यह पूरा मामला कंपनी के चल रहे प्री-पैकेज्ड इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (PPIRP) से जुड़ा है, जो इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत जारी है।
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Vikas Saxena
SAB Events & Governance Now Media Limited से जुड़ा एक अहम अपडेट सामने आया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी है कि कर्जदाताओं की कमेटी (Committee of Creditors यानी CoC) की पांचवीं बैठक के बाद महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
यह पूरा मामला कंपनी के चल रहे प्री-पैकेज्ड इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (PPIRP) से जुड़ा है, जो इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत जारी है।
कंपनी के मुताबिक, CoC की इस बैठक में उस एफिडेविट (शपथ पत्र) और लीगल ओपिनियन (कानूनी राय) पर विचार किया गया, जिसे रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दाखिल किया था। यह एफिडेविट रिजॉल्यूशन एप्लिकेंट की योग्यता से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, NCLT ने 21 अप्रैल 2026 को कुछ निर्देश दिए थे, जिसके बाद ये दस्तावेज जमा किए गए। CoC ने इन दस्तावेजों की समीक्षा की और उन्हें आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड में शामिल कर लिया।
इससे पहले CoC ने इन दस्तावेजों पर विस्तार से विचार करने के लिए एक दिन का समय भी मांगा था, ताकि सभी पहलुओं को अच्छे से समझा जा सके।
अब आगे की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक जारी रहेगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने CBC और DPD के साझा कैडर में प्रोडक्शन मैनेजर (प्रिंटेड पब्लिसिटी) / प्रोडक्शन ऑफिसर (प्रोडक्शन) के एक पद को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरने के लिए आवेदन मांगे हैं।
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Samachar4media Bureau
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने अधीनस्थ कार्यालयों सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) और डायरेक्टरेट ऑफ प्रिंटिंग एंड डिजाइन (DPD) के साझा कला एवं प्रोडक्शन कैडर में प्रोडक्शन मैनेजर (प्रिंटेड पब्लिसिटी) / प्रोडक्शन ऑफिसर (प्रोडक्शन) के एक पद को प्रतिनियुक्ति (Deputation) के आधार पर भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यह पद ग्रुप ‘A’ गजटेड, गैर-मंत्रालयी श्रेणी का है और इसका वेतनमान सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे मैट्रिक्स लेवल-11 (67,700 रुपये से 2,08,700 रुपये) निर्धारित किया गया है।
प्रतिनियुक्ति की अवधि और आयु सीमा
चयनित अधिकारी की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से एक वर्ष के लिए होगी, जिसे नियुक्ति प्राधिकारी के विवेक से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, किसी भी अधिकारी की कुल प्रतिनियुक्ति अवधि सामान्यतः तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी।
इस पद के लिए प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन प्राप्त होने की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी।
कौन कर सकता है आवेदन?
यह अवसर केंद्र और राज्य सरकारों के उन अधिकारियों के लिए है जो—
इसके अलावा उम्मीदवार के पास निम्न शैक्षणिक योग्यता और अनुभव होना आवश्यक है—
जरूरी योग्यता
वांछनीय योग्यता
क्या होगी जिम्मेदारी?
चयनित अधिकारी को पोस्टर, फोल्डर, लीफलेट, बुकलेट, ब्रॉडशीट और अन्य प्रचार सामग्री के मुद्रण कार्य की निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
आवेदन प्रक्रिया
सभी मंत्रालयों और विभागों से अनुरोध किया गया है कि वे पात्र अधिकारियों के आवेदन निर्धारित प्रारूप में मंत्रालय को भेजें। आवेदन के साथ पिछले पांच वर्षों की एसीआर/एपीएआर, सतर्कता (Vigilance) मंजूरी, सत्यनिष्ठा (Integrity) प्रमाणपत्र और यह प्रमाणपत्र भी संलग्न करना होगा कि पिछले दस वर्षों में अधिकारी पर कोई बड़ी या छोटी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।
आवेदन रोजगार समाचार (Employment News) में विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि (18 जून 2026) से छह सप्ताह के भीतर मंत्रालय के शास्त्री भवन स्थित कार्यालय में भेजने होंगे।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अधूरे आवेदन, निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त आवेदन या आवश्यक दस्तावेजों के बिना भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
उन्होंने पिछले साल जून में यहां जॉइन किया था और एग्जिक्यूटिव शो प्रड्यूसर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। समाचार4मीडिया से बातचीत में निखिल दुबे ने अपने इस्तीफे की पुष्टि की है।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ टीवी पत्रकार निखिल दुबे ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। उन्होंने पिछले साल जून में यहां जॉइन किया था और एग्जिक्यूटिव शो प्रड्यूसर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। समाचार4मीडिया से बातचीत में निखिल दुबे ने अपने इस्तीफे की पुष्टि की है। निखिल दुबे का कहना था कि वह जल्द ही अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे, तब इसके बारे में बताएंगे।
बता दें कि निखिल दुबे इससे पहले हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर रात नौ बजे के प्राइम टाइम शो ‘Public Interes’ को लीड कर चुके हैं। निखिल दुबे की ‘एबीपी न्यूज’ के साथ यह चौथी पारी थी।
‘एबीपी न्यूज’ के साथ अपनी चौथी पारी शुरू करने से पहले निखिल दुबे ‘टीवी9’ में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह इस नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इस चैनल के साथ भी उनका संक्षिप्त कार्यकाल रहा था। वहीं, इससे पहले वह ‘इंडिया टीवी’ (India TV) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत थे।
‘इंडिया टीवी’ से पहले निखिल दुबे ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ में कार्यरत थे। इससे पहले वह ‘जी न्यूज’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। ‘जी न्यूज’ से पहले वह ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर कार्यरत थे।
टीवी न्यूज इंडस्ट्री में पर्दे के पीछे काम करने वालों में निखिल कुमार दुबे ऐसा चेहरा हैं, जिन्हें काफी काबिल माना जाता है। निखिल दुबे को तमाम चैनल्स के साथ काम करने का 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने फरवरी 2019 में ‘न्यूज नेशन’ जॉइन किया था और मई में उसे अलविदा कह दिया था। वहीं ‘इंडिया न्यूज’ में वह नवंबर 2018 से जनवरी 2019 तक कार्यरत रहे।
‘इंडिया न्यूज’ से पहले निखिल दुबे ‘एबीपी न्यूज’ में एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने वहां 9 जुलाई 2016 को पदभार संभाला था। जब वहां के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने अचानक चैनल से इस्तीफा दिया था तो निखिल ने भी वहां से अपना इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले वह अप्रैल 2006 से अक्टूबर 2009 में एसोसिएट एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर भी इस चैनल के साथ काम कर चुके हैं। तब इस चैनल का नाम ‘एबीपी न्यूज’ की जगह ‘स्टार न्यूज’ था।
निखिल कुमार ने 1995 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद 2002 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से मॉसकॉम किया और इसके बाद पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। मई 2003 में उन्होंने ‘सहारा समय’ से अपने करियर की शुरुआत की और नवंबर 2005 तक वह यहां रहे। ‘सहारा समय’ में अपने सफर में वह विशेष संवाददाता की भूमिका में थे। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2006 में ‘स्टार न्यूज’ के साथ अपने सफर को आगे बढ़ाया। वहां तीन साल सात महीने रहने के बाद उनके सफर का अगला पड़ाव ‘आजतक’ बना। नवंबर 2010 से नवंबर 2012 तक वह सीनियर प्रड्यूसर के तौर पर ‘आजतक’ को अपना योगदान देते रहे। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक फ्रीलांस के तौर पर काम किया।
इसके बाद वह जुलाई 2013 में मुंबई में एंडेमॉल प्रॉडक्शन हाउस (Endemol production house) के साथ जुड़ गए और सितंबर 2013 तक बतौर स्क्रिप्ट राइटर काम किया। फिर वह एसोसिएट एडिटर बनकर ‘इंडिया टीवी’ आ गए। सितंबर 2013 से जनवरी 2014 तक वे यहां रहे। ‘इंडिया टीवी’ के बाद उन्होंने ‘न्यूज एक्सप्रेस’ में बतौर डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर काम किया और जनवरी से अगस्त 2014 तक रहे।
फिर करीब तीन महीने तक उन्होंने ‘न्यूज24’ का हाथ थामा और डिप्टी एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर नवंबर 2014 तक का सफर तय किया। इसके बाद वह एसोसिएट एडिटर बनकर ‘जी न्यूज’ आ गए और जुलाई 2016 तक रहे। इसके बाद वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’, ‘इंडिया टीवी’ और ‘टीवी9’ होते हुए ‘एबीपी न्यूज’ पहुंचे थे और वहां अपनी पारी को विराम देने के बाद पिछले साल ‘एनडीटीवी’ के साथ नई पारी का आगाज किया था, जहां से अब उन्होंने बाय बोल दिया है।
आपको यह भी बता दें कि निखिल दुबे ने इंडिया टीवी में ‘तलाश’ नाम से शो बनाया था। वह एबीपी में ‘घंटी बजाओ’ और ‘वायरल सच’ शो में काम कर चुके हैं। इसके अलावा चार घंटे का मॉर्निंग शो ‘नमस्ते भारत’ प्रोड्यूस किया। जी न्यूज में रहते हुए उन्होंने क्रिकेट विश्वकप पर सात करोड़ रुपये की प्रॉडक्शन कास्ट का शो ‘वर्ल्ड war’ प्रड्यूस किया। इसके अलावा भी वह तमाम जाने-माने शो प्रड्यूस कर चुके हैं।
कुछ लोग कंपनी बनाते हैं और कुछ पूरी इंडस्ट्री खड़ी कर देते हैं। कारज़ॉनरेंट (Carzonrent) के फाउंडर और चेयरमैन राजीव के. विज इसी दूसरी कैटेगरी में आते हैं।
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Samachar4media Bureau
कुछ लोग कंपनी बनाते हैं और कुछ पूरी इंडस्ट्री खड़ी कर देते हैं। कारज़ॉनरेंट (Carzonrent) के फाउंडर और चेयरमैन राजीव के. विज इसी दूसरी कैटेगरी में आते हैं। उन्होंने भारत में कैब और कार रेंटल की दुनिया को उस समय नया आकार दिया, जब यह सेक्टर पूरी तरह बिखरा हुआ और असंगठित था।
साल 2000 में उन्होंने सिर्फ 29 गाड़ियों के छोटे से बेड़े के साथ इस कंपनी की शुरुआत की थी। उस वक्त देश में प्रोफेशनल कार रेंटल या कॉर्पोरेट मोबिलिटी जैसी सेवाएं बहुत सीमित थीं। लेकिन विज ने पहले ही समझ लिया था कि आने वाले समय में लोगों को भरोसेमंद, टेक्नोलॉजी-आधारित और प्रोफेशनल ट्रांसपोर्ट सेवाओं की जरूरत होगी।
धीरे-धीरे यह छोटा सा प्रयास एक बड़े मोबिलिटी नेटवर्क में बदल गया, जो आज देशभर में कॉरपोरेट्स, एयरपोर्ट ट्रैवलर्स और बिजनेस यात्रियों को सेवाएं देता है। कंपनी ने सिर्फ रेंटल तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कॉर्पोरेट मोबिलिटी मैनेजमेंट, लॉन्ग टर्म लीजिंग और प्रीमियम ड्राइवर-सर्विस जैसी सुविधाएं भी शुरू कीं।
राजीव के. विज की खासियत यह रही कि उन्होंने समय के साथ बदलती जरूरतों को पहले ही पहचान लिया। इसी सोच के चलते कंपनी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में भी कदम बढ़ाया और प्लग मोबिलिटी (Plug Mobility) नाम से अपनी ईवी सर्विस प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। उनका मानना है कि आने वाले समय में शहरी परिवहन का भविष्य इलेक्ट्रिक और टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा।
कंपनी ने भारत के बाहर भी अपनी सेवाओं का विस्तार किया है, जिससे विदेशों में यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों को भी समान क्वॉलिटी की लिमोजिन और ड्राइवर सेवाएं मिल सकें।
इस पूरे सफर में राजीव के. विज की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ कंपनी का विस्तार नहीं रही, बल्कि एक ऐसे सेक्टर को संगठित करना रहा जिसमें हजारों ड्राइवर, फ्लीट पार्टनर और मोबिलिटी प्रोफेशनल्स को रोजगार और नई पहचान मिली। उन्होंने इस इंडस्ट्री में सेवा, सुरक्षा और प्रोफेशनलिज्म के नए मानक तय किए।
आज भले ही कंपनी नई पीढ़ी के नेतृत्व की ओर बढ़ रही हो, लेकिन राजीव के. विज की सोच और विजन अब भी कंपनी की कार्यशैली और संस्कृति में गहराई से शामिल है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने यहां 17 जून को जॉइन किया है और वह दिल्ली से अपना कामकाज संभालेंगे।
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Samachar4media Bureau
चर्चित मैगजीन 'तहलका' (Tehelka) ने वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार चतुर्वेदी को संपादक के पद पर नियुक्त किया है। अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने इस बात की जानकारी खुद सोशल मीडिया पर शेयर की है।
अपनी फेसबुक पोस्ट में अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने लिखा है, ‘नमस्कार दोस्तों, टेलीविज़न में काम करते -करते कब बीस साल से ज़्यादा समय बीत गया पता ही नहीं चला। आज जब पीछे मुड़ के देखता हूँ तो लगता है ...जैसे कल की बात है। हमेशा जीवन में चुनौतियों को स्वीकार करना ही बड़ों ने सिखाया है। इसी क्रम में एक नई ज़िम्मेदारी मिली है ...देश और दुनिया में अपनी विशेष साख रखने वाली पत्रिका "तहलका " में मुझे सम्पादक के तौर पर काम करने का अवसर मिला है, उम्मीद और विश्वास है कि आप लोगों का पहले की तरह प्रेम और सहयोग मुझे मिलेगा।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने यहां 17 जून को जॉइन किया है और वह दिल्ली से अपना कामकाज संभालेंगे।
बता दें कि अरविंद कुमार चतुर्वेदी को प्रिंट और टीवी मीडिया में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया डेली लाइव’ (India Daily Live) में मैनेजिंग एडिटर रह चुके हैं। उससे पहले वह हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ (India News) में चैनल हेड (यूपी/यूके) और डिप्टी मैनेजिंग एडिटर (इंडिया न्यूज) के पद पर कार्यरत थे। वह लखनऊ से अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वह वर्ष 2014 से ‘इंडिया न्यूज’ के साथ जुड़े हुए थे। इससे पहले वह इस चैनल में रेजिडेंट एडिटर (यूपी/यूके) के पद पर काम कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के रहने वाले अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीन किताबें (द रियल मोदी, मोदी का बनारस, माँ हीरा बहन और नरेन्द्र) लिख चुके हैं। समाचार4मीडिया की ओर से अरविंद कुमार चतुर्वेदी को नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
उनकी नियुक्ति 18 जून 2026 से प्रभावी हो गई है। कंपनी के अनुसार, अमितेश पुनहानी सीनियर मैनेजमेंट टीम का हिस्सा होंगे और मार्केटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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Samachar4media Bureau
डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सर्विस प्रोवाइडर कंपनी डिश टीवी (Dish TV) ने अमितेश पुनहानी को कॉर्पोरेट हेड-मार्केटिंग (DTH) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 18 जून 2026 से प्रभावी हो गई है। कंपनी के अनुसार, अमितेश पुनहानी सीनियर मैनेजमेंट टीम का हिस्सा होंगे और मार्केटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अमितेश पुनहानी को बिजनेस ग्रोथ, ब्रैंड निर्माण, बड़े पैमाने पर पी एंड एल (P&L) पोर्टफोलियो प्रबंधन और राजस्व वृद्धि से जुड़ी पहलों का नेतृत्व करने का दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने भारत, एशिया-प्रशांत (APAC) और वैश्विक बाजारों में विभिन्न भूमिकाओं में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक और मार्केटिंग परियोजनाओं का नेतृत्व किया है।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाटा स्टील से की थी। इसके बाद उन्होंने रॉकवेल ऑटोमेशन, गैप इंक, भारती एयरटेल लिमिटेड, इंटेक्स टेक्नोलॉजीज और जाब्रा जैसी कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाईं।
अपने पेशेवर सफर के दौरान पुनहानी ने बड़े बिजनेस पोर्टफोलियो का प्रबंधन किया, रणनीतिक साझेदारियों को विकसित किया, विभिन्न श्रेणियों में कारोबार वृद्धि की पहल का नेतृत्व किया और राजस्व बढ़ाने से जुड़ी रणनीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया।
ऑनलाइन गेमिंग यूनिकॉर्न गेम्सक्राफ्ट से कथित तौर पर 250 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन मामले में नया मोड़ सामने आया है।
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Samachar4media Bureau
ऑनलाइन गेमिंग यूनिकॉर्न गेम्सक्राफ्ट से कथित तौर पर 250 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन मामले में नया मोड़ सामने आया है। कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) रमेश प्रभु ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिए अपने बयान में दावा किया है कि धनराशि का ट्रांसफर कंपनी के संस्थापकों के निर्देश पर किया गया था और इसकी जानकारी शीर्ष नेतृत्व को थी। यह दावा कर्नाटक हाईकोर्ट के 16 जून के आदेश में दर्ज बयान के आधार पर सामने आया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में ED द्वारा की गई गिरफ्तारियों की वैधता की समीक्षा करते हुए संबंधित तथ्यों का उल्लेख किया है।
संस्थापकों के निर्देश पर हुआ फंड ट्रांसफर: प्रभु
हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज जानकारी के अनुसार, रमेश प्रभु ने 18 नवंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत ED के समन के जवाब में ईमेल भेजा था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के संस्थापक विकास तनेजा, दीपक सिंह अहलावत, पृथ्वी राज सिंह और दीपक कुमार झा के निर्देश पर धनराशि कंपनी से बाहर ट्रांसफर की गई थी। प्रभु के अनुसार, इन लेनदेन को कंपनी के भीतर ऐसे निवेश के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसे बाद में लाभ के साथ वापस कंपनी में लाया जाना था।
2019 के विवाद के बाद बनी योजना
बयान में प्रभु ने दावा किया कि इस व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। उनके अनुसार, उस समय रम्मीसर्कल संचालित करने वाली कंपनी गेम्स24x7 ने गेम्सक्राफ्ट के कुछ संस्थापकों के खिलाफ कथित रूप से सोर्स कोड और कस्टमर डेटाबेस की चोरी को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी।
प्रभु ने कहा कि इस मुकदमे के बाद संस्थापकों को कंपनी में जमा हो रही धनराशि को लेकर चिंता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें धीरे-धीरे कंपनी से पैसा निकालकर शेयर बाजार में निवेश करने के लिए कहा गया था, ताकि बाद में उसे कंपनी में वापस लाया जा सके।
फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग में लगाया गया पैसा
रमेश प्रभु ने ED को बताया कि ट्रांसफर की गई रकम को उनके जेरोधा खाते के जरिए फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में निवेश किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक अन्य ट्रेडिंग खाता उनकी पत्नी के नाम पर खोला गया था, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। प्रभु के मुताबिक, कंपनी से ट्रांसफर किया गया पूरा पैसा डेरिवेटिव ट्रेडिंग में नुकसान के रूप में समाप्त हो गया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई लाभ नहीं हुआ।
म्यूचुअल फंड निवेश दिखाने का आरोप
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा है। प्रभु ने आरोप लगाया कि उनके खातों में भेजी गई रकम को गेम्सक्राफ्ट के वित्तीय दस्तावेजों में म्यूचुअल फंड निवेश के रूप में दर्ज किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि संस्थापकों ने ऑडिट के लिए फर्जी म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट तैयार करने को कहा था। हालांकि, उन्होंने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान ऐसा करने से इनकार कर दिया था। उल्लेखनीय है कि गेम्सक्राफ्ट की ओर से पहले दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत में भी फर्जी निवेश रिकॉर्ड और कथित नकली म्यूचुअल फंड दस्तावेजों के जरिए फंड डायवर्जन छिपाने की बात कही गई थी।
बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को मिलती थी
प्रभु ने अपने बयान में यह भी कहा कि जिस RBL बैंक खाते से धनराशि ट्रांसफर की गई, उसके संचालन के लिए दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की आवश्यकता थी। इनमें वह स्वयं और सह-संस्थापक पृथ्वी राज सिंह शामिल थे। उनका दावा है कि खाते से होने वाले प्रत्येक लेनदेन की सूचना ईमेल और SMS के जरिए दोनों अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को प्राप्त होती थी।
IPO की तैयारी के दौरान बढ़ा दबाव
प्रभु ने आरोप लगाया कि जब गेम्सक्राफ्ट संभावित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की तैयारी कर रही थी, तब कंपनी के खातों में धनराशि दिखाना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि कंपनी अगले दो वर्षों में IPO लाने की योजना बना रही थी। चूंकि F&O ट्रेडिंग में पैसा पहले ही खत्म हो चुका था, इसलिए नुकसान के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया। प्रभु का यह भी आरोप है कि बाद में उन्हें देश छोड़ने की सलाह दी गई और आश्वासन दिया गया कि स्थिति को संभाल लिया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन लेनदेन से जुड़े निर्देश मौखिक रूप से दिए जाते थे और लिखित संचार से बचा जाता था।
ED की जांच का अहम आधार बना बयान
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में रमेश प्रभु के बयान को महत्वपूर्ण आधार बनाया है। हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज गिरफ्तारी के आधारों के अनुसार, ED का आरोप है कि गेम्सक्राफ्ट के संस्थापक और पूर्व CFO कथित तौर पर मिलकर 250 करोड़ की राशि को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस तथा म्यूचुअल फंड निवेश के नाम पर डायवर्ट और मनी लॉन्ड्रिंग करने में शामिल थे।
एजेंसी का यह भी आरोप है कि कथित अपराध से अर्जित धन का एक हिस्सा निवेश संरचनाओं और डिविडेंड भुगतान के माध्यम से परिवार-नियंत्रित संस्थाओं और संपत्तियों तक पहुंचाया गया। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इन आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने केवल यह परखा कि PMLA के तहत की गई गिरफ्तारियों के लिए ED के पास पर्याप्त आधार मौजूद थे या नहीं।
संस्थापकों की गिरफ्तारी को हाईकोर्ट ने बताया अवैध
इस बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट ने गेम्सक्राफ्ट के संस्थापक दीपक सिंह, पृथ्वी राज सिंह और विकास तनेजा की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि ED गिरफ्तारी से संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं और सुरक्षा प्रावधानों का पालन करने में विफल रही। यह आदेश 7 और 8 मई को हुई ED की तलाशी कार्रवाई के बाद की गई गिरफ्तारियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया।
कॉर्पोरेट जगत में ऐसे लीडर कम ही देखने को मिलते हैं जो किसी पुराने और स्थापित संस्थान को नई दिशा देने के साथ-साथ उसे भविष्य के लिए भी तैयार कर सकें।
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Samachar4media Bureau
कॉर्पोरेट जगत में ऐसे लीडर कम ही देखने को मिलते हैं जो किसी पुराने और स्थापित संस्थान को नई दिशा देने के साथ-साथ उसे भविष्य के लिए भी तैयार कर सकें। आईटीसी (ITC) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव पुरी ऐसे ही लीडर्स में गिने जाते हैं। उन्होंने यह दिखाया है कि सिर्फ त्वरित लाभ कमाने पर ध्यान देने के बजाय लंबी अवधि की सोच, मजबूत रणनीति और लगातार मेहनत से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
संजीव पुरी का पूरा प्रोफेशनल करियर आईटीसी के साथ ही बीता है। यही वजह है कि उन्हें कंपनी की कार्यप्रणाली, संस्कृति और कारोबार की गहरी समझ है। अपने करियर के दौरान उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेशंस, सप्लाई चेन और बिजनेस मैनेजमेंट जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया। इससे उन्हें कंपनी के अलग-अलग कारोबारों को करीब से समझने का अवसर मिला।
उनके नेतृत्व में आईटीसी ने अपनी पारंपरिक पहचान से आगे बढ़कर कई नए क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। कंपनी ने एफएमसीजी कारोबार को तेजी से विस्तार दिया, पैकेज्ड फूड, पर्सनल केयर और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स में अपनी पकड़ मजबूत की। साथ ही प्रीमियम उत्पादों, डिजिटल तकनीकों और इनोवेशन पर भी विशेष जोर दिया गया।
आज आईटीसी के कई ब्रांड देश के करोड़ों घरों तक पहुंच चुके हैं। इसके पीछे कोई जल्दबाजी में किया गया विस्तार नहीं, बल्कि वर्षों की योजनाबद्ध निवेश रणनीति और लगातार किए गए प्रयास हैं।
संजीव पुरी ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि कारोबार सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके नेतृत्व में आईटीसी ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। जल संरक्षण, जिम्मेदार खरीद व्यवस्था, पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन और जलवायु संतुलन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए कंपनी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक कंपनी के जटिल ढांचे को अधिक प्रभावी और भविष्य के अनुरूप बनाना रहा है। उन्होंने कारोबारी पोर्टफोलियो को बेहतर ढंग से व्यवस्थित किया, पूंजी निवेश की रणनीति को मजबूत बनाया और तेजी से बढ़ने वाले उपभोक्ता व्यवसायों पर फोकस बढ़ाया। इससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ और कंपनी के लिए नए अवसरों के रास्ते खुले।
इंडस्ट्री जगत में संजीव पुरी को एक शांत, व्यवस्थित और परिणामों पर ध्यान देने वाले लीडर के रूप में देखा जाता है। वे सुर्खियों में रहने से ज्यादा अपने काम और उसके नतीजों पर विश्वास करते हैं। उनका नेतृत्व दिखावे से अधिक निरंतरता और ठोस क्रियान्वयन पर आधारित माना जाता है।
भारत की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है और उपभोक्ताओं की जरूरतें भी तेजी से बदल रही हैं। ऐसे समय में आईटीसी खुद को नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में पाती है। इसके पीछे पिछले कई वर्षों में रखी गई मजबूत रणनीतिक नींव का बड़ा योगदान माना जाता है।
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर संजीव पुरी की यात्रा यह संदेश देती है कि सफल नेतृत्व केवल बड़े फैसलों या चर्चित क्षणों से नहीं बनता। असली नेतृत्व वह है जो लगातार उत्कृष्टता की ओर बढ़े, समय के साथ खुद को बदलने का साहस दिखाए और ऐसा संस्थान तैयार करे जो शेयरधारकों, ग्राहकों, समाज और देश—सभी के लिए मूल्य पैदा करे।
भारतीय टीवी पत्रकारिता में अपने विशिष्ट अंदाज, धारदार प्रस्तुति और गहन रिपोर्टिंग के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर सुधीर चौधरी आज, 18 जून को अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं
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भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता में जब भी निर्भीक अंदाज, सटीक विश्लेषण और स्पष्ट प्रस्तुति शैली की बात होती है, तो वरिष्ठ पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर सुधीर चौधरी का नाम स्वाभाविक रूप से जुबान पर आ जाता है। आज यानी 18 जून को वह अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं और जीवन के 55वें वर्ष में कदम रख रहे हैं। तीन दशकों से अधिक के लंबे करियर में सुधीर चौधरी ने जो पहचान बनाई है, वह सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक भरोसे का प्रतीक बन चुकी है।
