अन्वी दधीच ने संभाली जियोब्लैकरॉक में मार्केटिंग की जिम्मेदारी

अन्वी दधीच का फोकस निवेश सलाहकार सेवाओं को पहली बार निवेश करने वालों और जटिल वेल्थ पोर्टफोलियो वाले निवेशकों तक पहुंचाने पर रहेगा।

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Friday, 16 October, 2026
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जियोब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स (JioBlackRock Investment Advisers) ने अन्वी दधीच को मार्केटिंग फंक्शन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी है। कंपनी का लक्ष्य भारत में निवेश सलाहकार सेवाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आसान तरीके से पहुंचाना है।

अन्वी दधीच ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वह निवेश सलाहकार सेवाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के इस अवसर को लेकर उत्साहित हैं। उनका फोकस पहली बार निवेश करने वाले लोगों के साथ-साथ जटिल वेल्थ पोर्टफोलियो संभालने वाले निवेशकों की जरूरतों को पूरा करने पर रहेगा।

जियोब्लैकरॉक से पहले अन्वी पावरअप मनी (PowerUp Money) के साथ थीं। वहां उन्होंने जनवरी से अगस्त 2026 तक एसोसिएट मार्केटिंग डायरेक्टर (Associate Marketing Director) के रूप में काम किया। इससे पहले वह कंपनी में कंटेंट और मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल चुकी थीं और प्रोडक्ट मार्केटिंग तथा ब्रांड मार्केटिंग पर भी काम किया।

पावरअप मनी से पहले अन्वी ने दिसंबर 2022 से सितंबर 2023 तक स्वतंत्र ब्रांड मार्केटिंग कंसल्टेंट के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने उद्यमी राज शमानी के साथ फिगरिंग आउट (Figuring Out) में उनके पर्सनल ब्रांड को विकसित करने पर काम किया। उन्होंने टीम मैनेजमेंट और ब्रांड पार्टनरशिप तैयार करने की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके अलावा शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को ब्रांड पोजिशनिंग, सोशल मीडिया और कंटेंट स्ट्रैटेजी पर सलाह दी।

अन्वी ने यूनिकार्ड्स (Uni Cards) में भी एक साल से ज्यादा समय तक काम किया, जहां उन्होंने ब्रांड एंड मार्केटिंग मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर-ब्रांड एंड मार्केटिंग जैसी भूमिकाएं निभाईं। यहां उनका काम ब्रांड कैंपेन, कम्युनिटी बिल्डिंग, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, परफॉर्मेंस मार्केटिंग और कस्टमर सक्सेस से जुड़ा रहा।

उन्होंने मई 2019 में वीवर्क इंडिया (WeWork India) के साथ एसोसिएट मार्केटिंग स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर करियर की शुरुआत की। बाद में वह सीनियर एसोसिएट-डिजिटल मार्केटिंग एंड स्ट्रैटेजी बनीं। यहां उन्होंने मार्केटिंग स्ट्रैटेजी, पार्टनरशिप, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और वीवर्क ऑन-डिमांड (WeWork On-Demand) डे-पास ऑफरिंग पर काम किया।

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YouTube Music पर अब AI से बने गानों की होगी पहचान, लेबल से मिलेगी जानकारी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल म्यूजिक इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यूट्यूब ने गानों में एआई के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है।

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Friday, 16 October, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल म्यूजिक इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यूट्यूब ने गानों में एआई के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। कंपनी ने YouTube Music पर ऐसे लेबल देने शुरू किए हैं, जिनकी मदद से श्रोता पहचान सकेंगे कि किसी गाने को बनाने में जनरेटिव एआई (Generative AI) का कितना इस्तेमाल हुआ है। इस सुविधा को आगे मुख्य YouTube ऐप पर भी शुरू किया जाएगा।

ये लेबल गाने के प्लेयर पेज पर दिखाई देंगे। श्रोता इन पर क्लिक करके जान सकेंगे कि गाने को तैयार करने में एआई की क्या भूमिका रही है। इसके लिए यूट्यूब म्यूजिक इंडस्ट्री के भागीदारों के साथ काम कर रहा है। साथ ही, कंपनी अपने डिटेक्शन सिस्टम की मदद से भी एआई से तैयार किए गए गानों की पहचान करेगी। यूट्यूब के दूसरे कंटेंट में एआई के इस्तेमाल की जानकारी देने के लिए पहले से लागू व्यवस्था को अब म्यूजिक के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

यूट्यूब ने कहा, “हमारा लक्ष्य दर्शकों और श्रोताओं को उनके देखे और सुने जाने वाले कंटेंट के बारे में सही जानकारी और स्पष्टता देना है, ताकि उनके लिए यह समझना आसान हो कि वे क्या देख या सुन रहे हैं।”

तीन श्रेणियों में बांटे जाएंगे गाने

यूट्यूब की इस व्यवस्था के तहत म्यूजिक इंडस्ट्री के भागीदार गानों को एआई के इस्तेमाल के आधार पर तीन श्रेणियों में रख सकेंगे। इनमें ‘फुली जनरेटिव एआई’, ‘पार्शियली जनरेटिव एआई’ और ‘नो जनरेटिव एआई’ शामिल हैं। 

फुली जनरेटिव एआई (Fully Gen AI): इस श्रेणी में वे गाने आएंगे, जो पूरी तरह एआई की मदद से तैयार किए गए हैं।

पार्शियली जनरेटिव एआई (Partly Gen AI): इसमें ऐसे गाने शामिल होंगे, जिनमें एआई से तैयार किए गए हिस्सों के साथ कलाकारों का योगदान भी हो। इसमें कलाकारों की लाइव प्रस्तुति जैसे हिस्से भी शामिल हो सकते हैं।

नो जनरेटिव एआई (No Gen AI): इस श्रेणी में वे गाने रखे जाएंगे, जो ऊपर बताई गई दोनों एआई श्रेणियों में नहीं आते।

इस तरह श्रोताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी गाने को तैयार करने में एआई की कितनी भूमिका रही है और उसमें कलाकारों का कितना योगदान है।

हर डिजिटल बदलाव पर नहीं लगेगा AI लेबल

यूट्यूब ने यह भी स्पष्ट किया है कि गाने में इस्तेमाल होने वाले हर डिजिटल टूल के कारण उसे एआई से बना गाना नहीं माना जाएगा। उदाहरण के लिए, ऑटो-ट्यून (Auto-Tune) की मदद से आवाज का सुर ठीक करना अपने आप में किसी गाने को एआई से तैयार गानों की श्रेणी में नहीं रखता।

इस व्यवस्था का मकसद जनरेटिव एआई के जरिए संगीत या आवाज तैयार करने और म्यूजिक प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले सामान्य टूल्स के बीच अंतर स्पष्ट करना है। यानी केवल आवाज में सुधार करने या किसी सामान्य तकनीक का इस्तेमाल करने से गाने पर एआई का लेबल नहीं लगेगा।

Apple Music और Spotify भी उठा रहे हैं कदम

एआई से तैयार होने वाले गानों की बढ़ती संख्या के बीच म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म अपने-अपने तरीके से पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

Apple Music की योजना इस साल के अंत में अपने ‘एआई ट्रांसपेरेंसी टैग्स’ के तहत ‘मेड विद एआई’ (Made With AI) लेबल शुरू करने की है। वहीं, Spotify भी एआई से जुड़े लेबल लगाने के उपाय शुरू कर चुका है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म ने म्यूजिक स्पैम से निपटने के लिए एक फिल्टर भी पेश किया है।

हालांकि, सभी प्लेटफॉर्म एआई से तैयार गानों को लेकर एक जैसा तरीका नहीं अपना रहे हैं। कुछ सेवाएं ऐसे गानों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने या उनसे कमाई करने पर पाबंदियां लगाती हैं, जबकि यूट्यूब फिलहाल गाने में एआई के इस्तेमाल की जानकारी देने पर जोर दे रहा है।

यूट्यूब पर किसी गाने में एआई का इस्तेमाल होने का मतलब यह नहीं है कि उससे कमाई नहीं की जा सकती। यानी केवल एआई की मदद से गाना तैयार होने के कारण वह कमाई के लिए अयोग्य नहीं हो जाता।

गाने बनाने में भी AI का इस्तेमाल कर रहा YouTube

यूट्यूब सिर्फ एआई से तैयार गानों की पहचान करने की व्यवस्था ही नहीं बना रहा, बल्कि संगीत तैयार करने में भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी के ‘ड्रीम ट्रैक’ (Dream Track) टूल की मदद से चुनिंदा क्रिएटर्स भाग लेने वाले कलाकारों की एआई से तैयार आवाजों का इस्तेमाल करके साउंडट्रैक बना सकते हैं।

इस तरह यूट्यूब संगीत के क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल दो स्तरों पर कर रहा है। एक तरफ यह क्रिएटर्स को एआई की मदद से संगीत बनाने के साधन दे रहा है, तो दूसरी तरफ श्रोताओं को यह बताने की व्यवस्था भी कर रहा है कि किसी गाने को तैयार करने में इस तकनीक की क्या भूमिका रही है।

श्रोताओं को मिलेगी अपनी पसंद चुनने की आजादी

जैसे-जैसे म्यूजिक प्रोडक्शन में एआई की भूमिका बढ़ रही है, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के सामने चुनौती यह है कि श्रोताओं को सही जानकारी मिले, लेकिन तकनीक के हर इस्तेमाल को एक जैसा न माना जाए। यूट्यूब के नए लेबल इसी दिशा में एक कदम हैं। इनकी मदद से श्रोता जान सकेंगे कि किसी गाने में एआई का इस्तेमाल हुआ है या नहीं और फिर अपनी पसंद के हिसाब से तय कर सकेंगे कि वे क्या सुनना चाहते हैं। 

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हैदराबाद को वैश्विक कंटेंट हब बनाने की तैयारी, तेलंगाना सरकार ने पेश की योजना

हैदराबाद अब सिर्फ फिल्मों, एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स से जुड़े काम करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दुनिया के लिए अपना कंटेंट बनाने और उसके अधिकार अपने पास रखने वाला बड़ा केंद्र बनना चाहता है।

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Friday, 16 October, 2026
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हैदराबाद अब सिर्फ फिल्मों, एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स (VFX) से जुड़े काम करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दुनिया के लिए अपना कंटेंट बनाने और उसके अधिकार अपने पास रखने वाला बड़ा केंद्र बनना चाहता है। इसी दिशा में तेलंगाना सरकार ने 14 अक्टूबर को फ्रांस के कान में आयोजित Mipcom Cannes 2026 में हैदराबाद को वैश्विक कंटेंट निर्माण, रचनात्मक तकनीक और निवेश के केंद्र के रूप में पेश किया।

सरकार ने इस मौके पर दिसंबर में होने वाले IndiaJoy 2026 के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ की घोषणा की। साथ ही, राज्य की प्रस्तावित AVGC IMAGE 2.0 नीति की भी झलक दिखाई। इस पहल का मकसद दुनिया के बड़े स्टूडियो, ओटीटी मंचों, प्रसारण कंपनियों और निवेशकों को हैदराबाद में काम शुरू करने और लंबे समय तक निवेश करने के लिए आकर्षित करना है।

तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू ने इस पहल का नेतृत्व किया। उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल ने प्रसारण कंपनियों, फिल्म निर्माताओं, स्ट्रीमिंग मंचों और निवेशकों से मुलाकात की। सरकार का संदेश साफ था कि हैदराबाद अब केवल दूसरे देशों और कंपनियों के लिए तकनीकी सेवाएं देने वाला केंद्र नहीं रहना चाहता। वह मौलिक कंटेंट बनाने, उसके बौद्धिक संपदा अधिकार (IP) अपने पास रखने और रचनात्मक उद्योग में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

7 से 13 दिसंबर तक होगा IndiaJoy 2026

IndiaJoy 2026 का आयोजन 7 से 13 दिसंबर तक हैदराबाद के भारत फ्यूचर सिटी में किया जाएगा। यह आयोजन 7 से 9 दिसंबर तक होने वाले Invest Telangana Global Summit 2026 के साथ भी जुड़ा रहेगा। यह शिखर सम्मेलन राज्य की ‘Telangana Rising 2047’ योजना का हिस्सा है।

दोनों आयोजनों की तारीखें आसपास रखने का मकसद निवेशकों और उद्योग जगत के बड़े लोगों को एक ही समय पर हैदराबाद में जुटाना है, ताकि रचनात्मक उद्योग में निवेश और कारोबारी साझेदारी के नए अवसर बन सकें।

एक सप्ताह तक चलने वाले IndiaJoy में फिल्म, एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स से जुड़े कार्यक्रम होंगे। इनमें सम्मेलन, प्रदर्शनियां, फिल्मों और अन्य कंटेंट की स्क्रीनिंग, विशेषज्ञों की मास्टरक्लास, ई-स्पोर्ट्स मुकाबले और प्रशंसकों के लिए विशेष गतिविधियां शामिल होंगी।

इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में DreamHack Hyderabad, Hyderabad Comic Con, VFX Summit और DesiToons शामिल हैं।

निवेशकों और कंटेंट निर्माताओं को जोड़ने पर जोर

IndiaJoy 2026 में निवेश और कारोबारी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए दो खास पहल भी होंगी। इनमें Investor-Producer Connect और Writer-Producer Pitch Arena शामिल हैं।

Investor-Producer Connect के जरिए निवेशकों और निर्माताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी। वहीं, Writer-Producer Pitch Arena में लेखक अपनी कहानियों और नए विचारों को निर्माताओं के सामने रख सकेंगे।

इन पहलों का मकसद स्टूडियो, वितरकों, ओटीटी मंचों, प्रकाशकों और तकनीकी कंपनियों के बीच साझेदारी के रास्ते खोलना है। इसके जरिए संयुक्त निर्माण, कंटेंट के इस्तेमाल और वितरण के अधिकारों से जुड़े समझौतों और मौलिक कहानियों पर आधारित नई परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना है।

सरकार चाहती है कि हैदराबाद में केवल दूसरों के लिए कंटेंट तैयार न हो, बल्कि यहां की कंपनियां और रचनाकार अपनी कहानियों, पात्रों और अन्य रचनात्मक संपत्तियों को विकसित करें और उनके व्यावसायिक अधिकारों से भी कमाई कर सकें।

क्या है AVGC IMAGE 2.0 नीति?

Mipcom Cannes 2026 में तेलंगाना सरकार ने प्रस्तावित AVGC IMAGE 2.0 नीति की भी जानकारी दी। AVGC का मतलब एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स है। इस नीति को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि भारत में उत्पादन और रचनात्मक कामकाज के लिए जगह तलाशने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

प्रस्तावित नीति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने लायक प्रोत्साहन, आधुनिक बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित लोगों की उपलब्धता पर जोर दिया जा रहा है।

इसका दायरा केवल फिल्मों या विज्ञापनों के लिए उत्पादन सेवाएं देने तक सीमित नहीं होगा। इसमें वर्चुअल प्रोडक्शन, रियल-टाइम रेंडरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड आधारित कामकाज और गेमिंग तकनीक जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इसके अलावा, मौलिक कंटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकार विकसित करने तथा उन्हें बाजार में उतारने के अवसर बढ़ाने की योजना है। सरकार बड़ी कंपनियों को हैदराबाद में निवेश करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन साझेदारी विकसित करने के लिए भी आकर्षित करना चाहती है।

इस नीति का पूरा खाका तेलंगाना सरकार की आगामी औद्योगिक और निवेश संबंधी घोषणाओं का हिस्सा बनने की उम्मीद है।

IMAGE Tower बनेगा रचनात्मक उद्योग का केंद्र

तेलंगाना की इस योजना में IMAGE Tower को भी अहम माना जा रहा है। करीब 16 लाख वर्ग फुट में प्रस्तावित यह इमारत एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों के लिए तैयार की जानी है।

इसका उद्देश्य एक ही परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्टूडियो, उत्पादन सुविधाओं और तकनीकी स्टार्टअप को जगह उपलब्ध कराना है। यहां साझा सुविधाओं के साथ ऐसा बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है, जिसका इस्तेमाल कंपनियां सीधे अपने उत्पादन कार्यों के लिए कर सकें।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस तरह की सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को हैदराबाद में अपना काम शुरू करने और उसका विस्तार करने में मदद करेंगी।

हैदराबाद में पहले से मौजूद है मजबूत आधार

हैदराबाद में पहले से ही एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स और संबंधित क्षेत्रों की 150 से अधिक कंपनियां काम कर रही हैं। शहर में इस उद्योग से जुड़े रचनात्मक पेशेवरों की संख्या करीब 30,000 बताई गई है।

Netflix के Eyeline Studios ने भी हैदराबाद में अपनी पहली भारतीय सुविधा शुरू की है। इसे शहर में विजुअल इफेक्ट्स और वर्चुअल प्रोडक्शन के बढ़ते महत्व के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इसके अलावा, हैदराबाद में तकनीक और इंजीनियरिंग से जुड़े कुशल लोगों की उपलब्धता भी एक अहम ताकत है। तेलंगाना सरकार का मानना है कि इन खूबियों के साथ आधुनिक बुनियादी ढांचा और निवेश के अवसर मिलकर वैश्विक कंपनियों को यहां अपना कारोबार स्थापित करने के लिए आकर्षित कर सकते हैं।

‘दुनिया के लिए तेलंगाना में बनाएं कंटेंट’

संजय जाजू ने कहा कि वैश्विक मनोरंजन उद्योग का भविष्य रचनात्मकता, तकनीक और पूंजी के मेल से तय होगा। उनके मुताबिक, तेलंगाना खुद को इस बदलाव के केंद्र में स्थापित करने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि IndiaJoy और Telangana Rising Global Summit के जरिए दुनिया के रचनाकारों, निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को एक साथ लाकर सार्थक साझेदारी विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

जाजू ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और रचनाकारों को तेलंगाना में काम शुरू करने और दुनिया के लिए कंटेंट बनाने का न्योता भी दिया।

Mipcom Cannes में तेलंगाना के प्रतिनिधिमंडल में Invest Telangana के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी. अजीत रेड्डी, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार विभाग के संयुक्त सचिव अनुदीप दुरिशेट्टी तथा Invest Telangana में AVGC और ऑरेंज इकोनॉमी के निदेशक वल्लभी ए. भी शामिल थे।

कान में हुई यह पहल दिसंबर में हैदराबाद में होने वाले आयोजनों की तैयारी का हिस्सा है। तेलंगाना सरकार की कोशिश है कि IndiaJoy 2026 और प्रस्तावित IMAGE 2.0 नीति के जरिए हैदराबाद को वैश्विक रचनात्मक उद्योग में सिर्फ उत्पादन सेवाएं देने वाले शहर के बजाय मौलिक कंटेंट, बौद्धिक संपदा और निवेश के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए। 

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Netflix में 1,000 नौकरियों पर संकट, खर्च घटाने की तैयारी

नेटफ्लिक्स में दुनियाभर में करीब 1,000 नौकरियां खत्म होने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी अपने कुल कर्मचारियों की संख्या में करीब 6% की कटौती करने की योजना बना रही है।

Last Modified:
Thursday, 15 October, 2026
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नेटफ्लिक्स में दुनियाभर में करीब 1,000 नौकरियां खत्म होने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी अपने कुल एम्प्लॉयीज की संख्या में करीब 6% की कटौती करने की योजना बना रही है। कंपनी कारोबार की बढ़ती चुनौतियों, दर्शकों की भागीदारी और खर्च की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाने पर विचार कर रही है।

अगर यह योजना लागू होती है, तो 2022 के बाद नेटफ्लिक्स में एम्प्लॉयीज की यह सबसे बड़ी कटौती होगी। उस साल कंपनी ने मई में करीब 150 और जून में लगभग 300 एम्प्लॉयीज की नौकरियां खत्म की थीं। उस समय कंपनी ने कहा था कि वह कम होती राजस्व वृद्धि के अनुरूप अपने खर्च की बढ़ोतरी को नियंत्रित कर रही है, लेकिन कारोबार में निवेश जारी रखेगी। यह फैसला कंपनी के एक दशक से ज्यादा समय में पहली बार तिमाही आधार पर सब्सक्राइबरों की संख्या घटने के बाद लिया गया था।

प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और लीगल टीमों पर असर की आशंका

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, नेटफ्लिक्स के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्रेग पीटर्स और टेड सारंडोस ने बुधवार सुबह एम्प्लॉयीज को ईमेल के जरिए प्रस्तावित कटौती की जानकारी दी।

रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले का सबसे ज्यादा असर प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी, कानूनी मामलों और मानव संसाधन से जुड़ी टीमों पर पड़ने की आशंका है।

एम्प्लॉयीज को भेजे गए ईमेल में दोनों अधिकारियों ने कहा कि दुनिया भर के लोगों का मनोरंजन करना कंपनी का बड़ा लक्ष्य है। इसे पूरा करने के लिए जरूरी है कि कंपनी अपने एम्प्लॉयीज और संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर करे और उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे, जहां सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि नेटफ्लिक्स उन क्षेत्रों में निवेश जारी रखेगी, जहां से कारोबार को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। हालांकि, कंपनी अलग-अलग कारोबारी जरूरतों के हिसाब से अपने संसाधनों के बंटवारे को लेकर फैसले लेगी।

अधिकारियों ने एम्प्लॉयीज को भरोसा दिलाया कि कंपनी पूरे साल के लिए तय अपनी कमाई के अनुमान को हासिल करने की राह पर है।

फिल्मों और सीरीज से आगे बढ़ रही है कंपनी

नौकरियों में कटौती की खबर ऐसे समय आई है, जब नेटफ्लिक्स अपनी पारंपरिक स्ट्रीमिंग सेवाओं से आगे बढ़कर मनोरंजन के नए तरीकों पर काम कर रही है। कंपनी की कोशिश है कि दर्शक उसके प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताएं और उसकी सामग्री से जुड़े रहें।

