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BARC के बेसलाइन सर्वे पर 2018 में लगा था ब्रेक, आज भी इंतजार करती टीवी इंडस्ट्री
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत में टेलीविजन विज्ञापनदाता आज जिस मीडिया परिदृश्य में काम कर रहे हैं, उसमें उन्हें दर्शकों की जानकारी बहुत सीमित रूप में मिल रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि BARC (Broadcast Audience Research Council India) की बेसलाइन स्टडी, जो यह बताने के लिए अहम होती है कि कितने टीवी घर हैं और दर्शक क्या देख रहे हैं। 2018 के बाद से यह अपडेट नहीं हुई है।
हालांकि यह स्टडी हर दो साल में होनी थी, लेकिन आखिरी बार Broadcast India (BI) Survey 2018 में हुआ था। 2021 में BARC ने "TV Universe Estimates 2020" ज़रूर जारी किए थे, लेकिन वो पुराने डेटा पर आधारित अनुमान थे, कोई नया सर्वे नहीं।
तब से अब तक कोई नया डेटा जारी नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान Connected TV (CTV) का चलन बढ़ा है और डिजिटल कंटेंट की खपत, खासकर कोविड के बाद, बहुत तेजी से बदली है। ऐसे में पुराने डेटा के आधार पर काम करना अब मुश्किल होता जा रहा है।
इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों ने 'एक्सचेंज4मीडिया' को बताया कि BARC ने इस साल की शुरुआत में नया BI सर्वे शुरू किया था, जिसमें नई मार्केट रियलिटी को ध्यान में रखते हुए मेथडोलॉजी में बदलाव भी किए जा रहे थे। लेकिन सूत्रों का कहना है कि ब्रॉडकास्टर्स जैसे स्टेकहोल्डर ग्रुप्स की चिंताओं की वजह से यह काम फिलहाल धीमा पड़ गया है।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF), जो टीवी और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री का बड़ा प्रतिनिधि संगठन है, ने BARC के डेटा सर्वे से जुड़ी मौजूदा प्रक्रियाओं में बदलाव को लेकर आपत्ति जताई। इस वजह से दो एजेंसियों द्वारा शुरू की गई नई बेसलाइन स्टडी बीच में ही रोक दी गई।
एक विशेषज्ञ ने बताया कि कुछ ब्रॉडकास्टर्स इसलिए सतर्क हैं क्योंकि उन्हें डर है कि नई स्टडी में शहरी क्षेत्रों में टीवी की पहुंच में गिरावट (reach trends) सामने आ सकती है, जिससे उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है।
चूंकि कई सालों से नया डेटा नहीं आया है, इसलिए टीवी और डिजिटल मीडिया की तुलना को लेकर बहस बढ़ गई है। कई मीडिया प्लानर्स का मानना है कि जब तक कोई ठोस, थर्ड-पार्टी द्वारा वेरिफाइड डेटा नहीं होगा, टीवी विज्ञापन धीरे-धीरे सीमित हो सकते हैं, सिर्फ़ बड़े इम्पैक्ट वाले स्लॉट्स तक सीमित रह जाएंगे, और बाकी बजट डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो सकता है क्योंकि वहां पर ज्यादा सटीक माप उपलब्ध है।
एक वरिष्ठ मीडिया एग्जिक्युटिव के मुताबिक, जब विज्ञापनदाताओं के पास ताज़ा और भरोसेमंद डेटा नहीं होता, तो वे अपने बजट को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं या मीडिया हाउस से ज्यादा छूट की मांग करते हैं। यही ट्रेंड पहले भी देखा गया था जब Indian Readership Survey (IRS) का डेटा कई सालों तक नहीं आया।
2025 के Pitch Madison Annual Report (PMAR) के अनुसार, डिजिटल मीडिया अब भारत के कुल विज्ञापन बाजार में 50% से ज्यादा हिस्सा ले चुका है (₹49,250 करोड़), जबकि टीवी का हिस्सा 2022 के 34% से गिरकर 2024 में सिर्फ़ 30% से थोड़ा कम (₹34,500 करोड़) रह गया है। वहीं, TV पर 2023 में 11,127 विज्ञापनदाता थे, जो 2024 में घटकर 8,653 रह गए यानी करीब 23% की गिरावट।
पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्क्रीन पर कंटेंट देखने का अनुभव काफी बदल गया है। एक अग्रणी एफएमसीजी कंपनी के सीनियर मीडिया प्लानर के अनुसार अब बहुत-से घरों में पारंपरिक टेलीविजन के साथ-साथ कनेक्टेड प्लेटफॉर्म्स (जैसे स्मार्ट टीवी या ओटीटी डिवाइसेज) का मिश्रण देखने को मिल रहा है। ऐसे हाइब्रिड व्यूअरशिप वाले घरों की वजह से पहले के पुराने अनुमान अब आज की वास्तविकता को पूरी तरह नहीं दर्शाते। इसके अलावा पे-टीवी यानी सब्सक्रिप्शन वाले टीवी कनेक्शनों की संख्या में भी गिरावट आई है।
इस बदलाव का असर ब्रैंड्स के मीडिया प्लानिंग के तरीकों पर भी पड़ रहा है। एक ऑटोमोबाइल कंपनी के सीनियर मार्केटर ने बताया कि उनके आंतरिक अनुमानों के मुताबिक अब भारत में टीवी घरों की संख्या 22.5 करोड़ से ज्यादा है और इनमें से बड़ी संख्या में घर CTV (कनेक्टेड टीवी) सक्षम हैं। यह सीधे तौर पर इस बात को प्रभावित करता है कि कंपनियां अपने विज्ञापन बजट को किस तरह विभाजित करें।
कुछ ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि जो भी नया BI (ब्रॉडकास्ट इंडिया) सर्वे किया जाएगा, उसे भारत की 2011 की जनगणना पर ही आधारित करना होगा क्योंकि नई जनगणना की प्रक्रिया में देरी हुई है। लेकिन विज्ञापनदाताओं का मानना है कि डेटा मॉडल्स और आंकड़ों के अनुमान में बीच-बीच में कुछ अपडेट करके इस अंतर को पाटा जा सकता है।
एक प्रमुख कंज्यूमर टेक कंपनी के मीडिया प्रमुख ने कहा कि जनगणना संबंधी अड़चन को समझा जा सकता है, लेकिन इससे डेटा अपडेट की संभावनाओं को पूरी तरह रोकना जरूरी नहीं है। अगर टीवी की पहुंच नए क्षेत्रों या नए फॉर्मेट्स में बढ़ रही है, तो हमें ऐसे तरीके अपनाने होंगे जो इस बदलाव को माप सकें।
BARC इंडिया के सीईओ नकुल चोपड़ा ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और IBDF के चेयरमैन केविन वज ने भी प्रतिक्रिया नहीं दी।
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