अपने करियर की शुरुआत एक छोटे पद से करने वाले सुधीर चौधरी आज न सिर्फ देश के सबसे चर्चित पत्रकारों में गिने जाते हैं, बल्कि वह पत्रकारिता के उन चेहरों में भी शामिल हैं, जिन्होंने इस पेशे को अपनी मेहनत, निष्ठा और विजन से नई दिशा दी है। पत्रकारिता के लगभग हर मोर्चे को उन्होंने बेहद गहराई से जिया है, चाहे वो फील्ड रिपोर्टिंग हो, चुनावी कवरेज, या फिर न्यूजरूम में नेतृत्व की भूमिका।
हाल ही में उन्होंने देश के प्रतिष्ठित सार्वजनिक प्रसारण चैनल 'डीडी न्यूज' के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है, जहां वे कंसल्टिंग एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। इसी क्रम में मई 2025 में उन्होंने DD News पर अपना नया प्राइम टाइम शो ‘Decode with Sudhir Chaudhary’ लॉन्च किया, जो लॉन्च के साथ ही डिजिटल जगत में तहलका मचा चुका है।
इस शो के पहले एपिसोड को यूट्यूब पर मात्र 24 घंटों में 10 लाख से अधिक व्यूज मिले और पूरे मई महीने में ‘डिकोड’ ने DD News के कुल डिजिटल ट्रैफिक का लगभग 50 प्रतिशत अकेले हासिल किया। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं है, बल्कि सुधीर चौधरी के प्रति जनता के अटूट विश्वास और उनकी प्रस्तुतिकरण शैली की लोकप्रियता का जीवंत प्रमाण है।
भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के पूर्व छात्र रहे सुधीर चौधरी ने पत्रकारिता को हमेशा एक मिशन की तरह देखा है। शुरुआत से ही उनके लक्ष्य स्पष्ट थे- सार्थक पत्रकारिता, तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग और जनहित को सर्वोपरि रखना। उनका यह समर्पण ही है कि उन्होंने अपने करियर में कभी दिशा नहीं खोई। जैसे अर्जुन को सिर्फ चिड़िया की आंख दिखती थी, वैसे ही सुधीर चौधरी की नजर हमेशा अपने लक्ष्य पर टिकी रही है।
उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों की रिपोर्टिंग से लेकर कई दिग्गज राजनेताओं के साक्षात्कार तक, हर विषय को गहन रिसर्च और निष्पक्षता के साथ जनता के सामने रखा है। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल चर्चित नहीं होते, बल्कि जनमत को दिशा देने वाले भी होते हैं।
आज के दौर में, जहां पत्रकारिता कई बार सनसनी और पक्षपात के घेरे में फंस जाती है, सुधीर चौधरी ने तथ्यों की ठोस जमीन पर खड़े रहकर अपनी विश्वसनीयता को कायम रखा है। यही वजह है कि वे नए पत्रकारों के लिए न सिर्फ प्रेरणा हैं, बल्कि एक आदर्श भी हैं।
सोशल मीडिया पर भी सुधीर चौधरी की जबरदस्त पकड़ है। उनकी पोस्ट्स, रिपोर्टिंग स्टाइल और विषय-वस्तु में हमेशा एक स्पष्ट दृष्टिकोण और राष्ट्रहित की भावना झलकती है।
आज जब सुधीर चौधरी अपने जीवन के 55वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, तब यह कहना गलत नहीं होगा कि वे केवल अतीत की सफलता के सहारे नहीं टिके हैं, बल्कि आज भी वे पूरी ऊर्जा, प्रामाणिकता और नवाचार के साथ पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।
‘समाचार4मीडिया’ की ओर से सुधीर चौधरी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं। हम कामना करते हैं कि आने वाला साल उनके लिए और अधिक सफलता, सृजनात्मकता और समाज के लिए सार्थक पत्रकारिता का प्रतीक बने।
केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की विधायक फातिमा तहलिया ने कुछ ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कामकाज पर गंभीर आपत्ति जताई है।
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केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की विधायक फातिमा तहलिया ने कुछ ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कामकाज पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि अगर उनके निजी जीवन से जुड़े वीडियो बिना अनुमति रिकॉर्ड किए गए या उन्हें भ्रामक तरीके से पेश किया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। पेराम्ब्रा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहीं फातिमा ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की निजी गतिविधियों को लगातार रिकॉर्ड करना और उसका पीछा करना स्वीकार्य नहीं है।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना उनके दायित्व का हिस्सा है। हालांकि, हाल के दिनों में कई ऐसे लोग कार्यक्रम स्थलों पर पहुंच रहे हैं जो खुद को मीडिया प्रतिनिधि बताते हैं, लेकिन उनके पास न तो कोई आधिकारिक पहचान होती है और न ही किसी संस्थान की स्पष्ट मान्यता। ऐसे लोगों की मौजूदगी के कारण वास्तविक पत्रकारों और स्वयंभू कंटेंट क्रिएटर्स के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है।
