आरोप: पत्रकार को जिंदा जलाकर मार डाला, खुद भी जला आरोपी

पत्रकारों ने इस घटना के बाद आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग की है

पंकज शर्मा by
Published - Thursday, 20 June, 2019
Last Modified:
Thursday, 20 June, 2019
Chakresh Jain

संदिग्ध परिस्थितियों में जलने से पत्रकार की मौत का मामला सामने आया है। घटना मध्य प्रदेश में सागर के शाहगढ़ की है। शाहगढ़ जिला पंचायत के सहायक विस्तार अधिकारी (एडीओ) अमन चौधरी व एक अन्य पर 40 वर्षीय चक्रेश जैन नामक इस पत्रकार को जलाकर मारने का आरोप है। चक्रेश जैन के भाई राजकुमार जैन का आरोप है कि दो साल पहले चौधरी की शिकायत पर जैन के खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई अंतिम दौर में चल रही है।

बताया जाता है कि जैन इस मामले में राजीनामा चाहते थे और इसी सिलसिले में बातचीत के लिए बुधवार को वे चौधरी से मिलने उनके घर गये थे। चक्रेश जैन की मौत से कुछ समय पहले बुधवार की सुबह अमन चौधरी खुद 20 फीसदी से ज्यादा जली हालत में शाहगढ़ थाने पहुंचे और चक्रेश के खिलाफ पेट्रोल छिड़ककर जलाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस घटना के कुछ देर बाद अमरमऊ के पास एक झोपड़ी में चक्रेश जैन मरणासन्न मिले। 90 फीसदी से ज्यादा जली हुई हालत में चक्रेश जैन को अस्पताल लाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

वहीं, राजकुमार जैन का आरोप है चौधरी और उसके एक साथी ने उनके भाई को जिंदा जलाकर मार डाला। राजकुमार के अनुसार, चक्रेश को जब अस्पताल लाया गया, तब वह जिंदा था। इसके बावजूद चक्रेश के बयान नहीं लिए गए। सागर के एसपी अमित सांघी का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमों ने दोनों स्थानों से नमूने एकत्र किए हैं। शाहगढ़ के पत्रकारों ने इस घटना के बाद एसपी को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग की है।

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ABP न्यूज की टीम पर हमला, एंकर अखिलेश आनंद की गाड़ी पर फेंके गए पत्थर

सोमवार को एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम 'कौन बनेगा मुख्यमंत्री' की टीम अरवल पहुंची, जहां कार्यक्रम के दौरान ही कुछ असामाजिक तत्वों ने एबीपी न्यूज टीम पर हमला कर दिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
ABP News

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections 2020) को लेकर चुनावी मैदान में उतरे सभी राजनीतिक दल राज्य की सत्ता तक पहुंचने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हुए हैं। ऐसे में मीडिया भी बिहार चुनाव से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबरें दर्शकों और पाठकों तक पहुंचाने के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रही हैं। लिहाजा इसी सिलसिले में सोमवार को एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम 'कौन बनेगा मुख्यमंत्री' की टीम अरवल पहुंची, जहां कार्यक्रम के दौरान ही कुछ असामाजिक तत्वों ने एबीपी न्यूज टीम पर हमला कर दिया और एंकर अखिलेश आनंद को निशाना बनाने की कोशिश की।

एबीपी न्यूज के मुताबिक, कार्यक्रम में बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी समेत अन्य दलों के कार्यक्रताओं का जमावड़ा था, काफी गहमागहमी थी। इसी दौरान राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। तभी कुछ लोगों ने हाथापाई करने की कोशिश की। इस बीच कुछ लोग अखिलेश आनंद को भी निशाना बनाने की कोशिश की और हमला करने के लिए उनकी तरफ दौड़ पड़े। हमले से बचने के लिए जैसे-तैसे एंकर अखिलेश आनंद अपनी टीम के साथ गाड़ी की तरफ भागे। इसके बाद असमाजिक तत्वों ने गाड़ी पर पत्थड़ फेंके और हाथों से शीशा तोड़ने की कोशिश की।

पूरी घटना पर अखिलेश आनंद का कहना है कि एक निष्पक्ष पत्रकार होने के नाते सच्चाई से लोगों से रूबरू कराते रहेंगे। चाहे लोगों को बुरा ही क्यों न लगे। उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज बिहार के अरवल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान मुझ पर हमला हुआ। बचने के लिए मैं कार के अंदर जाकर बैठ गया तो मेरा पीछा कर पत्थर बरसाये गए। गुंडे किस पार्टी के थे, मैं जानता हूं। भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें। मैं सच बोलता रहूंगा,चाहे किसी को बुरा लगे या भला..

 

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जमानती बॉन्ड न भर पाने के कारण पत्रकार समेत चार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा

पिछले दिनों हाथरस जाते समय केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Detained

पिछले दिनों हाथरस जाते समय गिरफ्तार किए गए केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य लोगों को जमानती बॉन्ड न भर पाने के कारण 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इन लोगों की गिरफ्तारी पिछले दिनों उस दलित महिला के हाथरस स्थित घर जाने के दौरान हुई थी, जिसकी कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद पिछले दिनों दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश में मथुरा के एसडीएम ने सोमवार को चारों को समाज में शांति कायम रखने के लिए बॉन्ड भरने का आदेश दिया। लेकिन रिहाई के लिए एक-एक लाख रुपये के जमानती मुचलके नहीं देने तक, मथुरा में मांट के उप मंडलीय दंडाधिकारी (एसडीएम) सुरेश कुमार ने सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

यह भी पढ़ें: हाथरस जाते समय पत्रकार अरेस्ट, रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

रिपोर्ट्स के अनुसार, चारों को वीडियो लिंक के जरिये मथुरा जेल से एसडीएम के समक्ष पेश किया गया था। आरोपित कप्पन, अतीक-उर-रहमान, आलम और मसूद पर कथित कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे संबद्ध संगठनों से संबंध रखने का आरोप है। उनकी राजद्रोह और आतंकी मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत मंगलवार को खत्म हो रही थी और उन्हें तब न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने हिरासत बढ़ाने के लिए पेश किया जाना था।

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HC ने MIB से पूछा, मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर क्यों नहीं लिया गया एक्शन?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय से इस बात की जानकारी मांगी है कि वह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत की मौत के मामले में मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं शुरू कर पायी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Mumbai High Court

बॉम्बे हाईकोर्ट में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़ी न्यूज कवरेज को लेकर दाखिल कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई चल रही है। इस मामले में कोर्ट ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) से इस बात की जानकारी मांगी है कि वह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत की मौत के मामले में मीडिया ट्रायल से संबंधित शिकायतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं शुरू कर पायी है? साथ ही यह भी पूछा कि न्यूज चैनल्स द्वारा प्रसारित विषयवस्तु को नियंत्रित करने के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीएसए) जैसी निजी संस्थाओं के दिशानिर्देशों पर अपनी मुहर लगाकर उन्हें लागू क्यों नहीं कर पाई है?

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि एनबीएसए की विस्तृत आचार संहिता और दिशानिर्देश है। पीठ ने कहा कि इनका सभी सदस्य चैनलों से पालन करने की अपेक्षा की जाती है और उसे कुछ अधिकार दिये जा सकते हैं और सरकार द्वारा लागू करने योग्य बनाया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘क्या हम सरकार से यह अनुरोध नहीं कर सकते कि दिशानिर्देश बने हुए हैं तो उन दिशानिर्देशों पर मुहर लगाई जाए और उन्हें लागू किया जा सके?’

वहीं सुनवाई के दौरान, एनबीए और एनबीएसए का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील अरविंद दातार और नीला गोखले ने बताया कि चैनल्स के लिए स्व-नियामक तंत्र लगन से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि निजी संस्था ने न्यूज चैनल्स के खिलाफ प्राप्त अनेक शिकायतों पर कार्रवाई की है।

वकीलों ने कहा कि एनबीएसए ने पहले कुछ न्यूज चैनल्स पर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाली सामग्री के प्रसारण पर अधिकतम एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। दातार ने कहा कि अन्य सभी चैनल्स ने माफी मांगी है और जुर्माना अदा किया है, वहीं एक एनबीए से अलग हो गया।

दातार ने कहा कि एनबीएसए ने उच्चतम न्यायालय के पिछले फैसलों के आधार पर समाचार प्रसारणकर्ताओं के लिए स्व-नियमन की प्रणाली का समर्थन किया है। एनबीएसए एक स्वतंत्र इकाई है जिसका गठन एनबीए ने प्रसारणकर्ताओं के बारे में शिकायतों पर विचार करने और निर्णय लेने के लिए किया था।

इसके बाद दातार की दलीलों पर पीठ ने पूछा कि अगर स्व-नियामक प्रणाली विफल हो गई और कोई एक चैनल दिशानिर्देशों का पालन करने से इनकार कर दे, तो क्या होगा? एक उदाहरण के जरिए पीठ ने कहा, ‘जब डॉक्टरों को रियायती दरों पर पीजी कोर्स में प्रवेश दिया जाता है, तो उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करनी होती है। यदि वे उस शर्त को पूरा नहीं करते हैं, तो डॉक्टरों को उनका प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है। यदि वे शर्त से इनकार करते हैं, तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है।’

अदालत ने कहा, ‘आपके पास इस तरह के दिशानिर्देश क्यों नहीं हो सकते? इन दिशानिर्देशों में इस तरह की शक्ति होनी चाहिये।’

इस पर दातार ने कहा कि अगर किसी चैनल ने एनबीएसए के दिशानिर्देशों का पालन करने से इनकार कर दिया या अगर उसने जुर्माना देने से इनकार कर दिया, तो सूचना-प्रसारण मंत्रालय दखल दे सकता है और कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्व-नियमन विफल हो गया, तो अदालत को भी कदम उठाने की पर्याप्त शक्ति है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि एनबीएसए मीडिया को विनियमित करने के लिए किसी नए वैधानिक निकाय के पक्ष में नहीं है।

अदालत जनहित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई कर रही है। ये याचिकाएं कई पूर्व आईपीएस अधिकारियों समेत नामी हस्तियों की तरफ से दाखिल की गई हैं, जिसमें अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले के मीडिया ट्रॉयल पर रोक लगाने की मांग की गई है। हाई कोर्ट अब बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगा।

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह को अगली सुनवाई पर अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय मिली शिकायतों को आगे एनबीएसए के पास क्यों बढ़ा रहा है? पीठ ने पूछा, ‘क्या ऐसे उदाहरण हैं, जहां चैनल्स को मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित किया गया है?’

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गृहमंत्री अमित शाह बोले, मीडिया को इस तरह की गतिविधियों से रहना चाहिए दूर

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मीडिया ट्रायल्स के खिलाफ अपनी बात रखी है।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Amit Shah

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मीडिया ट्रायल्स के खिलाफ अपनी बात रखी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमित शाह का कहना है कि हालांकि मीडिया को समाज में हो रही गलत चीजों को उजागर करने का अधिकार है, लेकिन मीडिया को इस तरह की गतिविधियों से दूर रहना चाहिए, जिनका उद्देश्य विशुद्ध रूप से टीआरपी को बढ़ाना होता है।  

रिपोर्ट्स के अनुसार, शाह का कहना है कि कुछ न्यूज चैनल्स अथवा रिपोर्टर्स द्वारा टीआरपी के लिए बात को बढ़ाना ठीक नहीं है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि जिस तरह तमाम चैनल्स बात को बढ़ाते हैं कि कार में बैठे, पांच मिनट में पहुंचेगे, दायां पैर कार से बाहर निकाला, इस तरह की बातें सही नहीं हैं। 

पिछले दिनों ज्वेलरी ब्रैंड ’तनिष्क’ (Tanishq) के विज्ञापन को लेकर उठे विवाद के बीच गृहमंत्री ने कहा कि इस तरह की अति सक्रियता (over activism) से बचा जाना चाहिए, क्योंकि यह सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकती है।

