CCI का Cartel Order बना Media Agencies के लिए नई मुसीबत, जांच में बढ़ी मुश्किलें

भारत की मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में CCI की जांच के बीच TAI और तीन Debenture Trustees पर आए ताजा Cartel Order से Media Agencies की चिंता बढ़ गई है।

Last Modified:
Friday, 04 September, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर ।। 

भारत की मीडिया व ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी CCI की चल रही जांच के बीच Trustees’ Association of India (TAI) और तीन Debenture Trustees के खिलाफ आया ताजा Cartel Order अब मीडिया एजेंसीज के लिए भी चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इस मामले में CCI ने TAI, IDBI Trusteeship Services, Axis Trustee Services और SBI CAP Trustee Company को सेवाओं की फीस तय करने और उस तय व्यवस्था को लागू कराने के मामले में दोषी पाया है।

हालांकि, CCI ने इस मामले में कोई Monetary Penalty यानी आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया है। रेगुलेटर ने संबंधित पक्षों की परिस्थितियों और कुछ Mitigating Circumstances को देखते हुए उन्हें ऐसा आचरण बंद करने का आदेश दिया है। लेकिन इस आदेश का असर सिर्फ Financial Sector तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि CCI ने साफ कर दिया है कि किसी इंडस्ट्री एसोसिएशन का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच कीमतों को लेकर सामूहिक फैसला लेने के लिए किया जाता है, तो वह Competition Law से बचने की ढाल नहीं बन सकता।

यही बात भारत की मीडिया एजेंसीज के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में Commission, Rebate, Discount और दूसरे Commercial Terms को लेकर पहले से CCI की जांच चल रही है। ऐसे में TAI मामले का फैसला यह संकेत देता है कि रेगुलेटर किसी Industry Practice को Cartel का सबूत मानने के लिए किन चीजों पर ध्यान दे सकता है।

सिर्फ बातचीत नहीं, उसके बाद क्या हुआ यह भी अहम

2 सितंबर को जारी CCI के आदेश में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। रेगुलेटर ने सिर्फ यह नहीं देखा कि अलग-अलग कंपनियों ने Pricing को लेकर आपस में बातचीत की थी या नहीं। उसने यह भी देखा कि बातचीत के बाद उस व्यवस्था को लागू कैसे किया गया।

CCI के मुताबिक, मार्च 2021 में TAI के सदस्यों ने Listed Debt Securities से जुड़ी सेवाओं के लिए एक Benchmark Pricing Structure पर सहमति बनाई थी। जांच में पाया गया कि यह Benchmark असल में एक तरह का Minimum Price या Floor बन गया था। Association की तरफ से यह सुनिश्चित करने की कोशिश भी की गई कि कोई सदस्य इससे कम कीमत पर अपनी सेवा न दे।

मामला तब और गंभीर हो गया जब CCI को ऐसे सबूत मिले कि TAI ने केवल Benchmark तय करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके पालन को लेकर भी हस्तक्षेप किया।

एक मामले में MITCON ने HUDCO के एक Mandate के लिए कम फीस का Quote दिया था। आरोप के मुताबिक, TAI ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और Trustee ने अपनी कम बोली वापस लेकर उससे ज्यादा कीमत का नया Quote दिया। CCI ने इसे इस बात के सबूत के तौर पर देखा कि Benchmark सिर्फ एक Recommendation नहीं था, बल्कि उसे लागू भी कराया जा रहा था।

यही फर्क मीडिया Industry की जांच में भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

मीडिया एजेंसीज की जांच में क्यों महत्वपूर्ण है TAI का मामला?

ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में CCI पहले से ही बड़ी मीडिया एजेंसीज के बीच कथित Coordination की जांच कर रहा है। मार्च 2025 में CCI ने कई Agency Offices और Industry Bodies पर कार्रवाई की थी। इनमें Advertising एजेंसीज Association of India यानी AAAI, Indian Society of Advertisers यानी ISA और Indian Broadcasting and Digital Foundation यानी IBDF भी शामिल थे।

यह जांच CCI के Leniency Framework के तहत मिली जानकारियों के बाद शुरू हुई थी। इस मामले में Dentsu की ओर से भी disclosures किए जाने की बात सामने आई थी।

जांच के दौरान CCI ने Senior Agency Executives के बीच हुई WhatsApp बातचीत और Meetings की भी पड़ताल की। शुरुआती जांच में आरोप लगाया गया कि कुछ प्रतिस्पर्धी एजेंसीज ने Clients को दिए जाने वाले जवाब, Pitches और Pricing को लेकर आपस में Coordination किया और एक-दूसरे से कम कीमत पर Quote नहीं करने जैसी व्यवस्था पर सहमति बनाई।

जांच में Rebates और ऐसे Commercial Arrangements को लेकर भी बातचीत का जिक्र किया गया, जिनका पालन नहीं करने वाली एजेंसीज पर दबाव डालने की बात सामने आई थी।

ऐसे में TAI का फैसला मीडिया एजेंसीज के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि CCI अब यह देखने पर ज्यादा ध्यान दे सकता है कि एजेंसीज ने सिर्फ आपस में बातचीत की थी या उस बातचीत के बाद वास्तव में अपने Commercial Decisions को एक-दूसरे के हिसाब से बदल दिया था।

WhatsApp Messages बन सकते हैं बड़ा सबूत

मीडिया Cartel Investigation में Digital Communication भी एक अहम मुद्दा है। CCI की शुरुआती सामग्री में प्रतिस्पर्धी एजेंसीज के Senior Executives के बीच WhatsApp Group में हुई बातचीत की जांच का भी जिक्र है।

बताया गया कि इन बातचीत में Pitches, Client Responses और Commercial Terms जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। CCI ने शुरुआती तौर पर इसे Competing Advertising एजेंसीज के बीच संभावित "Alignment" से जोड़कर देखा।

