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ये है मोदी और मनमोहन सरकार के विज्ञापनों की ‘सच्चाई’
हाल ही में सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले सरकारी...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
हाल ही में सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों की दरों में लगभग 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इससे प्रिंट मीडिया जगत में खुशी की लहर है। सरकार द्वारा प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों की बात करें तो अधिकारियों का दावा है कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की तुलना में प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों पर ज्यादा खर्च किया है।
इस बारे में सरकार की ओर से जारी डाटा के अनुसार, सरकारी विज्ञापनों के लिए यूपीए ने 1,896.73 करोड़ रुपए का भुगतान किया, जबकि एनडीए ने अब तक 2,156.22 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि एनडीए सरकार ने वर्ष 2014-15 और दिसंबर 2018 के बीच प्रिंट मीडिया को 460 मिलियन सेंटीमीटर विज्ञापन दिया है, जबकि यूपीए सरकार ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच 560 मिलियन सेंटीमीटर विज्ञापन दिया था।
नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि यूपीए सरकार द्वारा भले ही विज्ञापन ज्यादा दिया गया, लेकिन इस पर खर्च एनडीए सरकार ने ज्यादा किया, क्योंकि इस दौरान विज्ञापन की दरों में भी काफी बढ़ोतरी हो गई है। अधिकारी का यह भी कहना था कि हालांकि यदि हम यूपीए सरकार द्वारा दिए गए विज्ञापनों को आज के रेट से देखें तो यह रकम लगभग 2,558 करोड़ रुपए बैठती है।
रिपोर्ट के अनुसार, इसमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का विज्ञापन शामिल नहीं है। यह भी माना जा रहा है कि वर्तमान एनडीए सरकार द्वारा डिजिटल मीडिया पर भी ज्यादा खर्च किया गया है। इसका भी कारण यही है कि पिछले पांच वर्षों में इस मीडिया का काफी विस्तार हो चुका है।
गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में, सूचना-प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने राज्यसभा को बताया था कि प्रिंट मीडिया को सरकारी विज्ञापन उपलब्ध कराने वाली नोडल एजेंसी ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) की ओर से 2015-16 में 60.9442 करोड़ रुपए के 52 विज्ञापन जारी किए गए। इसके अलावा 2016-17 में 83.2686 करोड़ रुपए के 142 विज्ञापन और 2016-17 में 147.9600 करोड़ रुपए के विज्ञापन जारी किए गए। ये विज्ञापन प्रधानंत्री फसल बीमा योजना, स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन और सांसद आदर्श गांव योजना जैसी सरकारी योजनाओं के लिए दिए गए।
संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 और जुलाई 2018 के बीच इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और अन्य मीडिया पर करीब 480 करोड़ रुपए खर्च किए। इनमें 2014-15 में 979.78 करोड़, 2015-16 में 1,160.16 करोड़, 2016-17 में 1,264.26 करोड़ और 2017-18 में 1,313.57 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
नाम न छापने की शर्त पर भाजपा के एक नेता का कहना है कि यूपीए सरकार द्वारा सरकारी योजनाओं के कई विज्ञापनों में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी का फोटो भी इस्तेमाल किया गया था।
वहीं, कांग्रेस ने विज्ञापनों को लेकर किए गए सरकार के दावे को खारिज किया है। पूर्व सूचना-प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी का कहना है, ‘इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है कि एनडीए ने विज्ञापनों पर अपने पूर्ववर्तियों से ज्यादा खर्च किया है।’ उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञापनों पर सोनिया गांधी के फोटो का इस्तेमाल यूपीए सरकार की चेयरपर्सन की हैसियत से किया गया था। उनका कहना है, ‘भाजपा की तरह हम व्यक्ति केंद्रित पार्टी नहीं हैं।’
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