बोधि ट्री मल्टीमीडिया जुटाएगी ₹200 करोड़, QIP के जरिए पूंजी जुटाने की तैयारी

बोधि ट्री मल्टीमीडिया लिमिटेड ने कारोबार के विस्तार और अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए 200 करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटाने की तैयारी की है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
BodhiTree895


बोधि ट्री मल्टीमीडिया लिमिटेड ने कारोबार के विस्तार और अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए 200 करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटाने की तैयारी की है। कंपनी यह रकम क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के जरिए जुटाना चाहती है।

इस प्रस्ताव पर शेयरधारकों की मंजूरी लेने के लिए कंपनी ने 28 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (ईजीएम) बुलाई है। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से होगी।

कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजारों को ईजीएम का नोटिस भेजा है। इसमें क्यूआईपी के जरिए इक्विटी शेयर और/या अन्य पात्र प्रतिभूतियां जारी कर 200 करोड़ रुपये तक जुटाने का प्रस्ताव रखा गया है।

क्यूआईपी के जरिए जुटाई जाएगी रकम

कंपनी के मुताबिक, प्रस्तावित क्यूआईपी में रकम एक या एक से ज्यादा चरणों में जुटाई जा सकती है। इसमें इक्विटी शेयर, गैर-परिवर्तनीय ऋण साधन के साथ वारंट और वारंट को छोड़कर परिवर्तनीय प्रतिभूतियां या इनका कोई संयोजन शामिल हो सकता है। इन प्रतिभूतियों को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) को जारी किया जाएगा। कंपनी के मौजूदा शेयरधारक होना इनके लिए जरूरी नहीं होगा।

कंपनी ने साफ किया है कि अभी निवेशकों की पहचान नहीं की गई है और यह भी तय नहीं किया गया है कि किस निवेशक को कितनी प्रतिभूतियां जारी की जाएंगी। इनका फैसला आगे बाजार की स्थिति और कंपनी की जरूरतों को देखते हुए बोर्ड करेगा।

रकम का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी ने 200 करोड़ रुपये तक की प्रस्तावित रकम के इस्तेमाल के कई उद्देश्य बताए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों की वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करना, जिसमें चल रही और भविष्य में होने वाली सामग्री निर्माण की लागत शामिल है।
  • कंपनी के स्वामित्व वाली मूल बौद्धिक संपदा तैयार करना। इसमें फिल्में, वेब सीरीज, फॉर्मेट, एनीमेशन और डिजिटल-केंद्रित सामग्री शामिल हैं।
  • भारत और विदेशों में सामग्री निर्माण और वितरण से जुड़ी कंपनियों और कारोबार में अधिग्रहण या रणनीतिक निवेश करना।
  • स्टूडियो, उपकरण, विजुअल इफेक्ट्स, एनीमेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उत्पादन ढांचे और संबंधित तकनीक में निवेश करना।
  • नए भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं और प्लेटफॉर्म बाजारों में विस्तार करना। इसमें भारत के क्षेत्रीय भाषा बाजार, सरकारी व संस्थागत मीडिया और अंतरराष्ट्रीय बाजार शामिल हैं।
  • सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों को पूरा करना।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी अधिग्रहण या निवेश के लिए कोई अंतिम समझौता नहीं किया गया है।

क्यूआईपी में सिर्फ संस्थागत निवेशक होंगे

प्रस्ताव के मुताबिक, क्यूआईपी के तहत प्रतिभूतियों का आवंटन सिर्फ पात्र क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स को किया जाएगा। कंपनी के प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप के सदस्य, निदेशक और प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारी इस क्यूआईपी में निवेश नहीं करेंगे।

किसी एक निवेशक को क्यूआईपी के कुल आकार का 50 प्रतिशत से ज्यादा आवंटित नहीं किया जाएगा और न्यूनतम दो निवेशक होंगे।

इसके अलावा, पात्र प्रतिभूतियों का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा म्यूचुअल फंडों को आवंटित किया जाएगा। अगर म्यूचुअल फंड इस हिस्से की पूरी या कुछ रकम के लिए सदस्यता नहीं लेते हैं, तो यह हिस्सा अन्य क्यूआईबी को दिया जा सकता है।

शेयर की कीमत पर भी नियम लागू होंगे

कंपनी के मुताबिक, क्यूआईपी के तहत प्रतिभूतियां जारी करने की कीमत सेबी के तय नियमों के मुताबिक तय होगी। सामान्य तौर पर कीमत संबंधित फ्लोर प्राइस से कम नहीं होगी।

हालांकि, बोर्ड बाजार की स्थिति को देखते हुए और लीड मैनेजरों से सलाह लेकर फ्लोर प्राइस पर 5 प्रतिशत तक की छूट दे सकता है, या लागू नियमों के तहत जितनी अन्य छूट की अनुमति हो।

रकम के इस्तेमाल की निगरानी होगी

क्योंकि प्रस्तावित इश्यू का आकार 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है, कंपनी सेबी में पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसी को मॉनिटरिंग एजेंसी के रूप में नियुक्त करेगी। यह एजेंसी जुटाई गई रकम के इस्तेमाल की निगरानी करेगी और हर तिमाही कंपनी को रिपोर्ट देगी। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक क्यूआईपी से मिली 100 प्रतिशत रकम का इस्तेमाल नहीं हो जाता।

कंपनी को हर तिमाही खत्म होने के 45 दिनों के भीतर मॉनिटरिंग एजेंसी की रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर डालनी होगी और शेयर बाजारों को भी देनी होगी।

ईजीएम में शेयरधारकों से मांगी जाएगी मंजूरी

बोधि ट्री मल्टीमीडिया के बोर्ड ने 18 सितंबर 2026 को क्यूआईपी के प्रस्ताव पर विचार कर जरूरी मंजूरी दी थी। अब इसे आगे बढ़ाने के लिए शेयरधारकों की विशेष मंजूरी जरूरी है। इसी उद्देश्य से 28 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे ईजीएम होगी। शेयरधारक इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा ले सकेंगे।

कंपनी के शेयरधारकों के लिए रिमोट ई-वोटिंग 24 अक्टूबर 2026 सुबह 9 बजे से 27 अक्टूबर 2026 शाम 5 बजे तक खुली रहेगी। 21 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट यानी कट-ऑफ डेट रखा गया है। इस तारीख को कंपनी के रिकॉर्ड में शेयर रखने वाले पात्र शेयरधारक प्रस्ताव पर अपना वोट दे सकेंगे।

अगर शेयरधारक प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो कंपनी का बोर्ड आगे क्यूआईपी के आकार, कीमत, निवेशकों, प्रतिभूतियों की संख्या और जारी करने के समय जैसे प्रमुख पहलुओं पर फैसला कर सकेगा। कंपनी ने कहा है कि अंतिम शर्तें बाजार की स्थिति, नियामकीय जरूरतों और कंपनी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तय की जाएंगी।

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प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में 13 नए सदस्य नामित, ये नाम शामिल

अधिसूचना के तहत भारतीय प्रेस परिषद में कार्यरत पत्रकारों के दो वर्गों में कुल 13 सदस्यों को नामित किया गया है। इनमें छह संपादक और सात अन्य कार्यरत पत्रकार शामिल हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 08 October, 2026
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Thursday, 08 October, 2026
PCI

केंद्र सरकार ने भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) में 13 सदस्यों को नामित किया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 7 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना के मुताबिक, यह नामांकन प्रेस काउंसिल अधिनियम, 1978 की धारा 5 की उपधारा (3) के खंड (क) और उपधारा (5) तथा धारा 6 की उपधारा (1) के तहत किया गया है।

इस अधिसूचना के तहत भारतीय प्रेस परिषद में कार्यरत पत्रकारों के दो वर्गों में कुल 13 सदस्यों को नामित किया गया है। इनमें छह संपादक और सात अन्य कार्यरत पत्रकार शामिल हैं। अधिसूचना के अनुसार, कार्यरत पत्रकारों के संपादक वर्ग में छह सदस्यों को नामित किया गया है। इनमें प्रदीप कुमार जैन, सैयद रजा हुसैन रिजवी, अंकुर दुआ, अपर्णा शुक्ला, राज परवाना/नरेन्द्र सिंह और विनोद बाजपेयी शामिल हैं।

वहीं, संपादकों के अलावा अन्य कार्यरत पत्रकारों के वर्ग में सात सदस्यों को नामित किया गया है। इनमें विनोद कोहली, गीतार्थ पाठक, प्रज्ञानंद चौधरी, किंग्शुक प्रमाणिक, सी.के. नायक, प्रसन्न कुमार मोहंती और बिजॉय काकचिंगताबम शामिल हैं।

सरकार ने इन नामांकनों के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय की 19 दिसंबर 2024 की अधिसूचना में संशोधन किया है। यह मूल अधिसूचना भारत के राजपत्र में 20 दिसंबर 2024 को प्रकाशित हुई थी। इसके बाद इसमें 2 दिसंबर 2025 को भी संशोधन किया गया था।

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‘आज तक’ ट्रेडमार्क विवाद में ‘सौराष्ट्र आजतक’ को सुप्रीम कोर्ट से झटका

सुप्रीम कोर्ट ने ‘सौराष्ट्र आजतक’ की याचिका खारिज करते हुए ‘सौराष्ट्र आज तक’ नाम के इस्तेमाल पर रोक रखी और दिल्ली कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए तीन महीने दिए।

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Published - Wednesday, 07 October, 2026
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Wednesday, 07 October, 2026
supremecourt

सुप्रीम कोर्ट ने गुजराती अखबार ‘सौराष्ट्र आजतक’ की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत अखबार को ‘सौराष्ट्र आज तक’ नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘आज तक’ समाचार चैनल संचालित करने वाला टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network) इस ट्रेडमार्क का पहले से इस्तेमाल करने वाला पक्ष है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant), जस्टिस जॉयमाल्या बागची (J Joymalya Bagchi) और जस्टिस वी. मोहना (J V. Mohana) की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि इंडिया टुडे (India Today) वर्ष 1995 से इस नाम का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस ट्रेडमार्क का ‘सेकेंडरी एसोसिएशन’ स्थापित होने की बात कही गई है, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से इसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए गए।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि टीवी टुडे नेटवर्क ने लाइसेंस एग्रीमेंट (License Agreement) तक पेश नहीं किया है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि इस्तेमाल से जुड़ा दस्तावेज रिकॉर्ड पर स्वीकार किया गया है। वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया और केवल पीडब्ल्यू1 (PW1) के पक्ष में एक बोर्ड प्रस्ताव दिया गया है।

जस्टिस बागची ने पूछा कि क्या इस संबंध में गवाह से जिरह की गई है और कहा कि मामला ‘पासिंग ऑफ’ (Passing Off) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि टीवी टुडे को यह दिखाना चाहिए था कि वह वास्तव में इस नाम का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने यह भी दलील दी कि संबंधित संस्था लिविंग मीडिया (Living Media) है, लेकिन उसे मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया। वकील ने कहा कि वह 26 वर्षों से इस नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ता किसी दूसरे नाम पर विचार कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए तीन महीने का समय दिया है।

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राजस्थान की बेटी रुबिका लियाकत के हाथों में होगी अब News18 Rajasthan की कमान

रुबिका लियाकत News18 India पर प्राइम टाइमस शो करेंगी। इसके साथ ही वह News18 Rajasthan में मैनेजिंग एडिटर की भूमिका निभाते हुए चैनल के संपादकीय कामकाज और कंटेंट स्ट्रैटेजी को लीड करेंगी।

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Published - Wednesday, 07 October, 2026
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Wednesday, 07 October, 2026
Rubika Liyaquat News18 Rajasthan

जानी-मानी पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर रुबिका लियाकत ने एक बार फिर Network18 में वापसी की है। इस बार उनकी वापसी एक अहम और व्यापक भूमिका के साथ हुई है। रुबिका लियाकत Network18 के राष्ट्रीय चैनल News18 India के प्राइम टाइम में नजर आएंगी, वहीं उन्हें समूह के राजस्थान चैनल News18 Rajasthan के संपादकीय नेतृत्व की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रुबिका लियाकत News18 India पर प्राइम टाइमस शो करेंगी। इसके साथ ही वह News18 Rajasthan में मैनेजिंग एडिटर की भूमिका निभाते हुए चैनल के संपादकीय कामकाज और कंटेंट स्ट्रैटेजी को लीड करेंगी।

Network18 में रुबिका की यह वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह इससे पहले News18 India की कंसल्टिंग एडिटर और प्राइम टाइम एंकर रह चुकी हैं। अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने कई बड़े राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष कार्यक्रमों और कवरेज का नेतृत्व किया था और चैनल के प्रमुख चेहरों में अपनी जगह बनाई थी।

अब Network18 ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। News18 India के प्राइम टाइम में वापसी के साथ वह एक बार फिर देशभर के दर्शकों से सीधे रूबरू होंगी। वहीं, समूह के News18 Rajasthan की जिम्मेदारी संभालकर वह क्षेत्रीय पत्रकारिता और संपादकीय नेतृत्व में भी अपनी भूमिका निभाएंगी।

रुबिका लियाकत के लिए राजस्थान से जुड़ी यह जिम्मेदारी खास है। मूल रूप से उदयपुर, राजस्थान की रहने वाली रुबिका ने राष्ट्रीय मीडिया में करीब दो दशक के अपने करियर में एक अलग पहचान बनाई है। अब अपने गृह राज्य से जुड़े News18 चैनल का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

Network18 में वापसी से पहले रुबिका लियाकत ने टाइम्स नाउ नवभारत में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर काम किया था। उन्हें वहां वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई थी। हाल ही में उन्होंने टाइम्स नाउ नवभारत से अपनी पारी समाप्त की थी। इसके बाद से ही मीडिया इंडस्ट्री में उनके अगले कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। अब Network18 में उनकी वापसी के साथ इन चर्चाओं पर विराम लग गया है।