Cartel की जांच में यह अंतर काफी महत्वपूर्ण है। किसी इंडस्ट्री एसोसिएशन की तरफ से जारी कोई सामान्य Guideline यह कहकर बचाई जा सकती है कि वह सिर्फ Industry Recommendation थी। लेकिन अगर WhatsApp बातचीत में प्रतिस्पर्धी कंपनियां यह तय करती दिखाई दें कि वे कितना Charge करेंगी, कितना Discount देंगी या किसी खास Client के सामने किस तरह का Commercial Proposal रखेंगी, तो इसे Coordination के सबूत के तौर पर देखा जा सकता है।

एक Competition Lawyer के मुताबिक, अब असली सवाल यह होगा कि बातचीत में सिर्फ अलग-अलग Businesses ने अपनी राय साझा की थी या बातचीत के बाद कोई Agreement हुआ और फिर उसके मुताबिक व्यवहार भी किया गया।

अगर Agreement और उसके बाद उसी के अनुरूप Conduct साबित हो जाता है, तो "यह तो Industry Practice थी" वाला बचाव कमजोर पड़ सकता है।

‘Industry Practice’ का बचाव भी मुश्किल हो सकता है

TAI मामले से मीडिया Industry के लिए सबसे बड़ा सबक यही निकलता है। Trustees ने अपने Pricing Structure को बढ़ी हुई रेगुलेटरy Responsibilities और SEBI के साथ उनकी भूमिका से जोड़कर देखा था। लेकिन CCI ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया कि रेगुलेटरy Oversight की वजह से प्रतिस्पर्धी Trustees को मिलकर अपनी कीमत तय करने की अनुमति मिल जाती है।

इसका असर ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में भी पड़ सकता है। मीडिया एजेंसीज यह तर्क दे सकती हैं कि कुछ Common Commercial Practices एजेंसीज, Advertisers, Broadcasters और इंडस्ट्री एसोसिएशनs के बीच चर्चा से विकसित हुई थीं।

लेकिन CCI के सामने असली सवाल इससे अलग हो सकता है।

क्या Industry Body ने एजेंसीज को आपस में Coordination करने के लिए कहा था, या एजेंसीज ने खुद यह तय किया था कि वे एक-दूसरे के साथ Coordination करेंगी?

अगर दूसरी स्थिति साबित होती है, तो किसी Industry Body या रेगुलेटरy Environment की मौजूदगी उन्हें Competition Law से सुरक्षा नहीं दे सकती।

Price Fixing से ज्यादा गंभीर हो सकता है Enforcement

TAI Order का शायद सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ Benchmark Pricing नहीं, बल्कि उसके पालन को लेकर हुई Monitoring और Enforcement है।

CCI ने पाया कि TAI ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि उसके Members Benchmark का पालन करें। जब किसी Member ने तय सीमा से कम Quote किया, तो हस्तक्षेप भी किया गया।

मीडिया Industry की जांच में भी ऐसी ही बातें सामने आने का दावा किया गया है। CCI के दस्तावेजों में कथित तौर पर ऐसे प्रयासों का जिक्र है, जिनके तहत तय Commercial Positions का पालन नहीं करने वाली एजेंसीज को Business से दूर रखने या उन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।

अगर CCI इस तरह के Conduct को साबित कर देता है, तो TAI मामले और मीडिया Cartel Investigation के बीच समानता और मजबूत हो सकती है।

Experts के मुताबिक, सिर्फ Price Fixing का आरोप एक बात है, लेकिन अगर यह भी साबित हो जाए कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने मिलकर उस कंपनी को रोकने की कोशिश की जो तय व्यवस्था से हट रही थी, तो मामला ज्यादा गंभीर हो जाता है।

इससे यह संकेत मिल सकता है कि मकसद सिर्फ Industry Consensus बनाना नहीं था, बल्कि पूरे Market के व्यवहार को बदलना था।

Smaller मीडिया एजेंसीज पर भी पड़ सकता है असर

इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू Smaller और Independent मीडिया एजेंसीज से जुड़ा है।

मीडिया Cartel Investigation में बड़ी एजेंसीज के अलावा ऐसी एजेंसीज से जुड़े कथित Conduct पर भी ध्यान दिया गया है जो सबसे बड़े Networks का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में TAI-HUDCO मामले की तरह यह भी देखा जा सकता है कि क्या बड़ी एजेंसीज ने छोटी या Independent एजेंसीज को कम कीमत पर Commercial Offer देने से रोकने की कोशिश की।

अगर कोई छोटी Agency किसी Client को ज्यादा Aggressive Commercial Proposal देती है और बड़ी एजेंसीज मिलकर उसे मीडिया Inventory या Clients तक पहुंचने से रोकने की कोशिश करती हैं, तो CCI इसे Competition को Restrict करने के प्रयास के रूप में देख सकता है।

इस स्थिति में मामला सिर्फ Price Coordination तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Market Competition को प्रभावित करने का सवाल भी उठ सकता है।

सिर्फ कंपनियां ही नहीं, Executives पर भी नजर

मीडिया एजेंसीज के लिए TAI Order का एक और महत्वपूर्ण पहलू Individual Executives की जिम्मेदारी से जुड़ा है।

CCI ने इस मामले में कुछ Individuals को Competition Act की Section 48 के तहत जिम्मेदार माना है, जहां उनके Anti-Competitive Conduct में शामिल होने और उनकी भूमिका स्थापित हुई।

इसका मतलब यह है कि अगर मीडिया Cartel Investigation में भी Cartel Conduct साबित होता है, तो जांच सिर्फ Agency की Corporate Entity तक सीमित नहीं रह सकती।

Investigators यह भी देख सकते हैं कि बातचीत किसने शुरू की, Commercial Position को किसने मंजूरी दी, Competitors के साथ किसने बातचीत की और किसी Agreement को लागू कराने में किसकी भूमिका रही।

इस वजह से Senior Agency Executives के लिए अनौपचारिक बातचीत भी भविष्य में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।

CCI ने जुर्माना नहीं लगाया, लेकिन मीडिया एजेंसीज को राहत मानना ठीक नहीं

TAI मामले में CCI ने Monetary Penalty नहीं लगाई है। पहली नजर में यह मीडिया एजेंसीज के लिए राहत जैसी बात लग सकती है, लेकिन इसे भविष्य के मामले का संकेत मानना सही नहीं होगा।

