पल्लवी मेस्त्री हवल ने पिडिलाइट इंडस्ट्रीज में हेड - मीडिया की जिम्मेदारी संभाली है। वह एक दशक से अधिक समय से कंपनी से जुड़ी हैं और पहले कैरेट इंडिया में ग्रुप हेड थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पल्लवी मेस्त्री हवल (Pallavi Mestry Haval) ने पिडिलाइट इंडस्ट्रीज (Pidilite Industries) में हेड - मीडिया (Head - Media) की जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
पल्लवी एक दशक से अधिक समय से पिडिलाइट इंडस्ट्रीज से जुड़ी हुई हैं। कंपनी में शामिल होने से पहले वह कैरेट इंडिया (Carat India) में ग्रुप हेड (Group Head) के पद पर कार्यरत थीं। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने मैडिसन कम्युनिकेशंस (Madison Communications) के साथ भी काम किया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियां पत्रकारिता से जुड़ी खबरों और दूसरे कंटेंट का इस्तेमाल किस तरह कर रही हैं, इस पर नजर रखने और अपने अधिकारों को मजबूत करने के लिए मीडिया संस्थान एकजुट हो रहे हैं।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियां पत्रकारिता से जुड़ी खबरों और दूसरे कंटेंट का इस्तेमाल किस तरह कर रही हैं, इस पर नजर रखने और अपने अधिकारों को मजबूत करने के लिए मीडिया संस्थान एकजुट हो रहे हैं। इसी कड़ी में द न्यूयॉर्क टाइम्स, द इकोनॉमिस्ट और एजेंस फ्रांस-प्रेस (AFP) जैसे बड़े मीडिया संस्थान ‘स्टैंडर्ड्स फॉर पब्लिशर यूसेज राइट्स’ (SPUR) गठबंधन से जुड़ गए हैं।
इस गठबंधन का मकसद AI कंपनियों की ओर से न्यूज कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर साझा तकनीकी और व्यावसायिक मानक तैयार करना है। इसके जरिए प्रकाशक यह पता लगा सकेंगे कि उनके कंटेंट का इस्तेमाल AI सिस्टम किस तरह कर रहे हैं। साथ ही, जिन प्रकाशकों के कंटेंट का इस्तेमाल लाइसेंस के तहत किया जाता है, उनके लिए भुगतान और इस्तेमाल से जुड़ी पारदर्शी जानकारी की व्यवस्था बनाने की भी कोशिश की जा रही है।
80 से ज्यादा संगठनों तक पहुंचा गठबंधन
SPUR के हालिया विस्तार में 40 से ज्यादा नए प्रकाशक शामिल हुए हैं। इसके साथ ही गठबंधन की सदस्यता 20 से अधिक देशों के 80 से ज्यादा संगठनों तक पहुंच गई है। नए सदस्यों में द अटलांटिक और ब्राजील का नेशनल एसोसिएशन ऑफ न्यूजपेपर्स भी शामिल हैं। वहीं, इस गठबंधन के संस्थापक सदस्यों में फाइनेंशियल टाइम्स, बीबीसी और एसोसिएटेड प्रेस जैसे प्रमुख मीडिया संस्थान शामिल हैं।
इस पहल के जरिए प्रकाशक AI कंपनियों के साथ अपने संबंधों में कंटेंट के इस्तेमाल, उसके अधिकारों और भुगतान से जुड़े मामलों पर ज्यादा स्पष्टता लाना चाहते हैं।
AI में खबरों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखने की पहल
इस महीने की शुरुआत में SPUR ने अपने ‘कंटेंट टेलीमेट्री स्टैंडर्ड’ का पहला संस्करण जारी किया था। यह एक ओपन-सोर्स तकनीकी व्यवस्था है, जिसे इस बात का रिकॉर्ड रखने के लिए तैयार किया गया है कि AI प्लेटफॉर्म प्रकाशकों के कंटेंट का इस्तेमाल कब और किस तरह करते हैं।
इस मानक के तहत यह दर्ज किया जा सकेगा कि किसी AI प्लेटफॉर्म ने प्रकाशक के कंटेंट को कब हासिल किया, AI के जवाब को आधार देने के लिए उसका इस्तेमाल कब किया, उसे जवाब में कब स्रोत के रूप में बताया, कब दिखाया और कब उस पर यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी या उससे जुड़ाव दिखाया।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रकाशकों को अपने कंटेंट के इस्तेमाल के बारे में बेहतर जानकारी देना है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिल सकती है कि उनकी खबरें और दूसरे कंटेंट AI प्लेटफॉर्म तक किस तरह पहुंच रहे हैं और उनका उपयोग कैसे किया जा रहा है।
कॉपीराइट और भुगतान को लेकर बढ़ रहा विवाद
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब न्यूज प्रकाशकों और AI कंपनियों के बीच कॉपीराइट और कंटेंट के इस्तेमाल के बदले भुगतान को लेकर तनाव बढ़ रहा है। कई मीडिया कंपनियों ने आरोप लगाया है कि उनके कॉपीराइट वाली खबरों और दूसरे कंटेंट का इस्तेमाल बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) को प्रशिक्षित करने के लिए बिना अनुमति किया गया। इस मुद्दे पर कुछ मीडिया कंपनियों ने कानूनी कार्रवाई भी की है।
इसके अलावा, प्रकाशकों की चिंता यह भी है कि AI से तैयार जवाबों के कारण यूजर न्यूज वेबसाइट्स पर जाने के बजाय सीधे AI प्लेटफॉर्म से जानकारी हासिल कर रहे हैं। इससे खबरों की वेबसाइट्स पर आने वाले पाठकों की संख्या और रेफरल ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।
ऐसे में प्रकाशक चाहते हैं कि AI कंपनियों की ओर से उनके कंटेंट के इस्तेमाल को मापने, उसकी जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर लाइसेंस के तहत उसका इस्तेमाल करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो।
SPUR लाइसेंस देने वाली संस्था नहीं
हालांकि, SPUR कोई सामूहिक लाइसेंसिंग संस्था नहीं है। इसका मतलब है कि यह गठबंधन सभी सदस्यों की ओर से AI कंपनियों के साथ लाइसेंसिंग समझौते नहीं करेगा।
प्रकाशकों का अपने कंटेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग समझौते करने का अधिकार बरकरार रहेगा। SPUR का ध्यान साझा तकनीकी ढांचा और ऐसे मानक तैयार करने पर है, जिनसे कंटेंट के इस्तेमाल की अनुमति, उसकी निगरानी, माप और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके।
भारत में ANI-OpenAI कॉपीराइट मामला चर्चा में
भारत में भी न्यूज कंटेंट के AI में इस्तेमाल को लेकर बहस जारी है। यहां यह मुद्दा ANI और OpenAI के बीच चल रहे कॉपीराइट मामले के जरिए सामने आया है।
दिए गए विवरण के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई में कहा था कि मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए OpenAI की ओर से ANI के कंटेंट का इस्तेमाल ‘फेयर डीलिंग’ के दायरे में आता है। हालांकि, ANI ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है। सितंबर में अदालत ने OpenAI से उसका जवाब भी मांगा था।
इस मामले पर मीडिया और AI उद्योग की नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है कि भारतीय कॉपीराइट कानून के तहत प्रकाशकों के कंटेंट का AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल किस तरह देखा जाएगा।
कुल मिलाकर, SPUR का विस्तार इस बात का संकेत है कि न्यूज प्रकाशक AI कंपनियों के साथ कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा पारदर्शिता और स्पष्ट नियम चाहते हैं। आने वाले समय में यह बहस और अहम हो सकती है कि AI कंपनियां पत्रकारिता के कंटेंट का इस्तेमाल किन शर्तों पर करेंगी और इसके बदले प्रकाशकों को किस तरह का अधिकार या भुगतान मिलेगा।
भारत में एक समय ऐसा था, जब डीडी फ्री डिश पर स्लॉट हासिल करना टीवी चैनलों के लिए काफी मुश्किल और प्रतिस्पर्धा भरा काम था।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में एक समय ऐसा था, जब डीडी फ्री डिश पर स्लॉट हासिल करना टीवी चैनलों के लिए काफी मुश्किल और प्रतिस्पर्धा भरा काम था। खासकर हिंदी भाषी क्षेत्रों और कम खर्च में टीवी देखने वाले दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे ब्रॉडकास्टर्स के लिए प्रसार भारती का यह मुफ्त डीटीएच प्लेटफॉर्म काफी अहम था। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसके जरिए दर्शकों तक पहुंच बनाने के लिए उनसे हर महीने का सब्सक्रिप्शन शुल्क लेने की जरूरत नहीं थी। हालांकि, यह खासियत आज भी बनी हुई है, लेकिन प्लेटफॉर्म पर स्लॉट हासिल करने के लिए होने वाली नीलामी का माहौल अब बदलता नजर आ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, डीडी फ्री डिश की पहुंच 2018 में करीब 3.3 करोड़ घरों से बढ़कर 2024 में लगभग 4.9 करोड़ घरों तक पहुंच गई। वहीं, फिक्की-ईवाई के ताजा अनुमानों के अनुसार, 2025 में फ्री डिश के जरिए मुफ्त टीवी देखने वाले घरों की संख्या करीब 5.3 करोड़ थी।
इसके बावजूद, इस बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच बनाने के लिए होने वाली नीलामी में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां सीमित MPEG-2 क्षमता वाले स्लॉट हासिल करने के लिए चैनलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होती थी और वे ऊंची बोली लगाते थे, वहीं अब कई स्लॉट खाली रह जा रहे हैं। इन खाली स्लॉट के लिए बार-बार नीलामी करनी पड़ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस स्थिति को देखते हुए प्रसार भारती जनवरी 2027 में होने वाले अगले सालाना नीलामी चक्र से पहले डीडी फ्री डिश की नीलामी प्रक्रिया की समीक्षा कर सकता है।
नीलामी के नियमों में संभावित बदलाव की तैयारी ऐसे समय में हो रही है, जब सरकारी प्रसारक को नीलामी से होने वाली कमाई में गिरावट, खाली स्लॉट भरने के लिए बार-बार प्रयास करने और पारंपरिक टीवी प्रसारण यानी लीनियर टेलीविजन पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, नीलामी प्रक्रिया में किसी भी तरह का बदलाव बाजार की मौजूदा स्थिति का आकलन करने और उद्योग से जुड़े पक्षों के साथ बातचीत के बाद ही किया जा सकता है। ऐसे में जनवरी 2027 के नीलामी चक्र से पहले डीडी फ्री डिश की नीलामी व्यवस्था में संभावित बदलाव पर सबकी नजर रहेगी।
उन्होंने इसे एक कठिन फैसला बताया। हालांकि, उन्होंने कंपनी की टीम के साथ काम करने के अनुभव को अच्छा बताया और YAAP Digital के भविष्य को लेकर भरोसा जताया।
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डिजिटल मार्केटिंग कंपनी ‘याप डिजिटल लिमिटेड’ (YAAP Digital Ltd) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) राज नायक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया है। नायक ने अपने इस्तीफे की वजह पूर्णकालिक परिचालन संबंधी भूमिका की जिम्मेदारियों और अपनी निजी प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की इच्छा को बताया है।
अपने इस्तीफे में राज नायक ने कहा कि इस स्तर पर पूर्णकालिक परिचालन संबंधी भूमिका की जिम्मेदारियां और उसकी व्यस्तता उतनी अधिक हैं, जितना वह फिलहाल अपने ऊपर लेना नहीं चाहते। उन्होंने इसे एक कठिन फैसला बताया। हालांकि, उन्होंने कंपनी की टीम के साथ काम करने के अनुभव को अच्छा बताया और YAAP Digital के भविष्य को लेकर भरोसा जताया।
राज नायक अब अपने उद्यमशीलता से जुड़े प्रयासों और निजी जीवन से जुड़ी प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने कंपनी की भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी सकारात्मक रुख व्यक्त किया है।
गौरतलब है कि YAAP Digital Ltd ने इस साल जुलाई में राज नायक को कंपनी का चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया था। यह नियुक्ति कंपनी के संस्थापक, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अतुल हेगड़े के 7 जुलाई 2026 को निधन के बाद हुई थी।
वह मुंबई ब्यूरो में अपनी भूमिका निभाएंगे। ऋत्विक भालेकर इससे पहले TV टुडे नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने इंडिया टुडे, आजतक और मुंबई तक मराठी डिजिटल के लिए काम किया।
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पत्रकार ऋत्विक भालेकर ने एनडीटीवी (NDTV) के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने यहां बतौर डिप्टी एडिटर नई जिम्मेदारी संभाली है। वह मुंबई ब्यूरो में अपनी भूमिका निभाएंगे। ऋत्विक भालेकर इससे पहले TV टुडे नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने इंडिया टुडे, आजतक और मुंबई तक मराठी डिजिटल के लिए काम किया।