रुबिका लियाकत ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Live India से की थी। इसके बाद उन्होंने News24, Zee News, ABP News, News18 India, Bharat24 और Times Now Navbharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में अलग-अलग महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। रिपोर्टिंग से लेकर एंकरिंग और संपादकीय नेतृत्व तक का लंबा अनुभव रखने वाली रुबिका लियाकत अब एक बार फिर Network18 के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय—दोनों प्लेटफॉर्म्स पर महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगी।

एक तरफ News18 India के प्राइम टाइम में उनका राष्ट्रीय चेहरा दर्शकों के सामने होगा, तो दूसरी तरफ News18 Rajasthan की मैनेजिंग एडिटर के रूप में वह चैनल के संपादकीय नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालेंगी। Network18 में उनकी नई पारी के लिए रुबिका लियाकत को ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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डेन नेटवर्क्स के बोर्ड की बैठक 13 अक्टूबर को, इस मुद्दे पर होगी चर्चा

कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि इस बैठक में 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही और छमाही के वित्तीय नतीजों पर विचार किया जाएगा।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
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Wednesday, 07 October, 2026
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डेन नेटवर्क्स लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 13 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है। कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि इस बैठक में 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही और छमाही के वित्तीय नतीजों पर विचार किया जाएगा।

कंपनी ने बताया कि यह बैठक सेबी के लिस्टिंग नियमों के रेग्युलेशन 29 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत आयोजित की जाएगी।

दूसरी तिमाही और पहली छमाही के नतीजों पर फैसला

डेन नेटवर्क्स के बोर्ड की बैठक में कंपनी के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड अनऑडिटेड वित्तीय नतीजों पर विचार किया जाएगा और उन्हें मंजूरी दी जा सकती है। ये नतीजे 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही और छमाही के लिए होंगे।

स्टैंडअलोन नतीजों में कंपनी के अकेले कारोबार का प्रदर्शन शामिल होता है, जबकि कंसोलिडेटेड नतीजों में कंपनी और उसकी संबंधित कंपनियों के संयुक्त कारोबार का प्रदर्शन दिखाया जाता है।

13 अक्टूबर को होगी बोर्ड बैठक

कंपनी के मुताबिक, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को होगी। बैठक में वित्तीय नतीजों को मंजूरी दिए जाने के बाद कंपनी इसकी जानकारी शेयर बाजारों को देगी।

 

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फ्लिपकार्ट में सौहार्द्य बनर्जी का हुआ प्रमोशन, बने डायरेक्टर

सौहार्द्य बनर्जी ने फ्लिपकार्ट में डायरेक्टर की नई भूमिका संभाली है। इससे पहले वह कंपनी में IoT डिवाइसेज के बिजनेस हेड थे और इससे पहले व्हर्लपूल तथा आईबीएम से जुड़े रहे।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
flipcart

सौहार्द्य बनर्जी (Souhardya Banerjee) ने फ्लिपकार्ट (Flipkart) में डायरेक्टर (Director) की नई भूमिका संभाली है। इससे पहले वह फ्लिपकार्ट में बिजनेस हेड-आईओटी डिवाइसेज (Business Head - IoT Devices) के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

इस भूमिका में वह स्मार्टवॉच, स्मार्ट बैंड, स्मार्ट रिंग, स्मार्ट ग्लासेज, ट्रैकर्स और अन्य वियरेबल डिवाइसेज (Wearable Devices) वाली कैटेगरी की जिम्मेदारी देख रहे थे।

फ्लिपकार्ट से जुड़ने से पहले बनर्जी करीब छह साल तक व्हर्लपूल कॉरपोरेशन (Whirlpool Corporation) के साथ जुड़े रहे। इससे पहले उन्होंने आईबीएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (IBM India Pvt Ltd) में भी काम किया है।

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नेटवर्क18 समूह में रुबिका लियाकत की हुई वापसी

जानी-मानी पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर रुबिका लियाकत एक बार फिर नेटवर्क18 (Network18) समूह के साथ जुड़ गुई हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
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जानी-मानी पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर रुबिका लियाकत एक बार फिर नेटवर्क18 (Network18) समूह के साथ जुड़ गुई हैं। विश्वसनीय सूत्रों ने हमारी सहयोगी वेबसाइट 'एक्सचेंज4मीडिया' (e4m) से इसकी पुष्टि की है। 

हालांकि, यहां उन्होंने किस पद पर जॉइन किया है और कौन सा शो करेंगी, फिलहाल इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं मिल सकी है।

बता दें कि रुबिका लियाकत ने इसी वर्ष जून में 'टाइम्स नाउ नवभारत' में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर नई पारी शुरू की थी। इसके साथ ही वह नेटवर्क में वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं। वह नोएडा स्थित नेटवर्क कार्यालय से अपनी भूमिका का निर्वहन कर रही थीं, जहां से उन्होंने पिछले दिनों ही अपनी पारी को विराम दे दिया था।