नेटफ्लिक्स ने वीडियो पॉडकास्ट, यूट्यूब पर लोकप्रिय क्रिएटर्स के कार्यक्रमों, लाइव स्पोर्ट्स और दूसरे लाइव आयोजनों की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अलावा, कंपनी लाइव टीवी चैनलों और दूसरी स्ट्रीमिंग सेवाओं के साथ मिलकर पैकेज उपलब्ध कराने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर चुकी है।

इन पहलों का मकसद फिल्मों और वेब सीरीज के अलावा भी दर्शकों को देखने के लिए ज्यादा विकल्प देना है। इससे कंपनी को नए दर्शक जोड़ने और मौजूदा दर्शकों को अपने साथ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

2026 की पहली छमाही में 97 अरब घंटे से ज्यादा देखा गया कंटेंट

नेटफ्लिक्स के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में उसके सदस्यों ने कुल 97 अरब घंटे से ज्यादा समय तक कंटेंट देखा। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2% अधिक है।

कंपनी ने दर्शकों की भागीदारी को अच्छा बताया है। उसका कहना है कि इस आकलन में केवल यह नहीं देखा जाता कि दर्शकों ने कितने घंटे कंटेंट देखा, बल्कि कार्यक्रमों की गुणवत्ता और विविधता को भी ध्यान में रखा जाता है।

इस तरह कंपनी के सामने स्थिति मिली-जुली है। एक ओर प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखने का कुल समय बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर कंपनी यह दोबारा तय कर रही है कि उसके कर्मचारी और दूसरे संसाधन किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा प्रभाव डाल सकते हैं।

खर्च और विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती

दुनियाभर की टेक्नोलॉजी और मनोरंजन कंपनियां इस समय खर्च पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ कारोबार बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रही हैं। नेटफ्लिक्स के सामने भी यही चुनौती है। उसे नई तरह की सामग्री और मनोरंजन सेवाओं में निवेश करना है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि खर्च का इस्तेमाल सही जगह हो।

अगर रिपोर्ट में बताई गई योजना लागू होती है, तो करीब 1,000 नौकरियों में कटौती कंपनी के कामकाज और एम्प्लॉयीज के ढांचे में एक बड़ा बदलाव होगी। यह 2022 के बाद नेटफ्लिक्स की सबसे बड़ी छंटनी होगी। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अपने खर्च और संसाधनों की प्राथमिकताओं की समीक्षा कर रही है। प्रस्तावित कटौती का उद्देश्य नए कारोबारी अवसरों में निवेश जारी रखते हुए लागत पर ज्यादा ध्यान देना है। 

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YouTube पर अब सवाल पूछकर खोज सकेंगे वीडियो, मोबाइल पर आया नया AI फीचर

यूट्यूब पर अब वीडियो खोजने का तरीका बदलने जा रहा है। कंपनी ने अमेरिका में मोबाइल इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए अपने नए AI फीचर ‘Ask YouTube’ की शुरुआत की है।

Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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यूट्यूब पर अब वीडियो खोजने का तरीका बदलने जा रहा है। कंपनी ने अमेरिका में मोबाइल इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए अपने नए AI फीचर ‘Ask YouTube’ की शुरुआत की है। इसकी मदद से यूजर्स सामान्य भाषा में सवाल पूछकर अपनी पसंद के वीडियो खोज सकेंगे। इसके लिए उन्हें पहले की तरह सिर्फ कुछ शब्द लिखकर सर्च करने और नतीजों में से सही वीडियो चुनने पर निर्भर नहीं रहना होगा।

इस फीचर के जरिए यूजर्स यूट्यूब के सर्च बार में दिए गए ‘Ask’ विकल्प पर जाकर अपना सवाल लिख सकते हैं। इसके बाद उन्हें सवाल से जुड़े वीडियो, क्लिप, शॉर्ट्स और जरूरी जानकारी एक साथ दिखाई जाएगी। यह सुविधा फिलहाल अमेरिका में मोबाइल पर शुरू की गई है। इससे पहले यह वेब और टीवी डिवाइस पर उपलब्ध थी।

सवाल पूछकर खोज सकेंगे वीडियो

यूट्यूब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नील मोहन ने सोशल मीडिया मंच X पर इस फीचर के मोबाइल विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कुछ उदाहरण भी साझा किए, जिनसे पता चलता है कि यूजर्स इसका इस्तेमाल किस तरह कर सकते हैं।

मसलन, कोई यूजर पूछ सकता है कि पतझड़ के मौसम में सबसे खूबसूरत रंग दिखाने वाले राष्ट्रीय उद्यान कौन-से हैं। इसी तरह, सैन फ्रांसिस्को से लॉस एंजिल्स तक तीन दिन की सड़क यात्रा की योजना बनाने या घर पर खुद अपने बालों की फ्रिंज काटने का तरीका जानने के लिए भी सवाल पूछा जा सकता है।

इस फीचर का मकसद वीडियो खोजने की प्रक्रिया को ज्यादा आसान और बातचीत जैसा बनाना है। यूजर्स पहले एक सामान्य सवाल पूछ सकते हैं और फिर उससे जुड़े अगले सवालों के जरिए अपनी जरूरत के मुताबिक जानकारी हासिल कर सकते हैं।

एक ही बातचीत में मिलेंगे वीडियो और जानकारी

‘Ask YouTube’ की मदद से किसी विषय पर जानकारी पाने के लिए हर बार नई सर्च शुरू करने की जरूरत कम हो सकती है। यह फीचर सवाल से जुड़े वीडियो, उनके छोटे हिस्से यानी क्लिप, शॉर्ट्स और लिखित जानकारी को एक साथ पेश करता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई यूजर सड़क यात्रा की योजना बना रहा है, तो वह पहले रास्ते से जुड़े सुझाव मांग सकता है। इसके बाद वह अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से आगे के सवाल पूछकर विकल्पों को सीमित कर सकता है। इस तरह यूजर सामान्य जानकारी से आगे बढ़कर अपने काम की ज्यादा खास जानकारी तक पहुंच सकता है।

अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था परीक्षण

यूट्यूब ने इस फीचर का परीक्षण अप्रैल 2026 में शुरू किया था। इसके बाद कंपनी ने Google I/O कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी। जुलाई तक यह अमेरिका में डेस्कटॉप पर उपलब्ध हो गया था, जबकि अगस्त में इसे टीवी डिवाइस तक भी बढ़ाया गया। अब मोबाइल पर इसकी शुरुआत के साथ फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स भी इसका फायदा उठा सकेंगे।

कंपनी ने यह भी बताया है कि वह बातचीत पर आधारित AI सुविधाओं को सीधे शॉर्ट्स और लाइव स्ट्रीम के वीडियो देखने वाले पेजों पर लाने की योजना बना रही है। इससे यूजर्स वीडियो देखते समय ही उससे जुड़े सवाल पूछ सकेंगे और अतिरिक्त जानकारी हासिल कर सकेंगे।

वीडियो बनाने वालों के लिए भी अहम बदलाव

‘Ask YouTube’ का असर वीडियो बनाने वालों यानी क्रिएटर्स के लिए भी अहम हो सकता है। जब यूजर्स पूरे सवाल लिखकर वीडियो खोजेंगे, तो मंच को उनकी जरूरत और वीडियो की विषयवस्तु के बीच संबंध समझने में मदद मिल सकती है।

ऐसे में वीडियो का साफ और जानकारी देने वाला शीर्षक, विषय के अनुसार व्यवस्थित सामग्री और अलग-अलग हिस्सों के लिए बनाए गए चैप्टर उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, इस फीचर की शुरुआत का मतलब यह नहीं है कि इन चीजों को अपनाने से किसी वीडियो की सर्च रैंकिंग अपने आप बेहतर हो जाएगी।

Google ने भारत में क्रिएटर्स के लिए भी शुरू की सुविधा

यूट्यूब के इस कदम के बीच गूगल ने भारत में योग्य क्रिएटर्स और प्रकाशकों के लिए ‘Search Profiles’ की सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए वे यूट्यूब, इंस्टाग्राम, X और टिकटॉक जैसे मंचों पर अपनी मौजूदगी को एक ही प्रोफाइल में जोड़ सकते हैं। यह प्रोफाइल गूगल सर्च के जरिए लोगों को दिखाई दे सकती है।

यह सुविधा भारत, अमेरिका और कनाडा में उपलब्ध है। इसके लिए क्रिएटर की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और किसी एक समर्थित मंच पर उसके कम से कम 10,000 फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर होने चाहिए।

पात्र यूजर्स profile.google.com/claim पर जाकर अपने गूगल खाते से साइन इन कर सकते हैं और अपने सोशल मीडिया खातों को जोड़ सकते हैं। वे अपनी प्रोफाइल में परिचय और लिंक भी अपडेट कर सकते हैं। गूगल एक खाते के जरिए अधिकतम 10 अलग-अलग प्रोफाइल संभालने की सुविधा देता है। इससे उन क्रिएटर्स और प्रकाशकों को मदद मिल सकती है, जो कई चैनल या डिजिटल ब्रांड चलाते हैं।

हालांकि, Search Profiles बनाने से गूगल सर्च में किसी क्रिएटर की रैंकिंग सीधे बेहतर नहीं होती। यह सुविधा लोगों को क्रिएटर के अलग-अलग मंचों पर मौजूद खातों और उसके काम तक पहुंचने का एक और रास्ता देती है। इसके जरिए लोग Google Discover पर भी उनकी ऑनलाइन मौजूदगी खोज सकते हैं।

डिजिटल कंटेंट खोजने का तरीका बदलने की कोशिश

‘Ask YouTube’ और ‘Search Profiles’ दोनों का मकसद डिजिटल कंटेंट तक लोगों की पहुंच आसान बनाना है। जहां Ask YouTube यूजर्स को सवाल पूछकर वीडियो खोजने की सुविधा देता है, वहीं Search Profiles क्रिएटर्स को अपने अलग-अलग सोशल मीडिया खातों और काम को एक जगह दिखाने में मदद करता है।

फिलहाल Ask YouTube का मोबाइल विस्तार अमेरिका तक सीमित है। यूट्यूब ने इसे आगे और यूजर्स तथा क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना का संकेत दिया है, लेकिन भारत में इसकी शुरुआत की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

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Blink Digital विवाद मामले में अमेरिका की अदालत में सुनवाई चाहता है Meta

सोशल मीडिया कंपनी मेटा और डिजिटल एजेंसी Blink Digital India Pvt Ltd के बीच विवाद अब केवल बंद किए गए खातों को दोबारा शुरू करने तक सीमित नहीं रह गया है।

Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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सोशल मीडिया कंपनी Meta और डिजिटल एजेंसी Blink Digital India Pvt Ltd के बीच विवाद अब केवल बंद किए गए खातों को दोबारा शुरू करने तक सीमित नहीं रह गया है। मामला इस बात पर भी केंद्रित हो गया है कि इस विवाद की सुनवाई भारत की अदालत में होनी चाहिए या अमेरिका की अदालत में। Meta ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दलील दी है कि कंपनी के साथ हुए समझौतों के मुताबिक, इस तरह के व्यावसायिक विवादों की सुनवाई कैलिफोर्निया की अदालतों में होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति संदीप वी. मार्ने की अदालत में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत में सुनवाई 14 अक्टूबर को फिर से होगी। Blink Digital ने Meta Platforms Inc. और Facebook India Online Services Pvt Ltd से अपने चार बंद किए गए Business Manager खातों को दोबारा शुरू करने और नुकसान के बदले कुल 1,158 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है।

Meta ने अलग-अलग समझौतों का दिया हवाला

Meta Platforms Inc. और Facebook India की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि Blink Digital के दावों को उन समझौतों के आधार पर देखा जाना चाहिए, जिनके तहत कंपनी Meta के उत्पादों और विज्ञापन सेवाओं का इस्तेमाल करती थी।

वकील ने चार तरह के समझौतों का जिक्र किया। इनमें सेवा की शर्तें (Terms of Service), व्यावसायिक शर्तें (Commercial Terms), खुद विज्ञापन चलाने से जुड़ी शर्तें (Self-Serve Advertising Terms) और अलग-अलग देशों में लागू विज्ञापन संबंधी शर्तें शामिल हैं।

Meta की ओर से कहा गया कि इन सभी समझौतों को एक साथ पढ़कर ही यह तय किया जा सकता है कि संबंधित कंपनियों की क्या जिम्मेदारियां हैं। कंपनी ने यह भी दलील दी कि Blink Digital ने अपनी याचिका में प्रतिवादियों का जिक्र सामूहिक रूप से किया है और उनके अलग-अलग संविदात्मक दायित्वों को पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं किया है।

Meta ने यह भी कहा कि Facebook India, सेवा की मुख्य शर्तों और व्यावसायिक शर्तों में उस तरह पक्षकार नहीं थी, जैसा Blink Digital ने अपनी याचिका में बताया है। Meta के मुताबिक, केवल भारतीय इकाई के खिलाफ आदेश देने से खाते बहाल करने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा, क्योंकि संबंधित मंचों और विज्ञापन व्यवस्था का संचालन एवं नियंत्रण अमेरिका स्थित Meta Platforms Inc. के पास है।

ये Meta की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें हैं। इन्हें अदालत का फैसला या स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

खातों को बंद करने के अधिकार पर भी दलील

सुनवाई के दौरान Meta के वकील ने कंपनी की सेवा संबंधी शर्तों का हवाला दिया। इन शर्तों के तहत कुछ परिस्थितियों में सामग्री हटाने, सुविधाओं पर रोक लगाने, खातों को निलंबित या बंद करने और स्थायी रूप से पहुंच समाप्त करने का अधिकार दिया गया है।

Meta की ओर से कहा गया कि यदि कंपनी को लगता है कि किसी यूजर ने उसकी शर्तों या नीतियों का गंभीर, स्पष्ट या बार-बार उल्लंघन किया है, तो वह इन प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर सकती है। वकील ने इन शर्तों का हवाला Blink Digital के चार Business Manager खातों को बहाल करने की मांग के जवाब में दिया।

खुद विज्ञापन चलाने से जुड़ी शर्तों का भी जिक्र किया गया। इनके तहत Meta विज्ञापनों को अस्वीकार या हटा सकती है। नियमों का पालन नहीं होने की स्थिति में विज्ञापन रद्द करने, खाते निलंबित करने या उन्हें बंद करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, बशर्ते लागू कानून का पालन किया जाए।

इस सुनवाई में Meta की दलीलों का मुख्य जोर इन अधिकारों के संविदात्मक आधार और विवाद की सुनवाई के उचित मंच पर था। सुनवाई से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कथित नीतिगत उल्लंघनों के गुण-दोष पर मुख्य रूप से बहस नहीं हुई।

Meta क्यों चाहता है कैलिफोर्निया की अदालत में सुनवाई?

