नए नियमों से कुछ यूं तालमेल बिठाने की तैयारी में है टीवी इंडस्ट्री

टेलिविजन इंडस्ट्री में नए रेगुलेशंस को लेकर इस इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों के अलग-अलग विचार हैं और उसी के अनुसार ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को जोड़ने के लिए वे अपनी स्ट्रैटेजी बनाने में जुटे हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 January, 2020
Last Modified:
Saturday, 18 January, 2020
TV

टेलिविजन इंडस्ट्री में नए रेगुलेशंस को लेकर इस इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों के अलग-अलग विचार हैं। नए रेगुलेशन से इस क्षेत्र में ज्यादा स्थायित्व और इंडस्ट्री की अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही कई ब्रॉडकास्टर्स ऐसे रणनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा व्युअर्स को अपने साथ जोड़ा जा सके। एक ओर कुछ बड़े ब्रॉडकास्टर्स लिनियर टीवी (Linear TV) और तेजी से बढ़ते डिजिटल क्षेत्र को मिलाने की बात कर रहे हैं, ताकि एडवर्टाइजर्स से अच्छी डील की जा सके, वहीं कुछ ब्रॉडकास्टर्स व्युअर्स की जरूरतों के अनुसार उन्हें पहले से ज्यादा बेहतर और आकर्षक कंटेंट देने की जुगत में लगे हुए हैं।

इन्हीं सब बातों को लेकर हमारी सहयोगी मैगजीन ‘इंपैक्ट’ (IMPACT) ने टीवी इंडस्ट्री से जुड़े कुछ दिग्गजों से बातचीत की। आइए, जानते हैं कि इस मामले पर इंडस्ट्री से जुड़ी इन शख्सियतों ने क्या कहा।

रेगुलेशनंस से विज्ञापन कैटेगरी में बढ़ोतरी के साथ स्थायित्व आएगा: ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के एमडी और सीईओ एमके आनंद का कहना है कि फरवरी 2019 में लागू किए गए न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO) ने टीवी की पहुंच और विज्ञापन बिक्री (Ad Sales) पर काफी प्रभाव डाला है। इस नए बदलाव से तालमेल बैठाने के लिए ब्रॉडकास्टर्स लगे हुए हैं। उम्मीद है कि रेगुलेशन में प्रस्तावित बदलावों से स्थायित्व में मदद मिलेगी। पिछले कुछ महीनों में खराब प्रदर्शन के बाद उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2020 में विज्ञापन की कुछ श्रेणियों में दोबारा से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे ब्रॉडकास्टर्स को राहत मिलेगी।

कंज्यूमर को ही प्राथमिकता: 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के सीईओ (इंडिया ब्रॉडकास्ट बिजनेस) पुनीत मिश्रा का कहना है कि सिर्फ भाषा और कंटेंट के बारे में सोचने के बजाय सबसे पहले आप अपने कंज्यूमर के बारे में कैसे सोचते हैं? यह बहुत जरूरी है।  एफएमसीजी वर्ल्ड ने इस दिशा में काफी किया है, जहां साबुन की एक टिकिया के लिए 18 महीने तक काफी कंज्यूर रिसर्च की जाती है। उस साबुन को व्यक्ति सिर्फ तीन मिनट इस्तेमाल करता है, लेकिन वह कंटेंट को दिन में करीब चार घंटे देखता है। ऐसे में आपको यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि आप अपने कंज्यूमर को समझते हैं और तभी वह आपके साथ इतना समय व्यतीत करता है। हम इस दिशा में लगातार जुटे हुए हैं और इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि कंटेंट को ऑन एयर करते समय सबसे पहले कंज्यूमर को ध्यान में रखा जाए।

काफी अच्छा रहा है ये कदम: ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स’ इंडिया  के प्रेजिडेंट (नेटवर्क सेल्स एंड इंटरनेशनल बिजनेस) रोहित गुप्ता का कहना है कि बड़े ब्रॉडकास्टर्स अपनी डिजिटल और टेलिविजन ऑफरिंग को मजबूती देंगे। हालांकि, इन्हें अलग-अलग तरीके से खरीदा और बेचा जाता है। जल्द ही इसमें बदलाव होने वाला है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर व्युअरशिप काफी ज्यादा है और इसलिए दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। ग्लोबल स्तर पर देखें तो ब्रैंड्रस अपनी एजेंसियों को मजबूती देने में जुटे हैं, ताकि उनसे रिटर्न भी सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम भी ब्रॉडकास्टर और एजेंसी के साथ एडवर्टाइजर के लिए भी काफी अच्छा रहा है।

टीवी की पहुंच और दर्शकों में इसकी पैठ बढ़ेगी: ‘देशभर में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया के सीईओ सुनील लुल्ला का कहना है कि पिछले चार साल में टीवी पर बिताए जाने वाले समय में लगातार वृद्धि हुई है। इस साल भी इस तरह की स्थिति बनी रहेगी और लोग टीवी पर इस साल भी ज्यादा से ज्यादा समय बिताएंगे। मेरा मानना है कि वर्ष 2020 में टीवी की पहुंच (खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में) बढ़ेगी और बड़ी संख्या में लोग भी इससे जुड़ेगे। बार्क भी अपनी मीजरमेंट प्रक्रिया में और मजबूती ला रहा है, ताकि टेलिविजन इंडस्ट्री को बेस्ट मीजरमेंट दिया जा सके, जिससे वे उसी के अनुसार अपनी स्ट्रैटेजी भी बना सकें।

रीजनल कंटेंट और विश्लेषण से इस सेक्टर को मिलेगी और गति: इस बारे में मीडिया नेटवर्क ‘वायकॉम18’ (Viacom18) की हेड (Hindi Mass Entertainment & Kids TV Network) नीना इलाविया जयपुरिया का कहना है कि इस साल टेलिविजन सेक्टर को आगे बढ़ाने में रीजनल कंटेंट और विश्लेषण (Analytics) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नीना इलाविया के अनुसार, ‘हमारे देश विभिन्न भाषाओं वाला देश है। पिछले एक साल की बात करें तो रीजनल कंटेंट के मार्केट में जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। आने वाले समय में भी यह ट्रेंड जारी रहेगा, क्योंकि व्युअर्स अपनी पसंद की भाषा में कंटेंट देखना ज्यादा पसंद करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन, व्युअरशिप और एडवर्टाइजमेंट के मोर्चे पर सफलता के लिए रीजनल फ्रेंचाइजी काफी अहम बनी रहेगी। मीडिया के क्षेत्र में बिग डाटा और एनालिटिक्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे कंज्यूमर्स और उनकी प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से समझने में काफी मदद मिलेगी।’ 

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न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने BARC को लिखा लेटर, रेटिंग को लेकर उठाए ये 12 पॉइंट्स

कुछ चैनल्स की रेटिंग्स में संदिग्ध विसंगति को लेकर ब्रॉडकास्टर्स ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्टर ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया को एक पत्र लिखा है।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2020
NBA

कुछ चैनल्स की रेटिंग्स में संदिग्ध विसंगति को लेकर ब्रॉडकास्टर्स ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्टर ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया को एक पत्र लिखा है। आठ जुलाई को ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) के प्रेजिडेंट रजत शर्मा की ओर से बार्क इंडिया के चेयरमैन को लिखे गए इस लेटर में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) की रेटिंग में असामान्य रूप से अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है, जबकि अन्य चैनल्स की रेटिंग में काफी कमी दिखाई गई है।

यह भी पढ़ें: रेटिंग्स को लेकर उठ रहे सवालों के बीच टीवी9 आया सामने, इन 11 पॉइंट्स में रखी अपनी बात

बार्क इंडिया के चेयरमैन को लिखे इस लेटर में रजत शर्मा का कहना था, ‘आपके संज्ञान में यह मामला लाना चाहते हैं कि पिछले आठ हफ्ते और उससे भी ज्यादा समय से चैनल्स की रेटिंग्स सामान्य नहीं हैं। खासकर टीवी9 भारतवर्ष की रेटिंग काफी असामान्य है। इस मामले में हम टीवी9 भारतवर्ष की अभूतपूर्ण रेटिंग की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।’ न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन की ओर से अंग्रेजी में लिखे गए इस लेटर को आप हूबहू यहां पढ़ सकते हैं।  

1. After seeing an all-time high during lockdown, News viewership has been declining almost consistently on all parameters. From Wk 12 to Wk 25 News Time Spend (TSV) declined by 36%, this decline is consistent for all news channels except for TV9, which has actually increased by a huge 59%.

2. While TV news industry saw an unprecedented growth in Week 12/13, with maximum TSV, oddly TV9 has got its max TSV in Week 25, when most people are back to work and unlock has happened. More surprisingly it has higher contribution from Urban than Rural.

3. It is well known that legacy brands have an advantage during LIVE and fast unfolding news events of national importance. However, this week Chinese troops related news and Actor Sushant’s suicide which were the biggest in the recent 2 weeks have not given the legacy brands as much benefit as it has given to TV9 suddenly.

4. If we compare the viewing pattern of TV9’s common viewers of week 12 vis a vis Week 25, strangely viewers in Wk 12 spent 50 min on the channel (TSV) while in Wk 25 they have spent 71 min. This means that the same viewers are more interested in watching TV9 now than they did when they had all the time in hand during lockdown.

5. If we just compare viewer behaviour, New Viewers that added to TV9 in Week 12 had a time spend of 26 min however New Viewer who got added to the channel in Week 25 have a time spend of 36 minutes.

6. To reach a ranking position as high as no.2 even with landing channel support, brands have at least ranked 2 or 3 in reach. This example is phenomenal where channel is ranked no.7 in Weekly Reach in 000s, and yet No.1 in TSV and No.2 in Impressions. Other channels who have achieved this feat only recently, include R Bharat and News18 that touched no.3 on weekly reach parameter when they breached the ranking barrier.

7. BARC Rules on Landing on extraordinary surge may have missed 59 Ground interventions: TV9 Bharatvarsh is in landing on 59 headend find below state wise count. Were these tracked and trimmed from the output and in which manner? A similar table for Republic Bharat has been placed below to observe the scale of interventions in the genre, leading to subsequent unchecked rises.

8. The four big anchors on the channel are Nishant Chaturvedi, Sumaira Khan, Sameer Abbas and Dinesh Gautam. In all likelihood, they would not feature in any instant recall or Qual study. Therefore, no programming led loyalty factor can be attributed to this spike.

9. Compare GRPs below in absolute terms with its own sister channels in regional space. All have fallen in the two weeks, but TV9 Bharatvarsh has grown. So the advantage of network is also negated.

10. As per BARC’s BIO News, TV9 Bharatvarsh has very little On Location coverage.

11. It may be worthwhile to look at the track record of the organization and assess if any earlier instances of interventions or proven malpractices exist against it. The current floating WhatsApp’s raise serious suspicion.

12. Besides the Hindi genre, English has been suffering the same pattern of chaos. Many wild swings in single markets, compounded with the failure of a reach outlier picking mechanism, have made the data unusable. Republic TV continues to show exceptional Coverage in Chennai market, possibly because of an Out of Genre placement next to Tamil channels in gross violation of the law. How can an English speaking market be a single channel phenomenon? What is BARC’s plan to course correct?

एनबीए के अलावा अन्य तमाम ब्रॉडकास्टर्स ने भी बार्क इंडिया के समक्ष यह मुद्दा उठाया है। ब्रॉडकास्टर्स की ओर से कहा गया है कि हर हफ्ते डाटा में छेड़छाड़ की जा रही है और ऐसा लगता है कि बार्क और ब्रॉडकास्टर पूरी तरह से मिलकर काम कर रहे हैं। ब्रॉडकास्टर की ओर से यह भी कहा गया है कि इस बारे में समस्या से अवगत कराए जाने के बावजूद हम बार्क के एक अधिकारी की ओर से न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन के प्रेजिडेंट को इस तरह का अवांछित मेल किए जाने से हैरान हैं, जिसमें टीवी9 भारतवर्ष के वीकली डाटा की क्रेडिबिलिटी को सही ठहरा रहे हैं। बार्क इंडिया को लिखे लेटर में यह भी कहा गया है, ‘यह सर्वविदित है कि टीवी9 ग्रुप के तमाम चैनल्स पहले भी व्युअरशिप डाटा में हेरफेर करते हुए पकड़े गए हैं, ताकि उनकी रेटिंग बढ़ सके। इसके परिणामस्वरूप बार्क द्वारा उनके चैनल के डाटा को सस्पेंड भी किया गया था।’

इस लेटर में बार्क से मांग की गई है कि बार्क को इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करानी चाहिए और डाटा में इस तरह के गलत आचरण में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे लोगों को बार्क से हटा देना चाहिए, जो इसकी विश्वसनीयता को ठेस पहुंचा रहे हैं। लेटर के अनुसार, बार्क में पिछले दिनों टॉप लेवल पर हुए बदलाव के बाद इस बात पर सहमति बनी थी कि पारदर्शिता के लिए और बार्क की विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए इसकी टीम और सदस्यों की पूरी समीक्षा की जाएगी। लेकिन अभी तक इस संबंध में कुछ नहीं हुआ है, जिस वजह से डाटा में हेरफेर और भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहती है।

रजत शर्मा की ओर से लिखे लेटर में कहा गया है, ‘मैं अवगत कराना चाहता हूं कि इस तरह के मामले से एनबीए बोर्ड सहमत नहीं है। एनबीए के सदस्य काफी धीरज से काम करते रहे हैं, लेकिन यह काफी समय से टूट रहा है। ऐसे में एनबीए के सदस्यों को बताया जाना चाहिए कि व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बार्क की क्या योजना है। पुरानी गलतियों को सुधारने और व्यवस्था में मौजूद लूप होल्स को ठीक करने के लिए क्या किया गया है। जहां तक हमने देखा है कि इस दिशा में कुछ नहीं किया गया है, जिससे यह बदतर हो गया है। इस तरह की स्थिति ज्यादा समय तक नहीं चल सकती है। इसके लिए हमें आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।’

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यूट्यूबर के खिलाफ न्यूज चैनल ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत, ये है पूरा मामला

न्यूज चैनल की शिकायत पर चेन्नई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2020
News Channel

तमिलनाडु में एक प्राइवेट न्यूज चैनल ने यूट्यूबर मरिधास (Maridhas) के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में चैनल ने मरिधास पर चैनल के संपादक और पत्रकारों को बदनाम करने और सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ने के प्रयास का आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,चैनल की शिकायत पर चेन्नई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

बताया जाता है कि पुलिस आयुक्त महेश कुमार अग्रवाल को दी शिकायत में चैनल का कहना था कि पांच जुलाई को मरिधास ने मीडिया हाउस को एक ई-मेल भेजा, जिसमें उसके पत्रकारों पर पिछले चार वर्षों से हिंदू विरोधी अभियान चलाने का झूठा आरोप लगाया गया।

शिकायत के अनुसार, मरिधास ने यह भी दावा किया था कि चैनल का संचालन प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से द्रविड़ कषगम और द्रविड़ मुनेत्र कषगम के समर्थकों द्वारा किया गया। यही नहीं, उसने अपने यूट्यूब चैनल पर इन आरोपों को लेकर एक वीडियो भी पोस्ट किया था। इसके बाद तमाम अन्य लोगों ने चैनल को इस तरह के ई-मेल भेजे थे।

अपनी शिकायत में चैनल की ओर से यह भी कहा गया कि मरिधास ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस तरह के फर्जी ई-मेल भी पोस्ट किए जैसे कि कंपनी मैनेजमेंट ने अपने ऊपर लगाए गए इन आरोपों को मान लिया है। हिंदू विरोधी होने के आरोपों से इनकार करते हुए चैनल ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनकी तरफ से इस तरह का कोई ई-मेल मरिधास को नहीं भेजा गया। इसके साथ ही चैनल ने मरिधास के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

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Zee मीडिया की प्रत्यूषा अग्रवाल ने बताई फ्रेश कंटेंट को लेकर नेटवर्क की स्ट्रैटेजी

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) ने प्रमुख कंज्यूमर पैकेज्ड गुड (CPG) ब्रैंड्स के साथ इनोवेटिव पार्टनरशिप के द्वारा अपने कंटेंट की वापसी को घोषणा की है।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2020
Prathyusha Agarwal

देश की प्रमुख मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) ने प्रमुख कंज्यूमर पैकेज्ड गुड (CPG) ब्रैंड्स के साथ इनोवेटिव पार्टनरशिप के द्वारा अपने कंटेंट की वापसी की घोषणा की है। इसके लिए नेटवर्क ने नेस्ले मैगी, अमूल लस्सी, पेप्सिको, रेड लेबल, कैडबरी डेरी मिल्क और आईटीसी डार्क फैंटेसी जैसे ब्रैंड्स के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ ही नेटवर्क ने 13 जुलाई से ‘जी टीवी’ के साथ ही चार अन्य चैनल्स &TV, Zee Marathi, Zee Yuva और Zee Punjabi पर डेली कंटेंट की वापसी की घोषणा की है।

नेटवर्क की ओर से चलाए जाने वाले कैंपेन और चैनल्स के लिए कंटेंट स्ट्रैटेजी के बारे में ZEEL की चीफ कंज्यूमर ऑफिसर प्रत्यूषा अग्रवाल का कहना है कि कोविड-19 के दौरान टीवी की काफी अहम भूमिका रही है। तमाम न्यूज अपडेट्स लेने और सोशल डिस्टैंसिंग के दौर में बाहरी दुनिया से जुड़े रहने के लिए लोगों ने टीवी का रुख किया है।

उन्होंने कहा, ‘जब हमने यह काम शुरू किया था, तब हम देश का मूड समझने के लिए अपनी कंज्यूमर रिसर्च कर रहे थे और यह जानना चाह रहे थे कि हमारे ब्रैंड पार्टनर्स और कस्टमर्स इस दौरान किस तरह का अनुभव कर रहे हैं? वे आखिर में क्या चाहते हैं? हम अप्रैल से यह देख रहे थे और उस समय यह भावना थी कि हमें अपने आप को बचाने की जरूरत है। जैसे ही हम मई की ओर बढ़े, हमने देखा कि उस समय प्रमुख भावना यह थी कि कैसे इससे बाहर निकलना है और जीवन को सामान्य बनाना है? यह सब हमने अपनी पार्टनर एजेंसी के साथ शेयर किया और एक मजबूत पार्टनरशिप के साथ वापस आए।’  

वर्चुअल राउंड टेबल के दौरान प्रत्यूषा अग्रवाल ने बताया, ‘इस कैंपेन के द्वारा जी देश के कुछ लोकप्रिय ब्रैंड्स को एक साथ लेकर आया है। #BanegiBaatSaathSaath के दावे के साथ पूरी टीवी इंडस्ट्री अपने व्युअर्स को एंटरटेन करने के लिए एक साथ आगे आ रही है। हमारा मानना है कि वर्ष 2020 के शुरुआती छह महीने में हमने जितनी चुनौतियों का सामना किया है, वह इंटरवल से पहले कहानी में आने वाले मोड़ की तरह हैं और जब हम सब साथ मिलकर चलेंगे तो बाकी के छह महीनों में हम मुश्किल चीजें भी हासिल कर सकते हैं और इसे काफी बेहतर छमाही बना सकते हैं।’

अग्रवाल का यह भी कहना था, ‘टीजर को मुंबई व दिल्ली में लॉन्च किया गया था और हमारे सभी शोज व प्रत्येक चैनल की वापसी 21 शहरों में हुई थी। इसके पीछे हमारी दोहरी स्ट्रैटेजी थी। हम मुंबई और दिल्ली में टीजर लॉन्च करना चाहते थे और इसे डिजिटल माध्यम तक ले जाना चाहते थे जहां पूरे देश में इसकी पहुंच हो जाएगी और इसके बाद अन्य मीडिया पर इसे ले जाया जाएगा।’

तीन महीने के लंबे इंतजार के बाद नए एपिसोड के साथ दर्शक अपनी स्टोरीज और कैरेक्टर्स की पर्दे पर वापसी को लेकर उत्सकु थे। जहां Zee Bangla, Zee Kannada, Zee Sarthak, Zee Keralam, Zee Telugu ने पहले ही अपने व्युअर्स को एंटरटेन करना शुरू कर दिया है और रीजनल मार्केट में हर हफ्ते 100 घंटे से ज्यादा का कंटेंट डिलीवर कर रहे हैं, हिंदी भाषी मार्केट के चार चैनल्स Zee TV, &TV, Zee Marathi और Zee Punjabi भी 13 जुलाई से लाइव हो गए हैं।

कंटेंट स्ट्रैटेजी के बारे में अग्रवाल ने कहा कि यह जानना जरूरी था कि दर्शक क्या मिस कर रहे थे और क्या महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘इस महामारी के बाद लोगों का दृष्टिकोण बदल गया है। उनका व्यवहार बदल गया है। इस दौरान टीवी का इस्तेमाल 35 प्रतिशत तक बढ़ गया था। हमने नील्सन (Nielsen) के साथ अनुमानित विश्लेषण किया। इसमें घरों पर रहने वाले और काम के लिए घर से बाहर जाने वाले लोगों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया, जिससे हमें उपलब्ध ऑडियंस के बारे में जानकारी मिली, जब हम अनलॉक दो की दिशा में जा रहे हैं। कोविड के दौरान लोगों के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव यह आया है कि वे घर पर एक-दूसरे के साथ ज्यादा समय गुजार रहे हैं। कोविड के दौरान परिवार एक साथ आए और यह देखते हुए कि पारिवारिक कंटेंट का इस्तेमाल बढ़ रहा है, हमने इन एलीमेंट्स पर ज्यादा जोर दिया।’

अग्रवाल के अनुसार, ‘इस बात को लेकर भी काफी फिक्र है कि कैसे हम इस स्थिति से बाहर आएंगे और क्या करेंगे? हम दिखा रहे हैं कि हम सब साथ मिलकर इस मुश्किल समय से बाहर निकलेंगे और यह हमारे ट्रैक में भी दिखाई देगा। इसके अलावा, इस तरह की स्थिति से निजात दिलाने में कॉमेडी जॉनर भी अहम भूमिका निभाता है। हमने इस दिशा में काफी काम किया है कि हम अपने पात्रों को पटरी पर लाने और नई कहानियों में कैसे जान डालते हैं।’

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टीवी टुडे नेटवर्क को बाय बोलकर अब Zee Media में बड़ी भूमिका निभाएंगे गौरव वर्मा

गौरव वर्मा को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब दो दशक का अनुभव है। पूर्व में वह तमाम प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अहम पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2020
Gaurav Verma

‘टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड’ (TV Today Network Ltd) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि यहां करीब साढ़े आठ साल से कार्यरत गौरव वर्मा अब ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) में बतौर सेल्स हेड अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों ने हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) से इस बात की पुष्टि की है।  

गौरव वर्मा को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब दो दशक का अनुभव है। वह वर्ष 2012 से ‘टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड’ से जुड़े हुए थे और दो पदों पर काम कर चुके हैं। फिलहाल वे नेटवर्क में वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत हैं।  

 ‘टीवी टुडे’ में अपनी पारी शुरू करने से पहले वर्मा ‘नेटवर्क18’ में असिस्टेंट वाइस प्रेजिडेंट के पद पर अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। यहां वह सात साल से ज्यादा समय तक कार्यरत रहे। यही नहीं, अपने करियर के दौरान पूर्व में वह ‘इंडिया टुडे’ और ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ में भी विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं।

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नए फॉर्मेट में दर्शकों को कुछ यूं भा रहा है एबीपी न्यूज का शो ‘नमस्ते भारत’

इस शो को हर घंटे दो सेगमेंट में बांटा जाता है। पहले सेगमेंट में शॉर्ट स्टोरीज होती हैं, जिन्हें शुरुआत में टेलिकास्ट किया जाता है, इसके बाद के सेगमेंट में लॉन्ग स्टोरीज को दिखाया जाता है।

Last Modified:
Monday, 13 July, 2020
Namaste Bharat

हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) का मॉर्निंग शो ‘नमस्ते भारत’ (Namaste Bharat) दर्शकों का पसंदीदा शो बन गया है। चैनल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस साल अपनी लॉन्चिंग के बाद से ही यह शो अपने दर्शकों को नया कंटेंट उलपब्ध करा रहा है। चैनल के अनुसार, नए फॉर्मेट के तहत इस शो में कंटेंट इनोवेशन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। यही कारण है कि इस शो को 13से 25वें हफ्ते के बीच 17 करोड़ लोगों से ज्यादा द्वारा देखा (Source BARC, TG- 2+, Mkt- All India, Cuml. Reach in Cr, Latest 13 Wks (Wk 13-25'20), 0600-1000 AM (Wkdays) गया।

इस शो को ‘एबीपी न्यूज’ पर सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना सुबह छह बजे से 10 बजे तक देखा जा सकता है। एबीपी न्यूज एंकर्स विकास भदौरिया, प्रतिमा मिश्रा और कुमकुम बिनवाल द्वारा होस्ट किए जाने वाले इस शो में नए फॉर्मेट के तहत डेवलपिंग स्टोरी के पूर्वावलोकन के साथ दिन भर की खबरों को काफी बेहतर तरीके से दर्शकों को दिखाया जाता है। चैनल के अनुसार, विश्वसनीय और जानकारीपरक कंटेंट के साथ इस शो में जटिल मुद्दों को काफी आसान तरीके से व्युअर्स तक पहुंचाया जाता है।

इस शो को हर घंटे दो सेगमेंट में बांटा जाता है। पहले सेगमेंट में शॉर्ट स्टोरीज होती हैं, जिन्हें शुरुआत में टेलिकास्ट किया जाता है, इसके बाद के सेगमेंट में लॉन्ग स्टोरीज को दिखाया जाता है। इस शो में पॉलिटिकल स्टोरीज कवर की जाती हैं, ताकि उनके आधार पर लोगों को अपनी राय हनाने में मदद मिलती है। क्राइम रिपोर्टिंग से लोगों को सुरक्षित और सतर्क रहने में मदद मिलती है, जबकि मौसम की रिपोर्टिंग से दर्शकों को उसी के अनुसार अपने दिन भर के प्लान बनाने में मदद मिलती है।

इस शो की लोकप्रियता के बारे में ‘एबीपी नेटवर्क’ (ABP Network) के सीईओ अविनाश पांडे का कहना है, ‘प्रासंगिक, जानकारीपरक और दिलचस्प कंटेंट की बदौलत नमस्ते भारत को दर्शकों ने बार-बार सराहा है। एबीपी नेटवर्क ने हमेशा ऐसा कंटेंट तैयार करने का प्रयास किया है जो न केवल हमारे दर्शकों के लिए काफी आकर्षक है, बल्कि हमारे विज्ञापनदाताओं और भागीदारों के लिए भी बहुत अधिक महत्व रखता है। एबीपी न्यूज हमेशा से ही अपनी इनोवेटिव प्रोग्रामिंग के लिए जाना जाता है और यह शो इस तरह की पहल का प्रतीक है। इसकी यही खासियत इसकी लोकप्रियता का कारण है।’

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दो चैनल्स बंद करने के बाद सबस्क्रिप्शन दरों को लेकर SONY ने उठाया ये कदम

यह दूसरा मौका है, जब ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ ने इस तरह का निर्णय लिया है। इससे पहले मार्च में भी नेटवर्क की ओर से सबस्क्रिप्शन पैक की कीमत में किया गया था संशोधन

Last Modified:
Monday, 13 July, 2020
SPN

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने मासिक रूप से लिए जाने वाले अपने सबस्क्रिप्शन मूल्य (subscription price) में एक जुलाई से संशोधन किया है। इसके तहत नेटवर्क ने अपने अधिकांश बुके (the pricing of Happy India) के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में कमी की है। एक जुलाई से अपने दो अंग्रेजी एंटरटेनमेंट चैनल्स ‘एएक्सएन’ (AXN) और ‘एएक्सएन एचडी’ (AXN HD) को बंद करने के बाद नेटवर्क ने यह कीमतें घटाई हैं। हालांकि ए-ला कार्टे (à la carte) के आधार पर यानी अलग-अलग लिए जाने वाले चैनल्स (एसडी और एचडी) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।  

उदाहरण के लिए ‘हैप्पी इंडिया इंग्लिश एचडी पैक’ (Happy India English HD pack) जो पहले 20 रुपये का था और और इसमें सोनी पिक्स एचडी और सोनी बीबीसी अर्थ शामिल हैं, उसका सबस्क्रिप्शन मूल्य घटाकर अब 15.6 रुपये मंथली कर दिया गया है। ‘हैप्पी इंडिया स्पोर्ट्स+इंग्लिश एचडी पैक’ (Happy India Sports+ English HD pack) का सबस्क्रिप्शन मूल्य जो पहले 46.4 रुपये का था और इसमें सात चैनल्स शामिल थे, अब छह चैनल्स के लिए उसका मंथली सबस्क्रिप्शन मूल्य 42.7 रुपये कर दिया गया है।   

इसी तरह ‘हैप्पी इंडिया इंग्लिश एसडी पैक’ का मासिक सबस्क्रिप्शन मूल्य 12 रुपये से घटाकर 8.8 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इस बारे में आधिकारिक टिप्पणी के लिए हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ से संपर्क साधा, लेकिन फिलहाल वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।    

बता दें कि यह दूसरा मौका है, जब ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ ने अपनी सबस्क्रिप्शन कीमतों में संशोधन किया है। इस साल मार्च में नेटवर्क की ओर से तीन चैनल सोनी मिक्स, सोनी ईएसपीएन और सोनी ईएसपीएन एचडी को बंद किए जाने के बाद ‘हैप्पी इंडिया पैक’ (Happy India pack) के सबस्क्रिप्शन मूल्य में संशोधन किया गया था।

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रेटिंग्स को लेकर उठ रहे सवालों के बीच टीवी9 आया सामने, इन 11 पॉइंट्स में रखी अपनी बात

कुछ चैनल्स की रेटिंग्स में संदिग्ध विसंगति को लेकर ब्रॉडकास्टर्स द्वारा बार्क इंडिया को लिखे गए पत्र के मामले में टीवी9 के सीईओ बरुण दास ने अपना पक्ष रखा है।

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2020
TV9

कुछ चैनल्स की रेटिंग्स में संदिग्ध विसंगति को लेकर ब्रॉडकास्टर्स द्वारा देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्टर ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया को लिखे गए पत्र के मामले में अब ‘टीवी9’ (TV9) के सीईओ बरुण दास ने विस्तृत रूप से अपना पक्ष रखा है।

दरअसल ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) की ओर से बार्क को लिखे गए इस लेटर में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि ‘टीवी9’ (TV9) की रेटिंग में असामान्य रूप से अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है, जबकि अन्य चैनल्स की रेटिंग में काफी कमी दिखाई गई है। वहीं, ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (NBF) ने भी रेटिंग में उतार-चढ़ाव के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त की जताई थी। इस बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने एक स्टोरी पब्लिश की थी, जिसे हिंदी में अनुवादित कर समाचार4मीडिया ने भी पब्लिश किया था। अब बरुण दास ने 11 पॉइंट्स के रूप में अपनी प्रतिक्रिया दी है। इन पॉइंट्स को आप यहां देख सकते हैं।

यह भी पढ़ें: रेटिंग्स को लेकर ब्रॉडकास्टर्स ने उठाया ये मुद्दा, BARC INDIA को लिखा लेटर

1. मुझे इस बारे में सिर्फ ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की स्टोरी से जानकारी मिली है। मेरा इस मामले में न तो एनबीए से और न ही बार्क से आधिकारिक रूप से कोई कम्युनिकेशन हुआ है।    

2. हालांकि, मैंने कथित रूप से एनबीए के द्वारा लिखे गए लेटर को देखा है, जिस पर किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं और उसमें से पॉइंट नंबर छह और सात गायब हैं।

3. यदि वास्तव में एनबीए की ओर से बार्क को इस तरह का कोई ऑफिशियल लेटर लिखा गया है तो मुझे एनबीए की ओर से इसकी एक कॉपी मिलने पर खुशी होगी ताकि मैं आधिकारिक रूप से एनबीए को इसका जवाब दे सकूं।

4. इसलिए, फिलहाल मैं अभी केवल इसी पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकता हूं जो मैंने उस कथित पत्र में पढ़ी हैं। एक्सचेंज4मीडिया की स्टोरी के अनुसार, इस लेटर में उन हफ्तों के दौरान भी टीवी9 भारतवर्ष की लगातार बढ़ती व्युअरशिप के बारे में सवाल उठाया गया है, जब न्यूज व्युअरशिप कम हो रही थी। लेकिन यह काफी अजीब तुलना है। बिजनेस इंडस्ट्री के अनुसार चलते हैं, लेकिन मार्केट शेयर्स का इंडस्ट्री के मूवमेंट से कोई संबंध नहीं है। ये दोनों हमेशा साथ-साथ नहीं होते हैं।

5. टीवी9 भारतवर्ष के बारे में उठ रहे इस तरह के मामलों में मैं कुछ तथ्यों पर ध्यान दिलाना चाहता हूं। 22 मार्च को जब लॉकडाउन शुरू होने वाला था, मैंने एनबीए को एक लेटर लिखकर सुझाव दिया था कि इंडस्ट्री को कुछ समय के लिए वीकली रेटिंग्स को स्थगित कर देना चाहिए। मुझे लग रहा था कि इस महामारी के दौरान रेटिंग के चक्कर में हम रिपोर्टर्स और कैमरापर्सन की जिंदगी को खतरे में डाल देंगे। उस समय हम रेटिंग को लेकर चिंतित नहीं थे, बल्कि हमें तमाम न्यूज संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों के स्वास्थ्य और सलामती की चिंता थी। अगले दिन एनबीए की ओर से मेरा यह सुझाव खारिज कर दिया गया।   

6. यह एक ट्रांसपैरेंट इंडस्ट्री है। हम सभी की बार्क रेटिंग्स तक पहुंच है। साथ ही हम सभी के पास लॉगर में अपने हर प्रतियोगी के हर सेकेंड के कंटेंट तक पहुंच है। हम में से हर कोई इसका विश्लेषण कर सकता है और हम सभी ने हर हफ्ते ऐसा किया भी। टीवी 9 भारतवर्ष के कंटेंट को सही तथ्यों के साथ दूसरों से अलग रखा गया था। मुझे लगता है कि जो कंटेंट हमें रेटिंग दे रहा था, वह अब अन्य चैनलों के प्राइम-टाइम पर आ रहा है।

7. हम इस मामले में सौभाग्यशाली रहे। हमारी री-लॉन्चिंग जो जनवरी में प्रस्तावित थी, वह मार्च आधे तक लेट हो गई और इसके एक हफ्ते बाद लॉकडाउन हो गया। सामान्य सी बात है कि नए और दोबारा से डिजाइन किए गए चैनल की सफलता व्यापक सैंपलिंग पर निर्भर करती है। 10 हफ्ते में 10 गुना सैंपलिंग की जहां तक बात है तो सामान्यत: इस तरह की सैंपलिंग में आठ से नौ महीने लगते हैं, लेकिन लॉकडाउन के शुरुआती कुछ हफ्तों में न्यूज व्युअरशिप में बेतहाशा वृद्धि हो गई, जिसका हमें लाभ मिला।  

8. टीवी न्यूज इंडस्ट्री में ऐसे तमाम उदाहरण हैं, जिनमें चैनल्स ने संकट या आपदा के दौरान काफी सुर्खियां बटोरीं। जैसे- भुज में आए भूकंप के दौरान आजतक, मुंबई में हुए हमलों में एबीपी और 26/11 के हमलों के दौरान टाइम्स नाउ इसका उदाहरण है। हमारा ही चैनल ऐसा था जो कोविड-19 से पहले नए लुक, नई प्रोग्रामिंग और प्रभावशाली मार्केटिंग के साथ रीलॉन्च हुआ था।   

9. कंटेंट के साथ-साथ इसकी पैकेजिंग और डिलीवरी पर फोकस ने हमें काफी फायदा पहुंचाया है। हमने कोविड-19 को फैलाने के लिए चीन के खिलाफ दुनिया के गुस्से को महसूस कर लिया था, जबकि भारत में अभी यह पनप ही रहा था। हमने चीन और उसकी हरकतों पर काफी बारीकी से नजर ऱखी। कोविड-19 को लेकर हम चीन विरोधी लाइन पर पहले ही चल रहे थे, ऐसे में जब गलवान घाटी में हमारे जवान शहीद हुए, तब चीन के खिलाफ लोगों के अत्यधिक गुस्से का हमें रेटिंग्स में स्वभाविक रूप से फायदा मिला। इसमें कोई जादू या आंकड़ों में हेरफेर का मामला नहीं है, बस बिजनेस की मूल बातें हैं।    

10. मार्केट में स्थापित खिलाड़ी के लिए इस तरह की अच्छी भावना कभी नहीं रही कि अपनी नाक के नीचे से किसी को आगे निकलते देख सकें। मैं ऐसा कभी नहीं करता हूं। मैं नहीं चाहूंगा कि इस तरह के फैसले से मेरे बिजनेस पर कोई बुरा प्रभाव पड़े। मैं बेहतर चीजों को फॉलो करूंगा या उसे और अच्छा बनाने की कोशिश करूंगा।

11. जहां तक टीवी9 भारतवर्ष का सवाल है, यह अभी भी प्रगति की राह पर है।

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श्रीअधिकारी ब्रदर्स ग्रुप के इस चैनल ने पूरे किए 10 साल, यूं बनाए रखा अपना कीर्तिमान

देश की मीडिया इंडस्ट्री में कुछ ऐसे प्रमाण हैं, जो निजी मीडिया इंडस्ट्री के रूप में खुद को लंबे समय तक लेकर चलते हैं

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
SAB

देश की मीडिया इंडस्ट्री में कुछ ऐसे प्रमाण हैं, जो निजी मीडिया इंडस्ट्री के रूप में खुद को लंबे समय तक लेकर चलते हैं। ऐसा ही एक नाम है श्रीअधिकारी ब्रदर्स का। श्रीअधिकारी ब्रदर्स ग्रुप ने ‘सब’ (SAB) टीवी के लॉन्च होने के 20 साल बाद अपने म्यूजिक चैनल ‘मस्ती’ (Mastiii) का एक दशक पूरा कर लिया है। बता दें कि ‘मस्ती’ चैनल जुलाई, 2010 में लॉन्च किया गया था, जबकि इसी ग्रुप के द्वारा वर्ष 2000 में SAB चैनल भी स्थापित किया गया था।

पिछले कई दशकों में अधिकारी ब्रदर्स ने भारतीय इंडस्ट्री को कई शानदार सफलताओं की खुराक दी है। किसी एक लेख में मीडिया के लगभग सभी क्षेत्रों में यदि उनके योगदान को गिनाया जाए, तो यह सूची बहुत ही लंबी होगी, क्योंकि न्यूज व एंटरटेनमेंट और कई अन्य चैनल्स के बीच उन्होंने टीवी शो, डिजिटल शो, प्रिंट व पब्लिकेशंस, फिल्म प्रॉडक्शन, मूवी डिस्ट्रीब्यूशन समेत कई अन्य क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है।

पिछले 10 वर्षो में ‘मस्ती’ (Mastiii) चैनल कभी भी किसी से पीछे नहीं रहा है। इतने प्रतिस्पर्धी जॉनर में पिछले पांच वर्षों में यह 73 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ नंबर वन की पोजीशन पर बना हुआ है और पिछले दशक के दौरान इसका मार्केट शेयर सभी हफ्तों में 61 प्रतिशत रहा है। ऐसे बहुत कम चैनल होंगे, जो इतने लंबे समय तक इस तरह का अपना वर्चस्व कायम रखने का दावा करते हों।

‘मस्ती’ के प्रदर्शन को लेकर श्रीअधिकारी ब्रदर्स के एमडी व वाइस चेयरमैन मार्कंड अधिकारी ने कहा, ‘आज मुझे यह जानकर बहुत संतुष्टि हो रही है कि हमारे ‘मस्ती’ चैनल को लेकर हमारे उपभोक्ताओं में इतनी मजबूत निष्ठा है।’

‘सब’ (SAB) टीवी, जिसकी स्थापना श्रीअधिकारी ब्रदर्स ने की थी, लेकिन अब यह Sony Pictures Networks Limited की छत्रछाया में है, उसके भी 20 साल पूरे होने के मौके पर  मार्कंड अधिकारी ने कहा, ‘शुरुआत SAB TV और अंत Mastii के साथ करने वाले इस ब्रॉडकास्टर के तौर पर हमने विभिन्न जॉनर में 10 चैनल लॉन्च किए हैं। हमें बेहद खुशी है कि इन सभी चैनलों ने बहुत अच्छा काम किया है। यह नहीं भूलना चाहिए कि SAB TV ने श्री अधिकारी ब्रदर्स के शासन में अपनी एक अलग जगह बनाई थी और फिर सोनी पिक्चर लिमिटेड का हिस्सा बनकर एनपी सिंह (सीईओ, सोनी पिक्चर्स इंडिया) के नेतृत्व में यह चैनल दुनिया का सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कॉमेडी चैनल के रूप में उभरा है और आज के चुनौतीपूर्ण दौर में भी यह चैनल कमांडिंग पोजिशन में है।’

अपने दिवंगत भाई, जिनके साथ मिलकर मार्कंड अधिकारी ने 1980 में मीडिया की यात्रा शुरू की, उनको याद करते हुए, मार्कंड अधिकारी ने कहा कि मैं अपने प्यारे स्वर्गीय भाई गौतम को दिल से याद करता हूं, क्योंकि हमने अपने इस सफर में एक और मील का पत्थर छू लिया है, जिसे हमने एक बड़े सपने और दृढ़ संकल्प के साथ निर्धारित किया था। हमने, यह नहीं सोचा था कि यह सफर कितना लंबा होगा, बल्कि ऐसे एंटरटेनमेंट क्रिएट करने के बारे में सोचा था, जिसे पूरा देश देखना चाहता हो।  

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रेटिंग्स को लेकर ब्रॉडकास्टर्स ने उठाया ये मुद्दा, BARC INDIA को लिखा लेटर

कुछ चैनल्स की रेटिंग्स में संदिग्ध विसंगति को लेकर ब्रॉडकास्टर्स ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्टर ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' इंडिया को एक पत्र लिखा है।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
Channel

कुछ चैनल्स की रेटिंग्स में संदिग्ध विसंगति को लेकर ब्रॉडकास्टर्स ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्टर ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया को एक पत्र लिखा है।

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) की ओर से बार्क को लिखे गए इस लेटर में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ‘टीवी9’ (TV9) की रेटिंग में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है, जबकि अन्य चैनल्स की रेटिंग में काफी कमी दिखाई गई है। वहीं, ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (NBF) ने भी रेटिंग में उतार-चढ़ाव के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है।

‘एनबीएफ’ की ओर से जारी लेटर में कहा गया है, ‘हमारी कुछ सदस्य कंपनियां, फ्री टू एयर चैनल्स रेटिंग के लिए पूरी तरह से बार्क पर निर्भर करते हैं और इस रेटिंग के आधार पर वे विज्ञापन प्राप्त करते हैं, जो चैनल्स के रेवेन्यू का प्रमुख स्रोत है। हमारे तमाम चैनल्स ने पिछले कुछ हफ्तों में रेटिंग में गिरावट पर चिंता जताई है।’

सोमवार को लिखे गए इस लेटर में यह भी कहा गया है, ‘21वें सप्ताह से बार्क के डेटा का विश्लेषण करने पर हमें रेटिंग में काफी अंतर दिखा है, जो हमारे लिए चिंता का विषय है, क्योंकि हममें से अधिकांश इस महामारी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और यह रेटिंग हमारे लिए काफी मायने रखती है। पिछले पांच हफ्तों में रेटिंग में काफी गिरावट देखी गई है। यह स्थिति न सिर्फ हमारे अस्तित्व को खतरे में डालती है, बल्कि फ्री टू एयर जॉनर की रेटिंग्स को लेकर बार्क रिपोर्टिंग की पारदर्शिता व जवाबदेही का मुद्दा भी उठाती है।’ 

‘एनबीएफ’ के अनुसार, ‘जब से कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप शुरू हुआ और उसके बाद देश के तमाम हिस्सों में लॉकडाउन किया गया, एफटीए चैनल्स ने सिचुएशन को कवर करने के लिए संसाधनों पर काफी ज्यादा निवेश किया है। बार्क द्वारा लॉकडाउन के पहले आठ हफ्तों में व्युअरशिप, रेटिंग में इजाफा देखा गया था और दर्शकों द्वारा चैनल देखने में बिताए जाने वाले समय में भी इजाफा देखा गया था, अब अचानक रेटिंग्स में कमी आने से यह चिंता का विषय बन गया है।’

दूसरे और तीसरे हफ्ते (औसतन साप्ताहिक इम्प्रेशंस 2172 मिलियन) की तुलना में 12 और 13 हफ्ते (औसतन साप्ताहिक इम्प्रेशंस 8129 मिलियन) के दौरान न्यूज जॉनर की व्युअरशिप (दर्शकों की संख्या) में 274 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसे बार्क ने स्वीकार किया। एनबीएफ के पत्र का जवाब देते हुए कहा बार्क इंडिया का कहना है, ‘बार्क इंडिया की रेटिंग हितधारकों को बेहतर विज्ञापन निवेश करने में मदद करती है और हितधारकों के रेवन्यू को बिल्कुल प्रभावित नहीं करती है। अब बार्क से कुछ सब्सक्राइबर्स ने सवाल किए हैं, जिनमें एनबीएफ के कुछ सदस्य भी शामिल हैं। व्युअरशिप डेटा के आधार पर अपनी प्रतिक्रिया के साथ ही हमने इसके जवाब दिए हैं। डेटा संग्रह के दृष्टिकोण से बार्क इंडिया पेड और फ्री-टू-एयर चैनल्स के बीच अंतर नहीं करता है और जो व्युअरशिप डेटा प्रकाशित किया गया है, वह इस आधार पर है कि ‘देश क्या देखता’ (What India Watches) है।’

आंकड़ों की ओर इशारा करते हुए बार्क ने कहा कि हाल के 5 हफ्तों के दौरान न्यूज जॉनर के आंकड़ों पर नजर डाले तों 21वें हफ्ते से 25वें हफ्ते तक औसतन साप्ताहिक इम्प्रेशंस 4053 मिलियन दर्ज किए गए थे, जबकि 16वें से 25वें हफ्ते के दौरान औसतन साप्ताहिक इम्प्रेशंस 5427 मिलियन थे। कोविड-19 महामारी से पहले यदि इम्प्रेशंस की तुलना की जाए तो दूसरे से चौथे हफ्ते के इम्प्रेशंस 21 से 25वें हफ्ते के इम्प्रेशंस से 87% अधिक हैं।  

हालांकि, अन्य संस्थान द्वारा लिखे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि न्यूज व्युअरशिप में कैसे 12वें से 25वें हफ्ते तक सभी पैरामीटर्स पर लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उदाहरण के लिए जहां न्यूज टाइम स्पेंड में 36% की गिरावट आई है, वहीं TV9 के आंकड़ों में 59% की भारी वृद्धि हुई है।

जब हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया (e4m) ने इस मामले में बार्क से जानना चाहा, तो उसने बताया, ‘बार्क इंडिया एक इंडस्ट्री बॉडी है और हितधारक और घटक दलों के बीच किसी भी तरह के मतभेद हों, तो वे उन पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। बार्क इस आधार पर अपनी रिपोर्ट बनाता है कि देश टेलिविजन पर क्या देखता है। हर हफ्ते के डेटा सभी उचित सांख्यिकीय और सुरक्षा सत्यापन के साथ ही जारी किए जाते हैं।’ फिलहाल यह रिपोर्ट फाइल किए जाने तक TV9 की ओर से इस मामले में किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। फिलहाल इसका इंतजार है और जैसे ही उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया मिलती है, तुरंत ही इस स्टोरी को अपडेट किया जाएगा।

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नेपाल में इस चैनल को छोड़कर सभी भारतीय न्यूज चैनल बंद

भारत के साथ जारी तनातनी के बीच नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने एक और भारत विरोधी कदम उठाया है

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
Channels

भारत के साथ जारी तनातनी के बीच नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने एक और भारत विरोधी कदम उठाया है। नेपाल में भारतीय न्यूज चैनल को बंद कर दिया गया है। ये फैसला नेपाल के केबल ऑपरेटर्स ने लिया है, हालांकि उनके इस प्रतिबंध से दूरदर्शन को बाहर रखा गया है। बता दें कि फिलहाल अभी तक इस संबंध में नेपाली सरकार द्वारा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।

बताया जा रहा है कि नक्‍शे विवाद पर भारत और नेपाल की बीच की तनातनी के बाद भारतीय मीडिया की कवरेज से ओली सरकार नाराज है। नेपाल में आजकल चीनी प्रभाव ज्‍यादा देखा जा रहा है। ये भी देखा जा रहा है कि भारत विरोध के मुद्दे पर ओली सरकार की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के भीतर ही मतभेद हैं, जिसको सुलझाने में चीनी राजदूत का खुला हस्‍तक्षेप देखा जा रहा है।  

इसी सिलसिले में नेपाल के सूचना-प्रसारण मंत्री युबराज खातिवाड़ा ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय चैनलों पर चीनी राजदूत को लेकर दिखाए गए खबरों पर आपत्ति जताते हुए भारतीय चैनलों के खिलाफ कानूनी रास्ता अख्तियार करने की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय मीडिया द्वारा नेपाल की संप्रभुता और गरिमा पर हमला करने की खबरों के खिलाफ राजनयिक स्तर पर उठा सकता है।

लिहाजा इस कदम के बाद विदेशी समाचार वितरक संगठन मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर्स (MSO) द्वारा भारत के राष्ट्रीय समाचार नेटवर्क, दूरदर्शन को छोड़कर सभी निजी चैनलों पर प्रतिबंध का फैसला किया है। वहीं, पाकिस्तानी और चीनी चैनलों का प्रसारण पहले की तरह जारी रहेगा।

हालांकि नेपाली केबिल टीवी ऑपरेटरों ने न्‍यूज एजेंसी ANI से कहा कि नेपाल में  भारतीय न्‍यूज चैनलों के प्रसारण को बंद कर दिया गया है. लेकिन इस संबंध में कोई सरकारी आदेश अभी तक नहीं आया है. 

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