Zee5 में इस बड़े पद से राजनील कुमार का इस्तीफा, शुरू करेंगे नई पारी

राजनील कुमार ‘ZEE5’ से करीब ढाई साल से जुड़े हुए थे। उन्होंने यहां पर सितंबर 2018 में जॉइन किया था।

Last Modified:
Monday, 18 January, 2021
Rajneel Kumar

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) की ओटीटी सर्विस ‘ZEE5’ (Zee5) के बिजनेस हेड (Expansion Projects & Head of Products) राजनील कुमार (Rajneel Kumar) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जाता है कि वह दुबई के ‘जेनोमेडिया स्टूडियो’ (Genomedia Studios) को जॉइन करने जा रहे हैं, जो एक अरबी ओटीटी प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है।

राजनील कुमार ‘ZEE5’ से करीब ढाई साल से जुड़े हुए थे। उन्होंने यहां पर सितंबर 2018 में जॉइन किया था। ‘ZEE5’ से पहले वह ‘वायकॉम18’ (Viacom18) में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (Head Products & Technology) के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

अपने दो दशक से ज्यादा के करियर में वह ‘JumpGames’, ‘ALTBalaji’, ‘Mobile2Win’, ‘Startup’, ‘Shaw Wallace’ और Magnasound के साथ भी काम कर चुके हैं।

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यहां ईरान से जुड़ीं कई न्यूज वेबसाइट्स पर लगी रोक

अमेरिका में मंगलवार को ईरान से जुड़ीं कई न्यूज वेबसाइट्स पर रोक लगा दी गई है

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
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अमेरिका में मंगलवार को ईरान से जुड़ीं कई न्यूज वेबसाइट्स पर रोक लगा दी गई है। बात दें कि इन पर दुष्प्रचार फैलाने के आरोप में के न्‍याय विभाग और वाणिज्‍य विभाग ने कार्रवाई की है।  

इन वेबसाइट्स में ईरान की सरकारी मीडिया प्रेस टीवी की अंग्रेजी वेबसाइट, यमन के हूती विद्रोहियों का अल मसीराह सैटलाइट न्‍यूज चैनल और ईरान का सरकारी अरबी भाषा का टीवी चैनल अल-अलम शामिल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब तीन दर्जन वेबसाइट बंद की हैं, जिनमें से अधिकतर ईरान द्वारा किए जाने वाले दुष्प्रचार प्रयासों से जुड़ी थीं।

इन वेबसाइट्स पर जाने पर अमेरिका सरकार की ओर से अलर्ट आ रहा है। इस नोटिस में कहा गया कि अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी, ऑफिस ऑफ एक्सपोर्ट इंफोर्समेंट और फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन द्वारा वेबसाइट्स को कानून प्रवर्तन कार्रवाई के हिस्से के रूप में सीज किया गया है। अमेरिकी सरकार ने समाचार वेबसाइट फिलिस्तीन टुडे का डोमेन नाम भी अपने कब्जे में ले लिया है। यह वेबसाइट गाजा में सक्रिय हमास और इस्‍लामिक जिहाद की विचारधारा को पेश करती थी। इस वेबसाइट पर भी वही नोटिस आ रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह एक ऐसा कदम है, जिसे ईरानी मीडिया पर एक दूरगामी कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है।

अमेरिकी सरकार ने हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘IRNA’ ने अमेरिकी सरकार द्वारा वेबसाइट बंद करने की घोषणा की, लेकिन इस मामले पर कोई विस्तृत जानकारी मुहैया नहीं कराई।

पिछले साल अमेरिका के न्‍याय विभाग ने ऐलान किया था कि उसने ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड की करीब 100 वेबसाइट्स को बंद कर दिया है। तब अमेरिका ने कहा था कि ये वेबसाइट्स खुद को असली न्‍यूज वेबसाइट बताती हैं लेकिन असल में वे 'वैश्विक दुष्‍प्रचार अभियान' को चलाती हैं। इनका मकसद अमेरिका की नीतियों को प्रभावित करना और ईरानी प्रोपेगैंडा का दुनियाभर में प्रसार करना है।

अमेरिका ने यह कदम ईरान के राष्‍ट्रपति इब्राहिम रईसी के पदभार संभालने के कुछ ही दिन बाद उठाया है।

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IT नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से HC के जस्टिस ने खुद को किया अलग

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने सोमवार को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 की आवश्यकता को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
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दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने सोमवार को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 की आवश्यकता को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

आईटी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं क्विंट डिजिटल मीडिया लिमिटेड और इसकी निदेशक रितु कपूर, ‘द वायर’ प्रकाशित करने वाले फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म, फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज’ चलाने वाले प्रवदा मीडिया फाउंडेशन और अन्य द्वारा दायर की गई हैं।

याचिकाओं को जस्टिस भंभानी और जस्टिस जसमीत सिंह की अवकाश पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने मामले के लंबित रहने के दौरान अंतरिम सुरक्षा की मांग करने के लिए अदालती अवकाश के दौरान मामलों को सूचीबद्ध करने का उल्लेख किया था, लेकिन मामला सामने आते ही जस्टिस भंभानी ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि वह सुनवाई से हट रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि मामलों को अगले सोमवार को सूचीबद्ध किया जाएगा।

न्यायमूर्ति भंभानी ने कहा कि या तो वह मामले की सुनवाई कर सकते हैं या नहीं, कोई बीच का रास्ता नहीं है। अब यह मामला रोस्टर बेंच के समक्ष सूचीबद्ध है।

‘द क्विंट’ और ‘द वायर’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने कहा कि पहले याचिकाकर्ताओं के लिए नियमों के भाग 3 (जो डिजिटल मीडिया से संबंधित है) के तहत कठोर कदमों से अंतरिम सुरक्षा की मांग की थी, पीठ ने कहा कि वह इसे अभी नहीं देगी। हालांकि पीठ ने कहा था कि यदि कोई कठोर कदम उठाया जाता है, तो याचिकाकर्ता तत्काल सुनवाई की मांग करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

इससे पहले चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मई में गैर-जरूरी के आधार पर याचिकाओं की सुनवाई 4 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी थी। याचिकाओं के बैच में व्यक्तिगत याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील ने तर्क दिया था कि मामला अत्यावश्यक है, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित है।

गौरतलब है कि क्विंट द्वारा दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि डिजिटल न्यूज पोर्टल्स पर सामग्री को वस्तुतः निर्देशित करने की कार्यकारी शक्ति संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 (1) (ए) का पूरी तरह से उल्लंघन करेगी।

अन्य याचिकाओं में भी इसी तरह के तर्क दिए गए हैं। याचिका में कहा गया, ‘आईटी नियम, 2021 एक विशिष्ट और लक्षित वर्ग के रूप में समाचार और करेंट अफेयर्स की सामग्री के साथ डिजिटल पोर्टल पेश को करते हैं, जो एक ढीले-ढाले आचार संहिता के तहत विनियमित होते हैं और केंद्र सरकार के अधिकारियों द्वारा पूरी तरह से देखे जाते हैं।’

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि नियम राज्य को डिलीट करने, संशोधन या अवरुद्ध करने, निंदा, माफी के लिए मजबूर करने और अधिक के माध्यम से समाचार दर्ज करने और नियंत्रित करने के लिए अधिकार देते हैं। इसमें तर्क दिया गया, ऑनलाइन न्यूज पोर्टल्स को सोशल मीडिया से जोड़ना और प्रिंट न्यूज मीडिया से अलग करना अनुचित और तर्कहीन वर्गीकरण है।

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'डिजिटल मीडिया न होता तो कोरोना काल में लॉकडाउन से जनजीवन में आ जाता ठहराव'

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमएसी) नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि डिजिटलीकरण से देश में भ्रष्टाचार रोकने में काफी हद तक सफलता हासिल हुई है।

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
sanjay565

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमएसी) नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि डिजिटलीकरण से देश में भ्रष्टाचार रोकने में काफी हद तक सफलता हासिल हुई है। हमारे राजनेताओं और प्रशासकों की चिंता थी कि ऊपर से लाभार्थियों के लिए भेजे गए पैसे का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है, लेकिन आज सरकार की ओर से डिजिटल इंडिया पर जोर दिए जाने से एक क्लिक से सीधे लाभार्थियों के जनधन खातों में धनराशि पहुंच जाती है।

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग एवं आन्तरिक गुणवत्ता  सुनश्चयन  प्रकोष्ठ की ओर से संकाय संवर्धन कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन आयोजित हुई सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘डिजिटल दौर में  मीडिया का  बहुआयामी स्वरूप’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. द्विवेदी ने वर्तमान दौर में डिजिटल मीडिया की उपयोगिता पर चर्चा की।

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि अगर डिजिटल मीडिया न होता तो कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण जनजीवन ठहर जाता। न तो हम सार्वजनिक संवाद कर पाते न शिक्षा व्यवस्था और व्यापार ही चल पाता। लेकिन, डिजिटल मीडिया के कारण जीवन के जरूरी कार्यों को संचालन होता रहा। उन्होंने कहा कि जब भी कोई नई तकनीक आती है तो वह जीवन आसान करती है।

बतौर विशिष्ट अतिथि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में जनसंचार विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर वंदना पांडेय ने कहा कि डिजिटल मीडिया सूचना प्रसार का एक विधि है। आज की दुनिया डिजिटल उत्पादों से भरी हुई है। ऐसे में डिजिटल मीडिया की उपयोगिता बहुत बढ़ गई है। हमारा पूरा जीवन डिजिटल माध्यम पर आधारित हो गया है। सरकार भी अपनी योजनाओं के डिजिटलीकरण पर जोर दे रही है। अल्ट्रासाउंड आदि स्वास्थ्य सेवाएं भी डिजिटल हो चलीं हैं। तकनीक इस कदर विकसित हो चली है कि आज डिजिटल मीडिया से आगे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम होने लगा है। प्रो. वंदना पांडेय ने डिजिटल मीडिया के लिए सेल्फ रेगुलेशन की भी जरूरत बताई।

अध्यक्षता करते हुए वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि पत्रकारिता लाक्षणिक भाषा में बात करती है। पत्रकार मेहनती और कर्मठ होते हैं। पत्रकारिता मिशन भी है और प्रोफेशन भी। पत्रकारिता के व्यवसाय होने का मतलब व्यापार नहीं बल्कि रोजगार से है। अतिथियों का स्वागत आंतरिक गुणवत्ता सुनश्चयन प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. मानस पांडेय ने किया। कार्यशाला संयोजक और जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज मिश्र ने सात दिनों तक आयोजित कार्यशाला की रिपोर्ट पेश की और संचालन सह संयोजक डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने किया। सात दिनों तक चली कार्यशाला में डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. अवध बिहारी सिंह, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. लता चौहान, डॉ. बुशरा जाफरी सहित 21 राज्यों के सात सौ से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

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इस डिजिटल प्लेटफॉर्म में कंसल्टिंग एडिटर बने युवा पत्रकार स्वप्निल श्रीवास्तव

करीब छह महीने से मीडिया से दूरी बनाकर रखने वाले डिजिटल मीडिया के चेहरे स्वप्निल श्रीवास्तव ने अब अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

Last Modified:
Saturday, 19 June, 2021
Swapnil Srivastav

करीब छह महीने से मीडिया से दूरी बनाकर रखने वाले डिजिटल मीडिया के चेहरे स्वप्निल श्रीवास्तव ने अब अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्होंने नोएडा के सेक्टर-तीन से संचालित होने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कवरेज18’ (Coverage18) में बतौर कंसल्टिंग एडिटर जॉइन किया है।

बता दें कि पूर्व में स्वप्निल आब्जर्वर डॉन, मोजो भारत, मोजो पत्रकार और सूर्या समाचार जैसे प्लेटफॉर्म्स में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। अपने फेसबुक पोस्ट में स्वप्निल ने लिखा है कि कवरेज18 की उनकी ये पारी अंतिम और निर्णायक होगी।

समाचार4मीडिया की ओर से स्वप्निल श्रीवास्तव को उनकी नई पारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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TRAI ने ऐसे लोगों के लिए शुरू की ‘टीवी चैनल सेलेक्टर’ वेबसाइट

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने ऐसे डीटीएच व केबल टीवी उपभोक्ताओं के लिए बुधवार को एक ‘टीवी चैनल सेलेक्टर’ वेबसाइट की शुरुआत की है

Last Modified:
Thursday, 17 June, 2021
TRAI

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने ऐसे डीटीएच व केबल टीवी उपभोक्ताओं के लिए बुधवार को एक ‘टीवी चैनल सेलेक्टर’ वेबसाइट की शुरुआत की है, जिनके पास स्मार्टफोन नही है और इस वजह से वे इसके ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। या फिर ऐसे लोग, जो वेब ब्राउजर का उपयोग करना चाहते हों।

स्मार्टफोन के लिए ‘टीवी सेलेक्टर ऐप’ पिछले साल 25 जून को शुरू किया गया था, जिससे उपभोक्ता अपना ‘सब्सक्रिप्शन’ देख सकते हैं, उसमें बदलाव कर सकते हैं, केबल सेवा प्रदाता द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी चैनल देख सकते हैं और अपनी रुचि के चैनल चुन सकते हैं।

यह दिसंबर 2018 में अधिसूचित एक विनियम के तहत किया गया था और तभी से यह देखा जा रहा था कि उपभोक्ता अपने ऑपरेटर के अनुसार, वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर अपनी रुचि का टीवी चैनल चुनने में दिक्कत का सामना कर रहे थे।

प्राधिकरण ने अपनी वर्तमान अधिसूचना में कहा, ‘ट्राई ने अब टीवी सेलेक्टर वेबसाइट भी विकसित की है जिससे उन उपभोक्ताओं को सुविधा होगी जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है या जो वेबसाइट ब्रॉउजर का इस्तेमाल करना चाहते हैं। ऐप और वेबसाइट की मुख्य विशेषता है कि डीटीएच/केबल ऑपरेटर को भेजने से पहले सब्सक्रिप्शन में बदलाव किया जा सकता है ताकि उपभोक्ताओं को लाभ हो सके।’

प्राधिकरण ने यह भी कहा कि पोर्टल में ऐप की सभी विशेषताएं हैं और डाउनलोड की सुविधा भी है।

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इस बड़े पद पर SonyLIV से जुड़े श्रीधर रेड्डी कोमल

श्रीधर रेड्डी ने एनआईटी वारंगल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद आईआईटी मद्रास से एमएस (रिसर्च) किया है और उन्हें एमएस थीसिस के लिए गोल्ड मेडल मिला है।

Last Modified:
Wednesday, 16 June, 2021
SONY LIV

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) ने श्रीधर रेड्डी कोमल (Sreedhar Reddy Komalla) को अपनी वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस ‘सोनी लिव’ (SonyLIV) का हेड (तेलुगु कंटेंट) नियुक्त किया है। अपनी इस भूमिका में वह विभिन्न मार्केट्स में यूजर्स के लिए सोनी लिव के तेलुगु वर्टिकल के विस्तार की योजनाओं का नेतृत्व करेंगे।   

श्रीधर रेड्डी ने एनआईटी वारंगल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद आईआईटी मद्रास से एमएस (रिसर्च) किया है और उन्हें एमएस थीसिस के लिए गोल्ड मेडल मिला है।

पूर्व में श्रीधर रेड्डी करीब 11 साल तक कई प्रमुख मल्टीनेशनल आईटी कंपनियों जैसे-टीसीएस, विप्रो और टेक महिंद्रा में काम कर चुके हैं और इसके बाद फिल्म निर्माण के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने आईटी करियर छोड़ दिया था।

तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में मधुर श्रीधर रेड्डी के नाम से मशहूर श्रीधर रेड्डी कोमल को तेलुगु सिनेमा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने म्यूजिक कंपनी मधुर ऑडियो (Madhura Audio) की स्थापना कर अपने फिल्म करियर की शुरुआत की थी और इसे काफी ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनकी पहले निर्देशित फिल्म स्नेहा गीतम (Sneha Geetham) थी, जिसके लिए उन्हें बेस्ट नवोदित डायरेक्टर का पुरस्कार मिला। इसके बाद पिछले 10 वर्षों में उन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों को डायरेक्ट और प्रड्यूस किया है।  

रेड्डी तेलुगु फिल्म निर्माताओं के तमाम संगठनों जैसे-तेलुगु फिल्म डायरेक्टर्स एसोसिएशन, तेलुगु प्रड्यूसर्स काउंसिल, एक्टिव तेलुगु फिल्म प्रड्यूसर्स गिल्ड आदि में सक्रिय सदस्य के तौर पर भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

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Netflix में इस बड़े पद से अजय अरोड़ा ने दिया इस्तीफा

‘ओवर द टॉप’ प्लेटफॉर्म ‘नेटफ्लिक्स’ (Netflix) में अजय अरोड़ा करीब चार साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

Last Modified:
Friday, 11 June, 2021
Ajay Arora

‘ओवर द टॉप’ (OTT) प्लेटफॉर्म ‘नेटफ्लिक्स’ (Netflix) में डायरेक्टर Product Innovation (Growth) अजय अरोड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह यहां करीब चार साल से कार्यरत थे और इस दौरान उन्होंने भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए एक नया कम कीमत वाला नेटफ्लिक्स प्लान पेश किया। इस प्लेटफॉर्म ने भारत में एक मोबाइल-ओनली प्लान लॉन्च किया था, जिसकी कीमत 199 रुपये प्रति माह थी।

अपनी लिंक्डइन पोस्ट में अजय अरोड़ा का कहना है, ‘नेटफ्लिक्स में चार साल के सफर के बाद मैं यहां से विदाई ले रहा हूं। मैं एक छोटा ब्रेक ले रहा हूं और अपने अगले कदम को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं।‘ बता दें कि अपने दो दशक से ज्यादा के करियर में अजय अरोड़ा Motorola, Cisco, McKinsey, Bubble Motion, Audible, Imgur और Netflix जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं।

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NBF ने बनाई डिजिटल मीडिया के लिए उपसमिति, और अधिक ब्रॉडकास्टर्स हो सकते हैं शामिल

एनबीएफ के सभी सदस्य नई डिजिटल मीडिया उप समिति से संबद्ध हैं और यह अपने साथ अधिक ब्रॉडकास्टर्स को शामिल करने पर विचार कर रहा है।

Last Modified:
Thursday, 10 June, 2021
NBF

न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) ने अब डिजिटल रूप में मौजूदगी वाले ब्रॉडकास्टर्स के लिए डिजिटल मीडिया उपसमिति (subcommittee) शुरू की है। यह डिजिटल मीडिया उपसमिति इस सप्ताह की शुरुआत में प्रभाव में आई है। इस कदम से ब्रॉडकास्टर्स के पास स्व: नियामक संस्थाओं (self-regulatory bodies) के लिए और अधिक विकल्प मौजूद होंगे, हालांकि यह सिर्फ न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के लिए है।

‘एनबीएफ‘ के सभी सदस्य वर्तमान में नवगठित डिजिटल मीडिया उपसमिति के साथ संबद्ध हैं और यह अपने साथ अधिक ब्रॉडकास्टर्स को शामिल करने पर विचार कर रहा है। ‘एनबीएफ‘ में वर्तमान में Dighvijay, DY365 News, First India Rajasthan, Gulistan News, IBC24, India News, JK 24X7, Living India News, News Live, News Nation, NewsX, North East Live, Odisha TV, Prag News, MH One News, PuthiyaThalaimurai TV, News First Kannada, Republic Bharat, Republic TV, S Newz, TV5, and Twenty Four News शामिल हैं।

इस बारे में ‘एनबीएफ‘ के महासचिव जय कृष्णा (Jai Krishna) का कहना है, ‘डिजिटल मीडिया के विस्तार से न्यूज के उपभोग (consumption of news) के तरीकों में काफी बदलाव आया है और यह बड़ी स्क्रीन से निकलकर छोटी स्क्रीन जैसे-मोबाइल, टैबलेट आदि में आ गई है। डिजिटल में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की क्षमता भी है। मजबूत सेल्फ रेगुलेटरी ढांचे के साथ एनबीएफ की डिजिटल मीडिया उपसमिति, डिजिटल मौजूदगी वाले ट्रेडिशनल न्यूज ब्रॉडकास्टर्स द्वारा समाचारों के नियामक अनुपालन में और अधिक स्पष्टता लाने का काम करेगी। यह डिजिटल के ऑडियंस के लिए जिम्मेदाराना न्यूज ब्रॉडकास्टिंग भी सुनिश्चित करेगी।‘

‘एनबीएफ‘ के अनुसार, डिजिटल कंटेंट के मामले में उपसमिति ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय‘ (एमआईबी) के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि ब्रॉडकास्टर्स को सेल्फ रेगुलेशन की नई व्यवस्था के तहत मदद मिल सके।

बता दें कि ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन‘ (NBA) के साथ-साथ ‘एनबीएफ‘ पहले ही सूचना प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर पारंपरिक न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को नए आईटी नियमों से बाहर रखने की मांग कर चुका है। नए नियमों के अनुसार, डिजिटल मीडिया पर न्यूज पब्लिशर्स को केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियमन अधिनियम के तहत भारतीय प्रेस परिषद के पत्रकारीय आचरण के मानदंडों और कार्यक्रम संहिता का पालन करना आवश्यक है। एनबीएफ ने एक आरटीआई दाखिल कर इन नए नियमों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

‘एनबीएफ’ के महासचिव के अनुसार, ‘ब्रॉडकास्टर्स कई बार उसी कंटेंट को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करते हैं, जिसे वह टीवी पर इस्तेमाल करते हैं। यह कंटेंट पहले से ही तमाम कानूनों जैसे-केबल टेलीविजन रेगुलेशन एक्ट 1995 और अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस2011 आदि से रेगुलेट होता है। इस तरह के कंटेंट के लिए नए आईटी नियमों का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि इससे बेवजह और अतिरिक्त फिल्टर लगेगा। हमारी डिजिटल उपसमिति ब्रॉडकास्टर्स के हित में काम करेगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें नई योजना में किसी भी तरह के मार्गदर्शन में मदद करेगी।‘

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ZEE5 में इस बड़े पद पर हुई मानसी सप्रे की नियुक्ति

‘ZEE5’ से पहले मानसी तीन साल से ज्यादा समय से ‘Vuclip’ के साथ जुड़ी हुई थीं और Viu app पर कंटेंट स्ट्रैटेजी व प्रोग्रामिंग का काम देखती थीं।

Last Modified:
Tuesday, 01 June, 2021
Manasi Sapre

मोबाइल वीडियो ऑन डिमांड सर्विस ‘Vuclip’ की पूर्व सीनियर डायरेक्टर (कंटेंट) मानसी सप्रे ने 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) की ओटीटी सर्विस ‘ZEE5’ (Zee5) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने यहां पर बतौर हेड (कंटेंट) जॉइन किया है।

‘ZEE5’ से पहले मानसी तीन साल से ज्यादा समय से ‘Vuclip’ के साथ जुड़ी हुई थीं। अपनी इस पारी के दौरान वह विभिन्न प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न क्षेत्रों में Viu app पर कंटेंट स्ट्रैटेजी और प्रोग्रामिंग का काम देखती थीं। बता दें कि ‘Viu’ ने दिसंबर 2019 में भारत में अपने परिचालन को बंद कर दिया था।  

‘Vuclip’ से पहले मानसी सप्रे जाने-माने अंतरराष्ट्रीय वीडियो ऑन डिमांड ओटीटी प्लेटफॉर्म Lebara Play में हेड (Acquisitions, strategy, and content partnership - Indian Subcontinent) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। 2007 से 2014 के बीच वह रोनी स्क्रूवाला के मूवी चैनल्स यूटीवी नेटवर्क की लीडरशिप टीम में शामिल रह चुकी हैं, जिसे वॉल्ट डिज्नी ने अधिगृहीत कर लिया था।

यही नहीं, अपने करीब 19 साल के करियर में वह ‘ईटीवी नेटवर्क’ (ETV Network) और ‘हंगामा टीवी’ (Hungama TV) के साथ भी बतौर एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर काम कर चुकी हैं।

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सरकार ने डिजिटल मीडिया पब्लिशर्स से मांगा ये ब्योरा, दिया 15 दिनों का समय

लगभग 60 पब्लिशर्स और उनसे जुड़े संगठनों ने मंत्रालय को सूचित किया है कि उन्होंने नए नियम के तहत स्व-नियामक निकायों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Last Modified:
Thursday, 27 May, 2021
MIB

सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने सभी डिजिटल मीडिया पब्लिशर्स, जिनमें ओटीटी प्लेटफॉर्म्स भी शामिल हैं, को नई इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड (new Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) के तहत अपनी सभी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है। सूचना प्रसारण मंत्रालय की डिजिटल मीडिया डिवीजन ने डिजिटल मीडिया पब्लिशर्स को नोटिस भेजकर यह समस्त जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। पब्लिशर्स को इस नोटिस के जारी होने के 15 दिनों के भीतर तय फॉर्मेट में मंत्रालय को सूचना देनी होगी।

पब्लिशर्स की ओर से अधिकृत व्यक्ति द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित एक पीडीएफ फाइल में यह समस्त जानकारी ई-मेल के द्वारा एमआईबी के डिप्टी सेक्रेट्री अमरेंद्र सिंह annarendra.singh@nic.in  अथवा एमआईबी के असिस्टेंट डायरेक्टर क्षितिज अग्रवाल kshitij.aggarwal@gov.in को भेजनी होगी।

इसके लिए मंत्रालय ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स (जो ट्रेडिशनल मीडिया यानी टीवी और अखबार में भी न्यूज टेलिकास्ट/पब्लिश करते हैं), अन्य डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देने वाले पब्लिशर्स के लिए अलग-अलग फॉर्मेट जारी किए हैं, जिनमें उन्हें सभी जानकारी देनी होगी।  

नोटिस में कहा गया है कि नए नियमों की अधिसूचना के बाद से सूचना प्रसारण मंत्री ने ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट पब्लिशर्स के साथ-साथ डिजिटल मीडिया पर न्यूज देने वाले पब्लिशर्स के साथ बातचीत की है। मंत्रालय की ओर से कई डिजिटल मीडिया पब्लिशर्स और उनके संगठनों के साथ इस बारे में संपर्क किया गया है।

नोटिस के अनुसार, लगभग 60 पब्लिशर्स और उनसे जुड़े संगठनों ने मंत्रालय को सूचित किया है कि उन्होंने नियम के तहत स्व-नियामक निकायों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ पब्लिशर्स ने नियमों के तहत मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन के संबंध में मंत्रालय को पत्र भी लिखा है। इस संबंध में सूचित किया जाता है कि डिजिटल मीडिया पब्लिशर्स को मंत्रालय में पहले रजिस्ट्रेशन की कोई आवश्यकता नहीं है। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के नियम 18 (new Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) 2021 में न्यूज एंड करेंट अफेयर्स और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट पब्लिशर्स द्वारा मंत्रालय को कुछ तय जानकारी देने का प्रावधान है।

जिस तरह समाचार पत्र प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 के तहत पंजीकृत हैं और निजी सैटेलाइट टीवी चैनल्स मंत्रालय के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग दिशानिर्देश (2011) के तहत अनुमति धारक हैं,  उसी तरह डिजिटल मीडिया पर न्यूज और करेंट अफेयर्स पब्लिशर्स के लिए जानकारी प्रस्तुत करने के लिए एक अलग फॉर्मेट तैयार किया गया है। मंत्रालय की ओर से जारी नोटिस में यह भी कहा गया है कि इन संस्थाओं को किसी भी बदलाव के बारे में 30 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी को सूचित करना होगा।

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स (जो ट्रेडिशनल मीडिया यानी टीवी और अखबार में भी न्यूज टेलिकास्ट/पब्लिश करते हैं) को इस फॉर्मेट में सूचना देनी होगी।

I.   Basic Information

A. Name of the Title:

B. Language(s) in which content is published:

C. Website URL:

D. Mobile App(s):

E. Social media account(s):

II.  Entity Information

A. Name of Entity:

B. RNI Registration Number or TV Channels permitted by the Ministry:

III. Contact Information (in India)

A. Contact person(s):

B. Address:

C. Telephone Number (Landline):

D. Mobile:

E. E-mail:

IV. Grievance Redressal Mechanism

A. Grievance Redressal Officer (in India):

B. Name of the Self Regulating Body of which the publisher is a member:

C. Particulars of News Editor(s):

अन्य डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को इस फॉर्मेट में जानकारी देनी होगी।

1. Basic Information:

A. Name of the Title:

B. Language(s) in which content is published:

C. Website URL:

D. Mobile App(s):

E. Social media (all outlets) account(s):

2. Entity Information

A. Name of Entity:

B. PAN No. (optional):

C. Month and Year of Incorporation:

D. Month and Year of commencement of operations as digital news publisher:

E. Company Identification Number (for companies only):

F. Board of Directors for companies only):

3. Contact Information (in India)

A. Contact person(s):

B. Address:

C. Telephone Number (Landline):

D. Mobile:

E. E-mail:

4.  Grievance Redressal Mechanism

A. Grievance Redressal Officer (in India):

B Name of the Self Regulating Body of which the publisher is a member:

C. Particulars of News Editor(s):

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए इस फॉर्मेट में समस्त जानकारी देनी होगी।

I.  Basic Information

A. Name of OTT Platform:

B. Website

C. Mobile App(s):

II.  Entity Information

A. Name of Entity:

B. PAN No. (optional):

C. Month and Year of Incorporation (for Indian companies):

D. Country of registration (in respect of foreign entities):

E. Month and Year of commencement of operations in India:

F. Company Identification Number for Indian companies):

G. Names of Board of Directors (for companies):

III. Contact information (in India)

A. Contact person(s):

B. Address:

C. Telephone Number (Landline):

D. Mobile:

E. E-mail:

IV. Grievance Redressal Mechanism

A. Grievance Redressal Officer (in India):

B. Name of the Self Regulating Body of which the publisher is a member:

C. Particulars of Content Manager(s):

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