होम / अखबारी आईना / आज किस अखबार का फ्रंट पेज रहा ‘दमदार’, पढ़ें यहां
आज किस अखबार का फ्रंट पेज रहा ‘दमदार’, पढ़ें यहां
कुछ को छोड़कर दिल्ली के लगभग सभी प्रमुख अखबारों के फ्रंट पेज पर काफी विज्ञापन है
नीरज नैयर 6 years ago
आज अमर उजाला को छोड़कर दिल्ली के लगभग सभी प्रमुख अखबारों के फ्रंट पेज पर काफी विज्ञापन है। नवभारत टाइम्स की बात करें तो कर्नाटक के सियासी नाटक को लीड लगाया गया है। पिछले कुछ दिनों से यह खबर लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। इसके साथ ही एक डीप रंगीन बॉक्स में क्रिकेट को जगह दी गई है। पत्रकार संजीव कुमार ने अपनी इस स्टोरी में सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर के हवाले से वो सवाल उठाया है, जिसका जवाब जानने को पूरा देश उत्सुक है। यानी ‘नंबर 7 पर धोनी को भेजने का फैसला आखिर किसका था?’ सेमीफाइनल में मिली शिकस्त के बाद से ही क्रिकेटप्रेमियों के जहन में यह सवाल उठ रहा था।
अखबार ने अयोध्या मसले से जुड़ी खबर को भले ही छोटा लगाया है, लेकिन उसे प्राथमिकता दी गई है। इसके नीचे एक स्थानीय और एक लखनऊ के समाचार को रखा गया है, दोनों ही खबरें पढ़ी जाने वाली हैं। घर खरीदारों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त और सीबीआई छापे को भी फ्रंट पेज पर स्थान मिला है। ‘फ़ास्ट न्यूज़’ बॉक्स में भी तीन महत्वपूर्ण समाचार हैं। इसके साथ ही इंग्लैंड के वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने की खबर भी पाठकों को दी गई है।
हिन्दुस्तान ने अयोध्या मसले को लीड लगाया है। इस खबर को आकर्षक तरह से पेश किया गया है, जिसकी अपेक्षा हिन्दुस्तान से की जाती है। मानसून से जुडे एक अच्छे समाचार को आंकड़ों के साथ दो कॉलम में उतारा है, क्रिकेट के बाद मानसून ही सबसे पढ़ी जाने वाली खबर है। कर्नाटक और सीबीआई छापे के साथ ही हिन्दुस्तान ने भोपाल में मासूम से दुष्कर्म के दोषी को मिली फांसी की सजा को भी फ्रंट पेज पर लगाया है, जो कि एक अच्छा फैसला है। यह खबर राष्ट्रीय स्तर का महत्व रखती है, क्योंकि बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में लगातार तेजी आ रही है।
प्रभात कुमार की एक्सक्लूसिव स्टोरी ‘सरकारी जमीन पर बने सभी अस्पतालों में गरीबों को मुफ्त इलाज’ शानदार है। इसके अलावा सिंगल कॉलम में भी महत्वपूर्ण खबरों को जगह दी गई है। जैसे कि इंग्लैंड का वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचना और घर खरीदारों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख। ये कहना गलत नहीं होगा कि सीमित जगह होने के बावजूद संपादकीय टीम ने लगभग सभी अहम् समाचारों को प्रथम पृष्ठ पर रखा है।
अमर उजाला का फ्रंट पेज देखने में आकर्षक लग रहा है, लेकिन एक ही जगह, एक जैसे बॉक्स का मोह अब खटकने लगा है। समझना मुश्किल है कि लेआउट में परिवर्तन से इतना परहेज क्यों किया जा रहा है। अमर उजाला उन अखबारों में शुमार है जो प्रजेंटेशन को भी खबर जितना महत्व देता है, मगर पिछले कुछ दिनों से उसने एक ही राह पकड़ ली है। घर खरीदारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख को यहां लीड बनाया गया है, जबकि अयोध्या मसले को उसके नज़दीक डॉटेड बॉक्स में जगह मिली है।
कर्नाटक की सियासी हलचल के साथ सीबीआई छापे के समाचार के साथ न्याय हुआ है। इसके अलावा आम लोगों से जुड़ाव वाले हाई कोर्ट के फैसले को भी प्रथम पृष्ठ पर रखा गया है। फैसले के मुताबिक, फीस न भरने पर प्राइवेट स्कूल टीसी नहीं रोक सकते, निसंदेह इस खबर को सबसे ज्यादा पढ़ा गया होगा। एंकर में क्रिकेट से जुड़ी पढ़ने योग्य खबर है। आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या में पूर्व सांसद को उम्रकैद, इस समाचार को भी फ्रंट पेज पर रखा गया है।
दैनिक जागरण का फ्रंट पेज कल जितना ही नीरस है। जागरण आज भी पारंपरिक तरीके से पेज लगाने में विश्वास रखता है। खबरों का दमदार होना बेहद जरूरी है, लेकिन उतना ही ज़रूरी उनकी दमदार प्रस्तुति भी है। लीड अयोध्या है और क्रिकेट एवं कर्नाटक की कलह को क्रमश: डीप सिंगल और डबल कॉलम में रखा गया है। आज के समय में पूरी खबर पढ़ने वालों की संख्या पहले जितनी नहीं है, लोग केवल प्रमुख बातों पर नजर डालकर पन्ना पलट देते हैं। लिहाजा ये ज़रूरी हो जाता है कि ख़बरों को ब्रेक करके, महत्वपूर्ण बातों को अलग से पेश किया जाए।
सीबीआई छापे के साथ ही जागरण के फ्रंट पेज पर एक ऐसी खबर भी है, जिसके बारे में जानना लोगों को पसंद आएगा। इस खबर के अनुसार, किरायेदार और मकान मालिक के झगड़े 60 दिनों में ही निपट जाएंगे। इसके अलावा कर्नाटक और गोवा में मचे सियासी घमासान को लेकर प्रशांत मिश्र की त्वरित टिप्पणी भी पढ़ने लायक है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे इस स्थिति के लिए राहुल गांधी जिम्मेदार हैं।
आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)
टैग्स हिन्दुस्तान दैनिक जागरण अमर उजाला नवभारत टाइम्स न्यूजपेपर कवरेज न्यूजपेपर्स अखबारों का विश्लेषण अखबार समीक्षा