अब इस चैनल की कश्ती पर सवार हुए पत्रकार आयुष कुमार जायसवाल

मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले आयुष कुमार ने वहीं की महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पढ़ाई की है

पंकज शर्मा by
Published - Tuesday, 13 August, 2019
Last Modified:
Tuesday, 13 August, 2019
Ayush Kumar

पत्रकार आयुष कुमार जायसवाल ने ‘जी हिन्दुस्तान’ में अपनी पारी को विराम दे दिया है। यहां करीब एक साल तक वे प्रॉडक्शन एग्जिक्यूटिव के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने अपना नया सफर अब ‘एबीपी गंगा’ चैनल से किया है। यहां उन्हें असिस्टेंट प्रड्यूसर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश में वाराणसी के रहने वाले आयुष कुमार जायसवाल ने वहीं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पढ़ाई की है।

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अब ‘Zee’ समूह से जुड़ीं पूजा सेठी, मिली ग्रुप एडिटर की जिम्मेदारी

देश की प्रमुख मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Puja Sethi

देश की प्रमुख मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि वरिष्ठ पत्रकार पूजा सेठी ने यहां बतौर ग्रुप एडिटर जॉइन किया है। पूजा सेठी इससे पहले स्वास्थ्य' क्षेत्र की प्रमुख वेबसाइट myupchar.com में बतौर वाइस प्रेजिडेंट (कंटेंट स्ट्रैटेजी और पार्टनरशिप्स) अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं। वह यहां करीब सवा साल से जुड़ी हुई थीं।

पूजा सेठी इससे पहले देश के प्रमुख मीडिया समूह 'जागरण प्रकाशन लिमिटेड' की डिजिटल विंग ‘जागरण न्यू मीडिया’  (Jagran New Media) में जीएम और डिजिटल हेड (जागरण ऑनलाइन) के रूप में भी काम कर चुकी हैं। इसके अलावा वह ‘दैनिक जागरण’ समूह के अंग्रेजी अखबार ‘सिटी प्लस’ में भी एग्जिक्यूटिव एडिटर रह चुकी हैं। पूर्व में वह ‘Getit Infomedia’  और ‘indiatimes’ (टाइम्स ऑफ इंडिया) में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो पूजा सेठी ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने करियर के शुरुआती दिनों में वह ‘ऑल इंडिया रेडियो’ और ‘दूरदर्शन’ में फ्रीलॉन्स एंकर के रूप में भी काम कर चुकी हैं।  

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जानिए, कोरोना का न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप पर क्या पड़ा असर

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने देश में 21 दिनों का लॉकडाउन किया हुआ है और लोगों को घरों पर ही रहने की सलाह दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
TV-Viewership

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने देश में 21 दिनों का लॉकडाउन किया हुआ है और लोगों को घरों पर ही रहने की सलाह दी है। इसका असर यह हुआ है कि इस दौरान न्यूज बुलेटिन्स की व्युअरशिप में काफी बढ़ोतरी हो गई है, जो इससे पहले कभी नहीं देखी गई है। कम स्टाफ और अन्य समस्याओं के बावजूद व्युअरशिप के माममें में टीवी न्यूज अपने पिछले रिकॉर्ड को पछाड़ने में लगी हुई है और कई प्रमुख टीवी चैनल्स इस मामले में अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ रहे हैं।

‘बार्क इंडिया’ (BARC India) और ‘नील्सन’ (Nielsen) की रिपोर्ट के अनुसार, लोग इन दिनों तमाम घटनाक्रमों के बारे में अपडेट रहना चाहते हैं। यही कारण है कि टीवी पर न्यूज काफी ज्यादा देखी जा रही है। अधिकांश टीवी न्यूज प्लेयर्स का कहना है कि यह पहले से अपेक्षित था।

लॉकडाउन के पहले हफ्ते में लोगों द्वारा ज्यादा टीवी देखा गया है यानी टीवी देखने के समय में वृद्धि हुई है, वहीं इस दौरान न्यूज जॉनर (news genre) में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है, इसके बाद मूवीज और किड्स जॉनर का नंबर आता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, टीवी न्यूज व्युअरशिप आगे और बढ़ेगी। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) के साथ एक बातचीत में ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के फाउंडर और वरिष्ठ टीवी पत्रकार अरनब गोस्वामी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान न्यूज की व्युअरशिप में 50 से 100 प्रतिशत का उछाल आएगा, क्योंकि अब टीवी न्यूज का प्राइम टाइम रात नौ बजे के स्लॉट तक ही सीमित नहीं रह गया है। अब दिन का घर घंटा प्राइम टाइम बन गया है।

लॉकडाउन के इस दौर में जब लोगों को घर पर रहने (Stay At Home) पर जोर दिया जा रहा है, तब न्यूजपेपर्स के सर्कुलेशन को पीछे छोड़ते हुए टीवी न्यूज इंफॉर्मेशन का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ टीवी न्यूज की कुल व्युअरशिप में इजाफा हुआ है, बल्कि अलग-अलग चैनल्स की व्युअरशिप में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी गई है।  

दसवें हफ्ते में (सात मार्च से 13 मार्च के बीच) हिंदी न्यूज जॉनर में ‘आजतक’ 153379000 इंप्रेशंस (impressions) के साथ सबसे आगे रहा। इस जॉनर में ‘आजतक’ सबसे आगे बना है, लेकिन इस बार 216024000 इंप्रेशंस के साथ एक हफ्ते में इसकी व्युअरशिप में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, 11वें हफ्ते में ‘जी न्यूज’ की व्युअरशिप बढ़कर 142089000 इंप्रेशंस हो गई जो इससे पहले के हफ्ते में 114390000 इंप्रेशंस थी।

अंग्रेजी न्यूज जॉनर की बात करें तो यहां पर भी यही स्थिति है। यहां 11वें हफ्ते में ‘रिपब्लिक टीवी’ 852000 इंप्रेशंस के साथ नंबर एक पर बना हुआ है, जबकि 10वें हफ्ते में इसकी व्युअरशिप 692000 इंप्रेशंस थी। ‘टाइम्स नाउ’ की व्युअरशिप जहां 10वें हफ्ते में 501000 इंप्रेशंस थी, वह बढ़कर 11वें हफ्ते में 644000 इंप्रेशंस हो गई है।  

इस बारे में ‘नेटवर्क18’ के सीईओ अविनाश कौल का कहना है, ‘सुबह और दोपहर के दौरान नॉन प्राइम टाइम व्युअरशिप में ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है, क्योंकि इस दौरान अखबार पढ़ने की दिनचर्या प्रभावित होने के कारण लोग टीवी न्यूज ज्यादा देख रहे हैं। टीवी देखने वालों में महिलाओं की संख्या भी काफी बढ़ रही है और टीवी देखने में बिताए जाने वाले समय में उन्होंने पुरुष दर्शकों को भी पीछे छोड़ दिया है, यानी वे पुरुषों से ज्यादा समय तक टीवी देख रही हैं। यदि हम आंकड़े देखें तो पता चलता है कि लॉकडाउन को लेकर प्रधानमंत्री का संबोधन अब तक का सबसे बड़ा टीवी कार्यक्रम था, यह आईपीएल के फाइनल से भी बड़ा था।’ पिछले हफ्ते ‘नेटवर्क18’ के चैनल्स की डेली एवरेज रीच (daily average reach) 10 करोड़ पहुंच गई थी। इस बढ़ोतरी का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि कोविड-19 के प्रकोप से पहले यह आंकड़ा करीब सात करोड़ हुआ करता था।

बार्क के यह आंकड़े 22 साल से अधिक उम्र के पुरुषों की कैटेगरी (Males 22+ individuals’ category) के हैं, लेकिन नील्सन की रिपोर्ट में यह भी हाईलाइट किया गया है कि लॉकडाउन के दौरान दो से 14 साल की कैटेगरी में भी किड्स कंटेंट के मुकाबले न्यूज को ज्यादा देखा जा रहा है।  

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ अविनाश पांडे के अनुसार, ‘पिछले कई महीनों के दौरान चुनाव, प्रमुख फैसलों और अन्य बड़ी राष्ट्रीय घटनाओं के साथ ही अब चल रहे कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में काफी वृद्धि देखी गई है। हम इस बात को लेकर निश्चिंत हैं कि व्युअरशिप में बढ़ोतरी का यह सिलसिला आने वाले हफ्तों अथवा महीनों तक जारी रहेगा, क्योंकि क्वारंटाइन अथवा लॉकडाउन जैसे उपाय कुछ समय तक लागू रहेंगे।’

नेशनल ही नहीं, रीजनल न्यूज की व्युअरशिप में भी काफी इजाफा देखा गया है। उदाहरण के लिए-बंगाली न्यूज की ग्रोथ काफी अच्छी रही है। व्युअरशिप के मामले में बंगाल में ‘एबीपी आनंदा’ लिस्ट में सबसे ऊपर है। 11वें हफ्ते में इसकी व्युअरशिप 64821000 इंप्रेशंस दर्ज की गई है, जो 10वें हफ्ते में 34147000 इंप्रेशंस थी। यानी इस चैनल की व्युअरशिप में करीब 90 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि न्यूज में यह ग्रोथ इसलिए है, क्योंकि वर्तमान परिस्थिति में लोग अपडेट रहना चाहते हैं। अविनाश पांडे के अनुसार, ‘एक जिम्मेदार न्यूज चैनल्स के रूप में कोविड-19 के संकट को हम व्युअरशिप बढ़ाने के रूप में नहीं देखते हैं। पूरी दुनिया इस समय इस अप्रत्याशित चुनौती का सामना कर रही है।’ उनका कहना है, ‘यहां लगातार चीजें बदल रही हैं और ऐसे में हमारा पूरा उद्देश्य व्यूअर्स को संपूर्ण तथ्यों के साथ सबसे तेज और सबसे बेहतर इंफॉर्मेशन उपलब्ध कराना है।’

वर्तमान में टीवी पर न्यूज की व्युअरशिप तो बढ़ ही रही है, डिजिटल मीडिया पर भी न्यूज देखने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। नील्सन रिपोर्ट के अनुसार, न्यूज ऐप्स यूजर्स की संख्या में हर हफ्ते बढ़ोतरी हो रही है और प्रति सप्ताह यूजर द्वारा न्यूज ऐप पर बिताए जाने वाले समय में 17 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। हालांकि, यह बढ़ोतरी गैर अंग्रेजी न्यूज ऐप्स में दर्ज की गई है।

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MIB ने जारी की एडवाइजरी, केबल ऑपरेटर्स को अनिवार्य रूप से दिखाने होंगे ये चैनल्स

आदेशों का उल्लंघन होने की स्थिति में सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से की जाएगी कार्रवाई

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
MIB

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी मल्टीसिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) और केबल ऑपरेटर्स को अपने केबल टीवी नेटवर्क पर दूरदर्शन के 25 चैनल्स के साथ ही लोकसभा और राज्यसभा चैनल को अनिवार्य रूप से दिखाने के लिए कहा है।

एमआईबी की ओर से इस संबंध में जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने पर केबल एक्ट के सेक्शन 11, 12 और 18 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। मंत्रालय के अनुसार, आदेशों का उल्लंघन होने की दशा में एमएसओ को अनुमति देने के लिए तय नियम और शर्तों के तहत निर्धारित नियम लागू होंगे।

मंत्रालय के अनुसार, यदि दर्शकों को डीडी चैनल देखने को नहीं मिल रहा है तो वे निकटतम दूरदर्शन केंद्र पर जाकर स्टेशन हेड से शिकायत कर सकते हैं अथवा ddpb.inform@gmail.com पर ई-मेल भी कर सकते हैं।

 

 

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कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में ‘इंडिया टीवी’ ने भी कुछ यूं की मदद

कोविड-19 के खिलाफ देश की इस लड़ाई में ‘इंडिया टीवी’ भी सामने आया, जिसकी जानकारी इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए दी है।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
India TV

पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है, जिससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पीएम केयर फंड’ का ऐलान किया, तो इस लड़ाई को जीतने के लिए तमाम संगठन और निजी संस्थान आगे आ रहे हैं , जो पीएम केयर में दान कर रहे हैं। यही नहीं आमलोग भी स्वेच्छा से अपने हिसाब से पीएम केयर्स फंड में पैसे डोनेट कर रहे हैं। इसी कड़ी में अब ‘इंडिया टीवी’ (India Tv) भी सामने आया है।

बता दें कि ‘इंडिया टीवी’ ने एक करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड में डोनेट किए हैं। इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि कोविड-19 के खिलाफ देश की इस लड़ाई में मदद के लिए ‘पीएम केयर्स फंड’ में अब तक जिन लोगों ने अपना योगदान दिया, मैं उन सभी लोगों को सलाम करता हूं। मैं ‘पीएम केयर्स फंड’ में एक करोड़ रुपए का विनम्र सहयोग दे रहा हूं।

बता दें कि पीएम केयर्स फंड यानी ‘प्रधानमंत्री सिटिजन असिस्टेंड एंड रिलिफ इन इमरजेंसी सिचुएशन फंड’ (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) वो कोष है जिसमें आपातकालीन स्थिति में देश के नागरिकों के लिए राहत की राशि जमा की जाती है। इसमें छोटी-बड़ी राशि दान में दी जा सकती है। फिलहाल इस रकम का इस्‍तेमाल मौजूदा संकट से निपटने में किया जाएगा।  

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टेलिविजन का गोल्डन एरा कुछ यूं लौटा दोबारा

देश में लॉकडाउन के चलते लोग अपने घरों में कैद हैं और तरह-तरह के कामों में खुद को व्‍यस्‍त रख रहे हैं। इस बीच अब टेलिविजन का गोल्डन एरा भी दोबारा लौट आया है

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन है। लोग घरों में हैं। ऐसे में लोग घर से बाहर न निकलें, इसके लिए हर तरह की कोशिशें जारी हैं। इस बीच अब टेलिविजन का गोल्डन एरा भी दोबारा लौट आया है। दरअसल, सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक स्टेटमेंट में कहा है कि दूरदर्शन पर पांच शो प्रसारित किए जाएंगे।

‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के बाद दूरदर्शन पर अब ‘शक्तिमान’, ‘चाणक्य’, ‘उपनिषद गंगा’, ‘कृष्णा काली’ और ‘श्रीमान श्रीमति’ जैसे धारावाहिकों का प्रसारण भी दोबारा शुरू हो रहा है। सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने दर्शकों की मांग के बाद यह फैसला लिया है।

इससे पहले सोशल मीडिया पर रामायण और महाभारत धारावाहिक को शुरू करने की मांग उठी थी जिसे मंत्रालय ने पूरा किया था। 

बता दें कि शक्तिमान अप्रैल के पहले हफ्ते से दोपहर 1 बजे प्रसारित किया जाएगा। शक्तिमान का टेलिकास्ट 1997 में शुरू हुआ था, जो 2005 तक चला। मुकेश खन्ना और वैष्णवी इसमें लीड रोल में थे। वहीं, ‘चाणक्य’ के 47 एपिसोड, जिसे डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने निर्देशित किया है, डीडी भारती पर अप्रैल के पहले हफ्ते से शुरू होगा। इसका प्रसारण दोपहर के समय में किया जाएगा। चाणक्य में डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने ही लीड रोल निभाया था। शो 1991 में शुरू हुआ था। 47 एपिसोड की यह सीरीज अगस्त 1992 में खत्म हुई थी।

वहीं, ‘उपनिषद गंगा’ के 52 एपिसोड, जिसे चिन्मया मिशन ट्रस्ट ने प्रड्यूस और चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने निर्देशित किया है, डीडी भारती पर अप्रैल के पहले हफ्ते में शुरू होगा। इसका प्रसारण भी दोपहर के समय में ही किया जाएगा। ‘श्रीमान श्रीमति’, जो कि एक कॉमेडी शो है, इसका प्रसारण दूरदर्शन नेशन चैनल पर दोपहर 2 बजे किया जाएगा। इसके अलावा ‘कृष्णा काली’ के 18 एपिसोड डीडी नेशनल पर रात 8 बजे प्रसारित किए जाएंगे।

बता दें कि देश में लॉकडाउन के चलते लोग अपने घरों में कैद हैं और तरह-तरह के कामों में खुद को व्‍यस्‍त रख रहे हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इन पुराने सीरियल्‍स को देखने की मांग उठी थी, जिसके बाद दूरदर्शन पर अभी तक रामानंद सागर के निर्देशन में बनी रामायण, बीआर चोपड़ा की महाभारत और ब्योमकेश बख्शी जैसे शो ही दिखाए जा रहे थे। लोगों की डिमांड थी कि शक्तिमान को भी टेलिकास्ट किया जाए। इस मांग को मानते हुए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इनका समय तय कर दिया है।