CCI ने TAI मामले में Penalty नहीं लगाने के पीछे कई Mitigating Circumstances का उल्लेख किया। इनमें संबंधित अवधि में Association की Income नहीं होना, कुछ Trustees की ओर से Benchmark से कम Fees लेना और जांच में Cooperation करना शामिल था।

किसी बड़े Advertising Network का मामला इससे काफी अलग हो सकता है। अगर CCI भविष्य में किसी मीडिया Cartel को लंबे समय तक चलने वाला और बड़ी Revenue से जुड़ा Coordination साबित करता है, तो परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

इसके अलावा Financial Penalty ही एकमात्र जोखिम नहीं है। Cartel साबित होने पर एजेंसीज को Reputational Damage, प्रभावित Clients की तरफ से Litigation, Commercial Contracts की जांच और Commission, Rebates तथा मीडिया Buying Arrangements के तरीके में बड़े बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।

CCI का संदेश मीडिया Industry के लिए भी साफ

TAI का यह आदेश भारत की Advertising और मीडिया Industry के लिए एक बड़ा संकेत माना जा सकता है। किसी इंडस्ट्री एसोसिएशन का Meeting Room कंपनियों को Competition Law से Immunity नहीं दे सकता।

अगर एजेंसीज अपने Prices, Discounts और Commercial Strategies स्वतंत्र रूप से तय करती हैं, तो Competition बनी रहती है। लेकिन अगर प्रतिस्पर्धी एजेंसीज मिलकर इन Terms को तय करती हैं और फिर किसी Association, WhatsApp Group, Broadcaster Relationship या किसी दूसरे माध्यम से यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती हैं कि सभी उसी व्यवस्था का पालन करें, तो Conduct की कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।

इसलिए मीडिया एजेंसीज के लिए CCI की मौजूदा जांच का अगला चरण काफी अहम होने वाला है। रेगुलेटर के लिए सिर्फ यह साबित करना काफी नहीं होगा कि एजेंसीज के बीच बातचीत हुई थी। उसे यह भी स्थापित करना होगा कि कोई Agreement हुआ था या नहीं, उसमें कौन-कौन शामिल थे, उसे किस तरह लागू किया गया और उसका Competition पर क्या असर पड़ा।

अब मीडिया Industry के सामने असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि एजेंसीज ने Pricing पर चर्चा की थी या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या कोई ऐसा सबूत है जिससे यह साबित हो सके कि एजेंसीज ने कीमत पर आपस में सहमति बनाई और फिर यह भी सुनिश्चित किया कि बाकी खिलाड़ी उसी नियम के मुताबिक काम करें।

अगर ऐसा साबित होता है, तो TAI मामले में CCI की ओर से अपनाया गया दृष्टिकोण मीडिया Cartel Investigation के लिए बेहद महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

अगर आप चाहें, तो इसी खबर के लिए मैं और ज्यादा दमदार, एक्सक्लूसिव और न्यूज़ पोर्टल वाली 8-10 हेडलाइन भी बना सकता हूं।

 

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सनी देओल की फिल्म ‘Suryaa’ के प्रोमो पर IMA को आपत्ति, MIB से की समीक्षा की मांग

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अभिनेता सनी देओल और संजय दत्त की फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ के प्रचार वीडियो पर आपत्ति जताई है।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अभिनेता सनी देओल और संजय दत्त की फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ के प्रचार वीडियो पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि फिल्म का प्रोमो चिकित्सा पेशे में भ्रष्टाचार को व्यापक रूप में दिखाता है और डॉक्टरों व अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा को इस तरह पेश करता है, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। IMA ने इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से प्रचार सामग्री की समीक्षा करने की मांग की है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे. नायक ने 22 अक्टूबर को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म की प्रचार सामग्री की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। एसोसिएशन ने फिल्म निर्माताओं से जरूरी सुधार करने को भी कहा है। साथ ही, उसने कहा है कि लागू कानूनों के तहत जरूरत पड़ने पर प्रतिबंध या दूसरी उचित कार्रवाई पर विचार किया जाए।

यह पत्र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष को भी भेजा गया है।

डॉक्टरों की छवि को लेकर जताई चिंता

IMA का कहना है कि फिल्म में कुछ लोगों के भ्रष्टाचार या गलत कामों को इस तरह दिखाए जाने की आशंका है, जिससे पूरे चिकित्सा समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है। एसोसिएशन ने कहा कि अगर कोई डॉक्टर गलत काम करता है, तो उसके खिलाफ जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सजा भी मिलनी चाहिए। लेकिन कुछ लोगों के गलत कामों के लिए पूरे डॉक्टर समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा पर भी आपत्ति

एसोसिएशन ने फिल्म के उन दृश्यों पर भी चिंता जताई है, जिनमें डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के कर्मचारियों पर शारीरिक हमला दिखाया गया है। IMA के मुताबिक, अगर ऐसी हिंसा को बहादुरी या जायज कार्रवाई के रूप में पेश किया जाता है, तो इससे स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को सामान्य मानने की सोच बढ़ सकती है।

IMA ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पहले से ही चिंता का विषय है। ऐसे में फिल्मों और उनकी प्रचार सामग्री में हिंसा को सही ठहराने वाले चित्रण से स्थिति और मुश्किल हो सकती है।

मरीजों और डॉक्टरों के बीच भरोसे पर असर की आशंका

IMA ने अपने पत्र में यह भी आशंका जताई कि इस तरह का चित्रण मरीजों और डॉक्टरों के बीच अविश्वास बढ़ा सकता है। इलाज के दौरान दोनों के बीच भरोसा और सहयोग जरूरी होता है। एसोसिएशन के अनुसार, चिकित्सा पेशे की नकारात्मक छवि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों का मनोबल भी प्रभावित कर सकती है और युवाओं को इस पेशे में आने से हतोत्साहित कर सकती है।

हालांकि, IMA ने रचनात्मक स्वतंत्रता के महत्व को स्वीकार किया है। उसका कहना है कि फिल्मों और दूसरी रचनात्मक सामग्री को बनाने की आजादी जरूरी है, लेकिन जहां स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं पर लोगों के भरोसे का सवाल हो, वहां इस स्वतंत्रता का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

फिलहाल, IMA ने मंत्रालय से फिल्म के प्रचार वीडियो की समीक्षा करने और लागू नियमों के तहत उचित कदम उठाने की मांग की है। 

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टीवी रेटिंग पर रोक के बीच GTPL Hathway ने शुरू किया व्युअरशिप डेटा जारी करना

टीवी रेटिंग जारी करने की व्यवस्था में रुकावट के बीच केबल टीवी और ब्रॉडबैंड सेवा देने वाली कंपनी GTPL Hathway ने टेलीविजन दर्शकों से जुड़ा डेटा जारी करना शुरू कर दिया है।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
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टीवी रेटिंग जारी करने की व्यवस्था में रुकावट के बीच केबल टीवी और ब्रॉडबैंड सेवा देने वाली कंपनी GTPL Hathway ने टेलीविजन दर्शकों से जुड़ा डेटा जारी करना शुरू कर दिया है। कंपनी इसके लिए रिटर्न पाथ डेटा (RPD) तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। फिलहाल इस व्यवस्था के तहत 10 हजार से ज्यादा ऐसे सेट-टॉप बॉक्स से डेटा जुटाया जा रहा है, जो इस तकनीक से जुड़े हैं। कंपनी आने वाले कुछ महीनों में इस दायरे को बढ़ाकर करीब 50 हजार घरों तक पहुंचाना चाहती है।

कंपनी के मुताबिक, यह पहल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 के अनुरूप है। GTPL ने अपनी वेबसाइट पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले टीवी चैनलों और सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध डिजिटल विज्ञापन माध्यमों से जुड़ी जानकारी के सारांश भी जारी करने शुरू कर दिए हैं।

GTPL के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, एक औसत घर में रोजाना साढ़े सात घंटे से ज्यादा समय तक पारंपरिक टीवी देखा जाता है। कंपनी का कहना है कि यह आंकड़ा भारतीय घरों में लीनियर टेलीविजन यानी तय कार्यक्रमों और प्रसारण समय के अनुसार टीवी देखने की आदत को दिखाता है।

यह पहल ऐसे समय में आई है, जब टीवी रेटिंग व्यवस्था में जारी रुकावट के बीच प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों को दर्शकों की पसंद और विज्ञापनों की पहुंच समझने के लिए दूसरे स्रोतों की जरूरत है। हालांकि, GTPL का यह प्लेटफॉर्म आधारित डेटा मौजूदा उद्योग-स्तरीय टीवी रेटिंग व्यवस्था से अलग है।

50 हजार घरों तक सैंपल बढ़ाने की योजना

GTPL फिलहाल 200 से ज्यादा शहरों और कस्बों के साथ करीब 3,000 पिन कोड क्षेत्रों में मौजूद 10 हजार से अधिक RPD-सक्षम सेट-टॉप बॉक्स से डेटा जुटा रही है। इस सैंपल में महानगरों, शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया है।

कंपनी का लक्ष्य अगले कुछ महीनों में इस सैंपल को बढ़ाकर लगभग 50 हजार घरों तक पहुंचाना है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में टीवी देखने के तौर-तरीकों को समझने और आंकड़ों का अधिक बारीकी से विश्लेषण करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कंपनी के मुताबिक, इस व्यवस्था के लिए शुरुआती अध्ययन एक स्वतंत्र तीसरी पार्टी की रिसर्च एजेंसी ने किया है। इसमें अलग-अलग बाजारों में दर्शकों की देखने की आदतों को समझने के लिए सांख्यिकीय और वैज्ञानिक सैंपलिंग तरीकों का इस्तेमाल किया गया है।

GTPL के पास 1.1 करोड़ से ज्यादा सक्रिय डिजिटल टीवी घरों का ग्राहक आधार है और कंपनी का अनुमानित दर्शक आधार करीब 5 करोड़ है। कंपनी का कहना है कि सैंपल बढ़ने से उसके ग्राहक आधार में टीवी देखने के रुझानों की बेहतर जानकारी मिल सकती है।

हालांकि, इन आंकड़ों की सटीकता और व्यापकता इस बात पर निर्भर करेगी कि सैंपल में किस तरह के घर शामिल हैं, उन्हें कैसे चुना गया है और उनके आंकड़ों के आधार पर बड़े ग्राहक आधार के अनुमान किस तरीके से तैयार किए जाते हैं। इसलिए इस डेटा को पूरे भारत के टीवी दर्शकों की पसंद का प्रतिनिधि मानने से पहले इसकी कार्यप्रणाली को समझना जरूरी होगा।

RPD तकनीक से कैसे मिलेगी जानकारी?

रिटर्न पाथ डेटा यानी RPD तकनीक के जरिए टीवी देखने से जुड़ी गतिविधियों का डेटा सीधे इससे जुड़े सेट-टॉप बॉक्स से मिलता है। सर्वे में लोगों से उनकी टीवी देखने की आदतों के बारे में पूछने के बजाय यह तकनीक अपने आप देखने की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करती है।

GTPL के मुताबिक, इस डेटा से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि लोग कितनी देर टीवी देखते हैं, किन चैनलों को पसंद करते हैं, किस समय और किस तरह के कार्यक्रम ज्यादा देखते हैं और अलग-अलग बाजारों में दर्शकों की पसंद कैसे बदलती है।

इस व्यवस्था के जरिए दर्शकों की पहुंच, विज्ञापनों के अनुमानित इम्प्रेशन, चैनलों की लोकप्रियता, क्षेत्रीय देखने के रुझान, कार्यक्रमों की श्रेणी और अलग-अलग समय के हिसाब से टीवी देखने की आदतों का विश्लेषण किया जा सकता है। कंपनी लंबे समय में दर्शकों की पसंद में होने वाले बदलावों और विज्ञापनों की प्रभावशीलता को समझने के लिए भी इसका इस्तेमाल करना चाहती है।

