Star India: वर्ल्ड कप में 10 सेकंड के विज्ञापन के लिए अब चुकानी होगी ये रकम

किक्रेट वर्ल्ड कप के लिए स्टार इंडिया ने विज्ञापन रेट के दो पैकेज तैयार किए हैं

Last Modified:
Thursday, 30 May, 2019
Samachar4media

इंग्लैंड में क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 का आगाज हो गया है। इतने बड़े आयोजन के मद्देनजर क्रिकेट वर्ल्ड कप के आधिकारिक ब्रॉडकास्टर ‘स्टार इंडिया’ ने अपने विज्ञापन के रेट बढ़ा दिए हैं। इसके तहत 10 सेकंड के विज्ञापन के लिए कंपनियों को 20 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे। यहां बता दें कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने स्टार मिडिल ईस्ट और स्टार इंडिया को वर्ष 2015 से 2023 तक वर्ल्डकप का आधिकारिक ब्रॉडकास्टर बना रखा है।

बताया जाता है कि वर्ल्ड कप 2015 में चैनल ने 700 करोड़ की कमाई की थी, माना जा रहा है कि रेट बढ़ने से अब यह कमाई और ज्यादा बढ़ सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो विज्ञापन के कारण इस विश्वकप में चैनल को 1,200 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपए तक रेवेन्यू मिल सकता है।

दरअसल, स्टार इंडिया ने विज्ञापन रेट के दो पैकेज तैयार किए हैं। इनके तहत भारत के साथ होने वाले मैचों में विज्ञापन का रेट 17 से 20 लाख रुपए प्रति दस सेकंड के बीच रखा गया है। वहीं, जिन मैचों में भारत नहीं खेल रहा होगा, उन मैचों का विज्ञापन रेट 10 सेकंड के लिए छह से सात लाख रुपए के बीच होगा। चैनल की ओर से सेमीफाइनल और फाइनल मैचों के दौरान विज्ञापन के रेट का फैसला अभी नहीं किया गया है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय टीम का इन मैचों के दौरान किस तरह का प्रदर्शन रहता है।

अमेजन, ड्रीम कोका कोला, उबर, फिलिप्स और आईसीआईसीआई लोम्बॉर्ड जैसी 40 से अधिक कंपनियों ने स्टार इंडिया से विश्व कप का स्लॉट खरीदा है। कंपनी को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म हॉटस्टार से 300 करोड़ रुपए की कमाई की उम्मीद है। वहीं डीटीएच और केबल कंपनियों से भी अलग से रेवेन्यू मिलेगा।

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अनुप्रिया आचार्य को मिली AAAI की कमान, एग्जिक्यूटिव कमेटी में शामिल हुए ये नाम

‘Publicis Groupe’ की सीईओ (साउथ एशिया) अनुप्रिया आचार्य को ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का प्रेजिडेंट चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
Anupriya Acharya

‘Publicis Groupe’ की सीईओ (साउथ एशिया) अनुप्रिया आचार्य को ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) का प्रेजिडेंट चुना गया है। उनका चयन वर्ष 2020-21 के लिए किया गया है। एसोसिएशन की वार्षिक आम सभा की बैठक में यह घोषणा की गई। अब तक इस पद पर रहे आशीष भसीन ने अनुप्रिया आचार्य को चार्ज सौंप दिया है। इसके अलावा ‘ग्रुप एम’ (GroupM) के सीईओ (साउथ एशिया) प्रशांत कुमार को सर्वसम्मति से एसोसिएशन का वाइस प्रेजिडेंट चुना गया है।

 एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव कमेटी में  बतौर मेंबर आनंद भडमकर (Dentsu Aegis Network Marketing Solutions Pvt Ltd), कुणाल ललानी (Crayons Advertising Pvt Ltd), मोहित जोशी (Havas Media India Pvt Ltd), प्रणव प्रेमनारायण (Prem Associates Advertising & Marketing), राणा बरुआ (Havas Worldwide India Pvt Ltd), विवेक श्रीवास्तव (Innocean Worldwide Communications Pvt Ltd) को शामिल किया गया है। आशीष भसीन वर्ष 2020-21 के लिए एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव कमेटी के पदेन सदस्य (ex-officio member) होंगे।

अपनी नियुक्ति के बारे में अनुप्रिया आचार्य का कहना है, ‘इस तरह के प्रतिष्ठित संस्थान के प्रेजिडेंट के तौर पर चुना जाना मेरे लिए मेरे लिए काफी सम्मान की बात है, इसके अलावा यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। सारी दुनिया की तरह हमारी इंडस्ट्री भी महामारी से काफी बुरी तरह प्रभावित हुई है और यह हम सभी के लिए काफी मुश्किल समय है।  मैं एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के हितों को आगे बढ़ाने और AAAI को और अधिक ऊंचाई तक ले जाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास करूंगी।’

वहीं, आशीष भसीन ने कहा, ‘मुझे दो साल बतौर प्रेजिडेंट इस प्रतिष्ठित संस्था के साथ काम करने का मौका मिला। मैं एग्जिक्यूटिव कमेटी के सभी मेंबर्स का उनके सहयोग के लिए धन्यवाद अदा करता हूं। इसके अलावा मैं अनुप्रिया आचार्य को इस संस्था का प्रेजिडेंट चुने जाने पर बधाई देता हूं।’

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ओणम पर ऐडवर्टाइजर्स ने मातृभूमि समूह पर कुछ यूं 'बरसाया प्यार'

समूह की ओर से इन विज्ञापनदाताओं का आभार भी व्यक्त किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
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‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) समूह को इस बार ओणम सीजन (Onam season) के दौरान 1000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापन दिए हैं। बताया जाता है कि इनमें से 200 ऐडवर्टाइजर्स केरल के स्थानीय व्यापारी रहे, जिन्होंने खासतौर पर मातृभूमि समूह को विज्ञापन दिए।

समूह की ओर से इन विज्ञापनदाताओं का आभार भी जताया गया है। इस बारे में ‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘मेरा हमेशा से मानना रहा है कि प्रत्येक संकट में एक अवसर होता है। यह हमारी उत्साही और मेहनती टीम के प्रयासों का नतीजा और ऐडवर्टाइजर्स का हमारे ऊपर भरोसा है, जो हमें इतने विज्ञापन मिले हैं।’

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जानिए, विज्ञापनों के लिहाज से कैसे रहे पिछले दो महीने

पिछले साल जुलाई से अगस्त के बीच की अवधि के मुकाबले इस साल इसी अवधि में विज्ञापनों में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 10 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 10 September, 2020
Advertising

पिछले साल जुलाई से अगस्त के बीच की अवधि के मुकाबले इस साल इसी अवधि में विज्ञापनों (Advertising volumes) में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। ‘टैम एडेक्स’ (Tam AdEx) के डाटा के अनुसार, यदि टीवी की बात करें तो इसी अवधि के दौरान इसे मिलने वाले विज्ञापनों में 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पिछले साल जुलाई-अगस्त के मुकाबले इस साल इसी अवधि में 20 से ज्यादा नई कैटेगरी और 1800 से ज्यादा नए एडवर्टाइजर्स सामने आए हैं।    

टीवी पर 370 से ज्यादा कैटेगरीज में 3000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स और 4600 से ज्यादा ब्रैंड्स देखे गए हैं। दैनिक आधार (daily basis) पर विज्ञापनों की संख्या (ad volumes) की बात करें तो अगस्त 2020 में पिछले महीने के मुकाबले इनमें पांच प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इन डाटा से यह भी पता चलता है कि पिछले छह हफ्तों के दौरान विज्ञापनों की संख्या में स्थिरता आई है और 27वें हफ्ते की तुलना में 35वें हफ्ते में 16 प्रतिशत बढ़ोतरी देखी गई है।

इन डाटा के अनुसार, सेक्टर्स को देखें तो पर्सनल केयर/पर्सनल हाइजीन 21 प्रतिशत शेयर के साथ ऐड वॉल्यूम के मामले में टॉप पर हैं और इसके बाद फूड एंड बेवरेज (F&B) का नंबर है। टॉप10 कैटेगरीज में एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर का बोलबाला रहा है। ऐड वॉल्यूम के मामले में टॉप10 एडवर्टाइजर्स का टीवी में शेयर करीब 50 प्रतिशत है। इसमें HUL का अकेले 22 प्रतिशत और Reckitt का 10 प्रतिशत शेयर है।

नए एडवर्टाइजर्स की लिस्ट में Facebook Inc पहले नंबर पर है। top 10 growing Advertisers में ऐड वॉल्यूम में सबसे ज्यादा तीन गुना ग्रोथ कार कैटेगरी में देखी गई है। इसके बाद चॉकलेट्स का नंबर है। कोका कोला इंडिया के ऐड वॉल्यूम में भारी उछाल देखा गया है। ऐड वॉल्यूम के मामले में सबसे आगे न्यूज जॉनर (31%) है। इसके बाद जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (27%) और फिर मूवीज जॉनर (25%) है।

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भ्रामक माने जाएंगे इस तरह के विज्ञापन, इन नियमों का भी करना होगा पालन

झूठे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने विज्ञापन निर्माताओं व विज्ञापन एजेंसियों के लिए गाइडलाइंस का मसौदा तैयार किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 07 September, 2020
Last Modified:
Monday, 07 September, 2020
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झूठे और गुमराह करने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए ‘उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय’ (Ministry of Consumer Affairs) ने विज्ञापन निर्माताओं व विज्ञापन एजेंसियों के लिए गाइडलाइंस का मसौदा (draft guidelines) तैयार किया है। इसके अनुसार, ‘डिस्क्लेमर’ (disclaimers) वाले विज्ञापनों में छोटे फॉन्ट्स (small fonts) का इस्तेमाल किए जाने पर उन्हें भ्रामक माना जाएगा। इन दिशा निर्देशों में कहा गया है कि डिस्क्लेमर का फॉन्ट साइज विज्ञापन द्वारा किए गए दावे के समान आकार का होना चाहिए।

इसी तरह से यदि विज्ञापन में डिस्क्लेमर ‘वॉयस ओवर’ (VO) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तो एडवर्टाइजर द्वारा किए गए दावे को इस वॉयस ओवर के साथ सिंक (sync) किया जाना चाहिए।

ये नए नियम ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ (Consumer Protection Act) 2019 के तहत मंत्रालय द्वारा तैयार मसौदा गाइडलाइंस के एक समूह का हिस्सा हैं। इस मसौदे में ‘वैध विज्ञापन’ (valid advertisement) के तहत ‘दिशानिर्देशों के उल्लंघन’ (contraventions of the guidelines) के लिए 20 नियमों को शामिल किया गया है।

इन ड्राफ्ट गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि विज्ञापनों में सच और ईमानदारी होनी चाहिए और यह किसी भी तरह से कंज्यूमर्स को गुमराह करने वाले नहीं होने चाहिए। इसके अलावा विज्ञापनों को देश में सार्वजनिक शालीनता (public decency) के मानकों का भी पालन करना चाहिए। इनके अनुसार, विज्ञापनों में दूसरों के लेआउट, कॉपी, नारों, दृश्यों, प्रस्तुति, संगीत या ध्वनि प्रभावों की नकल नहीं होनी चाहिए।

विज्ञापनों को लेकर तैयार गाइडलाइंस के मसौदे (Draft Guidelines) को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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विज्ञापन के लिहाज से दैनिक भास्कर के लिए कैसा रहा पिछला महीना, जानें यहां

दैनिक भास्कर ने अगस्त में अपना रिटेल मार्केट एडवर्टाइजिंग बेस करीब 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। ग्रुप के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में इसका करीब 70 प्रतिशत योगदान है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 04 September, 2020
Last Modified:
Friday, 04 September, 2020
Dainik Bhaskar

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) के लिए यह काफी अच्छी खबर है। दरअसल, दैनिक भास्कर ने अगस्त में अपना रिटेल मार्केट एडवर्टाइजिंग बेस करीब 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। ग्रुप के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में इसका करीब 70 प्रतिशत योगदान है। इस बात से स्पष्ट पता चलता है कि नॉन मेट्रो मार्केट में स्थिति सामान्य की ओर लौटने लगी है। ‘E&Y’ की हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार, नॉन मेट्रो मार्केट देश की अर्थव्यवस्था में रिकवरी की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे। दैनिक भास्कर को मिले विज्ञापनों की कैटेगरी की बात करें तो इनमें रियल एस्टेट, ज्वैलरी, ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर, एफएमसीजी और सरकार ने काफी मजबूती के साथ वापसी की है।

बताया जाता है कि अगस्त में दैनिक भास्कर में ऑटोमोबाइल कैटेगरी में नौ प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। इस बारे में दैनिक भास्कर ग्रुप के प्रेजिडेंट (सेल्स एंड मार्केटिंग) हरीश भाटिया का कहना है, ‘राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात के मार्केट्स ने उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से रिकवरी की है। कुछ खास कैटेगरी जैसे-रियल एस्टेट और ज्वैलरी में मध्य प्रदेश और राजस्थान में हमें ग्रोथ देखने को मिली है। इन मार्केट्स में दैनिक भास्कर की मजबूत स्थिति के कारण हमें ज्यादा मार्केट शेयर हासिल करने में मदद मिल रही है।’

इस बारे में ‘डीबी कॉर्प’ (DB Corp) के चीफ कॉरपोरेट सेल्स और मार्केटिंग ऑफिसर सत्यजीत सेन गुप्ता का कहना है, ‘त्योहारी सीजन नजदीक होने और सरकार द्वारा अनलॉक-4 की घोषणा के कारण हमें पूरा विश्वास है कि कंपनियां अप्रैल, मई और जून में खोई हुई सेल्स को वापस पटरी पर लाने के लिए बाहर आएंगी और इसके लिए विज्ञापन बजट भी बढ़ाया जाएगा।’

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अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी विज्ञापनों की मॉनीटरिंग करेगी ASCI, इस संस्था से मिलाया हाथ

इस पार्टनरशिप के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर संदिग्ध व भ्रामक विज्ञापनों की मॉनीटरिंग की जाएगी।    

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2020
ASCI

'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने राष्ट्रीय विज्ञापन निगरानी सेवा (NAMS) के तहत की जा रही प्रिंट और टेलिविजन मीडिया पर विज्ञापनों की मॉनीटरिंग के साथ इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी शामिल करने के लिए 'टैम मीडिया रिसर्च' (TAM Media Research) के साथ पार्टनरशिप की है। 

इस पार्टनरशिप के तहत 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंनडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' डिजिटल मीडिया पर फूड और बेवरेज, हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर्स से जुड़े विज्ञापनों की जांच करेगी। बताया जाता है कि पिछले साल 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंचडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' ने इन तीनों सेक्टर्स से जुड़ी सबसे ज्यादा शिकायतों पर कार्रवाई की थी।

इस समय मीडिया पर किए जाने वाले विज्ञापन खर्च में डिजिटल एडवर्टाइजिंग करीब 30 प्रतिशत है और यह तेजी से बढ़ रही है। इस पार्टनरशिप के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर संदिग्ध व भ्रामक विज्ञापनों की मॉनीटरिंग की जाएगी। 

इस बारे में ‘ASCI’ के चेयरमैन रोहित गुप्ता का कहना है, ‘हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो तेजी के साथ दिनोंदिन और ज्यादा डिजिटल होती जा रही है। ऐसे में तमाम मार्केटिंग भी इस तरह के प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो रही है। एक सेल्फ रेगुलेटरी बॉडी के तहत हमने ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन की मॉनीटरिंग के लिए अपना दायरा बढ़ाया है। मेरा मानना के है कि दुनिया में ‘ASCI’ ही एकमात्र ऐसी स्व: नियामक संस्था (self-regulatory organisation) है, जो विज्ञापनों की इतनी व्यापक मॉनीटरिंग करती है। हमें टैम से बेहतर पार्टनर नहीं मिल सकता, इसकी प्रतिष्ठा और व्यापक अनुभव हमें विज्ञापन में विश्वास बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के अपने मिशन को हासिल करने में मदद करेगा कि हमारे नैतिक मूल्यों का पालन किया जाए।’

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IPL 2020: विज्ञापनों को लेकर स्टार इंडिया ने कुछ यूं ‘कसी कमर’

माना जा रहा है कि इसके बाद भी ब्रैंड्स आईपीएल के लिए विज्ञापन पर खूब खर्च करेंगे और यह लीग एक बार फिर मार्केट में गति लेकर आएगी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 20 August, 2020
Last Modified:
Thursday, 20 August, 2020
Star India

इस साल के सबसे बड़े आयोजन को भुनाने के लिए ‘स्टार इंडिया’ (Star India) पूरी तरह से तैयार है। पहली तिमाही खराब रहने के बाद अब स्टार इंडिया पिछले सत्र के मुकाबले ‘इंडियन प्रीमियर लीग’ (IPL) की विज्ञापन दरों में 20 से 20 प्रतिशत बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, साल 13वें आईपीएल के लिए विज्ञापन दरें 12लाख रुपये प्रति सेकेंड से लेकर 12.5 लाख रुपये प्रति सेकेंड रह सकती हैं।

कोविड-19 से पहले की तुलना में टीवी का उपभोग (TV consumption) 15 प्रतिशत बढ़ा है (source: BARC) और लाइव स्पोर्ट्स को दर्शकों ने काफी मिस किया है। इसके अलावा, आईपीएल के इस सीजन में मैच पहले यानी शाम साढ़े सात बजे शुरू होंगे, जिसके कारण इसके दर्शकों की संख्या 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाएगी।

माना जा रहा है कि इस बार यह सीरीज व्युअरशिप के नए रिकॉर्ड बनाएगी, जिसकी वजह से विभिन्न सेक्टर्स से जुड़े एडवर्टाइजर्स इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में सुस्त अर्थव्यवस्था के बावजूद ब्रॉडकास्टर्स को लग रहा है कि वे ऐड स्लॉट की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। यहां तक कि बढ़ी हुई कीमतों पर भी ब्रैंड्स आईपीएल की विज्ञापन इंवेंट्री पर बड़ा दांव लगा रहे हैं।

‘आईपीजी मीडियाब्रैंड्स इंडिया’ (IPG Mediabrands India) के सीईओ शशि सिन्हा के अनुसार, ‘इस साल कोविड के बाद कंपनियां निश्चित रूप से रिकवरी की ओर देख रही हैं। फेस्टिव सीजन के साथ इस बार आईपीएल भी शुरू हो रहा है। टाइटल स्पॉन्सरशिप से वीवो (Vivo) के हटने के बाद हमने देखा कि तीन बड़े बोलीदाता आगे आए और ब्रैंड्स इस लीग में काफी रुचि दिखा रहे हैं। आईपीएल की लोकप्रियता को देखते हुए उम्मीद है कि यह एडवर्टाइजर्स को आकर्षित करेगी। कुल मिलाकर आईपीएल इस समय बहुत जरूरी पुनर्त्थान का संकेत है।’

सिन्हा का यह भी कहना है, ‘विज्ञापन देने वाले ब्रैंड्स की कैटेगरीज की बात करें तो इनमें मुख्य: ई-कॉमर्स प्लेयर्स, एजुकेशन ऑटो कंपनियां और यहां तक कि बेवरेज कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं, हालांकि उनके लिए यह पीक सीजन नहीं है।’

व्युअरशिप की बात करें तो आईपीएल एक तरह से फैमिली स्पोर्ट्स बन गया है और लीग के 12वें एडिशन को 613 मिलियन व्युअर्स मिले थे (consolidated + PPL + surround)। यही नहीं, यह लीग से ब्रैंड्स को विभिन्न भाषाओं के दर्शकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिलती है। स्टार इंडिया के सूत्रों के अनुसार, आईपीएल के 13वें सीजन के ब्रॉडकास्टर प्रादेशिक भाषाओं में अपना फोकस बनाए जारी रखेगा।  

विशेषज्ञों का अनुमान है कि हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त स्टार स्पोर्ट्स को चार अन्य भाषाओं (तमिल, तेलुगू, बांग्ला और कन्नड़) में व्युअरशिप मिलेगी। इस बारे में वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ अनीता नैय्यर का कहना है कि वर्तमान में चल रही महामारी की स्थिति के बावजूद दो प्रमुख फैक्टर्स हैं जो चैनल्स को ज्यादा चार्ज करने की अनुमति देंगे।

अनीता नैय्यर के अनुसार, ‘पहली बात तो यह है कि आईपीएल का आयोजन फेस्टिव सीजन के दौरान होगा और कई ब्रैंड्स फेस्टिव एडवर्टाइजिंग के लिए अपने बजट को बढ़ाएंगे। दूसरी बात ये है कि वर्तमान में ऑडियंस क्रिकेट को देखना चाहते हैं। इस साल का पहला बड़ा क्रिकेट आयोजन होने के कारण आईपीएल को सबसे ज्यादा व्युअरशिप मिलनी चाहिए, ऐसे में यह ब्रैंड्स के लिए अच्छा मौका होगा।’

पब्लिशेस ग्रुप के स्वामित्व वाली मीडिया एजेंसी ‘जेनिथ’ (Zenith) के चीफ क्लाइंट ऑफिसर अजीत गुरनानी का कहना है, ‘इस समय तमाम लोग घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर रहे हैं। ऐसे में कुछ निश्चित कैटगेरीज की मांग बढ़ रही है और क्रिकेट व आईपीएल इसकी रफ्तार को और गति देंगे। इसके अलावा फिलहाल आईपीएल के कॉम्प्टीशन में कोई नहीं है। इन सबके कारण व्युअरशिप बढ़ना निश्चित है। इससे मार्केट में फिर उछाल आने की उम्मीद है।’

चार घंटे के इस मैच में ब्रैंड्स न सिर्फ ब्रेक्स के दौरान विज्ञापन देंगे, बल्कि मैच के दौरान विकेट गिरने या चौका-छक्का लगने की स्थिति में भी विज्ञापन देंगे। सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन शॉपिंग, होम डेकोर, मोबाइल हैंडसेट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी, ऑटो जैसी कैटेगरीज में लोग खर्च करेंगे इससे ऐड इन्वेंट्री बढ़ेगी। इसके अलावा, ऐसे तमाम एडवर्टाइजर्स जो पिछले सीजन में अपने निवेश पर अच्छा रिटर्न देख चुके हैं, वे भी विज्ञापन दरों के बढ़ने के बावजूद इस अवसर का फिर फायदा उठाना चाह रहे हैं।

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मीडिया में विज्ञापन खर्च को लेकर कैसी रही यह छमाही, पढ़ें ये रिपोर्ट

‘पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट’ (PMAR) 2020 का अर्द्धवार्षिक रिव्यू (Mid-Year Review) हाल ही में जारी हुआ।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 August, 2020
Last Modified:
Wednesday, 19 August, 2020
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‘पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट’ (PMAR) 2020 का अर्द्धवार्षिक रिव्यू (Mid-Year Review) मंगलवार को जारी हुआ। इस रिपोर्ट के अनुसार दूसरी तिमाही (Q2) में विज्ञापन खर्च (AdEx) में काफी कमी आई है। कोविड के प्रभाव के कारण यह कमी 65 प्रतिशत तक हुई है। इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि पहली तिमाही (Q1) में विज्ञापन खर्च के अनुबंध आठ प्रतिशत तक ही रहे और ट्रेडिशनल मीडिया में विज्ञापन खर्च में सबसे ज्यादा कमी देखी गई। इस रिपोर्ट ने यह संकेत भी दिए कि इस साल विज्ञाप खर्च वर्ष 2017 और 2018 के स्तर से भी कम होगा। ऐसा पहली बार हुआ है, जब पिच मैडिसन रिपोर्ट का अर्द्धवार्षिक रिव्यू (H1 Outlook) लाया गया है, जिसके अनुसार वर्ष 2020 की पहली छमाही (2020 H1) में विज्ञापन खर्च में 39 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है। ट्रेडिशनल मीडिया के लिए यह काफी निराशाजनक खबर है, जिसकी ग्रोथ 47 प्रतिशत तक घटी है। हालांकि, यह कमी दूसरी तिमाही में ज्यादा है, जब विज्ञापन खर्च 65 प्रतिशत तक घटा है।

दूसरी तिमाही में ट्रेडिशनल मीडिया की ग्रोथ में भी 71 प्रतिशत तक कमी देखी गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जून और जुलाई में टीवी और डिजिटल वापसी करते हुए प्रतीत हो रहे हैं, लेकिन प्रिंट, सिनेमा और आउटडोर जैसे माध्यम इस मामले में भाग्यशाली नहीं रहे हैं। इस रिपोर्ट में पिछले साल के विज्ञापन खर्च और उसमें योगदान देने वाले इवेंट्स पर भी प्रकाश डाला गया है। जैसे-पिछले साल आईपीएल, आईसीसी वर्ल्ड कप और चुनाव भी थे, जिसके कारण पिछले साल की दूसरी तिमाही में इनका योगदान करीब 3000 करोड़ रुपये (पिछले साल की दूसरी तिमाही के विज्ञापन खर्च का 34 प्रतिशत) था। हालांकि, महामारी ने अप्रैल-मई-जून की इस तिमाही में इन दोनों पैसे जुटाने वाले इवेंट्स को दूर कर दिया, जिससे यह गिरावट दर्ज की गई।

इसे शब्दों में कहें तो विज्ञापन खर्च जो पिछले साल की पहली छमाही (H1’19) में 35110 करोड़ रुपये था, वह इस साल की पहली तिमाही (H1 2020) में करीब 14000 रुपये घटकर 21298 करोड़ रुपये रह गया है। ट्रेडिशनल मीडिया में पहली छमाही में 40 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट हुई है। हाल के वर्षों में डिजिटल मीडिया के विज्ञापन खर्च की ग्रोथ भी प्रभावित हुई है, लेकिन इसमें मुश्किल से सात प्रतिशत तक की कमी हुई है। इस साल अप्रैल,मई, जून (AMJ 2020) में टीवी और डिजिटल ने मिलकर करीब 80 प्रतिशत मार्केट शेयर पर कब्जा किया। इसमें प्रिंट का शेयर महज 18 प्रतिशत और रेडियो का एक प्रतिशत रहा, वहीं आउट ऑफ होम और सिनेमा का मार्केट शेयर शून्य रहा।

भारतीय विज्ञापन खर्च की बात करें तो अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा खराब स्थिति रही, जबकि इस दौरान ऑरिजिल कंटेंट में कमी के बावजूद टीवी की व्युअरशिप में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई और इस पर बिताए जाने वाले समय में भी बढ़ोतरी हुई। तमाम ब्रॉडकास्टर्स छूट के लुभावने ऑफर्स के बावजूद एडवर्टाइजर्स को अपनी ओर वापस लाने में नाकामयाब रहे और प्रिंट व रेडियो से करीब आधे एडवर्टाइजर्स ने अपने कदम खींच लिए, जबकि टीवी पर भी इन तीन महीनों में एडवर्टाइजर्स की संख्या में काफी कमी देखी गई।

यदि कैटेगरी की बात करें तो लगभग सभी में कमी देखी गई। टेलिकॉम, ट्रैवल क्लोथिंग, फैशन और ड्यूरेबल्स कैटेगरी सबसे ज्यादा प्रभावित रही। एफएमसीजी में ज्यादा उछाल देखा गया और इसका शेयर पिछले साल 33 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 38 प्रतिशत हो गया। इस साल की दूसरी छमाही (H2 2020) के लिए अनुमान लगाया गया है कि विज्ञापन खर्च में तेजी से बढ़ोतरी होगी। उम्मीद है कि टीवी और डिजिटल सामान्य स्थिति में वापस आ जाएंगे। आईपीएल, कौन बनेगा करोड़पपति और बिग बॉस की लॉन्चिंग के बाद एक बार फिर इनके बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।   

हालांकि, इस पूरे साल ग्रोथ में कमी दिखाई दे सकती है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि सितंबर में तमाम ऑफिस खुल जाते हैं तो इस साल की पहली छमाही (H1’20) के मुकाबले दूसरी छमाही (H2’20) में विज्ञापन खर्च 60 प्रतिशत से बढ़कर 72 प्रतिशत होना चाहिए। आखिर में रिपोर्ट में यह संकेत दिए गए हैं कि इस महामारी  इंडस्ट्री तीन साल पीछे जा सकती है। इसके साथ ही यह आशा भी जताई है कि यदि फेस्टिव सीजन और कंज्यूमर्स की भावनाएं इंडस्ट्री को वापसी करने में मदद करते हैं तो मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर दो साल पीछे जा सकता है।

पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें-

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बॉम्बे हाई कोर्ट से इमामी को झटका, इस शब्द के इस्तेमाल पर लगाई रोक

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इमामी को त्वचा की देखभाल के उसके प्रॉडक्ट के लिए ‘ग्लो एंड हैंडसम’ शब्द वाला ट्रेडमार्क इस्तेमाल करने से रोक लगा दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 August, 2020
Last Modified:
Wednesday, 19 August, 2020
emami

