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ये बता रहा है इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट्स (ICFJ) का नया ग्लोबल सर्वे
14 भाषाओं में किया गया यह अनोखा सर्वेक्षण, 149 देशों के 4,100 से अधिक न्यूज़ रूम प्रबंधकों और पत्रकारों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में पत्रकार भी तेजी से आगे बढ़ते जा रहे हैं। 2017 के मुकाबले पत्रकारों ने ऐसे डिजिटल टूल्स का प्रयोग ज्यादा कर दिया है, जो उनकी कई तरह की चुनौतियों से निपटने में मदद करते हैं। जैसे कि भ्रामक या गलत जानकारी। सोशल मीडिया से निकली कोई खबर किस तरह से खबरिया चैनल या न्यूज़ वेबसाइट की सुर्खियां बन जाती है, ये हम कई बार देख चुके हैं। लिहाजा, ऐसी गलतियों को दुरुस्त करने और अपनी सूचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए मीडिया प्रोफेशनल्स की डिजिटल टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढ़ी है। यह बात सामने आई है इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट (आईसीएफजे) के एक सर्वेक्षण में। 14 भाषाओं में किया गया यह अनोखा सर्वेक्षण, 149 देशों के 4,100 से अधिक न्यूज़ रूम प्रबंधकों और पत्रकारों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। इस अध्ययन को आईसीएफजे की 2017 की रिपोर्ट का अपडेटेड संस्करण कहा जा सकता है, क्योंकि उस वक़्त यह पता चला था कि डिजिटल क्रांति के साथ तालमेल बैठने में पत्रकारों को संघर्ष करना पड़ रहा है।
‘ग्लोबल न्यूज़रूम में टेक्नोलॉजी की स्थिति 2019’ नामक इस सर्वेक्षण के मुताबिक, पत्रकारों द्वारा सोशल मीडिया वेरिफिकेशन टूल्स का उपयोग दोगुना (11 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत) हो गया है। वहीं, मौजूदा वक़्त में 67 प्रतिशत पत्रकार एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन इस्तेमाल करते हैं, 2017 में यह आंकड़ा 46 फीसदी था। इस बारे में आईसीएफजे के अध्यक्ष जॉय बरनाथन ने कहा, आजकल न्यूज़ आउटलेट्स डिजिटल और भौतिक हमले का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में पत्रकारों ने डिजिटल टेक्नोलॉजी पर ज्यादा विश्वास जताना शुरू कर दिया है। सर्वेक्षण के निष्कर्ष से पता चलता है कि न्यूज़रूम अपने कम्युनिकेशन को सुरक्षित रखने और अपनी जानकारी की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल उपकरणों को अपना रहे हैं।
सर्वेक्षण के मुताबिक, ऑनलाइन हमलों में वृद्धि के चलते पत्रकार खुद को बचाने के अधिक प्रयास कर रहे हैं। दो-तिहाई से अधिक पत्रकार और न्यूज़ रूम आज साइबर सिक्योरिटी का उपयोग करते हैं, जो 2017 के बाद से लगभग 50% ज्यादा है। इसके अलावा, सुरक्षित संचार के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल में भी इजाफा हुआ है। साइबर सिक्योरिटी के जरिये अपने न्यूज़ रूम को सुरक्षित बनाने में उत्तरी अमेरिकी का नंबर यूरोप के बाद आता है। यहां, 82% न्यूज़रूम डिजिटल रूप से सुरक्षित हैं। ये आंकड़ा पहले के मुकाबले लगभग दोगुना है। जबकि यूरोप 92% के साथ पहले स्थान पर है। सर्वेक्षण में शामिल 50% से अधिक पत्रकारों का कहना है कि वे नियमित रूप से डिजिटल टूल का उपयोग जानकारी की सत्यता जांचने के लिए करते हैं। जबकि 2017 में केवल 11% ही सोशल मीडिया वेरिफिकेशन टूल इस्तेमाल करते थे।
इसी तरह न्यूज़ आर्गेनाईजेशन की बात करें, तो करीब एक तिहाई में ऐसे समर्पित कर्मचारी हैं, जिनका काम सिर्फ फैक्ट-चेकिंग करना है। इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष की तुलना में 44% न्यूज़ रूम और 37% पत्रकार पहले से अधिक फैक्ट-चेकिंग गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। यह अध्ययन व्यावहारिक पत्रकारिता अनुसंधान पर आईसीएफजे के विस्तार पर केंद्रित है। ऐसे समय में जब मीडिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर असहमति का माहौल है, आईसीएफजे इंडस्ट्री में प्रमुख रुझानों पर अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए विशिष्ट रूप से कार्य कर रहा है। और अपने इस प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए उसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पत्रकार और मीडिया शोधकर्ता डॉ. जूली पॉसेट्टी को ग्लोबल डायरेक्टर ऑफ रिसर्च के नवनिर्मित पद पर नियुक्त किया है। गौरतलब है कि आईसीएफजे दुनिया भर में पत्रकारों की विशेषज्ञता और स्टोरीटेलिंग के कौशल को निखारने के लिए पत्रकारिता और प्रौद्योगिकी के गठजोड़ के रूप में करता है।
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