कंपनी के अनुसार, यह व्यवस्था उसके प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करीब 1,000 टीवी चैनलों के देखने से जुड़े डेटा को कवर करती है। इसमें पे चैनल और फ्री-टू-एयर चैनल, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनल के साथ सैटेलाइट और प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराए जाने वाले चैनल भी शामिल हैं।

इससे छोटे, क्षेत्रीय और नए प्रसारकों को भी अपने कार्यक्रमों की पहुंच और दर्शकों की पसंद समझने में मदद मिल सकती है। प्रसारक इस जानकारी के आधार पर कार्यक्रमों और उनके प्रसारण के समय से जुड़े फैसलों का आकलन कर सकते हैं। वहीं, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां इसका इस्तेमाल विज्ञापन की योजना बनाने और दर्शकों के रुझान समझने के लिए कर सकती हैं।

सेट-टॉप बॉक्स पर डिजिटल विज्ञापनों का भी होगा आकलन

GTPL ने टीवी देखने के आंकड़ों के अलावा सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध डिजिटल विज्ञापन माध्यमों के प्रदर्शन को मापने की व्यवस्था भी तैयार की है।

कंपनी के मुताबिक, सैंपल में शामिल घरों के देखने के व्यवहार से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और सांख्यिकीय तरीकों से इनके आधार पर अपने व्यापक ग्राहक आधार के लिए अनुमान तैयार किए जाएंगे।

इससे विज्ञापनदाताओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि सेट-टॉप बॉक्स पर मौजूद डिजिटल विज्ञापन माध्यम कितने लोगों तक पहुंचे और उन्हें देखने में कितना समय बिताया गया। इसके लिए विज्ञापनों की अनुमानित पहुंच और औसत देखने के समय जैसे मानकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

कंपनी विज्ञापनदाताओं को इन डिजिटल माध्यमों पर तय डिजिटल मानकों के आधार पर विज्ञापन खरीदने का विकल्प देने की योजना बना रही है। इनमें प्रति हजार इम्प्रेशन की लागत यानी CPM के आधार पर विज्ञापन खरीदने की व्यवस्था भी शामिल होगी। डिजिटल विज्ञापन जगत में गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म पर भी इस तरह के मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है।

इस पहल से GTPL को अपने सेट-टॉप बॉक्स आधारित विज्ञापन माध्यमों के लिए एक नया कारोबारी विकल्प मिल सकता है। विज्ञापनदाता भी टीवी और डिजिटल माध्यमों पर अपनी पहुंच का आकलन करने के लिए इन आंकड़ों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

हालांकि, कंपनी ने अभी इस विज्ञापन सुविधा की व्यावसायिक शर्तों और उपलब्ध विज्ञापन माध्यमों का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया है।

डेटा की गोपनीयता पर कंपनी का क्या कहना है?

GTPL का कहना है कि उसने इस व्यवस्था में डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखा है। कंपनी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान बताने वाली जानकारी एकत्र नहीं की जाती। डेटा को प्रोसेस करने से पहले उसकी पहचान छिपाई जाती है और जानकारी को घरों के स्तर पर एकत्रित रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनी ने डेटा जुटाने और उसके विश्लेषण को सुरक्षित रखने के लिए स्वचालित प्रणालियों के इस्तेमाल की भी बात कही है।

टीवी रेटिंग व्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह पहल?

टीवी रेटिंग का डेटा प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इससे उन्हें चैनलों और कार्यक्रमों की लोकप्रियता समझने, विज्ञापन की योजना बनाने और अपने निवेश से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलती है।

ऐसे में GTPL की यह पहल टीवी देखने के रुझानों को समझने के लिए एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध करा सकती है। आने वाले महीनों में सैंपल को 50 हजार घरों तक बढ़ाने से कंपनी के अपने ग्राहक आधार से मिलने वाले आंकड़ों का दायरा बढ़ सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि GTPL का डेटा उसके प्लेटफॉर्म से जुड़े सेट-टॉप बॉक्स और चुने गए घरों के सैंपल पर आधारित है। इसे अपने आप पूरे भारत की टीवी व्युअरशिप का आधिकारिक या सार्वभौमिक माप नहीं माना जा सकता। इसके निष्कर्षों को समझने के लिए सैंपल के चयन, आंकड़ों के विश्लेषण और अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया को देखना होगा।

कुल मिलाकर, GTPL Hathway की इस पहल से टीवी दर्शकों की पसंद और सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध विज्ञापन माध्यमों के प्रदर्शन को समझने का एक नया रास्ता खुल सकता है। इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि उद्योग के दूसरे पक्ष इन आंकड़ों और उनकी कार्यप्रणाली का आकलन किस तरह करते हैं।

 

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Zee Learn में राकेश चतुर्वेदी को बड़ी जिम्मेदारी, 9 नवंबर से बनेंगे होल-टाइम डायरेक्टर

शिक्षा क्षेत्र की कंपनी जी लर्न (Zee Learn Ltd) ने राकेश चतुर्वेदी को होल-टाइम डायरेक्टर (पूर्णकालिक निदेशक) नियुक्त किया है।

Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
Rakesh5412

शिक्षा क्षेत्र की कंपनी जी लर्न (Zee Learn Ltd) ने राकेश चतुर्वेदी को होल-टाइम डायरेक्टर (पूर्णकालिक निदेशक) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होगी। वह कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।

कंपनी के निदेशक मंडल ने 23 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस नियुक्ति को मंजूरी दी। यह फैसला नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के लिए कंपनी के सदस्यों की मंजूरी भी जरूरी होगी। यह मंजूरी अगली आम बैठक में या नियुक्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर, जो भी पहले हो, ली जानी है।

मीडिया और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में 30 साल का अनुभव

राकेश चतुर्वेदी को विभिन्न कॉरपोरेट क्षेत्रों में करीब 30 साल का अनुभव है। इसमें मीडिया और टेक्नोलॉजी क्षेत्र भी शामिल हैं। उनके पास कॉमर्स और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री, कानून में स्नातक (LL.B.) और फाइनेंस में डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री है।