विधायक का कहना है कि कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर सार्वजनिक आयोजनों के दौरान उनकी निजी बातचीत या सामान्य गतिविधियों को रिकॉर्ड कर लेते हैं। बाद में इन्हीं वीडियो को संदर्भ से अलग करके सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाता है। उनके मुताबिक, इस तरह की सामग्री को आकर्षक या सनसनीखेज शीर्षकों के साथ पेश किया जाता है, जिससे लोगों के बीच गलत संदेश जाता है और अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं।
फातिमा तहलिया ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ प्लेटफॉर्म्स द्वारा किए जा रहे ऐसे दावों में कोई सच्चाई नहीं है कि वे उनके जनसंपर्क या प्रचार अभियान का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की निजता समाप्त हो जाती है। हर नागरिक की तरह जनप्रतिनिधियों को भी व्यक्तिगत सम्मान और निजी दायरे का अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की गतिविधियां जारी रहीं, तो उन्हें निजता के उल्लंघन और पीछा करने जैसी श्रेणी में मानते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मीडिया संस्थानों को भी जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए और व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में अभिनेता सलीम कुमार के अंतिम संस्कार के दौरान कुछ ऑनलाइन मीडिया कर्मियों के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठे थे। उस घटना के बाद मीडिया की कार्यशैली और पेशेवर मर्यादाओं को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी मीडिया संस्थानों से आत्मनियमन और जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपेक्षा जताई थी।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 का एक विज्ञापन अब बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का ध्यान भी खींचने में कामयाब रहा है।
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 11 जून को हो चुका है। टूर्नामेंट के उद्घाटन समारोह में दुनिया भर के कई बड़े कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। कनाडा के टोरंटो में आयोजित एक ओपनिंग सेरेमनी में बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही ने भी शानदार परफॉर्मेंस देकर दर्शकों का दिल जीता। इसी बीच, फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए ZEE5 द्वारा बनाया गया विज्ञापन भी खूब चर्चा बटोर रहा है। इस अभियान को अब एक अप्रत्याशित और बेहद प्रतिष्ठित समर्थन भी मिला है, क्योंकि बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने इसकी तारीफ की है।
अमिताभ बच्चन ने इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर मजेदार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “आहा हा हा हा... FIFA World Cup का AD जो चलता है... वाह... क्या भाषा बनाई है : POORA INDIA, WATCHEGA !!!” इसके साथ उन्होंने हंसने वाली इमोजी भी शेयर कीं और विज्ञापन के स्लोगन की तारीफ की।
T 5772 - aahaa haah haa haaaa haa haa .. ??
— Amitabh Bachchan (@SrBachchan) June 14, 2026
FIFA world Cup का AD., जो चलता है .. वाह .. क्या भाषा बनायी है :
POORA INDIA, WATCHEGA !!!
? ??
हाह हाह हाह हाह हाह !!!
सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं, अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में भी इस विज्ञापन का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि टीवी पर बार-बार आने वाला यह प्रचार उनके दिमाग में पूरी तरह बैठ गया है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि लोगों को वर्ल्ड कप देखने के लिए प्रेरित करने वाला यह विज्ञापन लगातार याद दिला रहा है- “पूरा इंडिया वाचेगा!”
अमिताभ बच्चन की प्रतिक्रिया को देखकर ऐसा लगता है कि वह फीफा वर्ल्ड कप 2026 के इस विज्ञापन से काफी प्रभावित हुए हैं। खास तौर पर “पूरा इंडिया वाचेगा” जैसी टैगलाइन ने उनका ध्यान खींचा है और उन्होंने इसे अपने अंदाज में सराहा भी है।
ZEE5 और Unite8 Sports ने FIFA World Cup 2026 के लिए "पूरा इंडिया वाचेगा" नाम से एक देशव्यापी मार्केटिंग अभियान शुरू किया है। इस अभियान को विज्ञापन एजेंसियों Talented और mktgstack ने तैयार किया है।
इस कैंपेन का विचार भारत में मौजूद अलग-अलग तरह के फुटबॉल प्रशंसकों को केंद्र में रखकर बनाया गया है। यानी यह दिखाने की कोशिश की गई है कि फुटबॉल अब सिर्फ कुछ शहरों या खास वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों और अलग-अलग आयु वर्ग के लोग भी इसे देख रहे हैं।
इस अभियान का मुख्य आकर्षण एक ब्रैंड फिल्म है, जिसका निर्देशन Atul Kattukara ने किया है और इसे First December Films ने प्रोड्यूस किया है।
यहां देखें ये विज्ञापन-