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भारत में माइक्रोड्रामा कंटेंट का बूम: इंस्टाग्राम व यूट्यूब के बीच उभरते नए खिलाड़ी

भारत का शॉर्ट-वीडियो कंटेंट इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव के केंद्र में हैं माइक्रोड्रामा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago

कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारत का शॉर्ट-वीडियो कंटेंट इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव के केंद्र में हैं माइक्रोड्रामा- ऐसे बेहद संक्षिप्त, भावनात्मक और ट्विस्ट से भरे वीडियो जो एक मिनट से भी कम समय में पूरी कहानी कह जाते हैं। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स जैसे प्लेटफॉर्म्स ने इस फॉर्मेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, जिससे अब कई नए खिलाड़ी इस क्षेत्र में उतर चुके हैं।

नए खिलाड़ी, नए प्रयोग

इस तेजी से उभरते सेगमेंट में Reelies, ReelSaga और Flick TV जैसे प्लेटफॉर्म्स स्थानीय भाषाओं में छोटे-छोटे फिक्शन एपिसोड के साथ सामने आए हैं। खास बात यह है कि ये सभी मोबाइल-फर्स्ट उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए टियर-2 और टियर-3 शहरों को टारगेट कर रहे हैं। Reelies (जिसे अंशुमान मिश्रा और अंशुमाली झा ने शुरू किया)ने महज छह महीनों में 4 लाख से ज्यादा डाउनलोड हासिल किए हैं। वहीं Flick TV को कुछ ही हफ्तों में 10 हजार डाउनलोड मिल चुके हैं।

निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी

शॉर्ट-वीडियो कंटेंट के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए निवेशक भी तेजी से इसमें रुचि दिखा रहे हैं। Flick TV ने 2025 की शुरुआत में कुशल सिंगल और प्रतीक आनंद द्वारा स्थापित किए जाने के बाद Stellaris Venture Partners के नेतृत्व में Gemba Capital और Titan Capital की भागीदारी से 2.3 मिलियन डॉलर की सीड फंडिंग जुटाई है। ReelSaga (जिसकी स्थापना शुभ बंसल, शानू विवेक और रितेश पांडे ने की) ने भी पिछले महीने Picus Capital, Nazara Technologies, ITI Growth Opportunities Fund और 8i Ventures समेत अन्य एंजेल निवेशकों से 2.1 मिलियन डॉलर जुटाए हैं।

शॉर्ट-फॉर्म में ओटीटी की चुनौती

टिकटॉक के भारत से बाहर होने के बाद देश में शॉर्ट-वीडियो का बाजार पूरी तरह से गर्म है। एक ओर जहां इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसी दिग्गज कंपनियां मौजूद हैं, वहीं Moj और Chingari जैसे देसी ऐप्स और नए खिलाड़ी Flick TV व ReelSaga तेजी से उभर रहे हैं। भारत में अब 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर्स हैं और अधिकांश मोबाइल-फर्स्ट हैं। RedSeer के अनुमान के मुताबिक यह सेगमेंट 2030 तक 8 से 12 अरब डॉलर का हो सकता है।

PTPL India के COO और पूर्व SonyLIV एग्जिक्यूटिव पेप फिगेरेडो कहते हैं, “माइक्रोड्रामा का उभार दर्शकों की आदतों, क्रिएटर्स की लॉयल्टी और नए मोनेटाइजेशन मॉडल को दर्शाता है। यह वायरल वीडियो से आगे जाकर सीरियलाइज्ड स्टोरीटेलिंग का दौर है।”

"डिजिटल सोप्स" की नई लत

DentsuX के मीडिया लीड अनिल सोलंकी मानते हैं कि यह ट्रेंड छोटे शहरों और जेनरेशन Z में खासा लोकप्रिय हो रहा है। यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से जुड़ाव बनाने का एक तरीका बन गया है। एक मीडिया विश्लेषक इसे “डिजिटल सोप्स” की संज्ञा देते हैं- हर दिन लौटकर देखने की लत लगाने वाला फॉर्मेट।

