नेटवर्क18 मीडिया व इन्वेस्टमेंट ने अपनी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस टीम में बड़ा बदलाव करते हुए अराध्य दुबे (Aradhya Dubey) को प्रमोट किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नेटवर्क18 मीडिया व इन्वेस्टमेंट ने अपनी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस टीम में बड़ा बदलाव करते हुए अराध्य दुबे (Aradhya Dubey) को प्रमोट किया है। उन्हें अब कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस में असिसटेंट जनरल मैनेजर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अराध्य दुबे ने अपने प्रमोशन की जानकारी लिंक्डइन पर साझा की है। उन्होंने नई जिम्मेदारी मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए अपने अब तक के सफर में मिले भरोसे, सहयोग और मौकों के लिए आभार जताया है।
उन्होंने अपने साथ काम करने वाले सहयोगियों, मेंटर्स और टीमों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उनके प्रोफेशनल सफर में योगदान दिया है। अराध्य दुबे ने कहा कि वह अपनी नई भूमिका में नई चुनौतियों को स्वीकार करने और आगे भी बेहतर काम करने को लेकर उत्साहित हैं।
अराध्य दुबे ने 2023 में नेटवर्क18 जॉइन किया था। वह कंपनी में कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस में सीनियर मैनेजर के तौर पर शामिल हुए थें। इसके बाद से वह नेटवर्क18 के कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस से जुड़े कामकाज का हिस्सा रहे हैं।
अब प्रमोशन के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। नई भूमिका में वह Network18 के कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस से जुड़े कामों में योगदान जारी रखेंगे और टीम के लिए व्यापक लीडरशिप की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अराध्य दुबे को पब्लिक रिलेशंस और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के क्षेत्र में 13 साल से ज्यादा का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई अलग-अलग सेक्टर्स में काम किया है।
उनके अनुभव में Media, Education, Healthcare और Pharmaceuticals जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन अलग-अलग इंडस्ट्रीज में काम करने के अनुभव के साथ उन्होंने कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस और पब्लिक रिलेशंस के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस में असिसटेंट जनरल मैनेजर के तौर पर दुबे अब नेटवर्क18 के कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस से जुड़े कामों में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाएंगे। उनका प्रमोशन ऐसे समय हुआ है, जब मीडिया कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, ब्रैंड इमेज और स्टेकहोल्डर कम्युनिकेशन की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है।
अराध्य दुबे ने अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर उत्साह जताया है और कहा है कि वह अपने करियर के इस नए पड़ाव में नई चुनौतियों के साथ आगे बढ़ने और संगठन के लिए अपना योगदान जारी रखने को लेकर उत्साहित हैं।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने फेस्टिव सीजन के लिए अपना बड़ा कंटेंट प्लान जारी कर दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने फेस्टिव सीजन के लिए अपना बड़ा कंटेंट प्लान जारी कर दिया है। कंपनी ने फिक्शन, रियलिटी, स्पोर्ट्स, फिल्मों और रीजनल प्रोग्रामिंग समेत अलग-अलग जॉनर और भाषाओं में कई नए और लोकप्रिय कार्यक्रमों का ऐलान किया है।
कंपनी का कहना है कि यह कंटेंट प्लान उसके हाल में बताए गए ‘कंटेंट-फर्स्ट’, ‘प्लेटफॉर्म-एग्नोस्टिक’ और मल्टीलिंगुअल एंटरटेनमेंट बिजनेस की रणनीति को आगे बढ़ाता है। इसमें प्रीमियम इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP), दुनियाभर में सफल रहे फॉर्मेट्स के भारतीय रूप, नए घरेलू कॉन्सेप्ट और ऐसा कंटेंट शामिल है, जिसे टीवी और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म पर दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।
डिजिटल स्तर पर इस पूरे कंटेंट प्लान को Sony LIV के नए ब्रांड पोजिशनिंग ‘It All LIVs Here’ के साथ जोड़ा गया है। कंपनी के मुताबिक, इसका मकसद Sony LIV को SPNI के मनोरंजन और स्पोर्ट्स कंटेंट के डिजिटल होम के तौर पर स्थापित करना है।
KBC Season 18 से फेस्टिव सीजन की शुरुआत
SPNI के फेस्टिव सीजन के कंटेंट प्लान की सबसे बड़ी पेशकश ‘Kaun Banega Crorepati Season 18’ है। इसका प्रीमियर 10 अगस्त को Sony Entertainment Television और Sony LIV पर हुआ। शो के नए सीजन की कैंपेन लाइन ‘Sochna Padega’ रखी गई है। KBC अपने पुराने फॉर्मेट को जारी रखते हुए ज्ञान, सपनों और जिंदगी बदल देने वाली कहानियों को सामने लाएगा।
रोहित शर्मा का एंटरटेनमेंट डेब्यू
SPNI ने अपने हिंदी एंटरटेनमेंट पोर्टफोलियो को भी विस्तार दिया है। क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी रोहित शर्मा नेटवर्क पर अपने खुद के शो के साथ एंटरटेनमेंट की दुनिया में डेब्यू करेंगे।
वहीं, अभिनेता अजय देवगन एक नई ट्रू-क्राइम सीरीज ‘Crime Patrol 2026’ को होस्ट करेंगे। इसमें असल जिंदगी के असाधारण अपराधों और मामलों को ‘Crime Patrol’ के खास स्टोरीटेलिंग अंदाज में दर्शकों के सामने रखा जाएगा।
कॉमेडी और तेज-तर्रार मनोरंजन के लिए ‘Indian Game Show’ भी पेश किया जा रहा है। इसे भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया होस्ट करेंगे। शो में सेलिब्रिटीज अलग-अलग मजेदार चुनौतियों में हिस्सा लेते नजर आएंगे।
‘Scam 2010’ भी प्लान का हिस्सा
SPNI के नए कंटेंट में ‘Scam 2010’ भी शामिल है। यह Sony LIV, Birla Studios और Applause Entertainment की सीरीज है, जिसका निर्देशन नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्ममेकर हंसल मेहता ने किया है। यह सीरीज एक बड़े वित्तीय साम्राज्य के उभरने और फिर उसके पतन की कहानी को सामने लाएगी।
मराठी और तमिल कंटेंट पर भी बड़ा फोकस
SPNI ने अपने मल्टीलिंगुअल विस्तार को भी इस कंटेंट प्लान में खास जगह दी है। पद्मश्री से सम्मानित अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ‘Kon Honar Crorepati’ को होस्ट करेंगी। यह लोकप्रिय KBC फॉर्मेट का मराठी संस्करण है। कंपनी के मुताबिक, माधुरी दीक्षित की मौजूदगी इस शो को एक नई पहचान और अलग ऊर्जा देगी।
तमिल दर्शकों के लिए Sony LIV पर ‘MasterChef Tamil’ पेश किया जाएगा, जिसमें अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु नजर आएंगी। इसके अलावा ‘Tamil Idol’ भी लॉन्च किया जाएगा। यह दुनिया भर में लोकप्रिय सिंगिंग कॉम्पिटिशन फॉर्मेट का पहला तमिल रूपांतरण होगा। संगीतकार ए. आर. रहमान तमिलनाडु की अगली बेहतरीन गायन प्रतिभा की तलाश में अहम भूमिका निभाएंगे।
तीन महीने से ज्यादा चलेगा ‘Festival of Sports’
मनोरंजन के साथ SPNI ने स्पोर्ट्स के लिए भी बड़ा कैलेंडर तैयार किया है। सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क का ‘Festival of Sports’ 15 अगस्त से 1 दिसंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान दर्शकों को भारत के श्रीलंका दौरे, महिला T20 एशिया कप, एशियन गेम्स और भारत के न्यूजीलैंड के ऑल-फॉर्मेट दौरे जैसे बड़े खेल आयोजनों का लाइव एक्शन देखने को मिलेगा।
कंपनी के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिए दर्शकों को तीन महीने से ज्यादा समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और मल्टी-स्पोर्ट्स एक्शन देखने को मिलेगा।
‘जहां और जैसे दर्शक देखना चाहें, वहां कंटेंट पहुंचाना लक्ष्य’
SPNI के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO गौरव बनर्जी ने कहा कि भारत का एंटरटेनमेंट बाजार तेजी से बदल रहा है। आज दर्शक भाषाओं, जॉनर और स्क्रीन के बीच आसानी से स्विच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस ऐसे मजबूत IP और कहानियां तैयार करने पर है, जो दर्शकों से जुड़ सकें, फिर चाहे वे इन्हें किसी भी भाषा, जॉनर या स्क्रीन पर देखना पसंद करें।
बनर्जी के मुताबिक, कंपनी का नया फेस्टिव सीजन कंटेंट प्लान इसी रणनीति को दिखाता है। इसमें पुराने और मजबूत फ्रेंचाइजी के साथ नए फॉर्मेट, बड़े सितारे, बढ़ता रीजनल कंटेंट और लाइव स्पोर्ट्स का बड़ा कैलेंडर शामिल है।
उन्होंने कहा कि KBC और नए हिंदी एंटरटेनमेंट प्रोग्राम से लेकर मराठी और तमिल कंटेंट तक, SPNI अपने कंटेंट पोर्टफोलियो को ज्यादा व्यापक और विविध बना रहा है। टीवी नेटवर्क और Sony LIV मिलकर इस कंटेंट को देशभर के दर्शकों तक पहुंचाने का काम करेंगे।
टीवी और डिजिटल को साथ लेकर चलने की रणनीति
कंपनी के मुताबिक, पूरा कंटेंट प्लान SPNI की ‘कंटेंट-फर्स्ट’ रणनीति और मल्टीलिंगुअल पोर्टफोलियो के बढ़ते दायरे को दिखाता है।
SPNI का लक्ष्य ऐसे मजबूत IP को अलग-अलग स्क्रीन के दर्शकों तक पहुंचाना है, जो उन्हें लंबे समय तक जोड़े रख सकें। इसके लिए टेलीविजन नेटवर्क और Sony LIV को एक-दूसरे के पूरक प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
गौरव बनर्जी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (BARC India) के चेयरमैन भी हैं। हालांकि, उन्होंने BARC के चेयरमैन के तौर पर रेटिंग्स के ट्रेंड पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
टेलीविजन ऐडवर्टाइजिंग मार्केट में इस समय अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में मजबूत और लंबे समय से दर्शकों के बीच पहचान बना चुके कंटेंट शो सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) के लिए बड़ा सहारा बन रहे हैं। ऐडवर्टाइजर भी ऐसे समय में उन कार्यक्रमों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, जिनकी ऑडियंस पहले से मजबूत है। इसकी एक बड़ी वजह दर्शकों की खपत और BARC रेटिंग्स को लेकर बनी चिंता भी है।
SPNI के मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ गौरव बनर्जी ने कहा कि Sony के लिए उसके पुराने और स्थापित कंटेंट ब्रैंड काफी मददगार साबित हो रहे हैं। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया के पास ऐसे कई लोकप्रिय कार्यक्रम हैं, जिनकी दर्शकों के बीच पहले से मजबूत पहचान है।
गौरव बनर्जी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (BARC India) के चेयरमैन भी हैं। हालांकि, उन्होंने BARC के चेयरमैन के तौर पर रेटिंग्स के ट्रेंड पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसके बजाय मौजूदा माहौल में ऐडवर्टाइजर्स और ब्रॉडकास्टर्स के रवैये पर बात की।
एक मीडिया बातचीत के दौरान बनर्जी ने कहा कि मार्केट में Sony के लिए उसके जाने-पहचाने कंटेंट IP काफी मदद कर रहे हैं। उनके मुताबिक, दर्शकों और ऐडवर्टाइजर्स के बीच पहले से पहचान रखने वाले कार्यक्रम मौजूदा अनिश्चित माहौल में नेटवर्क को फायदा देते हैं।
रीजनल विस्तार में भी पुराने IP का फायदा
बनर्जी ने यह भी कहा कि स्थापित कंटेंट IP का फायदा सिर्फ हिंदी मार्केट तक सीमित नहीं है। Sony के रीजनल विस्तार में भी इन लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की अहम भूमिका हो सकती है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स फेस्टिव सीजन की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान कंटेंट का कैलेंडर काफी व्यस्त रहता है। वहीं, BARC डेटा के उपलब्ध नहीं होने की अवधि और कुछ पारंपरिक ऐडवर्टाइजिंग कैटेगरी में ऐडवर्टाइजर्स की सावधानी ने ब्रॉडकास्टर्स के सामने चुनौती बढ़ा दी है।
ऐसे माहौल में ब्रॉडकास्टर्स ज्यादा दर्शक जुड़ाव वाले कार्यक्रमों के जरिए अपनी ऑडियंस हिस्सेदारी और कमाई को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
KBC और Crime Patrol पर Sony का भरोसा
Sony की रणनीति में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) और ‘Crime Patrol’ जैसे पुराने और मजबूत कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मौजूदा सीजन में KBC को Sony के सबसे बड़े और प्रमुख कार्यक्रम के तौर पर पेश किया जा रहा है। वहीं, ‘Crime Patrol’ भी वापसी कर रहा है। इस बार अभिनेता अजय देवगन इसके ‘Grand Ambassador’ के तौर पर जुड़े हैं।
बनर्जी पहले भी कह चुके हैं कि Sony के लिए दर्शकों का ध्यान यानी ‘Attention’ सबसे महत्वपूर्ण मेट्रिक है। उनका मानना है कि अगर दर्शकों का ध्यान किसी कंटेंट पर बना रहता है, तो इससे टीवी पर एंगेजमेंट के साथ-साथ स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर दर्शकों को बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने कहा था कि अगर सिर्फ एक मेट्रिक पर ध्यान देना हो, तो Sony ‘Attention’ को ही सबसे ज्यादा महत्व देगा।
सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर फिक्शन को मजबूत करने की तैयारी
स्थापित IP पर जोर देने की रणनीति ऐसे समय में सामने आई है, जब सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (SET) अपने फिक्शन कारोबार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
बनर्जी ने माना कि पिछले कुछ वर्षों में SET का फिक्शन कंटेंट उम्मीद के मुताबिक मजबूत प्रदर्शन नहीं कर पाया है। अब कंपनी चैनल के लिए फिक्शन शो की एक नई लाइन-अप तैयार कर रही है। आने वाले करीब छह महीनों में इन नए शो को लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
हालांकि, Sony अपने पुराने मजबूत क्षेत्रों को छोड़ने के मूड में नहीं है। कंपनी नॉन-फिक्शन, रियलिटी और क्राइम प्रोग्रामिंग पर भी अपना फोकस बनाए रखेगी।
बनर्जी के मुताबिक, SET की पहचान बड़े स्टार्स के साथ बनाए गए शानदार नॉन-फिक्शन और रियलिटी शो के अलावा क्राइम फ्रेंचाइजी से भी जुड़ी हुई है। फिक्शन को अब इस रणनीति के एक और महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर मजबूत किया जा रहा है।
फेस्टिव सीजन में कंटेंट की भीड़ के बीच अलग दिखने की चुनौती
ब्रॉडकास्टर्स के लिए फेस्टिव सीजन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह टीवी दर्शकों और ऐडवर्टाइजिंग के लिहाज से साल के सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी दौर में से एक माना जाता है। इस दौरान कई चैनल नए शो और बड़े कार्यक्रम लेकर आते हैं।
ऐसे में Sony के सामने चुनौती यह है कि वह इस भीड़ में अपने कंटेंट को अलग कैसे दिखाए। बनर्जी के मुताबिक, इसका रास्ता ऐसा कंटेंट पेश करने में है, जो अलग भी हो और दर्शकों के लिए प्रासंगिक भी।
KBC इसका एक उदाहरण है। बनर्जी के मुताबिक, KBC के नए सीजन को इस तरह तैयार किया गया है कि यह लंबे समय से चले आ रहे इस फॉर्मेट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दौर के हिसाब से पेश करे।
इस बार शो में सिर्फ सामान्य ज्ञान के सवालों के जवाब देने के बजाय तर्क और सोचने की क्षमता पर ज्यादा जोर देने की कोशिश की गई है। यानी Sony अपने पुराने और भरोसेमंद IP को बनाए रखते हुए उसे नए दौर और दर्शकों की बदलती जरूरतों के हिसाब से पेश करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के कंसोलिडेटेड नतीजों के मुताबिक, 30 जून 2026 को खत्म तिमाही में कंपनी को 743 मिलियन डॉलर नहीं, बल्कि 743 मिलियन रुपये यानी करीब 74.3 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 1,437 मिलियन रुपये यानी करीब 143.7 करोड़ रुपये था।
कंपनी की ओर से 10 अगस्त को शेयर मार्केट को दी गई जानकारी के मुताबिक, बोर्ड बैठक में 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी गई। बोर्ड की बैठक 10 अगस्त को हुई थी।
