तात्पर्य यह कि लोकतंत्र की सर्वोच्च पंचायत की गरिमा बनाए रखने के लिए सदन की सभी बैंचों से प्रयास किए गए तभी संसद शान से काम कर पाई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो