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‘मीडिया के लिए कई खट्टे-मीठे अनुभव छोड़कर जा रहा है साल 2022’
वर्ष 2022 मीडिया के लिए मिला-जुला रहा। कुछ खट्टा, कुछ मीठा। बीते साल में मीडिया के प्रसार को लेकर भी उम्मीद जगी है, जिससे रोजगार के कुछ नए अवसर भी खुल रहे हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
विनोद अग्निहोत्री।।
वर्ष 2022 मीडिया के लिए मिला-जुला रहा। कुछ खट्टा, कुछ मीठा। पहले खट्टा कि सरकारों के कोप का शिकार कई पत्रकार मुकदमे और गिरफ्तारी का शिकार हुए और कई अभी भी जेल में हैं। मीडिया और विशाल मीडिया दोनों की पक्षधारिता निष्पक्षता और निरपेक्षता पर इस कदर हावी रही कि पार्टी प्रवक्ता (दोनों तरफ के) भी पीछे छूट गए।
मनमाफिक खबरें दिखाने और दबाने की होड़ में जनता के सवाल और मुद्दे अनदेखे होते रहे। टीवी बहसों का स्तर लगातार गिरता रहा। आपराधिक घटनाओं को भी सांप्रदायिक चश्मे से देखने की होड़ ने समाज में विभाजन को गहरा किया। चुनावी साल में हुए विधानसभा चुनावों के विश्लेषण में भी संतुलित नजरिये की कमी दिखाई दी।
मीडिया और सोशल मीडिया में सरकार के पक्ष और विरोध की खेमेबंदी और बढ़ गई। आजादी के बाद किसी नेता की लंबी पदयात्रा के लिए पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को याद किया जाता है। उन्हें तत्कालीन प्रेस में खूब कवरेज भी मिला था। लेकिन राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को जो खबरों के रंग के लिहाज से एक बहुत बड़ा आयोजन है, मीडिया के बड़े हिस्से में उसकी अनदेखी कई सवालों को जन्म देती है। कुछ मीडिया संस्थानों में एंप्लॉयीज की छंटनी जारी रही।
अब मीठा। कोविड काल ने मीडिया के कामकाज को भी खासा प्रभावित किया था। मीडिया वर्ष 2022 में उससे काफी हद तक उबर आया। तब अखबारों की प्रसार संख्या में जो गिरावट आई, वो इस साल वापस पटरी पर आ गई। अखबारों के डिजिटल संस्करणों का प्रसार बढ़ा। कई नए न्यूज पोर्टल और यूट्यूब चैनल शुरू हुए और लोकप्रिय भी हुए। कई जाने-माने पत्रकारों ने अपने न्यूज पोर्टल और चैनल शुरू किए। सोशल मीडिया के प्रसार ने जनता की संस्थागत मीडिया पर निर्भरता भी कम की है।
एक बड़े उद्योग समूह द्वारा जाने-माने चैनल के अधिग्रहण की बड़ी घटना पर मीडिया बंटा हुआ है। एक हिस्से में इसका स्वागत हो रहा है कि इससे उन तमाम एंप्लॉयीज को राहत मिलेगी जो इस चैनल के आर्थिक संकट से परेशान थे। वहीं, दूसरा हिस्सा इस अधिग्रहण से दुखी है कि दशकों की मेहनत से खड़ा किया गया एक स्वतंत्र मीडिया संस्थान अब एक सरकार समर्थक उद्योग समूह का हिस्सा बन गया। बीते साल में मीडिया के प्रसार को लेकर भी उम्मीद जगी है, जिससे रोजगार के कुछ नए अवसर भी खुल रहे हैं।
(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक ‘अमर उजाला’ में कंसल्टिंग एडिटर हैं।)
टैग्स पत्रकार अमर उजाला मीडिया विनोद अग्निहोत्री सलाहकार संपादक कंसल्टिंग एडिटर वरिष्ठ पत्रकार ईयरएंडर 2022