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टीवी चैनलों के लिए सरकार ने जारी की नई गाइडलाइंस, जानें नियम
केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत में टीवी चैनलों के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग की नई गाइडलाइंस जारी की हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत में टीवी चैनलों के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग की नई गाइडलाइंस जारी की हैं। दरअसल, 11 साल बाद पुरानी गाइडलाइंस में संशोधन कर इसे जारी किया गया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने इससे पहले 2011 में गाइडलाइंस जारी की थी।
बता दें कि नई गाइडलाइंस में जो बदलाव किए गए हैं, वह तीन चीजों को ध्यान में रखकर किए गए हैं, जिसमें आसान मंजूरी, कारोबारी प्रक्रिया को आसान बनाना और सरलीकरण व तर्कसंगत बनाना शामिल है। इसकी जानकारी सूचना-प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्रा ने दी।
सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइंस के तहत अब हर ब्रॉडकास्टर या चैनल को हर दिन 30 मिनट के लिए राष्ट्रीय व सार्वजनिक हित से जुड़े कंटेंट को प्रसारित करना अनिवार्य होगा। इसके लिए मंत्रालय की ओर से आठ थीमों का विकल्प भी दिया गया है, जिनमें से किसी भी मुद्दे पर चैनल आधे घंटे का कार्यक्रम कर सकते हैं। उनमें महिला सशक्तीकरण, कृषि और ग्रामीण विकास, शिक्षा और साक्षरता का प्रसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, साइंस और टेक्नॉलजी, समाज के कमजोर तबकों का कल्याण, राष्ट्रीय अखंडता, पर्यावरण और सांस्कृति संरक्षण शामिल हैं।
गाइडलाइंस के मुताबिक, राष्ट्र व जनहित में प्रसारित होने वाले कंटेंट को लेकर भारतीय टेलीपोर्ट विदेशी चैनलों को अपलिंक कर सकते हैं।
अपूर्व चंद्रा ने कहा कि इस आधे घंटे के स्लॉट के लिए दिए जाने वाले कंटेंट को लेकर जल्द हम स्टेक होल्डर्स मसलन चैनलों आदि से चर्चा कर इसके बारे में अलग से गाइडलाइंस जारी करेंगे। हालांकि स्पोर्ट्स, वाइल्ड लाइफ और विदेशी चैनलों पर यह नियम लागू नहीं होगा। उनका कहना था कि पिछले कुछ सालों में हमने जो सुधार किया है, उनमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले से जुड़े सुधार अहम हैं।
चंद्रा ने कहा कि टीवी चैनलों के लिए प्रसारण कार्यप्रणाली को और ज्यादा आसान बनाया गया है। नई गाइडलाइंस के तहत इवेंट से जुड़े कार्यक्रमों के सीधे प्रसारण के लिए पहले से इजाजत लेने होती थी, लेकिन अब इस शर्त को खत्म कर दिया गया है। हालांकि सीधे प्रसारण किए जाने वाले कार्यक्रमों का पूर्व रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।
वहीं नई गाइडलाइंस के मुताबिक, एक से अधिक टेलीपोर्ट या सैटेलाइट की सुविधाओं का इस्तेमाल कर किसी चैनल को अपलिंक किया जा सकता है। मौजूदा नियमों के तहत सिर्फ एक ही टेलीपोर्ट या सैटेलाइट के जरिए चैनल को अपलिंक किया जा सकता है। इस कदम से भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के टेलीविजन चैनलों को सिंगापुर के बजाय भारत से अपलिंक करने की अनुमति मिलने की उम्मीद है, जो उपमहाद्वीप में प्रसारित चैनलों के लिए पसंदीदा अपलिंकिंग हब है। वर्तमान में सूचना-प्रसारण मंत्रालय में पंजीकृत कुल 897 में से केवल 30 चैनल भारत से अपलिंक हैं।
वहीं, चैनलों की नेटवर्थ से जुड़े नियम में भी बदलाव किया गया है। चैनलों के रिन्यू होने पर उनकी नेटवर्थ की लिमिट 20 करोड़ की गई है। साथ ही इस गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि एक कंपनी डिजिटल सैटेलाइट न्यूज गैदरिंग (डीएसएनजी) के अलावा अन्य न्यूज एकत्र करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे ऑप्टिक फाइबर, बैक पैक, मोबाइल का उपयोग कर सकती है, जिसके लिए अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
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