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एनडीटीवी मास्टरस्ट्रोक कला पुरस्कार : ग्रैंड जूरी की बैठक आज
एनडीटीवी मास्टरस्ट्रोक कला पुरस्कार की ग्रैंड जूरी की बैठक 13 जनवरी 2026 को आयोजित हो रही है। इस बैठक का उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति पर एक गंभीर, जिम्मेदार और दीर्घकालिक संवाद की नींव रखना है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत एनडीटीवी मास्टरस्ट्रोक कला पुरस्कार की ग्रैंड जूरी की बैठक आज, 13 जनवरी 2026 को आयोजित हो रही है। यह बैठक भारतीय कला को लेकर एक सार्थक, विचारशील और स्थायी सांस्कृतिक विमर्श की दिशा तय करेगी, जो इन पुरस्कारों के पहले संस्करण का आधार बनेगी।
इस जूरी बैठक में देश और दुनिया के प्रतिष्ठित कलाकार, कला संरक्षक, संग्रहालय विशेषज्ञ, क्यूरेटर, लेखक, फैशन डिज़ाइनर और सांस्कृतिक नेतृत्व से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व शामिल हो रहे हैं। इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में संस्थानों, कलात्मक आंदोलनों और सांस्कृतिक सोच को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।
उनकी सहभागिता यह सुनिश्चित करती है कि पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया गहन समझ, संतुलन और बौद्धिक ईमानदारी पर आधारित होगी। इस पहल के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए एनडीटीवी नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रधान संपादक राहुल कंवल ने कहा कि कला किसी भी समाज की आत्मा होती है।
मास्टरस्ट्रोक कला पुरस्कारों के माध्यम से एनडीटीवी का प्रयास है कि कलात्मक उत्कृष्टता को गंभीरता, निरंतरता और सार्वजनिक चेतना के केंद्र में रखा जाए, ताकि कला को केवल सौंदर्य नहीं बल्कि विचार और संवाद का माध्यम भी बनाया जा सके। ग्रैंड जूरी की अध्यक्षता प्रसिद्ध कला संरक्षिका किरण नादर कर रही हैं।
जूरी में अक्षता मूर्ति, अंजोली एला मेनन, अभिषेक पोद्दार, किशोर सिंह, सब्यसाची मुखर्जी, सैंडी एंगस, शनय झावेरी, इब्राहिम महामा, डॉ. पायल कनोडिया और डॉ. फेरोज़ा जे. गोदरेज जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। यह विविधता आधुनिक और समकालीन कला, दृश्य संस्कृति, फैशन, संस्थागत नेतृत्व और सांस्कृतिक संरक्षण के कई दृष्टिकोणों को एक साथ लाती है।
एनडीटीवी के लिए मास्टरस्ट्रोक कला पुरस्कार कला और संस्कृति के प्रति उसकी दीर्घकालिक संपादकीय प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं। आज की यह बैठक उस प्रक्रिया की शुरुआत है, जो ज्ञान और संवेदनशीलता से निर्देशित होकर फरवरी के पहले सप्ताह में होने वाले पहले एनडीटीवी मास्टरस्ट्रोक कला पुरस्कार तक पहुंचेगी और आगे भी एक व्यापक सांस्कृतिक संवाद को दिशा देती रहेगी।
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