आजतक के मैनेजिंग एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) सईद अंसारी ने समाचार4मीडिया के संपादक पंकज शर्मा के साथ फायरसाइड चैट में पत्रकारिता, जीवन-दर्शन, फिटनेस, सोशल मीडिया को लेकर बातचीत की।
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Vikas Saxena
समाचार4मीडिया की ओर से आयोजित 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में आजतक के मैनेजिंग एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) सईद अंसारी ने समाचार4मीडिया के संपादक पंकज शर्मा के साथ फायरसाइड चैट में पत्रकारिता, जीवन-दर्शन, फिटनेस, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रिश्तों को लेकर खुलकर बातचीत की। बातचीत की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में हुई, लेकिन आगे चलकर कई गंभीर विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
सवाल: आपकी फिटनेस, ऊर्जा और हमेशा मुस्कुराते रहने का राज क्या है?
चर्चा की शुरुआत में पंकज शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कई लोग उनसे यह सवाल पूछ रहे थे कि सईद अंसारी से उनकी फिटनेस, ऊर्जा और हमेशा मुस्कुराते रहने का राज जरूर पूछा जाए। उन्होंने कहा कि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी व्यस्त जिंदगी के बावजूद वे खुद को इतना ऊर्जावान कैसे रखते हैं।
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि उन्हें लोगों से मिलना-जुलना हमेशा अच्छा लगता है। चाहे संस्थान में उनका पद कुछ भी हो, वे आज भी खुद को एक इंटर्न की तरह ही मानते हैं। उनका कहना था कि उन्होंने पहली नौकरी जिस सीखने की भावना के साथ शुरू की थी, वही भावना आज भी कायम है।
सईद अंसारी ने कहा कि आज भी जब वे कैमरे के सामने माइक पकड़ते हैं या किसी मंच से बोलने जाते हैं तो घबराहट महसूस होती है। उन्हें हमेशा डर रहता है कि कहीं कोई गलती न हो जाए, कहीं ऐसा कुछ न कह दें जिससे किसी का मन दुखे या कोई नाराज हो जाए। यही डर और लगातार सीखने की इच्छा उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि वे आज भी खुद को पत्रकारिता का एक विद्यार्थी मानते हैं।
वहीं, अपनी फिटनेस, ऊर्जा और हमेशा मुस्कुराते रहने के राज के सवाल पर सईद अंसारी ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे खूब खाते हैं और भरपेट खाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके खाने में मुख्य रूप से दाल-चावल होता है और वे किसी तरह की डाइटिंग नहीं करते।
उन्होंने कहा कि वे कभी जिम नहीं गए, न ही नियमित वॉक करने या स्टेप्स गिनने जैसी आदतें अपनाईं। उनकी ड्यूटी देर रात तक चलती है। कई बार वे रात 12 बजे, 12:30 बजे या एक बजे ऑफिस से निकलते हैं और करीब डेढ़ बजे घर पहुंचते हैं। इसलिए सुबह जल्दी उठने की बजाय आराम से उठते हैं और सीधे एडिटोरियल मीटिंग की तैयारी में लग जाते हैं।
उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इंसान को खुश रहना चाहिए। वे बेवजह चिंता नहीं करते। उन्होंने हिंदी की कहावत 'चिंता चिता समान' का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन में उनकी चिंता माता-पिता ने की, पढ़ाई के समय शिक्षकों ने की, लेकिन अब वे खुद चिंता करने में विश्वास नहीं रखते।
उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि पढ़ाई में भी वे कभी बहुत अच्छे छात्र नहीं रहे। स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक उनके अंक कभी 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं आए। 40-45 प्रतिशत अंक आ जाते थे तो उन्हें लगता था कि बहुत अच्छा कर लिया। वे हमेशा आखिरी बेंच पर बैठने वाले छात्र रहे और खूब डांट व मार भी खाते थे।
सवाल: जीवन को लेकर आप क्या सोच रखते हैं?
सईद अंसारी ने कहा कि उनका मानना है कि इंसान इस दुनिया में किसी उद्देश्य से आया है। इसलिए यह सोचने की जरूरत नहीं कि सारी उपलब्धियां उसी की वजह से हैं। उन्होंने कहा कि कोई न कोई ऐसी शक्ति जरूर है, जो पूरी दुनिया को चला रही है। इंसान तो सिर्फ इस रंगमंच का एक कलाकार है, जिसे अपना किरदार निभाकर आगे बढ़ जाना है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हो रहा है, वह उसी बड़ी शक्ति की योजना का हिस्सा है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि बेवजह डाइटिंग करने की बजाय अच्छा खाना खाएं। उन्होंने कहा कि आजकल लोग तेल, घी और रोटी तक छोड़ रहे हैं, जबकि शरीर को ताकत की जरूरत होती है। उन्होंने अपने दादा का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वे बचपन में एक रोटी ज्यादा खा लेते थे तो उनके दादा खुश हो जाते थे और कहते थे कि अच्छी खुराक ही अच्छी सेहत की पहचान है।
उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर डॉक्टरों की सलाह भी बदलती रहती है। कभी कहा गया कि घी मत खाइए और अब वही डॉक्टर सीमित मात्रा में घी खाने की सलाह देते हैं। इसलिए उनका मानना है कि संतुलित भोजन करना सबसे बेहतर है।
सवाल: आप सोशल मीडिया से दूरी क्यों बनाए रखते हैं?
पंकज शर्मा ने इसके बाद उनसे पूछा कि लोग अक्सर यह जानना चाहते हैं कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय क्यों नहीं रहते। उन्होंने कहा कि आज लगभग हर पत्रकार के लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन सईद अंसारी ने खुद को सोशल मीडिया से काफी हद तक दूर रखा है। क्या आज के समय में ऐसा करना संभव है और इसकी वजह क्या है?
इस सवाल के जवाब में सईद अंसारी ने कहा कि उनके कई साथी पत्रकारों के 30 से 50 लाख तक फॉलोअर्स हैं। लेकिन अगर रात दो बजे किसी मुश्किल समय में मदद की जरूरत पड़ जाए, तो उन लाखों फॉलोअर्स में से शायद ही कोई साथ खड़ा मिले।
उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी में सिर्फ चार-पांच ऐसे दोस्त हैं जो साल के 365 दिन, 24 घंटे उनके साथ खड़े रहते हैं। वे उनके लिए परिवार जैसे हैं। उनके घर में उनके लिए अलग कमरा तक है। अगर वे कई दिनों तक उनके घर नहीं जाएं तो परिवार वाले खुद फोन कर लेते हैं या उनके लिए खाना भेज देते हैं।
सईद अंसारी ने साफ कहा कि उन्हें वर्चुअल रिश्तों पर भरोसा नहीं है। वे वास्तविक और आत्मीय रिश्तों में विश्वास करते हैं। उनके मुताबिक, जिंदगी में चार-पांच सच्चे दोस्त होना लाखों सोशल मीडिया फॉलोअर्स से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वही लोग मुश्किल समय में आपके साथ खड़े होते हैं, चाहे वे दोस्त हों, पड़ोसी हों या रिश्तेदार।
पंकज शर्मा ने कहा कि सार्वजनिक मंच से इस तरह की बात कहकर सईद अंसारी ने उन लोगों के सवाल का जवाब दे दिया है, जो जानना चाहते थे कि आज के दौर में सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखना क्यों और कैसे संभव है।
सवाल: लगातार बदलती तकनीक के दौर में एक अच्छे पत्रकार की पहचान किन मूल्यों से होती है?
सोशल मीडिया और व्यक्तिगत जीवन पर चर्चा के बाद पंकज शर्मा ने बातचीत को पत्रकारिता के मूल विषय की ओर मोड़ा। उन्होंने सईद अंसारी से पूछा कि उन्होंने पत्रकारिता का लंबा दौर देखा है और इस दौरान तकनीक तथा माध्यम लगातार बदलते रहे हैं। ऐसे में आज एक अच्छे पत्रकार की पहचान किन मूल्यों से तय होती है।
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि वास्तव में सिर्फ माध्यम बदले हैं, पत्रकारिता नहीं बदली है। उनके मुताबिक पत्रकार पहले भी पत्रकार था, आज भी है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के मूल सिद्धांत आज भी वही हैं जो वर्षों पहले थे।
उन्होंने कहा कि एक पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत सच बोलना है। उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी समाज के प्रति जवाबदेह रहना और अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाना है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की कई परिभाषाएं पढ़ाई जाती हैं, लेकिन उनकी अपनी परिभाषा अलग है।
सईद अंसारी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने देश से प्रेम करता है और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है तो वह पत्रकारिता की मूल भावना को समझता है। चाहे वह मुख्यधारा की मीडिया में काम करता हो, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो या किसी दूसरे पेशे में हो, देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना ही पत्रकारिता का आधार है।
उन्होंने कहा कि कैमरे बदल गए, तकनीक बदल गई, AI आ गया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आ गए, लेकिन पत्रकार की जिम्मेदारी नहीं बदली। आज भी उसका पहला कर्तव्य सच बोलना, लोगों का विश्वास बनाए रखना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है।
सवाल: इतने सारे प्लेटफॉर्म आने के बाद मेनस्ट्रीम मीडिया खुद को अलग कैसे बनाए रखे?
इस सवाल पर सईद अंसारी ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया को अलग दिखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उनका कहना था कि मीडिया का उद्देश्य किसी फिल्म की तरह चमक-दमक पैदा करना या खुद को हीरो साबित करना नहीं है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार का काम सिर्फ इतना है कि जहां जो कुछ हो रहा है, उसे सही तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए। हालांकि उन्होंने माना कि आज दर्शकों की अपेक्षाएं पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं। अब लोग सिर्फ खबर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पूरी सच्चाई भी जानना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार आंखों से देखी हुई चीज भी पूरी सच्चाई नहीं होती और कानों से सुनी हुई बात भी अंतिम सच नहीं होती। ऐसे में पत्रकार की जिम्मेदारी सिर्फ घटना बताने तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि उसके पीछे के तथ्य और वास्तविकता को सामने लाना भी उसका दायित्व है।
'न्यूज दिखाइए, व्यूज मत थोपिए'
बातचीत के दौरान सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी गलती तब शुरू होती है, जब न्यूज की जगह व्यूज को प्राथमिकता दी जाने लगती है।
उन्होंने कहा कि जैसे ही पत्रकार अपनी व्यक्तिगत राय या विचार दर्शकों पर थोपने लगता है, उसी क्षण वह एक पक्षकार बन जाता है और जब पत्रकार पक्षकार बन जाता है, तब वह अपने पत्रकारिता धर्म से भटक जाता है।
उनका कहना था कि मीडिया का काम तथ्य रखना है, न कि दर्शकों पर अपनी राय थोपना।
सवाल: सबसे पहले खबर दिखाने की होड़ में सटीकता कैसे बचाई जाए?
पंकज शर्मा ने अगला सवाल पूछा कि आज न्यूजरूम में सबसे पहले खबर देने की होड़ लगी रहती है। सोशल मीडिया पर खबरें पहले ही आ जाती हैं। ऐसे माहौल में सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। संपादकीय स्तर पर इसे कैसे संभाला जाए?
सईद अंसारी ने कहा कि यह चुनौती खासकर टीवी पत्रकारिता में सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सबसे पहले खबर डालने की होड़ में अक्सर बड़ी गलतियां हो जाती हैं और वहां हर जानकारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जरूरत पड़े तो खबर कुछ मिनट या कुछ घंटे बाद दिखाई जाए, लेकिन गलत खबर कभी नहीं दिखाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोग कुछ समय बाद यह भूल जाते हैं कि कौन-सा चैनल खबर सबसे पहले लेकर आया था, लेकिन अगर किसी चैनल या पत्रकार ने एक बार भी गलत खबर चला दी तो लोग उसे लंबे समय तक याद रखते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार उनके दोस्त उन्हें बताते हैं कि जो खबर टीवी पर दिखाई जा रही है, वह तो दो घंटे पहले ही व्हाट्सऐप पर आ चुकी थी। ऐसे में टीवी का मुकाबला सोशल मीडिया की रफ्तार से नहीं, बल्कि अपनी विश्वसनीयता से होना चाहिए।
सईद अंसारी ने कहा कि रिपोर्टर को खबर भेजने से पहले स्वतंत्र रूप से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। उसके बाद यदि प्रशासन या पुलिस भी उसकी पुष्टि कर दे, तभी उसे खबर माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को उतना इंतजार करना चाहिए, क्योंकि यही उनकी पेशेवर जिम्मेदारी है। अगर बिना पुष्टि के खबर दिखाई जाती है, तो यह पत्रकारिता की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसा है।
सवाल: AI पत्रकारों के लिए अवसर है या चुनौती?
पंकज शर्मा ने इसके बाद AI पर सवाल किया और पूछा कि न्यूजरूम में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में क्या यह पत्रकारों के लिए अवसर साबित होगा या संपादकीय स्तर पर नई चुनौतियां पैदा करेगा?
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि AI बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा भी हो सकता है कि भविष्य में वे खुद स्टूडियो में मौजूद न हों और AI उनकी आवाज और चेहरा इस्तेमाल करके बुलेटिन पढ़ रहा हो, जबकि दर्शकों को इसका पता भी न चले।
उन्होंने कहा कि फिलहाल AI में सबसे बड़ी कमी भावनाओं की है। हालांकि भविष्य में AI भाव-भंगिमाएं भी सीख सकता है, लेकिन इंसानी संवेदनाओं की बराबरी करना उसके लिए आसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जब कोई अपना व्यक्ति बिना कुछ कहे भी आपके चेहरे को देखकर पूछ लेता है कि आज आप परेशान क्यों हैं या खुश क्यों हैं, तो वह संवेदनशीलता मशीन में नहीं आ सकती।
सईद अंसारी ने कहा कि AI पत्रकार का अच्छा सहयोगी और मददगार बन सकता है, लेकिन वह पत्रकार की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता। तकनीक इंसान की सहायता कर सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनाएं, अनुभव और भावनात्मक समझ अभी भी पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत हैं।
इसी के साथ बातचीत का अगला दौर शुरू हुआ, जिसमें पंकज शर्मा ने युवा पत्रकारों, नई पीढ़ी, नशे की बढ़ती समस्या और पत्रकारिता के भविष्य को लेकर सईद अंसारी से विस्तार से सवाल पूछे।
सवाल: आज के युवा पत्रकारों की सबसे बड़ी ताकत क्या है और उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है?
AI पर चर्चा के बाद समाचार4मीडिया के संपादक पंकज शर्मा ने सईद अंसारी से पूछा कि वे लंबे समय से न्यूज़रूम में काम कर रहे हैं और लगातार युवाओं के साथ भी काम करते हैं। ऐसे में आज के युवा पत्रकारों की सबसे बड़ी ताकत क्या है और उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत महसूस होती है।
इस सवाल का जवाब देते हुए सईद अंसारी ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन का एक उद्देश्य होता है और उनका अपना उद्देश्य सिर्फ एक है- देश के युवाओं को नशे से दूर रखना।
उन्होंने कहा कि आज नशा बहुत सामान्य बात बनता जा रहा है और यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने फिल्म सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मौजूद कई मीडिया और अन्य संस्थानों के छात्र दिन में खुलेआम सिगरेट पीते हैं और शाम को उसी सिगरेट में चरस और गांजा भरकर उसका सेवन करते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उन्हें बेहद परेशान करती है।
सईद अंसारी ने बताया कि उन्होंने नोएडा में हुक्का संस्कृति के खिलाफ भी लंबे समय तक अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा हुक्का पर प्रतिबंध लगाने के लिए उन्होंने लगातार आवाज उठाई और आज भी उनका सबसे बड़ा प्रयास यही है कि युवाओं को किसी भी तरह के नशे से दूर रखा जाए।
उन्होंने कहा कि पत्रकार तो किसी भी हालत में नशे से दूर रहें, क्योंकि पत्रकार की जिम्मेदारी समाज के प्रति होती है। यदि नई पीढ़ी को सही दिशा नहीं मिली तो भविष्य भी प्रभावित होगा।
'अपने बच्चों पर भरोसा करें, लेकिन आंख बंद करके नहीं'
सईद अंसारी ने कहा कि आजकल आधुनिकता और Gen Z के नाम पर कई ऐसी चीजें सामान्य मानी जाने लगी हैं, जो भविष्य के लिए ठीक नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बच्चों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि आज माता-पिता बच्चों को संस्कार देने में पहले जैसी भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों पर भरोसा जरूर करें, लेकिन आंख मूंदकर नहीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह उनके माता-पिता बचपन में इस बात पर नजर रखते थे कि वे किसके साथ उठते-बैठते हैं, कहां जाते हैं, क्या करते हैं और किन दोस्तों के साथ समय बिताते हैं, उसी तरह आज भी अभिभावकों को अपने बच्चों पर नजर रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज कई माता-पिता अपने बच्चों से यह तक पूछने में संकोच करते हैं कि वे कहां जा रहे हैं या किसके साथ समय बिता रहे हैं। जबकि यही सतर्कता बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से बचा सकती है।
'मोबाइल सबसे बड़ा साथी भी है और सबसे बड़ा दुश्मन भी'
सईद अंसारी ने कहा कि मोबाइल फोन आज जितना उपयोगी है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज स्मार्टफोन में यह देखना आसान है कि कोई व्यक्ति कितना समय मोबाइल पर बिता रहा है।
उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे एक बार अपने बच्चों का स्क्रीन टाइम जरूर देखें। उन्हें पता चलेगा कि 12 घंटे के सक्रिय समय में कई बच्चे पांच से सात घंटे सिर्फ मोबाइल पर ही बिताते हैं। इस वजह से पढ़ने की आदत लगातार खत्म होती जा रही है और यही उन्हें सबसे ज्यादा चिंता में डालता है।
उन्होंने कहा कि आज का युवा अगर हिंदी नहीं जानता तो उसे शर्म नहीं आती। उसे सिर्फ यह लगता है कि अगर वह अच्छी अंग्रेजी बोल लेता है तो वही सबसे बड़ी योग्यता है। जबकि वास्तविक ज्ञान सिर्फ भाषा से नहीं आता, बल्कि पढ़ने और समझने की आदत से आता है।
सवाल: अगर आज आपको युवा पत्रकारों की भर्ती करनी हो तो किन बातों को सबसे ज्यादा महत्व देंगे?
इस सवाल के जवाब में सईद अंसारी ने कहा कि वे युवाओं की आलोचना नहीं कर रहे हैं। उन्होंने माना कि आज की पीढ़ी तकनीक के मामले में बेहद तेज और प्रतिभाशाली है। नई तकनीक को समझने और अपनाने की उनकी क्षमता शानदार है।
लेकिन उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन चीजों का ज्ञान एक पत्रकार के लिए जरूरी है, वही जानकारी युवाओं के पास नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज बहुत से युवाओं को अपने देश के बारे में बुनियादी जानकारी तक नहीं होती। वे इतिहास, भूगोल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से दूर होते जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने पढ़ना लगभग छोड़ दिया है।
सईद अंसारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में उन्होंने अपने संस्थान में फाइनल परीक्षा के बाद छात्रों का वाइवा लिया। उन्होंने सभी छात्रों से सिर्फ एक सवाल पूछा—भारत के उपराष्ट्रपति कौन हैं? उन्हें यह देखकर गहरा दुख हुआ कि 50 छात्रों में से केवल एक छात्र सही जवाब दे पाया।
उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने अपने संस्थान के प्रोफेसरों और डीन की बैठक बुलाई और साफ कहा कि यह छात्रों की नहीं, बल्कि शिक्षकों और उनकी भी जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को सही दिशा नहीं दे पाए।
उन्होंने कहा कि आधुनिक और तकनीकी रूप से दक्ष होना अच्छी बात है, लेकिन अगर युवा अपने देश, संविधान, राजनीति और समाज की बुनियादी जानकारी से ही अनजान रहेंगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
युवा पत्रकारों को सईद अंसारी का मैसेज
चर्चा के अंत में इस हिस्से में सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में आने वाले युवाओं को सिर्फ तकनीक सीखना ही काफी नहीं है। उन्हें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, खेल, मनोरंजन और समसामयिक घटनाओं सहित हर विषय की जानकारी रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकार किसी एक विषय का विशेषज्ञ जरूर हो सकता है, लेकिन उसे एक ऑलराउंडर भी होना चाहिए। इंटरव्यू के दौरान उससे किसी भी विषय पर सवाल पूछा जा सकता है, इसलिए व्यापक अध्ययन और पढ़ने की आदत विकसित करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने अभिभावकों से भी कहा कि यदि उनके बच्चे पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं तो समय-समय पर उनका सामान्य ज्ञान जांचते रहें। उनसे विंबलडन विजेता, देश के संवैधानिक पदों, राजनीति, खेल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल पूछें। इससे उनकी तैयारी मजबूत होगी और वे बेहतर पत्रकार बन सकेंगे।
सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता केवल कैमरे के सामने आने या तकनीक चलाने का नाम नहीं है, बल्कि यह निरंतर सीखने, पढ़ने और समाज की गहरी समझ विकसित करने का पेशा है।
दर्शकों के सवालों में भी उठे पत्रकारिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे
फायरसाइड चैट के समापन की ओर बढ़ते हुए दर्शकों की ओर से भी कई सवाल पूछे गए। एक दर्शक ने सईद अंसारी से पूछा कि उन्होंने बातचीत के दौरान कहा था कि पत्रकार को "न्यूज़" पर ध्यान देना चाहिए, "व्यूज़" पर नहीं। ऐसे में क्या वे हाल की कुछ घटनाओं के संदर्भ में इसका कोई उदाहरण देना चाहेंगे?
इस सवाल के जवाब में सईद अंसारी ने कहा कि आज दर्शकों की अपेक्षाएं पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं। अब लोग सिर्फ खबर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पूरी सच्चाई भी जानना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब वे "व्यूज़" की बात करते हैं तो उसका मतलब पत्रकार की व्यक्तिगत राय से होता है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पत्रकार है तो उसे अपनी व्यक्तिगत पहचान, राजनीतिक झुकाव और वैचारिक आग्रहों से ऊपर उठना होगा। पत्रकार के रूप में वह खुद को किसी धर्म, जाति, भाषा, राज्य या राजनीतिक दल के नजरिए से नहीं देख सकता।
सईद अंसारी ने कहा कि उन्होंने बहुत प्रयास करके खुद को हर तरह के वैचारिक पूर्वाग्रह से दूर रखने की कोशिश की है। उनका मानना है कि पत्रकार का सबसे बड़ा धर्म निष्पक्ष रहना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता आज देश के युवा हैं, क्योंकि आने वाले समय में वही देश और समाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।
"कई बातें कहना चाहता हूं, लेकिन मंच और समय की अपनी सीमाएं होती हैं"
उन्होंने कहा कि युवाओं और समाज से जुड़े कई ऐसे विषय हैं, जिन पर वे विस्तार से बोलना चाहते हैं, लेकिन हर मंच और हर अवसर की अपनी सीमाएं होती हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि समाज के लोगों, अभिभावकों और शिक्षकों को इन मुद्दों पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए और अपनी आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में काम करने वाले लोगों की अपनी पेशेवर सीमाएं होती हैं, इसलिए कई बार वे हर विषय पर खुलकर नहीं बोल पाते। ऐसे में समाज के अन्य लोगों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
सवाल: अगर आने वाले 10 साल में ऐसे ही युवा मीडिया की कमान संभालेंगे तो क्या होगा?
इस दौरान अनुराग बत्रा ने भी बातचीत में हिस्सा लेते हुए कहा कि सईद अंसारी ने खुद बताया कि उनके संस्थान में 50 छात्रों में से सिर्फ एक छात्र ही देश के उपराष्ट्रपति का नाम बता सका। ऐसे में यह चिंता स्वाभाविक है कि अगर आने वाले दस वर्षों में यही युवा मीडिया की कमान संभालेंगे तो स्थिति कैसी होगी।
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि यही उनकी सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी सिर्फ रील्स, सोशल मीडिया और मोबाइल तक सीमित रह जाएगी और सामान्य ज्ञान, पढ़ाई तथा सामाजिक समझ से दूर होती जाएगी, तो पत्रकारिता के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि माता-पिता अपने बच्चों पर नजर रखें। भरोसा जरूर करें, लेकिन आंख मूंदकर नहीं। उन्होंने कहा कि पहले माता-पिता को हमेशा पता रहता था कि उनका बच्चा कहां जा रहा है, किसके साथ रह रहा है और क्या कर रहा है। आज यह निगरानी लगभग खत्म हो गई है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज कई किशोर अपने माता-पिता से कहते हैं कि वे दोस्तों के साथ नाइट स्टे के लिए बाहर जाएंगे और माता-पिता बिना ज्यादा पूछताछ किए इसकी अनुमति दे देते हैं। उनका मानना है कि बच्चों को पूरी आजादी देने के साथ-साथ जिम्मेदार निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने एक और उदाहरण साझा करते हुए कहा कि उनके एक मित्र के आठवीं-नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे ने जन्मदिन मनाने के लिए माता-पिता से कहा कि वह दोस्तों के साथ मॉल जाएगा और वहां कोई अभिभावक मौजूद नहीं होगा। सईद अंसारी ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सिर्फ बच्चों को दोष देना ठीक नहीं है, बल्कि अभिभावकों की भी बराबर जिम्मेदारी बनती है।
उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि उस समय माता-पिता अनुशासन के मामले में काफी सख्त होते थे। वे बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखते थे और जरूरत पड़ने पर डांटते या सजा भी देते थे। उनका मानना है कि आज के समय में भी बच्चों के जीवन में माता-पिता की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।
सवाल: युवा पत्रकारों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में आने वाले युवाओं को सिर्फ तकनीक सीखने तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, खेल, मनोरंजन, राजनीति और देश-दुनिया की हर महत्वपूर्ण घटना की जानकारी रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक पत्रकार को ऑलराउंडर होना चाहिए। जरूरी नहीं कि उसे हर विषय का विशेषज्ञ होना पड़े, लेकिन इतना ज्ञान जरूर होना चाहिए कि किसी भी विषय पर बुनियादी सवालों का जवाब दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि इंटरव्यू में किसी उम्मीदवार से विंबलडन चैंपियन, किसी अंतरराष्ट्रीय नेता, किसी राज्य की विधानसभा सीटों या संसद की बुनियादी व्यवस्था के बारे में पूछा जाए, तो वह पूरी तरह अनजान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज कई युवाओं को यह तक नहीं पता कि लोकसभा और विधानसभा में क्या अंतर है या सांसद और विधायक की भूमिकाएं क्या होती हैं। यह स्थिति पत्रकारिता जैसे पेशे के लिए चिंता का विषय है।
सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता सिर्फ कैमरे के सामने बोलने या सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने का नाम नहीं है। यह लगातार पढ़ने, सीखने, समाज को समझने और तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी निभाने का पेशा है।
केविन वज ने रैखिक टेलीविजन का नियामकीय बोझ और लागत घटाने के लिए रोडमैप बनाने तथा बार्क ऑडियंस रेटिंग फिर शुरू करने की मांग की है।
by
Samachar4media Bureau
जियोस्टार (JioStar) के एंटरटेनमेंट बिजनेस के सीईओ (CEO) और फिक्की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट कमेटी (FICCI Media and Entertainment Committee) के चेयरमैन केविन वज (Kevin Vaz) ने रैखिक टेलीविजन (Linear Television) के नियामकीय बोझ और लागत को कम करने के लिए ठोस रोडमैप बनाने की मांग की है।
उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (Broadcast Audience Research Council) यानी बार्क (BARC) की ऑडियंस रेटिंग (Audience Rating) जारी करने की प्रक्रिया तुरंत बहाल करने का भी आग्रह किया।
फिक्की फ्रेम्स 2026 (FICCI FRAMES 2026) के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए केविन वज ने कहा कि ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री (Broadcasting Industry) को ज्यादा नियामकीय लचीलापन देने की जरूरत है, ताकि रैखिक टेलीविजन डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) के साथ आगे बढ़ सके। इससे उपभोक्ताओं को यह तय करने की ज्यादा आजादी मिलेगी कि वे क्या, कहां और किस स्क्रीन पर देखना चाहते हैं।
वज ने 10+2 विज्ञापन सीमा हटाने के मंत्रालय के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने इसे ऐसे नियामकीय ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जो रैखिक प्रसारण और व्यापक मीडिया लैंडस्केप (Media Landscape) में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखता है।
ऑडियंस मेजरमेंट (Audience Measurement) को लेकर उन्होंने बार्क रेटिंग जारी करने की प्रक्रिया फिर शुरू करने की मांग की। उनका कहना था कि विश्वसनीय और सत्यापन योग्य ऑडियंस डेटा (Audience Data) उपलब्ध नहीं होने से ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच अनिश्चितता पैदा हो रही है, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान।
उन्होंने कहा कि विश्वसनीय मापन जरूरी है, ताकि ब्रांड अपने कैंपेन (Campaign) की बेहतर प्लानिंग कर सकें और दर्शकों तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।
केविन वज ने कहा कि टेलीविजन आज भी भारत में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और किफायती मीडिया प्लेटफॉर्म (Media Platform) में से एक है। उनके मुताबिक, ब्रॉडकास्टिंग और विज्ञापन क्षेत्र व्यापक आर्थिक व्यवस्था में भी योगदान देते हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रसारकों और विज्ञापनदाताओं को समर्थन देने के लिए विश्वसनीय ऑडियंस मापन जरूरी है।
उन्होंने यह बातें ऐसे समय कहीं हैं, जब मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media and Entertainment Industry) में कंटेंट कंजम्पशन (Content Consumption) के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। रैखिक टेलीविजन, स्ट्रीमिंग, मोबाइल और कनेक्टेड टीवी (Connected TV) अब समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
फिक्की फ्रेम्स 2026 का आयोजन ‘इंडियाज मीडिया मोमेंट: क्रिएटिंग वैल्यू इन एन एज ऑफ इनफिनिट कंटेंट’ थीम के तहत किया जा रहा है। वज ने डिजिटल मीडिया, कनेक्टेड टीवी, माइक्रो-ड्रामा और कंटेंट कॉमर्स के विस्तार पर भी बात की। उन्होंने ऐसे इंडस्ट्री एनवायरनमेंट (Industry Environment) की जरूरत बताई, जो इनोवेशन और सेल्फ-रेगुलेशन (Self-Regulation) को बढ़ावा दे।
BARC के निलंबन से त्योहारों के सीजन में टीवी चैनलों के सामने अनिश्चितता है, लेकिन सभी पक्ष इंडस्ट्री के हित में मिलकर काम करें तो समाधान संभव है।
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Samachar4media Bureau
मार्कंड अधिकारी, चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर,
मानसून का मौसम अब खत्म होने की ओर है और बाजार साल के सबसे बड़े त्योहारों के सीजन के लिए तैयार हो रहा है। दिवाली से पहले का समय कंपनियों के लिए विज्ञापन पर खर्च करने और मीडिया के लिए कमाई का अहम दौर माना जाता है। लेकिन इस बार लीनियर टीवी इंडस्ट्री में त्योहारों जैसा उत्साह नहीं दिख रहा है। इसके बजाय इंडस्ट्री में अनिश्चितता का माहौल है।
इसकी बड़ी वजह टेलीविजन ऑडियंस रेटिंग को लेकर साफ तस्वीर नहीं होना है। विज्ञापन एजेंसीज अलग-अलग चैनलों पर विज्ञापनदाताओं का बजट तय करने के लिए उनकी रेटिंग को आधार बनाती हैं। ऐसे में टीवी रेटिंग उपलब्ध नहीं होने पर अलग-अलग चैनलों और कार्यक्रमों पर विज्ञापन खर्च तय करना मुश्किल हो जाता है।
क्यों नहीं मिल रही टीवी रेटिंग?