गौरतलब है कि 'टाइम्स नाउ नवभारत' से पहले रुबिका लियाकत 'न्यूज18 इंडिया' में कंसल्टिंग एडिटर और प्राइम-टाइम एंकर के रूप में कार्यरत थीं। वहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और विशेष कवरेज का नेतृत्व किया था और चैनल की प्रमुख चेहरों में शामिल थीं।

रुबिका लियाकत को ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म, राजनीतिक रिपोर्टिंग, प्राइम-टाइम एंकरिंग और न्यूजरूम नेतृत्व का 19 वर्षों से अधिक का अनुभव है। अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने एबीपी न्यूज, ज़ी न्यूज, न्यूज24, भारत24, लाइव इंडिया, नेटवर्क18 इंडिया और 'टाइम्स नाउ नवभारत' जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

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सरबजीत घडियोक बने सोडेक्सो में हेड ऑफ मार्केटिंग

सरबजीत घडियोक को सोडेक्सो में हेड ऑफ मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। वह मार्केटिंग पहलों का नेतृत्व करने के साथ संगठन की ग्रोथ और बिजनेस उद्देश्यों में योगदान देंगे।

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Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
sarabjeet

सरबजीत घडियोक (Sarbjeet Ghadiok) को सोडेक्सो (Sodexo) में हेड ऑफ मार्केटिंग (Head of Marketing) नियुक्त किया गया है। नई भूमिका में वह मार्केटिंग से जुड़ी पहलों का नेतृत्व करेंगे और संगठन की ग्रोथ व बिजनेस उद्देश्यों में योगदान देंगे।

घडियोक ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोडेक्सो में हेड ऑफ मार्केटिंग के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।

सोडेक्सो से पहले घडियोक टैबूला (Taboola) में सीनियर क्लाइंट पार्टनर (Sr. Client Partner) के पद पर कार्यरत थे। नई भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि वह संगठन के लिए वैल्यू बढ़ाने और सोडेक्सो की निरंतर ग्रोथ में योगदान देने पर काम करेंगे।

घडियोक ने इस नए प्रोफेशनल अध्याय को लेकर उत्साह जताया और सोडेक्सो के साथ आगे की यात्रा में योगदान देने की इच्छा व्यक्त की।

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D2M को बड़ा झटका! डिवाइस में चिप लगाने की अनिवार्यता के पक्ष में नहीं MeitY

सरकार ने साफ कर दिया है कि मोबाइल फोन और दूसरे उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए अपने डिवाइस में D2M तकनीक से जुड़ी चिप लगाना या डिवाइस को D2M के अनुकूल बनाना अनिवार्य नहीं होगा।

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Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारत में डायरेक्ट-टू-मोबाइल यानी D2M प्रसारण को व्यावसायिक रूप से शुरू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि मोबाइल फोन और दूसरे उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए अपने डिवाइस में D2M तकनीक से जुड़ी चिप लगाना या डिवाइस को D2M के अनुकूल बनाना अनिवार्य नहीं होगा। यानी फिलहाल कंपनियों के लिए D2M को अपनाना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सुझाव दिया है कि डिवाइस बनाने वाली कंपनियों के लिए D2M सुविधा स्वैच्छिक रखी जाए। इसका मतलब है कि स्मार्टफोन और दूसरे संबंधित उपकरणों में इस तकनीक को अनिवार्य करने की सरकार की योजना नहीं है।

यह फैसला D2M के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चा के एक अहम सवाल का जवाब देता है। इंडस्ट्री में यह इंतजार था कि क्या सरकार भविष्य में मोबाइल और अन्य डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को D2M सपोर्ट देना अनिवार्य करेगी।

470-582 MHz स्पेक्ट्रम बैंड को मंजूरी

सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने D2M प्रस्ताव को सीधे केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखने के बजाय इसे सचिवों की समिति (Committee of Secretaries-CoS) के पास भेजा था। इस समिति में दूरसंचार विभाग (DoT), MeitY, अंतरिक्ष विभाग (DoS) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हैं।

समिति ने D2M प्रसारण के लिए 470-582 MHz स्पेक्ट्रम बैंड के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही इसे लागू करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को भी मंजूरी दी गई है। इससे D2M को व्यावसायिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए एक नीतिगत ढांचा तैयार हो गया है।

अब सरकारी प्रसारक प्रसार भारती टेंडर की प्रक्रिया की तरफ बढ़ने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि अगले एक महीने में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया जा सकता है।

डिवाइस कंपनियों के लिए D2M पूरी तरह स्वैच्छिक

प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी ने बताया कि सरकार ने यह साफ कर दिया है कि डिवाइस कंपनियों के लिए D2M अनिवार्य नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि डिवाइस बनाने वाली कंपनियों पर D2M सिग्नल सपोर्ट करने या D2M तकनीक वाले डिवाइस बनाने की कोई बाध्यता नहीं है। यह पूरी तरह स्वैच्छिक है। कुछ कंपनियां पहले ही ऐसे डिवाइस के प्रोटोटाइप बना चुकी हैं, जो D2M सिग्नल हासिल कर सकते हैं। अगर बाजार में मांग बढ़ती है तो दूसरी कंपनियां भी इस तकनीक को अपनाएंगी।

इसका मतलब यह है कि सरकार शुरुआत में स्मार्टफोन और दूसरे डिवाइस निर्माताओं पर कोई नियामकीय दबाव नहीं डालना चाहती। अब D2M का इकोसिस्टम उपभोक्ताओं की मांग, प्रसारकों की भागीदारी, D2M वाले डिवाइस की उपलब्धता और कारोबारी फायदे के आधार पर विकसित होने की उम्मीद है।

DPR का काम लगभग पूरा

गौरव द्विवेदी के मुताबिक अब अगला कदम डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप देना और उसके बाद RFP जारी करना है। DPR का काम लगभग पूरा हो चुका है और उसका ड्राफ्ट प्रसार भारती को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि RFP तैयार किया जा रहा है और इसे अक्टूबर के अंत तक जारी किया जा सकता है।

यह RFP D2M के लिए काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इस तकनीक पर कई साल से काम और परीक्षण चल रहे हैं। RFP के जरिए यह साफ होने की उम्मीद है कि परियोजना का व्यावसायिक ढांचा किस तरह होगा और निजी कंपनियों की इसमें क्या भूमिका होगी।

क्या है D2M तकनीक?

D2M ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए टेलीविजन और दूसरे प्रसारण कंटेंट को सीधे मोबाइल फोन और दूसरे D2M-सक्षम डिवाइस तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए मोबाइल डेटा या इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होती। यानी अगर किसी डिवाइस में D2M की सुविधा मौजूद है तो उसमें प्रसारण कंटेंट सीधे प्रसारण नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जा सकता है।

इस तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर लाइव टीवी, खेल और दूसरे बड़े कार्यक्रमों के प्रसारण में किया जा सकता है। इससे मोबाइल नेटवर्क पर पड़ने वाला डेटा ट्रैफिक कम करने में भी मदद मिल सकती है।

डिवाइस सपोर्ट स्वैच्छिक होने से इंडस्ट्री में चिंता

हालांकि सरकार के इस फैसले को लेकर इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में चिंता भी है। कुछ प्रसारकों और इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि अगर डिवाइस कंपनियों के लिए D2M सपोर्ट अनिवार्य नहीं होगा तो बड़ी संख्या में D2M-सक्षम डिवाइस बाजार में लाना मुश्किल हो सकता है।

इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती D2M-सक्षम डिवाइस का पर्याप्त बड़ा आधार तैयार करना होगी। उनका कहना है कि अगर कंपनियों के लिए D2M सपोर्ट देना जरूरी नहीं है और ग्राहक भी अभी इस सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं तो डिवाइस निर्माता अपने उत्पादों में इसके लिए अतिरिक्त हार्डवेयर जोड़ने में तुरंत रुचि नहीं दिखा सकते।

इससे एक तरह की ‘चिकन एंड एग’ वाली स्थिति बन सकती है। प्रसारकों को कंटेंट और बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए बड़ी संख्या में D2M डिवाइस चाहिए होंगे, जबकि डिवाइस कंपनियां तभी बड़े स्तर पर इस तकनीक को अपनाना चाहेंगी जब उन्हें इसमें पर्याप्त कारोबारी अवसर दिखाई देगा।

स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से भी होगी चुनौती

D2M को पहले से मौजूद मोबाइल ब्रॉडबैंड, कनेक्टेड टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म से भी मुकाबला करना होगा। इन तकनीकों का इस्तेमाल उपभोक्ता पहले से बड़े स्तर पर कर रहे हैं। ऐसे में D2M की सफलता इस बात पर काफी निर्भर करेगी कि प्रसारक और पूरी D2M इंडस्ट्री उपभोक्ताओं के सामने इस तकनीक का कितना मजबूत फायदा पेश कर पाती है।

अगर लोगों को D2M के इस्तेमाल का कोई खास फायदा नजर नहीं आता है तो मोबाइल कंपनियां भी इसे प्राथमिकता देने से बच सकती हैं। खासकर स्मार्टफोन बाजार में कंपनियां पहले से ही डिवाइस की लागत को नियंत्रित करने और दूसरे फीचर्स के जरिए अपने उत्पादों को अलग दिखाने पर ध्यान देती हैं।

चिपसेट और ऐप की उपलब्धता भी अहम

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि D2M की सफलता सिर्फ स्पेक्ट्रम और प्रसारण ढांचे पर निर्भर नहीं करेगी। इसके लिए D2M-सक्षम चिपसेट, डिवाइस और एप्लिकेशन की उपलब्धता भी जरूरी होगी।

अगर अलग-अलग कंपनियों के डिवाइस में D2M सपोर्ट का स्तर अलग-अलग रहा तो प्रसारकों की पहुंच सीमित हो सकती है। इससे निजी कंपनियों के लिए भी इस तकनीक में निवेश करने का आकर्षण कम हो सकता है।

हालांकि सरकार फिलहाल बाजार के जरिए D2M को आगे बढ़ाने पर भरोसा कर रही है। पहले से तैयार D2M-सक्षम डिवाइस के प्रोटोटाइप शुरुआती आधार तैयार कर सकते हैं। इसके बाद अगर उपभोक्ताओं की मांग बढ़ती है तो ज्यादा कंपनियां D2M सपोर्ट वाले डिवाइस बाजार में ला सकती हैं।

अब प्रसार भारती की नजर RFP पर

प्रसार भारती के लिए फिलहाल सबसे बड़ा काम DPR को पूरा करना और RFP जारी करना है। इस टेंडर से परियोजना के व्यावसायिक ढांचे, निजी कंपनियों की भूमिका और बड़े स्तर पर D2M सेवाएं शुरू करने के तरीके को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

प्रसारक, टेक्नोलॉजी कंपनियां और डिवाइस निर्माता भी इस RFP पर नजर रखेंगे। इसकी वजह यह है कि इससे काफी हद तक यह तय हो सकता है कि D2M सरकारी परीक्षणों और प्रयोगों से आगे बढ़कर एक व्यावसायिक रूप से टिकाऊ प्रसारण प्लेटफॉर्म बन पाता है या नहीं।

सरकार का D2M को अनिवार्य नहीं करने का फैसला डिवाइस निर्माताओं के लिए एक नियामकीय बाधा जरूर कम करता है, लेकिन इसके साथ ही इंडस्ट्री पर इस तकनीक की मांग पैदा करने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।

स्पेक्ट्रम आवंटन को मंजूरी, PPP मॉडल को हरी झंडी और DPR के लगभग पूरा होने के साथ D2M अब एक अहम चरण में पहुंच गया है। इसकी असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित व्यावसायिक मॉडल प्रसारकों, टेक्नोलॉजी कंपनियों और डिवाइस निर्माताओं को D2M के इकोसिस्टम में निवेश के लिए कितना तैयार कर पाता है।

 

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दिल्ली पुलिस की पत्रकारों के लिए जारी गाइडलाइंस पर सुमित अवस्थी ने उठाए ये सवाल

दिल्ली पुलिस की ओर से धरना-प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए जारी गाइडलाइंस को लेकर वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने सवाल उठाए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
SumitAwasthi5412

दिल्ली पुलिस की ओर से धरना-प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए जारी गाइडलाइंस को लेकर वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिल्ली पुलिस की पोस्ट को साझा करते हुए पूछा कि अगर पत्रकारों के लिए प्रदर्शन कवर करने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, तो पुलिसकर्मियों के लिए भी ऐसी गाइडलाइन होनी चाहिए कि वे पत्रकारों को अपना काम करने दें।

सुमित अवस्थी ने दिल्ली पुलिस की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “दिल्ली पुलिस ने धरना-प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिये गाइडलाइंस जारी कीं… बहुत धन्यवाद 🙏!! पुलिसवालों के लिये क्या गाइडलाइन होंगी पत्रकारों को काम करने देने के लिये?? ये भी बताना चाहिये था….”

उन्होंने अपने पोस्ट में आगे कुछ ऐसे मुद्दे भी उठाए, जिन्हें लेकर उन्होंने सवाल किया है कि क्या प्रदर्शन के दौरान ऐसी चीजें पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के साथ इस्तेमाल या की जानी चाहिए।

सुमित अवस्थी ने सवाल करते हुए लिखा, “वैसे क्या ये सब मान्य है??” इसके बाद उन्होंने नुकीली कीलों वाले डंडे, सादी वर्दी में तैनात ‘गुंडे’, पैलेट गन, लाठियां, बिना नेमप्लेट वाले पुलिसकर्मी और अनुचित तरीके से पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों को छूने या टच करने का जिक्र किया।

उनका यह पोस्ट ऐसे समय आया है, जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों को लेकर कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने पत्रकारों से वैध पहचान पत्र साथ रखने और उसे स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने की सलाह दी है।

पुलिस की गाइडलाइंस में कहा गया है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पत्रकारों की पहचान आसानी से हो सके, इसके लिए उन्हें अपने संबंधित मीडिया संस्थान का वैध पहचान पत्र और/या वैध PIB/DIP मान्यता कार्ड साथ रखना चाहिए और उसे हर समय स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना चाहिए।

इसके अलावा पत्रकारों से यह भी कहा गया है कि उनकी मौजूदगी या गतिविधियों से पुलिस की कार्रवाई या कानून-व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारियों की आवाजाही में किसी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने तनावपूर्ण स्थिति में पत्रकारों को उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह भी दी है। पुलिस के मुताबिक, कवरेज और रिकॉर्डिंग के दौरान पत्रकारों को ऐसी स्थिति में रहना चाहिए जिससे वे प्रदर्शनकारियों से अलग स्पष्ट रूप से नजर आएं और अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रख सकें।

इसी गाइडलाइन को लेकर सुमित अवस्थी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पत्रकारों को भी अपना काम करने का मौका मिलना चाहिए और इस संबंध में पुलिसकर्मियों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए।

उन्होंने अपने पोस्ट में जिन नुकीली कीलों वाले डंडों, पैलेट गन, लाठियों, बिना नेमप्लेट वाले पुलिसकर्मियों और पत्रकारों या प्रदर्शनकारियों को अनुचित तरीके से छूने जैसे मामलों का जिक्र किया है, उन्हें सवाल के रूप में उठाया है।

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दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए जारी की गाइडलाइंस

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
Police78

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने कहा है कि किसी भी खबर को कवर करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि पत्रकार सुरक्षित तरीके से अपना काम करें। दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों से अपनी पहचान स्पष्ट रखने और पुलिस की कार्रवाई में किसी तरह की रुकावट न डालने की अपील की है।

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “कहानी महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे कवर करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है।” इसके साथ ही प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए कुछ गाइडलाइंस साझा की गई हैं।

वैध पहचान पत्र जरूर रखें

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि प्रदर्शन कवर करने के लिए मौके पर जाने वाले सभी पत्रकार अपने संबंधित मीडिया संस्थान की ओर से जारी वैध पहचान पत्र जरूर साथ रखें। यदि यह नहीं है तो पत्रकारों के पास वैध PIB या DIP मान्यता कार्ड होना चाहिए। पुलिस के मुताबिक, इन पहचान पत्रों से मौके पर मौजूद कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के लिए पत्रकारों की पहचान करना आसान होगा।

पहचान पत्र साफ दिखाई देना चाहिए

पुलिस ने पत्रकारों को सलाह दी है कि वे अपना पहचान पत्र हर समय ऐसी जगह लगाकर रखें, जहां वह साफ दिखाई दे। इसका मकसद यह है कि मौके पर मौजूद पुलिस और अन्य कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को यह आसानी से पता चल सके कि कौन व्यक्ति पत्रकार है।

पुलिस की कार्रवाई में रुकावट न डालें

दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों से यह भी कहा है कि प्रदर्शन की कवरेज के दौरान उनकी मौजूदगी या गतिविधियों से पुलिस की कार्रवाई या कानून-व्यवस्था संभाल रहे जवानों की आवाजाही में किसी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए।यानी पत्रकार अपना काम करते हुए इस बात का ध्यान रखें कि पुलिसकर्मियों के काम में बाधा न पड़े और उन्हें मौके पर कार्रवाई करने या आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिले।

तनावपूर्ण स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखें

पुलिस ने खास तौर पर तनावपूर्ण परिस्थितियों में पत्रकारों को उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। प्रदर्शन की कवरेज और रिकॉर्डिंग करते समय पत्रकारों को ऐसी जगह खड़ा होना चाहिए, जहां से वे सुरक्षित तरीके से पूरी स्थिति को कवर कर सकें। साथ ही उनकी स्थिति ऐसी होनी चाहिए जिससे उन्हें प्रदर्शनकारियों से अलग पहचानना आसान हो।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, पत्रकारों को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए इस तरह से कवरेज करनी चाहिए कि वे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच चल रही कार्रवाई में अनजाने में शामिल न हों।

पत्रकारों की सुरक्षा के साथ कवरेज पर जोर

दिल्ली पुलिस की इन गाइडलाइंस का मकसद प्रदर्शन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में पत्रकारों को अपना काम करने के दौरान सुरक्षित रखना और पुलिस की कार्रवाई को सुचारु बनाए रखना है। पुलिस ने पत्रकारों को वैध पहचान पत्र साथ रखने, उसे स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने, पुलिस की कार्रवाई में बाधा नहीं डालने और तनावपूर्ण स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।

दिल्ली पुलिस ने अपने संदेश के जरिए यह भी स्पष्ट किया है कि खबर को कवर करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ कवर करना भी उतना ही जरूरी है।

 

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