जी लर्न में नई जिम्मेदारी मिलने से पहले वह जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd) में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत थे। वहां वह जोखिम प्रबंधन, आंतरिक ऑडिट और वित्तीय नियंत्रण से जुड़े काम संभालते थे।

इसके अलावा, वह इंडिया वेब पोर्टल प्राइवेट लिमिटेड (India.com) में मुख्य वित्तीय अधिकारी और नियामक मामलों के प्रमुख की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उनके अनुभव में वित्तीय योजना तैयार करना, जोखिम प्रबंधन, नियमों का पालन, पूंजी के इस्तेमाल की योजना और कंपनियों के विलय एवं अधिग्रहण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

सेबी के नियमों के तहत दी गई जानकारी

कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया है कि सेबी या किसी अन्य प्राधिकरण के आदेश के तहत राकेश चतुर्वेदी पर निदेशक का पद संभालने की कोई रोक नहीं है।

यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के विनियमन 30 के तहत साझा की गई है। कंपनी के अनुसार, 23 अक्टूबर को बोर्ड की बैठक शाम 4 बजे शुरू हुई और शाम 6:30 बजे समाप्त हुई। 

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Affle 3i ने प्रमोटर कंपनी को आवंटित किए 12.77 लाख शेयर, पूंजी बढ़कर हुई ₹28.78 करोड़

डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल मार्केटिंग टेक्नोलॉजी कंपनी Affle 3i लिमिटेड ने अपनी प्रमोटर कंपनी Affle Holdings Pte. Ltd. को 12,77,155 नए इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं।

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Saturday, 24 October, 2026
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डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल मार्केटिंग टेक्नोलॉजी कंपनी Affle 3i लिमिटेड ने अपनी प्रमोटर कंपनी Affle Holdings Pte. Ltd. को 12,77,155 नए इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। कंपनी ने ये शेयर वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलने पर जारी किए हैं। हर शेयर का अंकित मूल्य 2 रुपये है, जबकि इश्यू प्राइस 1,487 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

कंपनी ने 21 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि यह आवंटन प्रेफरेंशियल आधार पर किया गया है। इससे पहले 19 अक्टूबर को कंपनी ने प्रमोटर कंपनी को 17,04,324 इक्विटी शेयर आवंटित करने की जानकारी दी थी।

अब तक 30.16 लाख शेयर आवंटित

Affle 3i के मुताबिक, प्रमोटर कंपनी को कुल 74 लाख वारंट आवंटित किए गए थे। इनमें से अब तक 30,16,443 वारंट को इक्विटी शेयरों में बदला जा चुका है। इसके बदले कंपनी को कुल 6,115.04 मिलियन रुपये यानी करीब 611.50 करोड़ रुपये मिले हैं।

कंपनी ने बताया कि 74 लाख वारंट के लिए कुल 11,003.80 मिलियन रुपये यानी करीब 1,100.38 करोड़ रुपये की राशि तय है। इसमें वारंट आवंटन के समय मिलने वाली 25 फीसदी शुरुआती राशि और वारंट को शेयरों में बदलने के लिए दी जाने वाली बाकी रकम शामिल है।

1,487 रुपये प्रति शेयर है इश्यू प्राइस

कंपनी ने वारंट को शेयरों में बदलने के लिए प्रति शेयर 1,487 रुपये का इश्यू प्राइस तय किया है। इसमें से 25 फीसदी यानी 371.75 रुपये प्रति वारंट की राशि पहले ही मिल चुकी थी। बाकी 75 फीसदी यानी 1,115.25 रुपये प्रति वारंट का भुगतान वारंट को शेयरों में बदलने के समय किया गया।

इस प्रक्रिया के बाद कंपनी की जारी, सब्सक्राइब्ड और पूरी तरह चुकता शेयर पूंजी बढ़कर 28,77,91,654 रुपये हो गई है। यह पूंजी 2 रुपये अंकित मूल्य वाले कुल 14,38,95,827 इक्विटी शेयरों में बंटी है।

 

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राजेंद्र तिवारी ने LENS में संभाली एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी

राजेंद्र तिवारी पूर्व में दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, अमर उजाला और प्रभात खबर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम कर चुके हैं।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
Rajendra Tiwari

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी ने लाइव आई न्यूज सर्विस (LENS) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में नई पारी शुरू की है। प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले तिवारी यहां न्यूजरूम का नेतृत्व करेंगे। उनकी जिम्मेदारी में खबरों की पुष्टि, न्यूजरूम की कार्यप्रणाली और संपादकीय मानकों की देखरेख शामिल होगी।

राजेंद्र तिवारी पूर्व में दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, अमर उजाला और प्रभात खबर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम कर चुके हैं। प्रभात खबर में उन्होंने कॉरपोरेट एडिटर के रूप में भी काम किया है।

उनके पत्रकारिता अनुभव का दायरा दिल्ली, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, भोपाल, इंदौर, रायपुर, रांची और कोलकाता तक फैला रहा है। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों में काम करने का उनका अनुभव उनके लंबे पत्रकारिता करियर का हिस्सा रहा है।

हाल के वर्षों में तिवारी डिजिटल पत्रकारिता से भी जुड़े रहे हैं। वह यूट्यूब आधारित न्यूज और राजनीतिक विश्लेषण मंच अनब्रेकिंग (UnBreaking) से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा, वह द वायर (The Wire) पर ‘बात दरअसल ये है’ नाम से राजनीतिक विश्लेषण कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं।

दरअसल, LENS एक ऐसा मंच विकसित कर रहा है, जो रिपोर्टरों और स्ट्रिंगरों के वीडियो फुटेज को ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल पब्लिशर्स से जोड़ने का काम करेगा। इसका उद्देश्य खबरों से जुड़े वीडियो फुटेज की पुष्टि करना, उनके अधिकारों को स्पष्ट रखना और एक व्यवस्थित लाइसेंसिंग व्यवस्था के जरिए उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था में योगदान देने वाले लोगों को पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर है।

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डॉ. अनुराग बत्रा दुबई में MDME 2026 के उद्घाटन समारोह में रखेंगे अपने विचार

एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा आज दुबई में आयोजित होने वाले मिडिल ईस्ट डिजिटल मार्केटिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड्स (MDME) 2026 के उद्घाटन समारोह में विशेष कीनोट संबोधन देंगे।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
AnnuragBatra512

BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा 23 अक्टूबर को यानी आज दुबई में आयोजित होने वाले मिडिल ईस्ट डिजिटल मार्केटिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड्स (MDME) 2026 के उद्घाटन समारोह में विशेष कीनोट संबोधन देंगे।

इस कार्यक्रम का आयोजन ग्रैंड एक्सिस ग्लोबल (Grand Axis Global) की ओर से किया जा रहा है। यह आयोजन दुबई के डाउनटाउन इलाके में स्थित केम्पिंस्की द बुलेवार्ड में होगा। कार्यक्रम में ‘टॉप 50 मार्केटिंग लीडर्स ऑफ द मिडिल ईस्ट 2026’ के तहत क्षेत्र के प्रमुख मार्केटिंग लीडर्स को भी पहचान दी जाएगी।

डॉ. बत्रा की भागीदारी से कार्यक्रम में भारतीय मीडिया और मार्केटिंग इंडस्ट्री का नजरिया भी सामने आएगा। BW Businessworld और एक्सचेंज4मीडिया के जरिए वह बिजनेस पत्रकारिता के साथ-साथ विज्ञापन, मार्केटिंग और मीडिया जगत से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में सक्रिय रहे हैं।

उन्होंने साल 2000 में एक्सचेंज4मीडिया की स्थापना की थी। इसके बाद इस मंच ने विज्ञापन, मार्केटिंग और मीडिया क्षेत्र के पेशेवरों के बीच अपनी पहचान बनाई। समूह के काम में खबरों और विश्लेषण के साथ इंडस्ट्री से जुड़े कार्यक्रम, चर्चाएं और वरिष्ठ कारोबारी नेताओं तथा ब्रैंड से जुड़े फैसले लेने वाले लोगों के साथ संवाद भी शामिल हैं।

डिजिटल मार्केटिंग के अलग-अलग क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

MDME 2026 का उद्देश्य डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में बेहतर काम और नए प्रयोगों को पहचान देना है। इसके तहत परफॉर्मेंस मार्केटिंग, ब्रैंडिंग, ग्राहकों से जुड़ाव, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैंपेन, मार्केटिंग टेक्नोलॉजी, विज्ञापन तकनीक और डिजिटल बदलाव जैसे क्षेत्रों में उपलब्धियों को सम्मानित किया जाएगा।

अवॉर्ड्स की विभिन्न श्रेणियों में सोशल मीडिया और कंटेंट, कारोबार की वृद्धि, ग्राहक अनुभव, ब्रैंड की पहचान, नई तकनीक, रचनात्मक प्रयोग, एजेंसी के काम और व्यक्तिगत नेतृत्व को शामिल किया गया है। इनमें मार्केटिंग में जनरेटिव AI के इस्तेमाल और ऐसे कैंपेन को भी जगह दी गई है, जिनसे कारोबार में मापने योग्य वृद्धि हुई हो।

कार्यक्रम में ‘टॉप 50 मार्केटिंग लीडर्स ऑफ द मिडिल ईस्ट 2026’ के जरिए क्षेत्र के उन पेशेवरों को भी पहचान दी जाएगी, जो मार्केटिंग जगत को दिशा देने में भूमिका निभा रहे हैं। इस तरह कार्यक्रम में एक ओर प्रभावी मार्केटिंग अभियानों और दूसरी ओर इस क्षेत्र का नेतृत्व करने वाले लोगों पर ध्यान दिया जाएगा।

ग्रैंड एक्सिस ग्लोबल कर रहा है आयोजन

दुबई स्थित ग्रैंड एक्सिस ग्लोबल कॉरपोरेट कार्यक्रमों का आयोजन करने वाली कंपनी है। इसके काम में अवॉर्ड्स, नेतृत्व से जुड़े सम्मेलन, वरिष्ठ अधिकारियों की गोलमेज बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। कंपनी का उद्देश्य मिडिल ईस्ट में कारोबार से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों, ब्रैंड्स, एजेंसियों और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है।

कंपनी की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रियंका भदौरिया हैं। उन्हें बिजनेस इवेंट्स इंडस्ट्री में 25 साल से अधिक का अनुभव है। ग्रैंड एक्सिस ग्लोबल की स्थापना से पहले वह नौ साल से अधिक समय तक एक्सचेंज4मीडिया के साथ जुड़ी रही थीं। वहां उन्होंने अवॉर्ड्स, नेतृत्व सम्मेलनों और वेबिनार जैसे कार्यक्रमों पर काम किया। 

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चिंतन जोशी बने अमागी में हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस

अमागी ने चिंतन जोशी को हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस नियुक्त किया है। इससे पहले वह इनमोबी एक्सचेंज में सीनियर मैनेजर-रेवेन्यू ऑपरेशंस थे और करीब पांच वर्षों तक इनमोबी से जुड़े रहे।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
amagi

अमागी (Amagi) ने चिंतन जोशी (Chintan Joshi) को हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस के पद पर नियुक्त किया है। जोशी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर पोस्ट साझा कर अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी दी।

जोशी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने अमागी में हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।”

अमागी से पहले जोशी इनमोबी (InMobi) से जुड़े हुए थे। यहां वह इनमोबी एक्सचेंज में सीनियर मैनेजर-रेवेन्यू ऑपरेशंस के पद पर काम कर रहे थे। वह करीब पांच वर्षों तक इनमोबी से जुड़े रहे।

अपने करियर में जोशी इंफोसिस (Infosys) और यस प्रॉपर्टी (Yes Property) के साथ भी काम कर चुके हैं।

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रेनी किशोर बनीं डब्ल्यूपीपी मीडिया में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट

रेनी किशोर तिलकनगर इंडस्ट्रीज के अल्कोहलिक बेवरेज पोर्टफोलियो, मीडिया रणनीति और ब्रांड समाधान का नेतृत्व करेंगी।

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Friday, 23 October, 2026
wpp media

रेनी किशोर (Reni Kishore) ने डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-क्लाइंट सॉल्यूशंस के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह मई से इस भूमिका में काम कर रही हैं और हाल ही में लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।

नई भूमिका में रेनी भारत में तिलकनगर इंडस्ट्रीज (Tilaknagar Industries) के अल्कोहलिक बेवरेज पोर्टफोलियो का नेतृत्व करेंगी। इसमें इंपीरियल ब्लू (Imperial Blue), सेवन आइलैंड्स व्हिस्की (Seven Islands Whiskey) और मैंशन हाउस (Mansion House) जैसे ब्रांड शामिल हैं। उनकी जिम्मेदारियों में मीडिया रणनीति, ब्रांड समाधान, प्रचार साझेदारियां और रणनीतिक कारोबार विकास शामिल होगा।

इससे पहले रेनी डब्ल्यूपीपी मीडिया में सहायक उपाध्यक्ष-रणनीति एवं साझेदारी के रूप में काम कर रही थीं। इससे पहले उन्होंने एसेंसमी़डियाकॉम इंडिया (EssenceMediacom India) में तीन वर्षों से अधिक समय तक काम किया।

रेनी को बी2सी और बी2बी मार्केटिंग में 15 वर्षों का अनुभव है। उन्हें डिजिटल रणनीति, ब्रांड निर्माण, कंटेंट मार्केटिंग, मार्केटिंग कम्युनिकेशन और पार्टनर मैनेजमेंट में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने भारत के अलावा एशिया-प्रशांत और अमेरिका के बाजारों में भी काम किया है।

अपने करियर में रेनी मीडिया कॉम (MediaCom), ग्रुपएम (GroupM), रेकिट बेनकाइजर (Reckitt Benckiser), इंटरग्लोब टेक्नोलॉजीज (InterGlobe Technologies) और वीडोपिया (Vdopia) जैसी कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं।

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मैरिको के लिए डिजिटल प्लानिंग संभालेंगे आशीष वानखड़े

आशीष वानखड़े पीएचडी में ग्रुप हेड-डिजिटल प्लानिंग के रूप में शामिल हुए हैं। वह मैरिको के लिए डिजिटल प्लानिंग संभालेंगे। इससे पहले वह डब्ल्यूपीपी मीडिया और अन्य मीडिया एजेंसियों से जुड़े थे।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
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आशीष वानखड़े (Ashish Wankhade) पीएचडी (PHD) में ग्रुप हेड-डिजिटल प्लानिंग के रूप में शामिल हुए हैं। उन्हें मैरिको (Marico) के लिए डिजिटल प्लानिंग की जिम्मेदारी दी गई है।

पीएचडी में शामिल होने से पहले वह डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) में मीडिया प्लानिंग मैनेजर के तौर पर एक साल से कुछ अधिक समय तक काम कर चुके हैं।

वानखड़े ग्रुपएम नेक्सस (GroupM Nexus) और मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) के साथ भी काम कर चुके हैं।

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इंडिया टुडे ग्रुप को बाय बोलकर अविनाश सिंह ने जॉइन किया NDTV

अविनाश सिंह इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) में मैनेजर–मार्केटिंग (ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट एवं रेपुटेशन स्ट्रैटेजी) के पद पर कार्यरत थे।

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Friday, 23 October, 2026
Avinash Singh

मीडिया प्रोफेशनल अविनाश सिंह अब मीडिया नेटवर्क NDTV से जुड़ गए हैं। अविनाश सिंह को स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस, ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट और डिजिटल नैरेटिव बिल्डिंग में करीब एक दशक का अनुभव है।

NDTV से जुड़ने से पहले वह इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) में मैनेजर–मार्केटिंग (ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट एवं रेपुटेशन स्ट्रैटेजी) के पद पर कार्यरत थे। यहां अपने तीन साल से अधिक के सफर में उन्होंने आजतक (AajTak), इंडिया टुडे (India Today) और नेटवर्क के अन्य ब्रैंड्स की रेपुटेशन और इमेज बिल्डिंग से जुड़ी पहलों में अहम भूमिका निभाई।

उनकी जिम्मेदारियों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं का मुकाबला करने, लोगों की प्रतिक्रिया को समझने और संवेदनशील न्यूज घटनाक्रमों के दौरान ब्रैंड की छवि को संभालने के लिए स्ट्रैटेजी तैयार करना शामिल था।

समाचार4मीडिया से बातचीत में अविनाश सिंह ने बताया कि इंडिया टुडे ग्रुप में उन्होंने ऐसे कैंपेन तैयार करने में भी योगदान दिया, जिनके जरिए लोगों के बीच कम्युनिकेशंस को बढ़ावा मिला और ब्रैंड्स की विजिबिलिटी, प्रासंगिकता तथा ऑडियंस एंगेजमेंट को मजबूत करने में मदद मिली।

इंडिया टुडे ग्रुप से पहले अविनाश सिंह ने नेशन विद नमो (Nation with NaMo) में डिजिटल स्ट्रैटेजी और नैरेटिव ऑपरेशंस के कैंपेन मैनेजर के रूप में काम किया। जनवरी 2019 से मई 2023 तक इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जनधारणा को प्रभावित करने के लिए डिजिटल पीआर और नैरेटिव स्ट्रैटेजी पर काम किया। उन्होंने ऑडियंस के व्यवहार और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप डेटा आधारित कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी तैयार करने तथा बड़े स्तर पर कंटेंट प्रसार के लिए नेटवर्क विकसित करने में भी भूमिका निभाई।

इससे पहले वह इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर (Indian Chamber of Food and Agriculture) में असिस्टेंट मैनेजर–मार्केटिंग कम्युनिकेशंस और अरुकस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Arrucus Media Private Limited) में मार्केटिंग एग्जिक्यूटिव के रूप में काम कर चुके हैं।

अविनाश सिंह ने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की है। इसके अलावा, उन्होंने एनबीए ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है।

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