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'शरबत जिहाद' टिप्पणी पर बाबा रामदेव का कोर्ट में हलफनामा, ऐसी गलती न करने का किया वादा
योग गुरु बाबा रामदेव ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में यह हलफनामा दाखिल किया कि वे “शरबत जिहाद” जैसी किसी भी अपमानजनक या सांप्रदायिक टिप्पणी को भविष्य में नहीं दोहराएंगे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
योग गुरु बाबा रामदेव ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कर्ट में यह हलफनामा दाखिल किया कि वे हमदर्द की रूह अफजा के खिलाफ अपनी “शरबत जिहाद” जैसी किसी भी अपमानजनक या सांप्रदायिक टिप्पणी को भविष्य में नहीं दोहराएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वे सोशल मीडिया या किसी अन्य सार्वजनिक मंच पर ऐसा कोई बयान, वीडियो या पोस्ट जारी नहीं करेंगे जिससे किसी समुदाय या प्रतिस्पर्धी उत्पाद की छवि को ठेस पहुंचे।
यह हलफनामा कोर्ट द्वारा पहले दिए गए निर्देशों के पालन में दाखिल किया गया। इससे पहले 1 मई को न्यायमूर्ति अमित बंसल ने बाबा रामदेव के वकील को दिन में ही हलफनामा दाखिल करने को कहा था। इसके साथ ही रामदेव की कंपनी पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने भी इसी तरह का हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया।
यह विवाद हमदर्द नेशनल फाउंडेशन इंडिया द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर एक दीवानी मुकदमे से जुड़ा है। फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि बाबा रामदेव ने पतंजलि के उत्पाद गुलाब शरबत के प्रचार के दौरान रूह अफजा को निशाना बनाते हुए यह दावा किया कि उसका मुनाफा मस्जिदों और मदरसों के निर्माण में लगाया जा रहा है।
फाउंडेशन के मुताबिक यह बयान केवल प्रतिस्पर्धी उत्पाद की निंदा नहीं, बल्कि एक सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाला वक्तव्य है जिसे जानबूझकर दिया गया। इस प्रचार वीडियो में रामदेव ने रूह अफजा का नाम न लेकर भी उसे स्पष्ट रूप से निशाना बनाया और “शरबत जिहाद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। यह वीडियो पतंजलि प्रोडक्ट्स नाम के फेसबुक पेज पर अपलोड किया गया था।
22 अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस टिप्पणी को “अक्षम्य” करार देते हुए कहा था कि यह न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस तरह के बयान सांप्रदायिक सौहार्द और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके बाद रामदेव की ओर से वकील वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने आश्वासन दिया था कि सभी आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट हटा दिए जाएंगे और ऐसा कोई बयान दोबारा नहीं दिया जाएगा।
हालांकि शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हमदर्द की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि जिन वीडियो को हटाया जाना था, उन्हें केवल “प्राइवेट” कर दिया गया है, जबकि कोर्ट ने इन्हें पूरी तरह हटाने का निर्देश दिया था।
जवाब में रामदेव के वकील ने कहा कि कोर्ट के प्रति उनका पूरा सम्मान है और “24 घंटे के भीतर सभी निर्देशों का पालन किया जाएगा।”
1 मई को कोर्ट ने रामदेव को चेतावनी दी थी कि यदि आपत्तिजनक कंटेंट हटाया नहीं गया तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इसी के बाद यह हलफनामा दाखिल किया गया।
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि रामदेव द्वारा दिया गया बयान केवल मानहानिकारक नहीं बल्कि सांप्रदायिक घृणा फैलाने वाला है। उन्होंने कोर्ट को यह भी याद दिलाया कि रामदेव को इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा एलोपैथी के खिलाफ भ्रामक बयानों पर फटकार लग चुकी है और एक अन्य मामले में उन्होंने एक मुस्लिम व्यवसायी के खिलाफ भी इसी तरह का बयान दिया था।
कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 9 मई 2025 तय की है, जब यह देखा जाएगा कि रामदेव और पतंजलि की ओर से दिए गए आश्वासनों पर पूरी तरह अमल हुआ है या नहीं।
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