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मीडिया इंडस्ट्री ने सरकार के सामने उठाया विज्ञापन में कमी का मुद्दा, रखी ये मांग
कोरोनावायरस (कोविड-19) का विपरीत असर मीडिया कंपनियों पर भी पड़ रहा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
कोरोनावायरस (कोविड-19) का विपरीत असर मीडिया कंपनियों पर भी पड़ रहा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है। ऐसे में मीडिया कंपनियों की ओर से मांग उठने लगी है कि ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय’ (डीएवीपी) व राज्यों के स्वामित्व वाली अन्य इकाइयां उनके विज्ञापन बिलों का तुरंत भुगतान करें, जिससे कंपनियों को नकदी की समस्या न हो और नौकरियों में संभावित कटौतियों को टाला जा सके।
मीडिया से जुड़े शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से ऐसे दौर में मीडिया इंडस्ट्री को संभलने में मदद मिलेगी, जब विज्ञापनदाता खर्च नहीं कर रहे हैं, कई जगह भुगतान अटका हुआ है, अखबारों के मामले में सप्लाई चेन बाधित हो रही है और स्पोर्ट्स व लाइव इंटरटेनमेंट जैसे मीडिया के कई रूप ठहर से गए हैं। बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय की नोडल एजेंसी ‘डीएवीपी’ सरकारी विज्ञापनों को जारी करती है।
‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (ET) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI) के प्रेजिडेंट आशीष भसीन का कहना है, ‘इस नाजुक समय में मैं सरकार से गुजारिश करूंगा कि वह विभिन्न विभागों, मंत्रालयों आदि पर विज्ञापन की बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने पर विचार करे, इनमें प्रिंट, टीवी, रेडियो, आउट ऑफ होम (OOH) और इवेंट्स आदि का बकाया शामिल है।’
प्रिंट मीडिया से जुड़े एक वरिष्ठ एग्जिक्यूटिव का कहना है, ‘सरकार की ओर से मिलने वाले भुगतान में काफी अनियमितता होती है, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में कई बिजनेस टाइम पर भुगतान करने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में सरकार को आगे आना चाहिए और अपने ऊपर बकाया सभी भुगतान करने चाहिए। इससे इंडस्ट्री को फिर से अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होने में मदद मिलेगी।’
वहीं, ‘जागरण ग्रुप’ (Jagran Group) की प्रेजिडेंट अपूर्वा पुरोहित का कहना है, ‘मीडिया इंडस्ट्री में अगले कुछ महीनों में कैश फ्लो का सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा। लॉकडाउन के कारण एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू काफी प्रभावित होने वाला है। ऐसे मौके पर हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि वह जितनी जल्दी हो सके, बकाया का भुगतान कर दे, ताकि इस सेक्टर को मुश्किल घड़ी में मदद मिल सके। समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए रेडियो इंडस्ट्री और इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी सरकार से बातचीत की प्रक्रिया में जुटे हैं।’
वहीं, ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह के चीफ कॉरपोरेट सेल्स एंड मार्केटिंग ऑफिसर सत्यजीत सेन गुप्ता का कहना है, ‘अनिश्चितता भरे और इस मुश्किल समय में अखबारों का रेवेन्यू काफी दबाव में है। सरकार द्वारा बकाया राशि का भुगतान किए जाने से निश्चित रूप से मदद मिलेगी।’
‘बीसीसीएल’ (BCCL) की कंपनी ‘एंटरटेनमेंट नेटवर्क इंडिया लिमिटेड’ (Entertainment Network India Limited) के एमडी और सीईओ प्रशांत पांडे का कहना है, ‘रेडियो ब्रॉडकास्टर्स सोशल मैसेज अथवा अन्य कैंपेन के माध्यम से सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक पिछले बकाया का भुगतान भी नहीं किया है। कई मामलों में तो 12 महीनों का भुगतान अटका हुआ है, जबकि कई मामलों में दो साल से भुगतान नहीं हुआ है। वहीं, ‘डीएवीपी’ ने पिछले वित्तीय वर्ष में रेडियों पर विज्ञापनों में कंमी भी कर दी है। मुझे उम्मीद है कि इस सेक्टर की बेहतरी के लिए वह पहले के मुकाबले इसे बढ़ा देंगे।’
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