आरोप: पत्रकार को जिंदा जलाकर मार डाला, खुद भी जला आरोपी

पत्रकारों ने इस घटना के बाद आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग की है

पंकज शर्मा by
Published - Thursday, 20 June, 2019
Last Modified:
Thursday, 20 June, 2019
Chakresh Jain

संदिग्ध परिस्थितियों में जलने से पत्रकार की मौत का मामला सामने आया है। घटना मध्य प्रदेश में सागर के शाहगढ़ की है। शाहगढ़ जिला पंचायत के सहायक विस्तार अधिकारी (एडीओ) अमन चौधरी व एक अन्य पर 40 वर्षीय चक्रेश जैन नामक इस पत्रकार को जलाकर मारने का आरोप है। चक्रेश जैन के भाई राजकुमार जैन का आरोप है कि दो साल पहले चौधरी की शिकायत पर जैन के खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई अंतिम दौर में चल रही है।

बताया जाता है कि जैन इस मामले में राजीनामा चाहते थे और इसी सिलसिले में बातचीत के लिए बुधवार को वे चौधरी से मिलने उनके घर गये थे। चक्रेश जैन की मौत से कुछ समय पहले बुधवार की सुबह अमन चौधरी खुद 20 फीसदी से ज्यादा जली हालत में शाहगढ़ थाने पहुंचे और चक्रेश के खिलाफ पेट्रोल छिड़ककर जलाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस घटना के कुछ देर बाद अमरमऊ के पास एक झोपड़ी में चक्रेश जैन मरणासन्न मिले। 90 फीसदी से ज्यादा जली हुई हालत में चक्रेश जैन को अस्पताल लाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

वहीं, राजकुमार जैन का आरोप है चौधरी और उसके एक साथी ने उनके भाई को जिंदा जलाकर मार डाला। राजकुमार के अनुसार, चक्रेश को जब अस्पताल लाया गया, तब वह जिंदा था। इसके बावजूद चक्रेश के बयान नहीं लिए गए। सागर के एसपी अमित सांघी का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमों ने दोनों स्थानों से नमूने एकत्र किए हैं। शाहगढ़ के पत्रकारों ने इस घटना के बाद एसपी को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग की है।

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Zee समूह में प्रत्यूषा अग्रवाल का बढ़ा कद, अब निभाएंगी ये भूमिका

देश की प्रमुख मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) ने अपनी चीफ मार्केटिंग ऑफिसर प्रत्यूषा अग्रवाल को नई जिम्मेदारी सौंपी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 28 February, 2020
Last Modified:
Friday, 28 February, 2020
Prathyusha Agarwal

देश की प्रमुख मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) ने अपनी चीफ मार्केटिंग ऑफिसर प्रत्यूषा अग्रवाल को चीफ कंज्यूमर ऑफिसर (Domestic Broadcast Business) के पद पर प्रमोट किया है। यह पद नया क्रिएट किया गया है। अपनी नई भूमिका में प्रत्यूषा अग्रवाल 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के सीईओ (Domestic Broadcast Business) पुनीत मिश्रा को पहले की तरह रिपोर्ट करती रहेंगी।

इस बारे में पुनीत मिश्रा का कहना है, ‘हमारे कंज्यूमर्स की जरूरतें समय के साथ बदल रही हैं और बढ़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में हमने अपने डोमेस्टिक ब्रॉडकास्ट बिजनेस में कंज्यूमर्स को प्राथमिकता पर रखते हुए उसी दिशा में अपने कार्यों और टीमों को आगे बढ़ाया है।’

वहीं अपनी नई भूमिका के बारे में प्रत्यूषा अग्रवाल का कहना है, ‘आज के दौर में हमारे व्युअर्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में उनके दिल को जीतने का एकमात्र तरीका यही है कि उनकी जरूरतों को समझते हुए उस दिशा में आगे बढ़ा जाए।’

बता दें कि ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ को जॉइन करने से पहले प्रत्यूषा अग्रवाल ‘Tata UniStore’ के साथ बतौर मार्केटिंग हेड जुड़ी हुई थीं। इससे पहले वह ‘स्टार इंडिया’ (Star India) में वाइस प्रेजिडेंट (ब्रैंड स्ट्रेटजी) के पद पर भी काम कर चुकी हैं।

प्रत्यूषा ने आईआईटी मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया है। प्रत्यूषा ने वर्ष 2002 में ‘हिन्दुस्तान यूनिलीवर’ (Hindustan Unilever) में एरिया सेल्स मैनेजर (पर्सनल प्रॉडक्ट) के पद से अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। वह ‘पेप्सोडेंट’ (Pepsodent) की ब्रैंड मैनेजर और ‘सनसिल्क’ (Sunsilk) की रीजनल ब्रैंड मैनेजर भी रह चुकी हैं। ‘हिन्दुस्तान यूनिलीवर को छोड़ने के बाद प्रत्यूषा ने ‘Market Gate Consulting’ में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट के पद पर भी काम किया और वह ‘HDFC Life’ की वाइस प्रेजिडेंट (Marketing and Analytics) भी रह चुकी हैं।

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न्यूज एंकर के इमोशन को लेकर Zee बिजनेस के संपादक अनिल सिंघवी ने कही ये बात

‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ के मौके पर आयोजित एक समारोह में ‘Zee बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने तमाम मुद्दों पर रखी अपनी बात

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 28 February, 2020
Last Modified:
Friday, 28 February, 2020
Anil Singhvi

देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में अपना बहुमूल्य योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह की ओर से 22 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba)  2019 दिए गए।

इनबा का यह 12वां एडिशन था। इस मौके पर ‘न्यूजनेक्स्ट कॉन्फ्रेंस’ (NewsNext Conference) के तहत कई पैनल डिस्कशन भी हुए। ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘Differentiating editorial content from propaganda’ रखा गया था। इस पैनल डिस्कशन के द्वारा लोगों को मीडिया के दिग्गजों के विचारों से रूबरू होने का मौका मिला। इस पैनल डिस्कशन को बतौर सेशन चेयर फिल्म मेकर, इंटरनेशनल एंटरप्रिन्योर, मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक डॉ. भुवन लाल ने मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी, ‘एबीपी न्यूज’ के वाइस प्रेजिडेंट (प्लानिंग और स्पेशल कवरेज) सुमित अवस्थी, ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) रोहित सरदाना, ‘राज्यसभा टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन, ‘सीएनएन न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे और ‘विऑन’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर पलकी शर्मा उपाध्याय शामिल थे।

इस मौके पर डॉ. भुवन लाल का कहना था कि मैं जब भी भारत आता हूं और न्यूज चैनल्स देखता हूं तो यह देखकर अजीब सी फीलिंग होती है कि कुछ चैनल्स न्यूज के मामले में पूरी तरह एंटरटेनमेंट हो गए हैं। इन चैनल्स में सिर्फ शोरशराबा या एक तरह से कह सकते हैं कि बदतमीजी तक होती है। भुवन लाल द्वारा यह सवाल भी उठाया गया कि जब न्यूज चैनल्स अपने डिबेट शो में कुछ लोगों को बुलाते हैं और उनकी किसी बात से सहमत नहीं होते हैं, तो क्या उनके साथ किसी भी तरह की बातचीत कर सकते हैं? क्या ये जायज है?

इस पर ‘जी बिजनेस’ (Zee Business) के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी का कहना था, ‘मेरे ख्याल से हम एकमात्र ऐसे चैनल होंगे, जो कोई पॉलिटिकल डिबेट नहीं करते हैं। इसलिए इस तरह की स्थिति या कहें कि समस्या हमारे सामने नहीं आती है। लेकिन पॉइंट यही है कि यदि आपने अपने एडिटोरियल कंटेंट में कोई एक लाइन पकड़ी हुई है और आप उस लाइन पर चलते हैं तो दर्शकों को वो साफ नजर आती है। अब यदि दर्शक उसे पसंद करेंगे तो कहेंगे कि यह चैनल सबसे बढ़िया है। जो उसे पसंद नहीं करेंगे, वे कहेंगे कि चैनल तो अपना प्रोपेगेंडा चला रहा है। लेकिन हमारे साथ ऐसा नहीं है। बिजनेस चैनल होने के नाते हम बिजनेस टॉक्स के तहत कंज्यूमर्स की जो समस्याएं हैं, वो कवर करते हैं। वहां यदि हम अपने कंज्यूमर्स के लिए आवाज उठाते हैं, तो हमें वाहवाही मिलती है। यदि हम किसी स्टॉक को रिकमंड करते हैं और उस स्टॉक में हमारे व्युअर्स पैसा बनाते हैं तो हमें वाहवाही मिलती है, लेकिन यदि वहां पर भी मैं स्टॉक को किस तरह रिकमंड कर रहा हूं अथवा मैं अपना न्यूज कंटेंट दे रहा हूं तो किस तरह से दे रहा हूं, ये भी मायने रखता है। यदि मैं अपनी बात को सॉफ्ट तरीके से समझा रहा हूं, आप (व्युअर्स) समझें तो ठीक है नहीं तो कोई बात नहीं, लेकिन यदि मैं बात को जोरदार तरीके से इस अंदाज में कहूं कि आप उस बात को मानें ही मानें यानी व्युअर्स पर थोपने की कोशिश करें, वहीं दिक्कत है।’

डॉ. भुवन लाल द्वारा यह पूछे जाने पर कि बतौर न्यूज एंकर पत्रकार के अंदर इमोशन कब आना चाहिए, अनिल सिंघवी का कहना था कि हर वक्त इमोशन आना चाहिए, लेकिन इमोशन का आना और इमोशन को लाना, इसमें काफी फर्क है। उनका कहना था कि बतौर न्यूज एंकर किसी भी चीज से इमोशन आना अच्छी बात है, लेकिन जब इसी इमोशन को लाने की कोशिश की जाती है, तो समस्या शुरू हो जाती है, क्योंकि वहां पर आप (न्यूज एंकर) एक्टिंग कर रहे होते हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में अनिल सिंघवी का कहना था कि जितने चैनल अपने ओपिनियन में बंटे हुए हैं, उतने ही दर्शक भी अपने ओपिनयन में बंटे हुए हैं। आज के दौर में अधिकांश दर्शक भी ऐसे हो गए हैं कि उन्हें व्यूज चाहिए, न्यूज नहीं चाहिए। न्यूज चाहने वाले दर्शक बहुत कम बचे हैं। ऐसे में चैनल अपने-अपने हिसाब से व्यूज दे रहे हैं।

पैनल डिस्कशन के दौरान आखिर जब डॉ. भुवन लाल ने पूछा कि देश में किसी भी मुद्दे पर कई बार तमाम न्यूज चैनल्स सेलिब्रिटीज की राय दिखाने लग जाते हैं। क्या वे सभी सेलिब्रिटीज, जिनमें फिल्मी सेलिब्रिटीज भी शामिल हैं, क्या रातोंरात इतने एकसपर्ट हो जाते हैं कि वह किसी भी मुद्दे पर अपनी राय दे सकें। कई बार ये राय गलत होती है और लोगों पर ये राय एक तरह से थोप दी जाती है, क्या यह सही है?  के जवाब में अनिल सिंघवी का कहना था, ‘लोग यदि न्यूज एंकर्स की राय जानना चाहते हैं तो उन्हें एक्टर-एक्ट्रैस की राय भी चाहिए होती है। लोगों को सेलिब्रिटीज की ओपिनयिन को सुनना अच्छा लगता है। हम तमाम एक्टर-एक्ट्रैस की राय पूछते हैं, हो सकता है कि इनमें से कई मना कर दें, लेकिन कुछ तो अपनी राय देंगे। ऐसे में जो सेलिब्रिटीज अपना ओपिनियन देते हैं, चैनल उसे चला देते हैं।’

पूरे पैनल डिस्कशन को आप इस विडियो पर क्लिक कर देख सकते हैं। 

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enba के मंच से आलोक मेहता की अपील, सभी चैनल शुरू करें इस तरह का सेगमेंट

नोएडा के रेडिसन ब्लू होटल में 22 फरवरी को बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यू्ज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ का आयोजन किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 28 February, 2020
Last Modified:
Friday, 28 February, 2020
Alok Mehta

नोएडा के रेडिसन ब्लू होटल में 22 फरवरी को बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यू्ज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) का आयोजन किया गया। enba का यह 12वां एडिशन था। enba 2019 के मंच से वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता ने देशभर के न्यूज चैनलों से कहा कि आप सब अब ये भी बताएं कि न्यूज चैनल में सबकुछ गड़बड़ ही नहीं, बहुत कुछ अच्छा भी हो रहा है। अब यह प्रमोट किया जाना चाहिए कि हमें (न्यूज चैनल्स को) बोलने की पूरी आजादी है।

न्यूज वेबसाइट ‘लल्लनटॉप’ की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इसके प्रोग्राम भले ही ‘आजतक’ पर नहीं दिखाई देते हों, लेकिन इसकी पहुंच बहुत ही ज्यादा है। लोग उसे देखना पसंद करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वो जो बात कह पाते हैं, वह लोगों तक पहुंचती है। इसलिए इसकी एकाध झलक मेन चैनल में भी आनी चाहिए, फिर चाहे वह आजतक हो, एबीपी न्यूज हो, एनडीटीवी हो या फिर कोई और चैनल... सब लोग इतना बोलते हैं, कहते हैं, लेकिन ‘लल्लनटॉप’ जैसी बातें कोई नहीं करता।

आलोक मेहता ने कहा, ‘’जब कई बार मुझे लोग कहते हैं कि सब कुछ बिकाऊ है, सब बिकता है, तब मुझे बहुत तकलीफ होती है। यहां कहना चाहूंगा कि हर कोई बिकाऊ नहीं है, ज्यादातर लोग ईमानदार हैं। हो सकता है दो-चार लोग जो सूटबूट में बाहर दिखाई देते हैं वो बेईमान हों। और मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि कुछ लोग इस तरह से ‘बीमार’ होते हैं, जो हमेशा कहते रहते हैं कि यहां करप्शन है, वहां करप्शन हैं। ब्यूरोक्रेट्स हों या नेता हों, कई लोग उनकी भी आलोचना करते रहते हैं कि ये आदमी वहां कैसे पहुंच गया। लेकिन कहना चाहूंगा कि इन लोगों में कुछ तो खूबियां होंगी, जो वे यहां तक पहुंचे हैं।’

आलोक मेहता ने मंच से सभी चैनलों से आह्वान करते हुए कहा कि आप सभी अपने चैनल पर कोई एक ऐसा सेगमेंट दीजिए, जो लोगों को इस बात का भरोसा दिला सके कि कोई भी सरकार हो, यह चैनल उसकी आलोचना से पीछे नहीं हटता है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि लोग ये सोचें ये चैनल तो सरकार के खिलाफ बोल ही नहीं पाता है। उन्होंने कहा कि टीवी की तरह प्रिंट के लोगों ने कभी ऐसा नहीं किया है कि वे हिमालय पर जाकर रिपोर्टिंग करें। हां, बहुत ही कम ऐसे मौके आते थे। लेकिन आज टीवी में बेहतर काम हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत बहुत आगे चला गया है। तमाम बुराइयों के बावजूद, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बोल्ड आवाज भारतीय मीडिया की है। बाहर भले ही कहा जाता हो कि भारतीय मीडिया सरकार की आलोचना नहीं कर पा रही है, लेकिन मैं मानता हूं कि कई सारी ऐसी क्रिटिकल चीजें होती हैं, जो समाज को उजागर करती हैं। मीडिया की वजह से कितने सारे ऐसे फैसले लिए गए हैं, जो भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।

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समाज में मीडिया की भूमिका को लेकर इन तीन चीजों का जिक्र जरूरी: उपेंद्र राय

नोएडा के रेडिसन ब्लू होटल में 22 फरवरी को ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ‘न्यूज नेक्स्ट 2020’ कांफ्रेंस का आयोजन किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 27 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 27 February, 2020
Upendra Rai

नोएडा के रेडिसन ब्लू होटल में 22 फरवरी को ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ‘न्यूज नेक्स्ट 2020’ कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज को बदलने में मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखते हुए ‘सहारा न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय ने कहा कि मीडिया और ट्रांसफेशन की बात की जाती है तो तीन बातें जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि मीडिया की सकारात्मक भूमिका क्या है, मीडिया की नकारात्मक भूमिका क्या है और मीडिया में संतुलन साधे रखना, यानी बैलेंस क्या है।

एक घटना का जिक्र करते हुए उपेंद्र राय ने कहा कि मीडिया किस हद तक नकारात्मक और सकारात्मक भूमिका निभा सकती है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि आप सबने पुलित्जर अवॉर्ड का नाम सुना होगा। पुलित्जर बहुत ही गरीब परिवार से थे और 19वीं सदी में वे हंगरी से न्यूयॉर्क आ गए थे। बहुत ही संघर्ष-परिश्रम करके उन्होंने एक अखबार खरीदा था, जो बाद में ‘न्यूयॉर्क वर्ल्ड’ के नाम से मशहूर हुआ था। ये अखबार में बाद में प्रभावी-शक्तिशाली दैनिक अखबार साबित हुआ था। उस समय अमेरिका में एक और अखबार था, जिसे विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट चलाते थे। वे अमेरिका के एक दूसरे शहर से न्यूयॉर्क में आकर बसे थे। विलियम हर्स्ट ने पुलित्जर अखबार के सभी अच्छे कर्मियों को तोड़ा और अपने अखबार की ओर ले गए। एक बार उन्होंने एक कहानी गढ़ी कि किस तरह से क्यूबा की एक लड़की को स्पेन ने अपने यहां बंदी बना लिया और वह कहानी इस तरह से चल पड़ी कि क्यूबा और स्पेन में युद्ध जैसी स्थित पैदा हो गई। बाद में ‘पुलित्जर’ अखबार ने पूरे झूठ का पर्दाफाश किया और बताया कि पूरी कहानी ही गलत थी। उस समय दोनों अखबारों में होड़ थी। यदि निगेटिविटी का उदाहरण दिया जाए तो ये अपने आप में बड़ा उदाहरण है, क्योंकि जिन दो देशों के बीच संबंध इतने मधुर थे, वे इतने ज्यादा खराब हो गए कि युद्ध जैसी नौबत आ गई। ये मीडिया का नकारात्मक प्रभाव ही तो है।

वहीं, मीडिया के संतुलित व्यवहार की बात करते हुए राय ने कहा,‘यहां महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू के एक संवाद का जिक्र करना चाहूंगा कि जब ‘नवजीवन’ और ‘यंग इंडिया’ में महात्मा गांधी कॉलम लिखते थे  तो उन्होंने नेहरूजी से कहा कि आप भी कॉलम लिखा करिए। देश के लोगों को पता चलना चाहिए कि गांधी और नेहरू में कितने मतभेद हैं, क्योंकि जब मैं लिखता हूं तो कांग्रेस का कोई भी वरिष्ठ आदमी लिखने को तैयार नहीं होता है। इससे लोगों को ये पता नहीं चलता कि हमारे बीच जी-हुजूरी नहीं है, बल्कि हम एक-दूसरे के विचारों को पसंद और नापसंद भी करते हैं। लेकिन नेहरू जी गांधी जी के साथ कॉलम लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। जब गांधी जी ने ‘नवजीवन’ में कई ऐसे आर्टिकल लिखे, जैसे ‘सत्य के प्रयोग में मैंने आज अपने ब्रह्मचर्य को परखने की कोशिश की।’ इस पर उन्होंने कई बातें लिखीं, तब सरदार पटेल ने उनको पत्र लिखा जो ‘नवजीवन’ में प्रकाशित भी हुआ कि बापू जो आप सत्य का प्रयोग कर रहे हैं, वह हम सभी जानते हैं, लेकिन समाज से उसका बहुत ज्यादा मतलब नहीं है। इसलिए इतना स्पष्ट और साफ बने रहने की जरूरत नहीं है। ये आपके निजी प्रयोग हैं और आप इसे निजी तरीके से करिए। इसे लेकर समाज में लंबे समय तक बहस चलाने की जरूररत नहीं है, ये आपके व्यक्तिगत मामले में हैं इनको व्यक्तिगत तरीके से करिए।

राय ने अपने संबोधन में आगे कहा कि जब आजादी का आंदोलन चल रहा था, उस समय जो अखबार निकल रहे थे, वे सभी चंदे से चलते थे और इसकी वजह से इन अखबारों की जवाबदेही समाज के प्रति थी, क्योंकि जनता का अखबार था, जनता के द्वारा, जनता के पैसे चलता था। वो तब किसी बिजनेस मोटिवेशन या उसके दवाब में नहीं चलता था, लेकिन आज की स्थिति ठीक इसके उलट है।

समाज में मीडिया की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि याद करिए पहले ऋषि-महर्षि वैद्य के रूप में इलाज करते थे, तो उनका एक उद्देश्य होता था कि बीमार को ठीक करना, लेकिन जब इस प्रोफेशन में बिजनेस घुसा तो आज देखिए कि किस तरह से हम लोग अखबारों में रोज खबरें छापते हैं और चैनलों पर बहस करते हैं कि कैसे किसी के मृत शरीर को वेटिंलेटर पर रखकर पांच दिन तक एयर पम्प करके उसको ‘जिंदा’ रखा गया और कैसे आज की तारीख में कई हॉस्पिटल्स चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा बीमार आदमी हमारे यहां ही भर्ती हों। इसके लिए उन्होंने मार्केटिंग के एग्जिक्यूटिव लगा रखे हैं। अब यहीं से होड़ शुरू होती है, क्योंकि सेवा का भाव तो चला गया और बिजनेस ने अपनी जगह बना ली है। ठीक ऐसे ही हम मीडिया के लोगों को भी आलोचना करने का ‘लाइसेंस’ मिला हुआ है और हम यह करते भी हैं। लेकिन कई बार सवाल उठता है कि हमारी आलोचना कौन करेगा, हम पर कौन नजर रखेगा। बवाल उस दिन खड़ा हो जाता है जब हम भी बिजनेस के दवाब में टीआरपी बढ़ाने के लिए, कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए, अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए कहानियां गढ़ने और बनाने लग जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सवाल तो तब खड़ा होता है जब कुछ चैनल ऐसे लोगों को अपने साथ कर लेते हैं जो दो मिनट में दस टायर और चार आदमियों को इकट्ठा करके दंगा करने से भी नहीं चूकते हैं। इस तरह की तमाम बाते हैं जो हम लोगों को पता है, जो हम बता सकते हैं कि हम हीं लोगों में से किस-किस चैनल पर इस तरह की खबरें चलीं। लेकिन साथ ही साथ देखा जाए तो तमाम निगेटिविटी के बीच मीडिया एक सशक्त आवाज भी है, एक सशक्त माध्यम भी है और खासतौर से मध्यम वर्ग की उम्मीदों को मीडिया ने जितना परवान चढ़ाया है, मीडिया ने जितना हौसला दिया है, शायद ही 500 सालों में कोई ऐसा माध्यम या तरीका हो, जिसने आम आदमी के भरोसे, साहस या उसके भरोसे को इतनी मजबूती दी हो।

राय ने कहा कि इस मामले में आप रानू मंडल का केस भी देख सकते हैं कि मीडिया ने कैसे एक भीख मांगकर अपनी जीविका चलाने वाली को रातों-रात स्टार बनाया और तमाम ऐसे लोगों के मन में ये भरोसा पैदा किया, जिसके पास कोई साधन-रिसोर्स नहीं है कि वह कैसे रातों-रात कोई चमत्कार कर सकता है। यही मीडिया और सोशल मीडिया की ताकत है।

आज 40 करोड़ लोग भारत में वॉट्सऐप इस्तेमाल करते हैं और वे ऐप्स जो बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं, वे न तो कोई पत्रकार हायर करते हैं और न ही किसी मीडियाकर्मी को नौकरी देते हैं फिर भी गूगल की दखल न्यूज में सबसे ज्यादा है और बिना मीडिया का काम करते हुए वॉट्सऐप सशक्त माध्यम बन चुका है।  

जो बदलाव मीडिया के जरिए सोसायटी में हो रहा है वह बहुत हद तक अच्छा है। प्रकृति का सारा सिस्टम द्वंद्वात्म है। अगर कहीं अच्छा है तो उसके साथ बुरा जुड़ा हुआ है और कहीं बुरा है तो उसके साथ अच्छा भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इन तमाम बहस के बीच मैं बतौर जर्नलिस्ट इतना ही कहना चाहूंगा कि अभी तक समाज के प्रति मीडिया ने जो अपनी भूमिका निभाई है वह बहुत अच्छी है और आम आदमी के लिए मीडिया ने भरोसा जगाने का काम किया है। शायद मौजूदा हालात में कोई ऐसा माध्यम, कोई ऐसा साधन नहीं है जो आम आदमी की ताकत बन सके। कहीं न कहीं न्यूज चैनल्स ने, सोशल मीडिया ने आम आदमी के दैनिक व्यवहार, उसके दैनिक जीवन को बदलने का काम किया है।

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Whatsapp का मिसयूज रोकने के लिए सुमित अवस्थी ने दिया ये 'आइडिया'

‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह की ओर से 22 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2019 दिए गए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 27 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 27 February, 2020
Sumit Awasthi

‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह की ओर से 22 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba)  2019 दिए गए। इनबा का यह 12वां एडिशन था। देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को नई दिशा देने और इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए ये अवॉर्ड्स दिए गए। इस मौके पर कई पैनल डिस्कशन भी हुए। ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘Differentiating editorial content from propaganda’ रखा गया था, जिसमें मीडिया की जानी-मानी हस्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस पैनल डिस्कशन को बतौर सेशन चेयर फिल्म मेकर, इंटरनेशनल एंटरप्रिन्योर, मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक डॉ. भुवन लाल ने मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘एबीपी न्यूज’ के वाइस प्रेजिडेंट (प्लानिंग और स्पेशल कवरेज) सुमित अवस्थी, ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) रोहित सरदाना, ‘जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी, ‘राज्यसभा टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन, ‘सीएनएन न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे और ‘विऑन’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर पलकी शर्मा उपाध्याय शामिल थे।

इस मौके पर डॉ. भुवन लाल द्वारा यह पूछे जाने पर कि आज के दौर में एक और बड़ी चुनौती है। टीवी पर कुछ दिखाया जाता है, वहीं, एक ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ है जो कुछ और बताती है। उसने भारत का इतिहास दोबारा लिख दिया है। बहुत सारे लोग इसमें ग्रेजुएशन और पीएचडी भी कर चुके हैं। अब उससे आप कैसे निबटेंगे? इस पर ‘एबीपी न्यूज’ के वाइस प्रेजिडेंट (प्लानिंग और स्पेशल कवरेज) सुमित अवस्थी का कहना था कि इसे ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ कहा जाना सही नहीं है। सुमित अवस्थी के अनुसार, ‘इस कथित वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी से बचने के लिए मेरे पास बहुत ही बेहतर आइडिया है। दरअसल, हम वॉट्सऐप से खुश होने से ज्यादा परेशान हैं। पहले खुश थे, लेकिन अब परेशान हो गए हैं। मेरी राय में वॉट्सऐप को पेड सर्विस कर देना चाहिए यानी इसे फ्री नहीं होना चाहिए। इस पर सेंशरशिप होनी चाहिए, क्योंकि इससे फायदे की जगह नुकसान ज्यादा हो रहा है।’

सुमित अवस्थी का कहना था, ‘मेरी राय में यदि लोग अपना कोई मैसेज लिखकर वॉट्सऐप पर शेयर कर रहे हैं तो उस पर कुछ शुल्क लगना चाहिए और यदि फॉरवर्ड कंटेंट को आगे फॉरवर्ड कर रहे हैं तो उस पर ज्यादा शुल्क लगना चाहिए और यदि फॉरवर्ड किया हुआ पिक्टोरियल कंटेंट है तो उस पर और ज्यादा शुल्क लगना चाहिए। मुझे लगता है कि ऐसा करने पर जब आदमी की जेब से मैसेज फॉरवर्ड करने के लिए पैसे जाएंगे, तो वह सिर्फ काम की बात ही फॉरवर्ड करेगा और काफी सोच-समझकर करेगा। आज के समय की तरह वो कुछ भी फॉरवर्ड नहीं कर देगा।’

चर्चा के दौरान सुमित अवस्थी का यह भी कहना था कि पत्रकारिता एक ऐसा आईना है, जिसे हम सब दूसरों को तो दिखाना चाहते हैं, लेकिन खुद नहीं देखना चाहते हैं। यही सबसे बड़ी समस्या है। इस आईने में हमें भी खुद को देखना होगा। स्थिति खराब तो हो चुकी है, लेकिन हम सभी को आगे की पीढ़ी के लिए ये कोशिश करनी होगी कि यह और खराब न हो। स्थिति सुधरे नहीं तो कम से कम इतना हो कि यह जहां है, उसी हाल में रुक जाए।

रेवेन्यू के मुद्दे पर सुमित अवस्थी का कहना था कि अखबार जितने का छपता है, यदि उतने का मिलने लगे तो क्या ज्यादातर लोग उसे खरीदेंगे? यह डेढ़ रुपए का मिलता है, इसलिए लोग इसे खरीदते हैं, लेकिन जिस दिन यह 25 रुपए का मिलेगा, तो मुझे लगता है कि आधा सर्कुलेशन खत्म हो जाएगा। इसी तरह जिस खर्चे पर चैनल चलते हैं और उसी खर्चे पर लोगों को ये खरीदने पड़ें तो आधे लोग देखना बंद कर देंगे और इनमें काम कर रहे पत्रकारों के लिए घर चलाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। जहां तक सबस्क्रिप्शन मॉडल की बात है तो लग रहा है कि उस तरफ जाना चाहिए पर यह जा नहीं रहा है।

चर्चा के दौरान सुमित अवस्थी का यह भी कहना था, ‘मैं जब न्यूज18 चैनल में था तो एक छोटा सा सर्वे कराया गया था। उस सर्वे में अलग-अलग शहरों में व्युअर्स से सवाल पूछा गया था कि क्या वे एंकर के व्यूज जानना चाहते हैं अथवा डिबेट में जो मेहमान आ रहे हैं, उनके व्यूज जानना चाहते हैं, इस पर ज्यादातर जगहों पर लोग एंकर का व्यू पॉइंट जानना चाहते थे। लोगों का कहना था कि पार्टी प्रवक्ता को तो हम कहीं पर भी सुन लेते हैं, लेकिन एंकर का व्यू पॉइंट नहीं पता चलता है।’

यही नहीं, पैनल चर्चा खत्म होने से पहले सुमित अवस्थी ने डॉ. भुवन लाल से भी इस बात पर उनकी राय जाननी चाही कि अगर आजादी के 70 साल बाद देश का प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत के नाम से एक प्रोग्राम शुरू करता है तो उसको दिखाना प्रोपेगेंडा है अथवा कंटेंट है?

सुमित अवस्थी के इस सवाल पर डॉ. भुवन लाल द्वारा  दिए गए जवाब के साथ ही पूरे पैनल डिस्कशन को आप इस विडियो पर क्लिक कर देख सकते हैं।    

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News Next 2020: एंकर्स की बात से जब नाराज हो गए सईद अंसारी, फिर दागे कई सवाल

‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ‘न्यूज नेक्स्ट’ कांफ्रेंस में बतौर अतिथि मौजूद अंसारी ने एंकर्स को कठघरे में खड़ा करने वाले वरिष्ठ पत्रकार दिलीप तिवारी और स्मिता शर्मा से कई तीखे सवाल भी पूछे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 26 February, 2020
sayeed

क्या न्यूज स्टूडियो आज ईको चैम्बर और एंकर इन चैम्बर के ऑपरेटर बन गए हैं? इस सवाल का जवाब अधिकांश लोग शायद ‘हां’ में दें, लेकिन ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर सईद अंसारी की सोच इससे बिलकुल विपरीत है। उन्हें लगता है कि एंकर एक निर्धारित प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं और उन्हें परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है।

‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ‘न्यूज नेक्स्ट’ कांफ्रेंस में बतौर अतिथि मौजूद अंसारी ने एंकर्स को कठघरे में खड़ा करने वाले वरिष्ठ पत्रकार दिलीप तिवारी और स्मिता शर्मा से कई तीखे सवाल भी पूछे। दरअसल, मीडिया के बदलते स्वरूप पर चर्चा के लिए सईद अंसारी के साथ ही स्वतंत्र पत्रकार स्मिता शर्मा, ‘जी मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़’ के सीईओ दिलीप तिवारी, ‘इंडिया टीवी’ की न्यूज एंकर अर्चना सिंह और ‘सहारा समय’ राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली एनसीआर की चैनल हेड गरिमा सिंह को आमंत्रित किया गया था। जबकि कार्यक्रम का संचालन ‘न्यूजएक्स’ के एसोसिएटेड एडिटर तरुण नांगिया ने किया।

चर्चा की शुरुआत दिलीप तिवारी से करते हुए तरुण ने सवाल पूछा कि क्या न्यूज स्टूडियो और टीवी डिबेट ईको चैम्बर में तब्दील हो गए हैं? इस पर हामी भरते हुए दिलीप ने आज के कई मौजूदा एंकर्स के ज्ञान पर सवाल किया और उन्हें मैदानी अनुभव हासिल करने की सीख दी। इसके बाद तरुण ने स्मिता की राय जाननी चाही। स्मिता ने दिलीप से दो कदम आगे बढ़ते हुए न्यूज स्टूडियो को ईको चैम्बर के बजाय टॉर्चर चैम्बर करार दे डाला। इतना ही नहीं उन्होंने एंकर्स के लिए कुछ तीखे शब्द भी इस्तेमाल किये। मसलन, ‘उन एंकर की प्रीमियम ज्यादा है जो टेबल तोड़कर चर्चा करवा रहा हो, क्योंकि वह एक आसान तरीका होता है। जब आपको उस विषय की ज्यादा जानकारी नहीं होती, तो या तो आप तीन किलोमीटर लंबे सवाल पूछते हैं ताकि लोग सवाल में ही उलझे रह जाएं या फिर आप ‘आप बताएं, आप बताएं’ कहते रहते हैं।’

दिलीप और स्मिता के बाद जब सईद अंसारी की बारी आई, तो उन्होंने तरुण के सवाल का जवाब देने से पहले दोनों वरिष्ठ पत्रकारों को जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘हम यहां न्यूज स्टूडियो की बात कर रहे हैं या एंकर बनाम रिपोर्टर की? ताज्जुब की बात यह है कि दिलीप और स्मिता भी एंकर रहे हैं और फिर भी उन्हें एंकर्स से इतनी परेशानी है। आज ऐसा कौनसा एंकर है जो आपको फील्ड में नजर नहीं आता। जितने भी एंकर पर आप सवाल उठा रहे हैं क्या वो बिना पढ़े-लिखे आये हैं? क्या आप यह सवाल उठा रही हैं स्मिता कि न्यूज चैनलों के जितने भी ऐसे एडिटर हैं जो फील्ड में नहीं गए, उनके पास दिमाग नहीं है? क्या उनमें सोचने-समझने की शक्ति नहीं है, क्या वे यह तय नहीं कर सकते कि खबर क्या है?

इसके बाद अंसारी के शब्द थोड़े तल्ख होते गए। उन्होंने अब दिलीप तिवारी से मुखातिब हुए पूछा ‘आप आज मुझे यह बताइए कि क्या आप उन एडिटर को खारिज कर रहे हैं? आप कहिये कि मैं किसी ऐसे को एंकर नहीं मानता हूं जो फील्ड में न उतरा हो। और आप मुझे उन एंकर्स का नाम बताइए जो कभी फील्ड में नहीं गए। आप नाम लीजिये, नाम लेने से क्यों डरते हैं? एंकर पर आप लोग सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उस गेस्ट पर नहीं जो स्टूडियो में आकर चिल्लाते हैं, एक-दूसरे को थप्पड़ मारते हैं’।

दिलीप तिवारी को जवाब देने के बाद अंसारी एक बार फिर स्मिता की तरफ मुड़े और उन्हें जमकर सुनाया। उन्होंने कहा, ‘मैंने देखा है आपके शो में कितना शोर-शराबा होता था। मैंने देखा है आपके शो में लोगों को लड़ते हुए। मैंने दिलीप के शो में इतना ज्यादा शोरशराबा देखा है कि आप सोच नहीं सकते हैं। तो आप लोग कैसे सवाल उठा सकते हैं’? सईद अंसारी के अपनी बात खत्म करने के बाद तरुण ने दिलीप की तरफ देखा कि शायद वह अंसारी को जवाब देना चाहते हों? लेकिन दिलीप ने कहा, ‘आप पहले बाकी गेस्ट के विचार जान लें, क्योंकि अंसारी ने हमारे बोलने के लिए काफी मसाला दे दिया है’। अर्चना और गरिमा सिंह के अपनी बात रखने के बाद एक बार फिर से दिलीप और स्मिता ने मोर्चा संभाला और अंसारी के सवालों का उदाहरणों के साथ सधा हुआ जवाब दिया।   

डिबेट का पूरा विडियो आप यहां देख सकते हैं:

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रोहित सरदाना ने बताया, चैनल्स-न्यूज एंकर्स को हमेशा किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

enba 2019 के मंच पर रोहित सरदाना ने कहा कि वे यहां पर किसी पर आरोप लगाने के लिए नहीं बैठे हैं और न ही किसी की तरफ से सफाई देने के लिए बैठे हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 26 February, 2020
rohit

देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को नई दिशा देने और इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए 22 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba)  2019 दिए गए। इनबा का यह 12वां एडिशन था। इस मौके पर कई पैनल डिस्कशन भी हुए। ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘Differentiating editorial content from propaganda’ रखा गया था, जिसमें मीडिया के दिग्गजों ने अपने विचार व्यक्त किए।

फिल्म मेकर, इंटरनेशनल एंटरप्रिन्योर, मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक डॉ. भुवन लाल ने बतौर सेशन चेयर इसे मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) रोहित सरदाना, ‘एबीपी न्यूज’ के वाइस प्रेजिडेंट (प्लानिंग और स्पेशल कवरेज) सुमित अवस्थी, ‘जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी, ‘राज्यसभा टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन, ‘सीएनएन न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे और ‘विऑन’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर पलकी शर्मा उपाध्याय शामिल थे।

इस मौके पर भुवन लाल द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या कुछ टीवी नेटवर्क्स प्रोपेगेंडा चलाते हैं और सिर्फ थोड़े चैनल ही ऑब्जेक्टिव यानी सही रूप में काम कर रहे हैं, ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) रोहित सरदाना का कहना था कि वे यहां पर किसी पर आरोप लगाने के लिए नहीं बैठे हैं और न ही किसी की तरफ से सफाई देने के लिए बैठे हैं।  

रोहित सरदाना के अनुसार, ‘आमतौर पर मैं जब भी अपने व्युअर्स के साथ रूबरू होता हूं, तो कहानी के साथ होता हूं, ताकि चीजें आसान हो जाएं। यहां भी मैं एक छोटी सी कहानी सुना देता हूं। इस कहानी के अनुसार, एक गांव में हाथी आ गया। सब गांववाले हाथी देखकर आए और उसके बारे में बातचीत शुरू कर दी। गांव में पांच लोग ऐसे भी थे, जो नेत्रहीन थे, उनके मन में भी आया कि हम भी जाकर हाथी देखें। आखिर वे हाथी के पास पहुंच गए और उसे छूकर देखने लगे। किसी के हाथ में हाथी का पैर आया तो वह कहने लगा कि यह तो पेड़ के तने जैसा है। किसी के हाथ में सूंड आई तो उसने कहा कि यह पाइप की तरह है। किसी के हाथ में पूंछ आई तो उसने कहा कि यह तो पेड़ से लटकी हुई जड़ की तरह है। किसी के हाथ में हाथी का दूसरा पैर आया तो उसे लगा कि यह तो खंभे के जैसा है। तो उनमें आपस में झगड़ा हो गया कि ये तो ऐसा है, ये तो वैसा है। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक बुद्धिजीवी ने उन्हें लड़ते हुए देखा तो इसका कारण पूछा। इस पर नेत्रहीनों ने पूरी बात बताई। सारी बात सुनकर उस बुद्धिजीवी ने कहा कि आप सब लोग अपनी-अपनी जगह सही हो। आपमें से कोई गलत नहीं है, दिक्कत ये है कि आप सब उसे अलग-अलग तरीके से देख रहे हो। सबको एक साथ ले आओ। इसके बाद ही आपको पता चलेगा कि हाथी कैसा है।‘

सरदाना का कहना था कि यही काम एक न्यूज चैनल और न्यूज एंकर का है कि इधर भी एक तथ्य है और दूसरी तरफ भी एक तथ्य है तो वह सभी को मिलाकर दर्शकों के सामने रखे। इस तरह ही वह न्यूज चैनल अथवा एंकर ऑब्जेक्टिव कहलाएगा और यदि हाथी की कहानी की तरह इसमें एक पार्ट भी कम हो गया तो वो दर्शक जिन्होंने कोई एक फैक्ट देख रखा होगा, वे कहेंगे कि यह न्यूज चैनल/एंकर ऑब्जेक्टिव नहीं है और यह झूठ बोल रहा है। ऐसे में जरूरी नहीं है कि वह झूठ बोल रहा हो। आज के दौर न्यूजरूम में डायनिज्म का दौर है। आपसे कोई चीज छूट गई है, वो दूसरे कोने में कहीं पड़ी हुई है, हो सकता है कि वह आपको थोड़ी देर बाद मिले, लेकिन उस थोड़ी देर में अगर आपने फैसला सुनाने में जल्दबाजी कर दी है, जो कि आपका काम नहीं है, तो ऐसे में लोग आरोप लगाएंगे कि आप ऑब्जेक्टिव नहीं हैं और आप एकतरफा बात करते हैं।’

डॉ. भुवन लाल द्वारा यह पूछे जाने पर कि आपने बतौर उदाहरण अपनी कहानी में हाथी का जिक्र किया, लेकिन कुछ लोग बोलेंगे कि वह हाथी ही नहीं था, शेर था तो इस बारे में आपका क्या कहना है? इस पर रोहित सरदाना का कहना था, ‘मुझे लगता है कि ऐसे में हाथी को शेर कह देना अतिशयोक्ति होगी। वो हाथी ही कहेंगे, शेर नहीं कहेंगे, ये हो सकता है कि थोड़ा वजन घटा-बढ़ाकर कह दें। हाथी को शेर कह दें, ये तो नाइंसाफी हो जाएगी। इस देश में सारे ही नेत्रहीन नहीं बैठे हुए हैं।’

एक अन्य सवाल के जवाब में रोहित सरदाना का कहना था, ‘आजतक देश का इकलौता न्यूज चैनल है जो न्यूज चैनल के तौर पर आईएफसीएन (International Fact Checking Network) सर्टिफाइड फैक्ट चेकर है। हम एक महीने में सामान्यत: पांच सौ स्टोरीज का फैक्ट चेक करते हैं। कभी इन स्टोरीज की संख्या छह सौ भी हो जाती है तो कभी चार सौ भी रह जाती हैं। अमूमन हम पांच सौ स्टोरीज का फैक्ट चेक करते हैं, जिसमें हम लोगों को यह बताने की कोशिश करते हैं कि उन्हें वॉट्सऐप, फेसबुक अथवा मैसेज के जरिये जो पोस्ट बार-बार भेजी जा रही है, यह झूठी कहानी है अथवा सच्ची और यदि झूठी है तो इसका सच यह है। इसके लिए अब आपको ऐसे मॉडल तैयार करने पड़ेंगे, जो केवल फैक्ट चेकिंग ही करते हों और फैक्ट चेकिंग के नाम पर वे शार्प शूटर न बन जाएं, जैसे कि कुछ बन चुके हैं। ऐसे फैक्ट चेकर एकतरफा फैक्ट चेकिंग भी कर देंगे और उसके बाद उस पर निशाना साधना भी शुरू कर देंगे। ऐसे में वहां पर भी एक लगाम लगाने की आवश्यकता आ गई है। हम अपने लेवल पर फैक्ट चेक करते हैं, लेकिन उसकी एक लिमिट है। ऐसे में हमें इस बारे में चिंता करने की जरूरत है कि कैसे फेक न्यूज को कम किया जाए अथवा उसे रोका जाए।’

पैनल डिस्कशन के दौरान आखिर जब डॉ. भुवन लाल ने पूछा कि देश में किसी भी मुद्दे पर कई बार तमाम न्यूज चैनल्स सेलिब्रिटीज की राय दिखाने लग जाते हैं। क्या वे सभी सेलिब्रिटीज, जिनमें फिल्मी सेलिब्रिटीज भी शामिल हैं, क्या रातोंरात इतने एकसपर्ट हो जाते हैं कि वह किसी भी मुद्दे पर अपनी राय दे सकें। कई बार ये राय गलत होती है और लोगों पर ये राय एक तरह से थोप दी जाती है, क्या यह सही है?  के जवाब में रोहित सरदाना का कहना था कि हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहां पर देश के बड़े-बड़े पत्रकार भी शाम को खुशी से ट्वीट कर बताते हैं कि मैं टैक्सी में था और मैंने टैक्सी ड्राइवर से बात की और उसकी राय जानी। इसके आधार पर वह तय कर देता है कि अब मैं देश के ओपिनियन को इस दिशा में लेकर जाना चाहता हूं। यदि जब सभी राय दे सकते हैं तो फिर सबकी राय ली जाए, फिर फिल्म स्टार अपनी राय दे रहे हैं तो इसमें उसमें उनकी क्या गलती है कि वह फिल्म स्टार हैं। उन्हें दोष क्यों दिया जाए।

नीचे दिए गए विडियो पर क्लिक कर आप इस पूरी चर्चा को देख सकते हैं-

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राष्ट्रपति की पत्रकार से हुई तीखी बहस, चैनल की ईमानदारी पर उठाए सवाल

राष्ट्रपति ने पत्रकार पर गलत बयानबाजी और फर्जी रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया और उनके टीवी नेटवर्क की ईमानदारी पर सवाल खड़े कर दिए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 26 February, 2020
trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार मीडिया को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने कई मौको पर ‘सीएनएन’ न्यूज चैनल की निंदा करते हुए उस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। इस बार फिर उन्होंने चैनल को आड़े हाथों लिया है और उसकी ईमानदारी पर सवाल खड़े किए हैं।

दरअसल ट्रंप 24 फरवरी को दो दिन के दौरे पर भारत पहुंचे थे। मंगलवार शाम दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप और सीएनएन के पत्रकार जिम एकोस्टा के बीच तीखी बहस हो गई। इस दौरान ट्रंप ने सीएनएन के पत्रकार पर गलत बयानबाजी और फर्जी रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया और टीवी नेटवर्क सीएनएन की ईमानदारी पर सवाल खड़े कर दिए।

इस पर एकोस्टा ने कहा, ‘मुझे लगता है कि सच बताने में हमारा रिकॉर्ड आपसे कहीं बेहतर है।’ इसके बाद राष्ट्रपति ने कहा, ‘शायद ब्रॉडकास्टिंग के इतिहास में आपका (सीएनएन) रिकॉर्ड सबसे खराब है।’

एकोस्टा ने ट्रंप से पूछा कि क्या वह आगामी राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को नकारने का संकल्प लेंगे। सीएनएन पत्रकार ने नये कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक की नियुक्ति के फैसले पर भी सवाल उठाया, जिन्हें किसी तरह का खुफिया अनुभव नहीं है।

बता दें कि  जिम एकोस्टा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 2020 के चुनाव में रूस की मदद नहीं करने के बारे में राष्ट्रपति ट्रंप की ईमानदारी को लेकर सवाल किया था। उन्होंने पूछा, ‘क्या वह आगामी राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को नकारने का संकल्प लेंगे।’

जवाब में ट्रंप ने कहा कि वह किसी देश से कोई मदद नहीं चाहते और उन्हें किसी देश से मदद नहीं मिली है। इसके बाद ट्रंप ने सीएनएन द्वारा पिछले दिनों एक गलत सूचना जारी करने पर खेद जताये जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि आपके 'वंडरफूल' नेटवर्क सीएनएन ने इस तथ्य के लिए माफी मांगी है, जो सच नहीं थीं? मुझे बताओ, क्या कल उन्होंने माफी नहीं मांगी थी?’

इस पर एकोस्टा ने इस पर कहा, 'राष्ट्रपति महोदय, मुझे लगता है कि हमारा सच बताने का रिकॉर्ड कई बार आपके रिकॉर्ड से काफी बेहतर है।' इसके बाद बहस बढ़ने लगी और ट्रंप ने कहा, 'मैं आपको आपके रिकॉर्ड के बारे में बताता हूं। आपका रिकॉर्ड इतना खराब है कि आपको उस पर शर्म आनी चाहिए।'

जवबा में एकोस्टा ने कहा, ‘मुझे किसी बात पर शर्म नहीं आती और हमारा संस्थान भी शर्मिंदा नहीं है।’ इसके बाद राष्ट्रपति ने सीएनएन पर प्रसारण के मामले में इतिहास में सबसे खराब रिकॉर्ड होने का भी आरोप लगाया।

गौरतलब है कि एकोस्टा और ट्रंप के बीच पहले भी कई बार कहासुनी हो चुकी है। इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद 2017 में ट्रंप का अपने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिम एकोस्टा से विवाद हुआ था। तब भी ट्रंप ने उनके न्यूज नेटवर्क को ‘फर्जी न्यूज’ बताया था। साथ ही कहा था कि आपका चैनल बहुत खराब है। इसके जवाब में रिपोर्टर ने कहा था कि आप हमारे न्यूज चैनल के बारे में गलत बातें कह रहे हैं। क्या मैं आपसे एक सवाल पूछ सकता हूं? इस पर ट्रंप ने कहा था कि अशिष्ट न बनें। मैं आपको सवाल पूछने की अनुमति नहीं दूंगा। आपका संस्थान फर्जी न्यूज दिखाता है।

तब इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई बहस के बाद एकोस्टा के प्रेस पास को निलंबित कर दिया गया था और उनके व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। ट्रंप प्रशासन ने प्रेस पास पर पाबंदी जारी रखी, लेकिन टीवी नेटवर्क ने इस मामले में व्हाइट हाउस पर मुकदमा दर्ज किया जिसके बाद एक जज ने उनके पास को बहाल कर दिया था।

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वॉल्ट डिज्नी ने इन्हें बनाया अपना नया CEO

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आइगर का कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट 31 दिसंबर 2021 को खत्म होगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 26 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 26 February, 2020
disney

वॉल्ट डिज्नी कंपनी (The Walt Disney Company) ने बॉब चापेक को अपना नया सीईओ नामित किया है। 60 वर्षीय चापेक, जो 27 वर्षों से कंपनी के साथ हैं और वे अब तक डिज्नी पार्क, एक्सपीरियंस एंड प्रॉडक्ट्स के चेयरमैन थे। बॉब चापेक पूर्व सीईओ बॉब आइगर की जगह लेंगे, जो फिलहाल डिज्नी के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आइगर का कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट 31 दिसंबर 2021 को खत्म होगा। तब तक यानी अपने शेष दो वर्षों में वे कंपनी के क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारियों को संभालेंगे।

चापेक ने 1993 में डिज्नी से ही अपना करियर शुरू किया था, तब  उन्होंने होम एंटरटेनमेंट यूनिट के साथ काम किया था। उन्होंने ‘डिज्नी  वॉल्ट’ में भी अपना योगदान दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चैपेक ने डिज्नी के लिए नए डिजिटल डिस्ट्रूब्यूशन डील जैसे कि एप्पल के आईट्यून्स को लेकर भी करार किया है।

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मध्य प्रदेश सरकार ने इस संपादक के खिलाफ लिया कड़ा एक्शन

मध्य प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, सरकारी पत्रिका ‘मध्य प्रदेश संदेश’ के संपादक पर कड़ी कार्रवाई की गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 25 February, 2020
Last Modified:
Tuesday, 25 February, 2020
Editor

मध्य प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, सरकारी पत्रिका ‘मध्य प्रदेश संदेश’ के संपादक पर कड़ी कार्रवाई की गई है। नाथूराम गोडसे से संबंधित एक आर्टिकल को लेकर संपादक मनोज खरे को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। बता दें कि ‘मध्य प्रदेश संदेश’ पत्रिका सरकार के जनसंपर्क निदेशालय (डीपीआर) के अंतर्गत प्रकाशित होती है।

बताया जा रहा है कि संपादक मनोज खरे के खिलाफ यह कार्रवाई 22 फरवरी को जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के निर्देश पर की गई है। जिस आर्टिकल को लेकर संपादक को पद से हटाया गया है कि उसका शीर्षक था 'महात्मा जिंदा हैं'।

‘हिन्दुस्तान’ न्यूज पोर्टल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस आर्टिकल में नाथूराम गोडसे की व्यथा और चरित्र को समझाने की कोशिश की गई। इस लेख में बताया गया कि 30 जनवरी, 1948 की शाम नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या कैसे की गई थी।

लेख में कथित तौर पर गोडसे के पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताया गया था। इसके साथ-साथ गोडसे के हवाले से कहा गया था कि वह मानता था कि गांधी जी कुछ मामलों में सही थे जबकि कुछ मामलों में अनुचित थे।

इसके अलावा कथित तौर पर आर्टिकल में नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे द्वारा लिखी गई पुस्तक 'मैंने गांधी को क्यों मारा' के कुछ अंश का उदाहरण देते कई बातें कहीं गई थीं। साथ में आर्टिकल में यह भी कहा गया था कि महात्मा गांधी की महान आत्मा आज भी देश के लोगों में जीवित है। महात्मा गांधी ने केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ ही नहीं बल्कि गरीबी, अशिक्षा और बुराइयों जैसी छुआछूत के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी थी।

लेख में कथित तौर पर यह बात भी कही गई थी कि अगर लोगों को लगता है कि गांधी की मृत्यु 30 जनवरी, 1948 को हुई या फिर गोडसे की  मृत्यु 15 नवंबर, 1949 को हुई, तो ऐसा नहीं है। न तो गोडसे की मृत्यु हुई है और न ही गांधी की। दोनों हमारे मन में विद्यमान हैं। हमें यह तय करना होगा कि हमें किसकी विचारधारा को आगे ले जाना है।

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