इसका कारण है ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) से जुड़ा मौजूदा मामला। जुलाई 2026 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने BARC को टीवी रेटिंग प्रकाशित करने से रोकने का निर्देश दिया था, जब तक कि उसकी लाइसेंस प्रक्रिया नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 के तहत पूरी नहीं हो जाती।
सरकार ने मार्च 2026 में नई टीवी रेटिंग पॉलिसी जारी की थी। इसका मकसद टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। नई पॉलिसी में रेटिंग एजेंसीज के लिए पंजीकरण, संचालन, ऑडिट और निगरानी से जुड़े नियम तय किए गए हैं।
नई पॉलिसी में टीवी रेटिंग एजेंसीज के लिए स्वतंत्र निदेशकों, ऑडिट, डेटा सुरक्षा और बड़े सैंपल के जरिए दर्शकों की माप जैसे प्रावधान भी किए गए हैं। सरकार ने रेटिंग एजेंसी बनने के लिए नेटवर्थ की शर्त को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये किया है, ताकि इस क्षेत्र में और कंपनियों के आने की संभावना बढ़े।
इसके बावजूद अब तक BARC ही टीवी रेटिंग के क्षेत्र में प्रमुख और अकेली रेटिंग एजेंसी बनी हुई है। ऐसे में रेटिंग का रुकना पूरी टीवी इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय बन गया है।
BARC को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
BARC के कामकाज और पारदर्शिता को लेकर इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पुराने समय में BARC के कामकाज को लेकर यह शिकायत रही कि वह अपने हितधारकों के सवालों का पर्याप्त जवाब नहीं देती थी और अपनी प्रणाली के बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं करती थी। इसके बाद एजेंसी की एक अन्य मैनेजमेंट टीम पर रेटिंग में गड़बड़ी, हेरफेर और भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगे थे, जिसके बाद सीबीआई जांच भी हुई। इन घटनाओं से इंडस्ट्री के कुछ हितधारकों का भरोसा प्रभावित हुआ।
मौजूदा व्यवस्था में भी हितधारकों के सवालों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई गई। BARC का लंबे समय तक अकेली रेटिंग एजेंसी बने रहना और उससे जुड़ी शिकायतें टीवी रेटिंग व्यवस्था में भरोसे को प्रभावित करती रही हैं।इसी तरह की चिंताओं के बीच सरकार ने टीवी रेटिंग के लिए नई पॉलिसी बनाई है। सरकार के मुताबिक, नई पॉलिसी का उद्देश्य देश में टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
त्योहारों के सीजन में बढ़ी चिंता
टीवी रेटिंग को लेकर यह अनिश्चितता ऐसे समय में आई है, जब दिवाली से पहले विज्ञापन बाजार में गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद रहती है। लीनियर टीवी चैनल पहले से ही डिजिटल मीडिया और मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक टीवी के विज्ञापन कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। ऐसे माहौल में टीवी चैनलों के लिए रेटिंग का उपलब्ध नहीं होना एक और बड़ी चुनौती बन गया है।
विज्ञापनदाता और एजेंसीज यह जानना चाहती हैं कि किस चैनल या कार्यक्रम की पहुंच और दर्शक संख्या कितनी है, ताकि उसी आधार पर विज्ञापन का बजट तय किया जा सके। रेटिंग नहीं होने पर यह फैसला लेना मुश्किल हो जाता है।
इंडस्ट्री को जल्द समाधान की जरूरत
मौजूदा स्थिति में पूरी टीवी इंडस्ट्री के हित में जल्द कोई व्यावहारिक समाधान निकालने की जरूरत है। सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे टीवी रेटिंग व्यवस्था दोबारा सुचारु हो सके और साथ ही नई पॉलिसी के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही भी बनी रहे।
साथ ही, BARC जैसी रेटिंग एजेंसी के लिए भी यह जरूरी है कि वह अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए और अपने कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता लाए। नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 इसी दिशा में बदलाव का आधार तैयार करती है।
प्रसार भारती की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इन स्लॉट का आवंटन 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक छह महीने की अवधि के लिए किया गया है।
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Samachar4media Bureau
प्रसार भारती ने अपने 'डीडी फ्री डिश' प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े तीन MPEG-4 स्लॉट की नीलामी पूरी कर ली है। 102वीं मिड-ईयर ई-नीलामी के बाद न्यूज लीडर, TV7 भारत और PTC सिमरन सफल चैनल रहे हैं।
प्रसार भारती की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इन स्लॉट का आवंटन 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक छह महीने की अवधि के लिए किया गया है।
यह नीलामी डीडी फ्री डिश की खाली MPEG-4 क्षमता के मिड-ईयर आवंटन का हिस्सा थी। डीडी फ्री डिश भारत का फ्री-टू-एयर डायरेक्ट-टू-होम प्लेटफॉर्म है। प्रसार भारती ने ई-ऑक्शन मेथडोलॉजी 2025 के तहत इस नीलामी के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे।
उपलब्ध क्षमता को चैनल की जॉनर और भाषा के आधार पर पांच कैटेगरी में बांटा गया था। इनमें G1 न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों, जबकि G2 गैर-न्यूज चैनलों के लिए था। R1, R2 और R3 क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों के लिए रखे गए थे।
R1 में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम चैनल शामिल थे। R2 में पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली और ओड़िया चैनल रखे गए थे। वहीं, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को, हिंदी और उर्दू को छोड़कर, R3 कैटेगरी में रखा गया था।
नीलामी में G1 और G2 कैटेगरी के लिए सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइस तय किया गया था। G1 स्लॉट के लिए शुरुआती बोली 39.83 लाख रुपये, जबकि G2 के लिए 36.40 लाख रुपये थी। R2 के लिए शुरुआती कीमत 21.56 लाख रुपये, R3 के लिए 3.31 लाख रुपये और R1 के लिए 3 लाख रुपये रखी गई थी।
मेथडोलॉजी के तहत, कुछ कैटेगरी के बोलीदाताओं को दूसरी कैटेगरी के स्लॉट के लिए भी बोली लगाने की अनुमति थी। G1 के बोलीदाता G1, G2, R2, R1 और R3 में बोली लगा सकते थे। G2 के बोलीदाता G2, R2, R1 और R3 के लिए बोली लगा सकते थे। इसी तरह R2 के बोलीदाता R2, R1 और R3, जबकि R3 के बोलीदाता R3 और R1 के लिए बोली लगा सकते थे। R1 में बोली लगाने की अनुमति सिर्फ R1 के बोलीदाताओं को थी।
भाषा और जॉनर की जांच हुई सख्त
क्षेत्रीय स्लॉट के लिए आवेदन करने वाले ब्रॉडकास्टर्स के लिए प्रसार भारती ने दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें भी सख्त की थीं। इसके तहत चैनलों को अपनी घोषित भाषा और जॉनर साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज देने थे।
पहले से चल रहे चैनलों को किसी एमएसओ या डीटीएच प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी का दस्तावेजी सबूत देना था। इसके साथ ही चैनल किस भाषा और जॉनर के तहत चल रहा है, इसकी जानकारी भी देनी थी। आवेदक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, ट्राई और टीवी रेटिंग एजेंसियों जैसे BARC से मिले दस्तावेज भी जमा कर सकते थे।
नीलामी की शर्तों के मुताबिक, चैनलों को मुख्य रूप से अपनी घोषित जॉनर और भाषा में ही कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे। प्रसार भारती ने ‘मुख्य रूप से’ का मतलब 75 फीसदी कंटेंट बताया है। साथ ही, घोषित भाषा और जॉनर का कंटेंट चैनल के कुल मासिक कंटेंट के 60 फीसदी से कम नहीं होना चाहिए।
अगर कोई चैनल अपनी घोषित भाषा या जॉनर की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसके प्रसारण की रिकॉर्डिंग की समीक्षा की जा सकती है। इसके बाद उसे शो-कॉज नोटिस भी दिया जा सकता है। शर्तों का पालन नहीं करने पर प्रसार भारती डीडी फ्री डिश से चैनल को हटाने का फैसला भी ले सकता है।
डीडी फ्री डिश पर जुड़ेंगे तीन चैनल
न्यूज लीडर, TV7 भारत और PTC सिमरन के जुड़ने के साथ प्रसार भारती डीडी फ्री डिश की खाली क्षमता को समय-समय पर ई-नीलामी के जरिए आवंटित करने की प्रक्रिया जारी रखे हुए है।
सफल बोलीदाताओं को नीलामी नोटिस में तय भुगतान, तकनीकी और कैरिज से जुड़ी सभी शर्तों का पालन करना होगा। इनमें लेटर ऑफ अलॉटमेंट मिलने के 15 दिनों के भीतर तय समझौते पर हस्ताक्षर करना और प्रसार भारती की ओर से तय शेड्यूल के अनुसार भुगतान करना शामिल है।
शर्तों के मुताबिक, बकाया भुगतान पर 14.5 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा। लगातार भुगतान में डिफॉल्ट होने पर रकम जब्त करने और चैनल को डीडी फ्री डिश से हटाने का भी प्रावधान है। सफल चैनलों को डीडी फ्री डिश पर जगह मिलने से पहले कैरिज फीस की पहली किस्त का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, उन्हें जरूरी तकनीकी उपकरण और सैटेलाइट पैरामीटर दूरदर्शन के तोड़ापुर, नई दिल्ली स्थित डीटीएच स्टेशन को उपलब्ध कराने होंगे।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण जल्द ही एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन सेवाओं को एक औपचारिक नियामकीय ढांचे के तहत लाने की सिफारिश कर सकता है।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) जल्द ही एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सेवाओं को एक औपचारिक नियामकीय ढांचे (रेगुलेट्री फ्रेमवर्क) के तहत लाने की सिफारिश कर सकता है। मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, TRAI अब भारत में इंटरनेट के जरिए दी जा रही टेलीविजन सेवाओं के नियमन के तरीके में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने TRAI से यह जांचने को कहा था कि क्या FAST और ALTD सेवाओं को लाइसेंसिंग के दायरे में लाया जाना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, TRAI अपने इस रुख को कायम रख सकता है कि खुले इंटरनेट पर लीनियर और तय शेड्यूल वाले चैनल उपलब्ध कराने वाली टेलीविजन सेवाओं को पूरी तरह किसी औपचारिक नियामकीय ढांचे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
यह मुद्दा भारत के तेजी से बदलते टेलीविजन वितरण बाजार में एक अहम बहस बन गया है। पारंपरिक वितरण प्लेटफॉर्म, जिनमें केबल और डीटीएच ऑपरेटर शामिल हैं, का कहना है कि FAST सेवाएं तेजी से टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें लाइसेंस प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटर्स पर लागू होने वाली कई जिम्मेदारियों का पालन नहीं करना पड़ता।
वहीं, टेक्नोलॉजी कंपनियों, ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्मार्ट-टीवी निर्माताओं और FAST ऑपरेटर्स का कहना है कि इंटरनेट आधारित सेवाएं पारंपरिक प्रसारण से मूल रूप से अलग हैं और उन पर पुराने लाइसेंसिंग नियम लागू नहीं किए जाने चाहिए।
इसलिए नियामकीय बहस अब इस सवाल पर केंद्रित हो गई है कि किसी सेवा की प्रकृति उसके कंटेंट पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक से तय होनी चाहिए या फिर इस बात से कि वह उपभोक्ताओं को किस तरह का टेलीविजन जैसा अनुभव देती है।
पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन के बराबर नियमों की मांग
नियमन का समर्थन करने वाले ब्रॉडकास्टर्स ने पारंपरिक टेलीविजन वितरण और इंटरनेट आधारित लीनियर टेलीविजन के बीच बढ़ते नियामकीय अंतर की ओर इशारा किया है।
टाइम्स नेटवर्क ने TRAI को दिए अपने सुझाव में कहा कि FAST सेवाएं पारंपरिक टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रही हैं, लेकिन केबल, डीटीएच और आईपीटीवी ऑपरेटरों पर लागू लाइसेंसिंग, टैरिफ, गुणवत्ता और कंटेंट से जुड़े नियम इन पर लागू नहीं होते।
ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, मुफ्त इंटरनेट आधारित टेलीविजन चैनलों की तेजी से बढ़ती संख्या से प्रतिस्पर्धा का संतुलन प्रभावित हो रहा है और पे-टीवी कारोबार की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है। टाइम्स नेटवर्क ने कहा कि केबल और डीटीएच प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध प्रीमियम चैनल अब FAST सेवाओं के जरिए मुफ्त में भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे दर्शकों के पारंपरिक पेड टीवी से हटने की रफ्तार बढ़ सकती है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई पर दबाव पड़ सकता है।
टाइम्स नेटवर्क ने विज्ञापन से होने वाली कमाई के बंटवारे में पारदर्शिता की कमी, शिकायतों के समाधान के लिए मानकीकृत व्यवस्था नहीं होने और स्मार्ट-टीवी निर्माताओं तथा ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनियों के चैनल खोजने और विज्ञापन इन्वेंट्री पर बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई।
उसने आशंका जताई कि ये टेक्नोलॉजी कंपनियां भविष्य में कनेक्टेड-टीवी इंटरफेस पर चैनलों को दिखाने और उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए शुल्क लेकर पारंपरिक टीवी के कैरिज फीस मॉडल जैसा सिस्टम बना सकती हैं।
एबीपी नेटवर्क ने भी नियमन का समर्थन किया है, लेकिन उसने पुराने टेलीविजन नियमों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीधे लागू करने के बजाय “हल्के लेकिन सक्रिय” नियामकीय ढांचे की मांग की है। कंपनी ने एल्गोरिदम के जरिए अपने ही कंटेंट को प्राथमिकता देने, प्रोग्रामेटिक विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और दर्शकों से जुड़े डेटा तक असमान पहुंच जैसे जोखिमों की ओर इशारा किया।
एबीपी ने “इन्वेंट्री सॉवरेन्टी” के लिए भी सुरक्षा उपाय मांगे हैं। उसका कहना है कि ब्रॉडकास्टर द्वारा बनाए गए कंटेंट से जुड़ी विज्ञापन इन्वेंट्री पर ब्रॉडकास्टर का नियंत्रण बना रहना चाहिए।
Zee ने लाइसेंस और ‘Must Carry’ नियम की मांग की
जी एंटरटेनमेंट ने नियामकीय बराबरी के पक्ष में ज्यादा मजबूत रुख अपनाया है। कंपनी का कहना है कि एप्लिकेशन आधारित लीनियर टेलीविजन प्लेटफॉर्म तेजी से पारंपरिक टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा कई जिम्मेदारियों से बाहर हैं।
ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स पर प्रोग्राम और विज्ञापन कोड, टैरिफ और इंटरकनेक्शन नियम, उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े नियम और सार्वजनिक सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियां लागू हैं। इससे नियमन में असमानता पैदा होती है।
जी ने प्रस्ताव दिया है कि ALTD प्रोवाइडर्स को औपचारिक अनुमति लेनी चाहिए। इसके तहत एप्लिकेशन प्रोवाइडर को मुख्य नियामकीय इकाई माना जाए, क्योंकि वही चैनलों को एक जगह लाता है, इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड संभालता है और उपभोक्ताओं की चैनल तक पहुंच नियंत्रित करता है।
कंपनी ने पूरे भारत के लिए 10 साल की अवधि वाली अनुमति का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए भारत में व्यावसायिक मौजूदगी रखने वाली भारतीय कंपनियों को पात्र माना जा सकता है और न्यूनतम नेटवर्थ 10 करोड़ रुपये या डीटीएच ऑपरेटरों पर लागू समान सीमा रखने का सुझाव दिया गया है।
जी ने ALTD सेवाओं पर ‘Must Carry’ और ‘Must Provide’ नियम लागू करने की भी मांग की है। कंपनी का कहना है कि इंटरनेट पर बैंडविड्थ की कमी नहीं होने के कारण सभी चैनलों को उपलब्ध कराना तकनीकी रूप से संभव है।
इसके अलावा, उसने प्रसार भारती के साथ अनिवार्य स्पोर्ट्स सिग्नल शेयरिंग के नियमों को भी ALTD प्लेटफॉर्म तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
कई ब्रॉडकास्टर्स ने टेलीकॉम जैसा नियमन लागू करने का किया विरोध
हालांकि, कई बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने FAST और ALTD को टेलीकॉम जैसी अनुमति व्यवस्था के तहत लाने का विरोध किया है। टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 का कहना है कि FAST और ALTD सेवाएं मूल रूप से इंटरनेट आधारित ओटीटी एप्लिकेशन हैं और इन्हें टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 या TRAI एक्ट के तहत टेलीकॉम सेवाएं नहीं माना जा सकता।
टीवी टुडे ने कहा कि ये सेवाएं केवल टेलीकॉम कंपनियों और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं। ये खुद वह ट्रांसमिशन काम नहीं करतीं, जो किसी सेवा को टेलीकॉम सेवा की श्रेणी में लाने के लिए जरूरी है।
कंपनी ने यह भी कहा कि इन सेवाओं पर पहले से ही MIB की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस, केबल टेलीविजन नेटवर्क्स एक्ट, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स और इंडस्ट्री की सेल्फ-रेगुलेटरी व्यवस्था जैसे नियम लागू हैं।
नेटवर्क18 ने कहा कि ओटीटी सेवाओं को अंतिम टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट से जानबूझकर बाहर रखा गया था, जबकि इसके पुराने ड्राफ्ट में इन्हें शामिल करने का प्रस्ताव था। कंपनी के मुताबिक, FAST “एप्लिकेशन लेयर” पर काम करता है, जबकि टेलीकॉम ऑपरेटर “नेटवर्क लेयर” पर काम करते हैं।
कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट और जियोस्टार ने भी इसी तरह के कानूनी और संवैधानिक तर्क दिए हैं। कल्वर मैक्स का कहना है कि FAST सेवाएं टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क की उपयोगकर्ता हैं, न कि टेलीकम्युनिकेशन सेवा देने वाली कंपनियां।
वहीं, जियोस्टार का कहना है कि ओटीटी सेवाएं टेलीकॉम नेटवर्क स्थापित नहीं करतीं, स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल नहीं करतीं और एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं करातीं। दोनों कंपनियों ने यह सवाल भी उठाया है कि स्पेक्ट्रम और बुनियादी ढांचे की कमी पर आधारित टेलीकॉम लाइसेंसिंग के सिद्धांतों को खुले इंटरनेट पर चलने वाले एप्लिकेशन पर कैसे लागू किया जा सकता है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने ब्रॉडकास्टिंग नियमन का विरोध किया
जियो प्लेटफॉर्म्स का कहना है कि सिर्फ इसलिए कि ओटीटी सेवाओं पर तय शेड्यूल के मुताबिक कार्यक्रम और विज्ञापन दिखाए जाते हैं, उन्हें पारंपरिक टेलीविजन चैनल नहीं माना जा सकता। 11 मई को दिए अपने सुझाव में कंपनी ने कहा कि FAST चैनलों समेत ओटीटी के जरिए उपलब्ध कराए जाने वाले कंटेंट को इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स के तहत ही नियंत्रित किया जाना चाहिए। इन पर केबल, डीटीएच, एचआईटीएस या आईपीटीवी ऑपरेटरों वाले नियम लागू नहीं होने चाहिए।
जियो का कहना है कि ब्रॉडकास्टिंग और ओटीटी की डिलीवरी तकनीक, नेटवर्क कंट्रोल, सेवा की गुणवत्ता, कंटेंट अधिकार और कारोबारी ढांचे अलग-अलग हैं। कंपनी ने नेट न्यूट्रैलिटी से जुड़े मौजूदा नियमों का भी हवाला दिया और कहा कि अतिरिक्त ‘Must Carry’ या ‘Must Provide’ नियमों की जरूरत नहीं है।
जियो ने यूट्यूब, जियोहॉटस्टार, जियोटीवी, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो और सोशल मीडिया की लाइव स्ट्रीमिंग सेवाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सिर्फ कंटेंट को चैनल की तरह दिखाने से उसकी नियामकीय श्रेणी तय नहीं होनी चाहिए।
स्मार्ट-टीवी कंपनियों को ब्रॉडकास्टर माने जाने की चिंता
संभावित नए नियामकीय ढांचे को लेकर स्मार्ट-टीवी निर्माताओं और टेक्नोलॉजी कंपनियों ने भी चिंता जताई है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने कहा है कि सिर्फ इसलिए टेलीविजन निर्माताओं को ब्रॉडकास्टर या डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि उनके स्मार्ट टीवी में FAST एप्लिकेशन पहले से इंस्टॉल हो सकते हैं।
कंपनी का कहना है कि टीवी निर्माता टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराने का काम करते हैं और थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन के संपादकीय कंटेंट पर उनका नियंत्रण नहीं होता।
मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) ने भी चेतावनी दी है कि ब्रॉडकास्टिंग से जुड़ी अतिरिक्त जिम्मेदारियां उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ बढ़ा सकती हैं। इन कंपनियों पर पहले से ही बीआईएस सर्टिफिकेशन, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण से जुड़े नियम लागू हैं।
FAST प्लेटफॉर्म क्लाउडटीवी और रनटीवी ने पूरी लाइसेंसिंग व्यवस्था के बजाय MIB के साथ हल्के, रजिस्ट्रेशन आधारित ढांचे का प्रस्ताव दिया है।
नियामकीय फैसला बदल सकता है कनेक्टेड टीवी का बाजार
कनेक्टेड टीवी का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इस पूरे मामले का महत्व भी बढ़ रहा है। स्विफ्ट टीवी के हवाले से दिए गए इंडस्ट्री अनुमानों के मुताबिक, भारत में कनेक्टेड टीवी वाले घरों की संख्या मौजूदा करीब 2 करोड़ से बढ़कर 2028 तक 4 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। इसी अवधि में FAST से होने वाली विज्ञापन आय करीब 60 करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
अलग-अलग पक्षों की ओर से दिए गए सुझाव भारत के टेलीविजन बाजार में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाते हैं। ब्रॉडकास्टिंग, ओटीटी और इंटरनेट आधारित डिस्ट्रीब्यूशन के बीच की सीमाएं तेजी से धुंधली हो रही हैं।
पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इंटरनेट पर टीवी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच नियमन का सवाल बराबर का प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने से जुड़ा है। वहीं, टेक्नोलॉजी कंपनियों और FAST ऑपरेटर्स की मुख्य चिंता यह है कि बुनियादी ढांचे पर आधारित पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग के लिए बनाए गए नियम एप्लिकेशन लेयर पर काम करने वाली सेवाओं के लिए जरूरत से ज्यादा अनुपालन बोझ पैदा कर सकते हैं।
अब अंतिम नियामकीय व्यवस्था यह तय करेगी कि भारत का उभरता हुआ इंटरनेट टेलीविजन बाजार किसी नए और अलग नियामकीय ढांचे के तहत विकसित होगा या फिर मुख्य रूप से मौजूदा डिजिटल और कंटेंट नियमों के तहत ही चलता रहेगा।
टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड (TV Today Network Limited) ने बताया है कि कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक 2 नवंबर 2026 को होगी।
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Vikas Saxena
टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड (TV Today Network Limited) ने बताया है कि कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक 2 नवंबर 2026 को होगी। इस बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों पर विचार किया जाएगा और उन्हें मंजूरी दी जाएगी।
कंपनी ने यह जानकारी 23 सितंबर 2026 को बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में साझा की है।
कंपनी ने बताया कि दूसरी तिमाही और छमाही 30 सितंबर 2026 को खत्म हो रही है। इनके वित्तीय नतीजों को 2 नवंबर को होने वाली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
इसके साथ ही कंपनी ने ट्रेडिंग विंडो बंद करने की भी जानकारी दी है। कंपनी के इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों के तहत उसके शेयरों में कारोबार के लिए ट्रेडिंग विंडो 1 अक्टूबर 2026 से 4 नवंबर 2026 तक बंद रहेगी। यह अवधि दोनों तारीखों को शामिल करते हुए है।
यह पाबंदी कंपनी के सभी इनसाइडर्स पर लागू होगी। ट्रेडिंग विंडो 4 नवंबर 2026 को बंद रहेगी।
मीडिया इंडस्ट्री की अनुभवी एग्जिक्यूटिव अनु सिक्का ने Jio Studios में हेड ऑफ एनिमेशन के तौर पर जॉइन किया है।
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Samachar4media Bureau
मीडिया इंडस्ट्री की अनुभवी एग्जिक्यूटिव अनु सिक्का ने Jio Studios में हेड ऑफ एनिमेशन के तौर पर जॉइन किया है। इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया से इसकी पुष्टि की है।
यह नियुक्ति अनु सिक्का का अगला प्रोफेशनल कदम है। उन्होंने हाल ही में JioStar में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड–किड्स एंटरटेनमेंट एंड इंफोटेनमेंट के पद से इस्तीफा दिया था। इसके साथ ही Viacom18 के साथ उनका दो दशक से ज्यादा लंबा जुड़ाव भी खत्म हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज और द वॉल्ट डिज्नी कंपनी के भारत में मीडिया कारोबार के विलय के बाद Viacom18, JioStar का हिस्सा बन गया था।
Jio Studios में अपनी नई भूमिका में अनु सिक्का एनिमेशन, बच्चों के मनोरंजन, कंटेंट डेवलपमेंट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) तैयार करने का अपना लंबा अनुभव इस्तेमाल करेंगी। हालांकि, उनकी नई भूमिका में जिम्मेदारियों के बारे में अभी आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।
अनु सिक्का ने 2006 में Viacom18 जॉइन किया था। यहां उन्होंने नेटवर्क के बच्चों के मनोरंजन से जुड़े पोर्टफोलियो को तैयार करने और उसका विस्तार करने में अहम भूमिका निभाई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत में देश में तैयार किए गए एनिमेशन और कैरेक्टर आधारित मनोरंजन को मजबूत करने में भी योगदान दिया।
वह Motu Patlu, Shiva, Gattu Battu, Rudra, Keymon Ache और Pakdam Pakdai जैसे कई लोकप्रिय भारतीय एनिमेशन प्रॉपर्टीज के निर्माण और विकास से जुड़ी रही हैं। उनके नेतृत्व में किड्स एंटरटेनमेंट क्लस्टर ने 650 घंटे से ज्यादा स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया ओरिजिनल कंटेंट बनाया।
अनु सिक्का ने Ninja Hattori, Oggy and the Cockroaches और Doraemon जैसे बड़े इंटरनेशनल बच्चों के कंटेंट की खरीद और उन्हें भारतीय दर्शकों के हिसाब से तैयार करने का काम भी देखा। वह Nickelodeon’s Kids’ Choice Awards को भारत लाने और इसे नेटवर्क के लिए हर साल होने वाले कार्यक्रम के तौर पर विकसित करने से भी जुड़ी रही हैं।
अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट स्ट्रैटेजी, प्रोग्रामिंग, शेड्यूलिंग, कमीशनिंग, एक्विजिशन, बजट, मार्केटिंग और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स समेत कई तरह की जिम्मेदारियां संभालीं।
Viacom18 से पहले अनु सिक्का ने अपने करियर की शुरुआत Newstrack से करंट अफेयर्स प्रोग्रामिंग में की थी। Newstrack बाद में Aaj Tak का हिस्सा बना। इसके बाद उन्होंने BITV और Tara Punjabi में काम किया। बाद में उन्होंने SAB TV के दिल्ली ब्यूरो का नेतृत्व किया, जहां उन्होंने करंट अफेयर्स प्रोग्रामिंग पर काम किया। Viacom18 में जाने से पहले वह Hungama Kids Channel में क्रिएटिव डायरेक्टर भी रही थीं।
भारत में टीवी रेटिंग्स की लंबे समय से जारी रोक अब सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं रह गई है कि ऑडियंस मीजरमेंट फिर कब शुरू होगी।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत में टीवी रेटिंग्स की लंबे समय से जारी रोक अब सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं रह गई है कि ऑडियंस मीजरमेंट फिर कब शुरू होगी। ब्रॉडकास्टर्स अब इस बड़े सवाल पर भी विचार कर रहे हैं कि अगर देश की मुख्य टीवी ऑडियंस मापने वाली संस्था BARC India को ही बंद कर दिया जाता है, तो पूरे मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) इकोसिस्टम पर इसका क्या असर पड़ेगा। यह मुद्दा सोमवार को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) की बोर्ड स्तर की बैठक में उठा। यह बैठक IBDF की 27वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के साथ हुई।
ब्रॉडकास्टर्स सरकार के सामने इस मामले को औपचारिक तौर पर उठाने पर विचार कर रहे हैं। नवंबर को इस गतिरोध को खत्म करने के लिए अहम समयसीमा के तौर पर देखा जा रहा है। अगर तब तक स्थिति साफ नहीं होती है, तो इंडस्ट्री BARC को बंद करने जैसे ज्यादा कड़े विकल्पों पर विचार कर सकती है।
हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि BARC को बंद करना आखिरी विकल्प होगा। उनकी तत्काल मांग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से यह स्पष्ट करने की है कि अभी क्या-क्या किया जाना बाकी है और रेटिंग्स दोबारा शुरू करने के लिए आगे का रास्ता क्या होगा। लेकिन इंडस्ट्री की प्रमुख संस्था में मौजूदा ऑडियंस मीजरमेंट व्यवस्था को ही खत्म करने की संभावना पर चर्चा होना बताता है कि लंबे समय से रेटिंग्स बंद रहने के कारण कारोबारी दबाव बढ़ रहा है।
BARC के बंद होने का असर सिर्फ टीवी चैनलों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर कंटेंट में निवेश, प्रोडक्शन कंपनियों और टीवी से होने वाली कमाई पर निर्भर बड़ी संख्या में काम करने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।
टीवी इंडस्ट्री की ‘कॉमन करेंसी’ खत्म हो जाएगी
टीवी रेटिंग्स इंडस्ट्री के लिए एक तरह की कॉमन करेंसी हैं। ब्रॉडकास्टर्स इनका इस्तेमाल अपने चैनलों की ऑडियंस पहुंच दिखाने के लिए करते हैं। विज्ञापनदाता इन आंकड़ों से अपने कैंपेन का आकलन करते हैं, जबकि मीडिया एजेंसियां इन्हीं आंकड़ों के आधार पर मीडिया निवेश की योजना और कीमत तय करती हैं। BARC के बंद होने से वह संस्था ही खत्म हो जाएगी, जो सभी के लिए एक साझा संदर्भ उपलब्ध कराती है। इससे टीवी ऑडियंस को मीजरमेंटे के लिए इंडस्ट्री के पास कोई स्वीकार्य और स्वतंत्र बेंचमार्क नहीं रह सकता है।
एक बड़े ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया, “लोग इसे ब्रॉडकास्टर्स की समस्या मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। टीवी विज्ञापन कंटेंट के लिए पैसा देता है, कंटेंट पूरी इंडस्ट्री को रोजगार देता है और यह सब एक साझा मीजरमेंट व्यवस्था पर टिका है।”
तुरंत होने वाला कारोबारी असर विज्ञापन दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के रूप में सामने आ सकता है। ब्रॉडकास्टर्स पुराने रेटिंग आंकड़े, अपना आंतरिक डेटा और दूसरे ऑडियंस संकेतक दे सकते हैं, लेकिन विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के पास चैनलों और कार्यक्रमों की तुलना के लिए मौजूदा इंडस्ट्री-लेवल आंकड़े नहीं होंगे।
छोटे और रीजनल ब्रॉडकास्टर्स के लिए यह समस्या और बड़ी हो सकती है। बड़े नेटवर्क कुछ हद तक अपने ब्रैंड संबंधों और पुराने प्रदर्शन पर निर्भर कर सकते हैं, लेकिन नए और छोटे चैनलों के लिए विज्ञापन बाजार में अपनी वैल्यू साबित करने में स्वतंत्र रूप से मापी गई ऑडियंस ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
विज्ञापन बजट को लेकर बढ़ सकती है परेशानी
मीडिया एजेंसियों के काम पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है। टीवी प्लानिंग में आमतौर पर ऑडियंस डेटा के आधार पर चैनलों, कार्यक्रमों, बाजारों और अलग-अलग समय स्लॉट की तुलना की जाती है। BARC नहीं होने पर प्लानर्स को दूसरे डेटा स्रोतों और पुराने आंकड़ों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा।
एक वरिष्ठ मीडिया एजेंसी अधिकारी के अनुसार, किसी सिफारिश को सही ठहराने के लिए प्लानर को एक ठोस आंकड़े की जरूरत होती है। अगर टीवी ऐसा आंकड़ा उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो विज्ञापन बजट उन प्लेटफॉर्म की ओर जा सकता है जो ऐसा मीजरमेंट उपलब्ध कराते हैं।
इसका यह मतलब जरूरी नहीं है कि विज्ञापनदाता तुरंत अपने टीवी बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाएंगे। लेकिन लंबे समय तक रेटिंग्स नहीं होने से टीवी के लिए विज्ञापन हासिल करने का आधार जरूर बदल सकता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से ही विज्ञापनदाताओं को कैंपेन और ऑडियंस मीजरमेंटे के कई तरीके देते हैं। ऐसे में लंबे समय तक टीवी रेटिंग्स का अभाव टीवी प्लानिंग को ज्यादा मुश्किल बना सकता है और विज्ञापन से मिलने वाले रिटर्न को एक सामान्य और स्वीकार्य माप के जरिए साबित करने की इंडस्ट्री की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
कंटेंट में निवेश पर भी पड़ सकता है असर
इसका असर आगे चलकर विज्ञापन से कंटेंट बिजनेस तक पहुंच सकता है। टीवी चैनल किसी कार्यक्रम को जारी रखने, उसका विस्तार करने या उसे बदलने का फैसला लेते समय ऑडियंस प्रदर्शन के साथ कई दूसरे कारोबारी और संपादकीय पहलुओं को भी देखते हैं। वहीं, प्रोडक्शन कंपनियां ब्रॉडकास्टर्स से मिलने वाले कमीशन और प्रोग्रामिंग बजट पर निर्भर करती हैं।
प्रोडक्शन बिजनेस से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, अगर चैनलों को अपनी कमाई को लेकर स्पष्टता कम होगी, तो वे नए कार्यक्रमों को कमीशन करने में ज्यादा सावधानी बरतेंगे और इसका असर सबसे पहले कार्यक्रम बनाने वाले लोगों पर पड़ेगा। लंबे समय तक चलने वाला यह मीजरमेंट संकट प्रोडक्शन हाउस, लेखक, निर्देशक, तकनीशियन, स्टूडियो और टीवी से जुड़े दूसरे प्रोफेशनल्स को भी प्रभावित कर सकता है।
विज्ञापन से होने वाली कमाई को लेकर कम स्पष्टता के कारण ब्रॉडकास्टर्स प्रोग्रामिंग पर खर्च करने में ज्यादा सतर्क हो सकते हैं। खासकर महंगे फॉर्मेट और नए कार्यक्रमों के मामले में यह चिंता ज्यादा हो सकती है, जहां ऑडियंस की प्रतिक्रिया पहले से पता नहीं होती। इसका असर टीवी को सपोर्ट करने वाले टेक्नोलॉजी और सर्विस इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है, जिसमें प्रोडक्शन, पोस्ट-प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और मीजरमेंट से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के सामने अलग चिंता
इसका असर न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है। न्यूज चैनलों में बड़ी संपादकीय और तकनीकी टीमें काम करती हैं और वे विज्ञापन से होने वाली कमाई पर काफी निर्भर रहते हैं।
एक काम करने वाली मीजरमेंट व्यवस्था न्यूज चैनलों को विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के सामने अपनी पहुंच साबित करने में मदद करती है। मौजूदा रेटिंग्स नहीं होने पर ऑडियंस डिलीवरी की कारोबारी वैल्यू साबित करना मुश्किल हो जाता है।
एक वरिष्ठ न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अधिकारी के अनुसार, अगर नीति का उद्देश्य जवाबदेह मीडिया को मजबूत करना है, तो उसके आर्थिक आधार की भी सुरक्षा जरूरी है। न्यूज रूम से जवाबदेही की लागत उठाने की उम्मीद करते हुए उसकी पहुंच दिखाने की क्षमता को खत्म नहीं किया जा सकता। यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 के जरिए टीवी ऑडियंस मीजरमेंट में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
BARC को बदलना रातोंरात संभव नहीं
अगर BARC बंद होता है तो एक बड़ा सवाल यह भी होगा कि उसके बाद टीवी ऑडियंस को कौन मापेगा?
टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 में रेटिंग एजेंसियों के लिए नया नियामकीय ढांचा बनाया गया है। इसमें 80,000 मीटर वाले घरों का पैनल, स्वतंत्र निदेशक, सालाना ऑडिट, टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल मीजरमेंट और अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
इस नीति में रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की जरूरत को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये किया गया है। वहीं, न्यूनतम पैनल का आकार 50,000 से बढ़ाकर 80,000 घर कर दिया गया है। रेटिंग एजेंसी के बोर्ड में कम से कम 33% स्वतंत्र निदेशक होना जरूरी है।
हालांकि, सिर्फ नियामकीय रजिस्ट्रेशन से नई रेटिंग एजेंसी तैयार नहीं हो जाएगी। नए खिलाड़ी को मीजरमेंट का बुनियादी ढांचा तैयार या हासिल करना होगा, एक प्रतिनिधि पैनल बनाना होगा, मीजरमेंट की कार्यप्रणाली विकसित करनी होगी, ऑडिट कराना होगा और ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच अपनी स्वीकार्यता बनानी होगी। मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, भरोसेमंद विकल्प तैयार करना बड़ा काम है। इसमें समय, भरोसा और बाजार के सभी पक्षों का विश्वास जरूरी होगा।
यही वजह है कि BARC को बंद करना मौजूदा सस्पेंशन से काफी अलग स्थिति होगी। सस्पेंशन की स्थिति में मौजूदा संस्था और उसका बुनियादी ढांचा बना रहता है और नियामकीय जरूरतें पूरी होने के बाद मीजरमेंट दोबारा शुरू किया जा सकता है। लेकिन बंद होने की स्थिति में इंडस्ट्री को पूरी ऑडियंस मीजरमेंट व्यवस्था फिर से तैयार करनी पड़ सकती है और एक नई साझा ‘कॉमन करेंसी’ स्थापित करनी होगी।
नवंबर से पहले इंडस्ट्री चाहती है साफ स्थिति
BARC ने मंत्रालय को बताया है कि उसका पैनल बढ़कर 70,876 घरों तक पहुंच गया है और उसे दिसंबर तक 80,000 घरों की जरूरत पूरी होने की उम्मीद है।
जुलाई में MIB की BP&L विंग ने BARC के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन की सिफारिश की थी। इससे बाकी जरूरतों को पूरा करते हुए BARC को रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की संभावित अनुमति मिल सकती थी। हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि उन्हें अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि रेटिंग्स दोबारा शुरू होने में आखिर रुकावट क्या है।
एक वरिष्ठ इंडस्ट्री अधिकारी के मुताबिक, ब्रॉडकास्टर्स को अभी भी स्पष्ट नहीं है कि BARC को रोकने वाली वास्तविक समस्या क्या है। लंबे समय से नियामकीय प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इंडस्ट्री को यह जानना जरूरी है कि रेटिंग्स दोबारा शुरू होने से कौन-सा खास मुद्दा रोक रहा है। अगर जरूरतें स्पष्ट हैं तो BARC को बताया जाना चाहिए कि क्या बाकी है या फिर शर्तों के साथ उसे रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
एक अन्य वरिष्ठ मीडिया अधिकारी ने कहा कि टीवी इंडस्ट्री अनिश्चित समय तक साझा मीजरमेंट व्यवस्था के बिना काम नहीं कर सकती। विज्ञापनदाताओं और ब्रॉडकास्टर्स दोनों को स्पष्टता चाहिए और एजेंसियों को प्लानिंग के लिए भरोसेमंद आधार चाहिए। यह स्थिति जितने लंबे समय तक चलेगी, कारोबारी असर उतना ही बढ़ेगा।
इसलिए ब्रॉडकास्टर्स के लिए नवंबर की समयसीमा सिर्फ रेटिंग्स दोबारा शुरू करने से जुड़ी नहीं है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना भी है कि अस्थायी मीजरमेंट संकट टीवी इंडस्ट्री और उस पर निर्भर कारोबार के लिए लंबे समय की संरचनात्मक समस्या न बन जाए।
सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network Limited) के शेयरधारकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए वित्तीय खातों (Financial Statements) को मंजूरी दे दी है।
by
Vikas Saxena
हिंदी हेडलाइन
Sun TV Network की AGM में FY26 के वित्तीय खातों को मंजूरी, अंतरिम डिविडेंड भी हुआ फाइनल
सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network Limited) के शेयरधारकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए वित्तीय खातों (Financial Statements) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दिए गए अंतरिम डिविडेंड को अंतिम डिविडेंड के तौर पर भी मंजूरी मिल गई है। ये फैसले कंपनी की 41वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में लिए गए।
कंपनी की AGM 18 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई। बैठक सुबह 10 बजे शुरू हुई और 10:22 बजे खत्म हुई। कंपनी के चेयरमैन कलानिथि मारन ने कोरम पूरा होने की पुष्टि के बाद बैठक की अध्यक्षता की। 21 सितंबर 2026 को जमा की गई स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट में सभी प्रस्तावों के मतदान के नतीजे दिए गए हैं।
94.25% शेयरों पर हुआ मतदान
रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के कुल 1,03,045 शेयरधारक थे। इनमें 39,40,84,620 शेयरों पर वोटिंग हुई, जो कंपनी के कुल बकाया शेयरों का 94.25% है।
प्रमोटर ग्रुप के पास 29,55,63,457 शेयर थे और उसने ई-वोटिंग के जरिए अपने 100% वोट डाले। पब्लिक इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की भागीदारी 94.03% रही, जबकि पब्लिक नॉन-इंस्टीट्यूशनल शेयरधारकों की 42.41% हिस्सेदारी वाले वोटिंग में भागीदारी रही।
चारों प्रस्ताव मंजूर
AGM में शेयरधारकों के सामने कुल चार प्रस्ताव रखे गए और सभी प्रस्ताव पास हो गए। प्रमोटर ग्रुप ने हर प्रस्ताव के पक्ष में सर्वसम्मति से वोट किया। पब्लिक शेयरधारकों के बीच भी ज्यादातर प्रस्तावों को 99.9% से ज्यादा वोट मिले।
पहला प्रस्ताव: वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए वित्तीय खातों को मंजूरी दी गई। इसके पक्ष में 99.9997% और विरोध में 0.0003% वोट पड़े।
दूसरा प्रस्ताव: वित्त वर्ष 2025-26 के अंतरिम डिविडेंड को अंतिम डिविडेंड के तौर पर मंजूरी दी गई। इसके पक्ष में 99.9939% और विरोध में 0.0061% वोट पड़े।
तीसरा प्रस्ताव: रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहीं काव्या कलानिधि मारन (DIN: 07883203) को दोबारा डायरेक्टर नियुक्त किया गया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.9032% और विरोध में 0.0968% वोट पड़े। उनके खिलाफ कुल 3,59,691 वोट पड़े, जिनमें मुख्य रूप से पब्लिक इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के वोट शामिल थे।
चौथा प्रस्ताव: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक की पुष्टि की गई। इसके पक्ष में 99.9997% और विरोध में 0.0003% वोट पड़े।
15 से 17 सितंबर तक हुई ई-वोटिंग
AGM से पहले 15 सितंबर 2026 से 17 सितंबर 2026 तक रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा उपलब्ध थी। M/s Lakshmi Subramanian & Associates की पार्टनर स्वेता सुब्रमणियन ने स्क्रूटिनाइजर की भूमिका निभाई।
शेयरधारकों की सहमति से अनमॉडिफाइड ऑडिटर रिपोर्ट और सेक्रेटेरियल ऑडिटर रिपोर्ट को पढ़ा हुआ माना गया।
सहारा वन मीडिया व एंटरटेनमेंट लिमिटेड (Sahara One Media and Entertainment Limited) की 46वीं सालाना आम बैठक (AGM) के लिए e-Voting की प्रक्रिया को लेकर अड़चन सामने आई है।
by
Vikas Saxena
सहारा वन मीडिया व एंटरटेनमेंट लिमिटेड (Sahara One Media and Entertainment Limited) की 46वीं सालाना आम बैठक (AGM) के लिए e-Voting की प्रक्रिया को लेकर अड़चन सामने आई है। कंपनी को 26 जून 2026 से NSDL और CDSL से शेयरधारकों का जरूरी BenPos (Beneficial Position) डेटा नहीं मिला है। इसके चलते कंपनी ने BSE से e-Voting के लिए 26 जून 2026 को दूसरा कट-ऑफ डेट मानने की मांग की है।
आसान भाषा में समझें तो कट-ऑफ डेट के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन से शेयरधारक AGM में e-Voting के लिए पात्र होंगे। कंपनी ने AGM के नोटिस में 23 सितंबर 2026 को कट-ऑफ डेट बताया था। अब कंपनी चाहती है कि इसकी जगह 26 जून 2026 को दूसरा कट-ऑफ डेट माना जाए।
कंपनी ने 21 सितंबर को BSE को भेजे पत्र में बताया कि उसे 26 जून से NSDL और CDSL से BenPos डेटा नहीं मिला है। कंपनी का कहना है कि उसने इस संबंध में लागू सभी शुल्क और बकाया का भुगतान कर दिया है।
कंपनी के मुताबिक, डेटा उपलब्ध नहीं होने की वजह से AGM से जुड़े जरूरी अनुपालन और e-Voting की तैयारियां तय समय पर पूरी करने में परेशानी हो रही है।
इसी वजह से कंपनी ने BSE से 26 जून 2026 को दूसरा कट-ऑफ डेट मानने का अनुरोध किया है, ताकि AGM में e-Voting के लिए पात्र सदस्यों का निर्धारण किया जा सके।
कंपनी ने यह भी कहा है कि वह इस बारे में स्टॉक एक्सचेंज और अन्य संबंधित पक्षों को जरूरी जानकारी देगी। साथ ही, e-Voting के नतीजों की स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट तैयार करते समय भी इस स्थिति को ध्यान में रखने का अनुरोध किया गया है।
‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ का प्रसारण हर शनिवार और रविवार रात 9:30 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर किया जाता है, जबकि इसे Sony LIV पर एक साथ स्ट्रीम भी किया जाता है।
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Samachar4media Bureau
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के नए एंटरटेनमेंट शो ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ ने लॉन्चिंग के साथ ही शानदार शुरुआत की है। सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (SET) और सोनी लिव (Sony LIV) पर प्रसारित इस शो ने अपने प्रीमियर के बाद रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन दर्ज किया है।
कंपनी के अनुसार, 19 सितंबर को प्रीमियर के बाद Sony LIV पर यह शो प्लेटफॉर्म की किसी भी नॉन-फिक्शन प्रॉपर्टी के लिए सबसे बड़ा लॉन्च-डे दर्ज करने में सफल रहा। इस उपलब्धि के साथ शो ने डिजिटल दर्शकों के बीच अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
शो की शुरुआत के साथ सोशल मीडिया पर भी इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। शनिवार शाम तक यह कार्यक्रम X (पूर्व में ट्विटर) पर दुनिया भर में #1 ट्रेंड करता रहा। कंपनी का कहना है कि यह प्रतिक्रिया रोहित शर्मा को एक बिल्कुल नए अंदाज में देखने को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और उनकी वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाती है।
प्रीमियर से पहले भी शो की झलकियों को सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज और एंगेजमेंट मिले थे। वहीं, शो के प्रसारण के बाद रोहित शर्मा का हास्य, सहज अंदाज और मेहमानों के साथ उनकी दोस्ताना केमिस्ट्री दर्शकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी रही।
दर्शकों ने क्रिकेट मैदान से बाहर रोहित शर्मा के एक अलग और अनौपचारिक रूप को पसंद किया। उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रियाओं, हाजिरजवाबी और मेहमानों के साथ सहज बातचीत को दर्शकों ने खूब सराहा।
वैश्विक स्तर पर सफल ‘फैमिली फ्यूड’ फॉर्मेट पर आधारित इस शो का निर्माण Fremantle ने किया है। ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ परिवार आधारित मनोरंजन, सहभागिता और सामूहिक दर्शक अनुभव पर केंद्रित है। शो से कई ब्रैंड भी जुड़े हैं, जिन्होंने SPNI के टेलीविजन और डिजिटल इकोसिस्टम के माध्यम से दर्शकों तक अपनी पहुंच बनाई है।
शो की रिकॉर्डतोड़ शुरुआत पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन, सोनी मराठी और सोनी लिव के चीफ कंटेंट ऑफिसर नचिकेत पंतवैद्य ने कहा कि ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ को दर्शकों से असाधारण प्रतिक्रिया मिली है। रोहित शर्मा दुनिया के बेहतरीन क्रिकेटरों में से एक हैं और दर्शकों के साथ उनका विशेष जुड़ाव है। इस शो के माध्यम से दर्शक उनके हास्य, सहजता और गर्मजोशी भरे व्यक्तित्व को एक नए रूप में देख रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि Sony LIV पर रिकॉर्ड लॉन्च और टेलीविजन व सोशल मीडिया पर मिली व्यापक प्रतिक्रिया इस फॉर्मेट और रोहित शर्मा पर उनके विश्वास को सही साबित करती है। ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ का प्रसारण हर शनिवार और रविवार रात 9:30 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर किया जाता है, जबकि इसे Sony LIV पर एक साथ स्ट्रीम भी किया जाता है।