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जानें, क्यों के.जी.सुरेश बोले कि प्रशांत कनौजिया को पत्रकार मानना ही गलत
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में प्रशांत कनौजिया को किया गया है गिरफ्तार
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार ‘द वायर’ के पूर्व पत्रकार प्रशांत कनौजिया के समर्थन में कई पत्रकारों सहित ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया’ भी मैदान में उतर आया है। राजधानी दिल्ली में इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन भी हुआ। वहीं, कुछ पत्रकार ऐसे भी हैं, जो मानते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर चरित्र हनन की इजाजत नहीं दी जा सकती और दोषी को सजा मिलनी ही चाहिए। उन्हीं में से एक हैं वरिष्ठ पत्रकार, प्रोफ़ेसर एवं भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के पूर्व डीजी केजी सुरेश।
कनौजिया खुद को IIMC का छात्र कहते हैं, इस लिहाज से सुरेश उन्हें बहुत अच्छी तरह से पहचानते हैं। हालांकि, दोनों में आमने-सामने कभी मुलाकात नहीं हुई। केजी सुरेश का कहना है, ‘पत्रकार का मुखौटा पहनकर कोई असामाजिक तत्व का काम नहीं कर सकता। आप कनौजिया का सोशल मीडिया अकाउंट खंगाल लीजिये, आपको पता चल जायेगा कि वह किस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। किसी का विरोध करना या किसी के विचारों पर असहमति दर्शाना समझ आता है, लेकिन अभद्र भाषा को आप कैसे जायज ठहराएंगे?’
सुरेश के मुताबिक, ‘गाली-गलौच करना, अभद्रता करना कनौजिया की फितरत है। IIMC में मेरे कार्यकाल से पहले इन्होंने एक वरिष्ठ प्रोफ़ेसर के साथ जातिगत आधार पर गाली गलौच की थी, जिसके चलते इन्हें निलंबित कर दिया गया था।’ सुरेश का आरोप है कि प्रशांत कनौजिया उनकी छवि को भी प्रभावित करने के अनगिनत प्रयास कर चुके हैं।
समाचार4मीडिया से बातचीत में केजी सुरेश ने कहा, ‘कनौजिया न तो मेरे स्टूडेंट रहे और न ही मेरी इनसे व्यक्तिगत मुलाकात हुई, इसके बावजूद संस्थान के मुद्दों को लेकर यह तीन साल तक मुझे निशाना बनाते रहे। मेरे लिए स्तरहीन टिप्पणियाँ भी की गईं, अब ये कौनसी पत्रकारिता है, मुझे समझ नहीं आता। मैंने जितनी पत्रकारिता सीखी और सिखाई है, उसमें अभिव्यक्ति की आजादी के साथ-साथ जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाया गया है, लेकिन कनौजिया का इससे कोई सरोकार नहीं।’
एक घटना का जिक्र करते हुए सुरेश ने बताया कि कुछ वक़्त पहले वह अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने गए थे। तब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना एक फोटो शेयर किया था, जिसे प्रशांत कनौजिया ने छेड़छाड़ करके इस तरह पेश किया जैसे वह संघ की वेशभूषा में हैं। इसके अलावा उनके फोटो पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी की गईं। केजी सुरेश कनौजिया के समर्थन में आवाज़ बुलंद करने वालों से भी खफा हैं। वह सवाल करते हैं कि जब कनौजिया अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर स्तरहीन भाषा का प्रयोग कर रहे थे, उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे, तब किसी ने इसका विरोध क्यों नहीं किया? केजी सुरेश ने कहा, ‘पत्रकारिता की कुछ मर्यादाएं और कुछ मानक हैं, मैंने भी पत्रकारिता की है। मैं किसी के पक्ष या विपक्ष में हो सकता हूं, लेकिन मेरी भाषा आपको वैसी ही मिलेगी जैसी एक पत्रकार की होनी चाहिए।’
प्रशांत कनौजिया की गिरफ़्तारी के विषय में सुरेश ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहते, लेकिन वह कनौजिया को मिल रहे समर्थन को लेकर हैरत में ज़रूर हैं। वह कहते हैं, ‘कनौजिया मुझे इस कदर ट्रोल करते थे कि मुझे उन्हें सोशल मीडिया पर ब्लॉक करना पड़ा। एक ऐसा व्यक्ति जो स्तरहीन टिप्पणियाँ करता है, गाली-गलौच करता है, जात-पात के नाम पर लोगों को उकसाता है, वह पत्रकार कैसे हो सकता है? जो लोग आज उसका समर्थन कर रहे हैं, वो कल कहाँ थे? क्या कल उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं थी’?
केजी सुरेश का यह भी कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज़ उठानी पड़ेगी, जो पत्रकार का मुखौटा पहनकर असामाजिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ज़रूरी हुआ तो वो सारे सबूतों के साथ प्रशांत कनौजिया के खिलाफ अदालत में भी पेश होने के लिए तैयार हैं।
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