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भ्रामक माने जाएंगे इस तरह के विज्ञापन, इन नियमों का भी करना होगा पालन
झूठे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने विज्ञापन निर्माताओं व विज्ञापन एजेंसियों के लिए गाइडलाइंस का मसौदा तैयार किया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
झूठे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए ‘उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय’ (Ministry of Consumer Affairs) ने विज्ञापन निर्माताओं व विज्ञापन एजेंसियों के लिए गाइडलाइंस का मसौदा (draft guidelines) तैयार किया है। इसके अनुसार, ‘डिस्क्लेमर’ (disclaimers) वाले विज्ञापनों में छोटे फॉन्ट्स (small fonts) का इस्तेमाल किए जाने पर उन्हें भ्रामक माना जाएगा। इन दिशा निर्देशों में कहा गया है कि डिस्क्लेमर का फॉन्ट साइज विज्ञापन द्वारा किए गए दावे के समान आकार का होना चाहिए।
इसी तरह से यदि विज्ञापन में डिस्क्लेमर ‘वॉयस ओवर’ (VO) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तो एडवर्टाइजर द्वारा किए गए दावे को इस वॉयस ओवर के साथ सिंक (sync) किया जाना चाहिए।
ये नए नियम ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ (Consumer Protection Act) 2019 के तहत मंत्रालय द्वारा तैयार मसौदा गाइडलाइंस के एक समूह का हिस्सा हैं। इस मसौदे में ‘वैध विज्ञापन’ (valid advertisement) के तहत ‘दिशानिर्देशों के उल्लंघन’ (contraventions of the guidelines) के लिए 20 नियमों को शामिल किया गया है।
इन ड्राफ्ट गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि विज्ञापनों में सच और ईमानदारी होनी चाहिए और यह किसी भी तरह से कंज्यूमर्स को गुमराह करने वाले नहीं होने चाहिए। इसके अलावा विज्ञापनों को देश में सार्वजनिक शालीनता (public decency) के मानकों का भी पालन करना चाहिए। इनके अनुसार, विज्ञापनों में दूसरों के लेआउट, कॉपी, नारों, दृश्यों, प्रस्तुति, संगीत या ध्वनि प्रभावों की नकल नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापनों को लेकर तैयार गाइडलाइंस के मसौदे (Draft Guidelines) को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।
टैग्स विज्ञापन एडवर्टाइजर्स उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 विज्ञापनदाता एंडोर्समेंट मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर्स अफेयर्स उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय