होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / CCI कार्टेल जांच: मैडिसन मीडिया केस में सरकार की लापरवाही पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त
CCI कार्टेल जांच: मैडिसन मीडिया केस में सरकार की लापरवाही पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त
केंद्र सरकार ने गुरुवार को मैडिसन मीडिया की उस याचिका पर अपना जवाब अदालत के रिकॉर्ड में पेश नहीं किया, जिसमें उसने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच को चुनौती दी है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
केंद्र सरकार ने गुरुवार को मैडिसन मीडिया की उस याचिका पर अपना जवाब अदालत के रिकॉर्ड में पेश नहीं किया, जिसमें उसने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच को चुनौती दी है। यह जांच बड़े मीडिया और विज्ञापन एजेंसियों पर कथित कार्टेल बनाने के आरोपों से जुड़ी है। सरकार की इस चूक पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और केंद्र को चेतावनी दी कि यदि वह आगे भी जवाब दाखिल नहीं करती है तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार गेडेला की बेंच ने केंद्र सरकार को आखिरी मौका देते हुए दो हफ्ते का समय दिया है कि वह अपना हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर तय समय में जवाब नहीं आया तो अदालत सरकार के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को होगी।
मार्च महीने में CCI ने मीडिया रेट्स और डिस्काउंट को लेकर कथित मिलीभगत की जांच के तहत कई विज्ञापन एजेंसियों और ब्रॉडकास्टर्स पर छापेमारी की थी। मैडिसन भी उन्हीं एजेंसियों में शामिल थी। यह जांच भारतीय विज्ञापन इंडस्ट्री में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
CCI की यह जांच 2024 की शुरुआत में उसकी लेनिएंसी स्कीम के तहत दी गई जानकारी के बाद शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि यह जानकारी डेंट्सू की ओर से दी गई थी। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले थे कि कई बड़ी एजेंसियां अनौपचारिक तरीकों से एक-दूसरे के साथ मिलकर कीमत तय कर रही थीं, जिनमें मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल भी शामिल था।
मैडिसन का कहना है कि खुद CCI के आदेश में यह बात सामने आई थी कि इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स (ISA) के सदस्यों ने एक मॉडल एजेंसी एग्रीमेंट फैलाया था, जिससे बातचीत की ताकत सीमित हुई और एजेंसियों की कमाई पर असर पड़ा। मैडिसन का दावा है कि एडवर्टाइजिंग एजेंसिज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य असल में पीड़ित हैं, दोषी नहीं।
इसके बावजूद मैडिसन का आरोप है कि जांच एजेंसी ने सिर्फ विज्ञापन एजेंसियों को निशाना बनाया और ISA के सदस्यों के खिलाफ कोई ऐसी तलाशी कार्रवाई नहीं की गई। कंपनी का कहना है कि यह प्रक्रिया मनमानी थी और इससे उसकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा है।
टैग्स