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इमामी को त्वचा की देखभाल के उसके प्रॉडक्ट के लिए ‘ग्लो एंड हैंडसम’ शब्द वाला ट्रेडमार्क इस्तेमाल करने से रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि हिन्दुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) ने अपने ब्रैंड में इस प्रकार के शब्द का उपयोग पहले किया है।

न्यायाधीश एससी गुप्ता ने एचयूएल की ट्रेड मार्क्स कानून के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को अंतरिम आदेश पारित किया। याचिका में इमामी को ट्रेडमार्क ‘ग्लो एंड हैंडसम’ के उपयोग पर रोक लगाने का आग्रह किया गया है। हिन्दुस्तान यूनिलीवर ने हाल ही में त्वचा देखभाल से जुड़े प्रॉडक्ट से ‘फेयर’ शब्द हटाकर ‘ग्लो एंड हैंडसम’ शब्द का उपयोग किया।

इमामी ने दावा किया कि यह ट्रेडमार्क उसके पास है और वह उसी नाम से पुरुषों के लिए ‘स्किनकेयर क्रीम’ पेश करने जा रही है।

हाई कोर्ट ने कहा, एचयूएल पहले ही अपने प्रॉडक्ट इस ट्रेडमार्क के साथ बाजार में पेश कर चुकी है जबकि इमामी पेश करने की प्रक्रिया में है। आदेश के अनुसार, ‘इमामी का ट्रेडमार्क के पंजीकरण के लिए आवेदन भी बाद की तारीख का है।’

अदालत ने कहा कि एक ही ट्रेडमार्क के तहत प्रॉडक्ट अगर बाजार में आते हैं तो इससे लोगों में भ्रम होगा। उच्च न्यायालय ने कहा कि जबतक मामले का अंतिम रूप से निपटारा नहीं हो जाता, इमामी पर ‘ग्लो एंड हैंडसम’ शब्द के उपयोग पर पाबंदी लगाई जाती है।

फिलहाल मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद निर्धारित की जाएगी।

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ASCI ने जताई उम्मीद, भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ काफी कारगर होगा सरकार का ये कदम

विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का स्वागत किया है।

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2020
ASCI

विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 (Consumer Protection Act 2019) का स्वागत किया है। यह अधिनियम 20 जुलाई से लागू होगा और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की जगह लेगा।

ASCI ने उम्मीद जताई है कि नए अधिनियम से भ्रामक विज्ञापनों पर महत्वपूर्ण असर पड़ेगा, जो दिनों काफी छाये हुए हैं। ASCI ने कहा कि इसकी भूमिका सरकार की पूरक होगी और जिम्मेदार विज्ञापनों को बढ़ावा देने में मदद करेगी।   

'ऐडवर्टाइजिंग स्‍टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' के चेयरमैन रोहित गुप्ता का कहना है, ’20 जुलाई 2020 से अस्तित्व में आने वाले कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट का ASCI स्वागत करती है। विज्ञापन के स्व-नियामक निकाय के रूप में हमारे प्रयास, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भी हैं। हमें उम्मीद है कि इस एक्ट से भ्रामक विज्ञापनों के नियंत्रण की दिशा में काफी प्रभाव पड़ेगा।’

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘प्रिंट और टीवी पर निगरानी के अलावा हम जल्द ही डिजिटल मीडिया पर दिखने वाले संभावित भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी शुरू करेंगे।’ बता दें कि इस अधिनियम के अधिकांश प्रावधान 20 जुलाई से प्रभावी होंगे। इस नए अधिनियम के तहत कंज्यूमर्स अपनी शिकायतों को उस जिला अथवा राज्य उपभोक्ता आयुक्त के यहां दर्ज करा सकते हैं, जहां वे रहते हैं, बजाय इसके कि जहां से उन्होंने उपरोक्त प्रॉडक्ट/सर्विस खरीदा था।  

इस अधिनियम के प्रावधानों से उपभोक्ताओं को घटिया उत्पाद बेचने के लिए निर्माताओं, विक्रेताओं या वितरकों को अदालत में ले जाने का अधिकार होगा। यह अधिनियम उपभोक्ताओं को नकली या मिलावटी उत्पाद के मुआवजे के लिए फाइल करने की भी अनुमति देता है।

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