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IBDF ने प्रसार भारती से की अपील, DD फ्रीडिश पर स्लॉट की नीलामी प्रक्रिया हो पारदर्शी
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने प्रसार भारती से अपील की है कि वह अपने फ्री डायरेक्ट-टू-होम सर्विस 'डीडी फ्री डिश' पर स्लॉट की नीलामी के लिए अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमानित प्रणाली अपनाए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF), जो देश के प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स का प्रतिनिधित्व करता है, ने प्रसार भारती से अपील की है कि वह अपने फ्री डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सर्विस 'डीडी फ्री डिश' पर स्लॉट की नीलामी के लिए अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमानित प्रणाली अपनाए।
निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की कमी पर चिंता जताते हुए, IBDF ने 25 जुलाई को नीलामी पद्धति पर हुई परामर्श प्रक्रिया के जवाब में पब्लिक ब्रॉडकास्टर से कहा कि मौजूदा प्रक्रिया अनिश्चितता पैदा करती है, जिससे कारोबारी फैसले जटिल हो जाते हैं।
संस्थान ने सुझाव दिया है कि हर नीलामी से पहले प्रसार भारती को प्रमुख विवरण साझा करने चाहिए, जैसे- कुल कितने स्लॉट उपलब्ध होंगे, हर दौर के बाद कितने बेचने से बचे रह गए और आवेदकों की बकेट-वाइज सूची के साथ पात्र व अपात्र प्रतिभागियों की अंतिम सूची।
IBDF के अनुसार, नीलामी के दौरान मध्यावधि में अस्वीकृतियां समाप्त करना बेहद जरूरी है क्योंकि ऐसे फैसले प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं। इसके बजाय, सभी पात्रता जांच पहले ही पूरी कर ली जानी चाहिए।
डीडी फ्री डिश, जो 2024 तक लगभग 4.9 करोड़ घरों तक पहुंचता है, स्लॉट नीलामियों से हर साल 600 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित करता है।
IBDF ने जोर देकर कहा कि आवश्यक जानकारी तक समान पहुंच सुनिश्चित करना निष्पक्ष माहौल के लिए महत्वपूर्ण है। संस्था का कहना है कि स्पष्ट खुलासे ब्रॉडकास्टर्स को बेहतर जानकारी-आधारित बोली लगाने में सक्षम बनाएंगे और वास्तविक प्रतिस्पर्धी माहौल को बढ़ावा देंगे।
नीलामी सुधारों के साथ-साथ IBDF ने प्लेटफॉर्म के संचालन में संरचनात्मक चिंताओं को भी उजागर किया। इसने प्रसार भारती से अपील की कि वह डीडी फ्री डिश की वास्तविक दर्शक संख्या का स्वतंत्र और वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराए। संस्था ने कहा कि विश्वसनीय डेटा मिलने से ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापनदाताओं को रणनीतिक और निवेश संबंधी फैसलों में अधिक स्पष्टता मिलेगी।
स्लॉट उपलब्धता पर दबाव कम करने के लिए IBDF ने आगे सुझाव दिया कि 25 से अधिक अनुपयोगी MPEG-4 स्लॉट को MPEG-2 में बदला जाए, जिसे सभी सेट-टॉप बॉक्स सपोर्ट करते हैं। इसके अलावा, इसने यह भी सिफारिश की कि नई ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम बनाई जाएं ताकि MPEG-4 तकनीक व्यापक रूप से अपनाए जाने तक क्षमता को बढ़ाया जा सके।
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