करीब 1,939 करोड़ रुपये रही कुल आय
कंपनी की कंसोलिडेटेड कुल आय पहली तिमाही में 19,385 मिलियन रुपये यानी करीब 1,938.5 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान तिमाही में यह 18,498 मिलियन रुपये यानी करीब 1,849.8 करोड़ रुपये थी। यानी कुल आय में सालाना आधार पर करीब 4.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
इस दौरान कंपनी की विज्ञापन से आय 671.4 करोड़ रुपये रही, जबकि सब्सक्रिप्शन से कंपनी को करीब 1,136.9 करोड़ रुपये की आय हुई। अन्य बिक्री और सेवाओं से करीब 99 करोड़ रुपये और अन्य आय से करीब 31.2 करोड़ रुपये मिले।
कंपनी के कुल खर्च की बात करें तो यह पहली तिमाही में करीब 1,864.4 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में कुल खर्च करीब 1,652.7 करोड़ रुपये था।
टैक्स के बाद 74.3 करोड़ रुपये का मुनाफा
कंपनी का पहली तिमाही में टैक्स से पहले मुनाफा करीब 74.1 करोड़ रुपये रहा। टैक्स के बाद कंपनी का शुद्ध मुनाफा 74.3 करोड़ रुपये रहा। वहीं पिछले साल की समान तिमाही में शुद्ध मुनाफा करीब 143.7 करोड़ रुपये था।
कंपनी के मुताबिक, तिमाही के दौरान शेयरधारकों के हिस्से में आने वाला मुनाफा करीब 76.3 करोड़ रुपये रहा।
JioStar के साथ विवाद में 1.097 अरब डॉलर का दावा
नतीजों के साथ कंपनी ने JioStar के साथ चल रहे ICC ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से जुड़े विवाद की भी जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक, JioStar ने इस मामले में अपने नुकसान के दावे को बढ़ाकर 1.097 अरब अमेरिकी डॉलर कर दिया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें और जवाब दाखिल कर चुके हैं और ट्रिब्यूनल के सामने अंतिम साक्ष्य संबंधी सुनवाई (Evidentiary Hearing) भी पूरी हो चुकी है। अब दोनों पक्षों को सुनवाई के बाद की लिखित दलीलें (Post-Hearing Briefs) दाखिल करनी हैं।
कंपनी का कहना है कि उसे कानूनी सलाह और अपने आकलन के आधार पर भरोसा है कि वह Alliance Agreement के तहत डिफॉल्ट में नहीं है और JioStar के दावे उसके मुताबिक कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं।
SEBI के आदेश के खिलाफ SAT पहुंची कंपनी
जी एंटरटनमेंट ने यह भी बताया है कि SEBI ने 31 जुलाई 2026 को एक आदेश पारित किया था, जिसमें कंपनी पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे दो महीने तक सिक्योरिटीज मार्केट में पहुंच/डीलिंग से रोकने की बात कही गई। कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ Securities Appellate Tribunal (SAT) में अपील दाखिल की है और आदेश पर रोक लगाने की मांग भी की है।
कंपनी ने कहा है कि उसे अपने मामले के मेरिट पर मजबूत भरोसा है। साथ ही, प्रबंधन का आकलन है कि इन मामलों का कंपनी या ग्रुप के वित्तीय नतीजों पर कोई बड़ा प्रतिकूल असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
3,143.5 करोड़ रुपये के वारंट को मंजूरी
कंपनी ने इससे पहले 1 जुलाई 2026 को प्रमोटर ग्रुप की एक इकाई को 24.94 करोड़ तक पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट जारी करने को मंजूरी दी थी। इन वारंट की इश्यू प्राइस 126 रुपये प्रति वारंट रखी गई है और इससे कंपनी को कुल करीब 3,143.5 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। शेयरधारकों ने 31 जुलाई 2026 की Extraordinary General Meeting में इस वारंट इश्यू को मंजूरी दे दी थी।
इसके साथ ही कंपनी ने कर्मचारियों के लिए ESOP के तहत करीब 3.74 करोड़ स्टॉक ऑप्शंस देने की योजना को भी मंजूरी दी है।
वार्षिक आम बैठक 17 सितंबर को
बोर्ड ने कंपनी की 44वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 17 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से आयोजित करने को भी मंजूरी दी है।
इसके अलावा बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर और इंटरनल ऑडिटर की दोबारा नियुक्ति तथा चार स्वतंत्र निदेशकों के दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति को भी मंजूरी दी है, जिनमें दीपू बंसल, उत्तम प्रकाश अग्रवाल, डॉ. वेंकटा रमणा मूर्ति पिनिसेट्टी और शिशिर बाबूभाई देसाई शामिल हैं। इन नियुक्तियों के लिए आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।
कुल मिलाकर, Zee Entertainment की पहली तिमाही में आय में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले मुनाफा कम हुआ है। वहीं कंपनी के सामने JioStar विवाद और SEBI के आदेश जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। दूसरी ओर, प्रमोटर ग्रुप को वारंट जारी करने और ESOP के जरिए कंपनी ने फंड जुटाने और कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।
निशा शर्मा (Nisha Sharma) ने रिपब्लिक वर्ल्ड (Republic World) में Deputy General Manager -TV Ad Sales की जिम्मेदारी संभाली है। वह टेलीविजन विज्ञापन बिक्री का नेतृत्व करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिपब्लिक वर्ल्ड (Republic World) ने निशा शर्मा (Nisha Sharma) को डिप्टी जनरल मैनेजर–टीवी एड सेल्स, रिपब्लिक टीवी (Deputy General Manager – TV Ad Sales, Republic TV) नियुक्त किया है। निशा ने कंपनी में अपनी नई भूमिका जॉइन कर ली है और अब वह रिपब्लिक टीवी के विज्ञापन बिक्री कारोबार को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगी।
निशा शर्मा के पास टेलीविजन विज्ञापन बिक्री (TV Advertising Sales), बिजनेस डेवलपमेंट (Business Development), रणनीतिक क्लाइंट पार्टनरशिप (Strategic Client Partnerships) और रेवेन्यू जनरेशन (Revenue Generation) का व्यापक अनुभव है। नई भूमिका में उनका फोकस विज्ञापन कारोबार को आगे बढ़ाने, क्लाइंट रिलेशनशिप मजबूत करने और नए कारोबारी अवसर विकसित करने पर रहेगा।
रिपब्लिक वर्ल्ड से पहले निशा शर्मा ने एनडीटीवी (NDTV), टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network), जी मीडिया (Zee Media) और रेडियो टुडे (Radio Today) जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। इन भूमिकाओं के दौरान उन्होंने विज्ञापन राजस्व बढ़ाने, क्लाइंट संबंध मजबूत करने और प्रभावी मीडिया सॉल्यूशंस तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रिपब्लिक वर्ल्ड ने निशा शर्मा का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि उनका अनुभव और नेतृत्व क्षमता रिपब्लिक टीवी के टीवी एड सेल्स कारोबार को मजबूत करने और कंपनी की आगे की ग्रोथ में योगदान देगा।
साउथ इंडिया की प्रमुख मीडिया कंपनी Sun TV Network Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले अंतरिम डिविडेंड (First Interim Dividend) को लेकर अहम जानकारी शेयर की है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
साउथ इंडिया की प्रमुख मीडिया कंपनी सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले अंतरिम डिविडेंड (First Interim Dividend) को लेकर अहम जानकारी शेयर की है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया है कि अगर बोर्ड अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी देता है, तो इसके लिए 18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को रिकॉर्ड डेट तय की गई है।
कंपनी ने बताया कि 12 अगस्त 2026 (बुधवार) को होने वाली बोर्ड बैठक में पहले अंतरिम डिविडेंड पर विचार किया जाएगा। यदि इस बैठक में डिविडेंड घोषित किया जाता है, तो जिन निवेशकों के नाम 18 अगस्त तक कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वे इस डिविडेंड के हकदार होंगे।
सन टीवी नेटवर्क ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर अंतरिम डिविडेंड घोषित होता है, तो कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार इसका भुगतान घोषणा की तारीख से 30 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा।