TV टुडे नेटवर्क में अपनी करीब चार साल की पारी के दौरान उन्होंने एसोसिएट एडिटर के तौर पर जिम्मेदारी निभाई। ऋत्विक भालेकर को मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का करीब 16 साल का अनुभव है।
ऋत्विक भालेकर की परवरिश मुंबई के वर्ली इलाके में हुई। उन्होंने दादर स्थित IES स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म की पढ़ाई की और पुणे यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की।
समाचार4मीडिया की ओर से ऋत्विक भालेकर को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकानाएं।
ओब्वियस ने ट्विनिंग्स इंडिया और ओवल्टाइन इंडिया के रिटेनर मैंडेट हासिल किए हैं। दोनों ब्रांड्स के जुड़ने से एजेंसी ने फूड एंड बेवरेज कैटेगरी में अपनी मौजूदगी और पोर्टफोलियो मजबूत किया है।
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ओब्वियस (Obveus) ने ट्विनिंग्स इंडिया (Twinings India) और ओवल्टाइन इंडिया (Ovaltine India) के रिटेनर मैंडेट हासिल किए हैं। दोनों नई जिम्मेदारियों के साथ एजेंसी ने फूड एंड बेवरेज कैटेगरी में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।
दोनों ब्रांड एसोसिएटेड ब्रिटिश फूड्स (Associated British Foods-ABF) के इंटरनेशनल ग्रॉसरी पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं। इनके जुड़ने के बाद ओब्वियस के ब्रांड पोर्टफोलियो में अडानी ग्रुप (Adani Group), बजाज (Bajaj), टाटा (Tata), मिसेज बेक्टर’स फूड स्पेशियलिटीज (Mrs. Bector’s Food Specialities), फिलिप मॉरिस इंटरनेशनल (Philip Morris International-PMI), हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा (House of Abhinandan Lodha) और सेंट-गोबेन (Saint-Gobain) जैसे नाम शामिल हो गए हैं।
ओब्वियस के फाउंडर रोहित कुमार कनोजिया (Rohit Kumar Kanojia) ने कहा कि ट्विनिंग्स और ओवल्टाइन का जुड़ना पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि दोनों ब्रांड्स की लंबी विरासत है और उनकी मार्केटिंग की जिम्मेदारी मिलना एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि क्लाइंट्स को सिर्फ कैंपेन चलाने वाली एजेंसी नहीं, बल्कि ऐसा पार्टनर चाहिए जो उनके बिजनेस को समझे, रणनीतिक तरीके से सोचे और आइडिया को एग्जीक्यूशन तक लेकर जाए। ओब्वियस ने इसी सोच के साथ अपनी टीम और काम करने का तरीका तैयार किया है।
कनोजिया ने कहा कि अडानी, बजाज, टाटा, मिसेज बेक्टर’स, पीएमआई, हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा और सेंट-गोबेन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के ब्रांड्स के साथ काम करने से एजेंसी को विभिन्न कैटेगरी में अनुभव मिला है। ट्विनिंग्स और ओवल्टाइन का जुड़ना इस सफर में अगला महत्वपूर्ण कदम है।
ट्विनिंग्स इंडिया और ओवल्टाइन इंडिया के मार्केटिंग हेड एमडी. गुलफाम अंसारी (MD. Gulfam Ansari) ने कहा कि ट्विनिंग्स और ओवल्टाइन अलग-अलग ब्रांड्स हैं और दोनों की अपनी विरासत, पहचान और कंज्यूमर प्रॉमिस है।
ट्विनिंग्स की विरासत 1706 तक जाती है और यह क्वालिटी, कारीगरी और अच्छी चाय की परंपरा से जुड़ा है। वहीं, 1904 से स्विस न्यूट्रिशन साइंस पर आधारित ओवल्टाइन पोषण, ऊर्जा और परिवार के रोजमर्रा के पलों से जुड़ा ब्रांड है।
उन्होंने कहा कि भारत में दोनों ब्रांड्स के लिए अवसर नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं के बीच अपनी पहचान और प्रासंगिकता बढ़ाने का है। आज के उपभोक्ता ज्यादा जिज्ञासु, हेल्थ कॉन्शियस और अपनी पसंद को लेकर पहले से अधिक चयनात्मक हैं।
अंसारी ने कहा कि ब्रांड को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ अच्छी कैंपेन पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए लगातार प्रभावी स्टोरीटेलिंग, कंज्यूमर बिहेवियर की गहरी समझ और ऐसा एग्जीक्यूशन जरूरी है, जो इनसाइट को मापने योग्य प्रभाव में बदल सके।
उन्होंने कहा कि ओब्वियस की रणनीतिक सोच, क्रिएटिव एनर्जी और मजबूत एग्जीक्यूशन ने उन्हें प्रभावित किया। अब दोनों टीमें मिलकर दोनों ब्रांड्स के अगले चरण को तैयार करने की दिशा में काम करेंगी।
उन्हें संस्थान के सेंट्रल डेस्क (Central Desk) पर यह जिम्मेदारी दी गई है। पवन देशपांडे अगस्त 2020 से लोकमत मीडिया में असिस्टेंट एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
लोकमत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Lokmat Media Pvt. Ltd.) ने पवन देशपांडे को प्रमोशन देकर रेजिडेंट एडिटर (Resident Editor) की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें संस्थान के सेंट्रल डेस्क (Central Desk) पर यह जिम्मेदारी दी गई है।
पवन देशपांडे ने अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर साझा की और संस्थान के प्रबंधन, वरिष्ठों तथा सहकर्मियों के प्रति आभार जताया।
अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर पवन देशपांडे ने कहा कि वह इस नए अध्याय की शुरुआत आभार, जिम्मेदारी के प्रति विनम्रता और आगे के सफर को लेकर विश्वास के साथ कर रहे हैं। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “सफर के लिए आभारी हूं। जिम्मेदारी के लिए तैयार हूं।”
पवन देशपांडे अगस्त 2020 से लोकमत मीडिया में असिस्टेंट एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इससे पहले नवंबर 2019 से जुलाई 2020 तक उन्होंने Loksatta.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में काम किया था।
जुलाई 2012 से नवंबर 2019 तक वह लोकमत मीडिया में चीफ सब-एडिटर के पद पर रहे। इसी अवधि में जुलाई 2018 से नवंबर 2019 तक उन्होंने सीनियर चीफ सब-एडिटर की जिम्मेदारी भी निभाई। इस भूमिका में वह फ्रंट पेज, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और फाइनेंस पेज का काम देखते थे। इसके अलावा, उन्हें विभिन्न मुद्दों पर स्पेशल जैकेट और विशेष पेज तैयार करने का अनुभव भी है। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मामलों, खेल, टेक्नोलॉजी और आतंकवाद जैसे विषय उनके लेखन के प्रमुख क्षेत्र रहे हैं।
इससे पहले उन्होंने अप्रैल 2011 से अप्रैल 2012 तक प्रहार मराठी अखबार में सीनियर सब-एडिटर के रूप में काम किया। अप्रैल 2009 से अप्रैल 2011 तक वह पुढ़ारी पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड में बिजनेस रिपोर्टर रहे। वहीं, अगस्त 2007 से अप्रैल 2009 तक उन्होंने लोकमत मीडिया में सब-एडिटर के रूप में काम किया था।
पवन देशपांडे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद से मास्टर्स की डिग्री ली है। उन्होंने स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, नांदेड़ से पत्रकारिता में बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) की पढ़ाई की है।
विजय पाठक करीब चार दशक से इस अखबार से जुड़े हुए थे। बतौर स्ट्रिंगर इस अखबार में अपनी पारी शुरू करने के बाद वह इन दिनों स्टेट एडिटर जैसे बड़े पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिंदी पत्रकारिता के प्रतिष्ठित नाम और वरिष्ठ पत्रकार विजय पाठक हिंदी दैनिक ‘प्रभात खबर’ (Prabhat Khabar) से सेवानिवृत हो गए हैं। इस संस्थान में आज उनका आखिरी कार्यदिवस है।
विजय पाठक करीब चार दशक से इस अखबार से जुड़े हुए थे। बतौर स्ट्रिंगर इस अखबार में अपनी पारी शुरू करने के बाद वह इन दिनों स्टेट एडिटर जैसे बड़े पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
समाचार4मीडिया से बातचीत में विजय पाठक ने बताया वह अब कुछ समय देश-दुनिया को देखेंगे और इसके बाद जीवन की नई पारी शुरू करेंगे। मूल रूप से बिहार के रहने वाले विजय पाठक के पिता झारखंड में शिक्षा विभाग में बड़े अधिकारी थे, इसलिए उनका बचपन और पढ़ाई-लिखाई झारखंड से ही हुई।
पत्रकारिता में उन्होंने अपनी शुरूआत प्रभात खबर में झारखंड के गुमला में बतौर स्ट्रिंगर की और बाद में फिर मुख्यालय में आ गए। इतने वर्षों में विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद पहले एडिटर और फिर करीब डेढ़ साल से स्टेट एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
‘प्रभात खबर’ से सेवानिवृति को लेकर विजय पाठक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की है और तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया है।
अपनी पोस्ट में विजय पाठक ने लिखा है, ‘मेरा भी राजयोग आ गया…
जिस संस्थान प्रभात ख़बर में मैंने अपने अब तक के जीवन के लगभग 70 फ़ीसदी वक़्त गुज़ारे, आज वहाँ मेरा आख़िरी कार्यदिवस है. 21 साल की उम्र में बतौर स्ट्रिंगर प्रभात खबर में शुरू हुआ सफ़र आज सेवानिवृत्ति के साथ एक पड़ाव पर पहुंच रहा है. इस लंबे सफ़र में आप सभी का भरपूर प्यार, स्नेह, विश्वास और सहयोग मिला. अपनी ओर से हमेशा यही कोशिश रही कि अपने काम से न कभी प्रभात ख़बर का सिर झुकने दूं… और न ही अपना.
आप सभी ने मुझ पर जो भरोसा जताया, जो स्नेह दिया और हर कदम पर जो साथ निभाया, उसके लिए दिल से आभार. प्रभात ख़बर प्रबंधन, संस्थान के एक-एक साथी और आप सभी मित्रों का विशेष धन्यवाद.
हां, एक बात और… यह विदाई सिर्फ़ कार्यस्थल से है, आप सबसे नहीं. रांची में ही रहूंगा. आप सभी के बीच और आपके ही साथ. एक बार पुनः इतने वर्षों तक मिले प्यार, सम्मान और अपनत्व के लिए आप सभी का हृदय से आभार. सफ़र जारी रहेगा… बस, भूमिका थोड़ी बदल जाएगी’
समाचार4मीडिया की ओर से विजय पाठक को उनके अगले सफर के लिए अग्रिम रूप से ढेरों शुभकामनाएं।
अनुज मित्तल को इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज का ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह इंट्यूटिव में भारत के सीएफओ पद पर पांच वर्षों तक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज (InterGlobe Enterprises) ने अनुज मित्तल (Anuj Mittal) को ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (Group Chief Financial Officer) नियुक्त किया है। कंपनी का कारोबार ट्रैवल, टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में है, जिसमें इंडिगो (IndiGo) भी शामिल है।
मित्तल ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज ट्रैवल, टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को आगे बढ़ाने और नए तरीके से परिभाषित करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कंपनी की लीडरशिप टीम और सहयोगियों के साथ जुड़ने को लेकर उत्साह भी जताया।
इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज से जुड़ने से पहले मित्तल इंट्यूटिव (Intuitive) में भारत के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) थे, जहां उन्होंने पांच साल तक काम किया। इससे पहले वह जीई हेल्थकेयर (GE Healthcare) और जीई कैपिटल (GE Capital) में भी अलग-अलग भूमिकाएं निभा चुके हैं।
16 अप्रैल 2026 को रिकॉर्ड किए गए पुराने वीडियो को लाइव स्टिंग ऑपरेशन के रूप में प्रसारित करने का आरोप, ब्लैकमेलिंग की शिकायत पर IT Act और BNS के तहत मामला दर्ज
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कुरुक्षेत्र पुलिस ने छह महीने पुराने एक वीडियो को कथित तौर पर फर्जी लाइव स्टिंग ऑपरेशन के रूप में प्रसारित करने के आरोपों से जुड़े मामले में Living India News के पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) अतुल अग्रवाल, एडिटर सौरभ, एंकर सुदेश नैन, पत्रकार नीतू और ड्राइवर लवप्रीत शामिल हैं। मामले में शिकायतकर्ता ने ब्लैकमेल किए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
