स्वभाव से मैं कभी भी निराशावादी नहीं रहा। जिंदगी में कई बार आशा और निराशा के दौर आए और चले गए, लेकिन यह साल जिस तरह पत्रकारिता और पत्रकारों को बांटकर जा रहा है, वह अवसाद बढ़ाने वाला है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो