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CTV की ताकत व चुनौती: ब्रैंड्स की नई रणनीतियों पर खुलकर बोले मार्केटिंग दिग्गज
एक्सचेंज4मीडिया कनेक्टेड टीवी कॉन्फ्रेंस (e4m Connected TV Conference) के एक सत्र में इंडस्ट्री के दिग्गजों ने यह विश्लेषण किया कि कैसे कनेक्टेड टीवी (CTV) एंटरटेनमेंट की दुनिया को नया आकार दे रहा है
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago
एक्सचेंज4मीडिया कनेक्टेड टीवी कॉन्फ्रेंस (e4m Connected TV Conference) के एक सत्र में इंडस्ट्री के दिग्गजों ने यह विश्लेषण किया कि कैसे कनेक्टेड टीवी (CTV) एंटरटेनमेंट की दुनिया को नया आकार दे रहा है और किस तरह यह पारंपरिक टेलीविजन के कंजप्शन पैटर्न को बदलते हुए टारगेटेड विज्ञापन के नए अवसर पैदा कर रहा है।
इस पैनल में शामिल थे– जंबोकिंग की मार्केटिंग हेड सयंतनी दास, hBits के ब्रैंड व मार्केटिंग डायरेक्टर जाहिद गावंडी, Liqvd Asia के फाउंडर अर्नब मित्रा और ज्योति लैब्स लिमिटेड के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट राघवेंद्र कट्टे। इस सत्र का संचालन e4m की असिस्टेंट एडिटर अदिति गुप्ता ने किया।
टेलीविजन से कनेक्टेड टीवी की यात्रा
सत्र की शुरुआत करते हुए राघवेंद्र कट्टे ने बताया कि भारत में कैसे पारंपरिक टीवी से कनेक्टेड प्लेटफॉर्म की ओर बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा, “यदि भारतीय परिप्रेक्ष्य से देखें तो 33 करोड़ घरों में टीवी है, जिनमें से करीब 100 करोड़ लोग पेड टीवी सेवाओं से जुड़े हैं, 40 करोड़ लोग कनेक्टेड टीवी से और 30 करोड़ फ्री डिश से।”
उन्होंने इस बदलाव के साथ जुड़ी चुनौती की ओर इशारा करते हुए कहा, “जब हम टीवी से कनेक्टेड टीवी की ओर जाते हैं, तो मापदंड खो जाते हैं। डिजिटल में हम कहते थे कि टारगेटिंग बेहतर होगी, लेकिन अब हम डिवाइस टारगेटिंग तक ही सीमित हो गए हैं। FMCG ब्रैंड्स के लिए यह एक तरह की यात्रा रही है, जिसने हमारे ‘प्रीमियमाइजेशन’ की चुनौती का हल निकाला।”
विज्ञापन का बदलता चेहरा
Liqvd Asia के अर्नब मित्रा ने बताया कि उन्होंने पिछले दो दशकों में विज्ञापन फॉर्मेट्स में भारी बदलाव देखे हैं। उन्होंने कहा, “विज्ञापन लगातार अपना रूप बदलते रहते हैं- प्रिंट से टीवी, फिर डिजिटल और अब डिजिटल के खंडों में बंटे हुए रूप। सबसे अहम बात है कि अब व्यूएबिलिटी से जुड़ी मेट्रिक्स की जगह एंगेजमेंट ज्यादा अहम हो गया है, और CTV में ये दोनों पहलू साथ-साथ आते हैं।”
टारगेटिंग का नया दौर
hBits के जाहिद गावंडी ने पारंपरिक टीवी की तुलना में CTV की टारगेटिंग क्षमताओं को बेहतर बताया। “पहले विज्ञापनदाता ‘स्प्रे एंड प्रे’ अप्रोच अपनाते थे, लेकिन अब CTV की मदद से हम सही दर्शक तक पहुंच सकते हैं।”
उन्होंने आगे बताया, “यह माध्यम एंटरटेनमेंट और अपॉइंटमेंट टीवी का मेल है। जैसे IPL जैसे बड़े इवेंट्स OTT पर लॉन्च होते हैं और खासतौर पर डिजाइन किए जाते हैं। सबसे बड़ी बात है कि अब हम जानते हैं कि दर्शक कौन हैं, क्या देख रहे हैं, और हमें कहां मौजूद होना चाहिए।”
ब्रैंड रणनीति में CTV का महत्व
जंबोकिंग की सयंतनी दास ने बताया कि खासतौर पर फूड ब्रैंड्स के लिए CTV पारंपरिक मीडिया से अधिक प्राथमिकता रखता है। “हम IPL जैसे लाइव इवेंट्स के दौरान अपने बजट का करीब 60% हिस्सा CTV पर लगाते हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने टाइमिंग की रणनीति पर रोशनी डालते हुए कहा, “IPL के दौरान सेकंड इनिंग ज्यादा अहम होती है क्योंकि उस समय दर्शकों की एंगेजमेंट चरम पर होती है। साथ ही, उस समय हम जिन कैम्पेनों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें क्रिकेट सितारे या बॉलीवुड सेलिब्रिटीज होते हैं, ताकि उनके फैनबेस और रीजनल कनेक्ट का लाभ मिल सके।”
क्या CTV वास्तव में टारगेटेड है?
राघवेंद्र कट्टे ने सवाल उठाया कि क्या यह टारगेटिंग वाकई सटीक है? “पहले टीवी दर्शकों को NCCS के तहत टीवी, फ्रिज जैसी चीजों के स्वामित्व से वर्गीकृत किया जाता था। अब डिवाइस के आधार पर हम यह नहीं कह सकते कि स्क्रीन के सामने कौन बैठा है।”
उन्होंने कहा, “हम ब्रैंड लेवल पर टारगेटिंग कर सकते हैं, जैसे सैमसंग टीवी बनाम अन्य ब्रैंड, लेकिन उस डिवाइस पर क्या दिखेगा, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं है। Netflix या Hotstar जैसे प्लेटफॉर्म्स से डील करनी पड़ती है, और यदि वे कॉमर्शियल शर्तों से पीछे हटें, तो मापन असंभव हो जाता है।”
स्टोरीटेलिंग और डेटा का मेल
गावंडी ने अधिक सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा, “यह नया माध्यम है, जिसे हम एक्सप्लोर कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अब हम डेटा के साथ स्टोरीटेलिंग को जोड़ सकते हैं, जिससे बेहतर टारगेटिंग संभव हो रही है।”
हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि अभी भी कई स्तरों पर एट्रिब्यूशन की समस्याएं बनी हुई हैं। “लेकिन हमें पता है कि हमारा दर्शक कौन है, और किसे टारगेट कर रहे हैं। इसलिए हम पारंपरिक टीवी के मुकाबले कम खर्च कर ज्यादा असर पा रहे हैं।”
क्या CTV से खरीदारी भी होती है?
जब बातचीत कॉमर्स की ओर मुड़ी, तो मित्रा ने स्पष्ट रूप से कहा, “भारत में अब तक CTV इंटरैक्शन से कंज़ंप्शन यानी खरीद तक की यात्रा तय नहीं कर पाया है।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हमने ऐसे ब्रैंड कैंपेन किए हैं जिनमें QR कोड या SMS जैसी साधारण कॉल-टू-एक्शन तकनीक जोड़ी गई है।”
उन्होंने भविष्य के बारे में आशावाद जताते हुए कहा, “CTV में डेटा की बहुत बड़ी संभावनाएं हैं- OEM डिवाइस लेवल पर डेटा देता है और हमारे पास खुद का फर्स्ट पार्टी डेटा भी है। इसलिए डेटा माइनिंग की बड़ी संभावना है।”
पूरी तरह से ट्रैक करने की जरूरत
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि जब कोई ऐड लाइव हो, तब से लेकर ग्राहक की खरीद तक पूरा फनल ट्रैक हो सके। हम अभी पूरी तरह वहां नहीं पहुंचे हैं, लेकिन करीब जरूर आ रहे हैं।”
ROI की चुनौती
सयंतनी दास ने बताया कि CTV में ROI मापना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। “अभी हमें सभी प्लेटफॉर्म्स से एक जैसे रिपोर्ट्स नहीं मिलते। किसी प्लेटफॉर्म से QR कोड कन्वर्ज़न, वीडियो कंप्लीशन रेट जैसी जानकारी मिलती है, जबकि किसी से केवल इम्प्रेशन।”
उन्होंने कहा, “IPL जैसे इवेंट्स पर अगर हम मल्टीपल प्लेटफॉर्म्स पर कैंपेन चला रहे हैं, तो हर जगह से अलग-अलग मेट्रिक्स आते हैं, जिससे एक समग्र तस्वीर बनाना मुश्किल हो जाता है।”
भविष्य की उम्मीदें
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि “अभी हम थर्ड-पार्टी मापन मानकों पर निर्भर हैं, लेकिन जैसे-जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंटरएक्टिविटी बढ़ेगी, हमें ज्यादा ROI-केंद्रित कैंपेन देखने को मिलेंगे।”
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