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कश्मीर प्रेस क्लब विवाद में आया नया मोड़, सरकार ने उठाया ये कदम
कश्मीर प्रेस क्लब में मैनेजमेंट को लेकर दो गुटों में जारी लड़ाई ने अब एक नया मोड़ ले लिया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
कश्मीर प्रेस क्लब में मैनेजमेंट को लेकर दो गुटों में जारी लड़ाई ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। दरअसल, अब जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को कश्मीर प्रेस क्लब के लिए आवंटित परिसर को ही वापस ले लिया है। घाटी स्थित पत्रकारों की सबसे बड़ी संस्था में पिछले हफ्ते की गुटबाजी के मद्देनजर प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा, ‘पत्रकारों के विभिन्न समूहों के बीच असहमति और अप्रिय घटनाओं के बीच यह फैसला किया गया है कि श्रीनगर के पोलो व्यू स्थित कश्मीर प्रेस क्लब को आवंटित परिसर का आवंटन रद्द करके परिसर की भूमि और इस पर निर्मित भवन को एस्टेट विभाग को वापस कर दिया जाए।’
दरअसल, कश्मीर प्रेस क्लब को शनिवार को तब अनअपेक्षित गतिविधियों का सामना करना पड़ा था जब कुछ पत्रकार पुलिस के साथ परिसर में पहुंचे और इसका ‘नया प्रबंधन’ होने का दावा किया। प्रशासन की ओर से एक दिन पहले इसके पंजीकरण को स्थगित करने के बाद इन पत्रकारों ने नए प्रबंधन का दावा किया। पत्रकारों ने मीडिया को बयान जारी किया कि ‘कुछ पत्रकार फोरम’ ने उन्हें नया पदाधिकारी चयनित किया है, लेकिन घाटी के नौ पत्रकार संघों ने इस दावे का विरोध किया था।
वहीं, कश्मीर प्रेस क्लब (Kashmir Press Club) के कथित नए प्रबंधन के एक सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद इसका हवाला देते हुए कश्मीर प्रेस क्लब परिसर को रविवार को बंद कर दिया गया।
नए प्रबंधन से जुड़े सलीम पंडित ने कहा, ‘हमें आपका, मेरा, सबका समर्थन हासिल है। चुनाव में देरी होने के चलते हमने प्रेस क्लब के रोज के कामकाज को अपने हाथ में ले लिया है। हमें समय दीजिए और हम क्लब के लिए सब कुछ करेंगे। आप इसका हिस्सा हैं। बताइए हैं या नहीं? मैं नहीं हूं।’
वहीं, कश्मीर प्रेस क्लब के मुख्य द्वार पर लगे एक नोटिस में कहा गया कि क्लब के एक सदस्य के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण इसे बंद किया गया है। सभी सदस्यों को एक ई-मेल भेजकर अगले एक हफ्ते तक पोलो ग्राउंड एरिया के पास स्थित इस क्लब में नहीं आने की सलाह भी दी गई है।
क्लब के प्रबंधक सजाद अहमद ने कहा, ‘क्लब के चौकीदार ने बताया कि अंतरिम निकाय के दो सदस्यों ने उसे क्लब के द्वार बंद करने और किसी को अंदर आने की अनुमति न देने का निर्देश दिया है, क्योंकि एक सदस्य संक्रमित पाया गया है।’
इस बीच तीखी आलोचनाओं का शिकार हो रहे अंतरिम निकाय के एक ई-मेल में दावा किया गया है कि उसके ई-मेल अकाउंट को हैक कर लिया गया था। उसने यह भी कहा कि हैकिंग के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा रही है।
इस सरकार के इस फैसले से पहले, 'एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया' और अन्य पत्रकार संगठनों ने क्लब पर 'जबरन नियंत्रण' हासिल किए जाने की निंदा की। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर में प्रेस की आजादी को दबाने की लगातार जारी कोशिश का हिस्सा बताया। साथ ही इसे पुलिस की मदद से केंद्र शासित प्रदेश में प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटने की प्रवृत्ति करार दिया।
गिल्ड ने जारी बयान में कहा कि सशस्त्र पुलिसकर्मियों की मदद से पत्रकारों के एक समूह ने शनिवार को जिस प्रकार घाटी के सबसे बड़े पत्रकार संघ केपीसी के कार्यालय और प्रबंधन पर जबरन कब्जा किया, वह उसे देखकर वह स्तब्ध है।
गिल्ड ने कहा कि इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस किसी वारंट या कागजी कार्रवाई के बिना परिसर में घुसी और इस तरह इस जबरन नियंत्रण की कार्रवाई में उसकी शर्मनाक मिलीभगत थी, जिसके तहत एक समूह के लोग क्लब के स्वयंभू प्रबंधक बन गए हैं।
साथ ही गिल्ड ने कहा कि वह क्लब पर नियंत्रण से एक दिन पहले रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज द्वारा कश्मीर प्रेस क्लब के पंजीकरण को स्थगित करने के मनमाने आदेश से भी उतना ही चिंतित है।
उसने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे एक परिवार को दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर केवल पोस्ट करने के कारण युवा पत्रकार सजाद गुल को गिरफ्तार किए जाने का भी जिक्र किया।
गिल्ड ने क्लब में 'जबरन नियंत्रण' से पहले की यथास्थिति तत्काल बहाल किए जाने की मांग की और नए प्रबंधन निकाय और कार्यकारी परिषद की नियुक्ति के लिए चुनाव कराए जाने का आह्वान किया।
बयान में कहा गया, ‘गिल्ड इस बात की स्वतंत्र जांच कराए जाने का अनुरोध करता है कि सशस्त्र बल क्लब परिसर में कैसे घुसे।'
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