भारत में पिछली कुछ जेनरेशन एक विचित्र स्थिति में हैं। संस्कृति की दृष्टि से हो या भाषा की दृष्टि से, न अंग्रेजी के मास्टर बन सके और न हिंदी समझ सके।
by
पूरन डावर