यह खबर एक ऐसे पत्रकार की है, जिनका नाम भारतीय मीडिया के इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज है। जी हां, यहां बात हो रही है वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की, जिन्होंने दशकों से भारतीय पत्रकारिता की दिशा तय की है।वह आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 24 मई 1965 को जन्मे राजदीप आज 62 वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। आने वाले अक्टूबर 2026 में वह पत्रकारिता के 38 सक्रिय वर्ष पूरे करेंगे और आज भी पूरी ऊर्जा के साथ इस पेशे में सक्रिय हैं।
राजदीप का करियर केवल पदों की सूची नहीं, बल्कि वह सफर है जिसने भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता को नया रूप दिया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी, जब वे 1988 में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से जुड़े और मुंबई संस्करण के सिटी एडिटर बने। राजदीप ने ब्रॉडकास्ट मीडिया में अपना सफर 1994 में शुरू किया, जब उन्होंने प्रिंट मीडिया में काम करने के बाद NDTV (New Delhi Television) में बतौर पॉलिटिकल एडिटर (राजनीतिक संपादक) जॉइन किया। इसके बाद वे NDTV 24x7 और NDTV इंडिया के मैनेजिंग एडिटर बने। वहां उन्होंने ‘द बिग फाइट’ जैसे चर्चित शो को होस्ट किया।
17 अप्रैल 2005 को NDTV से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने CNN और टीवी18 के साथ मिलकर अपनी मीडिया कंपनी ‘ग्लोबल ब्रॉडकास्ट न्यूज (GBN)’ शुरू की और CNN-IBN की नींव रखी, जो 17 दिसंबर 2005 को ऑन एयर हुआ। इसी समूह में 'चैनल 7' को भी शामिल किया गया, जिसे बाद में IBN7 के नाम से जाना गया। इसके अंतर्गत IBN-लोकमत जैसा चैनल भी शामिल हुआ।
राजदीप सरदेसाई CNN-IBN के पहले एडिटर-इन-चीफ बने और यह चैनल दिसंबर 2005 में ऑन-एयर हुआ। मई 2014 में जब रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने CNN-IBN, IBN7 और CNBC-TV18 जैसे नेटवर्क 18 समूह के चैनलों का अधिग्रहण किया, तो इसके कुछ ही हफ्तों बाद 1 जुलाई 2014 को राजदीप सरदेसाई और CNN-IBN की पूरी फाउंडिंग टीम ने नेटवर्क18 समूह से इस्तीफा दे दिया।
अपने करियर के दौरान उन्होंने प्राइमटाइम न्यूज एंकरिंग की, बड़े-बड़े एडिटोरियल टीम्स का नेतृत्व किया और भारत और विदेश के कई अहम व्यक्तित्वों का इंटरव्यू किया। वर्तमान में राजदीप सरदेसाई इंडिया टुडे ग्रुप के साथ कंसल्टिंग एडिटर के रूप में जुड़े हुए हैं।
राजदीप को पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए कई सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें 2008 में मिला ‘पद्मश्री’ प्रमुख है। इसके अलावा 2002 के गुजरात दंगों की रिपोर्टिंग के लिए उन्हें ‘इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टर्स अवार्ड’ और ‘रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड’ भी मिला।
वे एक प्रतिष्ठित लेखक भी हैं। उनकी किताबों में शामिल हैं:
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The Election that Changed India (2014)
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Democracy’s XI: The Great Indian Cricket Story
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Newsman: Tracking India in the Modi Era (2018)
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How Modi Won India (2019)
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The Election that Surprised India (2024)
साथ ही, उन्होंने ‘The Truth Hurts’ जैसे संग्रह में भी योगदान दिया है, जिसमें 2002 के दंगों में मीडिया की भूमिका को समझाया गया।
राजदीप का पारिवारिक जीवन भी खासा प्रेरणादायक रहा है। वे अहमदाबाद, गुजरात में जन्मे। उनके पिता दिलीप सरदेसाई भारतीय टेस्ट क्रिकेटर थे और उनकी मां नंदिनी सरदेसाई मुंबई की सामाजिक कार्यकर्ता और सेंट जेवियर्स कॉलेज की समाजशास्त्र विभाग की प्रमुख रही हैं। पढ़ाई की बात करें तो राजदीप ने कैम्पियन स्कूल और कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से स्कूली शिक्षा ली। फिर सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और आगे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून में डिग्रियां हासिल कीं। ऑक्सफोर्ड में उन्होंने यूनिवर्सिटी की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला और क्रिकेट ‘ब्लू’ की उपाधि प्राप्त की।
राजदीप की कहानी सिर्फ एक पत्रकार की नहीं, बल्कि उस जुनून की है जो सच की खोज में कभी नहीं थमता। एक ऐसे दौर में जब मीडिया लगातार बदल रहा है, राजदीप सरदेसाई जैसी शख्सियतें यह भरोसा दिलाती हैं कि पत्रकारिता की रीढ़ अब भी मजबूत है, जहां खबर सिर्फ शब्द नहीं, जिम्मेदारी होती है।