विचारों की स्वतंत्रता का अर्थ कतई मुंहजोरी नहीं हो सकता: पूरन डावर

भारत में पिछली कुछ जेनरेशन एक विचित्र स्थिति में हैं। संस्कृति की दृष्टि से हो या भाषा की दृष्टि से, न अंग्रेजी के मास्टर बन सके और न हिंदी समझ सके।

पूरन डावर by
Published - Friday, 27 August, 2021
Last Modified:
Friday, 27 August, 2021
Puran Dawar


पूरन डावर, चिंतक एवं विश्लेषक।। भारत में पिछली कुछ जेनरेशन एक विचित्र स्थिति में हैं। संस्कृति की दृष्टि से हो या भाषा की दृष्टि से, न अंग्रेजी के...
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