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NTO 3.0 की वजह से क्या ब्रॉडकास्टर्स खो रहे हैं पेड टीवी सब्सक्राइबर्स?
ट्राई का नया टैरिफ ऑर्डर (NTO 3.0) शुरू से ही ब्रॉडकास्टर्स और केबल टीवी इंडस्ट्री के बीच विवाद का कारण बना हुआ है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
ट्राई का नया टैरिफ ऑर्डर (NTO 3.0) शुरू से ही ब्रॉडकास्टर्स और केबल टीवी इंडस्ट्री के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। मीडिया कंपनियों को चैनल की कीमतें बढ़ाने की अनुमति दी जा सकती है। वैसे देखा जाए तो कि इस साल फरवरी में इसके लागू होने के बाद से चैनल्स के सब्सक्राइबर्स में कमी दर्ज की जा रही है।
टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग व केबल) सर्विस (आठवें) (एड्रेसेबल सिस्टम) के टैरिफ (तीसरा संशोधन) ऑर्डर या एनटीओ 3.0 को लागू करने के दौरान ब्रॉडकास्टर्स को अपने लीनियर टीवी चैनल्स की कीमतों में 10-15% की बढ़ोतरी की अनुमति दी गई।
एनटीओ 3.0 के प्रभाव पर इंडस्ट्री की मिश्रित प्रतिक्रिया रही है, क्योंकि कुछ का कहना है कि यह सकारात्मक है, वहीं कुछ मानते हैं कि इससे सब्सक्राइबर्स की संख्या कम हो गई है और इसका कोई अच्छा रिस्पॉन्स नहीं है। हालांकि, विभिन्न ब्रॉडकास्टर्स के फाइनेंशियल स्टेटमेंट एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है, जिससे पता चलता है कि सब्सक्राइप्शन रेवेन्यू पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024 (FY24) की पहली और दूसरी तिमाही में बढ़ा है।
TV18 के हाल ही में जारी वित्तीय परिणाम में, कंपनी ने पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में FY24 की दूसरी तिमाही में सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में 12% की बढ़ोतरी दर्ज की। TV18 ने FY24 की दूसरी तिमाही में 506 करोड़ रुपये का सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू दर्ज किया।
इसी तरह, ZEEL ने पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में FY24 की पहली तिमाही में अपने सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में 18% की वृद्धि दर्ज की है।
इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि एनटीओ 3.0 के कारण प्रति चैनल कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे निश्चित रूप से ब्रॉडकास्टर्स के सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में वृद्धि हुई है और चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में उनके और बढ़ने की उम्मीद है।
सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि एनटीओ 2.0 के बाद ब्रॉडकास्टर्स के सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में 30-35% की वृद्धि हुई थी। हमें उम्मीद है कि एनटीओ 3.0 के कारण इस वर्ष राजस्व में 7-8% की वृद्धि होगी। यह ब्रॉडकास्टर्स के लिए सकारात्मक है, लेकिन उन कस्टमर्स के लिए चुनौतीपूर्ण है, जो आदेश के कार्यान्वयन के बाद से 30% से अधिक का भुगतान कर रहे हैं।
एलारा कैपिटल के करण तौरानी के मुताबिक, इन सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में बढ़ोतरी के पीछे का कारण एनटीओ 3.0 के कार्यान्वयन के बाद बढ़ी हुई चैनल कीमतें हैं।
ZEEL के FY24 की पहली तिमाही के परिणाम के बारे में बात करते हुए तौरानी ने कहा कि कंपनी का सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू 18% से बढ़कर 771.7 करोड़ रुपये से 907.49 करोड़ रुपये हो गया है, क्योंकि यह NTO 3.0 और ZEE5 के बाद सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में बढ़ोतरी से प्रेरित था।
हालांकि, कुछ इंडस्ट्री सूत्रों ने साझा किया कि एनटीओ 3.0 में केवल सुधार ही उपाय था, जिसका लंबे समय से इंतजार था। न कि मूल्य वृद्धि, जिससे उन ब्रॉडकास्टर्स को कोई लाभ नहीं हो रहा है, जिनके टीवी चैनल की कीमतें नए आदेश के लागू होने से पहले पांच साल के लिए स्थिर थीं।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि चैनल्स की कीमतों में 10-15% की वृद्धि से सब्स्क्राइबर बेस भी इसी संख्या में कम हो गया है, जिससे समस्या सामने आ गई, इसलिए सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू पर सकारात्मक प्रभाव का सवाल ही नहीं उठता है।
ब्रॉडकास्ट कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया को बताया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ और सब्सक्राइब्स बेस के नुकसान के कारण एनटीओ 3.0 का लीनियर टीवी के ब्रॉडकास्टर्स के सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ब्रॉडकास्टर्स पर NTO 3.0 का प्रभाव यह है कि उनकी सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू कम हो गई है, क्योंकि सब्सक्राइबर्स कीमतों के प्रति बहुत संवेदनशील हो गए हैं। कीमतें बढ़ गई हैं और लोग टीवी से ओटीटी पर शिफ्ट हो गए हैं या उन्होंने नाता तोड़ लिया है। कोई पॉजिटिव इम्पैक्ट नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि चैनल्स की कीमतें 10% बढ़ जाती हैं, तो सब्स्क्राइबर बेस भी 10% कम हो जाता है।
उन्होंने कहा कि अब क्या हुआ है कि उच्च ARPU मार्केट में सब्सक्राइबर्स की संख्या कम हो गई है। आईपीएल की तो मुफ्त स्ट्रीमिंग थी और अब आईसीसी वर्ल्ड कप मोबाइल स्ट्रीमिंग पर मुफ्त है। यह एक तरह से सब्सक्राइबर्स को यह कहने जैसा है कि वे अपनी टीवी सर्विस का उपयोग न करें।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले 10 महीनों के भीतर पेड टीवी सब्सक्राइबर्स की संख्या 6-7 मिलियन घटकर 107 मिलियन से 101 मिलियन हो गई है।
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि मार्च 2024 तक यह और घटकर 98 मिलियन हो जाएगी।
अधिकारी ने कहा कि इसलिए, यदि ब्रॉडकास्टर्स ने कीमत में एक निश्चित राशि तक वृद्धि की है, तो उन्होंने भी उतनी ही संख्या में सब्सक्राइबर्स को खो दिया है। यह एकदम सरल गणित है। लिहाजा एनटीओ 3.0 का ब्रॉडकास्टर्स पर कोई पॉजिटिव इम्पैक्ट नहीं पड़ा है।
पिछले साल नवंबर में ट्राई द्वारा संशोधित नया टैरिफ ऑर्डर (NTO 3.0) जारी किया गया था, जिसके बाद ब्रॉडकास्टर्स ने कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी। यह इस साल 1 फरवरी को लागू हुआ।
एनटीओ 3.0 ने एक बुके में टीवी चैनल शामिल करने के लिए 19 रुपये की MRP कैप को बहाल कर दिया और ब्रॉडकास्टर्स को उस बुके में सभी पे चैनल्स के MRP के योग पर अपने पे चैनलों के बुके का मूल्य निर्धारण करते समय अधिकतम 45% की छूट देने की अनुमति दी। संशोधित मूल्य निर्धारण में, प्रसारकों ने कुछ गुलदस्ते की कीमत 10-15% तक बढ़ा दी थी। .
इस आदेश ने इस साल की शुरुआत में केबल इंडस्ट्री और ब्रॉडकास्टर्स को विवादों में ला दिया था। ब्रॉडकास्टर्स ने कीमतों में बढ़ोतरी को 'तर्कहीन' और 'अनुचित' करार दिया था, जबकि ब्रॉडकास्टर्स ने केबल ऑपरेटर्स को फीड देना बंद कर दिया था।
हालांकि, केबल ऑपरेटर्स द्वारा कानूनी मार्ग से अंतरिम राहत पाने में विफल रहने और नए RIOs (रेफरेंस इंटरकनेक्शन ऑफर) पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत होने के बाद गतिरोध खत्म हो गया था, जिसके बाद चैनल बहाल कर दिए गए थे।
हाल ही में ट्राई ने ब्रॉडकास्टिंग व केबल सर्विस के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा पर एक परामर्श पत्र जारी किया था और स्टेकहोल्डर्स से 25 अक्टूबर तक टिप्पणियां मांगी थीं। हालांकि अब टिप्पणियां प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 1 नवंबर , 2023 कर दिया गया है।
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