अनु सिक्का Jio Studios में बनीं एनिमेशन की हेड

मीडिया इंडस्ट्री की अनुभवी एग्जिक्यूटिव अनु सिक्का ने Jio Studios में हेड ऑफ एनिमेशन के तौर पर जॉइन किया है।

Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
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मीडिया इंडस्ट्री की अनुभवी एग्जिक्यूटिव अनु सिक्का ने Jio Studios में हेड ऑफ एनिमेशन के तौर पर जॉइन किया है। इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया से इसकी पुष्टि की है।

यह नियुक्ति अनु सिक्का का अगला प्रोफेशनल कदम है। उन्होंने हाल ही में JioStar में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड–किड्स एंटरटेनमेंट एंड इंफोटेनमेंट के पद से इस्तीफा दिया था। इसके साथ ही Viacom18 के साथ उनका दो दशक से ज्यादा लंबा जुड़ाव भी खत्म हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज और द वॉल्ट डिज्नी कंपनी के भारत में मीडिया कारोबार के विलय के बाद Viacom18, JioStar का हिस्सा बन गया था।

Jio Studios में अपनी नई भूमिका में अनु सिक्का एनिमेशन, बच्चों के मनोरंजन, कंटेंट डेवलपमेंट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) तैयार करने का अपना लंबा अनुभव इस्तेमाल करेंगी। हालांकि, उनकी नई भूमिका में जिम्मेदारियों के बारे में अभी आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

अनु सिक्का ने 2006 में Viacom18 जॉइन किया था। यहां उन्होंने नेटवर्क के बच्चों के मनोरंजन से जुड़े पोर्टफोलियो को तैयार करने और उसका विस्तार करने में अहम भूमिका निभाई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत में देश में तैयार किए गए एनिमेशन और कैरेक्टर आधारित मनोरंजन को मजबूत करने में भी योगदान दिया।

वह Motu Patlu, Shiva, Gattu Battu, Rudra, Keymon Ache और Pakdam Pakdai जैसे कई लोकप्रिय भारतीय एनिमेशन प्रॉपर्टीज के निर्माण और विकास से जुड़ी रही हैं। उनके नेतृत्व में किड्स एंटरटेनमेंट क्लस्टर ने 650 घंटे से ज्यादा स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया ओरिजिनल कंटेंट बनाया।

अनु सिक्का ने Ninja Hattori, Oggy and the Cockroaches और Doraemon जैसे बड़े इंटरनेशनल बच्चों के कंटेंट की खरीद और उन्हें भारतीय दर्शकों के हिसाब से तैयार करने का काम भी देखा। वह Nickelodeon’s Kids’ Choice Awards को भारत लाने और इसे नेटवर्क के लिए हर साल होने वाले कार्यक्रम के तौर पर विकसित करने से भी जुड़ी रही हैं।

अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट स्ट्रैटेजी, प्रोग्रामिंग, शेड्यूलिंग, कमीशनिंग, एक्विजिशन, बजट, मार्केटिंग और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स समेत कई तरह की जिम्मेदारियां संभालीं।

Viacom18 से पहले अनु सिक्का ने अपने करियर की शुरुआत Newstrack से करंट अफेयर्स प्रोग्रामिंग में की थी। Newstrack बाद में Aaj Tak का हिस्सा बना। इसके बाद उन्होंने BITV और Tara Punjabi में काम किया। बाद में उन्होंने SAB TV के दिल्ली ब्यूरो का नेतृत्व किया, जहां उन्होंने करंट अफेयर्स प्रोग्रामिंग पर काम किया। Viacom18 में जाने से पहले वह Hungama Kids Channel में क्रिएटिव डायरेक्टर भी रही थीं।

 

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BARC पर अनिश्चितता से M&E इंडस्ट्री पर संकट, ऐड से टीवी रोजगार तक पर असर पड़ने की आशंका

भारत में टीवी रेटिंग्स की लंबे समय से जारी रोक अब सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं रह गई है कि ऑडियंस मीजरमेंट फिर कब शुरू होगी।

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Tuesday, 22 September, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारत में टीवी रेटिंग्स की लंबे समय से जारी रोक अब सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं रह गई है कि ऑडियंस मीजरमेंट फिर कब शुरू होगी। ब्रॉडकास्टर्स अब इस बड़े सवाल पर भी विचार कर रहे हैं कि अगर देश की मुख्य टीवी ऑडियंस मापने वाली संस्था BARC India को ही बंद कर दिया जाता है, तो पूरे मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) इकोसिस्टम पर इसका क्या असर पड़ेगा। यह मुद्दा सोमवार को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) की बोर्ड स्तर की बैठक में उठा। यह बैठक IBDF की 27वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के साथ हुई।

ब्रॉडकास्टर्स सरकार के सामने इस मामले को औपचारिक तौर पर उठाने पर विचार कर रहे हैं। नवंबर को इस गतिरोध को खत्म करने के लिए अहम समयसीमा के तौर पर देखा जा रहा है। अगर तब तक स्थिति साफ नहीं होती है, तो इंडस्ट्री BARC को बंद करने जैसे ज्यादा कड़े विकल्पों पर विचार कर सकती है। 

हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि BARC को बंद करना आखिरी विकल्प होगा। उनकी तत्काल मांग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से यह स्पष्ट करने की है कि अभी क्या-क्या किया जाना बाकी है और रेटिंग्स दोबारा शुरू करने के लिए आगे का रास्ता क्या होगा। लेकिन इंडस्ट्री की प्रमुख संस्था में मौजूदा ऑडियंस मीजरमेंट व्यवस्था को ही खत्म करने की संभावना पर चर्चा होना बताता है कि लंबे समय से रेटिंग्स बंद रहने के कारण कारोबारी दबाव बढ़ रहा है।

BARC के बंद होने का असर सिर्फ टीवी चैनलों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर कंटेंट में निवेश, प्रोडक्शन कंपनियों और टीवी से होने वाली कमाई पर निर्भर बड़ी संख्या में काम करने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।

टीवी इंडस्ट्री की ‘कॉमन करेंसी’ खत्म हो जाएगी

टीवी रेटिंग्स इंडस्ट्री के लिए एक तरह की कॉमन करेंसी हैं। ब्रॉडकास्टर्स इनका इस्तेमाल अपने चैनलों की ऑडियंस पहुंच दिखाने के लिए करते हैं। विज्ञापनदाता इन आंकड़ों से अपने कैंपेन का आकलन करते हैं, जबकि मीडिया एजेंसियां इन्हीं आंकड़ों के आधार पर मीडिया निवेश की योजना और कीमत तय करती हैं। BARC के बंद होने से वह संस्था ही खत्म हो जाएगी, जो सभी के लिए एक साझा संदर्भ उपलब्ध कराती है। इससे टीवी ऑडियंस को मीजरमेंटे के लिए इंडस्ट्री के पास कोई स्वीकार्य और स्वतंत्र बेंचमार्क नहीं रह सकता है।

