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Zee News के आउटपुट हेड सिद्धिनाथ विश्वकर्मा ने दिया इस्तीफा, लिखा ये विदाई संदेश
‘जी’ (Zee) समूह से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि ‘जी न्यूज’ (Zee News) के आउटपुट हेड सिद्धिनाथ विश्वकर्मा ने यहां अपनी पारी को विराम दे दिया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
‘जी’ (Zee) समूह से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि ‘जी न्यूज’ (Zee News) के आउटपुट हेड सिद्धिनाथ विश्वकर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में उन्होंने संस्थान के शीर्ष प्रबंधन को एक लेटर भी लिखा है।
बता दें कि सिद्धिनाथ वर्ष 2014 से ‘जी न्यूज’ में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। सिद्धिनाथ को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 20 साल का अनुभव है। मूल रूप से झारखंड के रहने वाले सिद्धिनाथ ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से रेडियो-टीवी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है।
पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत सिद्धिनाथ ने ‘दैनिक जागरण’ की वेबसाइट से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘सहारा समय’ से टीवी की दुनिया में कदम रखा। ‘सहारा समय’ के बाद सिद्धिनाथ ने ‘आजतक’ में भी लंबे समय तक काम किया। इसके बाद वह करीब छह साल से ’जी न्यूज’ के साथ जुड़े हुए थे। हालांकि, अब उनका अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में पता नहीं चल पाया है।
‘जी न्यूज’ से अपनी विदाई के बारे में सिद्धिनाथ ने एक लेटर भी लिखा है, जिसे आप हूबहू यहां पढ़ सकते हैं।
मेरे पितातुल्य जवाहर सर इस संस्थान में एक संजीवनी बनकर आए जो बस इतना भर पूछ देते थे 'हां भाई ठीक हो ना' । उनके जैसे बड़े और महान व्यक्ति से इतना सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व की बात है और मेरे 20 वर्षों की सबसे बड़ी पूंजी है। आज अगर मेरे पिता होते तो मेरी इस उपलब्धि पर गर्व करते। जवाहर सर को मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि सर आपके इस अटूट और अटल भरोसे के लिए मैं अपनी आखिरी सांस तक आपका ऋणी रहूंगा। आपने मुझे कई बार रोका, कई बार मना किया कि 'नहीं तुम्हें इस्तीफा नहीं देना है'। लेकिन अब मैं उनसे बड़ी ही विनम्रता के साथ क्षमा चाहता हूं, अब यहां रहना मेरे लिए असहनीय है। क्योंकि ये मेरे साथ काम करने वाली हर महिला, हर पुरुष और मेरे आत्मसम्मान की बात है। मेरी टीम ने कई बार मुझसे कहा कि आपको यहां नहीं रहना चाहिए, आपका इस तरह का अपमान हम नहीं देख सकते। पर मैं उनको हमेशा कहता रहा कि ये संस्थान बहुत बड़ा है और यहां ये सब छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं। पर अब मेरे सब्र का बांध टूट चुका है, क्योंकि मैं ये कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता कि मेरी बच्चियों के साथ कोई अभद्र व्यवहार करे। आगे अपने व्यक्तिगत या व्यावसायिक जीवन में मैं कोई भी काम जवाहर सर की अनुमति के बगैर नहीं करूंगा। और जवाहर सर हमेशा कहते हैं, ‘सीखते रहो और बढ़ते रहो’। अब मैं अपने जीवन में इसी उद्देश्य की खोज जारी रखना चाहता हूं।
हमारे संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा सर से मुझे एक-दो बार मिलने का सौभाग्य मिला, इस दौरान मैंने उनसे बहुत कुछ सीखने और समझने का प्रयास किया। उन्होंने जो भी कार्य मुझे सौंपा मैंने बड़ी ही जिम्मेदारी के साथ उसका अक्षरश: पालन किया। पर मैं अब उनसे इस बात के लिए क्षमा चाहता हूं कि मैं उनकी डिजिटल क्रांति का हिस्सा नहीं बन पाऊंगा।
इस पूरी यात्रा में मैं, मेरे गुरुतुल्य सुधीर चौधरी सर का अपने रोम-रोम से धन्यवाद करना चाहूंगा जिन्होंने मुझे इस लायक बनाया कि मैं 20 वर्षों बाद ही सही अपनी मां, मातृभूमि और महादेव के बारे में सोचने के लायक बना। मैं अपने गुरु और बॉस सुधीर चौधरी से इस बात के लिए क्षमा मांगना चाहता हूं कि वो मुझे अपना अर्जुन बनाना चाहते थे और मैं बुधिया साबित हुआ ।
करीब 20 वर्षों के कठिन परिश्रम और मेहनत के बाद पहली बार पिछले 10 दिनों में मुझे आत्ममंथन करने का समय और अवसर मिला है और अब मैंने यही तय किया है कि आने वाले समय में मेरा जीवन सिर्फ और सिर्फ मां, मातृभूमि और महादेव को समर्पित रहेगा।
हमेशा के लिए आपका
सिद्धिनाथ
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