भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को 2030 के दशक की शुरुआत तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए हर साल करीब 15% की दर से बढ़ना होगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को 2030 के दशक की शुरुआत तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए हर साल करीब 15% की दर से बढ़ना होगा। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक नई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस क्षेत्र की मौजूदा 9% सालाना विकास दर बनी रहती है, तो 2033 तक इसका आकार करीब 64 अरब डॉलर ही पहुंच पाएगा। ऐसे में 100 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 36 अरब डॉलर का अंतर रह जाएगा।
CII ने यह रिपोर्ट ‘द न्यू इकोनॉमिक्स ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट’ (The New Economics of Media & Entertainment) शीर्षक से जारी की है। इसे मुंबई में गुरुवार को आयोजित CII बिग पिक्चर समिट 2026 के दौरान जारी किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीवी प्रसारण कारोबार को बाजार के हिसाब से चलाने, पाइरेसी यानी कंटेंट की गैरकानूनी नकल और डिस्ट्रीब्यूशन के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने और क्षेत्रीय बाजारों के साथ नए कारोबार में निवेश बढ़ाने की जरूरत है।
टीवी की कीमतों और पैकेजिंग में ज्यादा आजादी की मांग
समिट के चेयरमैन और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के एमडी एवं सीईओ गौरव बनर्जी ने कहा कि भारत ने दर्शकों की बड़ी संख्या तक पहुंच बनाने में कामयाबी हासिल की है। अब अगला लक्ष्य इस दर्शक वर्ग से ज्यादा आर्थिक मूल्य पैदा करना, उसे हासिल करना और लंबे समय तक बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि CII टेलीविजन की कीमतें तय करने और चैनलों के पैकेज बनाने में कंपनियों को ज्यादा आजादी देने की मांग कर रहा है। इसके साथ ही कैरेज फीस यानी चैनलों को डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के लिए दी जाने वाली फीस खत्म करने, दर्शकों की संख्या मापने की व्यवस्था बहाल करने और अलग-अलग स्क्रीन पर पारदर्शी मानक लागू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
रिपोर्ट में टीवी, ओटीटी और म्यूजिक सब्सक्रिप्शन पर जीएसटी घटाकर 5% करने की भी मांग की गई है। इसके अलावा, इंडस्ट्री के अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से नियम बनाने और कंपनियों को खुद अपने लिए नियम एवं मानक तय करने की व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
AI और नई तकनीकों से बढ़ेगा कारोबार
रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की अगली विकास यात्रा में नई तकनीकों और कारोबार के नए तरीकों की अहम भूमिका होगी। इसमें जिम्मेदारी के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल, वर्चुअल प्रोडक्शन, कनेक्टेड टीवी और क्रिएटर्स के जरिए तैयार होने वाले कंटेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
वर्चुअल प्रोडक्शन में डिजिटल तकनीक की मदद से फिल्म और वीडियो बनाने की प्रक्रिया को बेहतर किया जाता है। वहीं, कनेक्टेड टीवी इंटरनेट से जुड़ा टेलीविजन है, जिस पर ओटीटी और दूसरी ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय स्टूडियो के लिए एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से बाहर के क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ाने के मौके हैं। एनिमेशन, गेमिंग, एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) और डिजिटल मैपिंग जैसी क्षमताओं का इस्तेमाल दूसरे इंडस्ट्रीों की जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है। इससे भारतीय कंपनियों को नए ग्राहक और कमाई के नए स्रोत मिल सकते हैं।
बिहार और उत्तर प्रदेश में सिनेमा स्क्रीन की कमी
CII की रिपोर्ट में देश में सिनेमा स्क्रीन की कम संख्या को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 10 लाख लोगों पर करीब 6.8 सिनेमा स्क्रीन हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल हैं, जहां आबादी के मुकाबले सिनेमा स्क्रीन की संख्या सबसे कम है।
इस स्थिति को देखते हुए CII ने 2030 के दशक की शुरुआत तक देश में 16 हजार से अधिक नई सिनेमा स्क्रीन स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इससे ज्यादा लोगों तक फिल्मों की पहुंच बढ़ाने और सिनेमाघरों के कारोबार को विस्तार देने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों और कंटेंट को बढ़ावा देने, बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और स्थानीय रचनात्मक प्रतिभाओं में निवेश करने पर भी जोर दिया गया है। इससे छोटे शहरों और क्षेत्रीय बाजारों में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के विकास के अवसर बढ़ सकते हैं।
100 अरब डॉलर के लक्ष्य के लिए जरूरी हैं कई बदलाव
CII की रिपोर्ट का मुख्य संदेश है कि भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए केवल मौजूदा विकास दर के भरोसे नहीं रहा जा सकता। इसके लिए टीवी कारोबार के नियमों और कीमतों से जुड़े बदलाव, पाइरेसी पर कार्रवाई, नई तकनीकों में निवेश और क्षेत्रीय बाजारों का विस्तार जरूरी होगा।
इसके साथ ही सिनेमा स्क्रीन की संख्या बढ़ाने और भारतीय स्टूडियो की तकनीकी क्षमताओं का दूसरे इंडस्ट्रीों में इस्तेमाल करने से भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इन क्षेत्रों में तेजी से काम किया जाता है, तो इंडस्ट्री के लिए अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर बढ़ना आसान हो सकता है।
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) में सुरुचि पोपली को सीनियर डायरेक्टर-फैशन की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।इससे पहले सुरुचि पोपली फ्लिपकार्ट में डायरेक्टर-फैशन के पद पर कार्यरत थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) में सुरुचि पोपली को सीनियर डायरेक्टर-फैशन की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने लिंक्डइन पर पोस्ट शेयर कर इस नई भूमिका की जानकारी दी है। अक्टूबर 2026 से वह इस पद पर काम कर रही हैं।
इससे पहले सुरुचि पोपली फ्लिपकार्ट में डायरेक्टर-फैशन के पद पर कार्यरत थीं। दिसंबर 2025 में उन्होंने यह भूमिका संभाली थी और सितंबर 2026 तक इस पद पर रहीं। इस दौरान वह फैशन की सभी कैटेगरी में रेवेन्यू, कस्टमर, ग्रोथ और मार्केटिंग से जुड़े काम देख रही थीं।
फ्लिपकार्ट में इससे पहले वह डायरेक्टर-होम एंड फर्नीचर के पद पर भी काम कर चुकी हैं। अगस्त 2024 से दिसंबर 2025 तक उन्होंने इस भूमिका में अपनी सेवाएं दीं।
फ्लिपकार्ट के साथ सुरुचि पोपली पहले भी काम कर चुकी हैं। जनवरी 2019 में उन्होंने कंपनी में सीनियर मैनेजर-I, रेफ्रिजरेटर के तौर पर काम शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने सीनियर मैनेजर-II, लार्ज अप्लायंसेज और एसोसिएट डायरेक्टर, लार्ज अप्लायंसेज जैसी भूमिकाएं निभाईं। लार्ज अप्लायंसेज कैटेगरी में उन्होंने 14 सदस्यों की टीम का नेतृत्व किया और कारोबार की ग्रोथ से जुड़े काम संभाले।
फ्लिपकार्ट के अलावा सुरुचि पोपली एमेजॉन में भी काम कर चुकी हैं। दिसंबर 2023 से अगस्त 2024 तक वह वहां कैटेगरी हेड, कलर कॉस्मेटिक्स के पद पर रहीं। इससे पहले मार्च 2022 से दिसंबर 2023 तक उन्होंने लक्जमबर्ग में प्रोडक्ट एंड मार्केटिंग लीड, ईयू ऑटोमोटिव की भूमिका निभाई।
अपने करियर के शुरुआती दौर में सुरुचि पोपली महिंद्रा ग्रुप से भी जुड़ी रही हैं। यहां उन्होंने बिजनेस प्लानिंग, इंटरनेशनल मार्केट्स, सीईओ ऑफिस और स्पेशल प्रोजेक्ट्स से जुड़ी भूमिकाओं में काम किया।
सुरुचि पोपली ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), कोझिकोड से जनरल मैनेजमेंट, फाइनेंस और स्ट्रैटेजी में पीजीडीएम किया है। वह इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) से चार्टर्ड अकाउंटेंट भी हैं।
कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड रणनीति और कारोबार में बदलाव से जुड़े कामों का अनुभव रखने वाले दीप माल्दे ने Haleon में एक्सपर्ट मार्केटिंग व ट्रांसफॉर्मेशन के हेड के पद पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
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कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड रणनीति और कारोबार में बदलाव से जुड़े कामों का अनुभव रखने वाले दीप माल्दे ने Haleon में एक्सपर्ट मार्केटिंग व ट्रांसफॉर्मेशन के हेड के पद पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
दीप माल्दे ने LinkedIn पर इस नियुक्ति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह कंपनी के प्रतिष्ठित ब्रैंड्स को आगे बढ़ाने और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देने के Haleon के उद्देश्य को पूरा करने में योगदान देने के लिए उत्साहित हैं। कंपनी का उद्देश्य है कि लोगों को मानवीय संवेदनाओं के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर स्वास्थ्य मिल सके।
Haleon में शामिल होने से पहले दीप माल्दे Mega LifeSciences में बिजनेस हेड के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने जनवरी 2025 से मई 2026 तक इस जिम्मेदारी को संभाला। इस दौरान वह कारोबार के प्रदर्शन, मुनाफे और नुकसान से जुड़े नतीजों (P&L), बिक्री और मार्केटिंग टीमों के कामकाज के साथ-साथ संचालन की कार्यक्षमता बेहतर बनाने के लिए जिम्मेदार थे।
इससे पहले दीप माल्दे ने Danone India में आठ साल से ज्यादा समय तक मार्केटिंग से जुड़ी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम किया। यहां उनकी आखिरी जिम्मेदारी Global Brands Portfolio में मार्केटिंग हेड की थी। इस भूमिका में वह कंपनी के वैश्विक ब्रैंड पोर्टफोलियो से जुड़े मार्केटिंग कार्यों का नेतृत्व कर रहे थे।
दीप माल्दे इससे पहले Abbott Nutrition International में भी तीन साल से ज्यादा समय तक काम कर चुके हैं। यहां वह PediaSure ब्रैंड पोर्टफोलियो से जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारियों में ब्रैंड रणनीति तैयार करना, उपभोक्ता मार्केटिंग, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ जुड़ाव और डिजिटल माध्यमों से मार्केटिंग गतिविधियों को आगे बढ़ाना शामिल था।
दीप माल्दे का अनुभव कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड निर्माण और कारोबार में बदलाव जैसे क्षेत्रों में रहा है। Haleon में उनकी नई भूमिका में एक्सपर्ट मार्केटिंग और ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़े कामों पर ध्यान रहेगा।
अलिफिया हिरानी पब्लिसिस ग्रुप इंडिया से एसोसिएट डायरेक्टर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के तौर पर जुड़ी हैं। वह साची एंड साची इंडिया, बीबीएच इंडिया और प्रोपेगेट इंडिया की कम्युनिकेशंस संभालेंगी।
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अलिफिया हिरानी पब्लिसिस ग्रुप इंडिया (Publicis Groupe India) से एसोसिएट डायरेक्टर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Associate Director-Corporate Communications) के तौर पर जुड़ी हैं। नई भूमिका में वह साची एंड साची इंडिया (Saatchi & Saatchi India), बीबीएच इंडिया (BBH India) और प्रोपेगेट इंडिया (Propagate India) के लिए कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगी।
इससे पहले अलिफिया हिरानी ने डेंट्सू इंडिया (Dentsu India) के साथ करीब सात साल तक काम किया। वहां उनकी आखिरी जिम्मेदारी सीनियर मैनेजर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Senior Manager-Corporate Communications) की थी।
मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को सिर्फ बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच बनाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने खुद के कंटेंट, कमाई के टिकाऊ तरीकों और दुनिया के बाजारों में विस्तार पर भी काम करना चाहिए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को अब सिर्फ बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच बनाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने खुद के कंटेंट, कमाई के टिकाऊ तरीकों और दुनिया के बाजारों में विस्तार पर भी काम करना चाहिए। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने गुरुवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया में रचनात्मक कंटेंट, तकनीक और प्रतिभा के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ऐसी मीडिया कंपनियां तैयार करनी होंगी, जो वैश्विक बाजार में मुकाबला कर सकें।
चंचल कुमार मुंबई में आयोजित दो दिवसीय CII बिग पिक्चर समिट 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस साल समिट की थीम ‘द न्यू इकोनॉमिक्स ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट: बिल्डिंग इंडियाज फ्यूचर ग्लोबल मीडिया कंपनीज’ रखी गई है। इसका मकसद भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए कारोबार के नए अवसरों और विकास के रास्तों पर चर्चा करना है।
कुमार ने कहा कि भारत के पास कहानी सुनाने की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मक प्रतिभा है। जरूरत इस बात की है कि इन खूबियों को लंबे समय तक आर्थिक और सांस्कृतिक लाभ देने वाले अवसरों में बदला जाए।
‘क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड’ पर जोर
चंचल कुमार ने समिट की थीम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के WAVES 2025 के विजन ‘क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड’ से जोड़ते हुए कहा कि इस क्षेत्र में नए प्रयोगों के साथ भरोसे को भी अहमियत देनी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां देश में कंटेंट और तकनीक तैयार हो, उसके अधिकार भी भारतीय कंपनियों के पास रहें और फिर उसे दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जा सके।
कुमार ने सरकार की ओर से भारत के रचनात्मक उद्योग को मजबूत करने के लिए शुरू की गई पहलों का भी जिक्र किया। इनमें WAVES, WAVES Bazaar, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) और इंडिया सिने हब शामिल हैं।
उन्होंने पाइरेसी यानी फिल्मों, कार्यक्रमों और दूसरे कंटेंट की गैरकानूनी नकल और वितरण रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, रचनात्मक काम और उससे जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है, ताकि कंटेंट बनाने वालों और कंपनियों को उनके काम का सही लाभ मिल सके।
150 से ज्यादा निवेशक और कारोबारी WAVES बैठक में शामिल
समिट के दौरान चंचल कुमार ने WAVES ग्लोबल इन्वेस्टर एंड इन्वेस्टी मीट का भी उद्घाटन किया। इस आयोजन में 150 से ज्यादा निवेशकों और निवेश पाने की इच्छुक कंपनियों व कारोबारियों ने हिस्सा लिया।
इस पहल के जरिए WAVES से जुड़े मंच WaveX और WAVES Bazaar के करीब 20 प्रतिभागियों को भी जोड़ा गया। इसका मकसद निवेश उपलब्ध कराने वालों और उभरते रचनात्मक कारोबारों के बीच संपर्क बढ़ाना है, ताकि नए कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए निवेश और दूसरे अवसर मिल सकें।
मीडिया इंडस्ट्री के लिए 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
समिट में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की श्वेत पत्र रिपोर्ट ‘द न्यू इकोनॉमिक्स ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट’ भी जारी की गई। इसमें भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट क्षेत्र को 2030 के दशक की शुरुआत तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों में तेजी लाने, क्षेत्रीय बाजारों को मजबूत करने और प्रस्तावित कदमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।
इसका उद्देश्य उद्योग की विकास दर बढ़ाने के साथ नए कारोबार और कमाई के अवसर तैयार करना है।
‘बड़ा दर्शक वर्ग होना अपने आप में कारोबार का मॉडल नहीं’
समिट के चेयरमैन और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के एमडी एवं सीईओ गौरव बनर्जी ने कहा कि मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों को अपने कारोबार के तरीकों पर नए सिरे से विचार करना होगा।
उन्होंने कहा, “दर्शकों की बड़ी संख्या आखिरकार सिर्फ शुरुआत है। यह अपने आप में कोई बिजनेस मॉडल नहीं है।”
गौरव बनर्जी के मुताबिक, कंपनियों को यह समझने की जरूरत है कि वे अपने दर्शकों से कितना मूल्य हासिल कर पा रही हैं, विज्ञापन देने वालों को उनके खर्च के बदले कितना मापने योग्य फायदा मिल रहा है और निवेशकों को लंबे समय तक कितना टिकाऊ रिटर्न मिल सकता है।
उनकी बात का मुख्य जोर इस पर था कि सिर्फ ज्यादा दर्शक या अधिक पहुंच होना काफी नहीं है। मीडिया कंपनियों को अपनी पहुंच को मजबूत कमाई और टिकाऊ कारोबार में बदलने के तरीके भी विकसित करने होंगे।
AI और डिजिटल तकनीक से क्रिएटर्स को मिलेगा मौका
समिट की सह-अध्यक्ष और YouTube India की कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर गुंजन सोनी ने कहा कि भारत की रचनात्मकता और संस्कृति उसकी आर्थिक ताकत हैं। ये देश को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से युवा क्रिएटर्स अपने विचारों और स्थानीय पहचान को बड़े स्तर के कारोबार में बदल सकते हैं। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले क्रिएटर्स को अपने कंटेंट को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने और नए कारोबारी अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, समिट में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए सिर्फ दर्शकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मौलिक कंटेंट तैयार करने, उसके अधिकार अपने पास रखने, कमाई के टिकाऊ तरीके विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने पर भी ध्यान देना होगा।
उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पंकज राय का अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और विज्ञापन जगत से जुड़े पंकज राय ने Huella से इस्तीफा दे दिया है। वह कंपनी में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स, इंडिया के पद पर कार्यरत थे। उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पंकज राय का अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।
मार्च 2026 में पंकज राय को सीनियर वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स के पद पर पदोन्नत किया गया था। इस भूमिका में वह कंपनी के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन बिक्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इनमें NEXad, NewsroomAI और AIgnite शामिल हैं।
NEXad कंपनी का इंटरैक्टिव कनेक्टेड टीवी (CTV) प्लेटफॉर्म है। वहीं, NewsroomAI और AIgnite भी कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं।
बता दें कि Huella ने जुलाई 2025 में पंकज राय को वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स के पद पर नियुक्त किया था। इस भूमिका में उनकी जिम्मेदारी NewsroomAI के मुद्रीकरण यानी मोनेटाइजेशन से जुड़े प्रयासों का नेतृत्व करना था। इसके साथ ही उन्हें कंपनी के संस्थापकों के साथ मिलकर साझेदारियों, उत्पादों की बाजार में स्थिति और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर काम करना था।
पंकज राय को ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 18 साल से अधिक का अनुभव है। Huella से पहले वह जी मीडिया (Zee Media) में WION और Zee Business के बिजनेस हेड के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा, वह Qyou Media में नेशनल सेल्स हेड की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
पूर्व में वह Zee TV, Zee Cinema और Zee Bollywood जैसे चैनलों के लिए उत्तर और पूर्वी भारत में व्यावसायिक जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं।
एनआईआईटी ने अनिश सरकार को नया सीईओ नियुक्त किया है। वह पंकज जठार की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले अनिश प्लक्स़ी, मर्सर इंडिया और कैपजेमिनी में वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाओं में रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एनआईआईटी लिमिटेड (NIIT Limited) ने अनिश सरकार (Anish Sarkar) को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। वह कंपनी के मौजूदा सीईओ पंकज जठार (Pankaj Jathar) की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे।
एनआईआईटी के मैनेजिंग डायरेक्टर और वाइस चेयरमैन विजय कुमार थडानी (Vijay Kumar Thadani) ने कहा कि अनिश अपने साथ कारोबार को आगे बढ़ाने का अनुभव, टेक्नोलॉजी लीडरशिप और ग्रोथ को गति देने की क्षमता लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग तरह के कारोबार में अनिश का अनुभव एनआईआईटी के लिए उपयोगी साबित होगा, क्योंकि कंपनी पिछले कुछ वर्षों में तैयार की गई मजबूत नींव पर आगे बढ़ते हुए विकास के अगले चरण की ओर बढ़ रही है।
विजय कुमार थडानी ने पंकज जठार के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पंकज ने संगठन को मजबूत करने और एनआईआईटी को भविष्य के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एनआईआईटी में शामिल होने से पहले अनिश सरकार प्लक्स़ी (Pluxee), जिसे पहले सोडेक्सो बीआरएस (Sodexo BRS) के नाम से जाना जाता था, में मैनेजिंग डायरेक्टर-इंडिया और इंडिया, फिलीपींस तथा इंडोनेशिया क्लस्टर के डायरेक्टर थे।
इससे पहले वह मर्सर इंडिया (Mercer India) के सीईओ रह चुके हैं। अनिश ने कैपजेमिनी ग्रुप (Capgemini Group) के साथ भी कई वर्षों तक वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाओं में काम किया है। वहां उनका अनुभव मैनेजमेंट कंसल्टिंग (Management Consulting), सेल्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन (Technology Transformation) जैसे क्षेत्रों में रहा है।
NDTV में दो साल तक एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर रहीं सुचेतना रे, इससे पहले आउटलुक में भी निभा चुकी हैं कई अहम जिम्मेदारियां
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार सुचेतना रे ने बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म मिंट (Mint) में डिप्टी मैनेजिंग एडिटर के तौर पर नई पारी शुरू की है। अपनी नई भूमिका में वह Mint के एडिटर-इन-चीफ जोसी पी. जॉन (Josey P. John) को रिपोर्ट करेंगी।
सुचेतना रे को टेलीविजन, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में दो दशक से अधिक का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने संपादकीय नेतृत्व, कंटेंट स्ट्रैटेजी और मीडिया कारोबार को आगे बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में काम किया है।
इससे पहले वह NDTV में एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत थीं। NDTV में अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान सुचेतना रे NDTV.com पर प्रीमियम कंटेंट को आगे बढ़ाने और सब्सक्रिप्शन स्ट्रैटेजी विकसित करने से जुड़ी रहीं। वह नेटवर्क के कई प्रमुख कार्यक्रमों और आयोजनों से जुड़ी टीम का भी हिस्सा थीं। इनमें NDTV Art Awards, NDTV Food Awards, NDTV Profit Business Leadership Awards, Indian of the Year और NDTV World Summit शामिल हैं।
NDTV से पहले सुचेतना रे ने आउटलुक ग्रुप में कई नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने आउटलुक बिजनेस की एडिटर के तौर पर काम किया। इसके बाद वह ग्रुप की चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर बनीं। इस भूमिका में उन्होंने संपादकीय, ब्रैंड और रेवेन्यू से जुड़ी प्रमुख जिम्मेदारियां संभालीं।
अपने दो दशक से अधिक के पत्रकारिता करियर में सुचेतना रे ने आर्थिक नीतियों, कारोबार और आर्थिक अपराध से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग की है। पूर्व में वह ईटी नाउ (ET Now), हिन्दुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) और द इकनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी भूमिका निभा चुकी हैं।
टाटा प्ले ने कनेक्टेड टीवी यूजर्स के लिए स्मार्ट ऐप लॉन्च किया है। इसके जरिए बिना सेट-टॉप बॉक्स और डिश एंटीना 500 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल देख सकेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टाटा प्ले (Tata Play) ने कनेक्टेड टीवी यूजर्स के लिए टाटा प्ले स्मार्ट (Tata Play Smart) ऐप लॉन्च किया है। इसके जरिए यूजर्स बिना सेट-टॉप बॉक्स और डिश एंटीना के 500 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल देख सकेंगे।
कंपनी के मुताबिक, सेवा की कीमत पहले भाषा के लिए 199 रुपये प्रति माह रखी गई है। हर अतिरिक्त भाषा के लिए 99 रुपये प्रति माह देने होंगे। हालांकि, टाटा प्ले का कहना है कि यह सैटेलाइट टेलीविजन से दूर जाने की तैयारी नहीं है, बल्कि कंपनी अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही है।
यह लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब भारत के पेड डायरेक्ट-टू-होम (DTH) बाजार में ग्राहकों की संख्या लगातार घट रही है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की अप्रैल-जून 2026 की प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, चार पेड डीटीएच ऑपरेटरों का सक्रिय ग्राहक आधार 30 जून 2026 तक सालाना आधार पर 13.4 प्रतिशत घटकर 4.856 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह संख्या 5.607 करोड़ थी। यानी एक साल में करीब 75 लाख ग्राहक कम हुए।
मार्च 2026 में 4.905 करोड़ के मुकाबले जून तक भी ग्राहक आधार में गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में पेड-टीवी वितरण पर बढ़ते दबाव के बीच टाटा प्ले का नया ऐप कंपनी को टीवी दर्शकों तक पहुंचने का एक अतिरिक्त रास्ता देता है।
पेड डीटीएच बाजार में टाटा प्ले की स्थिति अभी भी सबसे मजबूत है। 30 जून 2026 तक कंपनी के पास 1.484 करोड़ ग्राहक थे और उसकी बाजार हिस्सेदारी 30.56 प्रतिशत थी। भारती टेलीमीडिया (Bharti Telemedia) के 1.358 करोड़, सन डायरेक्ट (Sun Direct) के 1.093 करोड़ और डिश टीवी इंडिया (Dish TV India) के 92.1 लाख ग्राहक थे।
इन आंकड़ों में प्रसार भारती (Prasar Bharati) की मुफ्त डीटीएच सेवा डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) शामिल नहीं है। यानी पेड डीटीएच बाजार के करीब हर तीन में से एक घर में पहले से टाटा प्ले की मौजूदगी है। अब टाटा प्ले स्मार्ट के जरिए कंपनी बिना केवल सैटेलाइट सेवा पर निर्भर हुए टीवी बाजार के बाकी हिस्से तक भी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।
ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जीएसटी (GST) के मामले में बड़ी राहत मिली है। कर अधिकारियों ने तीन बड़ी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर पहले प्रस्तावित जीएसटी मांग में करीब 52,915 करोड़ रुपये की कटौती की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जीएसटी (GST) के मामले में बड़ी राहत मिली है। कर अधिकारियों ने तीन बड़ी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर पहले प्रस्तावित जीएसटी मांग में करीब 52,915 करोड़ रुपये की कटौती की है। यह कटौती कुल प्रस्तावित मांग का लगभग 75.4% है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के ऑनलाइन मनी गेमिंग पर जीएसटी से जुड़े फैसले के बाद जारी किए गए आदेशों में सामने आया है।
एक्सचेंज4मीडिया (e4m) की ओर से देखे गए इन आदेशों के मुताबिक, स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज (Sporta Technologies), गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज (Gameskraft Technologies) और प्ले गेम्स 24x7 (Play Games 24x7) पर कुल 17,297.62 करोड़ रुपये का मूल जीएसटी बकाया तय किया गया है। इससे पहले इन कंपनियों से करीब 70,212.87 करोड़ रुपये की जीएसटी वसूली का प्रस्ताव था।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि तीनों कंपनियों को पूरा टैक्स माफ कर दिया गया है। कर अधिकारियों ने पहले प्रस्तावित मांग का बड़ा हिस्सा हटा दिया है, लेकिन तीनों कंपनियों पर अब भी भारी टैक्स देनदारी बनी हुई है। इसके अलावा, संबंधित आदेशों के तहत ब्याज और जुर्माना भी लागू होगा।
ड्रीम11 की संचालक कंपनी को सबसे बड़ी राहत
ड्रीम11 (Dream11) का संचालन करने वाली स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज को रकम के हिसाब से सबसे बड़ी राहत मिली है। कंपनी की मूल प्रस्तावित जीएसटी मांग में से 21,603.31 करोड़ रुपये हटा दिए गए हैं। यह कटौती मूल मांग का 76.4% है।
वहीं, गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज की प्रस्तावित मांग में 16,102.26 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। कंपनी को प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा 76.7% की राहत मिली है। प्ले गेम्स 24x7 की प्रस्तावित जीएसटी मांग में 15,209.68 करोड़ रुपये की कटौती हुई है। यह मूल मांग का 72.7% है। इस तरह तीनों कंपनियों के मामलों में जीएसटी की प्रस्तावित मांग और अंतिम रूप से तय टैक्स देनदारी के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज पर 6,690.87 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी
मुंबई ईस्ट कमिश्नरेट ने जुलाई 2017 से मार्च 2023 की अवधि के लिए स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज पर 6,690.87 करोड़ रुपये की कुल जीएसटी देनदारी तय की है। कंपनी के खिलाफ पहले करीब 28,294.18 करोड़ रुपये की मांग प्रस्तावित थी। इसमें से 21,603.31 करोड़ रुपये की मांग हटा दी गई है। तय की गई 6,690.87 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी में 5,671.60 करोड़ रुपये एकीकृत जीएसटी (IGST) और 509.64-509.64 करोड़ रुपये केंद्रीय जीएसटी (CGST) तथा राज्य जीएसटी (SGST) के हैं।
आदेश में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर कानून की धारा 50(1) के तहत लागू ब्याज की वसूली का भी निर्देश दिया गया है। इसमें कंपनी की ओर से पहले ही चुकाए गए जीएसटी का हिसाब भी शामिल किया जाना है।
स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज के मामले में जुर्माने का प्रावधान दूसरी दोनों कंपनियों से अलग है। कंपनी पर धारा 73(9) के तहत जुर्माना लगाया गया है, न कि धारा 74(1) के तहत टैक्स के बराबर जुर्माना। इसके अलावा, कानून की धारा 122 और 125 के कुछ प्रावधानों के तहत प्रस्तावित अन्य जुर्माने भी हटा दिए गए हैं।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 6,690.87 करोड़ रुपये कंपनी की कुल तय टैक्स देनदारी है। पहले से चुकाए गए टैक्स का हिसाब लगाने के बाद वास्तव में कितनी रकम बाकी रह जाएगी, यह अलग हो सकता है।
गेम्सक्राफ्ट की मांग में 76.7% की कटौती
गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज की प्रस्तावित जीएसटी मांग करीब 20,989.31 करोड़ रुपये थी। अब इसे घटाकर 4,887.05 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस तरह कंपनी को 16,102.26 करोड़ रुपये की राहत मिली है।
बेंगलुरु ईस्ट कमिश्नरेट का यह आदेश कंपनी के रमीकल्चर (RummyCulture) और गेम्जी (Gamezy) प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। इसमें अगस्त 2017 से जून 2022 तक की अवधि को शामिल किया गया है।
अधिकारियों ने कर योग्य रकम 20,261.97 करोड़ रुपये तय की है। इसके लिए केंद्रीय जीएसटी नियमों के नियम 31बी (Rule 31B) को आधार बनाया गया है। यह सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले के अनुरूप है।
इस मामले में खिलाड़ियों की ओर से जमा की गई रकम और निकासी के रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया। अधिकारियों ने ऐसी स्थिति में बार-बार खेल में लगाई गई जीत की रकम को हर बार नई जमा राशि मानकर कुल रकम जोड़ने का तरीका नहीं अपनाया, जब उस रकम को निकाला ही नहीं गया था और उसे दोबारा खेल में लगाया गया था।
यही अंतर टैक्स की दोबारा गणना में अहम रहा। मूल नोटिस में कुल खरीद या खेल में लगाई गई रकम (Cumulative Buy-in) को मुख्य आधार बनाकर काफी ज्यादा टैक्स मांग प्रस्तावित की गई थी।
अंतिम आदेश के तहत 1,548.60 करोड़ रुपये IGST और 1,669.22-1,669.22 करोड़ रुपये केंद्रीय जीएसटी तथा कर्नाटक जीएसटी की देनदारी तय की गई है। इस तरह कुल टैक्स 4,887.05 करोड़ रुपये होता है।
कंपनी की ओर से पहले जमा किए गए 20 करोड़ रुपये को तय टैक्स देनदारी में समायोजित किया गया है। साथ ही, लागू ब्याज की वसूली का निर्देश दिया गया है।
गेम्सक्राफ्ट पर धारा 74 के तहत 4,887.05 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जो तय टैक्स देनदारी के बराबर है। हालांकि, पांच व्यक्तियों के खिलाफ प्रस्तावित व्यक्तिगत जुर्माने हटा दिए गए हैं। कंपनी के खिलाफ एक ही काम या चूक के लिए दोहराए जाने वाले जुर्माने के प्रस्ताव भी संबंधित सीमा तक हटा दिए गए हैं।
प्ले गेम्स 24x7 पर 5,719.70 करोड़ रुपये का टैक्स
रमीसर्किल (RummyCircle) और माई11सर्किल (My11Circle) का संचालन करने वाली प्ले गेम्स 24x7 की प्रस्तावित जीएसटी मांग में 15,209.68 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। यह मूल मांग का 72.7% है। मुंबई ईस्ट कमिश्नरेट ने जुलाई 2017 से वित्त वर्ष 2022-23 तक की अवधि के लिए कंपनी पर 5,719.70 करोड़ रुपये की मूल जीएसटी देनदारी तय की है।
इससे पहले कंपनी से करीब 20,929.38 करोड़ रुपये की वसूली प्रस्तावित थी। अब इसमें से 15,209.68 करोड़ रुपये की मांग हटा दी गई है। तय टैक्स देनदारी में 4,223.37 करोड़ रुपये IGST और 748.17-748.17 करोड़ रुपये केंद्रीय जीएसटी तथा राज्य जीएसटी के हैं।
कंपनी की ओर से पहले ही चुकाए गए 1,407.38 करोड़ रुपये को तय टैक्स देनदारी में समायोजित किया गया है। आदेश में लागू ब्याज की वसूली का भी निर्देश दिया गया है।
स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज के विपरीत, प्ले गेम्स 24x7 पर धारा 74(9) और धारा 122(2)(b) के तहत 5,719.70 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह रकम कंपनी की तय टैक्स देनदारी के बराबर है।
इसके अलावा, कंपनी की अमेरिका स्थित शाखा से जुड़े कुछ विदेशी खर्चों और रकम भेजने के मामलों पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (Reverse Charge Mechanism) के तहत 32.52 करोड़ रुपये की अलग IGST मांग भी तय की गई है। यह रकम 5,719.70 करोड़ रुपये की मुख्य ऑनलाइन गेमिंग टैक्स देनदारी से अलग है। इस अतिरिक्त मांग के तहत कंपनी की ओर से पहले ही चुकाए गए करीब 30.60 करोड़ रुपये को भी समायोजित किया गया है।
अधिकारियों ने कंपनी के तीन अधिकारियों के खिलाफ प्रस्तावित व्यक्तिगत जुर्माने भी हटा दिए हैं। आदेश के मुताबिक, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका या उनके विशेष कृत्यों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
तीनों कंपनियों को कुल 52,915 करोड़ रुपये की राहत
तीनों कंपनियों के आदेशों को मिलाकर देखें तो पहले करीब 70,212.87 करोड़ रुपये की जीएसटी मांग प्रस्तावित थी। अब मूल टैक्स देनदारी 17,297.62 करोड़ रुपये तय की गई है। इस तरह कुल 52,915.25 करोड़ रुपये की मांग हटा दी गई है। यह मूल प्रस्तावित मांग का करीब 75.4% है।
यह तुलना तीनों कंपनियों के ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े मुख्य टैक्स मामलों और हटाई गई मांग पर आधारित है। इसमें ब्याज और जुर्माने को शामिल नहीं किया गया है। यह रकम पहले से चुकाए गए टैक्स और अन्य समायोजन के बाद वास्तव में वसूली जाने वाली अंतिम राशि भी नहीं है। प्ले गेम्स 24x7 पर लगाई गई 32.52 करोड़ रुपये की अलग रिवर्स चार्ज मांग भी इस तुलना में शामिल नहीं है।
तीनों मामलों में जुर्माने के प्रावधान भी अलग-अलग हैं। स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज पर धारा 73 के तहत जुर्माना लगाया गया है, जबकि गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज और प्ले गेम्स 24x7 पर धारा 74 के तहत तय टैक्स के बराबर जुर्माना लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुई दोबारा गणना
ये आदेश ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी लगाने और टैक्स योग्य रकम की गणना से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले के बाद आए हैं। खासकर गेम्सक्राफ्ट के मामले से यह बात सामने आती है कि ऑनलाइन गेमिंग में टैक्स तय करते समय खिलाड़ियों की जमा रकम, जीत की रकम और उस रकम को दोबारा खेल में लगाने के तरीके को कैसे देखा जाता है, इससे अंतिम टैक्स देनदारी पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, कर अधिकारियों के इन आदेशों से तीनों कंपनियों की मूल प्रस्तावित जीएसटी मांग में बड़ी कमी आई है। लेकिन इसे पूरी टैक्स माफी नहीं माना जा सकता। तीनों कंपनियों पर अब भी हजारों करोड़ रुपये की मूल टैक्स देनदारी बनी हुई है और संबंधित आदेशों के मुताबिक ब्याज तथा जुर्माने का भुगतान भी करना पड़ सकता है।
केबल टीवी सेवा देने वाली कंपनी SITI Networks Limited के नए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) के रूप में त्रुपालकुमार पटेल को नियुक्त किया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
केबल टीवी सेवा देने वाली कंपनी SITI Networks Limited के नए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) के रूप में त्रुपालकुमार पटेल को नियुक्त किया गया है। मुंबई स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 28 सितंबर 2026 को इस नियुक्ति को मंजूरी दी थी। कंपनी को इस आदेश की प्रमाणित प्रति 12 अक्टूबर को मिली, जिसके बाद उसने 14 अक्टूबर को इसकी जानकारी शेयर बाजार को दी।
कंपनी ने बताया कि NCLT के मुंबई बेंच ने यह आदेश कंपनी की ओर से दायर आवेदन पर दिया है। यह आवेदन दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 की धारा 27 के तहत नए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की नियुक्ति के लिए किया गया था।
पुराने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल का पंजीकरण रद्द होने के बाद फैसला
NCLT के आदेश के मुताबिक, भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड (IBBI) ने 6 अगस्त 2026 को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत कंपनी के तत्कालीन रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल का पंजीकरण रद्द कर दिया था। आदेश में यह भी कहा गया था कि वह अपनी मौजूदा जिम्मेदारी जारी रखने के पात्र नहीं रहेंगे। यह आदेश 6 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ।
इसके बाद 16 सितंबर 2026 को कर्जदाताओं की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में 72% वोट के साथ त्रुपालकुमार पटेल को नया रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त करने का फैसला लिया गया। NCLT के आदेश के अनुसार, पटेल के पास 31 दिसंबर 2026 तक वैध प्राधिकरण भी है।
NCLT ने आवेदन को मंजूरी दी
NCLT की पीठ में तकनीकी सदस्य हरिहरन नीलकांत अय्यर और न्यायिक सदस्य लक्ष्मी गुरंग शामिल थे। पीठ ने SITI Networks की ओर से दायर आवेदन को मंजूर करते हुए त्रुपालकुमार पटेल को कंपनी का रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया और आवेदन का निपटारा कर दिया। इस मामले से जुड़े दो अन्य आवेदनों पर अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को तय की गई है।
कंपनी ने NCLT के आदेश की प्रमाणित प्रति बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को नियामकीय जानकारी के तौर पर भेजी है।