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मीडिया में विज्ञापन खर्च को लेकर कैसी रही यह छमाही, पढ़ें ये रिपोर्ट
‘पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट’ (PMAR) 2020 का अर्द्धवार्षिक रिव्यू (Mid-Year Review) हाल ही में जारी हुआ।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
दूसरी तिमाही में ट्रेडिशनल मीडिया की ग्रोथ में भी 71 प्रतिशत तक कमी देखी गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जून और जुलाई में टीवी और डिजिटल वापसी करते हुए प्रतीत हो रहे हैं, लेकिन प्रिंट, सिनेमा और आउटडोर जैसे माध्यम इस मामले में भाग्यशाली नहीं रहे हैं। इस रिपोर्ट में पिछले साल के विज्ञापन खर्च और उसमें योगदान देने वाले इवेंट्स पर भी प्रकाश डाला गया है। जैसे-पिछले साल आईपीएल, आईसीसी वर्ल्ड कप और चुनाव भी थे, जिसके कारण पिछले साल की दूसरी तिमाही में इनका योगदान करीब 3000 करोड़ रुपये (पिछले साल की दूसरी तिमाही के विज्ञापन खर्च का 34 प्रतिशत) था। हालांकि, महामारी ने अप्रैल-मई-जून की इस तिमाही में इन दोनों पैसे जुटाने वाले इवेंट्स को दूर कर दिया, जिससे यह गिरावट दर्ज की गई।
इसे शब्दों में कहें तो विज्ञापन खर्च जो पिछले साल की पहली छमाही (H1’19) में 35110 करोड़ रुपये था, वह इस साल की पहली तिमाही (H1 2020) में करीब 14000 रुपये घटकर 21298 करोड़ रुपये रह गया है। ट्रेडिशनल मीडिया में पहली छमाही में 40 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट हुई है। हाल के वर्षों में डिजिटल मीडिया के विज्ञापन खर्च की ग्रोथ भी प्रभावित हुई है, लेकिन इसमें मुश्किल से सात प्रतिशत तक की कमी हुई है। इस साल अप्रैल,मई, जून (AMJ 2020) में टीवी और डिजिटल ने मिलकर करीब 80 प्रतिशत मार्केट शेयर पर कब्जा किया। इसमें प्रिंट का शेयर महज 18 प्रतिशत और रेडियो का एक प्रतिशत रहा, वहीं आउट ऑफ होम और सिनेमा का मार्केट शेयर शून्य रहा।
भारतीय विज्ञापन खर्च की बात करें तो अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा खराब स्थिति रही, जबकि इस दौरान ऑरिजिल कंटेंट में कमी के बावजूद टीवी की व्युअरशिप में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई और इस पर बिताए जाने वाले समय में भी बढ़ोतरी हुई। तमाम ब्रॉडकास्टर्स छूट के लुभावने ऑफर्स के बावजूद एडवर्टाइजर्स को अपनी ओर वापस लाने में नाकामयाब रहे और प्रिंट व रेडियो से करीब आधे एडवर्टाइजर्स ने अपने कदम खींच लिए, जबकि टीवी पर भी इन तीन महीनों में एडवर्टाइजर्स की संख्या में काफी कमी देखी गई।
यदि कैटेगरी की बात करें तो लगभग सभी में कमी देखी गई। टेलिकॉम, ट्रैवल क्लोथिंग, फैशन और ड्यूरेबल्स कैटेगरी सबसे ज्यादा प्रभावित रही। एफएमसीजी में ज्यादा उछाल देखा गया और इसका शेयर पिछले साल 33 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 38 प्रतिशत हो गया। इस साल की दूसरी छमाही (H2 2020) के लिए अनुमान लगाया गया है कि विज्ञापन खर्च में तेजी से बढ़ोतरी होगी। उम्मीद है कि टीवी और डिजिटल सामान्य स्थिति में वापस आ जाएंगे। आईपीएल, कौन बनेगा करोड़पपति और बिग बॉस की लॉन्चिंग के बाद एक बार फिर इनके बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।
हालांकि, इस पूरे साल ग्रोथ में कमी दिखाई दे सकती है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि सितंबर में तमाम ऑफिस खुल जाते हैं तो इस साल की पहली छमाही (H1’20) के मुकाबले दूसरी छमाही (H2’20) में विज्ञापन खर्च 60 प्रतिशत से बढ़कर 72 प्रतिशत होना चाहिए। आखिर में रिपोर्ट में यह संकेत दिए गए हैं कि इस महामारी इंडस्ट्री तीन साल पीछे जा सकती है। इसके साथ ही यह आशा भी जताई है कि यदि फेस्टिव सीजन और कंज्यूमर्स की भावनाएं इंडस्ट्री को वापसी करने में मदद करते हैं तो मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर दो साल पीछे जा सकता है।
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