Flick TV के कुशल सिंगल कहते हैं, “चीन का 7 अरब डॉलर का माइक्रोड्रामा बाजार इस बात का सबूत है कि भारत भी अगले 5 साल में 5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।”

माइक्रोपेमेंट से कमाई के नए रास्ते

कुछ प्लेटफॉर्म्स ऐसे भी हैं जो माइक्रोपेमेंट मॉडल पर प्रयोग कर रहे हैं, उदाहरण के लिए प्रतिदिन सीमित एपिसोड देखने के लिए छोटी-छोटी राशि वसूलना। इससे विज्ञापन पर निर्भरता कम होती है और बजट-फ्रेंडली यूजर्स को बनाए रखना आसान होता है।

Infectious के डिजिटल हेड अबरार नकुड़ा कहते हैं, “यदि कंटेंट राजा है, तो ध्यान (attention) उसकी गद्दी है और फिलहाल, इस गद्दी पर मजबूती से शॉर्ट-फॉर्म स्टोरीटेलिंग बैठी है'' वे आगे कहते हैं, "तेज भावनात्मक जुड़ाव वाले और कम समय की मांग करने वाले फॉर्मेट (high-emotion, low-commitment formats) आज जीत रहे हैं, क्योंकि दर्शकों को इससे जल्दी 'dopamine hit' यानी संतुष्टि और आनंद की अनुभूति मिल जाती है।"

ओटीटी के लिए चेतावनी

फिगेरेडो मानते हैं कि माइक्रोड्रामा पारंपरिक ओटीटी मॉडल को दर्शक, क्रिएटर और ब्रैंड स्पेंडिंग के मामले में कड़ी चुनौती दे रहा है। पारंपरिक ओटीटी को अब मोबाइल-फर्स्ट स्ट्रैटेजी और स्नैकेबल फॉर्मेट अपनाने की जरूरत है।

सोलंकी इसे “हाइब्रिड जॉनर” कहते हैं, जो ओटीटी की गहराई और सोशल मीडिया की गति का संगम है। नकुड़ा आगे जोड़ते हैं, “हम माइक्रो-बिंजिंग की ओर बढ़ रहे हैं, जहां मिनी एंथोलॉजी और कैप्सूल ड्रामा मुख्यधारा बन सकते हैं।”

ब्रैंड्स को भी मिला नया मंच

ब्रैंड्स भी अब माइक्रोड्रामा में अपनी जगह बना रहे हैं। न केवल इंटीग्रेशन के जरिए, बल्कि स्वतंत्र ब्रैंडेड सीरीज के रूप में भी। उदाहरण के तौर पर Canva’s Calm Chori और ListenTBH x Jeevansathi’s Finding Forever को देखा जा सकता है। नकुड़ा कहते हैं, “जब दो मिनट में कहानी खत्म हो जाए और किरदार याद रह जाएं, तब मार्केटिंग स्मार्ट हो जाती है।”

वे आगे जोड़ते हैं, “यह क्रिएटर गोल्ड रश का दौर है। ये प्लेटफॉर्म ‘क्रिएटर-फर्स्ट ओटीटी’ बनते जा रहे हैं, जहां क्षेत्रीय कहानीकारों को पहली बार राष्ट्रीय मंच मिल रहा है।”

माइक्रोड्रामा फॉर्मेट अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक नई डिजिटल संस्कृति बनकर उभर रहा है। पारंपरिक ओटीटी से लेकर ब्रैंड्स और निवेशक तक, सभी इसके संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं। अब जो प्लेटफॉर्म तेजी से मोबाइल-फर्स्ट थिकिंग, स्केलेबल फॉर्मेट और स्मार्ट मोनेटाइजेशन मॉडल को एडॉप्ट करेगा,  वही भारत के डिजिटल एंटरटेनमेंट के भविष्य को परिभाषित करेगा।


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