होम / ऐड वर्ल्ड / सरकार ने माना, इतनी सख्ती के बावजूद मीडिया में आ रहे 'ऐसे विज्ञापन'
सरकार ने माना, इतनी सख्ती के बावजूद मीडिया में आ रहे 'ऐसे विज्ञापन'
किसी भी उत्पाद अथवा सर्विस के प्रचार-प्रसार में विज्ञापनों का बहुत महत्व होता है...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
किसी भी उत्पाद अथवा सर्विस के प्रचार-प्रसार में विज्ञापनों का बहुत महत्व होता है। लेकिन कई बार ऐसे विज्ञापन भी बाजार में आ जाते हैं जो लोगों को गुमराह करते हैं। हालांकि ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई भी होती है, इसके बावजूद उनकी संख्या में कमी नहीं आ रही है।
सरकार का भी यही मानना है कि जागरूकता फैलाने और नियमों के उल्लंघन की निगरानी के लिए मैकेनिज्म बनाने के बावजूद मीडिया में गुमराह करने वाले विज्ञापनों में काफी उछाल आया है।
इस बारे में सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने लोकसभा में वर्षवार आंकड़े रखते हुए बताया कि वर्ष 2015 में भ्रमित करने वाले ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ 641 शिकायतें मिली थीं, वर्ष 2017 में यह संख्या 3302 तक पहुंच गई है जबकि यदि वर्ष 2016 की बात करें तो ऐसी 2032 शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
एक अन्य सवाल के जवाब में राठौड़ ने बताया कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में गुमराह करने वाले विज्ञापनों की शिकायतों को हैंडल करने के लिए 'उपभोक्ता संरक्षण विभाग' (डीसीए) द्वारा पोर्टल ' Grievance Against Misleading Advertisements ' (GAMA) लॉन्च किया गया है। 'GAMA' पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों पर कार्रवाई के लिए'डीसीए' ने 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) के साथ एक एमओयू भी साइन किया है। इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 'ASCI' कंपनियों से ऐसे विज्ञापनों को मॉडीफाई करने अथवा हटाने के लिए कहती है।
राठौड़ ने बताया कि एमआईबी द्वारा 21 अगस्त 2014 को सभी टीवी चैनलों को एडवाइजरी जारी की गई थी कि वे ऐसे विज्ञापनों को टेलिकास्ट न करें जो 'केबल टेलिविजन नेटवर्क्स रूल्स 1994', एएससीआई के नियमों और ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज (Objectionable Advertisement) अधिनियम 1954 के खिलाफ हों। यही नहीं 12 जुलाई 2017 को भी टीवी चैनलों को कहा गया था कि वे उन्हीं प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों का प्रसारण सुनिश्चित करें जिनके पास आयुष मंत्रालय अथवा राज्य के ड्रग लाइसेंसिंग विभाग द्वारा लाइसेंस जारी किया गया हो।
मीडिया में बढ़ते 'सरोगेट विज्ञापनों' (प्रतिबंधित वस्तुओं जैसे सिगरेट, शराब आदि के विज्ञापन) के बारे में एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए राठौड़ ने माना कि टीवी चैनलों में नियमों के उल्लंघन के कई मामले सामने आए हैं लेकिन न्यूजपेपर्स और मैगजीन पर नजर रखने वाली संस्था 'प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया' (PCI) ने इस तरह के किसी उल्लंघन की सूचना नहीं दी है।
राठौड़ के अनुसार मंत्रालय ने 17 जून 2010 को सभी टीवी चैनलों को निर्देश दिए थे कि वे ऐसे ब्रैंड और लोगो का इस्तेमाल करने वाले प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों को न चलाएं, जो सिगरेट, शराब और अन्य तंबाकू उत्पादों पर भी इस्तेमाल किए जाते हैं। इन नियमों का उल्लंकघन करने पर केबल टेलिविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्टर 1995 के अनुसार उचित कार्रवाई की जाती है।
इससे पहले खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्रालय ने भी भ्रामक अथवा गुमराह करने वाले विज्ञापनों का प्रचार करने वाले सेलिब्रिटीज पर भी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा था। वह प्रस्ताव जांच के लिए संसदीय पैनल के पास भेजा गया और यह वर्ष 2017 से वहां धूल खा रहा है। हालांकि सरकार का कहना था कि यह प्रस्ताव विचाराधीन है
गौरतलब है कि कई संसद सदस्यों समेत विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हुए व्यक्ति देश में विभिन्न प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों का प्रचार करते हुए देखे जा सकते हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी कुछ विज्ञापनों में शामिल है।
टैग्स राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भ्रामक विज्ञापन