‘हिन्दी चैनलों की तरह हिन्दी के अख़बार आपको कूड़ा परोस रहे हैं। पिछले दस सालों में चैनलों की खूब आलोचना हुई है। इसका असर ये हुआ है कि चैनल और भी कूड़ा परोसने लगे हैं।’ अपने ब्लॉग ‘कस्बा’ के जरिए ये कहा वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं:
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समाचार4मीडिया ब्यूरो