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कंटेंट और क्रिएटिविटी को लेकर ‘वायकॉम18’ के पूर्व COO राज नायक ने कही ये बात

‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में ‘हाउस ऑफ चीयर’ के संस्थापक और ‘वायकॉम18’ के पूर्व सीओओ राज नायक ने तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Raj Nayak

‘हाउस ऑफ चीयर’ के संस्थापक और ‘वायकॉम18’ के पूर्व सीओओ राज नायक ने ज्वेलरी ब्रैंड ‘तनिष्क’ द्वारा पिछले दिनों लॉन्च किए गए विज्ञापन को लेकर मचे हंगामे व विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। तनिष्क ने गहनों की नई सीरिज के लिए ‘एकत्वम’ नाम से इस विज्ञापन को जारी किया था, लेकिन सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध को देखते हुए इसे वापस ले लिया था।

राज नायक के अनुसार इस विज्ञापन का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव और एकता को बढ़ावा देना था और उन्हें अभी तक नहीं समझ आया कि इस विज्ञापन में ऐसा क्या गलत था जो इसका विरोध हुआ। राज नायक के अनुसार, पूर्व में भी सामाजिक सद्भाव और एकता पर कई अच्छे विज्ञापन आए हैं, लेकिन तब कोई परेशान या नाराज नहीं हुआ। सिर्फ अब लोगों ने इस तरह की चीजें पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है।

राज नायक ने यह भी कहा, ‘कोई व्यक्ति चाहे तो वह हर चीज में गलती ढूंढ सकता है। मुझे इस तरह की घटना पर दुख होता है। दुनिया में कहीं पर भी लोगों को एकजुट करने वाली चीज काफी अच्छी बात है। मुझे विज्ञापन अच्छा लगा।’

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में राज नायक ने कहा, ’केवल ट्रोलिंग की वजह से कंपनी को यह विज्ञापन वापस नहीं लेना चाहिए था। मुझे लगता है कि ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रदान करना राज्य का काम है।’

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘मास्टरमाइंड्स’ (Masterminds) कार्यक्रम के लाइव वेबकास्ट के दौरान राज नायक ने कहा, ‘आपको इसके कंटेंट को देखना होगा और सभी चीजों को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि आप विज्ञापन के उद्देश्य को देखें तो यह लोगों को एकजुट करने व सामाजिक सद्भाव के बारे में था। अगर इसी तरह की प्रतिक्रियाएं मिलेंगी तो अमर अकबर एन्थॉनी जैसी फिल्में हिट नहीं होंगी। क्रिएटिविटी को दबाया नहीं जाना चाहिए। क्रिएटिविटी को तब तक फ्री करना होगा, जब तक यह किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रही है।’

तनिष्क के बारे में सोशल मीडिया पर लोगों ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी है, उस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में राज नायक ने कहा कि संभवत: ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म सभी के लिए फ्री है। उन्होंने नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री-ड्रामा 'सोशल डिल्मा' (Social Dilemma) का उदाहरण दिया और कहा कि लोगों के बीच दुश्मनी पैदा करने की कोशिश के पीछे कई निहित स्वार्थ हो सकते हैं।

राज नायक ने कहा कि ‘मैं काफी दुखी महसूस करता हूं, खासकर आज के समय में जब महामारी का प्रकोप फैला हुआ है और लोग तमाम तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में लोगों को मिलकर आगे आना चाहिए। मानवता से बड़ा कुछ नहीं है।’

टेलिविजन और ‘जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स’ (GEC) पर कंटेंट के बारे में राज नायक ने कहा कि करीब 190 मिलियन घरों में टेलिविजन देखा जा रहा है और इसकी स्थिति काफी मजबूत हो, इसे अन्य घरों में भी अपनी जगह बनानी है। चैनल्स की बढ़ती संख्या और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा के कारण इसे अपने कंटेंट के बारे में दोबारा से सोचना होगा।

राज नायक के अनुसार, ‘टीवी और सिनेमा वही दिखाते हैं, जो समाज में हो रहा है। पहले सिर्फ कुछ चैनल्स थे, लेकिन अब बेहतरीन कंटेंट के साथ तमाम ओटीटी प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं, जिसके परिणामस्वरूप लोग तमाम तरह की सामग्री देख रहे हैं और उनकी पसंद भी बदल रही है। टीवी बहुत मजबूत हो रहा है और इंटरनेट का बढ़ना भी जारी है, हालांकि कुछ तकनीकी समस्याएं और पहुंच की दिक्कत के बावजूद ओटीटी प्लेयर्स काफी देखे जा रहे हैं। यदि टीवी ने एक समय अंतराल के अंदर अपने कंटेंट में कुछ बदलाव नहीं किए तो स्थिति बदल सकती है और लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो सकते हैं।’

राज नायक ने कहा कि दूसरी बात यह है कि ब्रॉडकास्ट और ओटीटी (OTT) के बीच की रेखा काफी धुंधली हो रही है। नेटफ्लिक्स, अमेजॉन, हॉटस्टार आदि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर देखने के लिए काफी अच्छे कंटेंट के साथ सब कुछ टीवी पर उपलब्ध है। अब कंज्यूमर्स के ऊपर है कि वह क्या देखना पसंद करते हैं, फिर चाहे वह छोटे पर्दे पर हो अथवा बड़ी स्क्रीन पर।

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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की नई टीम गठित, ये वरिष्ठ पत्रकार बनीं प्रेजिडेंट

आम तौर पर सर्वसम्मति से पदाधिकारियों की नियुक्ति की सामान्य व्यवस्था को दरकिनार कर इस बार पदों के लिए चुनाव हुए

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Editors Guild

‘द सिटीजन' की संपादक सीमा मुस्तफा एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की अध्यक्ष (प्रेजिडेंट) निर्वाचित हुई हैं। संस्था की तरफ से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है। सीमा मुस्तफा ‘द सिटीजन’ (The Citizen) वेबसाइट की फाउंडर व एडिटर हैं। वे अब ‘द प्रिंट’ (ThePint) के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता की जगह लेंगी। यह घोषणा 16 अक्टूबर को डिजिटल तरीके से संपन्न हुए चुनावों के नतीजे आने के बाद की गई।

बयान में कहा गया कि ‘हार्डन्यूज' (Hardnews) के एडिटर संजय कपूर महासचिव (जनरल सेक्रेट्री) निर्वाचित हुए हैं। कपूर बिजनेस स्टैंडर्ड के एडिटोरियल डायरेक्टर ए.के. भट्टाचार्य की जगह लेंगे।

‘कारवां’ पत्रिका के एडिटर अनंत नाथ को निर्विरोध कोषाध्यक्ष (Treasurer) चुना गया है। नाथ रेडिफ.कॉम (Rediff.com) की कंट्रिब्यूटिंग एडिटर शीला भट्ट की जिम्मेदारी संभालेंगे। आम तौर पर सर्वसम्मति से पदाधिकारियों की नियुक्ति की सामान्य व्यवस्था को दरकिनार कर इस बार पदों के लिए चुनाव हुए।

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रिपब्लिक मीडिया के इस बयान पर BARC ने जताई नाराजगी, दिया स्पष्टीकरण

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के हाल ही में दिए बयान के बाद स्पष्टीकरण जारी किया है

Last Modified:
Sunday, 18 October, 2020
BARC INDIA

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के हाल ही में दिए बयान के बाद स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपब्लिक मीडिया ने अपने बयान में कहा था कि बार्क से उसे ऑफिशियल मेल प्राप्त हुआ है। इस मेल में रिपब्लिक टीवी, रिपब्लिक भारत या न्यूज नेटवर्क के किसी अन्य सहयोगी के खिलाफ कोई अनुचित कार्य नहीं पाया गया है।

