राजस्व चुनौतियों के बीच न्यूज चैनल्स का मार्केटिंग पर जोर

भारत के न्यूज टीवी इंडस्ट्री के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 11 November, 2024
Last Modified:
Monday, 11 November, 2024
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चहनीत कौर, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।

भारत के न्यूज टीवी इंडस्ट्री के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जुलाई से सितंबर के बीच कुछ चैनलों के ऑपरेटिंग राजस्व में अप्रैल-जून की तुलना में औसतन 30-40% की गिरावट आई, जबकि कुछ चैनलों ने इस दौरान अच्छी बढ़त हासिल की।

इस गिरावट का कारण चुनावों के बाद का कूलिंग-ऑफ पीरियड (मतलब चुनावों के बाद का ठहराव) और न्यूज टीवी के राजस्व का चक्रीय स्वभाव (एक निश्चित चक्र में आने वाली उतार-चढ़ाव) है। जिन चैनलों ने अपनी कमाई में बढ़त दर्ज की, उनके लिए यह वृद्धि मुख्य रूप से डिजिटल विज्ञापनों में इजाफा, फेस्टिवल सीजन की शुरुआत, बेहतर कंटेंट स्ट्रैटेजी और नई डिजिटल पहलों के कारण हुई।

नाम न बताने की शर्त पर एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने बताया कि चुनावों के बाद न्यूज चैनल्स की कमाई में गिरावट आम बात है, क्योंकि चुनावों के दौरान राजनीतिक दल और उनसे जुड़े समूह न्यूज चैनल्स पर ज्यादा खर्च करते हैं ताकि वे मतदाताओं से जुड़ सकें। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही यह खर्च कम हो जाता है, जिससे चैनलों के विज्ञापन राजस्व पर असर पड़ता है।

चुनावों के बाद न्यूज चैनल्स के राजस्व पर पड़ा असर 

क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर (QoQ) प्रदर्शन:

  • Network18 के न्यूज पोर्टफोलियो में सितंबर की तिमाही में 1.6% की गिरावट आई, जिससे इसका राजस्व ₹445 करोड़ पर पहुंच गया।
  • TV Today Network (जो आज तक और इंडिया टुडे जैसे प्रमुख चैनल चलाता है) ने 33% की गिरावट दर्ज की। पहली तिमाही में इसका राजस्व ₹311.79 करोड़ था, जो दूसरी तिमाही में घटकर ₹206.77 करोड़ रह गया।
  • Zee Media (ZMCL) ने दूसरी तिमाही में 25% की गिरावट दर्ज की।

एक्सपर्ट का मानना है कि जुलाई-सितंबर अवधि में विज्ञापनदाता अपनी प्राथमिकता त्योहारों और छुट्टियों से जुड़े कैंपेन पर अधिक केंद्रित कर लेते हैं, जिससे न्यूज चैनल्स को मिलने वाले विज्ञापनों का हिस्सा कम हो जाता है। चुनावों के बाद दर्शकों की राजनीतिक कवरेज में रुचि कम हो जाती है, जिससे दर्शकों की संलग्नता (एंगेजमेंट) और विज्ञापन राजस्व पर असर पड़ता है।

कंपनियों के राजस्व में उछाल 

इसके विपरीत, NDTV ने 18.5% की वृद्धि दर्ज की। पहली तिमाही में इसका संयुक्त राजस्व ₹93.9 करोड़ था, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर ₹111.32 करोड़ हो गया। कंपनी के अनुसार, यह बेहतरीन प्रदर्शन NDTV की बेहतर कंटेंट रणनीति, नए इन्टेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज (IPs) के विस्तार और डिजिटल योजनाओं के कारण हुआ है।

साल-दर-साल के आधार पर न्यूज चैनल्स के राजस्व में मामूली गिरावट 

 साल-दर-साल के आधार पर भी अधिकांश न्यूज चैनल्स के राजस्व में हल्की गिरावट देखी गई। जी मीडिया का राजस्व Q2 2023 में ₹151.59 करोड़ से घटकर Q2 2024 में ₹130.70 करोड़ पर आ गया। NDTV का राजस्व Q2 2023 में ₹61.90 करोड़ से घटकर ₹59.8 करोड़ पर आ गया, यानी 3.4% की कमी। वहीं, TV Today Network का राजस्व भी 3.3% कम हो गया, जो 2023 की समान तिमाही में ₹213.86 करोड़ था और 2024 की दूसरी तिमाही में घटकर ₹206.77 करोड़ हो गया।

विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, Network18 ने 6% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष ₹420.31 करोड़ से बढ़कर ₹445.27 करोड़ हो गया। कंपनी के अनुसार, यह वृद्धि डिजिटल विज्ञापनों के बढ़ते राजस्व के कारण हुई।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि साल-दर-साल राजस्व में गिरावट का कारण आर्थिक चुनौतियां हो सकती हैं, जैसे कि महंगाई और वित्तीय अनिश्चितताएं। इसके अलावा, कई विज्ञापनदाता Q3 के त्योहारी सीजन (जैसे दिवाली, क्रिसमस, और नववर्ष) के लिए अपने बजट को बचाकर रखते हैं। इससे दूसरी तिमाही में विज्ञापन खर्च में कमी होती है।

मार्केटिंग और प्रचार खर्च में वृद्धि:  

 भले ही राजस्व में मामूली गिरावट आई हो, लेकिन न्यूज चैनल्स का मार्केटिंग और प्रचार खर्च में वृद्धि देखने को मिली है। Network18 का खर्च पिछले वर्ष ₹97.6 करोड़ से बढ़कर ₹106.5 करोड़ हो गया, जो लगभग 9% की वृद्धि है। NDTV ने भी अपने मार्केटिंग खर्च में बड़ी वृद्धि दर्ज की, जो जुलाई-सितंबर 2023 के ₹157.4 करोड़ से बढ़कर 2024 में ₹335.7 करोड़ हो गया, यानी 113% की वृद्धि।

यह वृद्धि इस ओर इशारा करती है कि न्यूज चैनल ब्रैंड की पहचान को मजबूत करने और दर्शकों को आकर्षित करने के लिए डिजिटल मीडिया से प्रतिस्पर्धा करते हुए अपने विज्ञापन और प्रचार पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएं 

कुल मिलाकर, चुनाव के बाद राजस्व में गिरावट के बावजूद, भारत का न्यूज टेलीविजन सेक्टर स्थिर बना हुआ है। कई प्रसारण कंपनियों के लिए अब चुनौती अपने कंटेंट को विविधता देना और डिजिटल ट्रेंड्स के साथ तालमेल बिठाना है ताकि वे दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रख सकें और विज्ञापन से अधिक राजस्व कमा सकें। 

इंडस्ट्री अब धीरे-धीरे डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही है, जहां कई प्रसारण कंपनियां अपने ऑनलाइन उपस्थिति को मजबूत कर रही हैं ताकि युवा दर्शकों तक पहुंचा जा सके और अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया जा सके। यह बदलाव भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है, क्योंकि पारंपरिक टीवी कंपनियां तेजी से डिजिटल-प्रथम (डिजिटल-फर्स्ट) बन रही दुनिया में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।

Network18 ने अपने मीडिया रिलीज में कहा, "जैसे-जैसे उपभोक्ता और विज्ञापनदाता अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं में ओमनी-चैनल अनुभवों की ओर बढ़ते जा रहे हैं, टीवी और डिजिटल मीडिया में गहरी और एकीकृत उपस्थिति होना Network18 और उसके अन्य साझेदारों को अपने उपभोक्ताओं और विज्ञापनदाताओं की सेवा करने में और अधिक सक्षम बनाएगा।"

इंडस्ट्री के एक स्रोत ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे मोबाइल ऐप्स और सब्सक्रिप्शन सेवाओं का विकास नए राजस्व साधनों को खोल सकता है। विशेष कंटेंट, जैसे एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स और बिहाइंड-द-सीन फुटेज, लॉयल क्लाइंट्स को आकर्षित कर सकता है। इसके अलावा, इंडस्ट्री अवॉर्ड, एक्सपर्ट्स पैनल और लाइफस्टाइल इवेंट्स जैसे आयोजनों से स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से भी राजस्व कमाया जा सकता है।

शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव :

- Network18 के शेयर की कीमत अप्रैल में लगभग ₹90.40 थी, जो अगस्त में ₹99.92 के उच्चतम स्तर पर पहुंची और सितंबर के अंत में ₹81.97 पर बंद हुई। इसकी सबसे कम कीमत जून में ₹75.60 रही, लेकिन दूसरी तिमाही के अंत तक रिकवरी के संकेत दिखे।
  
- ZMCL का नया वित्तीय वर्ष अप्रैल में ₹11.55 के साथ शुरू हुआ और मई में इसका न्यूनतम मूल्य ₹10.55 पर था। सितंबर के अंत में, यह बढ़कर ₹22.82 पर पहुंच गया, जो कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में निवेशकों की बढ़ती रुचि का परिणाम है।

- TV Today का वित्तीय वर्ष 2024-25 की शुरुआत ₹219.55 के साथ हुई, जो जून में ₹207.25 तक गिर गया। अगस्त की शुरुआत में यह ₹287 तक पहुंचा और H1 के अंतिम दिन ₹234.05 पर बंद हुआ, जो बाजार में सकारात्मक रुचि को दर्शाता है।

-  NDTV का नया वित्तीय वर्ष ₹222.65 के साथ शुरू हुआ और सितंबर के अंत में ₹187.34 तक गिर गया, जबकि जून की शुरुआत में इसका उच्चतम मूल्य ₹263.40 पर था। इस गिरावट से यह संकेत मिलता है कि व्यापक उद्योग परिवर्तनों के बीच बाज़ार पुनः मूल्यांकन कर रहा है।

इस प्रदर्शन से साफ है कि न्यूज टीवी इंडस्ट्री में चुनौतियां तो हैं, लेकिन डिजिटल मंचों और रणनीतिक योजना के माध्यम से यह इंडस्ट्री अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए तैयार है।

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त्योहारी सीजन में भी टाटा प्ले-सोनी के बीच सुलह नहीं, कनेक्टेड टीवी तक पहुंचा विवाद

टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के बीच चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर चल रहा विवाद अब पारंपरिक डीटीएच से आगे बढ़ गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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इमरान फैजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के बीच चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर चल रहा विवाद अब पारंपरिक डीटीएच से आगे बढ़ गया है। टाटा प्ले की स्मार्ट कनेक्टेड टीवी सर्विस में भी अब सोनी के चैनल उपलब्ध नहीं हैं। दोनों कंपनियों के बीच मामला टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) में चल रहा है और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होनी है।

यह विवाद शुरुआत में चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन और कमर्शियल शर्तों को लेकर था, लेकिन अब इसका असर टीवी देखने के नए तरीकों पर भी दिखाई दे रहा है। टाटा प्ले जैसे डिस्ट्रीब्यूटर कनेक्टेड टीवी की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं ब्रॉडकास्टर्स अलग-अलग स्क्रीन पर अपने कंटेंट की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

टाटा प्ले स्मार्ट पर 500 से ज्यादा लाइव चैनल

टाटा प्ले ने Tata Play Smart के जरिए कनेक्टेड स्क्रीन पर अपनी टीवी सर्विस का विस्तार किया है। इसकी ऐप लिस्टिंग के मुताबिक, यहां स्पोर्ट्स, न्यूज, फिल्म और जनरल एंटरटेनमेंट समेत 500 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल उपलब्ध हैं।

इसमें स्टार प्लस, जी टीवी, कलर्स, स्टार स्पोर्ट्स, स्टार गोल्ड, जी सिनेमा, एमटीवी, स्टार मां, जी तेलुगु, सन टीवी और स्टार विजय जैसे प्रमुख चैनल शामिल हैं। हालांकि, सोनी के चैनल Tata Play Smart पर उपलब्ध नहीं हैं। इस तरह टाटा प्ले और सोनी के बीच चल रहे विवाद का असर अब एक और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहा है।

डीटीएच पर चुनिंदा पैक और ए ला कार्टे में मिल रहे सोनी चैनल

टाटा प्ले की डीटीएच सर्विस पर सोनी के चैनल पूरी तरह से बंद नहीं हैं। ये चैनल ए ला कार्टे विकल्प और कुछ प्रीमियम पैक के जरिए उपलब्ध हैं। हालांकि, वे अभी भी टाटा प्ले के बेस चैनल पैक्स का हिस्सा नहीं हैं।

टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने इस मामले पर औपचारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

कनेक्टेड टीवी की तरफ बढ़ रहे डिस्ट्रीब्यूटर

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब डीटीएच कंपनियां सैटेलाइट आधारित टीवी से आगे बढ़कर कनेक्टेड टीवी में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

कनेक्टेड टीवी के जरिए लाइव टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मुफ्त कंटेंट को एक ही इंटरफेस पर उपलब्ध कराया जा सकता है। डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इससे दर्शकों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने का एक और रास्ता मिलता है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स को पारंपरिक पे-टीवी के अलावा नए प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलता है।

लेकिन टाटा प्ले स्मार्ट से सोनी चैनलों की गैर-मौजूदगी यह दिखाती है कि नए प्लेटफॉर्म आने के बावजूद पुराने कमर्शियल विवादों का असर इन नई टीवी सर्विसेज पर भी पड़ सकता है।

त्योहारों के सीजन में भी समाधान नहीं

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव गौरव बनर्जी ने पहले उम्मीद जताई थी कि त्योहारों के सीजन में यह लंबा चला आ रहा विवाद सुलझ सकता है। हालांकि, उनके बयान से किसी ठोस समाधान या समझौते की पुष्टि नहीं हुई थी।

जब उनसे पूछा गया कि क्या त्योहारों का समय कानूनी विवाद को खत्म कर सकता है, तो उन्होंने कहा था, “मुझे उम्मीद है।”

यह पूछे जाने पर कि सोनी के प्रमुख कंटेंट के साथ चैनल टाटा प्ले के बड़े चैनल पैक्स में वापस आ सकते हैं या नहीं, उन्होंने भी उम्मीद जताई थी। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया था कि दोनों कंपनियों के बीच बातचीत किस स्थिति में है या चैनलों की वापसी की कोई तय समयसीमा है।

उनका बयान टाटा प्ले पर ए ला कार्टे आधार पर सोनी चैनलों की उपलब्धता के संदर्भ में था। इससे किसी समझौते की पुष्टि नहीं हुई।

स्पोर्ट्स चैनलों की गैर-मौजूदगी भी अहम

सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनल भी इस विवाद को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। लाइव स्पोर्ट्स टीवी दर्शकों को किसी खास समय पर टीवी देखने के लिए आकर्षित करता है और इससे चैनलों की मांग पर भी असर पड़ता है।

फिलहाल सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स में वापस नहीं आए हैं। ऐसे में दोनों कंपनियां त्योहारों के महत्वपूर्ण टीवी सीजन में बिना किसी सार्वजनिक रूप से घोषित समाधान के आगे बढ़ रही हैं।

30 अक्टूबर को TDSAT में अगली सुनवाई

इस कमर्शियल विवाद के साथ कानूनी मामला भी जारी है। TDSAT ने 7 अगस्त को मामले की सुनवाई की थी और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर के लिए तय की है।

TDSAT के पहले के एक आदेश में टाटा प्ले को दो सप्ताह के भीतर 40 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही, सोनी समूह की टीवी ब्रॉडकास्टिंग कंपनी Culver Max Entertainment की ओर से जारी 128.42 करोड़ रुपये के डिमांड नोटिस की वसूली पर रोक लगाई गई थी।

ट्रिब्यूनल ने विवादित डिमांड नोटिस पर कार्रवाई पर भी रोक लगाई थी और ब्रॉडकास्टर को विवाद से जुड़े स्थिर चित्र या स्क्रॉल प्रसारित नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके बाद Culver Max ने TDSAT के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह मामला टाटा प्ले के डीटीएच पैक्स से सोनी चैनलों को हटाने के फैसले को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी पर रोक से जुड़ा था।

हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी, लेकिन सोनी को एक तय सोशल मीडिया संदेश साझा करने की अनुमति दी। इसमें बताया जा सकता था कि मामला अदालत में विचाराधीन है और सोनी के चैनल टाटा प्ले पर ए ला कार्टे सर्विस के जरिए उपलब्ध हैं।

टीवी डिस्ट्रीब्यूशन का बदल रहा बाजार

यह विवाद ऐसे समय में चल रहा है जब टीवी डिस्ट्रीब्यूशन का पूरा बाजार बदल रहा है। ऑपरेटर अब कनेक्टेड टीवी और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं ब्रॉडकास्टर्स भी पे-टीवी, कनेक्टेड स्क्रीन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

Vzy, Nelen और Sun Direct की Linear TV Streaming सर्विस जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सैकड़ों लाइव टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मुफ्त कंटेंट को एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स पर JioStar, Sony Pictures Networks India, Warner Bros Discovery India और Zee Entertainment जैसे ब्रॉडकास्टर्स के चैनल भी शामिल हैं।

यहां एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिलती है। सोनी एक इंटीग्रेटेड कनेक्टेड टीवी सर्विस में शामिल है, जबकि टाटा प्ले के साथ उसका डिस्ट्रीब्यूशन विवाद टाटा प्ले की स्मार्ट सर्विस तक पहुंच गया है।

अभी भी समाधान का इंतजार

टाटा प्ले के लिए कनेक्टेड टीवी का विस्तार अपने चैनल एग्रीगेशन बिजनेस को डीटीएच कनेक्शन से आगे ले जाने का मौका है। वहीं सोनी के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी दर्शकों तक पहुंच बढ़ाने का जरिया है।

लेकिन टाटा प्ले और सोनी का विवाद यह दिखाता है कि तकनीक और टीवी देखने के नए प्लेटफॉर्म आने भर से कंपनियों के बीच कमर्शियल शर्तों को लेकर विवाद अपने आप खत्म नहीं होते।

30 अक्टूबर की TDSAT सुनवाई के करीब आने के साथ अब मामला सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स में कब लौटेंगे। सवाल यह भी है कि कनेक्टेड टीवी का बाजार तेजी से बढ़ने और त्योहारों के सीजन में दोनों कंपनियां किसी समझौते तक पहुंच पाती हैं या नहीं।

फिलहाल गौरव बनर्जी की ओर से जताई गई उम्मीद के बावजूद किसी समझौते की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स से बाहर हैं और Tata Play Smart की कनेक्टेड टीवी सर्विस पर भी उपलब्ध नहीं हैं।

 

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राज टेलीविजन नेटवर्क की स्वतंत्र निदेशक भारती श्रीधर फिर 5 साल के लिए नियुक्त

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड के सदस्यों ने भारती श्रीधर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरी बार नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड के सदस्यों ने भारती श्रीधर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरी बार नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी कंपनी की 30 सितंबर 2026 को हुई 32वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में दी गई।

कंपनी के मुताबिक, भारती श्रीधर को 1 अप्रैल 2027 से पांच साल की दूसरी लगातार अवधि के लिए स्वतंत्र निदेशक के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया है। उनका नया कार्यकाल 31 मार्च 2032 तक रहेगा। उनका मौजूदा कार्यकाल 31 मार्च 2027 को खत्म हो रहा है। यह पुनर्नियुक्ति नामांकन और पारिश्रमिक समिति की सिफारिश और कंपनी के निदेशक मंडल की मंजूरी के आधार पर की गई है। 

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारती श्रीधर पर सेबी या किसी अन्य संबंधित प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने पर रोक नहीं है।

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भारती श्रीधर ने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया है और उन्हें मीडिया व एंटरमेंट इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। टेलीविजन और प्रसारण क्षेत्र में विभिन्न मीडिया मंचों के साथ लंबे समय तक जुड़ाव के कारण उन्हें इस क्षेत्र का अच्छा अनुभव है।

कंपनी के अनुसार, मीडिया इंडस्ट्री  में अपने प्रोफेशनल काम के अलावा वह ज्योतिष और अंक ज्योतिष की विशेषज्ञ और काउंसलर भी हैं। पिछले करीब 20 वर्षों में वह कई बड़े जनसंचार माध्यमों पर नजर आई हैं। इस दौरान उन्होंने दर्शकों की पसंद, मीडिया संचार और टेलीविजन इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों को लेकर व्यापक समझ विकसित की है।

कंपनी ने कहा है कि उनका अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभव और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की समझ कंपनी के कामकाज और इंडस्ट्री से जुड़ाव के लिए उपयोगी नजरिया देती है।

कंपनी ने यह भी बताया है कि भारती श्रीधर फिलहाल किसी दूसरी कंपनी में निदेशक पद पर नहीं हैं। इसके अलावा, उनका कंपनी के किसी भी अन्य निदेशक के साथ कोई पारिवारिक संबंध नहीं है।

कंपनी ने यह भी पुष्टि की है कि भारती श्रीधर पर सेबी या किसी अन्य संबंधित प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने पर कोई रोक नहीं है।

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राज टेलीविजन नेटवर्क की आम बैठक में इन दो निदेशकों की पुनर्नियुक्ति, सभी प्रस्ताव मंजूर

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
RajTelevision874

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और 11:45 बजे खत्म हुई। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि बैठक में रखे गए सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए।

बैठक की शुरुआत कंपनी की कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने की। उन्होंने सदस्यों का स्वागत किया और कंपनी के निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों का परिचय कराया। बैठक में कंपनी के ऑडिटर, कॉस्ट ऑडिटर, सेक्रेटेरियल ऑडिटर, इंटरनल ऑडिटर और स्क्रूटिनाइजर भी मौजूद रहे।

इसके बाद कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एम. राजेंद्रन ने सदस्यों का स्वागत किया और जरूरी कोरम पूरा होने के बाद बैठक शुरू की। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी के सफर, आर्थिक और मीडिया उद्योग की स्थिति, वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑडिटेड वित्तीय नतीजे, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट, अनक्वालिफाइड ऑडिटर्स रिपोर्ट और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स रिपोर्ट सदस्यों को पहले ही भेजी जा चुकी थी और इन्हें बैठक में पढ़ा हुआ माना गया।

AGM में इन प्रस्तावों को मंजूरी

AGM में कुल चार प्रस्ताव रखे गए। इनमें सामान्य और विशेष, दोनों तरह के प्रस्ताव शामिल थे।

  1. 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिटेड वित्तीय विवरण और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई।
  2. एम. रघुनाथन को रोटेशन के आधार पर दोबारा निदेशक नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। वह रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए योग्य थे और उन्होंने अपना नाम पेश किया था।
  3. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक को मंजूरी/रैटिफाई किया गया।
  4. भारती श्रीधर को कंपनी की स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरे कार्यकाल के लिए लगातार 5 साल के लिए दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।

शेयरधारकों ने सवाल भी पूछे

AGM में रजिस्टर्ड स्पीकर-शेयरहोल्डर्स अभिषेक जे. और महेश कुमार बोहरा ने अपने विचार रखे और कंपनी के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कुछ सवाल भी पूछे, जिनका जवाब कंपनी के मैनेजमेंट ने दिया। इसके बाद कोई और सवाल नहीं उठाया गया।

ई-वोटिंग के जरिए हुआ मतदान

कंपनी ने बताया कि रिमोट ई-वोटिंग 26 सितंबर 2026 सुबह 9 बजे से 29 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक हुई। जिन सदस्यों ने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी दी गई। AGM खत्म होने के बाद भी 15 मिनट तक ई-वोटिंग खुली रखी गई, ताकि सदस्य अपना वोट दे सकें।

कंपनी के मुताबिक, सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए हैं। ई-वोटिंग के विस्तृत नतीजे और कंसोलिडेटेड स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट AGM खत्म होने के दो कार्यदिवस के भीतर जारी की जाएगी। इसे कंपनी की वेबसाइट, स्टॉक एक्सचेंजों और CDSL पर उपलब्ध कराया जाएगा।

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Zee Media: राज कुमार गुप्ता का स्वतंत्र निदेशक के तौर पर कार्यकाल पूरा, पद से हुए अलग

जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बताया है कि राज कुमार गुप्ता का कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
ZMedia87

जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बताया है कि राज कुमार गुप्ता का कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया है। उनका कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को कारोबारी समय खत्म होने के साथ समाप्त हो गया।

कंपनी ने दी जानकारी में कहा कि राज कुमार गुप्ता का दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह अब कंपनी के स्वतंत्र निदेशक नहीं रहे हैं।

कंपनी के मुताबिक, उनका कार्यकाल कंपनी अधिनियम, 2013 और उससे जुड़े नियमों के तहत एक स्वतंत्र निदेशक के लिए तय अधिकतम अवधि पूरी होने के कारण समाप्त हुआ है। 

कार्यकाल पूरा होने के साथ ही राज कुमार गुप्ता कंपनी के निदेशक मंडल की विभिन्न समितियों में सदस्य या अध्यक्ष, जहां भी लागू था, उस पद से भी अलग हो गए हैं। 

 

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सुरभि तिवारी ने 'न्यूज़ इंडिया 24X7' को कहा अलविदा : लिखी भावुक पोस्ट

पत्रकार और एंकर सुरभि तिवारी ने एक्स पोस्ट के जरिए 'न्यूज़ इंडिया 24X7' से ढाई साल बाद विदाई की जानकारी दी और संस्था, टीम तथा वरिष्ठों के प्रति आभार जताया।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
surbhi

पत्रकार और एंकर सुरभि तिवारी (Surbhi Tiwari) ने न्यूज़ इंडिया 24X7 (News India 24X7) से अपने सफर के खत्म होने की जानकारी दी है। उन्होंने एक्स (X) पर एक भावुक पोस्ट शेयर कर ढाई साल के सफर को याद किया और संस्था व टीम के प्रति आभार जताया।

समाचार4मीडिया से बातचीत में सुरभि ने बताया कि न्यूज़ इंडिया उनके लिए घर जैसा हो गया था और यहां से अलग होने का फैसला लेना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सभी का साथ, सहयोग, प्यार, विश्वास और समर्थन मिला, जिसके लिए वह सभी की दिल से आभारी हैं।

उन्होंने संस्था और टीम के साथ काम करने को अपने लिए गर्व की बात बताया। सुरभि ने कहा कि इस दौरान उन्होंने जो कुछ सीखा और अनुभव हासिल किया, वह सभी के सहयोग से संभव हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस दौरान उनसे कोई गलती हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो वह इसके लिए माफी चाहती हैं। उन्होंने न्यूज़ इंडिया 24X7 के उज्ज्वल भविष्य और लगातार आगे बढ़ने की कामना की।

सुरभि ने अपने ढाई साल के सफर में विजेंद्र सर और शैलेंद्र सर का विशेष तौर पर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने उन्हें जिम्मेदारी दी, उनके काम को सराहा और पूरा सम्मान दिया, जो उनके लिए बेहद मूल्यवान है और जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगी।

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पंकज त्रिपाठी के साथ सोनी ने लॉन्च किया ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ अभियान

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने पंकज त्रिपाठी के साथ ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ अभियान शुरू किया है, जिसमें भारत के पनामा, ब्राजील और उरुग्वे मुकाबलों को शामिल किया गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
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सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India) ने अभिनेता पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) के साथ ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ (India Ki Sabse Badi Party) अभियान शुरू किया है। इसका मकसद पनामा, ब्राजील और उरुग्वे के खिलाफ भारतीय फुटबॉल टीम के मुकाबलों को लेकर दर्शकों में उत्साह बढ़ाना है।

अभियान की शुरुआत 65 सेकंड की एक फिल्म से हुई है। इसमें पंकज त्रिपाठी लोगों को एक पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, लेकिन शुरुआत में पार्टी की वजह नहीं बताते। बाद में पता चलता है कि यह पार्टी भारतीय टीम के पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील के खिलाफ मुकाबले से जुड़ी है। भारत और ब्राजील के बीच मैच 3 अक्टूबर को कोलकाता में खेला जाएगा। अभियान में 25 सितंबर को पनामा और 6 अक्टूबर को उरुग्वे के खिलाफ होने वाले मुकाबले भी शामिल हैं।

अभियान को ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी एक्स फैन एडिशन’ के तौर पर भी आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें पंकज त्रिपाठी देशभर के फुटबॉल फैंस (Football Fans) के साथ उनकी स्थानीय भाषाओं में नजर आएंगे। इसके अलावा ‘त्रिपाठी जी की ट्यूशन’ नाम से शॉर्ट-फॉर्म फिल्मों (Short-Form Films) की सीरीज भी पेश की जाएगी, जिसमें अभिनेता फुटबॉल से जुड़े विषयों पर नजर आएंगे।

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया सोशल मीडिया (Social Media) पर आधारित एक अन्य अभियान भी शुरू करेगा। इसमें पंकज त्रिपाठी भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ बातचीत करते दिखेंगे। इस अभियान में भारतीय टीम के कप्तान गुरप्रीत सिंह संधू (Gurpreet Singh Sandhu) भी शामिल होंगे।

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर और स्पोर्ट्स एंड इंटरनेशनल बिजनेस हेड (Chief Revenue Officer and Sports & International Business Head) राजेश कौल (Rajesh Kaul) ने कहा कि भारत का पनामा, ब्राजील और उरुग्वे से मुकाबला भारतीय फुटबॉल के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इसलिए अभियान को इन मैचों के उत्साह और स्तर के अनुरूप तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि पंकज त्रिपाठी की लोकप्रियता, सहजता और दर्शकों से जुड़ने की क्षमता उन्हें इस जश्न के लिए देश को आमंत्रित करने के लिए उपयुक्त बनाती है। अभियान के जरिए मनोरंजन और खेल को भारतीय अंदाज में जोड़ने की कोशिश की गई है, ताकि मुख्य फुटबॉल दर्शकों से आगे भी उत्साह पैदा हो और इन मुकाबलों को देशभर के लोगों के साझा आयोजन के रूप में देखा जाए।

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राज टीवी के शेयर में तेज हलचल पर कंपनी ने कही ये बात

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड ने अपने शेयर की कीमत में हुई तेज हलचल को लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सफाई दी है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
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Wednesday, 30 September, 2026
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राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड ने अपने शेयर की कीमत में हुई तेज हलचल को लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि उसके शेयर की कीमत में हुआ बदलाव पूरी तरह बाजार की स्थिति की वजह से है और यह पूरी तरह बाजार से संचालित है।

कंपनी ने 28 सितंबर 2026 को बीएसई और एनएसई से मिले ईमेल का जवाब देते हुए यह जानकारी दी है। इन ईमेल में कंपनी के शेयर की कीमत में हुई महत्वपूर्ण हलचल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

कंपनी ने कहा कि उसके शेयर की कीमत में हुई इस महत्वपूर्ण हलचल के कारणों पर प्रबंधन का न तो कोई नियंत्रण है और न ही उसे इसकी जानकारी है।

राज टेलीविजन नेटवर्क ने कहा कि वह सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत अपनी सभी जरूरी जानकारियां लगातार साझा करता रहा है और आगे भी अपनी जिम्मेदारियों के मुताबिक सभी संबंधित खुलासे करता रहेगा।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज के साथ हुए अपने समझौतों के तहत भी जरूरी खुलासे करने की बात कही है। यह जवाब कंपनी की ओर से कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने दिया है।   

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डिश टीवी की AGM में सभी प्रस्ताव मंजूर, डायरेक्टर के पद पर मनोज डोभाल की पुनर्नियुक्ति

डिश टीवी इंडिया लिमिटेड की 38वीं सालाना आम बैठक में कंपनी के शेयरधारकों ने एजेंडे में रखे गए सभी तीन प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।

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Published - Wednesday, 30 September, 2026
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Wednesday, 30 September, 2026
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डिश टीवी इंडिया लिमिटेड की 38वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) 29 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक में कंपनी के शेयरधारकों ने एजेंडे में रखे गए सभी तीन प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।

एजीएम की शुरुआत सुबह 11:30 बजे हुई और यह दोपहर 12:27 बजे समाप्त हुई। बैठक में कुल 76 शेयरधारक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इनमें 15 प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप से, जबकि 61 सार्वजनिक शेयरधारक थे।

वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय नतीजों को मंजूरी

पहले प्रस्ताव के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.7072% वोट पड़े, जबकि 0.2928% वोट विरोध में रहे।

मनोज डोभाल फिर बने डायरेक्टर

दूसरे प्रस्ताव में मनोज डोभाल को कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए योग्य थे और उन्होंने खुद को पुनर्नियुक्ति के लिए पेश किया था। इस प्रस्ताव को 98.4873% वोट के साथ मंजूरी मिली, जबकि 1.5127% वोट इसके खिलाफ पड़े।

कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को भी मंजूरी

तीसरे प्रस्ताव में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को मंजूरी देने का प्रस्ताव था। इसे भी शेयरधारकों ने मंजूर कर दिया। इसके पक्ष में 99.7055% वोट पड़े, जबकि 0.2945% वोट विरोध में रहे।

कंपनी ने बताया कि तीनों प्रस्तावों को रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान हुई ई-वोटिंग के जरिए जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिली। 

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लीनियर टेलीविजन का नियामकीय बोझ और लागत कम करना जरूरी : केविन वज

केविन वज ने रैखिक टेलीविजन का नियामकीय बोझ और लागत घटाने के लिए रोडमैप बनाने तथा बार्क ऑडियंस रेटिंग फिर शुरू करने की मांग की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
jiohotstar

जियोस्टार (JioStar) के एंटरटेनमेंट बिजनेस के सीईओ (CEO) और फिक्की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट कमेटी (FICCI Media and Entertainment Committee) के चेयरमैन केविन वज (Kevin Vaz) ने रैखिक टेलीविजन (Linear Television) के नियामकीय बोझ और लागत को कम करने के लिए ठोस रोडमैप बनाने की मांग की है।

उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (Broadcast Audience Research Council) यानी बार्क (BARC) की ऑडियंस रेटिंग (Audience Rating) जारी करने की प्रक्रिया तुरंत बहाल करने का भी आग्रह किया।

फिक्की फ्रेम्स 2026 (FICCI FRAMES 2026) के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए केविन वज ने कहा कि ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री (Broadcasting Industry) को ज्यादा नियामकीय लचीलापन देने की जरूरत है, ताकि रैखिक टेलीविजन डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) के साथ आगे बढ़ सके। इससे उपभोक्ताओं को यह तय करने की ज्यादा आजादी मिलेगी कि वे क्या, कहां और किस स्क्रीन पर देखना चाहते हैं।

वज ने 10+2 विज्ञापन सीमा हटाने के मंत्रालय के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने इसे ऐसे नियामकीय ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जो रैखिक प्रसारण और व्यापक मीडिया लैंडस्केप (Media Landscape) में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखता है।

ऑडियंस मेजरमेंट (Audience Measurement) को लेकर उन्होंने बार्क रेटिंग जारी करने की प्रक्रिया फिर शुरू करने की मांग की। उनका कहना था कि विश्वसनीय और सत्यापन योग्य ऑडियंस डेटा (Audience Data) उपलब्ध नहीं होने से ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच अनिश्चितता पैदा हो रही है, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान।

उन्होंने कहा कि विश्वसनीय मापन जरूरी है, ताकि ब्रांड अपने कैंपेन (Campaign) की बेहतर प्लानिंग कर सकें और दर्शकों तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।

केविन वज ने कहा कि टेलीविजन आज भी भारत में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और किफायती मीडिया प्लेटफॉर्म (Media Platform) में से एक है। उनके मुताबिक, ब्रॉडकास्टिंग और विज्ञापन क्षेत्र व्यापक आर्थिक व्यवस्था में भी योगदान देते हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रसारकों और विज्ञापनदाताओं को समर्थन देने के लिए विश्वसनीय ऑडियंस मापन जरूरी है।

उन्होंने यह बातें ऐसे समय कहीं हैं, जब मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media and Entertainment Industry) में कंटेंट कंजम्पशन (Content Consumption) के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। रैखिक टेलीविजन, स्ट्रीमिंग, मोबाइल और कनेक्टेड टीवी (Connected TV) अब समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

फिक्की फ्रेम्स 2026 का आयोजन ‘इंडियाज मीडिया मोमेंट: क्रिएटिंग वैल्यू इन एन एज ऑफ इनफिनिट कंटेंट’ थीम के तहत किया जा रहा है। वज ने डिजिटल मीडिया, कनेक्टेड टीवी, माइक्रो-ड्रामा और कंटेंट कॉमर्स के विस्तार पर भी बात की। उन्होंने ऐसे इंडस्ट्री एनवायरनमेंट (Industry Environment) की जरूरत बताई, जो इनोवेशन और सेल्फ-रेगुलेशन (Self-Regulation) को बढ़ावा दे।

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टीवी रेटिंग्स: अब सवाल अस्तित्व का

BARC के निलंबन से त्योहारों के सीजन में टीवी चैनलों के सामने अनिश्चितता है, लेकिन सभी पक्ष इंडस्ट्री के हित में मिलकर काम करें तो समाधान संभव है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
MarkandAdhikari521

मार्कंड अधिकारी, चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर,

मानसून का मौसम अब खत्म होने की ओर है और बाजार साल के सबसे बड़े त्योहारों के सीजन के लिए तैयार हो रहा है। दिवाली से पहले का समय कंपनियों के लिए विज्ञापन पर खर्च करने और मीडिया के लिए कमाई का अहम दौर माना जाता है। लेकिन इस बार लीनियर टीवी इंडस्ट्री में त्योहारों जैसा उत्साह नहीं दिख रहा है। इसके बजाय इंडस्ट्री में अनिश्चितता का माहौल है।

इसकी बड़ी वजह टेलीविजन ऑडियंस रेटिंग को लेकर साफ तस्वीर नहीं होना है। विज्ञापन एजेंसीज अलग-अलग चैनलों पर विज्ञापनदाताओं का बजट तय करने के लिए उनकी रेटिंग को आधार बनाती हैं। ऐसे में टीवी रेटिंग उपलब्ध नहीं होने पर अलग-अलग चैनलों और कार्यक्रमों पर विज्ञापन खर्च तय करना मुश्किल हो जाता है।

क्यों नहीं मिल रही टीवी रेटिंग?

इसका कारण है ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) से जुड़ा मौजूदा मामला। जुलाई 2026 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने BARC को टीवी रेटिंग प्रकाशित करने से रोकने का निर्देश दिया था, जब तक कि उसकी लाइसेंस प्रक्रिया नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 के तहत पूरी नहीं हो जाती।

सरकार ने मार्च 2026 में नई टीवी रेटिंग पॉलिसी जारी की थी। इसका मकसद टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। नई पॉलिसी में रेटिंग एजेंसीज के लिए पंजीकरण, संचालन, ऑडिट और निगरानी से जुड़े नियम तय किए गए हैं।

नई पॉलिसी में टीवी रेटिंग एजेंसीज के लिए स्वतंत्र निदेशकों, ऑडिट, डेटा सुरक्षा और बड़े सैंपल के जरिए दर्शकों की माप जैसे प्रावधान भी किए गए हैं। सरकार ने रेटिंग एजेंसी बनने के लिए नेटवर्थ की शर्त को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये किया है, ताकि इस क्षेत्र में और कंपनियों के आने की संभावना बढ़े।

इसके बावजूद अब तक BARC ही टीवी रेटिंग के क्षेत्र में प्रमुख और अकेली रेटिंग एजेंसी बनी हुई है। ऐसे में रेटिंग का रुकना पूरी टीवी इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय बन गया है।

BARC को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

BARC के कामकाज और पारदर्शिता को लेकर इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पुराने समय में BARC के कामकाज को लेकर यह शिकायत रही कि वह अपने हितधारकों के सवालों का पर्याप्त जवाब नहीं देती थी और अपनी प्रणाली के बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं करती थी। इसके बाद एजेंसी की एक अन्य मैनेजमेंट टीम पर रेटिंग में गड़बड़ी, हेरफेर और भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगे थे, जिसके बाद सीबीआई जांच भी हुई। इन घटनाओं से इंडस्ट्री के कुछ हितधारकों का भरोसा प्रभावित हुआ।

मौजूदा व्यवस्था में भी हितधारकों के सवालों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई गई। BARC का लंबे समय तक अकेली रेटिंग एजेंसी बने रहना और उससे जुड़ी शिकायतें टीवी रेटिंग व्यवस्था में भरोसे को प्रभावित करती रही हैं।इसी तरह की चिंताओं के बीच सरकार ने टीवी रेटिंग के लिए नई पॉलिसी बनाई है। सरकार के मुताबिक, नई पॉलिसी का उद्देश्य देश में टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

त्योहारों के सीजन में बढ़ी चिंता

टीवी रेटिंग को लेकर यह अनिश्चितता ऐसे समय में आई है, जब दिवाली से पहले विज्ञापन बाजार में गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद रहती है। लीनियर टीवी चैनल पहले से ही डिजिटल मीडिया और मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक टीवी के विज्ञापन कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। ऐसे माहौल में टीवी चैनलों के लिए रेटिंग का उपलब्ध नहीं होना एक और बड़ी चुनौती बन गया है।

विज्ञापनदाता और एजेंसीज यह जानना चाहती हैं कि किस चैनल या कार्यक्रम की पहुंच और दर्शक संख्या कितनी है, ताकि उसी आधार पर विज्ञापन का बजट तय किया जा सके। रेटिंग नहीं होने पर यह फैसला लेना मुश्किल हो जाता है।

इंडस्ट्री को जल्द समाधान की जरूरत

मौजूदा स्थिति में पूरी टीवी इंडस्ट्री के हित में जल्द कोई व्यावहारिक समाधान निकालने की जरूरत है। सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे टीवी रेटिंग व्यवस्था दोबारा सुचारु हो सके और साथ ही नई पॉलिसी के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही भी बनी रहे।

साथ ही, BARC जैसी रेटिंग एजेंसी के लिए भी यह जरूरी है कि वह अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए और अपने कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता लाए। नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 इसी दिशा में बदलाव का आधार तैयार करती है।

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