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'मीडिया वन' को क्यों नहीं दी गई सुरक्षा मंजूरी, नहीं बताया जा सकता कारण: केंद्र

मलयालम न्यूज चैनल‘मीडिया वन’के लाइसेंस की पुन: बहाली के मामले में बुधवार को गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago

मलयालम न्यूज चैनल‘मीडिया वन’के लाइसेंस की पुन: बहाली के मामले में बुधवार को गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। गृह मंत्रालय ने इस दौरान कोर्ट से कहा है कि न्यूज चैनल को सिक्युरिटी क्लियरेंस देने से मना करने का कारण नहीं बताया जा सका है क्योंकि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दायर हलफनामे कहा गया है कि क्षेत्रिय भाषा के एक न्यूज चैनल का सिक्युरिटी क्लियरेंस मना करने का कारण नहीं बताया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि नेचुरल जस्टिस का सिद्धांत यहां लागू नहीं होता है क्योंकि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा व हित से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि न्यूज चैनल को सिक्युरिटी क्लियरेंस देने से मना करने का कारण इसलिए चैनल को नहीं बताया जा सकता है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जु़ड़ा मसला है और इस मामले में जो भी इंटेलिजेंस इनपुट सिक्युरिटी क्लियरेंस न देने के मामले में है वह चैनल के साथ साझा नहीं किया जा सकता है।

इसके साथ-साथ गृह मंत्रालय की ओर से साक्ष्य अधिनियम की धारा 124 के तहत विशेषाधिकार का दावा किया और कहा कि इस खुलासे के राष्ट्रीय सुरक्षा पर‘दूरगामी और अकल्पनीय परिणाम’हो सकते हैं। वह उन फाइलों को जरूर पेश कर सकते हैं, जिनके आधार पर‘सीलबंद लिफाफे में’प्रतिबंध लगाया गया था।

दरअसल केरल हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले में दखल से इनकार किया था, जिसमें केंद्र ने चैनल के लाइसेंस को रिन्यूअल नहीं किया था। तब केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ चैनल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 15 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम न्यूज चैनल पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए बैन पर रोक लगा दी थी। चैनल पर लगाए गए बैन के खिलाफ न्यूज चैनल ने पहले केरल हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी। केरल हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया था, जिसके बाद सुप्रीम में न्यूज चैनल की ओर से अपील दाखिल की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच के सामने गृह मंत्रालय की ओर से दस्तावेज पेश किए थे। दस्तावेजों को देखने के बाद कोर्ट ने उक्त आदेश पारित किया था। गृह मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से चैनल का रिन्यूअल न कर उसे बैन किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेज देखने के बाद कहा कि पहली नजर में चैनल को रिलीफ का केस बनता है और कहा कि केंद्र सरकार के फैसले से पहले जिस तरह से चैनल चलता था उस तरह से वह ऑपरेट होता रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से काउंटर हलफनामा पेश करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर केंद्र सरकार से 10 मार्च को जवाब दाखिल करने को कहा था, जिसमें मलयालम न्यूज चैनल ने केरल हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। केंद्र ने अब इस मामले में हलफनामा दायर किया है।


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