बार्क इंडिया ने रिपब्लिक नेटवर्क पर उसके गोपनीय संचार का गलत तरीके से खुलासा करने पर नाराजगी जताई है। बार्क इंडिया ने अपने स्टेटमेंट में कहा, ‘उसने इस मामले में जारी जांच पर कोई टिप्पणी नहीं की है और वह जांच एजेंसियों को जरूरी मदद मुहैया कर रहा है। बार्क इंडिया निजी और गोपनीय संचार का खुलासा करके और उसी को गलत बताते हुए रिपब्लिक नेटवर्क की कार्रवाइयों से काफी निराश है। बार्क इंडिया फिर दोहराता है कि उसने इस मामले में जारी जांच पर टिप्पणी नहीं की है। वह रिपब्लिक नेटवर्क की कार्रवाई पर निराशा व्यक्त करता है।’

  

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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सरकार पर लगाए ये आरोप, इन दो घटनाओं का किया जिक्र

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild of India) ने पिछले दिनों हुई घटनाओं को लेकर सरकार पर कई आरोप लगाए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild of India) ने ‘प्रसार भारती’ द्वारा न्यूज एजेंसी ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (PTI) और ‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया’ (UNI) का सब्सक्रिप्शन रद्द करने के फैसले की आलोचना की है। इसके साथ ही गिल्ड ने ‘ओडिशा टीवी’ (OTV) चैनल के पत्रकार रमेश रथ के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई के मामले में भी चिंता जताई है।   

गिल्ड का कहना है कि जिस तरह से सरकार और उनकी एजेंसियों ने हाल ही में मीडिया के साथ बदले की भावना से कार्रवाई की है, उससे वह निराश और चिंतित हैं।

यह भी पढ़ें: प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी PTI व UNI का सबस्क्रिप्शन किया रद्द, इनसे मांगे नए प्रस्ताव

इस बारे में ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है। इस बयान में गिल्ड की ओर से कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई मीडिया संस्थानों के स्वतंत्र तरीके से कामकाज करने के लिए खतरा है और इसे कमजोर करती हैं।

यह भी पढ़ें: पुलिस ने रीजनल चैनल के पत्रकार को हिरासत में लिया, बताई ये वजह

गौरतलब है कि ‘प्रसार भारती’ ने गुरुवार को एक बैठक में ‘दूरदर्शन’ और ‘ऑल इंडिया रेडियो’ के ‘पीटीआई’ और ‘यूएनआई’ के साथ सबस्क्रिप्शन को खत्म करने का फैसला किया था। पीटीआई द्वारा भारत में चीन के राजदूत सुन वीडोंग का साक्षात्कार करने के बाद ही एजेंसी विवादों में थी।

वहीं, ओडिशा में पुलिस ने हाल ही में रीजनल टीवी चैनल 'ओडिशा टीवी' (OTV) के पत्रकार रमेश रथ को उठा लिया था। पुलिस का कहना था कि रमेश रथ को वर्ष 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आई एक अश्लील क्लिप के कारण पकड़ा गया है।

‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के पूरे बयान को आप यहां पढ़ सकते हैं।

 

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पुलिस ने रीजनल चैनल के पत्रकार को हिरासत में लिया, बताई ये वजह

तलाशी के लिए चैनल के दफ्तर भी पहुंची पुलिस। चैनल ने पुलिस पर व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
Detained

ओडिशा के रीजनल टीवी चैनल 'ओडिशा टीवी' (OTV) के पत्रकार रमेश रथ को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस का कहना है कि रमेश रथ को वर्ष 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आई एक अश्लील क्लिप के कारण पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि पड़ताल में रथ का नाम सामने आया था। रथ पर आरोप है कि उन्होंने ही वीडियो की डिटेल्स मुहैया करवाई।

इस मामले में चैनल का कहना है कि ओडिशा की बीजेडी सरकार को बेनकाब करने के लिए पत्रकार के काम की वजह से उन्हें निशाना बनाने के लिए साजिश रची गई है। वहीं, पुलिस द्वारा 16 अक्टूबर को चैनल परिसर की तलाशी लेने के लिए पहुंचने की खबर भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस एक महिला सांसद के अश्लील वीडियो क्लिप के मामले में चैनल के कार्यालय की तलाशी लेना चाहती थी, जो 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रसारित किया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ओटीवी के न्यूज एडिटर आर मिश्रा का कहना है कि ओटीवी को पहले भी टार्गेट किया जाता रहा है। आर मिश्रा के अनुसार, ‘रमेश रथ ने सीएम पटनाक के एरियल सर्वे के ऊपर आरटीआई रिस्पॉन्स की न्यूज ब्रेक की थी। इसी के बाद जब अगले दिन वह कार्यालय आने लगे तो पुलिस ने उन्हें वैन में बैठा लिया और उनका मोबाइल सीज करके उन्हें थाने ले गए। किसी को इस बारे में नहीं बताया गया कि उन्हें क्यों पकड़ा गया। उन्होंने पत्रकार के खिलाफ एफआईआर की है। हमें हमारे एंकर से इस संबंध में पता चला, फिर हमने पुलिस आयुक्त से इसकी पुष्टि की।’ इसके साथ ही मिश्रा ने कहा कि ओटीवी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

साल 2019 के मामले पर बात करते हुए आर मिश्रा ने कहा यह मामला एक महिला बीजेडी नेता की अश्लील वीडियो से संबंधित है। इसमें दो ओटीवी पत्रकार और कुछ भाजपा नेता शामिल थे, और मीडिया हाउस ने केवल पड़ताल में साथ दिया था। गौरतलब है कि ओटीवी के सीनियर रिपोर्टर रमेश रथ को पुलिस ने गुरुवार को तलब किया था। बाद में पुलिस ने उनके मोबाइल फोन को जब्त कर लिया था और जांच के लिए चैनल के कार्यालय भी गई थी। हालांकि, बाद में रमेश रथ को छोड़ दिया गया और उनसे 21 अक्टूबर को पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। पुलिस के इस कदम की विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।

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प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी PTI व UNI का सबस्क्रिप्शन किया रद्द, इनसे मांगे नए प्रस्ताव

प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से दूरी बना ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी को पत्र लिखकर अपना सब्सक्रिप्शन रद्द करने की जानकारी दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
prasar bharati

प्रसार भारती (Prasar Bharati) ने न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (Press Trust of India) से दूरी बना ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी को पत्र लिखकर अपना सब्सक्रिप्शन रद्द करने की जानकारी दी है। हालांकि न्यूज एजेंसी यूनिइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के साथ भी सब्सक्रिप्शन को खत्म करने का फैसला किया है।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रसार भारती ने 15 अक्टूबर को लिखे पत्र में पीटीआई और यूएनआई को बताया कि उसके बोर्ड ने अंग्रेजी भाषा और अन्य मल्टीमीडिया सेवाओं के लिए डिजिटल सब्सक्रिप्शन हेतु सभी घरेलू न्यूज एजेंसीज से नए प्रस्ताव (बोलियां) मंगवाने का फैसला किया है।

प्रसार भारती समाचार सेवा एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रमुख समीर कुमार द्वारा हस्ताक्षर किए गए पत्र में कहा गया, ‘प्रसार भारती द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद पीटीआई भी इसमें हिस्सा ले सकता है।’ इसके अलावा ‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया’ को पत्र भेजकर भी यह जानकारी दी गई है कि नए प्रस्तावों को आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की जानकारी भी दी गई है कि प्रसार भारती अपने समाचार सब्सक्रिप्शन के लिए पीटीआई को सालाना 6.85 करोड़ रुपए का भुगतान करता है।

देश की सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी पीटीआई, एक बोर्ड द्वारा चलायी जाती है जिसमें प्रमुख अखबार समूहों के मालिक शामिल हैं और यह एक नॉन प्रॉफिट ट्रस्ट है। प्रसार भारती का ये फैसला पीटीआई के भारत-चीन संघर्ष पर कवरेज को अनुचित पाए जाने के चार महीने बाद आया है।

इस साल जून में न्यूज एजेंसी द्वारा कथित राष्ट्र-विरोधी रिपोर्ट पर अपने संबंध को समाप्त करने की धमकी देते हुए प्रसार भारती ने एक पत्र भेजा था। पीटीआई ने चीनी राजदूत सून विडोंग का एक इंटरव्यू किया था, जिसमें उन्होंने भारत-चीन हिंसक गतिरोध के लिए भारत को दोषी ठहराया था, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।

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