Meta के मामले का एक प्रमुख आधार यह है कि Blink Digital ने व्यावसायिक उद्देश्य से उसके उत्पादों का इस्तेमाल किया और उनसे जुड़ी शर्तों को स्वीकार किया था। कंपनी के वकील ने दलील दी कि Blink को विवाद निपटाने के लिए उन्हीं शर्तों का पालन करना चाहिए, जिन पर उसने सहमति दी थी।

वकील ने समझौतों के उन प्रावधानों का हवाला दिया, जिनके मुताबिक गैर-उपभोक्ता यानी व्यावसायिक विवादों की सुनवाई अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत या सैन मेटियो काउंटी की राज्य अदालत में होनी चाहिए। संबंधित दावों पर कैलिफोर्निया का कानून लागू होने की बात भी कही गई।

Meta ने अमेरिका के बाहर स्थित कारोबारी यूजर्स के लिए बनाई गई व्यावसायिक शर्तों का भी हवाला दिया। कंपनी की दलील थी कि Blink Digital मंच का इस्तेमाल करने के लिए तय शर्तों को स्वीकार करने के बाद अब विवाद की सुनवाई के लिए तय अदालतों की व्यवस्था से अलग नहीं हो सकती।

सुनवाई में Meta Platforms Ireland Ltd. से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। यह कंपनी खुद विज्ञापन चलाने से संबंधित शर्तों में शामिल है। Meta के वकील ने दलील दी कि Meta Platforms Inc. और Meta Platforms Ireland Ltd. से जुड़े व्यावसायिक दावों के लिए भी कैलिफोर्निया की अदालतों का प्रावधान लागू होता है।

वकील ने यह भी कहा कि यदि व्यावसायिक शर्तों और सेवा की सामान्य शर्तों में कोई अंतर हो, तो व्यावसायिक शर्तों को प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि, उनके मुताबिक, विवाद की सुनवाई के लिए तय अदालतों के मामले में दोनों समझौतों के बीच कोई टकराव नहीं है।

यह मुद्दा इसलिए भी अहम है, क्योंकि Blink Digital अपने खाते बहाल करने की मांग कर रही है और Meta का कहना है कि ऐसा आदेश अमेरिका स्थित Meta Platforms Inc. के खिलाफ ही दिया जाना चाहिए।

Blink Digital ने खाते बहाल करने और 1,158 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की

Blink Digital ने अपने Business Manager खातों और Meta के मंचों पर उनसे जुड़े कंपनी पेज बंद किए जाने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था।

कंपनी ने अदालत से यह घोषित करने की मांग की है कि उसके खातों को बंद करना, हटाना या उन पर पाबंदी लगाना मनमाना, अनुचित, जरूरत से ज्यादा सख्त, गैरकानूनी और Meta की प्रकाशित शर्तों व नीतियों के खिलाफ था।

इसके अलावा, Blink Digital ने खुद को Meta के प्रबंधित एजेंसी साझेदार (Managed Agency Partner) के रूप में मान्यता देने और अपने खातों व पेजों के कामकाज में दखल रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की भी मांग की है। दूसरी ओर, Meta का कहना है कि Facebook India संबंधित खातों का संचालन या प्रबंधन नहीं करती थी और इन सेवाओं पर नियंत्रण अमेरिका स्थित Meta Platforms Inc. का था।

इस तरह विवाद में तीन प्रमुख सवाल सामने आए हैं। पहला, क्या Meta को अपनी शर्तों के तहत खाते बंद करने का अधिकार था? दूसरा, खातों को बहाल करने का आदेश किस कंपनी के खिलाफ दिया जा सकता है? और तीसरा, इस मामले की सुनवाई भारत में होनी

 

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ग्रो के 150 करोड़ रुपये के मीडिया मैंडेट के लिए पिच शुरू

डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ग्रो के करीब 150 करोड़ रुपये के मीडिया मैंडेट के लिए पिच शुरू हो गई है। वित्तीय सेवाओं के बढ़ते प्रतिस्पर्धी बाजार के बीच यह प्रक्रिया सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ग्रो (Groww) के मीडिया मैंडेट के लिए पिच शुरू हो गई है। एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) को सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक, इस मीडिया अकाउंट का आकार करीब 150 करोड़ रुपये है।

यह पिच ऐसे समय में शुरू हुई है, जब वित्तीय सेवाओं का बाजार लगातार प्रतिस्पर्धी हो रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म नए ग्राहकों को जोड़ने, ब्रांड की पहचान मजबूत करने और देश में बढ़ते रिटेल निवेशक आधार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

बिलियनब्रेन गैराज वेंचर्स (Billionbrains Garage Ventures) के संचालन वाला ग्रो डिजिटल इन्वेस्टमेंट क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहक शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय उत्पादों में निवेश कर सकते हैं। कंपनी का बिजनेस मॉडल तकनीक के जरिए निवेश को आसान बनाने पर केंद्रित है, जिसमें पहली बार निवेश करने वाले लोगों के साथ-साथ पारंपरिक निवेश सेवाओं के डिजिटल विकल्प तलाशने वाले ग्राहक भी शामिल हैं।

मीडिया मैंडेट के लिए यह पिच ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वित्तीय सेवाओं से जुड़े ब्रांड उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए आक्रामक प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। भारतीय पूंजी बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से कई डिजिटल प्लेटफॉर्म एक ही प्रतिस्पर्धी दायरे में आ गए हैं। ऐसे में ब्रांड पोजिशनिंग, मीडिया इफेक्टिवनेस और कस्टमर एक्विजिशन पहले से ज्यादा अहम हो गए हैं।

इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के लिए मीडिया स्ट्रैटेजी सिर्फ ब्रांड की पहुंच बढ़ाने तक सीमित नहीं रहती। वित्तीय सेवाओं की कैटेगरी में कंज्यूमर ट्रस्ट महत्वपूर्ण होने के कारण ब्रांड को विश्वसनीयता बनाए रखने और ग्राहकों के साथ लगातार जुड़ाव पर भी ध्यान देना पड़ता है। साथ ही, वित्तीय उत्पादों से जुड़े विज्ञापन में कस्टमर एक्विजिशन के लक्ष्य और जिम्मेदार कम्युनिकेशन के बीच संतुलन भी जरूरी होता है।

मीडिया मैंडेट में आमतौर पर मीडिया स्ट्रैटेजी, प्लानिंग, मीडिया बाइंग और कैंपेन ऑप्टिमाइजेशन जैसे काम शामिल होते हैं।

यह पिच डिजिटल-फर्स्ट कंपनियों के विज्ञापन निवेश में हो रहे व्यापक बदलाव के बीच भी सामने आई है। कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट और उपभोक्ताओं का ध्यान खींचने की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए ब्रांड अब ऐसे मीडिया पार्टनर्स की तलाश कर रहे हैं, जो व्यापक पहुंच के साथ मापने योग्य बिजनेस नतीजे भी दे सकें।

एजेंसियों के लिए ग्रो जैसे प्रमुख इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म का मीडिया मैंडेट हासिल करना एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। इससे उन्हें भारत की तेजी से प्रतिस्पर्धी कंज्यूमर-फेसिंग वित्तीय सेवा कैटेगरी में काम करने का मौका मिलेगा।

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त्योहारी सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने बेचा 24,000 करोड़ का सामान

त्योहारी सीजन की सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने करीब 24,200 करोड़ रुपये का GMV दर्ज किया। इस दौरान मोबाइल फोन की बिक्री सबसे ज्यादा रही।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
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त्योहारी सीजन की सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने करीब 24,000 करोड़ रुपये का सामान बेचा। कंसल्टेंसी फर्म रेडसीयर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स (Redseer Strategy Consultants) के अनुसार, ऑर्डर्स की संख्या बढ़ने से बिक्री में तेजी आई। वैल्यू के लिहाज से मोबाइल फोन सबसे आगे रहे।

रेडसीयर के अनुमान के मुताबिक, अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart), मीशो (Meesho) और अजियो (Ajio) समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर करीब 8-9 करोड़ ऑर्डर किए गए। पहले दो दिनों में 2.5 अरब डॉलर से अधिक यानी करीब 24,200 करोड़ रुपये का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (Gross Merchandise Value) दर्ज हुआ। इस दौरान करीब 6-6.5 करोड़ ग्राहक खरीदारी में शामिल हुए।

रेडसीयर के एसोसिएट पार्टनर निखिल दलाल (Nikhil Dalal) ने कहा कि शुरुआती दो दिनों के आंकड़े बताते हैं कि भारत में त्योहारी ई-कॉमर्स खरीदारी का दायरा बढ़ रहा है। ग्राहक मोबाइल के अलावा फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों पर भी खर्च कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वैल्यू फैशन (Value Fashion) की मांग खास तौर पर मजबूत रही। छोटे शहरों और टियर-2 शहरों के ग्राहकों ने किफायती कीमतों पर त्योहारी कपड़ों की खरीदारी की। कंपनी के अनुसार, ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू सामान्य दिनों की औसत दैनिक बिक्री की तुलना में करीब छह गुना रही। अमेजन और फ्लिपकार्ट की क्विक कॉमर्स सेवाओं (Quick Commerce Services) ने भी सामान्य दैनिक औसत के मुकाबले चार से पांच गुना अधिक जीएमवी दर्ज किया।

कुल बिक्री में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी करीब 38-40 प्रतिशत रही, जिसकी कीमत लगभग 9,100-9,600 करोड़ रुपये आंकी गई। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (Consumer Electronics) की हिस्सेदारी 25-27 प्रतिशत यानी करीब 6,000-6,500 करोड़ रुपये रही। वहीं, फैशन की हिस्सेदारी 15-18 प्रतिशत यानी लगभग 3,630-4,350 करोड़ रुपये रही।

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री 2026 की पहली छमाही में ही 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी थी। इसका एक कारण कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद के चलते ग्राहकों का कुछ खरीदारी पहले ही कर लेना रहा। वहीं, त्योहारी सेल के पहले दो दिनों में फैशन कैटेगरी (Fashion Category) का जीएमवी सालाना आधार पर 22-25 प्रतिशत बढ़ा।

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AI ने न्यूजरूम व क्रिएटिव वर्ल्ड को क्यों हिला दिया है? भरोसे और पारदर्शिता की नई लड़ाई

हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
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दुनिया भर में मीडिया और साहित्यिक संस्थान अब एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ एक सहायक तकनीक नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मुद्दा बन गया है जो भरोसे, संपादकीय जिम्मेदारी और पत्रकारिता की मूल पहचान तक को चुनौती दे रहा है। हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

जर्मनी के बर्लिन स्थित प्रतिष्ठित अखबार Tagesspiegel में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब यह खुलासा हुआ कि अखबार के पूर्व प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ Stephan-Andreas Casdorff ने अपने कुछ ओपिनियन लेख AI की मदद से तैयार किए थे। इस घटना ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी और अखबार को मजबूर होना पड़ा कि वह संबंधित लेखों को वेबसाइट से हटा दे और मामले की जांच शुरू करे। अखबार ने साफ किया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन पत्रकारिता के मूल हिस्से यानी सोच, विश्लेषण और लेखन का नियंत्रण पूरी तरह इंसानों के पास ही रहना चाहिए।

इस घटना के बाद जर्मन मीडिया में AI के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज हो गई। इससे पहले भी एक और मामला सामने आया था, जब Frankfurter Allgemeine Zeitung में प्रकाशित एक गेस्ट ओपिनियन में AI के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। यह मामला तब और गंभीर हो गया क्योंकि यह जानकारी प्रकाशन के बाद सामने आई, यानी संपादकीय जांच प्रक्रिया में इसे पकड़ा नहीं जा सका।

इस पूरे विवाद ने पत्रकारिता की बुनियादी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया शोधकर्ता Vera Katzenberger के अनुसार, समस्या सिर्फ AI के इस्तेमाल की नहीं है, बल्कि तब होती है जब AI से तैयार कंटेंट को बिना बताए प्रकाशित किया जाता है। उनका कहना है कि पाठक अखबार इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उन्हें लेखकों के विचार और विशेषज्ञता पर भरोसा होता है। यदि वही विचार मशीन द्वारा तैयार किए जाएं और उसका खुलासा न हो, तो यह सीधे तौर पर धोखा माना जा सकता है।

किए गए खुलासों के बाद Tagesspiegel ने अपनी एडिटोरियल पॉलिसी को दोहराया और कहा कि AI केवल सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन किसी भी हालत में यह न्यूज़रूम के “core editorial work” की जगह नहीं ले सकता। इसका मतलब है कि खबरों का विश्लेषण, तथ्यों की जांच और अंतिम निर्णय हमेशा पत्रकारों के हाथ में रहेगा।

लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI धीरे-धीरे पत्रकारों के काम करने के तरीके में गहराई से शामिल होता जा रहा है। पहले जहां AI को सिर्फ स्पेलिंग सुधारने या डेटा प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, अब यह ड्राफ्ट तैयार करने, हेडलाइन सुझाने और कभी-कभी पूरे लेख लिखने तक में इस्तेमाल होने लगा है। यही वह जगह है जहां “सहायक टूल” और “लेखक” के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।

जर्मनी के मीडिया रेगुलेटरी ढांचे में German Press Council ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कंटेंट की जिम्मेदारी अंततः न्यूज़रूम की ही होगी, चाहे वह कैसे भी तैयार किया गया हो। लेकिन यह संस्था यह भी मानती है कि AI-जनरेटेड कंटेंट के लिए अलग से लेबलिंग जरूरी नहीं है, क्योंकि असली मुद्दा तकनीक नहीं बल्कि सत्यता और संपादकीय जिम्मेदारी है।

इसी बीच, मीडिया इंडस्ट्री के भीतर एक अलग दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है। कुछ बड़े मीडिया ग्रुप्स के CEO और एडिटर्स का मानना है कि AI को अपनाना ही भविष्य है। उनका तर्क है कि यदि AI को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह रिपोर्टिंग की गति बढ़ा सकता है, लागत कम कर सकता है और डेटा विश्लेषण को बेहतर बना सकता है। लेकिन साथ ही यह भी माना जा रहा है कि बिना नियंत्रण के AI का इस्तेमाल पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।

इसी तरह का तनाव साहित्यिक जगत में भी देखा गया, जब प्रतिष्ठित पत्रिका Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद कर दिया। यह फैसला तब आया जब एक विजेता कहानी पर AI के इस्तेमाल का आरोप लगा। हालांकि लेखक ने इन आरोपों को खारिज किया और बताया कि उन्होंने कहानी अपने मोबाइल पर स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक की मदद से लिखी थी, क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं।

इसके बावजूद, इस विवाद ने साहित्यिक दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या रचनात्मक लेखन में तकनीक का इस्तेमाल स्वीकार्य है, और यदि हां, तो इसकी सीमा क्या होनी चाहिए? प्रकाशकों का कहना है कि जहां उनके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता, वहां वे अब साझेदारी से पीछे हट रहे हैं, ताकि कंटेंट की शुद्धता और पारदर्शिता बनी रहे।

AI को लेकर यह बहस सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि यह भरोसे और जिम्मेदारी का सवाल बन चुकी है। पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में यह चिंता बढ़ रही है कि यदि AI बिना पारदर्शिता के इस्तेमाल किया गया, तो पाठकों और लेखकों के बीच का भरोसा कमजोर हो सकता है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि AI को पूरी तरह नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में न्यूज़रूम्स को एक संतुलन बनाना होगा- जहां AI को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसान के पास ही रहे। इसके लिए साफ नियम, प्रशिक्षण और पारदर्शिता बेहद जरूरी होगी।

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि AI पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन को बदल रहा है, लेकिन यह बदलाव तभी स्वीकार्य होगा जब यह स्पष्ट हो कि इंसान और मशीन की भूमिका कहां खत्म होती है और कहां शुरू होती है।

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क्विंट डिजिटल ने वॉरंट की आखिरी किस्त के लिए 6 नवंबर से शुरू की भुगतान प्रक्रिया

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने 82,61,401 आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट (Partly Paid-up Warrants) पर पहली और अंतिम किस्त के रूप में ₹5 प्रति वॉरंट का भुगतान मांगा है।

Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
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मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने 82,61,401 आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट (Partly Paid-up Warrants) पर पहली और अंतिम किस्त (First and Final Call) के रूप में ₹5 प्रति वॉरंट का भुगतान मांगा है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 9 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस किस्त के तहत कंपनी कुल ₹4,13,07,005 यानी करीब ₹4.13 करोड़ जुटाएगी।

कंपनी ने यह जानकारी 9 अक्टूबर, 2026 को बीएसई लिमिटेड (BSE Limited) को दी। यह सूचना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग से जुड़े नियमों, 2015 के नियम 30 और 42 के तहत जारी की गई है।

क्या है पूरा मामला?

क्विंट डिजिटल ने 19 अगस्त, 2026 के ऑफर लेटर के तहत राइट्स इश्यू (Rights Issue) के जरिए 82,61,401 अलग किए जा सकने वाले वॉरंट जारी किए थे। प्रत्येक वॉरंट का इश्यू प्राइस ₹10 रखा गया था। आवेदन के समय निवेशकों से प्रति वॉरंट ₹5 प्राप्त किए गए थे, जबकि बाकी ₹5 का भुगतान पहली और अंतिम किस्त के तौर पर किया जाना है। अब कंपनी ने इस बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।

15 अक्टूबर होगी रिकॉर्ड डेट

कंपनी ने 15 अक्टूबर, 2026, गुरुवार को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय किया है। इस तारीख के आधार पर उन आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट धारकों की पहचान की जाएगी, जिन्हें पहली और अंतिम किस्त के भुगतान के लिए नोटिस भेजा जाएगा।

इन वॉरंट का आईएसआईएन (ISIN) नंबर INE641R13020 है। इनकी श्रेणी आंशिक रूप से भुगतान किए गए अलग किए जा सकने वाले वॉरंट की है।

6 से 20 नवंबर तक कर सकेंगे भुगतान

कंपनी के मुताबिक, पहली और अंतिम किस्त के भुगतान की अवधि 6 नवंबर, 2026, शुक्रवार से 20 नवंबर, 2026, शुक्रवार तक रहेगी। दोनों तारीखें इस अवधि में शामिल हैं। हालांकि, राइट्स इश्यू कमेटी को अपने विवेक के अनुसार भुगतान की अवधि बढ़ाने का अधिकार दिया गया है।

कंपनी के निदेशक मंडल ने पहली और अंतिम किस्त से संबंधित नोटिस और अन्य जरूरी दस्तावेजों को भी मंजूरी दे दी है। इस किस्त से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी संबंधित नोटिस में दी जाएगी, जिसे कंपनी आने वाले समय में आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट धारकों को भेजेगी।

वॉरंट में कारोबार पर भी पड़ेगा असर

क्विंट डिजिटल ने स्पष्ट किया है कि उसके आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट में शेयर बाजारों पर कारोबार 15 अक्टूबर, 2026, गुरुवार से निलंबित कर दिया जाएगा। पहली और अंतिम किस्त के भुगतान की प्रक्रिया के लिए आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड (ICICI Bank Limited) को बैंक के तौर पर नियुक्त किया गया है।

बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी

कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक दोपहर 1 बजे शुरू हुई और दोपहर 3 बजकर 43 मिनट पर समाप्त हुई। बैठक में वॉरंट पर पहली और अंतिम किस्त मांगने, रिकॉर्ड डेट तय करने, भुगतान की अवधि निर्धारित करने और संबंधित नोटिस व दस्तावेजों को मंजूरी देने के फैसले लिए गए। 

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'इंडिया टुडे' ने लॉन्च किया ‘Life Tak’, रामायण पर आधारित सीरीज 18 अक्टूबर से होगी स्ट्रीम

रामायण की कहानी को नए अंदाज में पेश करेगी ‘रघुपति राघव राजा राम’, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने संयुक्त रूप से टीजर लॉन्च किया

Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
India Today Group

‘इंडिया टुडे’ (India Today) ग्रुप ने डिजिटल फिक्शन और इंफोटेनमेंट के क्षेत्र में कदम रखते हुए अपना नया मोबाइल-फर्स्ट माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म ‘Life Tak’ लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत के साथ ग्रुप ने अपनी पहली प्रमुख शॉर्ट-फॉर्म सीरीज ‘रघुपति राघव राजा राम’ (RRRR) का टीजर भी जारी किया। इसका अनावरण मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के मंच पर किया गया। सीरीज का आधिकारिक टीजर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने संयुक्त रूप से लॉन्च किया।

रामायण की कहानी नए अंदाज में होगी पेश: ‘रघुपति राघव राजा राम’ में रामायण की पारंपरिक कहानी को आधुनिक और तेज रफ्तार अंदाज में पेश किया जाएगा। यह सीरीज खास तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखने वाले दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें सांस्कृतिक और पारंपरिक कहानी को आधुनिक प्रोडक्शन तकनीक के साथ जोड़ा गया है। इसका वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट आधुनिक दर्शकों की शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट देखने की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

AI तकनीक पर भी रहेगा जोर: इंडिया टुडे ग्रुप के मुताबिक, यह सीरीज उसके ऐसे क्रिएटिव और टेक्नोलॉजी आधारित इकोसिस्टम की पहली पेशकश है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विजुअल इंजीनियरिंग, स्क्रिप्ट तैयार करने वाले टूल्स और क्रिएटिव वर्ल्ड-बिल्डिंग का मेल है। इस पहल के जरिए पारंपरिक और नई कहानियों को आज के दर्शकों के लिए नए रूप में पेश किया जाएगा। ‘Life Tak’ के माध्यम से इंडिया टुडे ग्रुप सिनेमाई गुणवत्ता वाले कंटेंट को वर्टिकल वीडियो के तेजी से बढ़ते डिजिटल दौर में दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

18 अक्टूबर से देख सकेंगे दर्शक: ‘रघुपति राघव राजा राम’ का प्रीमियर 18 अक्टूबर 2026 को होगा। दर्शक इसके एपिसोड ‘Life Tak’ के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट (@lifetak), यूट्यूब और फेसबुक चैनलों के साथ-साथ आजतक ऐप पर भी देख सकेंगे।

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