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ASCI: जांच में भ्रामक निकले इन बड़ी कंपनियों के विज्ञापन
टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करती है भारतीय विज्ञापन मानक परिषद
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
टीवी पर आने वाले विज्ञापनों की प्रमाणिकता की जांच करने वाली संस्था 'ऐडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (ASCI) ने जुलाई में 489 विज्ञापनों की जांच की। ‘एएससीआई’ द्वारा इस बारे में सूचित किए जाने के बाद 151 एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापनों को हटा लिया। इसके बाद ‘एएससीआई’ की ‘कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल’ (CCC) ने 338 विज्ञापनों का मूल्यांकन किया और 299 शिकायतों को सही ठहराते हुए जांच के लिए रोका गया।
इन 299 विज्ञापनों में 201 एजूकेशन सेक्टर के, 59 हेल्थकेयर सेक्टर के, नौ पर्सनल केयर के, चार फूड और बेवरेज सेक्टर के और 26 अन्य कैटेगरी के थे। इन सभी विज्ञापनों में ‘एएससीआई’ की गाइडलाइंस का पालन नहीं किया गया था। इन सभी को भ्रामक विज्ञापनों की श्रेणी में रखा गया।
स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई (SUO MOTO ACTION)
‘ASCI’ की प्रिंट और टीवी मीडिया सर्विलॉन्स ने ‘नेशनल ऐडवर्टाइजिंग मॉनीटरिंग सर्विसेज प्रोजेक्ट’ (NAMS) द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर कुछ विज्ञापनों को जांच के लिए रोका गया। इसके तहत 409 विज्ञापनों में से 128 मामले तुरंत निपटा दिए गए। इनमें एडवर्टाइजर्स ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद ये विज्ञापन हटा दिए गए थे। बाकी बचे विज्ञापनों की ‘CCC’ द्वारा जांच की गई और 278 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों को बरकरार रखते हुए जांच के लिए रोका गया। इन 278 विज्ञापनों में 193 एजुकेशन सेक्टर के, 59 हेल्थ केयर सेक्टर के, सात पर्सनल केयर कैटेगरी के और 19 अन्य कैटेगरी के थे।
फूड और बेवरेज कैटेगरी में एएससीआई ने जिन विज्ञापनों को भ्रामक पाया है, उनमें ‘ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर लिमिटेड’ (हॉर्लिक्स प्रोटीन प्लस) का नाम भी शामिल है। वहीं ‘रसना इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड’ (Rasna Insta EnerG) के टीवी विज्ञापन के दावे को भी फर्जी पाया गया है। यदि पर्सनल केयर कैटेगरी की बात करें तो ‘जायडस वेलनेस लिमिटेड’ (नायसिल) का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है। इस विज्ञापन में दावा किया गया है कि यह पाउडर कीटाणुओं का तुरंत खात्मा करता है और तीन दिन में इसके परिणाम दिखने लगते हैं। यह विज्ञापन भी भ्रामक पाया गया। क्योंकि इसमें किसी भी तरह के मार्केट रिसर्च डाटा को नहीं दिखाया गया है।
इसके साथ ही अन्य कैटेगरी में हैवेल्स इंडिया लिमिटेड (Lloyd AC) और ‘कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के दावे भी भ्रामक मिले। हैवेल्स इंडिया लिमिटेड के विज्ञापन में जहां दावा किया गया था कि उनका ए.सी 45 सेकेंड में 18 डिग्री सेल्सियस तापमान कर देता है, जबकि कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पर्किंसन बीमारी के इलाज में अग्रणी होने का दावा किया था, लेकिन इससे संबंधित कोई सबूत नहीं दे सके।
वहीं, ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Educare) के विज्ञापन में इसे देश का सबसे बड़ा एजुकेशन फेस्टिवल (India's Largest Education Festival) होने का दावा किया गया है, जो सही नही है। जांच में पता चला कि वर्ष 2019 में देश में कई करियर, एजुकेशन और ट्रेनिंग ट्रेड सो हुए। ऐसे में एडवर्टाइजर्स ऐसा कोई भी तुलनात्मक डाटा उपलब्ध नहीं करा सका, जिससे इसके दावे की पुष्टि हो।
टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड (TOI App) के प्रिंट विज्ञापन में इसे देश का सबसे ज्यादा भरोसेमंद न्यूज ब्रैंड होने का दावा किया गया है। केवल ‘रॉयटर्स इंस्टीट्यूट इंडिया डिजिटल रिपोर्ट’ (Reuters Institute India Digital News Report) के आधार पर यह दावा उचित नहीं है। यह दावा अस्पष्ट और भ्रामक है। जांच में पता चला कि सर्वे के नमूनों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले सिर्फ अंग्रेजी भाषा के न्यूज यूजर्स को शामिल किया गया। ऐसे में ये विज्ञापन ‘एएससीआई’ की गाइडलाइंस का उल्लंघन करते मिले।
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