एक बड़े ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया, “लोग इसे ब्रॉडकास्टर्स की समस्या मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। टीवी विज्ञापन कंटेंट के लिए पैसा देता है, कंटेंट पूरी इंडस्ट्री को रोजगार देता है और यह सब एक साझा मीजरमेंट व्यवस्था पर टिका है।”

तुरंत होने वाला कारोबारी असर विज्ञापन दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के रूप में सामने आ सकता है। ब्रॉडकास्टर्स पुराने रेटिंग आंकड़े, अपना आंतरिक डेटा और दूसरे ऑडियंस संकेतक दे सकते हैं, लेकिन विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के पास चैनलों और कार्यक्रमों की तुलना के लिए मौजूदा इंडस्ट्री-लेवल आंकड़े नहीं होंगे।

छोटे और रीजनल ब्रॉडकास्टर्स के लिए यह समस्या और बड़ी हो सकती है। बड़े नेटवर्क कुछ हद तक अपने ब्रैंड संबंधों और पुराने प्रदर्शन पर निर्भर कर सकते हैं, लेकिन नए और छोटे चैनलों के लिए विज्ञापन बाजार में अपनी वैल्यू साबित करने में स्वतंत्र रूप से मापी गई ऑडियंस ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

विज्ञापन बजट को लेकर बढ़ सकती है परेशानी

मीडिया एजेंसियों के काम पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है। टीवी प्लानिंग में आमतौर पर ऑडियंस डेटा के आधार पर चैनलों, कार्यक्रमों, बाजारों और अलग-अलग समय स्लॉट की तुलना की जाती है। BARC नहीं होने पर प्लानर्स को दूसरे डेटा स्रोतों और पुराने आंकड़ों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा।

एक वरिष्ठ मीडिया एजेंसी अधिकारी के अनुसार, किसी सिफारिश को सही ठहराने के लिए प्लानर को एक ठोस आंकड़े की जरूरत होती है। अगर टीवी ऐसा आंकड़ा उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो विज्ञापन बजट उन प्लेटफॉर्म की ओर जा सकता है जो ऐसा मीजरमेंट उपलब्ध कराते हैं।

इसका यह मतलब जरूरी नहीं है कि विज्ञापनदाता तुरंत अपने टीवी बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाएंगे। लेकिन लंबे समय तक रेटिंग्स नहीं होने से टीवी के लिए विज्ञापन हासिल करने का आधार जरूर बदल सकता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से ही विज्ञापनदाताओं को कैंपेन और ऑडियंस मीजरमेंटे के कई तरीके देते हैं। ऐसे में लंबे समय तक टीवी रेटिंग्स का अभाव टीवी प्लानिंग को ज्यादा मुश्किल बना सकता है और विज्ञापन से मिलने वाले रिटर्न को एक सामान्य और स्वीकार्य माप के जरिए साबित करने की इंडस्ट्री की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

कंटेंट में निवेश पर भी पड़ सकता है असर

इसका असर आगे चलकर विज्ञापन से कंटेंट बिजनेस तक पहुंच सकता है। टीवी चैनल किसी कार्यक्रम को जारी रखने, उसका विस्तार करने या उसे बदलने का फैसला लेते समय ऑडियंस प्रदर्शन के साथ कई दूसरे कारोबारी और संपादकीय पहलुओं को भी देखते हैं। वहीं, प्रोडक्शन कंपनियां ब्रॉडकास्टर्स से मिलने वाले कमीशन और प्रोग्रामिंग बजट पर निर्भर करती हैं।

प्रोडक्शन बिजनेस से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, अगर चैनलों को अपनी कमाई को लेकर स्पष्टता कम होगी, तो वे नए कार्यक्रमों को कमीशन करने में ज्यादा सावधानी बरतेंगे और इसका असर सबसे पहले कार्यक्रम बनाने वाले लोगों पर पड़ेगा। लंबे समय तक चलने वाला यह मीजरमेंट संकट प्रोडक्शन हाउस, लेखक, निर्देशक, तकनीशियन, स्टूडियो और टीवी से जुड़े दूसरे प्रोफेशनल्स को भी प्रभावित कर सकता है। 

विज्ञापन से होने वाली कमाई को लेकर कम स्पष्टता के कारण ब्रॉडकास्टर्स प्रोग्रामिंग पर खर्च करने में ज्यादा सतर्क हो सकते हैं। खासकर महंगे फॉर्मेट और नए कार्यक्रमों के मामले में यह चिंता ज्यादा हो सकती है, जहां ऑडियंस की प्रतिक्रिया पहले से पता नहीं होती। इसका असर टीवी को सपोर्ट करने वाले टेक्नोलॉजी और सर्विस इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है, जिसमें प्रोडक्शन, पोस्ट-प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और मीजरमेंट से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के सामने अलग चिंता

इसका असर न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है। न्यूज चैनलों में बड़ी संपादकीय और तकनीकी टीमें काम करती हैं और वे विज्ञापन से होने वाली कमाई पर काफी निर्भर रहते हैं।

एक काम करने वाली मीजरमेंट व्यवस्था न्यूज चैनलों को विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के सामने अपनी पहुंच साबित करने में मदद करती है। मौजूदा रेटिंग्स नहीं होने पर ऑडियंस डिलीवरी की कारोबारी वैल्यू साबित करना मुश्किल हो जाता है।

एक वरिष्ठ न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अधिकारी के अनुसार, अगर नीति का उद्देश्य जवाबदेह मीडिया को मजबूत करना है, तो उसके आर्थिक आधार की भी सुरक्षा जरूरी है। न्यूज रूम से जवाबदेही की लागत उठाने की उम्मीद करते हुए उसकी पहुंच दिखाने की क्षमता को खत्म नहीं किया जा सकता। यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 के जरिए टीवी ऑडियंस मीजरमेंट में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

BARC को बदलना रातोंरात संभव नहीं

अगर BARC बंद होता है तो एक बड़ा सवाल यह भी होगा कि उसके बाद टीवी ऑडियंस को कौन मापेगा? 

टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 में रेटिंग एजेंसियों के लिए नया नियामकीय ढांचा बनाया गया है। इसमें 80,000 मीटर वाले घरों का पैनल, स्वतंत्र निदेशक, सालाना ऑडिट, टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल मीजरमेंट और अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

इस नीति में रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की जरूरत को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये किया गया है। वहीं, न्यूनतम पैनल का आकार 50,000 से बढ़ाकर 80,000 घर कर दिया गया है। रेटिंग एजेंसी के बोर्ड में कम से कम 33% स्वतंत्र निदेशक होना जरूरी है।

हालांकि, सिर्फ नियामकीय रजिस्ट्रेशन से नई रेटिंग एजेंसी तैयार नहीं हो जाएगी। नए खिलाड़ी को मीजरमेंट का बुनियादी ढांचा तैयार या हासिल करना होगा, एक प्रतिनिधि पैनल बनाना होगा, मीजरमेंट की कार्यप्रणाली विकसित करनी होगी, ऑडिट कराना होगा और ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच अपनी स्वीकार्यता बनानी होगी। मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, भरोसेमंद विकल्प तैयार करना बड़ा काम है। इसमें समय, भरोसा और बाजार के सभी पक्षों का विश्वास जरूरी होगा।

यही वजह है कि BARC को बंद करना मौजूदा सस्पेंशन से काफी अलग स्थिति होगी। सस्पेंशन की स्थिति में मौजूदा संस्था और उसका बुनियादी ढांचा बना रहता है और नियामकीय जरूरतें पूरी होने के बाद मीजरमेंट दोबारा शुरू किया जा सकता है। लेकिन बंद होने की स्थिति में इंडस्ट्री को पूरी ऑडियंस मीजरमेंट व्यवस्था फिर से तैयार करनी पड़ सकती है और एक नई साझा ‘कॉमन करेंसी’ स्थापित करनी होगी।

नवंबर से पहले इंडस्ट्री चाहती है साफ स्थिति 

BARC ने मंत्रालय को बताया है कि उसका पैनल बढ़कर 70,876 घरों तक पहुंच गया है और उसे दिसंबर तक 80,000 घरों की जरूरत पूरी होने की उम्मीद है।

जुलाई में MIB की BP&L विंग ने BARC के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन की सिफारिश की थी। इससे बाकी जरूरतों को पूरा करते हुए BARC को रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की संभावित अनुमति मिल सकती थी। हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि उन्हें अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि रेटिंग्स दोबारा शुरू होने में आखिर रुकावट क्या है।

एक वरिष्ठ इंडस्ट्री अधिकारी के मुताबिक, ब्रॉडकास्टर्स को अभी भी स्पष्ट नहीं है कि BARC को रोकने वाली वास्तविक समस्या क्या है। लंबे समय से नियामकीय प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इंडस्ट्री को यह जानना जरूरी है कि रेटिंग्स दोबारा शुरू होने से कौन-सा खास मुद्दा रोक रहा है। अगर जरूरतें स्पष्ट हैं तो BARC को बताया जाना चाहिए कि क्या बाकी है या फिर शर्तों के साथ उसे रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

एक अन्य वरिष्ठ मीडिया अधिकारी ने कहा कि टीवी इंडस्ट्री अनिश्चित समय तक साझा मीजरमेंट व्यवस्था के बिना काम नहीं कर सकती। विज्ञापनदाताओं और ब्रॉडकास्टर्स दोनों को स्पष्टता चाहिए और एजेंसियों को प्लानिंग के लिए भरोसेमंद आधार चाहिए। यह स्थिति जितने लंबे समय तक चलेगी, कारोबारी असर उतना ही बढ़ेगा।

इसलिए ब्रॉडकास्टर्स के लिए नवंबर की समयसीमा सिर्फ रेटिंग्स दोबारा शुरू करने से जुड़ी नहीं है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना भी है कि अस्थायी मीजरमेंट संकट टीवी इंडस्ट्री और उस पर निर्भर कारोबार के लिए लंबे समय की संरचनात्मक समस्या न बन जाए।

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Sun TV Network: AGM में डिविडेंड मंजूर, काव्या मारन फिर डायरेक्टर, 99% से भी ज्यादा वोट

सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network Limited) के शेयरधारकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए वित्तीय खातों (Financial Statements) को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
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हिंदी हेडलाइन

Sun TV Network की AGM में FY26 के वित्तीय खातों को मंजूरी, अंतरिम डिविडेंड भी हुआ फाइनल

सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network Limited) के शेयरधारकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए वित्तीय खातों (Financial Statements) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दिए गए अंतरिम डिविडेंड को अंतिम डिविडेंड के तौर पर भी मंजूरी मिल गई है। ये फैसले कंपनी की 41वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में लिए गए।

कंपनी की AGM 18 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई। बैठक सुबह 10 बजे शुरू हुई और 10:22 बजे खत्म हुई। कंपनी के चेयरमैन कलानिथि मारन ने कोरम पूरा होने की पुष्टि के बाद बैठक की अध्यक्षता की। 21 सितंबर 2026 को जमा की गई स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट में सभी प्रस्तावों के मतदान के नतीजे दिए गए हैं।

94.25% शेयरों पर हुआ मतदान

रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के कुल 1,03,045 शेयरधारक थे। इनमें 39,40,84,620 शेयरों पर वोटिंग हुई, जो कंपनी के कुल बकाया शेयरों का 94.25% है।

प्रमोटर ग्रुप के पास 29,55,63,457 शेयर थे और उसने ई-वोटिंग के जरिए अपने 100% वोट डाले। पब्लिक इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की भागीदारी 94.03% रही, जबकि पब्लिक नॉन-इंस्टीट्यूशनल शेयरधारकों की 42.41% हिस्सेदारी वाले वोटिंग में भागीदारी रही।

चारों प्रस्ताव मंजूर

AGM में शेयरधारकों के सामने कुल चार प्रस्ताव रखे गए और सभी प्रस्ताव पास हो गए। प्रमोटर ग्रुप ने हर प्रस्ताव के पक्ष में सर्वसम्मति से वोट किया। पब्लिक शेयरधारकों के बीच भी ज्यादातर प्रस्तावों को 99.9% से ज्यादा वोट मिले।

पहला प्रस्ताव: वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए वित्तीय खातों को मंजूरी दी गई। इसके पक्ष में 99.9997% और विरोध में 0.0003% वोट पड़े।

दूसरा प्रस्ताव: वित्त वर्ष 2025-26 के अंतरिम डिविडेंड को अंतिम डिविडेंड के तौर पर मंजूरी दी गई। इसके पक्ष में 99.9939% और विरोध में 0.0061% वोट पड़े।

तीसरा प्रस्ताव: रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहीं काव्या कलानिधि मारन (DIN: 07883203) को दोबारा डायरेक्टर नियुक्त किया गया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.9032% और विरोध में 0.0968% वोट पड़े। उनके खिलाफ कुल 3,59,691 वोट पड़े, जिनमें मुख्य रूप से पब्लिक इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के वोट शामिल थे।

चौथा प्रस्ताव: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक की पुष्टि की गई। इसके पक्ष में 99.9997% और विरोध में 0.0003% वोट पड़े।

15 से 17 सितंबर तक हुई ई-वोटिंग

AGM से पहले 15 सितंबर 2026 से 17 सितंबर 2026 तक रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा उपलब्ध थी। M/s Lakshmi Subramanian & Associates की पार्टनर स्वेता सुब्रमणियन ने स्क्रूटिनाइजर की भूमिका निभाई।

शेयरधारकों की सहमति से अनमॉडिफाइड ऑडिटर रिपोर्ट और सेक्रेटेरियल ऑडिटर रिपोर्ट को पढ़ा हुआ माना गया।

 

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सहारा वन मीडिया की AGM में e-Voting को लेकर अड़चन, 26 जून को कट-ऑफ डेट मानने की मांग

सहारा वन मीडिया व एंटरटेनमेंट लिमिटेड (Sahara One Media and Entertainment Limited) की 46वीं सालाना आम बैठक (AGM) के लिए e-Voting की प्रक्रिया को लेकर अड़चन सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
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सहारा वन मीडिया व एंटरटेनमेंट लिमिटेड (Sahara One Media and Entertainment Limited) की 46वीं सालाना आम बैठक (AGM) के लिए e-Voting की प्रक्रिया को लेकर अड़चन सामने आई है। कंपनी को 26 जून 2026 से NSDL और CDSL से शेयरधारकों का जरूरी BenPos (Beneficial Position) डेटा नहीं मिला है। इसके चलते कंपनी ने BSE से e-Voting के लिए 26 जून 2026 को दूसरा कट-ऑफ डेट मानने की मांग की है।

आसान भाषा में समझें तो कट-ऑफ डेट के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन से शेयरधारक AGM में e-Voting के लिए पात्र होंगे। कंपनी ने AGM के नोटिस में 23 सितंबर 2026 को कट-ऑफ डेट बताया था। अब कंपनी चाहती है कि इसकी जगह 26 जून 2026 को दूसरा कट-ऑफ डेट माना जाए।

कंपनी ने 21 सितंबर को BSE को भेजे पत्र में बताया कि उसे 26 जून से NSDL और CDSL से BenPos डेटा नहीं मिला है। कंपनी का कहना है कि उसने इस संबंध में लागू सभी शुल्क और बकाया का भुगतान कर दिया है।

कंपनी के मुताबिक, डेटा उपलब्ध नहीं होने की वजह से AGM से जुड़े जरूरी अनुपालन और e-Voting की तैयारियां तय समय पर पूरी करने में परेशानी हो रही है।

इसी वजह से कंपनी ने BSE से 26 जून 2026 को दूसरा कट-ऑफ डेट मानने का अनुरोध किया है, ताकि AGM में e-Voting के लिए पात्र सदस्यों का निर्धारण किया जा सके।

कंपनी ने यह भी कहा है कि वह इस बारे में स्टॉक एक्सचेंज और अन्य संबंधित पक्षों को जरूरी जानकारी देगी। साथ ही, e-Voting के नतीजों की स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट तैयार करते समय भी इस स्थिति को ध्यान में रखने का अनुरोध किया गया है। 

 

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SPNI के नए शो ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ ने लॉन्च के साथ ही बटोरी लोकप्रियता

‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ का प्रसारण हर शनिवार और रविवार रात 9:30 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर किया जाता है, जबकि इसे Sony LIV पर एक साथ स्ट्रीम भी किया जाता है।

Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
Family Full House Show

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के नए एंटरटेनमेंट शो ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ ने लॉन्चिंग के साथ ही शानदार शुरुआत की है। सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (SET) और सोनी लिव (Sony LIV) पर प्रसारित इस शो ने अपने प्रीमियर के बाद रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन दर्ज किया है।

कंपनी के अनुसार, 19 सितंबर को प्रीमियर के बाद Sony LIV पर यह शो प्लेटफॉर्म की किसी भी नॉन-फिक्शन प्रॉपर्टी के लिए सबसे बड़ा लॉन्च-डे दर्ज करने में सफल रहा। इस उपलब्धि के साथ शो ने डिजिटल दर्शकों के बीच अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

शो की शुरुआत के साथ सोशल मीडिया पर भी इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। शनिवार शाम तक यह कार्यक्रम X (पूर्व में ट्विटर) पर दुनिया भर में #1 ट्रेंड करता रहा। कंपनी का कहना है कि यह प्रतिक्रिया रोहित शर्मा को एक बिल्कुल नए अंदाज में देखने को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और उनकी वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाती है।

प्रीमियर से पहले भी शो की झलकियों को सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज और एंगेजमेंट मिले थे। वहीं, शो के प्रसारण के बाद रोहित शर्मा का हास्य, सहज अंदाज और मेहमानों के साथ उनकी दोस्ताना केमिस्ट्री दर्शकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी रही।

दर्शकों ने क्रिकेट मैदान से बाहर रोहित शर्मा के एक अलग और अनौपचारिक रूप को पसंद किया। उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रियाओं, हाजिरजवाबी और मेहमानों के साथ सहज बातचीत को दर्शकों ने खूब सराहा।

वैश्विक स्तर पर सफल ‘फैमिली फ्यूड’ फॉर्मेट पर आधारित इस शो का निर्माण Fremantle ने किया है। ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ परिवार आधारित मनोरंजन, सहभागिता और सामूहिक दर्शक अनुभव पर केंद्रित है। शो से कई ब्रैंड भी जुड़े हैं, जिन्होंने SPNI के टेलीविजन और डिजिटल इकोसिस्टम के माध्यम से दर्शकों तक अपनी पहुंच बनाई है।

शो की रिकॉर्डतोड़ शुरुआत पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन, सोनी मराठी और सोनी लिव के चीफ कंटेंट ऑफिसर नचिकेत पंतवैद्य ने कहा कि ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ को दर्शकों से असाधारण प्रतिक्रिया मिली है। रोहित शर्मा दुनिया के बेहतरीन क्रिकेटरों में से एक हैं और दर्शकों के साथ उनका विशेष जुड़ाव है। इस शो के माध्यम से दर्शक उनके हास्य, सहजता और गर्मजोशी भरे व्यक्तित्व को एक नए रूप में देख रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि Sony LIV पर रिकॉर्ड लॉन्च और टेलीविजन व सोशल मीडिया पर मिली व्यापक प्रतिक्रिया इस फॉर्मेट और रोहित शर्मा पर उनके विश्वास को सही साबित करती है। ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ का प्रसारण हर शनिवार और रविवार रात 9:30 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर किया जाता है, जबकि इसे Sony LIV पर एक साथ स्ट्रीम भी किया जाता है।

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BARC रेटिंग शुरू कराने के लिए ब्रॉडकास्टर्स का दबाव, संस्था के भविष्य पर भी नजर

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया पर बंद होने का खतरा है। नवंबर तक टीवी रेटिंग शुरू नहीं हुई तो ब्रॉडकास्टर्स BARC को बंद करने पर विचार किया जा सकता है।

Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।


ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया पर अब बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। अगर नवंबर तक टीवी ऑडियंस रेटिंग फिर से शुरू नहीं होती है, तो ब्रॉडकास्टर्स BARC को बंद करने जैसे कड़े कदम पर विचार कर सकते हैं। इससे पहले इंडस्ट्री आखिरी कोशिश के तौर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से BARC को रेटिंग शुरू करने की अनुमति देने की मांग करने की तैयारी कर रही है।

सोमवार को बोर्ड स्तर की चर्चा में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) के बोर्ड सदस्यों ने लंबे समय से बंद पड़ी टीवी रेटिंग और BARC के दोबारा मीजरमेंट शुरू करने को लेकर बनी अनिश्चितता पर चर्चा की। अब इंडस्ट्री सरकार के सामने नवंबर की स्पष्ट समयसीमा रखने पर विचार कर रही है। अगर तब तक कोई समाधान नहीं निकलता है, तो BARC को बंद करने समेत अन्य कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने BARC को नवंबर तक का समय दिया था, ताकि वह नई TV Ratings Policy के तहत जरूरी बदलाव लागू कर सके और रेटिंग दोबारा शुरू करने के लिए मंत्रालय की शर्तों को पूरा कर सके।

मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, ब्रॉडकास्टर्स अब यह भी सवाल उठा रहे हैं कि BARC को MIB की ओर से लगातार मंजूरी क्यों नहीं मिल रही है। खास तौर पर तब, जब BARC ने टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 की कई शर्तों को पूरा करने की दिशा में प्रगति की है।

इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ब्रॉडकास्टर्स अभी भी यह साफ तौर पर नहीं समझ पा रहे हैं कि BARC के रास्ते में आखिर क्या रुकावट है। लंबे समय से नियामकीय प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इंडस्ट्री को यह पता होना चाहिए कि रेटिंग दोबारा शुरू होने से कौन-सी खास समस्या रोक रही है। अगर जरूरी शर्तें स्पष्ट हैं, तो BARC को बताया जाना चाहिए कि क्या बाकी है या फिर कुछ शर्तों के साथ उसे रेटिंग शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

रेटिंग बंद होने से बढ़ रही परेशानी

रेटिंग को लेकर बनी यह अनिश्चितता ब्रॉडकास्टर्स के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। टीवी चैनल, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां विज्ञापन कैंपेन की योजना बनाने, विज्ञापन दर तय करने और कार्यक्रमों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए टीवी रेटिंग को एक साझा आधार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

MIB ने जुलाई में BARC को न्यूज और नॉन-न्यूज दोनों कैटेगरी में टीवी रेटिंग रोकने का निर्देश दिया था। यह रोक तब तक है, जब तक BARC को नई टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं मिल जाता। 

नई नीति में कई बदलाव किए गए हैं। इनमें 80,000 मीटर वाले घरों का बड़ा पैनल, स्वतंत्र निदेशक, हर साल ऑडिट, टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल मीजरमेंट और लैंडिंग-पेज व्यूअरशिप को आधिकारिक रेटिंग से बाहर रखना शामिल है। मंत्रालय ने BARC की नई व्यवस्था के तहत अनुपालन की जांच शुरू कर दी है। वहीं, ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि लंबे समय तक रेटिंग बंद रहने से टीवी विज्ञापन बाजार पर लगातार असर पड़ रहा है।

मौजूदा ऑडियंस डेटा नहीं होने के कारण ब्रॉडकास्टर्स को चैनलों के प्रदर्शन और विज्ञापन इन्वेंट्री की कीमत तय करने में कम जानकारी मिल रही है। दूसरी तरफ विज्ञापनदाता और एजेंसियां भी टीवी कैंपेन के प्रदर्शन को समझने और अपने बजट तय करने में मुश्किल का सामना कर रहे हैं।

BARC ने 70,876 घरों तक बढ़ाया पैनल

जुलाई में MIB के BP&L विंग ने BARC को अस्थायी रजिस्ट्रेशन देने की सिफारिश की थी। इससे BARC बाकी जरूरी शर्तों को पूरा करते हुए रेटिंग दोबारा शुरू कर सकता था।

BARC ने मंत्रालय को बताया था कि उसका पैनल बढ़कर 70,876 घरों तक पहुंच गया है और दिसंबर तक 80,000 घरों की जरूरी संख्या पूरी होने की उम्मीद है। हालांकि, रेटिंग दोबारा शुरू होने को लेकर जारी अनिश्चितता के कारण अब ब्रॉडकास्टर्स इस मामले को सीधे सरकार के सामने उठाने पर विचार कर रहे हैं।

एक अन्य वरिष्ठ मीडिया अधिकारी ने कहा कि टीवी इंडस्ट्री साझा मीजरमेंट व्यवस्था के बिना हमेशा काम नहीं कर सकती। विज्ञापनदाताओं और ब्रॉडकास्टर्स दोनों को स्पष्टता चाहिए और एजेंसियों को योजना बनाने के लिए एक भरोसेमंद आधार चाहिए। जितनी देर यह स्थिति बनी रहेगी, कारोबारी स्तर पर उतना ही ज्यादा असर पड़ेगा।

नवंबर तक रेटिंग शुरू करने की मांग

ब्रॉडकास्टर्स सरकार को औपचारिक नोटिस या प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर रहे हैं। इसमें कहा जा सकता है कि नवंबर तक टीवी रेटिंग दोबारा शुरू होनी चाहिए। अगर नवंबर तक रेटिंग शुरू नहीं होती है, तो इंडस्ट्री इस बात पर विचार कर सकती है कि BARC को मौजूदा रूप में आगे भी जारी रखा जाए या नहीं।

BARC को बंद करने की संभावना एक बड़ा कदम होगी, क्योंकि यह भारत में टीवी ऑडियंस मीजरमेंट की प्रमुख संस्था रही है। अगर BARC बंद होता है, तो इंडस्ट्री को टीवी ऑडियंस मीजरमेंट की भविष्य की व्यवस्था पर भी विचार करना होगा और यह देखना होगा कि कोई वैकल्पिक रेटिंग सिस्टम बनाया जा सकता है या नहीं। हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स BARC को बंद करने के विकल्प को फिलहाल आखिरी उपाय के तौर पर देख रहे हैं। उनकी तत्काल प्राथमिकता MIB से स्थिति स्पष्ट कराने और रेटिंग दोबारा शुरू करने का रास्ता निकालने की है।

नई नीति में कई बड़े बदलाव

यह पूरी स्थिति सरकार के उस उद्देश्य के बीच सामने आई है, जिसमें टीवी रेटिंग सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और स्वतंत्र बनाने की बात कही गई है।

टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 में कई संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। इनमें रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की शर्त को ₹20 करोड़ से घटाकर ₹5 करोड़ करना, मीजरमेंट पैनल को 50,000 से बढ़ाकर 80,000 घर करना, हर साल स्वतंत्र ऑडिट और रेटिंग एजेंसी के बोर्ड में कम से कम 33% स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति शामिल है।

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य टीवी ऑडियंस मीजरमेंट में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही को मजबूत करना है। सरकार की 24 जुलाई की सूचना के मुताबिक, उस समय तक नई नीति के तहत किसी भी रेटिंग एजेंसी को रजिस्टर नहीं किया गया था।

नई व्यवस्था लागू करने में लैंडिंग-पेज मेथडोलॉजी भी एक विवादित मुद्दा रही है। नई नीति में लैंडिंग-पेज व्यूअरशिप को आधिकारिक रेटिंग की गणना से बाहर रखा गया है। वहीं, ब्रॉडकास्टर्स की इसको लेकर अलग-अलग राय रही है। हाल की सरकार और इंडस्ट्री के बीच हुई चर्चाओं में यह मुद्दा भी शामिल रहा है कि BARC नई मेथडोलॉजी का पालन करते हुए रेटिंग दोबारा कैसे शुरू कर सकता है।

IBDF ने भी जताई टीवी इंडस्ट्री की अहमियत

इंडस्ट्री संगठन टीवी की आर्थिक अहमियत और एक स्थिर मीजरमेंट व्यवस्था की जरूरत को लगातार सामने रखते रहे हैं। सोमवार को इंडियन ब्रॉडकास्टिंकग व डिजिल फाउंडेशन की वार्षिक आम बैठक में IBDF के अध्यक्ष केविन वज ने कहा कि टेलीविजन भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक ढांचे का अहम हिस्सा बना हुआ है।

वहीं, IBDF के सेक्रेटरी जनरल और CEO अविनाश पांडे ने कहा कि राय अलग हो सकती है, लेकिन ब्रॉडकास्टिंग इकोसिस्टम के व्यापक हित को लेकर आपसी मतभेद नहीं होना चाहिए। ब्रॉडकास्टर्स की हालिया चर्चा से संकेत मिलता है कि इंडस्ट्री अब इस साझा रुख को सरकार के सामने ज्यादा सीधे तरीके से रखने की तैयारी कर रही है।

ब्रॉडकास्टर्स के लिए नवंबर की समयसीमा अब अहम पड़ाव बनती जा रही है। फिलहाल उनकी प्राथमिकता MIB को BARC की रेटिंग दोबारा शुरू करने की अनुमति देने के लिए मनाना है। इसके साथ बाकी अनुपालन से जुड़ी शर्तों को एक तय समयसीमा में पूरा किया जा सकता है। यदि यह कोशिश सफल नहीं होती है, तो ब्रॉडकास्टर्स इंडस्ट्री स्तर पर BARC को बंद करने की संभावना पर विचार करने की तैयारी कर रहे हैं।

 

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आईबीडीएफ की बैठक में बार्क टीवी रेटिंग तत्काल बहाल करने की मांग

आईबीडीएफ की 27वीं वार्षिक आम बैठक में सदस्यों ने बार्क टीवी रेटिंग तत्काल बहाल करने की मांग की। रेटिंग निलंबन से विज्ञापन, राजस्व और मीडिया योजना प्रभावित होने की बात कही।

Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
tvrating

इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (Indian Broadcasting and Digital Foundation) यानी आईबीडीएफ (IBDF) की 27वीं वार्षिक आम बैठक में सदस्यों ने बार्क (BARC) टेलीविजन रेटिंग को तत्काल बहाल करने की मांग की। प्रसारकों ने कहा कि रेटिंग लंबे समय तक निलंबित रहने से राजस्व और कारोबारी अनुमान प्रभावित हो रहे हैं, खासकर त्योहारी मौसम में।

सदस्यों के अनुसार, रेटिंग बंद होने से विज्ञापनदाताओं के बीच अनिश्चितता बढ़ी है और मीडिया प्लानिंग (Media Planning) प्रभावित हुई है। उनके मुताबिक, रेटिंग जल्द बहाल होने से विज्ञापनदाताओं का भरोसा लौटाने और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर (Broadcasting Sector) में कारोबारी गतिविधियों को सामान्य करने में मदद मिलेगी।

बैठक में सरकार द्वारा केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के नियम 7(11) को हटाने के फैसले का स्वागत किया गया। इस नियम में विज्ञापन अवधि के लिए 10+2 की सीमा तय थी। सदस्यों ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India) यानी ट्राई (TRAI) द्वारा 2012 के विज्ञापन अवधि संबंधी नियमों को रद्द किए जाने की भी सराहना की।

आईबीडीएफ के अध्यक्ष केविन वाज़ (Kevin Vaz) ने कहा कि टेलीविजन भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उद्योग के दीर्घकालिक हितों के लिए एकजुट आवाज जरूरी है। आईबीडीएफ के महासचिव एवं सीईओ अविनाश पांडे (Avinash Pandey) ने भी साझा जिम्मेदारी और सहयोग पर जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि 2025 में टेलीविजन का राजस्व करीब 617 अरब रुपये रहा, जो भारत के मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र का लगभग 22 प्रतिशत है। टेलीविजन हर महीने करीब 83.1 करोड़ और हर सप्ताह करीब 74.5 करोड़ दर्शकों तक पहुंचता है।

बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), कॉपीराइट (Copyright), टैक्सेशन (Taxation), पायरेसी (Piracy), टेलीकॉम रेगुलेशन (Telecom Regulation) और विज्ञापन नियमों समेत उद्योग से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने निवेश और इनोवेशन (Innovation) को बढ़ावा देने वाली नीतियों की जरूरत बताई।

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BAG Films: AGM में सभी प्रस्ताव पास, सुधीर शुक्ला व चंदन कुमार की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी

B.A.G. Films and Media Limited की 33वीं वार्षिक आम बैठक यानी AGM 17 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई।

Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
BAG985

B.A.G. Films and Media Limited की 33वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 17 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने 19 सितंबर 2026 को वार्षिक आम बैठक के वोटिंग रिजल्ट और कंसोलिडेटेड स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट स्टॉक एक्सचेंज को भेजी है। कंपनी के मुताबिक, AGM में रखे गए सभी 13 प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए। इन प्रस्तावों पर रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान ई-वोटिंग के जरिए मतदान हुआ।

AGM में पहला प्रस्ताव कंपनी के 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिटेड स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, जिसमें कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट भी शामिल हैं, को मंजूरी देने से जुड़ा था। इसके साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट भी शामिल थीं। यह प्रस्ताव पास हो गया।

दूसरे प्रस्ताव में सुधीर शुक्ला को रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद, पात्र होने के कारण दोबारा निदेशक नियुक्त करने की मंजूरी दी गई। यह प्रस्ताव भी पास हुआ। तीसरे प्रस्ताव में चंदन कुमार जैन को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव भी पास हो गया।

इसके बाद प्रस्ताव संख्या 4 में News24 Broadcast India Limited के साथ Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। यह प्रस्ताव भी पास हुआ। प्रस्ताव संख्या 5 में E24 Glamour Limited के साथ Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। इसे भी मंजूरी मिल गई।

प्रस्ताव संख्या 6 में Skyline Tele Media Services Limited के साथ Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। यह प्रस्ताव भी पास हुआ। प्रस्ताव संख्या 7 में B.A.G. Live Entertainment Limited के साथ Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। इसे भी शेयरधारकों ने मंजूरी दी।

प्रस्ताव संख्या 8 में News24 Broadcast India Limited और B.A.G. Live Entertainment Limited के बीच Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। यह प्रस्ताव भी पास हुआ। प्रस्ताव संख्या 9 में News24 Broadcast India Limited और Skyline Tele Media Services Limited के बीच Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। इसे भी मंजूरी मिली।

प्रस्ताव संख्या 10 में News24 Broadcast India Limited और B.A.G. Convergence Limited के बीच Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। यह प्रस्ताव भी पास हुआ। प्रस्ताव संख्या 11 में E24 Glamour Limited और B.A.G. Live Entertainment Limited के बीच Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। इसे भी मंजूरी मिल गई।

प्रस्ताव संख्या 12 में E24 Glamour Limited और Skyline Tele Media Services Limited के बीच Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। यह प्रस्ताव भी पास हुआ। वहीं, प्रस्ताव संख्या 13 में E24 Glamour Limited और B.A.G. Convergence Limited के बीच Material Related Party Transactions को मंजूरी देने की बात थी। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ।

कंपनी के वोटिंग रिजल्ट के मुताबिक, 10 सितंबर 2026 रिकॉर्ड डेट थी और उस तारीख को कंपनी के रिकॉर्ड में कुल 73,639 शेयरधारक थे। बैठक में कुल 13 प्रस्तावों पर मतदान हुआ और सभी प्रस्ताव पास हुए। 

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News Leader ने हिंदी न्यूज ब्रॉडकास्टिंग में रखा कदम, जनहित के मुद्दों पर रहेगा फोकस

वरिष्ठ पत्रकार रोहित सावल के नेतृत्व में नोएडा से होगा इस हिंदी न्यूज चैनल का संचालन

Last Modified:
Saturday, 19 September, 2026
News Leader

Leader News Network Pvt. Ltd. द्वारा प्रमोटेड न्यूज लीडर (News Leader) ने नेशनल हिंदी न्यूज चैनल के तौर पर शुरुआत की है। चैनल का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रोहित सावल के नेतृत्व में नोएडा से किया जाएगा।

News Leader की टैगलाइन ‘अब बारी आपकी’ है। चैनल के मुताबिक, इसके जरिए खबरों के एजेंडे में दर्शकों की आवाज और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं को केंद्र में रखने का प्रयास किया जाएगा।

बतौर सीईओ और एडिटर-इन-चीफ रोहित सावल के नेतृत्व में News Leader ने ऐसा संपादकीय दृष्टिकोण अपनाने की बात कही है, जिसमें लोगों के मुद्दों को समझने और उनके सवाल उठाने पर फोकस रहेगा। 

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कलकत्ता HC ने की 'रिपब्लिक मीडिया' के अधिकारियों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई खारिज

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 'रिपब्लिक मीडिया' के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर और एडिटर-इन-चीफ अभिषेक कपूर और 'रिपब्लिक बांग्ला' के पत्रकार बिट्टू चौधरी के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्रवाई खारिज कर दी।

Last Modified:
Saturday, 19 September, 2026
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने 'रिपब्लिक मीडिया' के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर और एडिटर-इन-चीफ अभिषेक कपूर और 'रिपब्लिक बांग्ला' के पत्रकार बिट्टू चौधरी के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्रवाई खारिज कर दी है। यह मामला गायक और गीतकार कबीर सुमन को किए गए कथित फोन कॉल से जुड़ा था।

कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने सीआरपीसी की धारा 202 के तहत जरूरी समन जारी करने से पहले की जाने वाली जांच नहीं की। कोर्ट ने कहा कि यह जांच इसलिए जरूरी थी क्योंकि याचिकाकर्ता मजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहते थे।

न्यायमूर्ति उदय कुमार की बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड में यह साफ है कि दोनों याचिकाकर्ता अलीपुर के संबंधित मजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहते हैं। ऐसे में निचली अदालत ने जिस तरह सीधे कार्रवाई आगे बढ़ाई, वह सीआरपीसी की धारा 202 के कानूनी उद्देश्य और प्रावधान के खिलाफ है।

कोर्ट ने सभी कानूनी प्रावधानों, तथ्यों, याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील की दलीलों और पहले दिए गए संबंधित फैसलों पर विचार करने के बाद कहा कि दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ शिकायत मामला संख्या 1286/2022 को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग और न्याय के साथ अन्याय होगा।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीपन गांगुली और अधिवक्ता अपलक बसु पेश हुए। याचिकाकर्ताओं ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत दो पुनरीक्षण याचिकाएं दायर की थीं। इनमें न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने लंबित आपराधिक मामले को खारिज करने की मांग की गई थी। यह शिकायत भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 499, 500 और 34 के तहत दर्ज की गई थी।

फोन कॉल से जुड़ा था मामला

मामले के मुताबिक, 27 जनवरी 2022 को दोपहर करीब 1:30 बजे 'रिपब्लिक बांग्ला' के रिपोर्टर बिट्टू चौधरी ने गायक और गीतकार कबीर सुमन को फोन किया था। यह फोन दिवंगत गायिका संध्या मुखर्जी से जुड़ी एक खबर पर उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए किया गया था।

फोन से नाराज कबीर सुमन ने कथित तौर पर गुस्से में अपशब्दों और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद उन्होंने फेसबुक पर एक लंबी माफी भी प्रकाशित की और अपने गुस्से में कही गई बातों को स्वीकार किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कानूनी नोटिस का आदान-प्रदान हुआ। बाद में मजिस्ट्रेट ने मामले का संज्ञान लेते हुए समन जारी किया।

शिकायत में रिपोर्टर बिट्टू चौधरी पर बातचीत रिकॉर्ड करने और उसे फैलाने का आरोप लगाया गया था। वहीं, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर और एडिटर-इन-चीफ अभिषेक कपूर को भी व्यक्तिगत और जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर मामले में शामिल किया गया। हालांकि, यह बात स्वीकार की गई थी कि 'रिपब्लिक बांग्ला' या रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के किसी भी चैनल पर इस बातचीत, ऑडियो रिकॉर्डिंग, न्यूज कार्यक्रम या किसी अन्य कार्यक्रम को कभी प्रसारित नहीं किया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत मानहानि के अपराध के जरूरी आधार इस मामले में मौजूद ही नहीं हैं। इसलिए यह आपराधिक कार्रवाई कानूनी आधार के बिना शुरू की गई है। 

यह भी दलील दी गई कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के उन शब्दों को सही तरीके से दोहराता या रिकॉर्ड करता है, जो उस व्यक्ति ने खुद गुस्से में कहे हैं, तो केवल ऐसा करने से उसे मानहानि का दोषी नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश पर क्या कहा?

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट की ओर से जारी समन आदेश में गंभीर प्रक्रियात्मक और कानूनी खामियां थीं। कोर्ट के मुताबिक, आदेश में आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर पर्याप्त न्यायिक विचार दिखाई नहीं देता।

कोर्ट ने कहा कि केवल एक सामान्य पदनाम और रिपोर्टर के आधार पर आदेश जारी किया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट ने सीआरपीसी की धारा 202 के तहत जरूरी समन से पहले की जाने वाली जांच को पूरी तरह नजरअंदाज किया।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ, कानून मंत्रालय एवं अन्य [(2016) 7 SCC 221] के फैसले का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपी मजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है, तो धारा 202 के तहत समन जारी करने से पहले मजिस्ट्रेट के लिए जांच करना या जांच के निर्देश देना जरूरी है।

इस प्रावधान का उद्देश्य दूर रहने वाले लोगों के खिलाफ की गई झूठी, परेशान करने वाली या बेबुनियाद शिकायतों को शुरुआती स्तर पर छांटना है। कोर्ट ने इस मामले में शिकायतकर्ता यानी विपक्षी पक्ष संख्या 2 की लगातार और जानबूझकर गैरहाजिरी पर भी नाराजगी जताई। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं को मंजूर कर लिया और अभिषेक कपूर और बिट्टू चौधरी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को खारिज कर दिया।

 

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B.A.G. Films की AGM में 13 प्रस्तावों पर हुई चर्चा, वोटिंग रिजल्ट बाद में होगा जारी

B.A.G. Films and Media Limited की 33वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 17 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई।

Last Modified:
Saturday, 19 September, 2026
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B.A.G. Films and Media Limited की 33वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 17 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई। बैठक में कंपनी के डायरेक्टर्स, ऑडिटर्स, अधिकारियों और शेयरहोल्डर्स ने हिस्सा लिया।

कंपनी के कंपनी सेक्रेट्री और कम्प्लायंस ऑफिसर अजय मिश्रा ने सभी सदस्यों का स्वागत किया और बैठक के दौरान अपनाई जाने वाली जरूरी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने कंपनी की चेयरपर्सन और Managing Director अनुराधा प्रसाद शुक्ला से बैठक की अध्यक्षता करने का अनुरोध किया।

बैठक में मौजूद सभी डायरेक्टर्स ने अपना परिचय दिया। इनमें अनुराधा प्रसाद शुक्ला, चंदन कुमार जैन, सुधीर शुक्ला, अनामिका सूद, संजीव कुमार दुबे और अर्शित आनंद शामिल थे। सभी डायरेक्टर्स ने अलग-अलग जगहों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में हिस्सा लिया।

AGM में कंपनी के Statutory Auditor Joy Mukherjee and Associates की ओर से जॉय मुखर्जी, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर अजय जैन और Secretarial Auditor Balika Sharma & Associates की ओर से पुष्पा जोशी भी मौजूद रहीं।

अनुराधा प्रसाद शुक्ला ने AGM में शेयरहोल्डर्स, डायरेक्टर्स, ऑडिटर्स और कंपनी के अन्य अधिकारियों का स्वागत किया। जरूरी संख्या में सदस्य मौजूद होने के बाद बैठक की कार्यवाही शुरू की गई।

कंपनी के कामकाज और वित्तीय प्रदर्शन पर जानकारी

चेयरपर्सन ने अपने संबोधन में कंपनी के कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन का संक्षिप्त ब्योरा दिया। उन्होंने कंपनी के अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट और ऑपरेशंस के बारे में बात की। साथ ही भविष्य में मिलने वाले अवसरों के लिए कंपनी की तैयारियों की भी जानकारी दी।

कंपनी सेक्रेटरी ने बताया कि 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए वैधानिक लेखा परीक्षक (Statutory Auditors) की रिपोर्ट और कंपनी सचिवीय लेखा परीक्षक (Secretarial Auditor) की रिपोर्ट में कोई आपत्ति, टिप्पणी या प्रतिकूल टिप्पणी नहीं है।

AGM में 13 प्रस्ताव रखे गए

AGM में कुल 13 प्रस्तावों पर कामकाज किया गया। इनमें से दो प्रस्ताव सामान्य कामकाज (Ordinary Business) और बाकी प्रस्ताव विशेष कामकाज (Special Business) से जुड़े थे। सामान्य कामकाज के तहत 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लेखा-परीक्षित वित्तीय विवरण (Audited Financial Statements) और समेकित वित्तीय विवरण (Consolidated Financial Statements) को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया। इसमें निदेशक मंडल और लेखा परीक्षकों की रिपोर्ट भी शामिल थी।

इसके अलावा, सुधीर शुक्ला के रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद, पात्र होने पर उन्हें दोबारा निदेशक नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया। विशेष कामकाज के तहत चंदन कुमार जैन को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) के तौर पर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया।

इसके अलावा News24 Broadcast India Limited, E24 Glamour Limited, Skyline Tele Media Services Limited और B.A.G. Live Entertainment Limited के साथ Material Related Party Transactions से जुड़े प्रस्ताव भी AGM में रखे गए। कुछ प्रस्तावों में इन कंपनियों के बीच होने वाले Related Party Transactions की मंजूरी मांगी गई थी।

शेयरहोल्डर्स ने पूछे सवाल

AGM के दौरान रजिस्टर्ड स्पीकर शेयरहोल्डर्स को अपने विचार रखने, सवाल पूछने और सुझाव देने का मौका दिया गया। कुल 6 रजिस्टर्ड स्पीकर शेयरहोल्डर्स ने सवाल पूछे या अपनी बात रखी, जिनका कंपनी की ओर से जरूरी जवाब और स्पष्टीकरण दिया गया। इसके बाद उन शेयरहोल्डर्स को AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वोट करने का मौका दिया गया, जिन्होंने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए पहले वोट नहीं किया था। यह वोटिंग NSDL प्लेटफॉर्म के जरिए सभी 13 प्रस्तावों पर की गई।

कंपनी ने AGM से पहले भी NSDL के जरिए रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा दी थी। कंपनी के मुताबिक, 10 सितंबर 2026 की कट-ऑफ डेट पर शेयर रखने वाले शेयरहोल्डर्स ने इस सुविधा के जरिए अपना वोट डाला।

वोटिंग रिजल्ट बाद में होगा जारी

AGM में हुई वोटिंग के नतीजे रिमोट ई-वोटिंग और AGM में हुई ई-वोटिंग दोनों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जाएंगे। Balika Sharma & Associates की सीनियर पार्टनर बालिका शर्मा को वोटों की जांच के लिए Scrutinizer नियुक्त किया गया था।

चेयरपर्सन ने कंपनी सेक्रेट्री को AGM खत्म होने के दो कार्यदिवस के भीतर वोटिंग रिजल्ट और Consolidated Scrutinizer's Report BSE और NSE को जमा करने और कंपनी तथा NSDL की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत किया है।AGM के अंत में शेयरहोल्डर्स को NSDL प्लेटफॉर्म पर वोट करने के लिए 15 मिनट की अतिरिक्त सुविधा दी गई। इसके बाद बैठक शाम 17 सितंबर को 4:45 बजे समाप्त हुई। 

English URL: bag-films-33rd-agm-13-resolutions-voting-results

 

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