होम / ऐड वर्ल्ड / सुधांशु वत्स बने ASCI के नए चेयरमैन, संस्था ने पूरे किए 40 साल
सुधांशु वत्स बने ASCI के नए चेयरमैन, संस्था ने पूरे किए 40 साल
पिडिलाइट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधांशु वत्स को ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
पिडिलाइट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधांशु वत्स को ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह घोषणा संस्था की 39वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में की गई। खास बात यह है कि अक्टूबर में ASCI अपने 40 साल पूरे कर रहा है, ऐसे में यह नियुक्ति एक मील का पत्थर मानी जा रही है।
MullenLowe Global के एस. सुब्रमणेश्वर को वाइस-चेयरमैन और Provocateur Advisory के प्रिंसिपल और इंडस्ट्री वेटरन पारितोष जोशी को ऑनरेरी ट्रेजरर बनाया गया है।
सुधांशु वत्स ने कहा, “ASCI की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम है। जैसे-जैसे विज्ञापन नई तकनीक और नए फॉर्मेट्स के साथ आगे बढ़ रहा है, हमारी जिम्मेदारी है कि इसे ईमानदारी के साथ पेश किया जाए, जिसमें प्रोडक्ट प्रॉमिस केंद्र में हो, समाज के प्रति सम्मान झलके और उपभोक्ताओं का ध्यान रखा जाए। आज जब भरोसा आसानी से डगमगा सकता है, तो सेल्फ-रेगुलेशन इंडस्ट्री को दिशा और जनता को भरोसा देता है। मैं विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों, प्लेटफॉर्म्स और उपभोक्ताओं के साथ मिलकर उच्च मानकों को कायम रखने, जिम्मेदार क्रिएटिविटी को बढ़ावा देने और विज्ञापन पर विश्वास मजबूत करने की दिशा में काम करने को लेकर उत्सुक हूं। इस प्रयास का मूल सिद्धांत बेहद सरल है- हमेशा उपभोक्ता के हित को सबसे आगे रखना।”
वहीं, मौजूदा चेयरमैन पार्थ सिन्हा ने कहा, “मेरा कार्यकाल भले ही खत्म हो रहा है, लेकिन ASCI की यात्रा पूरे उत्साह के साथ जारी है। यह किसी वाक्य में सिर्फ एक कॉमा की तरह है, जहां कहानी आगे बढ़ती रहती है। पिछले वर्षों में हम वॉचडॉग से जिम्मेदार कम्युनिकेशन के साझेदार बनने तक का सफर तय कर चुके हैं- सिर्फ निगरानी नहीं, बल्कि साझेदारी। हमने डिजिटल दुनिया में मजबूती से कदम रखा, क्योंकि जिम्मेदारी तकनीक से पीछे नहीं रह सकती। हमने ASCI का दायरा भी बढ़ाया है, ताकि उपभोक्ता का भरोसा सिर्फ कुछ हिस्सों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे भारत की साझा भाषा बने। मैं यह कुर्सी छोड़ रहा हूं इस सुकून के साथ कि यह कहानी जारी है और अपने सहयोगियों के प्रति गहरी कृतज्ञता के साथ, जिन्होंने इस सफर को साझा मकसद और सामूहिक ताकत से आगे बढ़ाया।”
ASCI के 40 साल पूरे होने पर नई पहलें
ASCI ने इस मौके पर अगले साल के लिए कई बड़े कदमों का ऐलान किया:
-
बच्चों के लिए ऐडवर्टाइजिंग और मीडिया लिटरेसी प्रोग्राम: ‘AdWise’ नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसमें 10 लाख से ज्यादा स्कूली बच्चों को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे विज्ञापनों को समझ, परख और सवाल कर सकें और भ्रामक या हानिकारक विज्ञापनों से बच सकें।
-
Gen Alpha पर रिसर्च: नई पीढ़ी के बच्चों, जो तकनीक और स्क्रीन के साथ बड़े हो रहे हैं, के लिए जिम्मेदार विज्ञापन का ढांचा बनाने को एथ्नोग्राफिक रिसर्च।
-
बेंगलुरु और दिल्ली में विस्तार।
-
विज्ञापन कोड्स और कानूनों पर व्यापक संसाधन लॉन्च, खैतान एंड कंपनी जैसे प्रमुख लॉ फर्म के साथ साझेदारी में।
-
पॉडकास्ट सीरीज की शुरुआत, द लॉजिकल इंडियन और मार्केटिंग माइंड्स के सहयोग से।
-
विजुअल एसेट लॉन्च: ASCI के मेंबर्स के लिए एक विजुअल एसेट उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे वे अपनी वेबसाइट्स और कम्युनिकेशन में इस्तेमाल कर सकेंगे ताकि जिम्मेदार विज्ञापन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा सकें।
ASCI की यात्रा और उपलब्धियां
1985 में स्थापित ASCI, विज्ञापन इंडस्ट्री की एक स्वैच्छिक पहल के रूप में शुरू हुआ था ताकि जिम्मेदारी और उपभोक्ता सुरक्षा की संस्कृति बनाई जा सके। शुरुआत में बनाए गए कोड ऑफ कंडक्ट को बाद में पॉलिसी मेकर्स और रेगुलेटर्स ने मान्यता दी। इसे केबल टीवी एक्ट, दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और कई रेगुलेटर्स ने अपनाया। समय के साथ ASCI ने स्वास्थ्य, उपभोक्ता मामले, शिक्षा और आयुष मंत्रालय समेत कई सरकारी निकायों के साथ काम किया।
ASCI की कंज्यूमर कंप्लेंट्स कमेटी की सिफारिशों पर पालन का स्तर बेहद ऊंचा रहा है। 2024-25 में प्रिंट और टीवी पर यह अनुपालन दर क्रमशः 98% और 97% रही, जबकि डिजिटल में यह 81% रही। सुप्रीम कोर्ट के कई मामलों में भी ASCI की भूमिका का जिक्र हुआ है, जो उपभोक्ता संरक्षण में इसकी अहमियत को दर्शाता है।
हाल के वर्षों में ASCI अकादमी की शुरुआत हुई है, जिसने संस्था की भूमिका को अनुपालन से आगे बढ़ाकर शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन तक फैला दिया है। इसके श्वेतपत्र और रिसर्च रिपोर्ट्स ने इंडस्ट्री को नए मुद्दों पर दिशा दी है, जैसे — डार्क पैटर्न्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल, विज्ञापन में मर्दानगी की छवि, डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स पर भरोसा। इसके लिए ASCI को दो अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड्स भी मिले।
ASCI ने इन्फ्लुएंसर आचार संहिता, डार्क पैटर्न्स, क्रिप्टोकरेंसी, ग्रीन क्लेम्स और जेंडर स्टीरियोटाइपिंग पर भी दिशा-निर्देश बनाए।
आज ASCI की भूमिका सिर्फ शिकायतों का निपटारा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदार और नैतिक विज्ञापन का भविष्य गढ़ने में भी है। इसके मास्टर क्लासेस और फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम्स देश के प्रमुख मीडिया और विज्ञापन कॉलेजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, एडवाइजरी सर्विस से विज्ञापनदाता प्रोडक्शन से पहले ही यह जांच सकते हैं कि उनका विज्ञापन कोड के अनुरूप है या नहीं।
आगे चलकर ASCI वैश्विक साझेदारी और ज्ञान-साझाकरण को और मजबूत करने, साथ ही डिजिटल-फर्स्ट विज्ञापन की चुनौतियों के लिए रिसर्च, इनोवेशन और फ्रेमवर्क पर निवेश करने की योजना बना रहा है।
टैग्स