वरिष्ठ टीवी पत्रकार सुमित अवस्थी का एक पॉडकास्ट इंटरव्यू इन दिनों चर्चा में है। यह इंटरव्यू यूट्यूबर भानू पाठक के चैनल पर प्रसारित हुआ था और अब सोशल मीडिया पर इसकी कई क्लिप्स वायरल हो रही हैं।
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Vikas Saxena
विकास सक्सेना, समाचार4मीडिया।।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार सुमित अवस्थी का एक पॉडकास्ट इंटरव्यू इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यह इंटरव्यू यूट्यूबर भानू पाठक के चैनल पर प्रसारित हुआ था और अब सोशल मीडिया पर इसकी कई क्लिप्स वायरल हो रही हैं।
इन क्लिप्स में सुमित अवस्थी मुख्यधारा मीडिया की आलोचना पर अपनी राय साफगोई से व्यक्त करते दिखाई देते हैं। लेकिन जो क्लिप्स वायरल हो रही हैं, वे महज इस बातचीत का एक छोटा सा हिस्सा हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इन कुछ सेकंड की क्लिप्स के आधार पर पूरी बातचीत का मूल्यांकन करना उचित है?
जिन लोगों ने पूरा वीडियो देखा है, उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर चल रही बहस और वायरल हिस्सों को देखने से स्पष्ट है कि वीडियो की कुछ क्लिप्स को काटने के बाद उन्हें वायरल कर एक खास नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है। सुमित अवस्थी का पूरा इंटरव्यू करीब एक घंटे से अधिक का है, जिसमें वह मीडिया की संरचना, पत्रकारों की सीमाएं और सत्ता प्रतिष्ठानों की अपेक्षाओं को लेकर बेहद ईमानदारी से बात करते हैं। लेकिन इन बातों को बाहर निकालने के बजाय, केवल उन अंशों को हाईलाइट किया जा रहा है जो सनसनीखेज प्रतीत होते हैं।
सुमित अवस्थी ने ये इंटरव्यू अपनी पहली किताब ‘Unfinished- The end of Kejriwal era?’ के प्रमोशन के लिए जाने माने सोशल मीडिया इन्फ्लुंसर भानु पाठक को दिया था। भानु पाठक को पिछले साल मोदी सरकार ने बेस्ट सोशल मीडिया इन्फलुंएसर का अवॉर्ड भी दिया था।
दिल्ली में केजरीवाल की पार्टी क्यों चुनाव हारी? आम आदमी पार्टी से क्यों दिल्ली का वोटर दूर हो गया? क्या अब केजरीवाल की पार्टी फिर से वापसी कर पाएगी? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश सुमित अवस्थी अपनी इस किताब में कर रहे हैं। Invincible Publisher ने इसे छापा है और इस किताब में दस साल की दिल्ली सरकार के प्रशासनिक कामकाज और उन पर लगे आरोपों का पूरा लेखा-जोखा है!
इस पॉडकास्ट में सुमित अवस्थी ने विभिन्न राजनेताओं के साथ अपने लंबे करियर के दौरान जो मुलाकातें हुई हैं, उस पर भी रोशनी डाली है। जैसे सुमित अवस्थी ने बताया है कि कैसे तमाम राजनेता अलग-अलग अंदाज में संवाद करते हैं। उमर और फारूक अब्दुल्ला को उन्होंने चुनौतीपूर्ण लेकिन विद्वान बताया, वहीं अखिलेश यादव को वर्तमान में मीडिया को लेकर काफी असहज और आक्रामक बताया। उनके मुताबिक कुछ नेता इंटरव्यू की शुरुआत में ही पत्रकार को दबाने की कोशिश करते हैं, जिससे निष्पक्ष बातचीत मुश्किल हो जाती है।
सुमित अवस्थी ने अमित शाह को ‘फुल ऑफ डेटा’ बताया जो हर सवाल का सहजता से सामना करते हैं, जबकि नरेंद्र मोदी की संवाद शैली को उन्होंने ‘कम बोलने और ज्यादा सुनने’ वाला बताया। उन्होंने मोदी की जनता की नब्ज पहचानने की क्षमता की सराहना की। मोदी की संवाद शैली को उन्होंने उनके पहले के सभी प्रधानमंत्रियों से बिल्कुल इतर बताई और उसकी वजह शायद सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को बताया है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज की राजनीति में वैचारिक टकराव से इतर व्यक्तिगत समीकरण कहीं ज्यादा प्रभावशाली होते हैं। संसद में तीखी बहस के बाद तमाम नेता निजी आयोजनों में एक-दूसरे से हंसी-मजाक करते देखे जाते हैं। ‘ये करियर पॉलिटिशियन हैं, क्रांति के लिए नहीं आए’, इस कथन में सुमित अवस्थी ने राजनीतिक यथार्थ को बिना लाग-लपेट के सामने रखा।
सुमित अवस्थी ने अपने करियर के व्यक्तिगत अनुभवों का भी जिक्र किया है। गुजरात दंगे, IC 814 का अपहरण, संसद पर हुआ आतंकी हमला, मुरली मनोहर जोशी के साथ हुआ उनका विस्फोटक इंटरव्यू जैसे तमाम किस्से सुनाए हैं और ये बताया है कि किस तरह से पत्रकारों का जीवन बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है।
इसके साथ ही उन्होंने मीडिया और सत्ता के बीच चलने वाले व्यावसायिक समीकरणों और पत्रकारों की व्यावसायिक सीमाओं पर भी खुलकर बात की, जो इस इंटरव्यू को एक संतुलित, अनुभवजन्य और आत्मविश्लेषी दस्तावेज बनाता है।
इस विवाद के पीछे एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या किसी पत्रकार द्वारा व्यवस्था की वास्तविकताओं को उजागर करना, उनकी छवि के लिए सकारात्मक साबित होगा या यह उन्हें निशाने पर ले आएगा? सुमित अवस्थी ने किसी विशेष दल या नेता पर सीधा हमला नहीं किया, बल्कि मीडिया संस्थानों की सरकारी विज्ञापनों पर निर्भरता और पत्रकारों की व्यावसायिक मजबूरियों की बात कही। और वो ये बात कहते हुए साफ करते हैं कि वो सरकारें केंद्र की हों या फिर राज्यों की हर संस्था विज्ञापन देने के बहाने मीडिया हाउस पर नियंत्रण रखना चाहती हैं।
सुमित अवस्थी इस संकट से निपटने का सुझाव देते भी इस इंटरव्यू में नजर आते हैं कि मीडिया हाउसेज को विज्ञापनों के नियंत्रण से बाहर निकालने के लिए दर्शक को भी अब आगे आना चाहिए और उन्हें सब्सक्रिप्शन बेस्ड मॉडल को अपनना चाहिए। सुमित अवस्थी का इस पॉडकास्ट में कहना है, ‘आप अपनी पसंद के न्यूज चैनल को देखने के मासिक या वार्षिक फीस दीजिए। इससे चैनलों और अखबारों की जवाबदेही दर्शकों के प्रति रहेगी, न कि किसी भी सरकार या संस्था के।’ यही बात आज के दौर में चर्चा और विवाद का विषय बन गई है।
दरअसल, यह पूरा मामला पत्रकारिता और उसके भीतर की जटिलताओं को लेकर एक बहस का अवसर देता है। सच्चाई यह है कि मीडिया संस्थानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की मांग जितनी जरूरी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी। सुमित अवस्थी ने बस इसी कठोर सच्चाई को शब्द दिए हैं। उनकी इसी साफगोई को भी राजनीतिक रंग देने की कोशिश कुछ पार्टियों से जुड़े ट्विटर हैंडल कर रहे हैं। ऐसे ट्विटर हैंडल क्लिप्स या रील काटछांट और एडिटिंग करके वायरल बना रहे हैं। जानकारों का मानना है कि ये इसलिये भी हो रहा है कि बिहार में चुनावी माहौल अब गरमा गया है।
ऐसे में यह जरूरी है कि दर्शक सिर्फ वायरल क्लिप्स नहीं, पूरी बातचीत देखें। क्योंकि आधी-अधूरी तस्वीर अक्सर भ्रम पैदा करती है, न कि समझ! सुमित अवस्थी की किताब “Unfinished- The End of Kejriwal Era?” एमेजॉन पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है! आप यहां क्लिक करके इसे ऑर्डर कर सकते हैं।
(यह लेखक के निजी विचार हैं)
इस पूरे पॉडकास्ट को आप यहां देख सकते हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा है कि 10 मई को पाकिस्तान ने भारत के सिस्टम को जाम कर दिया था।
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Samachar4media Bureau
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा है कि 10 मई को पाकिस्तान ने भारत के सिस्टम को जाम कर दिया था।
लेकिन सरकार की फैक्ट चेक यूनिट PIB Fact Check ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया है। PIB के मुताबिक, यह वीडियो असली नहीं बल्कि AI की मदद से बनाया गया डीपफेक है, जिसे लोगों को गुमराह करने के लिए फैलाया जा रहा है।
PIB ने साफ किया है कि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। वायरल वीडियो को एडिट करके गलत तरीके से पेश किया गया है। फैक्ट चेक में यह भी बताया गया है कि इस वीडियो का असली और बिना एडिट किया गया वर्जन मौजूद है, जिसे देखकर सच्चाई समझी जा सकती है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के भ्रामक वीडियो पर भरोसा न करें और किसी भी जानकारी को शेयर करने से पहले उसकी जांच जरूर करें। आजकल AI और डीपफेक तकनीक के जरिए इस तरह के फर्जी वीडियो बनाना आसान हो गया है, इसलिए सोशल मीडिया पर सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
?DEEPFAKE VIDEO ALERT
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) May 6, 2026
Pakistani propaganda accounts are circulating a digitally altered video of Defence Secretary Rajesh Kumar Singh making false claims that Pakistan jammed India's systems on 10 May.#PIBFactCheck:
❌ Beware! This is an AI-generated deepfake video being… pic.twitter.com/35cf5NSq2l
बॉलीवुड एक्ट्रेस नोरा फतेही का गाना ‘सरके चुनर तेरी सरके’ रिलीज होते ही विवादों में घिर गया।
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Samachar4media Bureau
बॉलीवुड एक्ट्रेस नोरा फतेही का गाना ‘सरके चुनर तेरी सरके’ रिलीज होते ही विवादों में घिर गया। यह गाना फिल्म KD: The Devil का हिस्सा है, लेकिन रिलीज के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर जमकर विरोध शुरू हो गया।
गाने के सामने आते ही लोगों ने इसके लिरिक्स और डांस स्टेप्स को लेकर आपत्ति जताई। कई यूजर्स ने इसे “अश्लील” और “डबल मीनिंग” वाला बताया और कहा कि इस तरह के गाने समाज पर गलत असर डालते हैं, खासकर बच्चों और युवाओं पर।
विवाद बढ़ने के बाद मामला सोशल मीडिया से निकलकर आधिकारिक स्तर तक पहुंच गया। इस गाने के खिलाफ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें गाने पर रोक लगाने की मांग की गई। शिकायत में कहा गया कि गाने का कंटेंट सार्वजनिक मर्यादा के खिलाफ है।
इसके बाद मामला और गंभीर हो गया और कानूनी कार्रवाई की दिशा में बढ़ा। गाने को लेकर वकील विनीत जिंदल ओर से दिल्ली पुलिस, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन में शिकायत दर्ज कराई और इसे बैन करने की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गाने के बोल और सीन दोनों ही अश्लील और हानिकारक हैं।
बढ़ते विवाद को देखते हुए National Human Rights Commission of India (NHRC) ने भी इस मामले में नोटिस जारी किया। आयोग ने गाने के कंटेंट पर आपत्ति जताते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और कहा कि इस तरह का कंटेंट समाज में गलत संदेश दे सकता है।
लगातार बढ़ते विरोध और शिकायतों के बाद आखिरकार गाने पर बड़ा एक्शन लिया गया। ‘सरके चुनर’ गाने को YouTube और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया। इसे फिल्म के प्रमोशन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि मनोरंजन के नाम पर किस हद तक कंटेंट दिखाया जाना चाहिए और क्या ऐसे मामलों में सख्त नियमों की जरूरत है या फिर इसे अभिव्यक्ति की आजादी के तहत देखा जाना चाहिए।
ईरान में रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब सरकारी टीवी ने सुबह-सुबह यह घोषणा कर दी कि देश के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल के हमले में मौत हो गई है।
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ईरान में रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब सरकारी टीवी ने सुबह-सुबह यह घोषणा कर दी कि देश के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल के हमले में मौत हो गई है। 36 साल तक देश की कमान संभालने वाले खामेनेई की मौत की खबर सुनते ही पूरे देश में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
सरकारी टीवी पर यह खबर बेहद भावुक माहौल में सुनाई गई। एंकर की आवाज कांप रही थी और वह मुश्किल से खुद को संभाल पा रहे थे। कुछ ही घंटों में देश के कई हिस्सों से तस्वीरें और वीडियो सामने आने लगे। कहीं लोग सड़कों पर उतरकर मातम मना रहे थे, तो कहीं खुलेआम जश्न भी मनाया जा रहा था।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस खबर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ऑस्ट्रेलिया के चैनल Sky News Australia की एंकर रीता पनहाई (Rita Panahi) ने लाइव शो के दौरान खामेनेई को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी की। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने उनके बयान का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे विवादित और आपत्तिजनक बताया।
WATCH ?
— Open Source Intel (@Osint613) March 1, 2026
Sky News Australia anchor, live on-air, in Persian:
"A message to the late Supreme Leader: You son of a b*tch, burn in Hell!"
Wild times pic.twitter.com/GnT3DE4PnH
सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो में ईरान के अलग-अलग शहरों में जश्न के दृश्य दिखे। रॉयटर्स द्वारा देखी गई फुटेज के मुताबिक इलाम प्रांत के देहलोरान में लोगों को एक प्रतिमा गिराते हुए देखा गया। तेहरान के पास कराज शहर में कुछ लोग सड़कों पर नाचते दिखे। खुज़ेस्तान प्रांत के इज़ेह शहर से भी ऐसे ही जश्न की खबरें आईं।
दक्षिणी कस्बे गल्लेह दार में 1979 की इस्लामिक क्रांति के नेता Ayatollah Ruhollah Khomeini की याद में बने एक स्मारक को भी गिराए जाने का वीडियो सामने आया।
दूसरी तरफ राजधानी तेहरान में गम का माहौल था। बड़ी संख्या में लोग काले कपड़े पहनकर एक सार्वजनिक चौक पर इकट्ठा हुए। कई लोग रोते-बिलखते और एक-दूसरे को गले लगाते दिखे। सरकारी चैनल Press TV पर भी कई लोग फूट-फूट कर रोते नजर आए। एक एंकर तो खबर पढ़ते-पढ़ते ही भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को चेतावनी देते हुए कहा कि “इसका बदला जल्द लिया जाएगा।”
तेहरान में हुए एक शोक सभा के दौरान कुछ लोगों का दुख गुस्से में बदलता दिखा। एक शख्स ने कहा कि इस खबर ने उसके दिल में इजरायल और अमेरिका के लिए नफरत भर दी है और नेता के खून का बदला लिया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, खामेनेई की मौत की खबर ने ईरान को दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखाया — एक तरफ मातम और गुस्सा, तो दूसरी तरफ जश्न और खुली बगावत के दृश्य। देश और दुनिया की नजरें अब इस घटनाक्रम के अगले कदम पर टिकी हैं।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब मलिक का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला के नाम से एक बयान चलाया गया।
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आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। काफी उठापटक और बयानबाजी के बाद पाकिस्तान सरकार ने भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलने के अपने फैसले को वापस ले लिया। 15 फरवरी को होने वाले इस मुकाबले को लेकर पहले पाकिस्तान ने बहिष्कार का ऐलान कर दिया था, लेकिन अब उसने यू-टर्न ले लिया है।
दरअसल, बांग्लादेश के टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा था कि टीम वर्ल्ड कप में खेलेगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला सरकार करेगी। इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने साफ किया कि टीम वर्ल्ड कप तो खेलेगी, लेकिन भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगी। इस ऐलान के बाद क्रिकेट जगत में हलचल मच गई। खबरें आने लगीं कि अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार करता है तो आईसीसी उसके खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है। ब्रॉडकास्टर की ओर से भी कानूनी कार्रवाई की बात सामने आई।
बताया गया कि इस पूरे मामले में आईसीसी ने बैकचैनल बातचीत शुरू की। भारत-पाकिस्तान मुकाबला रद्द न हो, इसके लिए कई स्तर पर बातचीत चली। आखिरकार चारों ओर से बढ़ते दबाव के बीच पाकिस्तान ने अपना फैसला बदल दिया और मैच खेलने पर सहमति दे दी।
इस बीच एक नया विवाद भी सामने आया। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब मलिक का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला के नाम से एक बयान चलाया गया। उस वीडियो में दावा किया गया कि बीसीसीआई के अनुरोध पर आईसीसी ने पाकिस्तान से बात की और उसे भारत के खिलाफ खेलने के लिए मनाया। हालांकि बाद में साफ हुआ कि यह बयान असली नहीं था।
राजीव शुक्ला ने खुद सामने आकर कहा कि उनके नाम से चलाया गया वीडियो एआई की मदद से छेड़छाड़ कर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ऑडियो से छेड़छाड़ की गई है और जो बातें दिखाई जा रही हैं, वे उन्होंने कभी नहीं कही। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे भ्रामक वीडियो पर भरोसा न करें और जहां भी दिखें, उन्हें रिपोर्ट करें।
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद के दौरान बीसीसीआई का रुख साफ था कि वह आईसीसी के फैसले के मुताबिक ही आगे बढ़ेगा। पाकिस्तान के यू-टर्न के बाद राजीव शुक्ला ने कहा था कि आईसीसी की पहल पर हुई बातचीत का सकारात्मक नतीजा निकला है और यह क्रिकेट के हित में लिया गया फैसला है। उनके मुताबिक यह सभी पक्षों के लिए बेहतर स्थिति है।
आखिरकार पाकिस्तान सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि बहुपक्षीय बातचीत और मित्र देशों के अनुरोध के बाद उसने अपनी राष्ट्रीय टीम को 15 फरवरी 2026 को निर्धारित मैच खेलने की अनुमति दे दी है। सरकार ने कहा कि यह फैसला क्रिकेट की भावना को बनाए रखने और खेल की निरंतरता के समर्थन में लिया गया है।
कुल मिलाकर, काफी बयानबाजी और विवाद के बाद अब भारत-पाकिस्तान का मुकाबला तय समय पर होने का रास्ता साफ हो गया है।
बीएसई ने बताया है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर एक पुराना फर्जी डीपफेक वीडियो फिर से वायरल हो रहा है
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Vikas Saxena
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। बीएसई ने बताया है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर एक पुराना फर्जी डीपफेक वीडियो फिर से वायरल हो रहा है, जिसमें बीएसई के मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ सुंदररमण राममूर्ति का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है।
इस वीडियो में सुंदररमण राममूर्ति को शेयर बाजार में निवेश की सलाह देते हुए दिखाया गया है, जिसे एक्सचेंज ने पूरी तरह झूठा, अनधिकृत और धोखाधड़ीपूर्ण बताया है।
बीएसई के मुताबिक, इस वीडियो में झूठे दावे किए जा रहे हैं और शेयर बाजार में निवेश से जुड़े टिप्स देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ खास शेयरों में निवेश करने से बहुत कम समय में कई गुना मुनाफा मिल सकता है। इसके साथ ही लोगों को वॉट्सएप या टेलीग्राम के प्राइवेट ग्रुप्स से जुड़ने के लिए भी उकसाया जा रहा है, जहां तथाकथित “एक्सक्लूसिव” टिप्स देने की बात कही जा रही है।
बीएसई ने साफ किया है कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है। न तो सुंदररमण राममूर्ति और न ही बीएसई का कोई अधिकारी कभी भी शेयर बाजार के टिप्स देता है, न ही किसी तरह के निवेश की सलाह देता है और न ही ऐसे किसी वॉट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप को चलाता है।
स्टॉक एक्सचेंज ने यह भी कहा है कि ऐसे फर्जी और भ्रामक वीडियो समय-समय पर अलग-अलग रूप में फिर से सामने आ सकते हैं। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे किसी भी कंटेंट पर भरोसा न करें, उसे आगे फॉरवर्ड न करें और न ही उससे जुड़ें।
बीएसई ने कहा है कि सही और भरोसेमंद जानकारी के लिए केवल बीएसई के आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स और सेबी से रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज पर ही भरोसा करें। साथ ही, इस भ्रामक कंटेंट को हटवाने और इसके पीछे मौजूद लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
बीएसई ने निवेशकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और डीपफेक जैसे ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार न बनें।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर अब्दुल रहीम राठेर ने शुक्रवार को कहा कि सोशल मीडिया पर एक विधायक का वीडियो अपलोड करने वाले पत्रकार के खिलाफ 'उचित कार्रवाई' की जाएगी।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म्स के गलत इस्तेमाल का मुद्दा छा गया। कई विधायकों ने कहा कि कुछ पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर गलत जानकारी फैलाकर जनप्रतिनिधियों की छवि खराब कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की। स्पीकर अब्दुल रहीम राठेर ने भरोसा दिलाया कि सदन और विधायकों को बदनाम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
मामला तब उठा जब नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कर्नाह विधायक जावेद मिरचल ने विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही एक न्यूज पोर्टल के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने बताया कि गुरुवार को जब वे अपने मोबाइल पर कुछ देख रहे थे, तब एक पत्रकार ने उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, यह कहते हुए कि वे सदन के दौरान "रील्स देख रहे थे" और समय बर्बाद कर रहे हैं।
मिरचल ने कहा, “मैं डॉक्टरों से जुड़े सवालों की तैयारी कर रहा था और कुछ सेकंड के लिए मोबाइल खोला था। उसी वक्त का वीडियो सोशल मीडिया पर गलत दावे के साथ अपलोड कर दिया गया।” उन्होंने कहा कि वीडियो वायरल होने के बाद उनके क्षेत्र के लोग लगातार फोन कर रहे हैं और वह रातभर सो नहीं पाए।
इस पर गुरेज से एनसी विधायक नजीर अहमद खान गुरेजी ने कहा कि वे इस न्यूज पोर्टल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएंगे। उन्होंने बताया कि मिरचल वास्तव में विधानसभा सचिवालय से आए आधिकारिक दस्तावेज देख रहे थे।
स्पीकर अब्दुल रहीम राठेर ने कहा कि मामले की जांच विधानसभा सचिवालय के सचिव करेंगे और संबंधित पत्रकार के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे।
वहीं उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भी सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गलत और अपमानजनक सामग्री पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू की एक तस्वीर से जुड़े मीम्स का उदाहरण देते हुए कहा, “कुछ पोर्टल्स ने मंत्री जी के साथ बातचीत के दौरान हमारे बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया। हम सभी इज्जतदार विधायक हैं, लेकिन गलत रिपोर्टिंग करने वालों को कार्रवाई पूरी होने तक कवरेज से रोका जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि सकीना इट्टू उनकी राखी बहन हैं, और अगर न भी होतीं, तो भी ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट्ट ने भी मीडिया की भूमिका पर चिंता जताते हुए कहा कि आजकल जिसके पास मोबाइल और माइक्रोफोन है, वह खुद को पत्रकार बताने लगा है। उन्होंने सूचना विभाग से अनुरोध किया कि मीडिया को मान्यता देने की प्रक्रिया सख्त की जाए, ताकि गैर-रजिस्टर्ड और गैर-जिम्मेदार मीडिया पोर्टल्स पर नियंत्रण रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर में ऐसे मीडिया प्लेटफॉर्म्स की संख्या तेजी से बढ़ी है जो न तो किसी नीति के तहत रजिस्टर्ड हैं और न ही किसी नियामक के अधीन। इनमें से ज्यादातर फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं।
साइबर क्राइम की डरावनी दुनिया का एक चौंकाने वाला अनुभव सामने आया है। हाल ही में एक कुख्यात रैनसमवेयर गैंग ने बीबीसी के साइबर रिपोर्टर जो टिडी को संपर्क किया और उन्हें एक बड़ा ऑफर दिया।
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Samachar4media Bureau