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न्यूज ब्रॉडकासटर्स फेडरेशन ने MIB मिनिस्टर के सामने उठाया रेटिंग्स का मुद्दा, की ये अपील

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) के खौफ के बीच पत्रकारिता के जज्बे को बरकरार रखते हुए मुस्तैदी से अपने काम में जुटे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को एक पत्र लिखा है

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) के खौफ के बीच पत्रकारिता के जज्बे को बरकरार रखते हुए मुस्तैदी से अपने काम में जुटे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने देश के लिए इस मुश्किल दौर में सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से चैनल्स की रेटिंग न रोकने की मांग की है। न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) के प्रेजिडेंट और वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी ने प्रकाश जावड़ेकर को इस संबंध में एक पत्र लिखा है।

इस पत्र में अरनब गोस्वामी ने कहा है, ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (NBF) के सभी सदस्यों की ओर से मैं आपको यह लेटर लिख रहा हूं। जैसा कि हमारे संज्ञान में आया है कि अपने निहित स्वार्थों के लिए एक तबका मंत्रालय पर दबाव बनाकर बार्क द्वारा मापी गई चैनल्स की रेटिंग्स को रोकने की कोशिश में जुटा है। मुझे यह भी पता चला है कि जो तबका ऐसे समय में रेटिंग्स को रोकने का प्रयास कर रहा है, वह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए इस तरह का काम कर रहा है। ऐसे लोग खुद को देश की न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री का प्रतिनिधि होने का झूठा दावा कर रहे हैं। न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री इस समय वास्तव में जनसेवा में जुटी हुई है।’  

पत्र के अनुसार, ‘जैसा कि आपको पता ही है कि इस मुश्किल घड़ी में न्यूज चैनल्स द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सभी ने सराहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले दिनों देश के कई न्यूज चैनल्स के मालिकों और वरिष्ठ संपादकों के साथ हुई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान न्यूज चैनल्स के प्रयासों की सराहना की थी। इस मुश्किल घड़ी में जब कहीं आना-जाना और लोगों से संवाद करना कठिन हो गया है, लोगों को कोरोना वायरस से जुड़ी खबरें पहुंचाने के लिए हमारे हजारों प्रोफेशनल्स दिन रात अपने काम में जुटे हुए हैं और कोरोना को हराने के लिए इस ‘जंग’ में सबसे आगे मोर्चा संभाले हुए हैं।’

प्रकाश जावड़ेकर को लिखे इस पत्र में अरनब गोस्वामी का यह भी कहना है, ‘ऐसी स्थिति में यदि न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स रोक दी जाती है तो हम सब बर्बाद हो जाएंगे और हमारा संगठन संकट में आ जाएगा। कुछ चैनल्स अथवा निकाय हमारे बारे में बोलने का भले ही दावा करें, लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि वे अपने कुछ हितों की वजह से ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि इस समय वे अपनी प्रोग्रामिंग बंद कर सकते हैं, जबकि न्यूज चैनल्स लगातार अपने काम में जुटे हैं। अपने बिजनेस को चलाने के लिए हम पूरी तरह से टीवी रेटिंग्स के प्रकाशन पर निर्भर हैं। राष्ट्रीय आपदा के इस दौर में हम सावर्जनिक सेवा का प्रसारण कर रहे हैं।’

इस पत्र में अरनब गोस्वामी ने यह भी कहा है, ‘एनबीएफ के सभी सदस्यों की ओर से मैं आपसे अपील करता हूं कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और टीवी रेटिंग्स का प्रकाशन रोकने की दिशा में कुछ लोगों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को अपनी मंजूरी न दें। यदि यह मंजूरी दी जाती है तो देश की न्यूज ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री खतरे में आ जाएगी, जो इस महत्वपूर्ण समय में अविश्वसनीय काम कर रही है। मैं बार्क के अधिकारियों को उनकी जानकारी के लिए इस लेटर की एक कॉपी भेज रहा हूं। एक बार फिर हम आपसे गुजारिश करते हैं कि इस तरह के किसी भी आदेश को मंजूरी न दें। क्योंकि इससे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के बीच चिंता की भावना पैदा हो रही है और कोरोनावायरस को हराने के उनके लक्ष्य से ध्यान भटक रहा है, जो चाहते हैं हम सभी लोग मिलकर आगे आएं और लॉकडाउन को सफल बनाएं।’

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LSTV के एडिटर-इन-चीफ आशीष जोशी के बारे में आयी ये बड़ी खबर

आशीष जोशी को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का लगभग 20 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1999 में हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ से की थी।

पंकज शर्मा by
Published - Monday, 30 March, 2020
Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
ashishjoshi

‘लोकसभा टीवी’ (LSTV) के एडिटर-इन-चीफ कम चीफ एग्जिक्यूटिव आशीष जोशी अभी अपने पद पर बने रहेंगे, क्योंकि लोकसभा सचिवालय के उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म किए जाने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। बता देंं कि यह निर्णय कोरोनावायरस के कारण देश भर में चल रहे लॉकडाउन के चलते लिया गया है। लोकसभा सचिवालय के डिप्टी सेक्रेटरी श्रीकांत. एस ने 30 मार्च को जारी पत्र में यह जानकारी दी है।

बता दें कि इससे पहले 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय के डायरेक्टर संतोष कुमार की ओर से जारी एक पत्र में आशीष जोशी के कॉन्ट्रैक्ट को 31 मार्च से खत्म किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, आशीष जोशी का कॉन्ट्रैक्ट 31 मई को खत्म होना था, लेकिन सचिवालय ने दो महीने पहले ही इसे खत्म करने के आदेश जारी किए थे।

आशीष जोशी को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का लगभग 20 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1999 में हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ से की थी। इसके बाद उन्होंने 'जी न्यूज' जॉइन किया और यहां वे 1999 से साल 2002 तक रहे। ‘जी न्यूज’ को अलविदा कहने के बाद उन्होंने पहले ‘डीडी न्यूज’ और फिर ‘आईबीएन7’ (अब न्यूज18 इंडिया) न्यूज चैनल जॉइन किया। डीडी न्यूज में वे लगभग एक साल तक रहे और ‘आईबीएन7’ में उन्होंने ढाई साल तक काम किया। इसके बाद वे एक बार फिर ‘आजतक’ तक चले गए और यहां सीनियर स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट की पारी संभाली।

लगभग तीन सालों तक यहां काम करने के बाद वे साल 2010 में भोपाल स्थित ‘माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जर्नलिज्म’ के साथ जुड़े और इसके बाद लोकसभा टीवी में बतौर एडिटर-इन-चीफ कम चीफ एग्जिक्यूटिव के पद पर कार्यरत थे। मूल रूप से मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले के रहने वाले आशीष जोशी देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान आईआईएमसी (IIMC) के 1999 बैच के छात्र रह चुके हैं।

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कोरोना के बीच नजर आया अरनब गोस्वामी का जज्बा, दिखाई लॉकडाउन की 'हकीकत'

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने लॉकडाउन के दौरान गुरुवार को मुंबई की गलियों में जाकर वहां का जायजा लिया और वहीं से रिपोर्टिंग की।

Last Modified:
Sunday, 29 March, 2020
arnab

कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने तमाम कदम उठाए हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में 25 मार्च को 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है। इन सबके बीच ‘वरिष्ठ पत्रकार व रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने लॉकडाउन के दौरान गुरुवार को मुंबई की गलियों में जाकर वहां का जायजा लिया और वहीं से रिपोर्टिंग की। लॉकडाउन का यह दूसरा दिन था, जब कोरोनावायरस से जंग के लिए पूरा देश अपने घरों में बैठा हुआ था।

अरनब गोस्वामी देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक लोअर परेल पहुंचे, जहां उन्हें इस दौरान कई खामियां देखने को मिलीं। इस दौरान अरनब ने देखा कि कुछ लोग लापरवाही बरत रहे थे। कई लोग यह मानकर भी चल रहे थे कि न तो उन्हें कोरोना हो सकता है और न ही वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। ऐसे में रिपोर्टिंग के साथ ही अरनब ने लोगों से अपील भी की कि वे  कोरोनावायरस की गंभीरता को समझें और लॉकडाउन को किसी छुट्टी की तरह न लें बल्कि सरकार का सहयोग करते हुए घरों से बाहर न निकलें।  

अरनब ने कहा, मैं एक बार फिर मुंबई के बहादुर, बुद्धिमान और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों से अपील करता हूं कि अपनी आदतों को बदलें और लॉकडाउन पूरी तरह लागू करें। लॉकडाउन को यहां प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया है। उद्धव ठाकरे सरकार और बाकी सभी को कड़ी मेहनत करने और इसे पूरी तरह लागू करने की जरूरत है।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण की बीच किस तरह अरनब गोस्वामी ने रिपोर्टिंग के प्रति अपना जज्बा दिखाते हुए जमीनी स्तर पर लॉकडाउन की हकीकत बयां की, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं।

गौरतलब कि महाराष्ट्र में तेजी से मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। यहां अब तक कोरोनो वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 193 हो गई है, जबकि मरने वाले लोगों की संख्या छह है। वहीं पूरे भारत में यह संख्या बढ़कर 1037 तक पहुंच गई है। अब तक पूरे देश में इस वायरस से 24 लोगों की जान जा चुकी है।

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अरनब गोस्वामी बोले, न्यूज इंडस्ट्री को विज्ञापनदाताओं के समर्थन की जरूरत

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के प्रेजिडेंट अरनब गोस्वामी ने कहा, कोरोना वायरस से लड़ाई में लोगों तक तथ्यात्मक खबरें पहुंचाने के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स कड़ी मेहनत करना जारी रखेंगे

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Arnab Goswami

दुनिया भर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का कोहराम बढ़ता जा रहा है। कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने तमाम एहतियाती कदम उठाए हैं। इसके तहत जहां देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की गई है, वहीं लोगों की परेशानी को देखते हुए उन्हें तमाम रियायतें दी जा रही हैं। कोरोना के खिलाफ इस ‘जंग’ में देश के न्यूज ब्रॉडकास्टर्स भी अपना मोर्चा संभाले हुए हैं और लोगों को इस महामारी जुड़े पल-पल के अपडेट्स देने के साथ ही इससे बचाव के बारे में जागरूक भी कर रहे हैं।

देश में लॉकडाउन के दौरान चूंकि तमाम लोग अपने घरों पर ही हैं, ऐसे में उनके पास न्यूज अथवा इंफॉर्मेशन के लिए टीवी न्यूज सबसे बड़ा स्रोत बन गया है। देश भर में सभी भाषाओं के ब्रॉडकास्टर्स दिन-रात लगातार कोरोना से जुड़ी ज्यादा से ज्यादा जानकारी अपने दर्शकों को उपलब्ध करा रहे हैं और लॉकडाउन की सफलता सुनिश्चित करने में अपना योगदान दे रहे हैं। इस दौरान चैनल्स न सिर्फ कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या के ताजा आंकड़े और इस बीमारी की बढ़ते प्रकोप के बारे में लोगों को खबर दे रहे हैं, वहीं लोगों तक सही सूचनाएं पहुंचाने और फेक न्यूज को रोकने के लिए भी कई कदम उठा रहे हैं। इसके लिए चैनल्स ने अपनी प्रोग्रामिंग में कई एक्सपर्ट्स, डॉक्टर्स आदि को भी शामिल किया है, जो लोगों को जागरूक कर रहे हैं।    

न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) के प्रेजिडेंट अरनब गोस्वामी का कहना है, ‘ऐसे समय में जब तमाम मीडिया ने अपने संसाधनों और खर्चों को कम कर दिया है, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने अपने प्रयासों को और बढ़ा दिया है और जमीनी स्तर पर भी अपने संसाधनों में इजाफा कर रहे हैं। राष्ट्रीय संकट के दौरान देश भर के न्यूज ब्रॉडकास्टर्स खुद को एक सार्वजनिक, आपातकालीन और आवश्यक सेवा समझते हैं और इस बात को सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस खतरनाक वायरस के खतरे के बारे में बताएं और उन्हें जागरूक करें। मैं इस समय मीडिया इंडस्ट्री के अपने सभी दोस्तों और विभिन्न सेक्टर्स में अपने सहयोगियों से गुजारिश करता हूं कि वे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के प्रयासों में अपना योगदान दें और इस मुश्किल दौर में न्यूज चैनल्स को एडवर्टाइजिंग के रूप में सपोर्ट करें।’  

अरनब गोस्वामी का यह भी कहना है, ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन इस बात को भी बताना चाहता है कि बार्क और नील्सन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यूज चैनल्स में दर्शकों की रुचि काफी बढ़ गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और हिंदी न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप 67 प्रतिशत बढ़ गई। प्रादेशिक भाषा के न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में भी काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी जा रही है। दिलचस्प यह है कि बार्क के सीईओ सुनील लुल्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि  बच्चों की श्रेणी (kids' category) में भी न्यूज चैनल के इस्तेमाल में जबर्दस्त 87 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है, यह इस बात का साफ संकेत है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) से जूझ रहे न्यूज चैनल्स के बीच सूचनाप्रद और प्रासंगिक न्यूज प्रोग्रामिंग को सभी तरह के टीवी ऑडियंस द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है।’

अरनब गोस्वामी का यह भी कहना है, ‘न्यूज चैनल्स और इसके मेंबर्स को मिले सपोर्ट की एनबीएफ सराहना करता है और मीडिया इंडस्ट्री व शेयरधारकों को आश्वस्त करना चाहता है कि देश के न्यूज ब्रॉडकास्टर्स कोविड-19 के खिलाफ इस जंग को मजबूती देने और देश के लोगों तक सही व तथ्यात्मक सूचनाएं पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे।’

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'इंडिया टुडे’ के सामाजिक सरोकार के साथ उसकी क्रिएटिविटी को दर्शाता यह विडियो

‘इंडिया टुडे’ समूह ने कोरोना से मुकाबले के लिए लोगों को जागरूक करने का अनोखा तरीका निकाला है।

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
sweta

अपनी भाषा में कुछ पढ़ने-सुनने का जो सुकून मिलता है, वो किसी दूसरी भाषा में नहीं मिल सकता। शायद इसीलिए मातृभाषा में मिलने वाली सूचनाएं जल्द समझ में आती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ‘इंडिया टुडे’ समूह ने कोरोना से मुकाबले के लिए लोगों को जागरूक करने का अनोखा तरीका निकाला है।

मीडिया हाउस से जुड़े लोकप्रिय पत्रकार जनता से लॉकडाउन का पालन करने की अपील कर रहे हैं। इस ‘अपील’ को जो अनोखा बनाता है, वह है इसकी भाषा। कहने का मतलब है कि सभी पत्रकार केवल हिंदी या अंग्रेजी में ही अपील नहीं करते हैं, बल्कि वह अपनी मातृभाषा इस्तेमाल करते हैं। इस विडियो संदेश की शुरुआत अंजना ओम कश्यप से होती है, वह भोजपुरी में कहती दिखाई देती हैं ‘बात इतनी है कि घर की चिंता दिमाग से आउट होती नहीं है’।

इसके बाद अन्य पत्रकार अपनी-अपनी भाषाओं में उनकी बात को आगे बढ़ाते हैं। खेल पत्रकार विक्रांत गुप्ता जहां पंजाबी बोलते हैं ‘मैं तुम्हारे वास्ते आऊंगा, क्योंकि तुम मेरा दूसरा परिवार हो। तुम्हारे तक हर खबर पहुंचाउंगा। तुम घर बैठो अपना ध्यान रखो’। वहीं राजदीप सरदेसाई मराठी में कहते हैं, ‘मेरी एक ज़िम्मेदारी है और तुम्हारी भी, घर पर रहें सुरक्षित रहें’।

वरिष्ठ पत्रकार श्वेता सिंह भी इस अपील में नजर आती हैं। वह हिंदी में कहती हैं, ‘आप घर बैठिये, जीते रहिये’। सबसे आखिरी में आते हैं ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल। जो अंग्रेजी भाषा में दर्शकों से घर में ही रहने की अपील करते हैं। ऐसे समय में जब देश कोरोना के संकट से जूझ रहा है और सरकार बार-बार लोगों से लॉकडाउन का पालन करने के लिए कह रही है।

‘इंडिया टुडे’ समूह की यह पहल सराहनीय है। एक ही विडियो संदेश में कई भाषाओं के लोगों तक पहुंचने का यह प्रयास ‘इंडिया टुडे’ के सामाजिक सरोकार के साथ-साथ उसकी क्रिएटिविटी को भी दर्शाता है। उम्मीद की जा सकती है कि अपनी भाषा में अपनापन महसूस करने वाले इस अपील की गंभीरता को समझेंगे और कोरोना वायरस से लड़ाई में अपनी जिम्मेदारी भी निभाएंगे।

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