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क्या अक्षय को सम्मान में मिली कनाडा की नागरिकता या फिर उन्होंने खुद ली?
पिछले दिनों पीएम मोदी का नॉन पॉलिटिकल इंटरव्यू कर अक्षय कुमार ने बटोरी थीं काफी सुर्खियां
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
नीरज नैय्यर
वरिष्ठ पत्रकार।।
कभी-कभी आप अच्छे की आस लगाते हैं और बुरा हो जाता है। बॉलिवुड अभिनेता अक्षय कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गैर-राजनीतिक इंटरव्यू लेते वक़्त अक्षय कुमार को लगा होगा कि यह उनके करियर और लोकप्रियता में मील का पत्थर साबित होगा, लेकिन परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत आये। अब अक्षय को अपनी नागरिकता पर उठे सवालों के जवाब देने पड़ रहे हैं। उन्हें लोगों को यह बताना पड़ रहा है कि वो केवल रील लाइफ में ही देशभक्त नहीं हैं, बल्कि रियल लाइफ में भी उनके लिए देश पहले आता है।
अक्षय के लिए राहत की बात यह है कि कुछ ‘बड़े नाम’ उनके साथ खड़े हैं। बड़े नामों का साथ मुश्किल से मिलता है, अक्षय इसके लिए खुद को ‘लकी’ कह सकते हैं। क्योंकि आमिर खान ने जब देश में असहिष्णुता का जिक्र किया था तो उन्हें किसी का साथ नहीं मिला। न स्टारडम उनके काम आया, न ही कुछ और। सोशल मीडिया पर एक ऐसी हवा चली, जिसने ‘सरफ़रोश’ के देशभक्त एसीपी राठौड़ को देशविरोधी बनाकर छोड़ दिया। नतीजतन, कई कंपनियों ने उनसे नाता तोड़ लिया और सरकार को भी इस दिव्यज्ञान की प्राप्ति हुई कि आमिर भारत के ‘अतुल्य गुणों’ का गुणगान करने के लिए अवगुणी हैं।
शायद इसके पीछे आमिर का अक्षय की तरह पत्रकार न बनना मुख्य कारण था। यदि आमिर खान भी पीएम का कोई अ-पॉलिटिकल इंटरव्यू लेने में सक्षम होते तो उन्हें अक्षम करने की कोशिशें परवान नहीं चढ़तीं। ख़ैर, यह बात पुरानी हो चुकी है और आमिर भी अब तक सीख गए होंगे कि दिल की बात को जुबां पर लाना फिल्मों में ही अच्छा लगता है, आम जिंदगी में नहीं।
अक्षय कुमार का तर्क है कि उनका पासपोर्ट भले ही कनाडा का हो, लेकिन दिल हिन्दुस्तानी है। इसलिए उनकी नागरिकता को लेकर बहस बंद होनी चाहिए। चलिए मान भी लें कि अक्षय का दिल हिन्दुस्तानी है, फिर भी यह सवाल तो कायम रहेगा ही कि इस हिन्दुस्तानी दिल ने अभी तक हिन्दुस्तानी पासपोर्ट हासिल क्यों नहीं किया? यदि अक्षय को कनाडा के पासपोर्ट पर यात्रा करने या कनाडावासी कहलाने पर ज्यादा ख़ुशी होती है तो फिर हिन्दुस्तानी दिल में हिन्दुस्तान कहां है?
अक्षय पहले भी कई मर्तबा कह चुके हैं कि फिल्मों से संन्यास लेने के बाद वह कनाडा में बसेंगे तो क्या अब तक जो वह करते आये हैं, उसे छदम देशभक्ति नहीं कहा जाना चाहिए? जब अदनान सामी भारत की नागरिकता पाने के लिए 16 सालों तक मशक्कत कर सकते हैं तो अक्षय के हिन्दुस्तानी दिल में यह इच्छा क्यों नहीं जागी, यह सवाल भी उनसे पूछा जाना चाहिए? अक्षय मानवीय आधार पर हमें देशभक्ति का पाठ पढ़ा सकते हैं या उस पर सवाल उठा सकते हैं। हमें वोट का महत्व समझा सकते हैं, लेकिन नैतिक आधार पर वह ऐसा नहीं कर सकते। यह अधिकार उनके पास कभी था ही नहीं, और न ही उन्होंने इसे प्राप्त करने का प्रयास ही किया। महज दिल को हिन्दुस्तानी कहकर हिन्दुस्तानी नहीं हुआ जा सकता, इसके लिए विधिवत प्रक्रिया का पालन भी करना पड़ता है। अक्षय इस पूरे एपिसोड से दुखी हैं और उन्हें होना भी चाहिए, क्योंकि वह खुद को एक ऐसे रूप में पेश करते रहे, जिसे अपनाने के लिए उन्होंने कभी कुछ नहीं किया।
अक्षय कुमार यदि अच्छे की आस में गैर-राजनीति इंटरव्यू न करते तो शायद देशवासी उनके देशभक्ति के पर्दे को उठाने में इतनी दिलचस्पी भी नहीं दिखाते। पहले भी यह मुद्दा सुर्खियाँ बंटोर चुका है, लेकिन कभी इतना लंबा नहीं खिंचा। यहां तक कि अक्षय के इस झूठ को भी तवज्जो नहीं दी गई कि उन्हें कनाडा की ऑनररी सिटीज़नशिप मिली हुई है। यानी कनाडा ने उन्हें सम्मान में अपने देश की नागरिकता दी है,जबकि ऐसा नहीं है, क्योंकि यदि ऐसा होता तो अक्षय के पास कनाडा का पासपोर्ट नहीं होता। कनाडा की ऑनररी सिटीज़नशिप सिर्फ एक सांकेतिक सम्मान है, इसके साथ कोई विशेष अधिकार नहीं आता। सीधे शब्दों में कहें तो ऑनररी सिटीज़न को न वहां का पासपोर्ट मिलता है और न ही वोट डालने का अधिकार।
इससे तो यही स्पष्ट होता है कि अक्षय कुमार ने खुद कनाडा का पासपोर्ट बनवाया। संभव है कि अक्षय पर आया यह संकट जल्द समाप्त हो जाएगा, क्योंकि उन पर बड़े नामों का हाथ है, लेकिन जो कंपनियां देशभक्त के रूप में अक्षय की छवि को अब तक भुनाती आई हैं, क्या वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगी और क्या उन्हें पुनर्विचार करना चाहिए, यह सबसे बड़ा सवाल है। इसके अलावा यह भी एक सवाल है कि क्या हाथ में तिरंगा थामकर, देश की मिट्टी का हवाला देकर, वह व्यक्ति लोगों को देश में बने टाइल्स (कजरिया) खरीदने के लिए प्रेरित कर सकता है, जो खुद पूरी तरह भारतीय न हो?
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
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