साइबर क्राइम की डरावनी दुनिया का एक चौंकाने वाला अनुभव सामने आया है। हाल ही में एक कुख्यात रैनसमवेयर गैंग ने बीबीसी के साइबर रिपोर्टर जो टिडी को संपर्क किया और उन्हें एक बड़ा ऑफर दिया।
जो टिडी, जो बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए डिजिटल खतरों को कवर करते हैं, को जुलाई में एक हैकर का संदेश मिला, जिसमें कहा गया कि यदि वह अपने लैपटॉप के जरिए साइबर अपराधियों को बीबीसी सिस्टम तक पहुंच देंगे, तो उन्हें एक बड़ी रकम का हिस्सा मिलेगा।
संपर्क एनक्रिप्टेड ऐप Signal के जरिए आया। हैकर ने शुरुआत में "Syndicate" नाम का इस्तेमाल किया और बाद में अपना नाम बदलकर "Syn" कर लिया। उन्होंने कहा, “यदि आप इच्छुक हैं, तो आप हमें अपने पीसी तक पहुंच देंगे और किसी भी रैनसम भुगतान का 15% हम आपको देंगे।”
इससे अपराधियों को संवेदनशील डेटा चुराने या मैलिशियस सॉफ्टवेयर डालने का मौका मिल जाता और वे ब्रॉडकास्टर को बिटकॉइन में फिरौती के लिए बंधक बना सकते थे।
जो टिडी ने, एक अनोखा मौका समझते हुए बीबीसी एडिटर्स से सलाह लेने के बाद सतर्कता से बातचीत शुरू की। उन्होंने संभावित इनसाइडर बनकर Syn के इरादों की जांच की। बाद में Syn ने अपना ऑफर बढ़ा दिया। Medusa रैनसमवेयर ग्रुप से जुड़ा होने का दावा करते हुए हैकर ने कहा कि उन्हें अंतिम रैनसम का 25% मिलेगा, जो संभावित रूप से दसियों मिलियन डॉलर हो सकता था।
हैकर ने कहा, “हमें पता नहीं बीबीसी आपको कितना देता है, पर मान लो कि हम अंतिम नेगोशिएशन का 25% तुम्हें देंगे जब हम बीबीसी की कुल आमदनी का 1% निकालते हैं। तुम्हें फिर कभी काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
विश्वास बनाने के लिए, Syn ने Medusa के डार्कनेट साइट का लिंक साझा किया और जो टिडी को उनके सुरक्षित Tox चैट में आमंत्रित किया, जो साइबर अपराधियों में लोकप्रिय है। उन्होंने 0.5 बिटकॉइन (लगभग $55,000) का “ट्रस्ट पेमेंट” भी ऑफर किया, जो लॉगिन डिटेल देने के बाद और बढ़ सकता था।
गौरतलब है कि Medusa एक रैनसमवेयर एज अ सर्विस (RaaS) का वैरिएंट है। यह साइबर अपराध का बिजनेस मॉडल है, जो दुनिया भर में हैकिंग करने के लिए अफिलिएट्स को प्लेटफॉर्म देती है। अमेरिकी साइबर सुरक्षा अलर्ट के अनुसार, माना जाता है कि यह समूह रूस या उसके सहयोगी देशों से संचालित होता है और चार साल में 300 से अधिक शिकार कर चुका है।
वे रूसी भाषी देशों से बचते हैं और डार्क वेब फोरम्स पर सक्रिय रहते हैं। Syn ने अपने पहले के सफल हमलों की कहानियां साझा कीं, जैसे कि एक यूके हेल्थकेयर कंपनी और एक अमेरिकी इमरजेंसी सर्विस प्रोवाइडर में अंदर वालों के साथ सौदे।
Syn ने कहा, “तुम हैरान रह जाओगे कि कितने कर्मचारी हमें एक्सेस देंगे।”
इस बीच, Syn अधीर हो गया और बीबीसी के आईटी सेटअप के बारे में लगातार सवाल भेजने लगा और कोड भेजा जिसे जो टिडी के लैपटॉप पर चलाना था, जिसे उन्होंने समझदारी से नजरअंदाज किया।
Syn ने दबाव डाला, “तुम इसे कब करोगे? मुझमें धैर्य नहीं है” और उन्होंने बहामास में समुद्र किनारे रहने का लालच दिया।
सोमवार की मध्यरात्रि तक की समयसीमा तय की गई। जब हैकर अधीर हो गया, तो रिपोर्टर के फोन पर बीबीसी की सुरक्षा लॉगिन ऐप से लगातार टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन नोटिफिकेशन आने लगे। यह MFA बमबारी कहलाती है, जो हर मिनट स्क्रीन पर पॉप-अप भेजती है। यह तकनीक, 2022 के Uber हैक में भी इस्तेमाल हुई थी, और इसका उद्देश्य पीड़ित को लॉगिन स्वीकार करने के लिए धोखा देना है, जिससे अनधिकृत पहुंच मिल सकती है।
उन्होंने तुरंत बीबीसी की सूचना सुरक्षा टीम से संपर्क किया। सुरक्षा के लिए, उन्हें बीबीसी के सभी सिस्टम्स से डिस्कनेक्ट कर दिया गया, जिसमें ईमेल, इंट्रानेट और इंटरनल टूल्स शामिल थे।
बाद में शाम को, हैकर्स ने अपेक्षाकृत शांत संदेश भेजकर असुविधा के लिए माफी मांगी और कहा कि वे सिर्फ बीबीसी की लॉगिन पेज का टेस्ट कर रहे थे।
जो टिडी ने लॉग आउट होने पर अपनी निराशा जताई, लेकिन Syn ने ऑफर दोहराया। जब उन्होंने जवाब नहीं दिया, तो हैकर्स ने अपना अकाउंट डिलीट कर दिया और गायब हो गए। अंततः उन्हें बीबीसी सिस्टम्स में पुनर्स्थापित किया गया और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए।
यह चौंकाने वाला मामला संगठनों की साइबर सुरक्षा की कमजोरी को उजागर करता है, भले ही वह बीबीसी जैसी प्रतिष्ठित संस्था ही क्यों न हो।
यह अप्रत्याशित घटना तब घटी, जब क्लारा नेरी सड़क किनारे रिपोर्टिंग के लिए कैमरे के सामने खड़ी थीं और कुछ नोट्स अपने फोन पर देख रही थीं।
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पत्रकारिता अक्सर जोखिम और अनिश्चितताओं से भरी होती है, लेकिन ब्राजील की एक महिला रिपोर्टर के साथ हुआ ताजा वाकया दिखाता है कि कभी-कभी खतरा उतनी ही तेजी से आता है, जितनी तेजी से कोई न्यूज ब्रेक होती है। ब्राजील के शहर रियो डी जनेरियो में Band Rio चैनल की पत्रकार क्लारा नेरी जब एक रिपोर्ट के लिए लाइव जाने को तैयार हो रही थीं, तभी अचानक एक झपटमार उनके पास आया और फोन छीनने की कोशिश की। सौभाग्य से वह मोबाइल लेकर भाग नहीं सका, लेकिन इस अप्रत्याशित घटना ने सुरक्षा को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
यह अप्रत्याशित घटना तब घटी, जब क्लारा नेरी सड़क किनारे रिपोर्टिंग के लिए कैमरे के सामने खड़ी थीं और कुछ नोट्स अपने फोन पर देख रही थीं। इसी बीच एक व्यक्ति बाइक पर वहां आया और तेजी से उनका मोबाइल छीनने की कोशिश की। हालांकि, वह फोन पर क्लारा की मजबूत पकड़ की वजह से उसे पूरी तरह लेकर भाग नहीं सका और फोन सड़क पर गिर गया। क्लारा ने तुरंत मोबाइल उठा लिया और इस अप्रत्याशित हमले से बाल-बाल बच गईं।
पूरी घटना मौके पर लगे कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। बाद में क्लारा ने इसका वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया। वीडियो में बाइक सवार का चेहरा साफ नजर आ रहा है। पोस्ट में उन्होंने इस अनुभव को “डरावना लेकिन शुक्र है, मैं सुरक्षित हूं” बताया।
उन्होंने ब्राजील की सिविल और मिलिट्री पुलिस का आभार जताते हुए लोगों से अपील की कि झपटमार की पहचान में मदद करें। उन्होंने लिखा, “उसका चेहरा सबने देख लिया है, अब उसे छुपने नहीं देना है।”
Band Rio की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने अपनी बाइक की नंबर प्लेट को कार्डबोर्ड से ढक रखा था ताकि वह पहचाना न जा सके। हालांकि, पास के एक सीसीटीवी कैमरे में उसका चेहरा कैद हो गया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की 30 जुलाई, 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश जारी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि वह जल्द ही गिरफ्त में आ जाएगा।
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12 जून की सुबह मिड-डे अखबार में छपे एक विज्ञापन ने कुछ ही घंटों बाद एक भयानक हवाई हादसे के चलते ऐसी सनसनी फैलाई, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
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12 जून की सुबह मिड-डे अखबार में छपे एक विज्ञापन ने कुछ ही घंटों बाद एक भयानक हवाई हादसे के चलते ऐसी सनसनी फैलाई, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। अखबार के पहले पन्ने पर छपे इस विज्ञापन में एक एयर इंडिया के विमान की तस्वीर थी, जो एक इमारत से निकलती दिखाई गई थी। इसी दिन दोपहर में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद से लंदन रवाना होने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई, जबकि सिर्फ एक व्यक्ति बच पाया।
यह विज्ञापन किडजेनिया की ओर से प्रकाशित किया गया था, जो बच्चों के लिए बना एक थीम पार्क है जहां वे पायलट, केबिन क्रू जैसी भूमिकाएं निभाकर सीखते हैं। विज्ञापन में एक कार्टून शहर और उसमें से निकलता एयर इंडिया ब्रैंडेड विमान दिखाया गया था। यह वही डिजाइन था जो किडजेनिया के एविएशन एकैडमी में लंबे समय से उपयोग में है।
किडजेनिया ने इस विज्ञापन के लिए एयर इंडिया के साथ साझेदारी की थी। पिछले साल जुलाई में एयर इंडिया ने X (पूर्व ट्विटर) पर कहा था: "Dreams take off here!" — दिल्ली-एनसीआर में किडजेनिया के साथ मिलकर एकैडमी की शुरुआत के वक्त ठीक यही विजुअल पेश किया गया था।
जैसे ही हादसे की खबर सामने आई और लोगों ने विज्ञापन से उसका विजुअल मेल देखा, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने इसे “डरावना संयोग” कहा, तो किसी ने पूछा- “क्या यह कोई इशारा था?” कुछ ने तो इसे “पूर्व चेतावनी” जैसा बताया। एक यूजर ने लिखा, “वही एयरलाइन, वही विजुअल – कितना अजीब संयोग है।” इस ‘भयानक समानता’ ने कई लोगों को गहराई तक झकझोर दिया।
In a striking coincidence, the front page of Gujarat's Mid-Day newspaper, printed hours before a tragic Air India crash, featured a large KidZania advertisement prominently displaying an Air India aircraft.#planecrash #AirIndia #GujaratPlaneCrash pic.twitter.com/FxCudTt72W
— Niilakshii (@warrior_nii) June 13, 2025
The otherwise harmless front-page KidZania ad in Mid-day today depicting the theme park has understandably created a flutter online in view of the Air India plane crash in Ahmedabad. Some say it was prophetic.@mid_day pic.twitter.com/YrabcMaoRB
— VARUN DAS (@das_varun99) June 12, 2025
