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भ्रामक प्रचार पर दिल्ली HC सख्त, पतंजलि को डाबर के खिलाफ ऐड हटाने का निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को अपने उन विज्ञापनों को हटाने का निर्देश दिया है जो डाबर के च्यवनप्राश उत्पाद को कथित तौर पर बदनाम करते हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को अपने उन विज्ञापनों को हटाने का निर्देश दिया है जो डाबर के च्यवनप्राश उत्पाद को कथित तौर पर बदनाम करते हैं। यह अंतरिम आदेश जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने डाबर इंडिया लिमिटेड द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
डाबर ने अदालत में आरोप लगाया कि पतंजलि द्वारा प्रसारित एक विज्ञापन भ्रामक और मानहानि करने वाला है, जो उसके प्रमुख उत्पाद ‘डाबर च्यवनप्राश’ को लक्षित करता है। इस विज्ञापन में पतंजलि के संस्थापक बाबा रामदेव दिखाई देते हैं और अन्य च्यवनप्राश ब्रैंड्स की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हैं। विज्ञापन में एक लाइन है: “जिनको आयुर्वेद और वेदों का ज्ञान नहीं, चरक, सुश्रुत, धन्वंतरि और च्यवनऋषि की परंपरा में 'ओरिजिनल' च्यवनप्राश कैसे बना पाएंगे?”
डाबर का कहना है कि यह सीधा हमला उनके ब्रैंड पर है।
डाबर ने इस विज्ञापन में 40 औषधियों से बने च्यवनप्राश को 'साधारण' कहे जाने पर आपत्ति जताई है। डाबर का दावा है कि उनका च्यवनप्राश भी 40 से अधिक जड़ी-बूटियों से निर्मित है और इस प्रकार की भाषा से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा होता है। डाबर फिलहाल च्यवनप्राश के बाजार में 60% से अधिक हिस्सेदारी के साथ अग्रणी ब्रैंड है।
कंपनी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि यह विज्ञापन तीन स्तरों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है—
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पतंजलि के अपने फॉर्मूलेशन को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है,
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डाबर की आयुर्वेदिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है और
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डाबर के उत्पाद को हीन बताने की कोशिश करता है।
डाबर ने यह भी तर्क दिया कि ऐसे भ्रामक संदेश उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं और आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उत्पादों के प्रति विश्वास को कमजोर कर सकते हैं, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कड़े मानकों के अधीन हैं। उन्होंने च्यवनप्राश को एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि बताया जो प्राचीन ग्रंथों के अनुसार विशेष नियमों के तहत तैयार की जाती है।
कंपनी ने यह भी चिंता जताई कि पतंजलि का यह विज्ञापन यह संकेत देता है कि गैर-पतंजलि उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, जो जनहित के लिए खतरनाक संदेश है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डाबर ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट में पतंजलि के खिलाफ पहले से लंबित अवमानना मामलों का भी हवाला दिया, जिसमें इस तरह के विज्ञापन अभियानों को लेकर पहले भी आपत्ति जताई जा चुकी है। उन्होंने पतंजलि पर ऐसे प्रचारों की "दोहराई जा रही रणनीति" अपनाने का आरोप लगाया।
फिलहाल, कोर्ट के आदेश के बाद पतंजलि को ऐसे सभी विज्ञापन हटाने होंगे जो डाबर के उत्पाद को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।
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