'छियालीस साल की पत्रकारिता में पहली बार मैंने इस तरह की विभाजन रेखा इस बरस देखी'

स्वभाव से मैं कभी भी निराशावादी नहीं रहा। जिंदगी में कई बार आशा और निराशा के दौर आए और चले गए, लेकिन यह साल जिस तरह पत्रकारिता और पत्रकारों को बांटकर जा रहा है, वह अवसाद बढ़ाने वाला है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 19 December, 2022
Last Modified:
Monday, 19 December, 2022
Rajesh Badal


राजेश बादल।। स्वभाव से मैं कभी भी निराशावादी नहीं रहा। जिंदगी में कई बार आशा और निराशा के दौर आए और चले गए, लेकिन यह साल जिस तरह पत्रकारिता और पत्र...
Read More
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए