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एक साल से ठंडे बस्ते में ब्रॉडकास्ट बिल, इंडस्ट्री जगत में असमंजस

सरकार का लंबे समय से प्रतीक्षित ब्रॉडकास्ट बिल (Broadcast Bill), जिससे टेलीविजन और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रेगुलेशन में व्यापक बदलाव की उम्मीद थी, पिछले एक साल से ठंडे बस्ते में है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago

अदिति गुप्ता, असिसटेट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

सरकार का लंबे समय से प्रतीक्षित ब्रॉडकास्ट बिल (Broadcast Bill), जिससे टेलीविजन और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रेगुलेशन में व्यापक बदलाव की उम्मीद थी, पिछले एक साल से ठंडे बस्ते में है। सूचना एवं ब्रॉडकास्ट मंत्रालय (MIB) ने इसे पिछले अगस्त में चुपचाप वापस ले लिया था।

पहला ड्राफ्ट सार्वजनिक किया गया था, लेकिन दूसरा ड्राफ्ट केवल चुनिंदा हितधारकों के बीच ही साझा किया गया, जिससे गोपनीयता और भ्रम और बढ़ गया। तब से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं आई है, जिससे इंडस्ट्री असमंजस में है कि यह विधेयक हमेशा के लिए रद्द कर दिया गया है या बंद दरवाजों के पीछे दोबारा तैयार किया जा रहा है। इस चुप्पी ने अटकलों, निराशा और सतर्क आशावाद को जन्म दिया है, क्योंकि हितधारक यह सोच रहे हैं कि सरकार की देरी नियामक महत्वाकांक्षाओं पर पुनर्विचार का संकेत है या अनिश्चितकालीन ठहराव।

सावधानी और उम्मीद के बीच बंटे हितधारक

इंडस्ट्री जगत मानता है कि यह विधेयक अपनी खामियों के बावजूद इतना अहम है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक ब्रॉडकास्ट एक्सपर्ट ने कहा, “ब्रॉडकास्ट बिल को पीछे कर दिया गया क्योंकि सभी को चिंता थी। सरकार ने कहा था कि इसे दोबारा बनाया जाएगा ताकि हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखा जा सके। अभी तक संशोधित संस्करण सामने नहीं आया है। यह निश्चित रूप से फिर आएगा और इंडस्ट्री की चिंताओं का ध्यान रखेगा। इंडस्ट्री अपना काम जारी रखे हुए है और आत्म-नियमन की दिशा में काम कर रहा है, क्योंकि यदि आत्म-नियमन मजबूत नहीं होता, तो सरकार या अदालत का फैसला यह विधेयक जल्दी ले आएगा और यह इंडस्ट्री को शायद पसंद न आए।”

एक अन्य इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने इसकी तात्कालिकता पर जोर देते हुए कहा, “यह इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भविष्य की सभी तकनीकी प्रगतियों को अधिक प्रभावी तरीके से शामिल किया गया है। इंडस्ट्री को संतुलित बनाए रखने के लिए यह तुरंत आवश्यक है।”

इसी क्रम में एक वरिष्ठ मीडिया सलाहकार ने कहा, “ब्रॉडकास्ट क्षेत्र में हर बड़ा निवेश निर्णय (इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड से लेकर कंटेंट रणनीति तक) ब्रॉडकास्ट बिल पर स्पष्टता का इंतजार करते हुए रोका हुआ है। जितनी देर होगी, उतना ही असमंजस बढ़ेगा और यह ऐसे क्षेत्र के लिए अच्छा नहीं है जो स्थिरता पर निर्भर करता है।”

दूसरे ड्राफ्ट की गोपनीयता

ब्रॉडकास्ट सेवाएं (विनियमन) विधेयक, 2024 की प्रतियां हितधारकों को बांटने के कुछ ही दिनों बाद, सूचना एवं ब्रॉडकास्ट मंत्रालय ने अचानक उन्हें वापस मांगा। पहला ड्राफ्ट सार्वजनिक किया गया था, लेकिन दूसरा ड्राफ्ट कभी सार्वजनिक नहीं हुआ। प्रतियां केवल चुनिंदा ब्रॉडकास्टर्स, केबल ऑपरेटर्स और अन्य हितधारकों को ही दी गईं।

इससे खास तौर पर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को बाहर रखने पर पारदर्शिता को लेकर चिंता बढ़ी।

मेघनाद एस, ध्रुव राठी, अभिसार शर्मा जैसे यूट्यूबर्स और अन्य ने इस अपारदर्शी परामर्श प्रक्रिया पर असहजता जताई। DIGIPUB News India Foundation, जो 90 से अधिक डिजिटल न्यूज संस्थानों का प्रतिनिधित्व करता है, ने भी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर डिजिटल न्यूज इकोसिस्टम से जुड़ी चिंताओं पर औपचारिक बैठक की मांग की।

संशोधित ड्राफ्ट में क्या बदला

विधेयक के दूसरे ड्राफ्ट में पहले संस्करण की कुछ आलोचनाओं को दूर करने की कोशिश की गई थी।

मुख्य बदलावों में शामिल थे:

  • अनिवार्य प्रमाणन से छूट: समाचार और सामयिक कार्यक्रम, शैक्षणिक कार्यक्रम, लाइव इवेंट्स, बच्चों की एनिमेशन और अन्य निर्दिष्ट श्रेणियों को कंटेंट इवैल्यूएशन कमेटियों (CECs) की अनिवार्य मंजूरी से मुक्त किया गया। इसे सरकारी नियंत्रण और सेंसरशिप की आशंकाओं से पीछे हटने की दिशा में कदम माना गया।

  • ओटीटी प्लेटफॉर्म की स्पष्ट श्रेणीकरण: ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट प्रोवाइडर्स (OCCPs) या ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को आधिकारिक तौर पर “इंटरनेट ब्रॉडकास्ट नेटवर्क” के रूप में वर्गीकृत किया गया।

  • नई परिभाषाओं का समावेश: “विज्ञापन मध्यस्थ,” “डिजिटल न्यूज ब्रॉडकास्टर,” और “ग्राउंड-बेस्ड ब्रॉडकास्टर” जैसे शब्द जोड़े गए, जिससे नियमन का दायरा बढ़ा।

  • विस्तारित दायरा: ड्राफ्ट में उन व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं को भी शामिल किया गया जो व्यवस्थित तरीके से व्यावसायिक उद्देश्य से समाचार और सामयिक कंटेंट का प्रसार करते हैं, जिससे स्वतंत्र डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स भी इसके दायरे में आ सकते हैं।

  • कड़े दंड: सामान्य उल्लंघनों पर पहली बार ₹10 लाख और बार-बार उल्लंघन पर ₹50 लाख का जुर्माना लगाया गया। सब्सक्राइबर रिकॉर्ड उल्लंघन पर ₹2.5 करोड़ तक का जुर्माना तय किया गया।

इन बदलावों के बावजूद विधेयक में कुछ विवादित प्रावधान बने रहे, जैसे व्यक्तियों के लिए आपराधिक दंड, CEC सदस्यों का विवरण अनिवार्य रूप से सार्वजनिक करना, और टेलीविजन व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक समान नियमन की संभावना।

इंडस्ट्री जगत की चिंताएं

कानूनी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स को आशंका थी कि विधेयक में और देरी से असमंजस और गहरा सकता है। उन्होंने कहा कि सबसे विवादित मुद्दों में से एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को प्रसारक की परिभाषा में शामिल करने की कोशिश थी। उन्होंने माना कि यही वजह हो सकती है कि मंत्रालय ने ड्राफ्ट वापस लेकर उसकी प्रावधानों पर फिर से विचार किया।

एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि ऐसे विधेयकों में लंबी प्रक्रिया असामान्य नहीं है, खासकर तब जब वे संवैधानिक स्वतंत्रताओं और व्यापक इंडस्ट्री प्रभाव से जुड़े हों। एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने कहा, “क्योंकि अब चर्चाएं सिर्फ पारंपरिक ब्रॉडकास्ट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल/ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएटर्स तक फैली हैं, इसलिए इसमें समय लगना स्वाभाविक है।”

फिलहाल, इंडस्ट्री इंतजार और आत्म-नियमन के बीच फंसा हुआ है। जहां कुछ लोग देरी को इस संकेत के रूप में देखते हैं कि सरकार अपने दृष्टिकोण का सावधानी से पुनर्मूल्यांकन कर रही है, वहीं अन्य को डर है कि यह अनिश्चितकालीन ठहराव है, जो ब्रॉडकास्ट नियमन और इंडस्ट्री से जुड़े अहम फैसलों के भविष्य को अधर में छोड़ देता है।


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