हरियाणा पुलिस के आधिकारिक X अकाउंट पर साझा की गई जानकारी के मुताबिक, शिकायत के आधार पर कुरुक्षेत्र के सिटी थानेसर पुलिस थाने में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कुरुक्षेत्र पुलिस की कार्रवाई: पुरानी वीडियो को फर्जी लाइव स्टिंग ऑपरेशन के रूप में प्रसारित करने के मामले में Living India News चैनल के 5 पदाधिकारी गिरफ्तार। शिकायत के आधार पर IT Act व BNS की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज। मूल वीडियो व तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी। #HaryanaPolice #KurukshetraPolice @cmohry @NayabSainiBJP @csharyana @DGPHaryana
— Haryana Police (@police_haryana) October 10, 2026
छह महीने पुराने वीडियो को लाइव स्टिंग बताने का आरोप: मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के आधिकारिक वक्तव्य के हवाले से कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसका निजी वीडियो 16 अप्रैल 2026 को रिकॉर्ड किया गया था। शिकायत में कहा गया कि चैनल ने इस पुराने वीडियो को लाइव स्टिंग ऑपरेशन के रूप में प्रसारित किया।
कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन के हवाले से प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो की सच्चाई सामने आने से रोकने के लिए उसे ब्लैकमेल किया गया और धमकियां दी गईं। पुलिस के मुताबिक, मामले से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है, ताकि वीडियो तैयार किए जाने और उसके प्रसारण से जुड़ी परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। जांच में गिरफ्तार लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है।
मूल वीडियो और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच: पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि पुलिस के पास मूल वीडियो, उसकी रिकॉर्डिंग की तारीख और वीडियो बनाने वाले लोगों से संबंधित जानकारी सहित महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। पुलिस इन साक्ष्यों और तकनीकी जानकारी के आधार पर वीडियो तैयार किए जाने तथा उसके प्रसारण से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चैनल ने नशे के खिलाफ अभियान से कार्रवाई जुड़ी होने का दावा किया: वहीं, हिन्दी खबर चैनल की ओर से दावा किया गया कि यह कार्रवाई हरियाणा में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से जुड़ी है। चैनल ने कहा कि वह नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान चला रहा है और जनहित में सच्चाई सामने लाने वाले पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की औचित्यता पर सवाल उठाया।
नशे की ख़बर दिखाई, हरियाणा पुलिस बौखलाई नशे का सच दिखाया, हरियाणा पुलिस ने उठाया प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल को किया अगवा अतुल अग्रवाल को अगवा करने से मचा हड़कंप @PMOIndia @narendramodi @AmitShah @HMOIndia @PIB_India @DelhiPolice @BJP4India @nsitharaman @noidapolice @CP_Noida @dmgbnagar @Uppolice @dgpup @myogiadityanath @CMOfficeUP @brajeshpathakup @kpmaurya1 @NayabSainiBJP @cmohry @BJP4Haryana @anilvijminister @police_haryana @KKR_POLICE @ArvindKejriwal @msisodia @SanjayAzadSln @Saurabh_MLAgk @AAPHaryana @AAPDelhi @AamAadmiParty @AtishiAAP @BhagwantMann @harjotbains @HarpalCheemaMLA @AAPPunjab @PunjabPoliceInd @atulaum_ @MIB_Hindi @HindiKhabar @LiPunjab #AtulAgarwal #HindiKhabar #BreakingNews #HaryanaPolice #SaurabhUpadhyay #SudeshNainMor #LivingIndia
— हिन्दी ख़बर | Hindi Khabar 🇮🇳 (@HindiKhabar) October 10, 2026
ईडी ने साधना ग्रुप के चेयरमैन राकेश कुमार गुप्ता को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने दिल्ली स्थित मीडिया और ब्रॉडकास्ट कंपनी साधना ग्रुप (Sadhna Group) के चेयरमैन राकेश कुमार गुप्ता (Rakesh Kumar Gupta) को मनी लॉन्ड्रिंग केस (Money Laundering Case) में गिरफ्तार किया है। यह मामला इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (Insolvency and Bankruptcy Code) की प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
अधिकारियों के मुताबिक, 63 वर्षीय राकेश कुमार गुप्ता को शुक्रवार रात करीब 10:25 बजे दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act) के तहत हिरासत में लिया गया। शनिवार तड़के करीब 2 बजे उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललेर (Saurabh Pratap Singh Laler) के आवासीय कैंप कार्यालय में पेश किया गया।
अदालत ने गुप्ता को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। ईडी ने सात दिन के रिमांड की मांग की थी। यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) की ओर से सितंबर में दर्ज की गई एफआईआर (FIR) से जुड़ा है। पुलिस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गुप्ता ने संबंधित लेनदारों के जरिए साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Sadhna Media Private Limited) की दिवाला प्रक्रिया को प्रभावित किया। इन लेनदारों के पास कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (Committee of Creditors) में 99.41 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए 110.10 करोड़ रुपये की आयकर देनदारी को महज 20 लाख रुपये में निपटाया गया। इसके अलावा गुप्ता पर एसएमपीएल (SMPL) और आर्यन टीवी (Aryan TV) की दोबारा बिक्री से जुड़े लेनदेन में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और हवाला के जरिए 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकद रकम हासिल करने का भी आरोप है।
पुलिस शिकायत के मुताबिक, एसएमपीएल ने कथित तौर पर जुड़े हुए लेनदारों को 4.48 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जिसमें 2.99 करोड़ रुपये उनकी अपनी कंपनी शार्पलाइन ब्रॉडकास्ट (Sharpline Broadcast) को दिए जाने का आरोप है।
ईडी ने अदालत में दाखिल रिमांड दस्तावेजों में मई 2025 के भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) के आदेश का भी हवाला दिया। इसमें गुप्ता को साधना ब्रॉडकास्ट (Sadhna Broadcast) के शेयरों में कथित हेरफेर का ‘मास्टरमाइंड’ बताया गया था और करीब 58 करोड़ रुपये के लिए उन्हें संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया गया था।
ईडी के अनुसार, इस मामले में कथित अपराध से अर्जित रकम करीब 168 करोड़ रुपये है। गुप्ता के बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि सेबी या आयकर विभाग ने उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं की है। वकील ने यह भी कहा कि गुप्ता को आयकर विभाग से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (No-Dues Certificate) मिला था। बचाव पक्ष ने बताया कि सेबी की ओर से लगाया गया जुर्माना भी जमा किया जा चुका है।
अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर ईडी की कार्रवाई को अवैध नहीं माना जा सकता कि सेबी या आयकर विभाग की ओर से कोई शिकायत नहीं की गई है। अदालत ने कहा कि सेबी का आदेश चुनौती के अधीन होने के बावजूद यह संकेत देता है कि शिकायत में जांच का आधार मौजूद है।
अदालत ने यह भी कहा कि 2024 में संबंधित मीडिया कंपनी के संबंध में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (National Company Law Tribunal) के आदेश को चुनौती नहीं दिए जाने से ईडी की जांच नहीं रोकी जा सकती, खासकर जब सरकारी खजाने को 100 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आरोप हो।
अदालत ने जांच को जरूरी बताते हुए गुप्ता की गिरफ्तारी को कानून के अनुरूप माना। अदालत के मुताबिक, इस मामले में मनी ट्रेल (Money Trail) बैंकिंग चैनलों से बाहर जाता है और जब्त किए गए उपकरणों से मिले डेटा को अभी आरोपी के सामने नहीं रखा गया है। अदालत ने कहा कि ये काम न्यायिक हिरासत में पूरा नहीं किए जा सकते।