हादसे के बाद किडजेनिया इंडिया ने NDTV से बातचीत में किडजेनिया ने एयर इंडिया विमान हादसे पर गहरा दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा, “हम इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हैं।”
उन्होंने विज्ञापन को लेकर भी सफाई दी कि, “मिड-डे में प्रकाशित यह विज्ञापन पहले से ही एक समर कैंपेन का हिस्सा था और हादसे से इसका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि विज्ञापन में दिखाया गया प्लेन उनके ‘एविएशन एकेडमी’ कार्यक्रम से जुड़ा है, जो एयर इंडिया के साथ साझेदारी में चलाया जाता है। कंपनी ने कहा कि हमने इस ऐड की आगे की प्रमोशन रोक दी है क्योंकि यह समय संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि इस ऐड की टाइमिंग पूरी तरह से एक इत्तेफाक है।
हालांकि विज्ञापन और हादसे के बीच कोई वास्तविक संबंध नहीं है, लेकिन जिस दिन, जिस विजुअल और जिस विमान ब्रैंड की चर्चा हुई, उसी दिन वही विमान हादसे का शिकार हुआ—यह इतना गहरा संयोग था कि उसने सिर्फ इंटरनेट ही नहीं, बल्कि विमानन से जुड़े हर शख्स को भावनात्मक रूप से हिला कर रख दिया।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिंदगी में कभी-कभी संयोग भी भविष्य की परछाइयों जैसे लगने लगते हैं।
मिशेल ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें उन्होंने बच्चे और व्यक्ति के चेहरे ब्लर कर दिए। उन्होंने लिखा कि मेरे रिपोर्टिंग करियर में यह सबसे परेशान कर देने वाली घटनाओं में से एक है।
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टोरंटो के रॉजर्स सेंटर के बाहर एक लाइव रिपोर्टिंग के दौरान कनाडा की सिटी न्यूज की पत्रकार मिशेल मैकी के साथ एक बेहद आपत्तिजनक घटना हुई। रिपोर्टिंग के दौरान एक बच्चा और एक पुरुष उनके पास से गुजरे और उस दौरान बच्चे ने एक अश्लील टिप्पणी की, जो एक पुराने इंटरनेट मीम से जुड़ी हुई थी।
मिशेल मैकी अपना काम कर रही थीं, उस छोटे लड़के ने जोर से चिल्लाकर कहा 'F–k her right in the p—y'। उसके साथ जो आदमी था, वह इस आपत्तिजनक टिप्पणी पर जोर से हंस पड़ा। मिशेल का चेहरा इस घटना के बाद साफ तौर पर असहज और हैरान नजर आया। यह वही लाइन थी, जो 2014 के दौरान एक वायरल मीम के तौर पर सामने आया था और महिला पत्रकारों को लाइव रिपोर्टिंग के दौरान टारगेट करने के लिए ट्रोल्स द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस मीम को लेकर पहले भी कई बार आलोचना हो चुकी है, क्योंकि यह महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार को बढ़ावा देता है।
मिशेल ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें उन्होंने बच्चे और व्यक्ति के चेहरे ब्लर कर दिए। उन्होंने लिखा, "मेरे रिपोर्टिंग करियर में यह सबसे परेशान कर देने वाली घटनाओं में से एक है। लगभग 8-9 साल का बच्चा यह बात मुझसे कहता है और उसके पिता उसके साथ खड़े होकर हंसते हुए चले जाते हैं।"
उन्होंने आगे लिखा, "मैंने उनके चेहरे छिपाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि बच्चा इसमें शामिल था। लेकिन यह कोई मजाक नहीं है। चाहे यह बात किसी पुरुष से कही जाए या महिला से, यह गलत सोच को आम बनाती है कि महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार करना ठीक है। मुझे लगा था कि यह घटिया ट्रेंड अब खत्म हो चुका है।"
बाद में एक इंटरव्यू में मैकी ने बताया कि उन्होंने उस पिता और बेटे को रोकने की कोशिश की ताकि वे उनकी आंखों में आंखें डालकर वही बात दोहराएं, लेकिन वे केवल हंसकर अंगूठा दिखाते हुए चले गए।
उन्होंने कहा, "मुझे यह बात सबसे ज्यादा तकलीफ देती है कि एक बच्चा, जो अभी सीखने की उम्र में है, उसे यह सिखाया जा रहा है कि महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार मजाक हो सकता है। मैं उस आदमी से बस इतना पूछना चाहती हूं कि क्या तुम यह बात अपनी बेटी, बहन या मां की आंखों में आंखें डालकर कह सकते हो?"
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यह घटना सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई और इस पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने इसे "पुराना मजाक" बताकर हल्के में लिया, तो कुछ ने इसे महिला विरोधी मानसिकता की मिसाल बताया।
एक यूजर ने लिखा, "2025 में भी ऐसे मीम को मजाक समझना शर्मनाक है।" वहीं दूसरे ने कहा, "हम अपने बच्चों को यही सिखा रहे हैं कि महिलाओं के खिलाफ अश्लीलता भी हंसी-मजाक का हिस्सा हो सकती है।"
यह घटना दिखाती है कि इंटरनेट मीम्स और ट्रोलिंग की संस्कृति कैसे असल जिंदगी में असंवेदनशीलता और अशिष्टता को बढ़ावा दे रही है और इसका असर अगली पीढ़ी तक पहुंच रहा है।