मुंबई की सड़कों पर कॉमेडियन और कलाकार समय रैना की पहचान बन चुकी लाल और काले चेक वाली शर्ट अब एक बड़े विज्ञापन का हिस्सा बन गई है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मुंबई की सड़कों पर कॉमेडियन और कलाकार समय रैना की पहचान बन चुकी लाल और काले चेक वाली शर्ट अब एक बड़े विज्ञापन का हिस्सा बन गई है। आउट ऑफ होम यानी OOH विज्ञापन कंपनी Bright Outdoor Media Limited ने District के साथ मिलकर इस शर्ट को 30 फीट के एक बड़े इंस्टॉलेशन में बदल दिया है। इसका मकसद समय रैना के आगामी लाइव शो और 2027 India Tour का प्रचार करना है।
कंपनी ने 8 अक्टूबर 2026 को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर जारी बिजनेस अपडेट में इस कैंपेन की जानकारी दी। Bright Outdoor Media को भारत की पहली सूचीबद्ध OOH कंपनी बताया गया है।
न फोटो, न ज्यादा शब्द, सिर्फ शर्ट
Bright Outdoor Media और District ने इस कैंपेन को एक बेहद सरल विचार के आधार पर तैयार किया है। इसमें न समय रैना की तस्वीर है और न ही बहुत ज्यादा लिखा हुआ कंटेंट। सिर्फ एक ऐसा विजुअल इस्तेमाल किया गया है, जिसे उनके प्रशंसक तुरंत पहचान सकें। इसके लिए समय रैना की लाल और काले रंग की चेक वाली शर्ट को चुना गया। कंपनी के मुताबिक, यह शर्ट उनके व्यक्तित्व की पहचान बन चुकी है और उनके लाखों प्रशंसक इसे तुरंत पहचान लेते हैं।
कंपनी ने बताया कि यह इंस्टॉलेशन जल्द ही मुंबई में आने-जाने वाले लोगों और प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर लगा 30 फीट का इंस्टॉलेशन
यह कैंपेन मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर लगाया गया है। यह शहर की प्रमुख और ज्यादा आवाजाही वाली सड़कों में से एक है। इसमें शर्ट को 30 फीट × 30 फीट के आकार में तैयार किया गया है, जिसे 40 फीट × 40 फीट के एक बड़े होर्डिंग पर लगाया गया है। यह कैंपेन District के साथ मिलकर तैयार और लागू किया गया है।
शर्ट ही बनी पूरे कैंपेन का आइडिया
कंपनी के मुताबिक, इस कैंपेन का विचार एक साधारण सवाल से शुरू हुआ कि कम से कम जानकारी के साथ आउटडोर विज्ञापन में लोगों का ज्यादा से ज्यादा ध्यान कैसे खींचा जा सकता है। कई दौर की चर्चा के बाद टीम ने समय रैना की लाल और काले चेक वाली शर्ट को चुना। यह शर्ट उनके प्रशंसकों के बीच उनके व्यक्तित्व से जुड़ी हुई है।
आमतौर पर किसी कलाकार के विज्ञापन में उसकी तस्वीर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस कैंपेन में समय रैना को पारंपरिक तरीके से बिलबोर्ड पर दिखाने के बजाय उनकी शर्ट को ही उनके लिए बोलने दिया गया है।
30 फीट की शर्ट, एक सरल विचार और ज्यादा ध्यान
इस कैंपेन में बड़े आकार और सरलता का इस्तेमाल किया गया है। शर्ट पर बनाए गए चेक, उसकी सिलवटों और कपड़े की बनावट को इस तरह तैयार किया गया है कि यह असली कपड़े जैसी दिखाई देती है। यह विज्ञापन कम और शहर के ऊपर लटके एक बहुत बड़े कपड़े जैसा ज्यादा नजर आता है। इसे सड़क से गुजरने वाले लोग, पैदल चलने वाले और समय रैना के प्रशंसक देख सकते हैं।
Bright Outdoor Media के मुताबिक, यह कैंपेन इस बात को दिखाता है कि अगर विचार मजबूत हो तो उसे बताने के लिए बहुत ज्यादा शब्दों की जरूरत नहीं होती। कई बार सिर्फ एक विजुअल काफी होता है और इस मामले में सिर्फ एक शर्ट ही काफी है।
OOH विज्ञापन में कम शब्द, ज्यादा असर
कंपनी ने बताया कि इस क्रिएटिव में बड़े आकार के साथ शर्ट के चेक, सिलवटों और कपड़े की दूसरी बारीकियों को दोबारा तैयार किया गया है। शर्ट को इस तरह दिखाया गया है जैसे वह वास्तव में बिलबोर्ड पर रखी हुई हो। इसकी वजह से यह सामान्य विज्ञापन के बजाय शहर के ऊपर लटका हुआ एक विशाल कपड़ा नजर आता है।
कंपनी के अनुसार, इस कैंपेन में एक साफ-सुथरे और बिना भीड़ वाले विजुअल के जरिए बड़े आकार, सरलता और रचनात्मकता से ज्यादा प्रभाव पैदा करने की कोशिश की गई है।
Bright Outdoor Media के चेयरमैन ने क्या कहा?
Bright Outdoor Media Limited के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. योगेश लखानी ने कहा कि कंपनी समय रैना के लाइव शो और 2027 India Tour के लिए District के साथ इस कैंपेन पर काम करके खुश है।
उन्होंने कहा कि कैंपेन का उद्देश्य कुछ अलग करना था, जहां विजुअल खुद अपनी बात कहे। टीम ने महसूस किया कि समय रैना की सिग्नेचर शर्ट उनके प्रशंसकों के बीच तुरंत पहचानी जाती है। इसलिए कंपनी ने तय किया कि क्यों न शर्ट को ही अपनी बात कहने दी जाए।
लखानी के मुताबिक, इस कैंपेन ने दिखाया है कि एक सरल विचार को बड़े स्तर पर लागू करके वास्तविक प्रभाव पैदा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रोजेक्ट Bright की एक इनोवेटिव OOH कंपनी के तौर पर पहचान को मजबूत करते हैं। साथ ही ये कंपनी की रचनात्मक सोच और उसे जमीन पर उतारने की क्षमता को भी दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे कैंपेन उन ब्रांड्स और एजेंसियों के साथ मजबूत रिश्ते बनाने में भी मदद करते हैं, जो अलग और नए तरह के आउटडोर विज्ञापन समाधान तलाश रहे हैं। लखानी ने कहा कि आगे भी कंपनी ऐसे नए फॉर्मेट और आइडिया तलाशती रहेगी, जो आउटडोर मीडिया को ज्यादा आकर्षक और उसके असर को ज्यादा मापने योग्य बनाएं।
45 साल से OOH विज्ञापन के कारोबार में Bright Outdoor Media
Bright Outdoor Media Limited की स्थापना 1980 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई के अंधेरी में है। कंपनी के पास भारत के OOH विज्ञापन क्षेत्र में 45 साल का अनुभव है।
कंपनी के पास रणनीतिक जगहों पर 490 से ज्यादा होर्डिंग्स का नेटवर्क है। इसके अलावा, मुंबई में मौजूद 120 से ज्यादा बड़े आकार के डिजिटल LED बिलबोर्ड्स में से 50 से ज्यादा पर कंपनी का स्वामित्व है। Bright Outdoor Media सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी संस्थाओं से हासिल किए गए होर्डिंग्स का कारोबार भी करती है। इससे कंपनी की बाजार में मौजूदगी और मजबूत होती है।
कंपनी के मुताबिक, प्रमुख विज्ञापन कंपनियों के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारियां और सभी प्रमुख ट्रांजिट क्षेत्रों में मौजूद कॉन्ट्रैक्ट्स उसे बाजार में अलग पहचान देते हैं।
कंपनी का दावा है कि वह दुनिया की पहली ऐसी कंपनी भी है, जिसने होर्डिंग्स पर सोलर पैनल लगाए हैं। इन सोलर पैनल्स के जरिए जॉइंट वेंचर पार्टनर के साथ मिलकर भारतीय रेलवे को बिजली उपलब्ध कराई जाती है। कंपनी इसे स्थिरता यानी सस्टेनेबिलिटी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का हिस्सा बताती है। इसके अलावा, कंपनी का रियल एस्टेट कारोबार भी है, जो उसकी आय के अलग-अलग स्रोतों में योगदान देता है।
कंपनी के अनुसार, नए समाधान, व्यापक ग्राहक आधार और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस के साथ Bright Outdoor Media OOH विज्ञापन क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है।
BSE SME पर सूचीबद्ध होने वाली पहली आउटडोर मीडिया कंपनी
Bright Outdoor Media के मुताबिक, यह भारत की पहली आउटडोर मीडिया कंपनी है, जो स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हुई। कंपनी ने 24 मार्च 2023 को BSE SME प्लेटफॉर्म पर शेयर बाजार में डेब्यू किया था।
कंपनी ने बताया कि H2 FY26 में उसका कुल राजस्व 92.12 करोड़ रुपये, EBITDA 20.25 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 13.97 करोड़ रुपये और EPS 12.98 रुपये रहा। वहीं, FY26 में कंपनी का कुल राजस्व 155.43 करोड़ रुपये, EBITDA 35.23 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 24.05 करोड़ रुपये और EPS 12.26 रुपये रहा।
कंपनी ने फॉरवर्ड-लुकिंग स्टेटमेंट पर दी चेतावनी
कंपनी ने अपने डिस्क्लेमर में कहा है कि दस्तावेज में दिए गए कुछ बयान ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें भविष्य को लेकर किए गए अनुमान या बयान माना जा सकता है।
कंपनी के मुताबिक, ऐसे बयानों में सरकारी फैसलों, स्थानीय, राजनीतिक या आर्थिक घटनाक्रम, तकनीकी जोखिम और कई अन्य कारणों से जोखिम और अनिश्चितताएं जुड़ी हैं। इन वजहों से वास्तविक परिणाम उन परिणामों से अलग हो सकते हैं जिनका इन बयानों में अनुमान लगाया गया है।
कंपनी ने कहा है कि ऐसे बयानों के आधार पर की गई किसी कार्रवाई के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगी। साथ ही, कंपनी ने बाद में होने वाली घटनाओं या परिस्थितियों के आधार पर इन फॉरवर्ड-लुकिंग स्टेटमेंट्स को सार्वजनिक रूप से अपडेट करने की कोई जिम्मेदारी नहीं ली है।
न्यूज चैनलों पर टेलीविजन विज्ञापन का दबाव 2026 के शुरुआती सात महीनों में भी बना रहा, लेकिन गिरावट की रफ्तार में काफी कमी आई है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
न्यूज चैनलों पर टेलीविजन विज्ञापन का दबाव 2026 के शुरुआती सात महीनों में भी बना रहा, लेकिन गिरावट की रफ्तार में काफी कमी आई है। TAM AdEx के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान न्यूज जॉनर में विज्ञापन वॉल्यूम साल-दर-साल 7% घटा।
इसकी तुलना जनवरी-जुलाई 2025 से करें तो उस दौरान न्यूज जॉनर के विज्ञापन वॉल्यूम में सालाना आधार पर 15% की गिरावट दर्ज की गई थी। यानी इस साल गिरावट की रफ्तार लगभग आधी रह गई है। इससे संकेत मिलता है कि टेलीविजन विज्ञापन मार्केट में कुछ हद तक स्थिरता के संकेत दिखाई दे रहे हैं, हालांकि ब्रॉडकास्टर्स पर टीवी विज्ञापन खर्च को लेकर दबाव अभी भी बना हुआ है।
TAM AdEx का यह विश्लेषण टेलीविजन पर प्रसारित कमर्शियल विज्ञापनों से जुड़ा है। इसमें प्रोग्राम प्रोमो और सोशल विज्ञापनों को शामिल नहीं किया गया है। एजेंसी 600 से ज्यादा टीवी चैनलों की निगरानी करती है।
न्यूज टीवी पर विज्ञापनदाताओं की पसंद बदली
न्यूज टीवी पर विज्ञापन देने वाले क्षेत्रों के मिश्रण में भी बदलाव देखने को मिला है। जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान फूड एंड बेवरेजेज सबसे बड़ा विज्ञापन क्षेत्र बनकर उभरा। इसका न्यूज जॉनर के कुल विज्ञापन वॉल्यूम में 14% हिस्सा रहा।
पिछले साल सबसे आगे रहने वाला सर्विसेज सेक्टर इस बार दूसरे स्थान पर रहा और उसका हिस्सा 13% रहा। इसके बाद एजुकेशन 10%, बिल्डिंग, इंडस्ट्रियल एंड लैंड मैटेरियल्स एंड इक्विपमेंट 8% और बैंकिंग, फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट तथा ऑटोमोबाइल्स 7-7% रहे। वहीं पर्सनल केयर एंड पर्सनल हाइजीन, पर्सनल हेल्थकेयर और हाउसहोल्ड प्रोडक्ट्स का हिस्सा 6-6% रहा। पर्सनल एक्सेसरीज का हिस्सा 5% रहा।
टॉप 10 सेक्टर्स ने मिलकर जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान न्यूज टीवी के कुल विज्ञापन वॉल्यूम का 81% हिस्सा बनाया।
एजुकेशन, BFSI और कंज्यूमर कैटेगरी की स्थिति मजबूत
सेक्टर की रैंकिंग में बदलाव से पता चलता है कि अलग-अलग कैटेगरी में विज्ञापन की मांग का दायरा बढ़ रहा है। एजुकेशन पिछले साल के पांचवें स्थान से बढ़कर इस साल तीसरे स्थान पर पहुंच गया। बैंकिंग, फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट भी नौवें स्थान से बढ़कर सातवें स्थान पर आ गया। पर्सनल केयर एंड पर्सनल हाइजीन आठवें स्थान से सातवें स्थान पर पहुंचा।
इसके उलट पर्सनल हेल्थकेयर चौथे स्थान से गिरकर आठवें स्थान पर आ गया। बिल्डिंग, इंडस्ट्रियल एंड लैंड मैटेरियल्स एंड इक्विपमेंट भी तीसरे स्थान से खिसककर चौथे स्थान पर पहुंच गया।
आंकड़ों से पता चलता है कि न्यूज टीवी पर बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले क्षेत्रों के साथ-साथ ऐसे सेक्टर भी विज्ञापन दे रहे हैं, जिन्हें व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंच चाहिए। इनमें FMCG, एजुकेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑटोमोबाइल प्रमुख हैं।
रिटेल आउटलेट्स और ज्वेलर्स सबसे बड़ी कैटेगरी
कैटेगरी के स्तर पर रिटेल आउटलेट्स और ज्वेलर्स सबसे बड़ी कैटेगरी रही। इसका न्यूज जॉनर के विज्ञापन वॉल्यूम में 5% हिस्सा रहा। इसके बाद मल्टीपल कोर्सेज 4% के साथ दूसरे स्थान पर रहे। स्पाइसेज, वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स, ई-कॉमर्स/मीडिया/एंटरटेनमेंट/सोशल मीडिया और कारों में से प्रत्येक का हिस्सा करीब 3% रहा।
टॉयलेट और फ्लोर क्लीनर्स और टॉयलेट सोप्स भी प्रमुख कैटेगरी में बने रहे। सीमेंट और टू-व्हीलर्स का हिस्सा 2-2% रहा।
पिछले साल की तुलना में कई कैटेगरी की रैंकिंग में बड़ा बदलाव हुआ। मल्टीपल कोर्सेज छठे से दूसरे स्थान पर पहुंच गए। स्पाइसेज 11वें से तीसरे, वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स नौवें से चौथे और ई-कॉमर्स/मीडिया/एंटरटेनमेंट/सोशल मीडिया 10वें से पांचवें स्थान पर पहुंच गया। टू-व्हीलर्स की रैंकिंग में भी बड़ा सुधार हुआ और यह 15वें स्थान से बढ़कर 10वें स्थान पर आ गया।
इसके उलट कार, टॉयलेट और फ्लोर क्लीनर्स, टॉयलेट सोप्स और सीमेंट की रैंकिंग जनवरी-जुलाई 2025 के मुकाबले नीचे आई।
न्यूज टीवी पर 3,400 से ज्यादा विज्ञापनदाता
जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान न्यूज टीवी पर विज्ञापनदाताओं का आधार काफी व्यापक रहा। TAM AdEx के मुताबिक, उसके टॉप विज्ञापनदाता समूह में 3,400 से ज्यादा विज्ञापनदाता मौजूद थे।
Reckitt Benckiser (India) लगातार पहले स्थान पर रहा। इसके बाद Patanjali Ayurved और SBS Biotech रहे। GCMMF (Amul) पांचवें स्थान से बढ़कर तीसरे स्थान पर आ गया। वहीं LIC of India आठवें स्थान से बढ़कर पांचवें स्थान पर पहुंचा। Godrej Consumer Products छठे और Policybazaar Insurance Brokers सातवें स्थान पर रहा।
टॉप 10 में दो नए नाम भी शामिल हुए। TVS Motor Company पिछले साल के 29वें स्थान से बढ़कर आठवें स्थान पर पहुंच गई। वहीं Mahashiya Di Hatti 24वें स्थान से बढ़कर नौवें स्थान पर आ गई। जनवरी-जुलाई 2025 में छठे स्थान पर रहने वाली Lalithaa Jewellery Mart इस बार 10वें स्थान पर रही।
टॉप 10 विज्ञापनदाताओं ने मिलकर न्यूज जॉनर के कुल विज्ञापन वॉल्यूम का करीब एक-पांचवां हिस्सा यानी लगभग 20% बनाया। इनमें से छह विज्ञापनदाताओं की रैंकिंग में इस अवधि के दौरान सुधार हुआ।
Policybazaar सबसे आगे, ChatGPT भी टॉप 10 ब्रैंड्स में
ब्रैंड के स्तर पर Policybazaar.Com जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान न्यूज टीवी पर सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाला प्रमुख ब्रैंड रहा। इसके बाद Lalithaa Jewellery, Harpic Power Plus 10x Total Clean, Ultratech Cement और Dettol Toilet Soaps रहे।
टॉप ब्रैंड्स की सूची में Aaina Jibonor, Pet Saffa, Dettol Antiseptic Liquid और Muthoot Fin Loan Against Gold भी शामिल रहे। वहीं ChatGPT ने टॉप 10 में 10वें स्थान पर जगह बनाई।
TAM AdEx के मुताबिक, इस अवधि में टीवी पर 5,100 से ज्यादा ब्रैंड्स मौजूद रहे। टॉप 10 ब्रैंड्स में से तीन Reckitt Benckiser (India) के थे। यह न्यूज चैनलों पर कंज्यूमर और घरेलू उत्पादों के विज्ञापनों की लगातार बनी अहमियत को दिखाता है।
टॉप 10 ब्रैंड्स ने मिलकर टेलीविजन के कुल विज्ञापन वॉल्यूम का 8% हिस्सा बनाया।
स्पाइसेज, टू-व्हीलर्स और लाइफ इंश्योरेंस में तेज बढ़त
भले ही न्यूज जॉनर के कुल विज्ञापन वॉल्यूम में गिरावट आई हो, लेकिन कई अलग-अलग कैटेगरी में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्पाइसेज के विज्ञापन वॉल्यूम में 30% की बढ़ोतरी हुई और टॉप ग्रोथ वाली कैटेगरी में इसके विज्ञापन सेकंडेज में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज हुई।
मल्टीपल कोर्सेज में 19% और टू-व्हीलर्स में 33% की बढ़ोतरी हुई। लाइफ इंश्योरेंस के विज्ञापन में 30% और वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स में 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सैनिटरी नैपकिन्स में हुई। जनवरी-जुलाई 2026 में इसके विज्ञापन वॉल्यूम में 5.5 गुना बढ़ोतरी हुई।
इसी तरह ई-कॉमर्स और अन्य सर्विसेज में 2.6 गुना और सोलर प्रोडक्ट्स में 3.6 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। एडिबल ऑयल के विज्ञापन में 35% और ई-कॉमर्स/मीडिया/एंटरटेनमेंट/सोशल मीडिया में 12% की बढ़ोतरी हुई। कुल मिलाकर 145 या उससे ज्यादा कैटेगरी ऐसी रहीं, जिनमें विज्ञापन वॉल्यूम बढ़ा। हालांकि न्यूज जॉनर का कुल विज्ञापन वॉल्यूम पिछले साल की तुलना में कम ही रहा।
हिंदी न्यूज अब भी विज्ञापन की सबसे बड़ी पसंद
भाषा के आधार पर हिंदी न्यूज जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान न्यूज टीवी विज्ञापन मार्केट में सबसे आगे रही। इसका कुल विज्ञापन वॉल्यूम में 18% हिस्सा रहा। इसके बाद बंगाली न्यूज 14% और हिंदी रीजनल न्यूज 12% के साथ रहे। तमिल न्यूज और तेलुगु न्यूज का हिस्सा 10-10% रहा। कन्नड़ न्यूज का हिस्सा 9% था। वहीं मराठी और मलयालम न्यूज का हिस्सा 6-6% और असम न्यूज तथा गुजराती न्यूज का हिस्सा 5-5% रहा।
टॉप पांच न्यूज सब-जॉनर ने मिलकर कुल विज्ञापन वॉल्यूम का 59% हिस्सा बनाया। इससे पता चलता है कि देश के बड़े भाषा मार्केटों में विज्ञापन का दबाव और मांग अभी भी काफी केंद्रित है।
गिरावट धीमी हुई, लेकिन मार्केट पर दबाव बरकरार
TAM AdEx के आंकड़े बताते हैं कि न्यूज जॉनर के विज्ञापन मार्केट में गिरावट सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं रही। कुल विज्ञापन वॉल्यूम में कमी के बावजूद अलग-अलग सेक्टर और कैटेगरी के बीच विज्ञापन खर्च का रुख बदल रहा है।
कंज्यूमर से सीधे जुड़े कारोबार, एजुकेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज, मोबिलिटी, ई-कॉमर्स और सोलर प्रोडक्ट्स जैसी उभरती कैटेगरी न्यूज टीवी पर ज्यादा जगह बना रही हैं। जनवरी-जुलाई 2026 में दर्ज 7% की गिरावट, जनवरी-जुलाई 2025 में आई 15% की गिरावट के मुकाबले काफी कम है। इससे संकेत मिलता है कि न्यूज टीवी का विज्ञापन मार्केट तेज गिरावट के दौर से निकलकर अब अपेक्षाकृत धीमी गिरावट की स्थिति में पहुंचा है।
हालांकि, टॉप 10 सेक्टर्स का कुल विज्ञापन वॉल्यूम में 81% हिस्सा और टॉप 10 विज्ञापनदाताओं का करीब 20% हिस्सा यह भी दिखाता है कि मार्केट का एक बड़ा हिस्सा अभी भी सीमित संख्या में बड़े उद्योगों और बड़े विज्ञापनदाताओं पर निर्भर है।
AdCounty Media India Limited ने वैश्विक मीडिया कंपनी Dailymotion के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
AdCounty Media India Limited ने वैश्विक मीडिया कंपनी Dailymotion के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस साझेदारी के तहत Dailymotion की नई पीढ़ी की विज्ञापन तकनीक, जिसमें Ray और Audience Path शामिल हैं, को AdCounty Media के जरिए भारतीय विज्ञापनदाताओं तक पहुंचाया जाएगा।
कंपनी ने 8 अक्टूबर 2026 को बीएसई में दाखिल जानकारी में बताया कि इस साझेदारी का मकसद भारतीय ब्रैंड्स और एजेंसियों को Dailymotion की वीडियो विज्ञापन तकनीक और AI आधारित समाधान उपलब्ध कराना है। इससे विज्ञापनदाताओं को दर्शकों को बेहतर तरीके से समझने, अभियान चलाने और उसके नतीजों को मापने में मदद मिलेगी।
वीडियो मार्केटिंग में AI की भूमिका बढ़ाएगा Ray
इस साझेदारी में Ray को अहम भूमिका दी गई है। Ray, Dailymotion की एजेंटिक AI तकनीक है, जिसे वीडियो मार्केटिंग की योजना बनाने, उसे लागू करने और उसके नतीजों को मापने के तरीके को बदलने के लिए तैयार किया गया है।
यह AI प्लेटफॉर्म दर्शकों से जुड़ी जानकारी, क्रिएटिव को बेहतर बनाने, विज्ञापन अभियान चलाने और उसके प्रदर्शन को मापने जैसी सुविधाओं को एक ही तकनीकी व्यवस्था में जोड़ता है। इसके लिए Dailymotion के अपने वीडियो डेटा का इस्तेमाल किया जाता है।
कंपनी के मुताबिक, इससे ब्रैंड्स और एजेंसियों को ज्यादा जानकारी के आधार पर फैसले लेने और अपने विज्ञापन अभियानों के नतीजों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।
Audience Path के साथ आगे बढ़ रहा है Dailymotion
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब Dailymotion अपनी नई पहल Audience Path को भी आगे बढ़ा रहा है। इसका मकसद तेजी से बंटते जा रहे मीडिया माहौल में विज्ञापनदाताओं को दर्शकों को समझने और उन तक पहुंच बनाने में मदद करना है।
Audience Path वीडियो, कंटेंट, दर्शकों के व्यवहार और उनकी रुचि से जुड़े संकेतों को उपयोगी दर्शक जानकारी में बदलने पर काम करता है। वहीं, Ray इस पूरी व्यवस्था में AI आधारित दर्शक समझ और विज्ञापन अभियान को सक्रिय करने वाली तकनीक के रूप में काम करता है।
भारतीय विज्ञापनदाताओं को मिलेगा ग्लोबल वीडियो इकोसिस्टम
AdCounty Media के मुताबिक, इस साझेदारी से भारतीय विज्ञापनदाताओं को Dailymotion के वैश्विक वीडियो इकोसिस्टम तक पहुंच मिलेगी, जबकि स्थानीय विज्ञापन बाजार की समझ AdCounty Media के जरिए उपलब्ध होगी। फिलहाल Dailymotion 191 देशों में उपलब्ध है। कंपनी के मुताबिक, उसके इकोसिस्टम पर हर महीने 40 करोड़ से ज्यादा विजिटर्स आते हैं और इसमें 5,000 से ज्यादा प्रीमियम पब्लिशर्स शामिल हैं।
Dailymotion मोबाइल, डेस्कटॉप, टैबलेट और कनेक्टेड टीवी पर वीडियो अभियानों की सुविधा देता है। कंपनी अपनी विज्ञापन तकनीक और प्राइवेसी पर आधारित वीडियो इकोसिस्टम के जरिए ये सेवाएं उपलब्ध कराती है।
इस साझेदारी के तहत AdCounty Media भारत में ब्रैंड्स और एजेंसियों के साथ काम करेगा। इसका मकसद Dailymotion के उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो कंटेंट, विज्ञापन तकनीक और AI क्षमताओं के इस्तेमाल की नई संभावनाएं तलाशना है।
सिर्फ एक और वीडियो चैनल जोड़ना मकसद नहीं
कंपनी के मुताबिक, इस साझेदारी का मकसद विज्ञापनदाताओं के लिए सिर्फ एक और वीडियो चैनल जोड़ना नहीं है। इसके पीछे उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो, दर्शकों से जुड़े डेटा और AI तकनीक को एक साथ लाकर वीडियो मार्केटिंग को ज्यादा एकीकृत बनाना है।
AI से बदल रहा है वीडियो विज्ञापन
कंपनी के मुताबिक, डिजिटल विज्ञापन का अगला दौर सिर्फ सही दर्शकों को खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। विज्ञापनदाताओं को अब यह समझना भी जरूरी है कि उनके दर्शक कौन हैं, उनकी रुचियां क्या हैं, वे क्या देखते हैं और उनके व्यवहार से मिलने वाली जानकारी को विज्ञापन के काम में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसी वजह से Dailymotion, Audience Path, Ray और AdCounty Media की तकनीकों का मेल विज्ञापन तकनीक के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
कंपनी के मुताबिक, Ray चार प्रमुख AI क्षमताओं पर आधारित है। इनमें Predict AI, Engage AI, Activate AI और Measure AI शामिल हैं। ये क्षमताएं दर्शकों को समझने से लेकर विज्ञापन अभियान को बेहतर बनाने और उसके प्रदर्शन को मापने तक वीडियो मार्केटिंग के अलग-अलग हिस्सों को कवर करती हैं।
भारतीय विज्ञापनदाताओं के लिए इसका मतलब ऐसी वीडियो विज्ञापन व्यवस्था से है, जिसमें प्रीमियम कंटेंट के साथ दर्शकों की समझ और AI की मदद से विज्ञापन अभियानों से जुड़े फैसले लेने की सुविधा मिलेगी।
Dailymotion ने क्या कहा?
Dailymotion के मैनेजिंग डायरेक्टर (APAC) डॉ. विजय आनंद कुंदुरी ने कहा कि भारत में डिजिटल वीडियो विज्ञापन के लिए यह एक महत्वपूर्ण और तेजी से बदलता अवसर है। कंपनियां प्रीमियम विज्ञापन जगहों के साथ स्मार्ट दर्शक जानकारी की तलाश कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि AdCounty Media के साथ साझेदारी के जरिए Dailymotion अपने वैश्विक वीडियो प्लेटफॉर्म और Ray जैसी नई तकनीक के साथ Audience Path की व्यापक सोच को भारतीय विज्ञापनदाताओं के और करीब ला रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ब्रैंड्स को पारंपरिक वीडियो विज्ञापन खरीद के तरीके से आगे बढ़ने और ज्यादा बेहतर जानकारी के आधार पर दर्शकों तक पहुंचने में मदद करने को लेकर उत्साहित है।
AdCounty Media के लिए भी अहम कदम
कंपनी के मुताबिक, यह साझेदारी पूरे डिजिटल विज्ञापन इकोसिस्टम में हो रहे बदलावों के बीच हुई है। मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म में दर्शकों के बंटने के कारण विज्ञापनदाताओं के लिए बेहतर दक्षता, पारदर्शिता और सही जानकारी की जरूरत बढ़ रही है।
AdCounty Media के लिए यह साझेदारी ऐसी तकनीक आधारित विज्ञापन कंपनी बनाने की दिशा में एक और कदम है, जो अपने इकोसिस्टम में परफॉर्मेंस मार्केटिंग, प्रोग्रामेटिक क्षमताओं, प्रीमियम मीडिया और AI आधारित विज्ञापन सुविधाओं को एक साथ जोड़ सके।
AdCounty Media के को-फाउंडर और चीफ रेवेन्यू ऑफिसर डेल्फिन वर्गीस ने कहा कि Dailymotion अब सिर्फ एक वीडियो प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है। Ray और Audience Path के जरिए कंपनी दर्शकों को समझने और वीडियो अभियानों को चलाने व मापने के तरीके के आसपास एक इंटेलिजेंट लेयर तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा कि AdCounty के जरिए इन क्षमताओं को भारत में लाना उन विज्ञापनदाताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, जो पारंपरिक वीडियो खरीद से आगे बढ़ना चाहते हैं। उनके मुताबिक, यह साझेदारी भारत में AI, प्रीमियम वीडियो और विज्ञापन के भविष्य को लेकर एक बड़े संवाद की शुरुआत हो सकती है।
वीडियो और AI के मेल से विज्ञापन को नई दिशा
कंपनी ने कहा कि आज की मीडिया रणनीतियों में वीडियो की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो माहौल, कंपनी के अपने दर्शक डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रोग्रामेटिक क्षमताओं का मेल विज्ञापनदाताओं को तेजी से बदलते और बंटते डिजिटल माहौल के हिसाब से अपने अभियान चलाने में मदद कर सकता है।
AdCounty Media के मुताबिक, यह साझेदारी उसके ऐसे विज्ञापन तकनीक प्लेटफॉर्म बनाने के विजन को मजबूत करती है, जो वैश्विक मीडिया अवसरों को स्थानीय स्तर पर अमल के साथ जोड़ सके।
बता दें कि AdCounty Media India Limited एक तकनीक आधारित डिजिटल विज्ञापन और परफॉर्मेंस मार्केटिंग कंपनी है। कंपनी का मुख्य फोकस मोबाइल ग्रोथ, AI आधारित ऑप्टिमाइजेशन और बड़े स्तर पर यूजर हासिल करने से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने पर है।
वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर आखिरी सांस ली।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर आखिरी सांस ली। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।
नाना पाटेकर कभी भी बॉलीवुड के पारंपरिक हीरो नहीं रहे। उनकी पहचान उनके दमदार अभिनय, अलग आवाज, संवाद बोलने के खास अंदाज, ठहराव, गुस्से और बाद में उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग से बनी। कुछ ही शब्दों में दर्शकों तक अपनी बात पहुंचा देने की उनकी क्षमता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी।
नाना पाटेकर का फिल्मी सफर 1978 में आई ‘गमन’ से शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। ‘परिंदा’, ‘अंगार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब पसंद किया गया।
उन्हें ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। साल 2013 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
फिल्मों से आगे विज्ञापन की दुनिया में भी अलग पहचान
नाना पाटेकर की लोकप्रियता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उनकी आवाज, चेहरे के भाव और संवाद बोलने का अंदाज इतना पहचाना जाने लगा था कि विज्ञापन कंपनियों ने भी उनकी इसी पहचान को अपने अभियानों का हिस्सा बनाया।
इसका एक अच्छा उदाहरण 2018 का विक्रम लायन टी का टेलीविजन विज्ञापन था। इसमें नाना पाटेकर एक सामान्य से बुजुर्ग व्यक्ति की भूमिका में नजर आए, जिनका सामना कुछ घमंडी बाइक सवार युवकों से होता है। चाय पीने के बाद उनका मशहूर संवाद “बाप को भेज, तेरे बस की बात नहीं है” लोगों के बीच काफी चर्चित हुआ।
इस विज्ञापन की खास बात यह थी कि इसमें नाना पाटेकर को किसी सामान्य सेलिब्रिटी की तरह पेश करने की कोशिश नहीं की गई। बल्कि उनकी वही पहचान इस्तेमाल की गई, जिससे दर्शक पहले से परिचित थे- शांत अंदाज, रौबदार व्यक्तित्व और अचानक गुस्से का असर।
‘वेलकम’ के उदय शेट्टी को भी विज्ञापन में वापस लाया गया
कई साल बाद नाना पाटेकर ने ‘वेलकम’ के अपने लोकप्रिय किरदार उदय शेट्टी को एक जार ऐप के अभियान के लिए फिर से पेश किया। इस बार उनके चर्चित अंदाज को “कंट्रोल... कंट्रोल!” जैसे संवाद के साथ इस्तेमाल किया गया। विज्ञापन में गुस्सा किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि बिना नियंत्रण के खर्च करने और बचत की खराब आदतों पर दिखाया गया। इस तरह ब्रैंड ने नाना पाटेकर की पुरानी लोकप्रिय पहचान को एक नए संदेश के साथ जोड़ दिया।
यही नाना पाटेकर की विज्ञापन की दुनिया में खासियत थी। ब्रैंड सिर्फ उनका चेहरा इस्तेमाल नहीं कर रहे थे, बल्कि उनके साथ जुड़ी हुई पहचान और यादगार किरदारों को भी अपने संचार का हिस्सा बना रहे थे।
अलग-अलग तरह के किरदारों ने बनाई पहचान
‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के मजेदार अंदाज ने नाना पाटेकर को एक अलग तरह की लोकप्रियता दी, वहीं ‘क्रांतिवीर’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों ने उनके गंभीर और प्रभावशाली अभिनेता की पहचान मजबूत की।
उनकी यही क्षमता विज्ञापन जगत के लिए भी काम आई। जरूरत के हिसाब से उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को इस्तेमाल किया जा सकता था।
नाना पाटेकर टाटा स्काई के महाराष्ट्र-केंद्रित अभियान में भी नजर आए, जहां उनकी कॉमिक टाइमिंग और क्षेत्रीय पहचान का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा हाल के समय में वह उत्तर प्रदेश पुलिस के डिजिटल अरेस्ट घोटालों से जुड़े जागरूकता अभियान में भी दिखाई दिए। इसमें उनके गंभीर और प्रभावशाली स्क्रीन व्यक्तित्व के जरिए लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई।
नाना पाटेकर खुद बन गए थे एक ब्रैंड
नाना पाटेकर ने दशकों तक अपने किरदारों के जरिए अपनी पहचान बनाई। उन्होंने पारंपरिक स्टारडम पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय शैली को अपनी सबसे बड़ी पहचान बनाया। यही वजह है कि विज्ञापन जगत में उनकी लोकप्रियता कुछ अलग रही। ब्रैंड्स को उनके साथ सिर्फ एक मशहूर चेहरा नहीं मिलता था, बल्कि ऐसी पहचान मिलती थी जिसे दर्शक कुछ ही सेकंड में पहचान लेते थे।
“बाप को भेज...” जैसे संवाद का विज्ञापन की दुनिया में लोकप्रिय होना और वर्षों बाद “कंट्रोल... कंट्रोल!” के जरिए उदय शेट्टी का फिर याद आना इसी का उदाहरण है।
नाना पाटेकर को किसी विज्ञापन के लिए नया ब्रैंड किरदार बनाने की जरूरत नहीं थी। उनके निभाए किरदार और उनका अपना अंदाज पहले ही लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन चुके थे। यही उनकी फिल्मों के साथ-साथ विज्ञापन जगत में भी सबसे बड़ी पहचान रही।
ऐडवर्टाइजिंग एजेंसियों की संस्था ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने गोपाकुमार आर. नायर को अपना नया सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऐडवर्टाइजिंग एजेंसियों की संस्था ऐडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने गोपाकुमार आर. नायर को अपना नया सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया है। वह 1 अक्टूबर 2026 यानी आज से यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
गोपाकुमार नायर अगस्त 2026 में AAAI से जुड़े थे। इसके बाद उन्हें संस्था के कामकाज और जिम्मेदारियों को समझने के लिए एक तय प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण और परिचय दिया गया। अब वह सुदेश कपूर की जगह लेंगे, जिन्होंने करीब दो दशकों तक AAAI के सेक्रेटेरिएट का नेतृत्व किया है।
हालांकि, सुदेश कपूर AAAI से पूरी तरह अलग नहीं होंगे। वह आगे भी संस्था के साथ सीनियर एडवाइजर के तौर पर जुड़े रहेंगे।
गोपाकुमार आर. नायर को विज्ञापन और मीडिया इंडस्ट्री में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर के दौरान WPP/GroupM के साथ 21 साल और Madison के साथ 8 साल काम किया है। उन्हें विज्ञापन और मीडिया के साथ-साथ व्यावसायिक कामकाज और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ लंबे समय तक काम करने का अनुभव है।
AAAI के प्रेसिडेंट श्रीनिवासन के. स्वामी ने नायर का स्वागत करते हुए कहा कि विज्ञापन और मीडिया इंडस्ट्री में उनका लंबा अनुभव, कमर्शियल ऑपरेशंस की समझ और इंडस्ट्री से जुड़े हितधारकों के साथ उनका पुराना जुड़ाव संस्था के लिए उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि AAAI अपनी मजबूत नींव को आगे बढ़ाते हुए इंडस्ट्री के हितों के लिए काम करती रहेगी।
वहीं, गोपाकुमार आर. नायर ने कहा कि AAAI के जरिए विज्ञापन इंडस्ट्री की सेवा करने का मौका मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि वह बोर्ड, सदस्यों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काम करेंगे और इंडस्ट्री तथा उसके पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में AAAI के प्रयासों में योगदान देंगे।
क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग लिमिटेड की 40वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) 28 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक दोपहर 3 बजे शुरू हुई और 3:19 बजे समाप्त हुई।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग लिमिटेड की 40वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) 28 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक दोपहर 3 बजे शुरू हुई और 3:19 बजे समाप्त हुई। कंपनी ने एजीएम में रखे गए सभी 10 प्रस्तावों को जरूरी बहुमत से मंजूरी मिलने की जानकारी दी है।
कंपनी ने 29 सितंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को दी जानकारी में सेबी के रेगुलेशन 44(3) के तहत वोटिंग रिजल्ट और स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट जमा की है।
कंपनी के अनुसार, एजीएम में 10 प्रस्ताव रखे गए थे और सभी प्रस्ताव पास हुए। कंपनी के रिकॉर्ड डेट 21 सितंबर 2026 के अनुसार कुल 1,070 शेयरधारक थे। इनमें से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 5 प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप और 10 पब्लिक शेयरधारक एजीएम में शामिल हुए।
वित्तीय नतीजों को मंजूरी
पहले प्रस्ताव में कंपनी के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड ऑडिट किए गए वित्तीय विवरणों को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव पर कुल 1,86,81,760 वोट पड़े। इनमें 1,86,66,760 वोट पक्ष में और 15,000 वोट विरोध में रहे। यानी 99.92 फीसदी वोट प्रस्ताव के पक्ष में पड़े।
विमी ललानी की दोबारा नियुक्ति
दूसरे प्रस्ताव में विमी ललानी को रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद दोबारा डायरेक्टर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव पर 7,50,800 वैध वोट पड़े। इनमें 7,35,800 वोट पक्ष में और 15,000 वोट विरोध में रहे। इस तरह 98 फीसदी वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
Vaish and Co को वैधानिक ऑडिटर बनाने की मंजूरी
तीसरे प्रस्ताव में Vaish and Co. Chartered Accountants को कंपनी का वैधानिक ऑडिटर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई। यह नियुक्ति 40वीं एजीएम के समाप्त होने से लेकर 45वीं एजीएम के समाप्त होने तक पांच वित्तीय वर्षों के लिए होगी। बोर्ड को ऑडिटर का पारिश्रमिक तय करने के लिए भी अधिकृत किया गया। इस प्रस्ताव को 99.92 फीसदी वोट मिले, जबकि 0.08 फीसदी वोट विरोध में रहे।
नवरत्न बैद्य की नियुक्ति
चौथे प्रस्ताव में नवरत्न बैद्य को डायरेक्टर और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियमित नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उनका कार्यकाल पांच साल का होगा। इस प्रस्ताव के पक्ष में 1,86,66,760 वोट और विरोध में 15,000 वोट पड़े। यानी 99.92 फीसदी वोट पक्ष में रहे।
लोन, गारंटी और निवेश की सीमा बढ़ाने को मंजूरी
पांचवें प्रस्ताव में कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 186 के तहत कंपनी के लोन देने, गारंटी देने, सिक्योरिटी देने और सिक्योरिटीज में निवेश की सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.92 फीसदी वोट पड़े और 0.08 फीसदी वोट विरोध में रहे।
लोन और गारंटी देने के प्रस्ताव को मंजूरी
छठे प्रस्ताव में कंपनी अधिनियम की धारा 185 के तहत लोन देने, गारंटी देने या सिक्योरिटी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव को भी 99.92 फीसदी वोट मिले।
कंपनी की संपत्तियों पर चार्ज बनाने की मंजूरी
सातवें प्रस्ताव में कंपनी अधिनियम की धारा 180(1)(a) के तहत कंपनी की संपत्तियों पर चार्ज, मॉर्गेज और हाइपोथिकेशन बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.92 फीसदी वोट पड़े।
कंपनी की उधार लेने की क्षमता को मंजूरी
आठवें प्रस्ताव में कंपनी अधिनियम की धारा 180(1)(c) के तहत कंपनी की उधार लेने की शक्तियों से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में भी 99.92 फीसदी वोट रहे।
कुणाल ललानी के पारिश्रमिक में बदलाव
नौवें प्रस्ताव में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कुणाल ललानी के पारिश्रमिक में बदलाव को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव पर कुल 7,50,800 वैध वोट पड़े। इनमें 7,35,800 वोट पक्ष में और 15,000 वोट विरोध में रहे। यानी 98 फीसदी वोट पक्ष में पड़े।
आश्रय ललानी के पारिश्रमिक में बदलाव
दसवें और आखिरी प्रस्ताव में कंपनी के होल टाइम डायरेक्टर आश्रय ललानी के पारिश्रमिक में बदलाव को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव पर भी 7,50,800 वैध वोट पड़े। इनमें 7,35,800 वोट पक्ष में और 15,000 वोट विरोध में रहे। यानी 98 फीसदी वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।
25 से 27 सितंबर तक हुई ई-वोटिंग
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, एजीएम से पहले रिमोट ई-वोटिंग 25 सितंबर 2026 सुबह 9 बजे से 27 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक हुई। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एजीएम में शामिल सदस्यों को भी ई-वोटिंग की सुविधा दी गई। रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान हुई ई-वोटिंग के नतीजों को दो गवाहों की मौजूदगी में अनब्लॉक किया गया। इसके बाद वोटों का कंपनी के रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट के रिकॉर्ड से मिलान किया गया।
स्क्रूटिनाइजर अक्षत गर्ग, प्रोपराइटर, अक्षत गर्ग एंड एसोसिएट्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि एजीएम के नोटिस में शामिल प्रस्ताव संख्या 1 से 10 तक सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए। कंपनी की ओर से यह जानकारी मैनेजिंग डायरेक्टर कुणाल ललानी ने दी है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी मुथूट फिनकॉर्प को मार्च 2028 तक होने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए टाइटल स्पॉन्सर बनाया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी मुथूट फिनकॉर्प को मार्च 2028 तक होने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए टाइटल स्पॉन्सर बनाया है। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह डील 150 करोड़ रुपये तक की है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कि मुथूट फिनकॉर्प हर मैच के लिए अधिकतम 4.3 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। वहीं, मौजूदा साइकल के 35 मैचों के लिए बीसीसीआई ने 4.85 करोड़ रुपये प्रति मैच की कीमत तय की थी।
पिछले टाइटल स्पॉन्सर आईडीएफसी फर्स्ट ने पिछली साइकल में प्रति मैच 4.2 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इस साइकल में 56 मैच शामिल थे और यह अगस्त में खत्म हुई। आईडीएफसी फर्स्ट ने 2023 में तीन साल के लिए 235.2 करोड़ रुपये की डील के तहत ये अधिकार हासिल किए थे।
बीसीसीआई ने टाइटल स्पॉन्सरशिप अधिकारों की बिक्री के लिए पहली बार 20 जुलाई को टेंडर जारी किया था। इसमें बोली जमा करने की आखिरी तारीख 13 अगस्त थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 7 सितंबर कर दिया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि टेंडर प्रक्रिया के जरिए पार्टनर नहीं मिलने के बाद बीसीसीआई ने मुथूट फिनकॉर्प के साथ सीधे डील की है।
एक स्पोर्ट्स मार्केटिंग अधिकारी के जरिए रिपोर्ट में बताया गया है कि नई डील आईडीएफसी फर्स्ट की ओर से दिए गए 4.2 करोड़ रुपये प्रति मैच से ज्यादा है, लेकिन बीसीसीआई की ओर से तय 4.85 करोड़ रुपये के बेस प्राइस से कम है।
अधिकारी ने कहा कि यह डील दिखाती है कि क्रिकेट स्पॉन्सरशिप मार्केट अब भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि, यह बीसीसीआई के लिए एक तरह का रियलिटी चेक भी है, क्योंकि बोर्ड अपनी तय उम्मीद तक पहुंचने में सफल नहीं रहा।
यह नई डील ऐसे समय हुई है जब बीसीसीआई ने टीम इंडिया से जुड़े द्विपक्षीय क्रिकेट मैचों के लिए कैंपा, एसबीआई लाइफ और चैटजीपीटी को एसोसिएट पार्टनर बनाया है। इन तीनों नई स्पॉन्सरशिप डील की कुल कीमत 130 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो पिछली साइकल के मुकाबले 44 प्रतिशत ज्यादा है।
मामले से जुड़े लोगों ने पहले इकनॉमिक टाइम्स को बताया था कि कैंपा कोला 1.31 करोड़ रुपये प्रति मैच की बोली के साथ सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी रही। इसके बाद चैटजीपीटी और एसबीआई लाइफ ने 1.2 करोड़ रुपये प्रति मैच की बोली लगाई। बिसलेरी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी 1.2 करोड़ रुपये प्रति मैच की बोली लगाई थी और वे एसोसिएट पार्टनरशिप के लिए दौड़ में थे।
बीसीसीआई ने एसोसिएट पार्टनर अधिकारों के लिए रिजर्व प्राइस भी बढ़ाकर 95 लाख रुपये प्रति मैच कर दिया था। पहले यह 82 लाख रुपये प्रति मैच था।
डब्ल्यूपीपी मीडिया की ‘स्पोर्टिंग नेशन’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2025 में स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप पर 7,942 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो सालाना आधार पर 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इस दौरान स्पॉन्सरशिप मार्केट में क्रिकेट की हिस्सेदारी भी एक साल पहले के 85 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई।
फिनटेक और फैंटेसी स्पोर्ट्स जैसी कई नई कैटेगरी के बाहर होने के बावजूद क्रिकेट स्पॉन्सरशिप मार्केट में बड़े ब्रैंड्स की दिलचस्पी बनी हुई है। बीसीसीआई की कुछ बड़ी डील में अपोलो टायर्स के साथ फ्रंट-ऑफ-जर्सी स्पॉन्सरशिप डील भी शामिल है, जिसकी कीमत 579 करोड़ रुपये है। इसके अलावा एशियन पेंट्स के साथ 145 करोड़ रुपये की डील भी है।
क्रेयॉन्स ऐडवर्टाइजिंग लिमिटेड ने अमित बांका को कंपनी का नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्रेयॉन्स ऐडवर्टाइजिंग लिमिटेड ने अमित बांका को कंपनी का नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। कंपनी ने 23 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी।
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 23 सितंबर को हुई बैठक में अमित बांका की CFO और Key Managerial Personnel (KMP) के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उनकी नियुक्ति 23 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई है।
कंपनी ने बताया कि उनकी नियुक्ति कंपनी के रोजगार से जुड़े नियमों और शर्तों के आधार पर की गई है।
अमित बांका को फाइनेंस के क्षेत्र में 24 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने वित्तीय रणनीति, ऑपरेशनल कामकाज और संगठन के विकास से जुड़े क्षेत्रों में काम किया है। उन्हें फाइनेंशियल प्लानिंग एंड एनालिसिस, कॉरपोरेट रिस्ट्रक्चरिंग, ट्रेजरी मैनेजमेंट, कंप्लायंस और टीम लीडरशिप का भी अनुभव है।
कंपनी ने यह भी बताया कि अमित बांका की नियुक्ति का कंपनी के किसी डायरेक्टर से कोई संबंध नहीं है।
मैक्सपोजर लिमिटेड (Maxposure Limited) ने अपने शेयरों की कीमत में हाल में हुई महत्वपूर्ण हलचल को लेकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को स्पष्टीकरण दिया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मैक्सपोजर लिमिटेड (Maxposure Limited) ने अपने शेयरों की कीमत में हाल में हुई महत्वपूर्ण हलचल को लेकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने कहा है कि उसके पास ऐसी कोई जानकारी, घटना, घटनाक्रम या आने वाली घोषणा नहीं है, जिसे SEBI Listing Regulations, 2015 के तहत शेयर बाजार को बताना जरूरी हो और जिसका असर कंपनी के शेयर की कीमत या कारोबार की मात्रा पर पड़ सकता हो।
बता दें कि मैक्सपोजर लिमिटेड नई पीढ़ी के मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की एक प्रमुख कंपनी है, जिसका खास फोकस एविएशन मार्केट पर है।
कंपनी ने यह स्पष्टीकरण 18 सितंबर 2026 को NSE के सर्विलांस डिपार्टमेंट को भेजा। यह जवाब NSE की 17 सितंबर 2026 की उस चिट्ठी के संदर्भ में दिया गया है, जिसमें कंपनी के शेयरों की कीमत में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
कंपनी ने कहा कि उसने SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के तहत लागू सभी जरूरी खुलासा नियमों का पालन किया है। कंपनी के मुताबिक, 3 सितंबर 2026 को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक के नतीजे और उससे जुड़े जरूरी खुलासे उसी दिन NSE को भेज दिए गए थे।
मैक्सपोजर ने यह भी कहा कि फिलहाल कंपनी से जुड़ी ऐसी कोई अन्य महत्वपूर्ण जानकारी या प्राइज-सेन्सिटिव इनफॉर्मेशन, घटना या घटनाक्रम लंबित नहीं है, जिसे SEBI LODR Regulations के Regulation 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंज को बताना बाकी हो।
कंपनी ने साफ किया कि उसके पास ऐसी कोई अप्रकाशित जानकारी या घोषणा नहीं है, जिसका हाल में कंपनी के शेयरों की कीमत या कारोबार की मात्रा में हुई हलचल से कोई संबंध हो सकता है।
कंपनी के मुताबिक, शेयर की कीमत और कारोबार की मात्रा में यह बदलाव बाजार की स्थितियों और बाजार में मौजूद दूसरे कारणों की वजह से हो सकता है। इन कारणों पर कंपनी का नियंत्रण नहीं है। मैक्सपोजर ने कहा कि वह आगे भी लागू नियमों के तहत सभी जरूरी खुलासे करती रहेगी और ऐसी किसी भी महत्वपूर्ण घटना या जानकारी के बारे में स्टॉक एक्सचेंज को उचित समय पर जानकारी देती रहेगी।
ISA का सिस्टम WFA के Halo फ्रेमवर्क और ब्रिटेन के ‘Origin’ मॉडल पर आधारित होगा, जिसकी शुरुआत वीडियो मेजरमेंट से होने की उम्मीद है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत के करीब ₹1.55 लाख करोड़ के ऐड मार्केट में एक बड़ी चुनौती अब भी बनी हुई है कि अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर चलने वाले किसी ऐड कैंपेन को वास्तव में कितने अलग-अलग लोग (यूनिक कंज्यूमर्स) देखते हैं। फिलहाल इंडस्ट्री के पास ऐसा कोई साझा मीजरमेंट सिस्टम नहीं है, जो टीवी, डिजिटल और दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलाकर यह बता सके कि किसी कैंपेन की कुल रीच कितनी रही और एक ही व्यक्ति तक ऐड कितनी बार पहुंचा।
इस कमी को दूर करने के लिए इंडियन सोसायटी ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (ISA) अगले कुछ महीनों में क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट (CMM) सिस्टम लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया को यह जानकारी दी है। प्रस्तावित सिस्टम के पहले चरण में वीडियो को शामिल किया जाएगा, क्योंकि यह ऐडवर्टाइजिंग का सबसे बड़ा इन्वेंट्री सेगमेंट है। आगे चलकर इस सिस्टम में दूसरे मीडिया को भी शामिल किया जा सकता है।
यह पहल ISA के करीब तीन साल से चल रहे प्रयास का अगला बड़ा कदम है। ऐडवर्टाइजर लंबे समय से ऐसे साझा सिस्टम की जरूरत महसूस कर रहे हैं, जिससे अलग-अलग और तेजी से बढ़ते मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस को एक समान तरीके से मापा जा सके।
WFA के Halo फ्रेमवर्क से प्रेरित होगा सिस्टम
ISA के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारत में तैयार किया जा रहा यह सिस्टम वर्ल्ड फेड्रेशन ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (WFA) के Halo फ्रेमवर्क के सिद्धांतों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। Halo एक ऐसा कॉमन फ्रेमवर्क है, जिसका मकसद अलग-अलग मीडिया पर कितने अलग-अलग लोगों तक ऐड पहुंचा और उन्होंने उसे कितनी बार देखा, यह पता लगाना है। यानी यह पता लगाया जा सके कि किसी कैंपेन को कुल कितने अलग लोगों ने देखा और उनमें से कितने लोगों तक ऐड बार-बार पहुंचा।
ISA ने इस दिशा में ब्रिटेन के Origin मॉडल का भी अध्ययन किया है। Origin को Halo फ्रेमवर्क पर आधारित सफल मॉडलों में से एक माना जाता है।
ISA के अधिकारी ने बताया कि भारतीय सिस्टम की शुरुआत वीडियो मीजरमेंट से होने की उम्मीद है। इसके बाद इसे धीरे-धीरे दूसरे मीडिया तक बढ़ाया जाएगा। यानी शुरुआत से ही हर माध्यम को एक ही सिस्टम में शामिल करने के बजाय इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
ऐडवर्टाइजर्स, एजेंसीज और प्लेटफॉर्म्स को साथ लाने की तैयारी
ISA की CMM पहल पर उसकी क्रॉस मीडिया मीजरमेंट सब-कमेटी के भीतर काफी समय से चर्चा और विचार-विमर्श चल रहा है। अब ISA इस प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स को शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इनमें ऐडवर्टाइजर्स, मीडिया एजेंसीज, ब्रॉडकास्टर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, पब्लिशर्स और मीजरमेंट/डेटा कंपनीज शामिल हैं।
मौजूदा मीजरमेंट सिस्टम और डेटा प्रोवाइडर्स जैसे BARC और TAM की भी इस प्रक्रिया में भूमिका हो सकती है। इंडस्ट्री यह समझने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग स्रोतों से आने वाले डेटा और मीजरमेंट मेथडोलॉजी को एक कॉमन फ्रेमवर्क के तहत किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। ISA का मकसद मौजूदा मीजरमेंट करेंसी को तुरंत खत्म करना नहीं है। इसके बजाय एक ऐसी न्यूट्रल मीजरमेंट layer तैयार करने की कोशिश है, जो अलग-अलग जगहों से मिले आंकड़ों को जोड़कर यह बताए कि कैंपेन कितने अलग-अलग लोगों तक पहुंचा।
ऐडवर्टाइजर 10 से ज्यादा टचपॉइंट्स का कर रहे इस्तेमाल
इंडस्ट्री से जुड़े ऐडवर्टाइजर्स के मुताबिक, मीडिया का दायरा लगातार बढ़ रहा है और आज एक ऐडवर्टाइजर अपने ऑडियंस तक पहुंचने के लिए औसतन 10 से ज्यादा टचपॉइंट्स का इस्तेमाल करता है। टीवी, कनेक्टेड टीवी, यूट्यूब, सोशल मीडिया, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स, ऑडियो और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक ही व्यक्ति तक ऐड पहुंच सकता है। ऐसे में हर प्लेटफॉर्म का अलग-अलग डेटा मिलने से यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में कितने यूनिक कंज्यूमर्स तक कैंपेन पहुंचा।
ऐडवर्टाइजर्स का मानना है कि करीब ₹1.5 लाख करोड़ के सालाना ऐडवर्टाइजिंग खर्च वाले बाजार में यह समझना जरूरी है कि ऑडियंस किस माध्यम पर और किस तरह जुड़ रही है। इसके लिए एक अकाउंटेबल, न्यूट्रल और क्रेडिबल क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम की जरूरत है।
TV और CTV मिलाकर करीब 25% ऐड मार्केट
पिच मेडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) 2026 के मुताबिक, भारत में 2025 में लीनियर टीवी का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹32,855 करोड़ रहा। इंडस्ट्री के एक अनुमान के मुताबिक, कनेक्टेड टीवी (CTV) समेत ब्रॉडर लार्ज-स्क्रीन इकोसिस्टम का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹38,855 करोड़ रहा। इसमें CTV का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹6,000 करोड़ रहने का अनुमान है, जो एक साल में दोगुना हुआ है। TV और CTV को मिलाकर यह आंकड़ा भारत के कुल ऐडवर्टाइजिंग खर्च का करीब 25% बैठता है।
Halo से Origin और अब भारत की तैयारी
ब्रिटेन का Origin मॉडल, जिसे Incorporated Society of British Advertisers (ISBA) के नेतृत्व में तैयार किया गया है, Halo फ्रेमवर्क पर आधारित सबसे विकसित मॉडलों में से एक माना जाता है। इसमें टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और पैनल डेटा को एक साथ जोड़कर ऑडियंस को मापा जाता है, जबकि लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रखी जाती है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक ही ऐड कितने लोगों तक पहुंचा और लोगों ने उसे कुल कितनी बार देखा।
WFA के मुताबिक, Origin अब ब्रिटेन के ऐडवर्टाइजिंग मार्केट के खर्च के हिसाब से 60% से ज्यादा हिस्से को कवर करता है। अमेरिका में ऐडवर्टाइजर्स द्वारा विकसित Aquila भी इसी तरह के मॉडल पर काम कर रहा है और इसके ट्रायल्स चल रहे हैं।
ISA अब Origin और Aquila दोनों का अध्ययन कर रहा है, ताकि यह समझा जा सके कि भारत में क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम को किस तरह तैयार किया जा सकता है। Origin में सिंगल-सोर्स पैनल को प्लेटफॉर्म डेटा के साथ जोड़ा जाता है। यह प्राइवेसी-प्रिजर्विंग एनवॉयरमेंट में काम करता है और स्वतंत्र ऑ़डिट के अधीन है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि TV और डिजिटल के जरिए कितने नए लोगों तक ऐड पहुंचा और कितने लोगों को वही ऐड दोबारा दिखा।
सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी नहीं, इंडस्ट्री की सहमति
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, CMM सिस्टम तैयार करने में तकनीक शायद सबसे बड़ी चुनौती नहीं होगी। असली चुनौती अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साझा सिस्टम पर सहमत करना हो सकती है।
ऐडवर्टाइजर्स को independent और comparable मीजरमेंट चाहिए। एजेंसीज ऐसा करेंसी सिस्टम चाहती हैं, जिसे मीडिया प्लानिंग सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जा सके। वहीं ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अपने डेटा और commercial interests को लेकर सतर्क रहते हैं। दूसरी तरफ मीजरमेंट कंपनीज की अपनी मेथोलॉजी और इंफ्रास्टचर्स पहले से मौजूद हैं। ऐसे में सभी पक्षों को एक साझा फ्रेमवर्क पर लाना ISA के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
इस पूरी पहल का अंतिम मकसद काफी सीधा है- यह पता लगाना कि किसी कैंपेन ने कितने अलग लोगों तक पहुंच बनाई, लोगों को कितनी बार ऐड दिखा और किस चैनल ने अतिरिक्त (incremental) रीच दी।
ISA की क्रॉस मीडिया मीजरमेंट सब-कमेटी की अध्यक्षता ITC Ltd के चीफ डिजिटल मार्केटिंग ऑफिसर शुवादीप बनर्जी कर रहे हैं। शुवादीप बनर्जी से इस मामले में टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। ISA चेयरमैन सुनील कटारिया ने एक्सचेंज4मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया।
भारत में CMM की जरूरत क्यों बढ़ रही है?
भारत में TV, कनेक्टेड टीवी, यूट्यूब और दूसरे डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म्स, social मीडिया, स्ट्रीमिंग सर्विसेज और ऑडियो जैसे कई माध्यमों की ऑडियंस अब एक-दूसरे से काफी हद तक overlap करती है। लेकिन इन सभी के मीजरमेंट सिस्टम अभी भी काफी हद तक प्लेटफॉर्म या medium-specific हैं।
उदाहरण के लिए, किसी ऐडवर्टाइजर को यह पता हो सकता है कि TV पर उसके ऐड को कितने इम्प्रेशंस मिले और डिजिटल पर कितने इम्प्रेशंस मिले। लेकिन दोनों को मिलाकर यह पता लगाना आसान नहीं है कि वास्तव में कितने अलग-अलग लोगों तक ऐड पहुंचा।
एक साझा क्रॉस मीडिया फ्रेमवर्क आने से फोकस सिर्फ इस बात पर नहीं रहेगा कि ऐडवर्टाइजर ने कितनी ऐडवर्टाइजिंग इन्वेंट्री खरीदी, बल्कि यह भी देखा जा सकेगा कि उसे वास्तव में कितनी इक्रीमेंटल ऑडियंस मिली। इसका असर आगे चलकर मीडिया प्लानिंग, ऐडवर्टाइजिंग प्राइसिंग, कैंपेन ऑप्टमाइजेशन और टीवी, डिजिटल वीडियो समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म के योगदान के आकलन पर भी पड़ सकता है।
TV ratings के बदलते दौर में पहल महत्वपूर्ण
ISA की यह पहल ऐसे समय में सामने आ रही है जब भारत का टीवी मीजरमेंट इकोसिस्टम भी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। टीवी रेटिंग्स काफी समय से रुकी हुई हैं। सरकार की TV Ratings Policy 2026 में रेटिंग्स इकोसिस्टम को लेकर नए प्रावधान किए गए हैं। इनमें transparency, accountability, data protection और independent oversight को मजबूत करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। BARC नए रेगुलेट्री फ्रेमवर्क के तहत काम कर रहा है। वहीं मार्केट में TAM जैसे स्थापित खिलाड़ियों से भी ज्यादा कम्पटीशन देखने को मिल सकता है।
दूसरी तरफ दूसरे मीडिया की मीजरमेंट करेंसीज में भी कई चुनौतियां हैं। इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) पिछले सात साल से रुका हुआ है। वहीं Out-of-Home (OOH) इंडस्ट्री के सामने भी अब तक कोई साझा मीजरमेंट सिस्टम नहीं है। डिजिटलमीडिया का मीजरमेंट बाकी माध्यमों की तुलना में ज्यादा विकसित है, लेकिन यहां भी बड़ी मात्रा में मीजरमेंट डेटा बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नियंत्रण में रहता है।
ऐसे में ISA का प्रस्तावित क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम अगर आकार लेता है, तो इसका उद्देश्य अलग-अलग मीडिया की ऑडियंस को एक साझा फ्रेमवर्क में देखकर ऐडवर्टाइजर्स को कैंपेन की वास्तविक रीच और फ्रीक्वेंसी समझने में मदद करना होगा।
विमल इलायची (Vimal Elaichi) बनाने वाली कंपनी PB Agro LLP को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
विमल इलायची (Vimal Elaichi) बनाने वाली कंपनी PB Agro LLP को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की ओर से Vimal Elaichi के सेलिब्रिटी ब्रैंड एंबेसडर्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली PB Agro की याचिका खारिज कर दी है।
PB Agro ने महाराष्ट्र FDA की ओर से 11 अगस्त को जारी किए गए इन नोटिस को चुनौती दी थी। इन नोटिस में आरोप लगाया गया था कि Vimal Elaichi के विज्ञापन के जरिए Vimal Pan Masala का अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार किया जा रहा है। Vimal Pan Masala महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है।
इस मामले में जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था। मुख्य सवाल यह था कि क्या दिल्ली हाई कोर्ट के पास महाराष्ट्र FDA की ओर से जारी किए गए इन नोटिस पर सुनवाई करने का क्षेत्रीय अधिकार है।
केंद्र और CCPA ने याचिका का विरोध किया
केंद्र सरकार और Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने PB Agro की याचिका की सुनवाई योग्य होने का विरोध किया था। उनका कहना था कि चूंकि कारण बताओ नोटिस महाराष्ट्र सरकार के विभाग ने जारी किए हैं, इसलिए कंपनी को इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश न होने को लेकर भी सवाल उठाया गया। वकील रुख्मिणी बोबडे ने दलील दी कि महाराष्ट्र सरकार, जिसने कारण बताओ नोटिस जारी किया है, वह अपने नोटिस का बचाव करने के लिए अदालत में मौजूद नहीं है।
वहीं, PB Agro की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन और मोहित माथुर ने कंपनी का पक्ष रखा। कंपनी की दलील थी कि कारण बताओ नोटिस केवल तीनों अभिनेताओं को जारी किए गए हैं, कंपनी को नहीं। जबकि विज्ञापन अभियान के खिलाफ किसी भी नियामकीय कार्रवाई का सीधा असर कंपनी पर पड़ सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने अब PB Agro की इस याचिका को खारिज कर दिया है।