कंपनी ने यह जानकारी सेबी (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत बीएसई और एनएसई को भेजी है। फिलहाल निवेशकों की नजर 12 अगस्त को होने वाली बोर्ड बैठक पर रहेगी, जहां अंतरिम डिविडेंड को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ पत्रकार अब संयुक्त रूप से रिपब्लिक बांग्ला के पूरे एडिटोरियल ऑपरेशन की कमान संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिपब्लिक बांग्ला ने अपने एडिटोरियल विभाग में बड़ा नेतृत्व बदलाव किया है। चैनल ने घोषणा की है कि स्वर्णाली सरकार (Swarnali Sarkar) और सुभ्रांग्शु चटर्जी (Subhrangshu Chatterjee) को तत्काल प्रभाव से एग्जिक्यूटिव एडिटर नियुक्त किया गया है।
कंपनी के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ पत्रकार अब संयुक्त रूप से रिपब्लिक बांग्ला के पूरे एडिटोरियल ऑपरेशन की कमान संभालेंगे। डेस्क, रिपोर्टर्स, एंकर्स, गेस्ट रिलेशंस, डिजिटल टीम और अन्य सभी एडिटोरियल विभाग व उनसे जुड़े प्रोजेक्ट्स अब इन्हीं के नेतृत्व में काम करेंगे।
रिपब्लिक बांग्ला ने कहा कि स्वर्णाली सरकार और सुभ्रांग्शु चटर्जी ने अब तक चैनल की सफलता में अहम योगदान दिया है। नई जिम्मेदारी में दोनों मिलकर एडिटोरियल गुणवत्ता को और मजबूत करेंगे, टीमों के बीच बेहतर तालमेल बनाएंगे और चैनल के अगले विकास चरण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कंपनी ने सभी कर्मचारियों से अपील की है कि वे नए नेतृत्व को पूरा सहयोग दें और साझेदारी की भावना के साथ काम करते हुए रिपब्लिक बांग्ला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दें।
इस घोषणा के साथ रिपब्लिक बांग्ला ने स्वर्णाली सरकार और सुभ्रांग्शु चटर्जी को उनके प्रमोशन पर बधाई देते हुए कहा कि पूरा संगठन एक टीम और एक विजन के साथ आगे बढ़ते हुए दर्शकों पर और अधिक प्रभाव छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के वरिष्ठ पत्रकार और सीनियर एडिटर एवं हेड ऑफ इनपुट, सीनियर एंकर (रिपब्लिक बांग्ला) मयूख रंजन घोष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के वरिष्ठ पत्रकार और सीनियर एडिटर एवं हेड ऑफ इनपुट, सीनियर एंकर (रिपब्लिक बांग्ला) मयूख रंजन घोष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह पिछले करीब छह वर्षों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे।
मयूख रंजन घोष ने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने लिखा कि हर सार्थक सफर एक दिन खत्म होता है, इसलिए नहीं कि कुछ गलत है, बल्कि इसलिए कि जिंदगी एक नई दिशा की ओर बुला रही होती है।
उन्होंने कहा कि साल 2021 के बाद उनका पेशेवर सफर किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा। इस दौरान उन्होंने बंगाली हिंदुओं की आवाज उठाने और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर काम करने की बात कही। उन्होंने लिखा कि इस यात्रा में उन्होंने बहुत कुछ सीखा, खुद को बेहतर बनाया, कई बार गिरे लेकिन फिर संभलकर आगे बढ़े।
मयूख ने कहा कि अब उन्हें महसूस हो रहा है कि कुछ अपना बनाने का समय आ गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस नए सफर में सफलता भी मिल सकती है और असफलता भी, नुकसान और चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है, लेकिन उन्हें अनिश्चितता से डर नहीं लगता।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि जोखिम से ज्यादा उन्हें ठहराव का डर है। उन्होंने फिल्म 'द डार्क नाइट' के जोकर का एक मशहूर संवाद भी साझा किया और कहा कि कई बार विकास वहीं से शुरू होता है, जहां आराम का दायरा खत्म होता है।
मयूख रंजन घोष ने बताया कि वह कुछ समय के लिए ब्रेक लेकर यात्रा करेंगे। इसके बाद नए विचारों और नई ऊर्जा के साथ वापसी करेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह लौटेंगे तो शायद ज्यादा सफल होंगे, शायद चुनौतियों के निशान साथ होंगे, लेकिन पहले से अधिक समझदार होंगे।
करीब 14 वर्षों के अपने पत्रकारिता करियर में मयूख रंजन घोष ने प्राइम टाइम एंकर, न्यूज एडिटर, मैनेजर और कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम किया है। रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क से पहले वह News18 Bangla, Times Network, ABP News और Star News जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से भी जुड़े रहे हैं।
शेमारू एंटरटेनमेंट (Shemaroo Entertainment Ltd) को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से नए हिंदी टीवी चैनल 'Mango TV' के संचालन की मंजूरी मिल गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
शेमारू एंटरटेनमेंट (Shemaroo Entertainment Ltd) को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से नए हिंदी टीवी चैनल 'Mango TV' के संचालन की मंजूरी मिल गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी को इस चैनल के लिए अपलिंकिंग (Uplinking) और डाउनलिंकिंग (Downlinking) दोनों की अनुमति प्रदान की गई है।
रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मंत्रालय की ओर से दी गई मंजूरी के अनुसार, Mango TV एक नॉन-न्यूज (Non-News) व करंट अफेयर्स कैटेगरी से बाहर का हिंदी चैनल होगा। इसका प्रसारण भारतीय उपग्रह GSAT-30 के जरिए किया जाएगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह लाइसेंस शेमारू Entertainment Limited के कॉर्पोरेट आइडेंटिटी नंबर (CIN) L67190MH2005PLC158288 के तहत जारी किया गया है।
मंत्रालय के दस्तावेजों में कंपनी के निदेशकों के रूप में सुनील बंसल, सीए रीता भारत शाह, जय मारू, हिरेन गडा, अतुल एच. मारू, रमन एच. मारू, अब्बास इस्माइल कॉन्ट्रैक्टर, राजेन हेमचंद गडा और कश्मीरा देढिया के नाम दर्ज हैं।
कंटेंट और लॉन्च डेट पर अभी सस्पेंस
MIB की मंजूरी मिलने के बाद अब शेमारू को Mango TV को हिंदी के नॉन-न्यूज चैनल के रूप में लॉन्च और डिस्ट्रीब्यूशन करने का रास्ता साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय के रिकॉर्ड में चैनल की कंटेंट रणनीति, लॉन्च की तारीख या यह किस तरह के मनोरंजन कार्यक्रम पेश करेगा, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
टीवी और डिजिटल दोनों पर फोकस
यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है, जब देश की मीडिया कंपनियां एक ओर अपने पारंपरिक टीवी नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल और OTT प्लेटफॉर्म पर भी लगातार निवेश बढ़ा रही हैं।
शेमारू पहले से ही फिल्मों, भक्ति और क्षेत्रीय मनोरंजन से जुड़े कई टीवी चैनलों का संचालन करती है। इसके अलावा कंपनी डिजिटल स्ट्रीमिंग और कंटेंट सिंडिकेशन कारोबार में भी मजबूत मौजूदगी रखती है।
आजतक के मैनेजिंग एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) सईद अंसारी ने समाचार4मीडिया के संपादक पंकज शर्मा के साथ फायरसाइड चैट में पत्रकारिता, जीवन-दर्शन, फिटनेस, सोशल मीडिया को लेकर बातचीत की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
समाचार4मीडिया की ओर से आयोजित 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में आजतक के मैनेजिंग एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) सईद अंसारी ने समाचार4मीडिया के संपादक पंकज शर्मा के साथ फायरसाइड चैट में पत्रकारिता, जीवन-दर्शन, फिटनेस, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रिश्तों को लेकर खुलकर बातचीत की। बातचीत की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में हुई, लेकिन आगे चलकर कई गंभीर विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
सवाल: आपकी फिटनेस, ऊर्जा और हमेशा मुस्कुराते रहने का राज क्या है?
चर्चा की शुरुआत में पंकज शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कई लोग उनसे यह सवाल पूछ रहे थे कि सईद अंसारी से उनकी फिटनेस, ऊर्जा और हमेशा मुस्कुराते रहने का राज जरूर पूछा जाए। उन्होंने कहा कि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी व्यस्त जिंदगी के बावजूद वे खुद को इतना ऊर्जावान कैसे रखते हैं।
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि उन्हें लोगों से मिलना-जुलना हमेशा अच्छा लगता है। चाहे संस्थान में उनका पद कुछ भी हो, वे आज भी खुद को एक इंटर्न की तरह ही मानते हैं। उनका कहना था कि उन्होंने पहली नौकरी जिस सीखने की भावना के साथ शुरू की थी, वही भावना आज भी कायम है।
सईद अंसारी ने कहा कि आज भी जब वे कैमरे के सामने माइक पकड़ते हैं या किसी मंच से बोलने जाते हैं तो घबराहट महसूस होती है। उन्हें हमेशा डर रहता है कि कहीं कोई गलती न हो जाए, कहीं ऐसा कुछ न कह दें जिससे किसी का मन दुखे या कोई नाराज हो जाए। यही डर और लगातार सीखने की इच्छा उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि वे आज भी खुद को पत्रकारिता का एक विद्यार्थी मानते हैं।
वहीं, अपनी फिटनेस, ऊर्जा और हमेशा मुस्कुराते रहने के राज के सवाल पर सईद अंसारी ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे खूब खाते हैं और भरपेट खाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके खाने में मुख्य रूप से दाल-चावल होता है और वे किसी तरह की डाइटिंग नहीं करते।
उन्होंने कहा कि वे कभी जिम नहीं गए, न ही नियमित वॉक करने या स्टेप्स गिनने जैसी आदतें अपनाईं। उनकी ड्यूटी देर रात तक चलती है। कई बार वे रात 12 बजे, 12:30 बजे या एक बजे ऑफिस से निकलते हैं और करीब डेढ़ बजे घर पहुंचते हैं। इसलिए सुबह जल्दी उठने की बजाय आराम से उठते हैं और सीधे एडिटोरियल मीटिंग की तैयारी में लग जाते हैं।
उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इंसान को खुश रहना चाहिए। वे बेवजह चिंता नहीं करते। उन्होंने हिंदी की कहावत 'चिंता चिता समान' का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन में उनकी चिंता माता-पिता ने की, पढ़ाई के समय शिक्षकों ने की, लेकिन अब वे खुद चिंता करने में विश्वास नहीं रखते।
उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि पढ़ाई में भी वे कभी बहुत अच्छे छात्र नहीं रहे। स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक उनके अंक कभी 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं आए। 40-45 प्रतिशत अंक आ जाते थे तो उन्हें लगता था कि बहुत अच्छा कर लिया। वे हमेशा आखिरी बेंच पर बैठने वाले छात्र रहे और खूब डांट व मार भी खाते थे।
सवाल: जीवन को लेकर आप क्या सोच रखते हैं?
सईद अंसारी ने कहा कि उनका मानना है कि इंसान इस दुनिया में किसी उद्देश्य से आया है। इसलिए यह सोचने की जरूरत नहीं कि सारी उपलब्धियां उसी की वजह से हैं। उन्होंने कहा कि कोई न कोई ऐसी शक्ति जरूर है, जो पूरी दुनिया को चला रही है। इंसान तो सिर्फ इस रंगमंच का एक कलाकार है, जिसे अपना किरदार निभाकर आगे बढ़ जाना है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हो रहा है, वह उसी बड़ी शक्ति की योजना का हिस्सा है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि बेवजह डाइटिंग करने की बजाय अच्छा खाना खाएं। उन्होंने कहा कि आजकल लोग तेल, घी और रोटी तक छोड़ रहे हैं, जबकि शरीर को ताकत की जरूरत होती है। उन्होंने अपने दादा का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वे बचपन में एक रोटी ज्यादा खा लेते थे तो उनके दादा खुश हो जाते थे और कहते थे कि अच्छी खुराक ही अच्छी सेहत की पहचान है।
उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर डॉक्टरों की सलाह भी बदलती रहती है। कभी कहा गया कि घी मत खाइए और अब वही डॉक्टर सीमित मात्रा में घी खाने की सलाह देते हैं। इसलिए उनका मानना है कि संतुलित भोजन करना सबसे बेहतर है।
सवाल: आप सोशल मीडिया से दूरी क्यों बनाए रखते हैं?
पंकज शर्मा ने इसके बाद उनसे पूछा कि लोग अक्सर यह जानना चाहते हैं कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय क्यों नहीं रहते। उन्होंने कहा कि आज लगभग हर पत्रकार के लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन सईद अंसारी ने खुद को सोशल मीडिया से काफी हद तक दूर रखा है। क्या आज के समय में ऐसा करना संभव है और इसकी वजह क्या है?
इस सवाल के जवाब में सईद अंसारी ने कहा कि उनके कई साथी पत्रकारों के 30 से 50 लाख तक फॉलोअर्स हैं। लेकिन अगर रात दो बजे किसी मुश्किल समय में मदद की जरूरत पड़ जाए, तो उन लाखों फॉलोअर्स में से शायद ही कोई साथ खड़ा मिले।
उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी में सिर्फ चार-पांच ऐसे दोस्त हैं जो साल के 365 दिन, 24 घंटे उनके साथ खड़े रहते हैं। वे उनके लिए परिवार जैसे हैं। उनके घर में उनके लिए अलग कमरा तक है। अगर वे कई दिनों तक उनके घर नहीं जाएं तो परिवार वाले खुद फोन कर लेते हैं या उनके लिए खाना भेज देते हैं।
सईद अंसारी ने साफ कहा कि उन्हें वर्चुअल रिश्तों पर भरोसा नहीं है। वे वास्तविक और आत्मीय रिश्तों में विश्वास करते हैं। उनके मुताबिक, जिंदगी में चार-पांच सच्चे दोस्त होना लाखों सोशल मीडिया फॉलोअर्स से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वही लोग मुश्किल समय में आपके साथ खड़े होते हैं, चाहे वे दोस्त हों, पड़ोसी हों या रिश्तेदार।
पंकज शर्मा ने कहा कि सार्वजनिक मंच से इस तरह की बात कहकर सईद अंसारी ने उन लोगों के सवाल का जवाब दे दिया है, जो जानना चाहते थे कि आज के दौर में सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखना क्यों और कैसे संभव है।
सवाल: लगातार बदलती तकनीक के दौर में एक अच्छे पत्रकार की पहचान किन मूल्यों से होती है?
सोशल मीडिया और व्यक्तिगत जीवन पर चर्चा के बाद पंकज शर्मा ने बातचीत को पत्रकारिता के मूल विषय की ओर मोड़ा। उन्होंने सईद अंसारी से पूछा कि उन्होंने पत्रकारिता का लंबा दौर देखा है और इस दौरान तकनीक तथा माध्यम लगातार बदलते रहे हैं। ऐसे में आज एक अच्छे पत्रकार की पहचान किन मूल्यों से तय होती है।
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि वास्तव में सिर्फ माध्यम बदले हैं, पत्रकारिता नहीं बदली है। उनके मुताबिक पत्रकार पहले भी पत्रकार था, आज भी है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के मूल सिद्धांत आज भी वही हैं जो वर्षों पहले थे।
उन्होंने कहा कि एक पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत सच बोलना है। उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी समाज के प्रति जवाबदेह रहना और अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाना है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की कई परिभाषाएं पढ़ाई जाती हैं, लेकिन उनकी अपनी परिभाषा अलग है।
सईद अंसारी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने देश से प्रेम करता है और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है तो वह पत्रकारिता की मूल भावना को समझता है। चाहे वह मुख्यधारा की मीडिया में काम करता हो, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो या किसी दूसरे पेशे में हो, देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना ही पत्रकारिता का आधार है।
उन्होंने कहा कि कैमरे बदल गए, तकनीक बदल गई, AI आ गया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आ गए, लेकिन पत्रकार की जिम्मेदारी नहीं बदली। आज भी उसका पहला कर्तव्य सच बोलना, लोगों का विश्वास बनाए रखना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है।
सवाल: इतने सारे प्लेटफॉर्म आने के बाद मेनस्ट्रीम मीडिया खुद को अलग कैसे बनाए रखे?
इस सवाल पर सईद अंसारी ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया को अलग दिखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उनका कहना था कि मीडिया का उद्देश्य किसी फिल्म की तरह चमक-दमक पैदा करना या खुद को हीरो साबित करना नहीं है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार का काम सिर्फ इतना है कि जहां जो कुछ हो रहा है, उसे सही तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए। हालांकि उन्होंने माना कि आज दर्शकों की अपेक्षाएं पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं। अब लोग सिर्फ खबर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पूरी सच्चाई भी जानना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार आंखों से देखी हुई चीज भी पूरी सच्चाई नहीं होती और कानों से सुनी हुई बात भी अंतिम सच नहीं होती। ऐसे में पत्रकार की जिम्मेदारी सिर्फ घटना बताने तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि उसके पीछे के तथ्य और वास्तविकता को सामने लाना भी उसका दायित्व है।
'न्यूज दिखाइए, व्यूज मत थोपिए'
बातचीत के दौरान सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी गलती तब शुरू होती है, जब न्यूज की जगह व्यूज को प्राथमिकता दी जाने लगती है।
उन्होंने कहा कि जैसे ही पत्रकार अपनी व्यक्तिगत राय या विचार दर्शकों पर थोपने लगता है, उसी क्षण वह एक पक्षकार बन जाता है और जब पत्रकार पक्षकार बन जाता है, तब वह अपने पत्रकारिता धर्म से भटक जाता है।
उनका कहना था कि मीडिया का काम तथ्य रखना है, न कि दर्शकों पर अपनी राय थोपना।
सवाल: सबसे पहले खबर दिखाने की होड़ में सटीकता कैसे बचाई जाए?
पंकज शर्मा ने अगला सवाल पूछा कि आज न्यूजरूम में सबसे पहले खबर देने की होड़ लगी रहती है। सोशल मीडिया पर खबरें पहले ही आ जाती हैं। ऐसे माहौल में सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। संपादकीय स्तर पर इसे कैसे संभाला जाए?
सईद अंसारी ने कहा कि यह चुनौती खासकर टीवी पत्रकारिता में सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सबसे पहले खबर डालने की होड़ में अक्सर बड़ी गलतियां हो जाती हैं और वहां हर जानकारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जरूरत पड़े तो खबर कुछ मिनट या कुछ घंटे बाद दिखाई जाए, लेकिन गलत खबर कभी नहीं दिखाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोग कुछ समय बाद यह भूल जाते हैं कि कौन-सा चैनल खबर सबसे पहले लेकर आया था, लेकिन अगर किसी चैनल या पत्रकार ने एक बार भी गलत खबर चला दी तो लोग उसे लंबे समय तक याद रखते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार उनके दोस्त उन्हें बताते हैं कि जो खबर टीवी पर दिखाई जा रही है, वह तो दो घंटे पहले ही व्हाट्सऐप पर आ चुकी थी। ऐसे में टीवी का मुकाबला सोशल मीडिया की रफ्तार से नहीं, बल्कि अपनी विश्वसनीयता से होना चाहिए।
सईद अंसारी ने कहा कि रिपोर्टर को खबर भेजने से पहले स्वतंत्र रूप से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। उसके बाद यदि प्रशासन या पुलिस भी उसकी पुष्टि कर दे, तभी उसे खबर माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को उतना इंतजार करना चाहिए, क्योंकि यही उनकी पेशेवर जिम्मेदारी है। अगर बिना पुष्टि के खबर दिखाई जाती है, तो यह पत्रकारिता की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसा है।
सवाल: AI पत्रकारों के लिए अवसर है या चुनौती?
पंकज शर्मा ने इसके बाद AI पर सवाल किया और पूछा कि न्यूजरूम में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में क्या यह पत्रकारों के लिए अवसर साबित होगा या संपादकीय स्तर पर नई चुनौतियां पैदा करेगा?
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि AI बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा भी हो सकता है कि भविष्य में वे खुद स्टूडियो में मौजूद न हों और AI उनकी आवाज और चेहरा इस्तेमाल करके बुलेटिन पढ़ रहा हो, जबकि दर्शकों को इसका पता भी न चले।
उन्होंने कहा कि फिलहाल AI में सबसे बड़ी कमी भावनाओं की है। हालांकि भविष्य में AI भाव-भंगिमाएं भी सीख सकता है, लेकिन इंसानी संवेदनाओं की बराबरी करना उसके लिए आसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जब कोई अपना व्यक्ति बिना कुछ कहे भी आपके चेहरे को देखकर पूछ लेता है कि आज आप परेशान क्यों हैं या खुश क्यों हैं, तो वह संवेदनशीलता मशीन में नहीं आ सकती।
सईद अंसारी ने कहा कि AI पत्रकार का अच्छा सहयोगी और मददगार बन सकता है, लेकिन वह पत्रकार की जगह पूरी तरह नहीं ले सकता। तकनीक इंसान की सहायता कर सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनाएं, अनुभव और भावनात्मक समझ अभी भी पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत हैं।
इसी के साथ बातचीत का अगला दौर शुरू हुआ, जिसमें पंकज शर्मा ने युवा पत्रकारों, नई पीढ़ी, नशे की बढ़ती समस्या और पत्रकारिता के भविष्य को लेकर सईद अंसारी से विस्तार से सवाल पूछे।
सवाल: आज के युवा पत्रकारों की सबसे बड़ी ताकत क्या है और उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है?
AI पर चर्चा के बाद समाचार4मीडिया के संपादक पंकज शर्मा ने सईद अंसारी से पूछा कि वे लंबे समय से न्यूज़रूम में काम कर रहे हैं और लगातार युवाओं के साथ भी काम करते हैं। ऐसे में आज के युवा पत्रकारों की सबसे बड़ी ताकत क्या है और उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत महसूस होती है।
इस सवाल का जवाब देते हुए सईद अंसारी ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन का एक उद्देश्य होता है और उनका अपना उद्देश्य सिर्फ एक है- देश के युवाओं को नशे से दूर रखना।
उन्होंने कहा कि आज नशा बहुत सामान्य बात बनता जा रहा है और यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने फिल्म सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मौजूद कई मीडिया और अन्य संस्थानों के छात्र दिन में खुलेआम सिगरेट पीते हैं और शाम को उसी सिगरेट में चरस और गांजा भरकर उसका सेवन करते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उन्हें बेहद परेशान करती है।
सईद अंसारी ने बताया कि उन्होंने नोएडा में हुक्का संस्कृति के खिलाफ भी लंबे समय तक अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा हुक्का पर प्रतिबंध लगाने के लिए उन्होंने लगातार आवाज उठाई और आज भी उनका सबसे बड़ा प्रयास यही है कि युवाओं को किसी भी तरह के नशे से दूर रखा जाए।
उन्होंने कहा कि पत्रकार तो किसी भी हालत में नशे से दूर रहें, क्योंकि पत्रकार की जिम्मेदारी समाज के प्रति होती है। यदि नई पीढ़ी को सही दिशा नहीं मिली तो भविष्य भी प्रभावित होगा।
'अपने बच्चों पर भरोसा करें, लेकिन आंख बंद करके नहीं'
सईद अंसारी ने कहा कि आजकल आधुनिकता और Gen Z के नाम पर कई ऐसी चीजें सामान्य मानी जाने लगी हैं, जो भविष्य के लिए ठीक नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बच्चों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि आज माता-पिता बच्चों को संस्कार देने में पहले जैसी भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों पर भरोसा जरूर करें, लेकिन आंख मूंदकर नहीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह उनके माता-पिता बचपन में इस बात पर नजर रखते थे कि वे किसके साथ उठते-बैठते हैं, कहां जाते हैं, क्या करते हैं और किन दोस्तों के साथ समय बिताते हैं, उसी तरह आज भी अभिभावकों को अपने बच्चों पर नजर रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज कई माता-पिता अपने बच्चों से यह तक पूछने में संकोच करते हैं कि वे कहां जा रहे हैं या किसके साथ समय बिता रहे हैं। जबकि यही सतर्कता बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से बचा सकती है।
'मोबाइल सबसे बड़ा साथी भी है और सबसे बड़ा दुश्मन भी'
सईद अंसारी ने कहा कि मोबाइल फोन आज जितना उपयोगी है, उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज स्मार्टफोन में यह देखना आसान है कि कोई व्यक्ति कितना समय मोबाइल पर बिता रहा है।
उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे एक बार अपने बच्चों का स्क्रीन टाइम जरूर देखें। उन्हें पता चलेगा कि 12 घंटे के सक्रिय समय में कई बच्चे पांच से सात घंटे सिर्फ मोबाइल पर ही बिताते हैं। इस वजह से पढ़ने की आदत लगातार खत्म होती जा रही है और यही उन्हें सबसे ज्यादा चिंता में डालता है।
उन्होंने कहा कि आज का युवा अगर हिंदी नहीं जानता तो उसे शर्म नहीं आती। उसे सिर्फ यह लगता है कि अगर वह अच्छी अंग्रेजी बोल लेता है तो वही सबसे बड़ी योग्यता है। जबकि वास्तविक ज्ञान सिर्फ भाषा से नहीं आता, बल्कि पढ़ने और समझने की आदत से आता है।
सवाल: अगर आज आपको युवा पत्रकारों की भर्ती करनी हो तो किन बातों को सबसे ज्यादा महत्व देंगे?
इस सवाल के जवाब में सईद अंसारी ने कहा कि वे युवाओं की आलोचना नहीं कर रहे हैं। उन्होंने माना कि आज की पीढ़ी तकनीक के मामले में बेहद तेज और प्रतिभाशाली है। नई तकनीक को समझने और अपनाने की उनकी क्षमता शानदार है।
लेकिन उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन चीजों का ज्ञान एक पत्रकार के लिए जरूरी है, वही जानकारी युवाओं के पास नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज बहुत से युवाओं को अपने देश के बारे में बुनियादी जानकारी तक नहीं होती। वे इतिहास, भूगोल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से दूर होते जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने पढ़ना लगभग छोड़ दिया है।
सईद अंसारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में उन्होंने अपने संस्थान में फाइनल परीक्षा के बाद छात्रों का वाइवा लिया। उन्होंने सभी छात्रों से सिर्फ एक सवाल पूछा—भारत के उपराष्ट्रपति कौन हैं? उन्हें यह देखकर गहरा दुख हुआ कि 50 छात्रों में से केवल एक छात्र सही जवाब दे पाया।
उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने अपने संस्थान के प्रोफेसरों और डीन की बैठक बुलाई और साफ कहा कि यह छात्रों की नहीं, बल्कि शिक्षकों और उनकी भी जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को सही दिशा नहीं दे पाए।
उन्होंने कहा कि आधुनिक और तकनीकी रूप से दक्ष होना अच्छी बात है, लेकिन अगर युवा अपने देश, संविधान, राजनीति और समाज की बुनियादी जानकारी से ही अनजान रहेंगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
युवा पत्रकारों को सईद अंसारी का मैसेज
चर्चा के अंत में इस हिस्से में सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में आने वाले युवाओं को सिर्फ तकनीक सीखना ही काफी नहीं है। उन्हें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, खेल, मनोरंजन और समसामयिक घटनाओं सहित हर विषय की जानकारी रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकार किसी एक विषय का विशेषज्ञ जरूर हो सकता है, लेकिन उसे एक ऑलराउंडर भी होना चाहिए। इंटरव्यू के दौरान उससे किसी भी विषय पर सवाल पूछा जा सकता है, इसलिए व्यापक अध्ययन और पढ़ने की आदत विकसित करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने अभिभावकों से भी कहा कि यदि उनके बच्चे पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं तो समय-समय पर उनका सामान्य ज्ञान जांचते रहें। उनसे विंबलडन विजेता, देश के संवैधानिक पदों, राजनीति, खेल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल पूछें। इससे उनकी तैयारी मजबूत होगी और वे बेहतर पत्रकार बन सकेंगे।
सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता केवल कैमरे के सामने आने या तकनीक चलाने का नाम नहीं है, बल्कि यह निरंतर सीखने, पढ़ने और समाज की गहरी समझ विकसित करने का पेशा है।
दर्शकों के सवालों में भी उठे पत्रकारिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे
फायरसाइड चैट के समापन की ओर बढ़ते हुए दर्शकों की ओर से भी कई सवाल पूछे गए। एक दर्शक ने सईद अंसारी से पूछा कि उन्होंने बातचीत के दौरान कहा था कि पत्रकार को "न्यूज़" पर ध्यान देना चाहिए, "व्यूज़" पर नहीं। ऐसे में क्या वे हाल की कुछ घटनाओं के संदर्भ में इसका कोई उदाहरण देना चाहेंगे?
इस सवाल के जवाब में सईद अंसारी ने कहा कि आज दर्शकों की अपेक्षाएं पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं। अब लोग सिर्फ खबर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पूरी सच्चाई भी जानना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब वे "व्यूज़" की बात करते हैं तो उसका मतलब पत्रकार की व्यक्तिगत राय से होता है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पत्रकार है तो उसे अपनी व्यक्तिगत पहचान, राजनीतिक झुकाव और वैचारिक आग्रहों से ऊपर उठना होगा। पत्रकार के रूप में वह खुद को किसी धर्म, जाति, भाषा, राज्य या राजनीतिक दल के नजरिए से नहीं देख सकता।
सईद अंसारी ने कहा कि उन्होंने बहुत प्रयास करके खुद को हर तरह के वैचारिक पूर्वाग्रह से दूर रखने की कोशिश की है। उनका मानना है कि पत्रकार का सबसे बड़ा धर्म निष्पक्ष रहना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता आज देश के युवा हैं, क्योंकि आने वाले समय में वही देश और समाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।
"कई बातें कहना चाहता हूं, लेकिन मंच और समय की अपनी सीमाएं होती हैं"
उन्होंने कहा कि युवाओं और समाज से जुड़े कई ऐसे विषय हैं, जिन पर वे विस्तार से बोलना चाहते हैं, लेकिन हर मंच और हर अवसर की अपनी सीमाएं होती हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि समाज के लोगों, अभिभावकों और शिक्षकों को इन मुद्दों पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए और अपनी आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में काम करने वाले लोगों की अपनी पेशेवर सीमाएं होती हैं, इसलिए कई बार वे हर विषय पर खुलकर नहीं बोल पाते। ऐसे में समाज के अन्य लोगों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
सवाल: अगर आने वाले 10 साल में ऐसे ही युवा मीडिया की कमान संभालेंगे तो क्या होगा?
इस दौरान अनुराग बत्रा ने भी बातचीत में हिस्सा लेते हुए कहा कि सईद अंसारी ने खुद बताया कि उनके संस्थान में 50 छात्रों में से सिर्फ एक छात्र ही देश के उपराष्ट्रपति का नाम बता सका। ऐसे में यह चिंता स्वाभाविक है कि अगर आने वाले दस वर्षों में यही युवा मीडिया की कमान संभालेंगे तो स्थिति कैसी होगी।
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि यही उनकी सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी सिर्फ रील्स, सोशल मीडिया और मोबाइल तक सीमित रह जाएगी और सामान्य ज्ञान, पढ़ाई तथा सामाजिक समझ से दूर होती जाएगी, तो पत्रकारिता के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि माता-पिता अपने बच्चों पर नजर रखें। भरोसा जरूर करें, लेकिन आंख मूंदकर नहीं। उन्होंने कहा कि पहले माता-पिता को हमेशा पता रहता था कि उनका बच्चा कहां जा रहा है, किसके साथ रह रहा है और क्या कर रहा है। आज यह निगरानी लगभग खत्म हो गई है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज कई किशोर अपने माता-पिता से कहते हैं कि वे दोस्तों के साथ नाइट स्टे के लिए बाहर जाएंगे और माता-पिता बिना ज्यादा पूछताछ किए इसकी अनुमति दे देते हैं। उनका मानना है कि बच्चों को पूरी आजादी देने के साथ-साथ जिम्मेदार निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने एक और उदाहरण साझा करते हुए कहा कि उनके एक मित्र के आठवीं-नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे ने जन्मदिन मनाने के लिए माता-पिता से कहा कि वह दोस्तों के साथ मॉल जाएगा और वहां कोई अभिभावक मौजूद नहीं होगा। सईद अंसारी ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सिर्फ बच्चों को दोष देना ठीक नहीं है, बल्कि अभिभावकों की भी बराबर जिम्मेदारी बनती है।
उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि उस समय माता-पिता अनुशासन के मामले में काफी सख्त होते थे। वे बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखते थे और जरूरत पड़ने पर डांटते या सजा भी देते थे। उनका मानना है कि आज के समय में भी बच्चों के जीवन में माता-पिता की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।
सवाल: युवा पत्रकारों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
इस पर सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में आने वाले युवाओं को सिर्फ तकनीक सीखने तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, खेल, मनोरंजन, राजनीति और देश-दुनिया की हर महत्वपूर्ण घटना की जानकारी रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक पत्रकार को ऑलराउंडर होना चाहिए। जरूरी नहीं कि उसे हर विषय का विशेषज्ञ होना पड़े, लेकिन इतना ज्ञान जरूर होना चाहिए कि किसी भी विषय पर बुनियादी सवालों का जवाब दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि इंटरव्यू में किसी उम्मीदवार से विंबलडन चैंपियन, किसी अंतरराष्ट्रीय नेता, किसी राज्य की विधानसभा सीटों या संसद की बुनियादी व्यवस्था के बारे में पूछा जाए, तो वह पूरी तरह अनजान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज कई युवाओं को यह तक नहीं पता कि लोकसभा और विधानसभा में क्या अंतर है या सांसद और विधायक की भूमिकाएं क्या होती हैं। यह स्थिति पत्रकारिता जैसे पेशे के लिए चिंता का विषय है।
सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता सिर्फ कैमरे के सामने बोलने या सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने का नाम नहीं है। यह लगातार पढ़ने, सीखने, समाज को समझने और तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी निभाने का पेशा है।
समाचार4मीडिया की ओर से आयोजित 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में 'टाइम्स नाउ नवभारत' के मैनेजिंग एडिटर रंजीत कुमार ने पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर खुलकर अपनी राय रखी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
समाचार4मीडिया की ओर से आयोजित 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में 'टाइम्स नाउ नवभारत' के मैनेजिंग एडिटर रंजीत कुमार ने पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है और आज भी मीडिया अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। हालांकि, एक सुनियोजित नैरेटिव के जरिए मेनस्ट्रीम मीडिया को बदनाम करने और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने की कोशिश की जा रही है।
अपने संबोधन की शुरुआत में रंजीत कुमार ने कहा कि उनसे पहले जिन मुद्दों और सवालों पर चर्चा हुई, उनका जवाब देने की वे पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि जब भी पत्रकारिता के इतिहास, वर्तमान और भविष्य की बात होती है तो हमें अपने आज को अपने अतीत के आईने में देखकर समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की पत्रकारिता का इतिहास स्वर्णिम रहा है। आजादी की लड़ाई के समय न तो आधुनिक संचार माध्यम थे और न ही लोगों को खुलकर बोलने या लिखने की आजादी थी। इसके बावजूद पत्रकारों और संपादकों ने हाथ से पर्चे लिखकर लोगों में आजादी की अलख जगाई। कई पत्रकारों और संपादकों ने अपने लेखों की कीमत वर्षों तक जेल में रहकर चुकाई। यही भारतीय पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत और विरासत रही है।
रंजीत कुमार ने कहा कि आज यह माहौल बनाया जा रहा है कि देश की पत्रकारिता, खासकर हिंदी मीडिया, पूरी तरह गिर चुकी है और अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट गई है। लेकिन उनका मानना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि मीडिया को बदनाम करने का एक सुनियोजित प्रयास चल रहा है, जबकि सच्चाई इससे अलग है।
उन्होंने हाल ही में जंतर-मंतर पर पत्रकारों के साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन उनके संस्थान के पत्रकार भी वहां मौजूद थे। उन्होंने बताया कि उनके कई एंकरों और रिपोर्टर्स के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की गई। एक महिला पत्रकार को करीब ढाई घंटे तक अपनी सुरक्षा के लिए एक बैंक में छिपकर रहना पड़ा, जबकि उनके एक एंकर को लगभग दो घंटे तक एक रेस्तरां में शरण लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि वहां भी प्रदर्शनकारी पहुंच गए और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की। अगर वह सड़क पर आ जाते तो उनके साथ क्या होता, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
रंजीत कुमार ने कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह बात कहना चाहते हैं कि उस दिन उनके चैनल की कवरेज को कोई भी व्यक्ति खुद देखकर फैसला कर सकता है कि क्या उसमें ऐसी कोई भाषा, रिपोर्टिंग या प्रस्तुति थी, जिसकी वजह से पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक, ऐसा बिल्कुल नहीं था। इसके बावजूद पत्रकारों के साथ हिंसक व्यवहार हुआ, जो बेहद चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले मीडिया जगत के एक वरिष्ठ संपादक ने अनौपचारिक बातचीत में उनसे कहा था कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो एक दिन पत्रकारों को सड़कों पर दौड़ाकर पीटा जाएगा। उस समय यह बात अतिशयोक्ति लग सकती थी, लेकिन आज जो माहौल बन रहा है, उसे देखकर वह चेतावनी सच होती दिखाई दे रही है।
रंजीत कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया पर लगातार ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें मेनस्ट्रीम मीडिया को खलनायक साबित करने की कोशिश की जाती है। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को अलग-अलग नामों और उपाधियों से पुकारा जाता है। उन पर आरोप लगाया जाता है कि वे सत्ता से सवाल नहीं करते और उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।
उन्होंने कहा कि यदि आज कोई पक्ष विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहा है तो वह मेनस्ट्रीम मीडिया नहीं, बल्कि राजनीति की दूसरी धारा है। उनका कहना था कि अपनी विश्वसनीयता के संकट को छिपाने के लिए मीडिया पर आरोप लगाए जा रहे हैं और यह उम्मीद की जाती है कि मीडिया विपक्ष की तरफ से लड़ाई लड़े और वही सवाल उठाए जो विपक्ष चाहता है।
रंजीत कुमार ने कहा कि कई बार ऐसे मुद्दों और सवालों को भी मीडिया से उठाने की अपेक्षा की जाती है, जो पूरी तरह सही या तथ्यपरक नहीं होते। यदि मीडिया आंख मूंदकर उनका समर्थन नहीं करता, तो उसे 'गोदी मीडिया' या 'दलाल मीडिया' कह दिया जाता है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश के पत्रकारों की जवाबदेही किसी विपक्ष, किसी राजनीतिक दल या किसी सरकार के प्रति नहीं है। पत्रकारों की पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ सच के प्रति है। मीडिया का काम किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि सही सवाल पूछना और सही तथ्यों को सामने लाना है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष द्वारा उठाया गया हर मुद्दा ही अंतिम सच होता है? क्या हर सवाल सही होता है और क्या मेनस्ट्रीम मीडिया का काम बिना जांच-पड़ताल के उन सभी सवालों के साथ खड़ा हो जाना है? उनका कहना था कि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
रंजीत कुमार ने कहा कि अक्सर यह कहा जाता है कि आज मीडिया सत्ता से ज्यादा विपक्ष से सवाल पूछता है। लेकिन उनका मानना है कि मीडिया का काम यह तय करना नहीं है कि सामने सत्ता है या विपक्ष, बल्कि यह देखना है कि सही सवाल कौन-सा है। पत्रकारिता की असली जिम्मेदारी जनता के प्रति है।
उन्होंने कहा कि मीडिया खुद को निष्पक्ष होने का दावा नहीं करता, बल्कि वह जनपक्षधर है। उसकी जवाबदेही किसी राजनीतिक दल, संगठन या विचारधारा के प्रति नहीं, बल्कि देश की जनता और सच के प्रति है। यही पत्रकारिता का मूल धर्म है और इसी सिद्धांत पर मीडिया को आगे भी काम करना चाहिए।
इसके बाद रंजीत कुमार ने कहा कि टीवी पत्रकारिता और उसके कंटेंट को लेकर भी कई तरह की धारणाएं बनाई जा रही हैं। अक्सर कहा जाता है कि आज के पत्रकारों और संपादकों में पहले जैसी सोच या कल्पनाशक्ति नहीं रही और टीवी का कंटेंट पहले जैसा नहीं रहा। लेकिन उनका मानना है कि हर दौर में पत्रकारिता के सामने अलग-अलग तरह की चुनौतियां रही हैं और आज की चुनौतियां पहले से बिल्कुल अलग हैं।
उन्होंने कहा कि आज सूचना के अनगिनत स्रोत मौजूद हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक खबरें बहुत तेजी से पहुंच जाती हैं। कई बार ऐसा होता है कि टीवी स्क्रीन पर कोई खबर ब्रेक होने से पहले ही लोग उसके बारे में सोशल मीडिया या डिजिटल माध्यमों से जान चुके होते हैं। ऐसे में यह स्वीकार करना होगा कि आज टीवी और अखबार लोगों के लिए खबरों का पहला स्रोत नहीं रह गए हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि टीवी मीडिया की भूमिका खत्म हो गई है। उनके अनुसार, आज जब फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं की बाढ़ आई हुई है, तब भी किसी खबर की पुष्टि करने के लिए लोग सबसे पहले टीवी न्यूज चैनलों की ओर ही देखते हैं। चाहे किसी ने फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई खबर देखी हो, लेकिन यह जानने के लिए कि खबर सही है या गलत, वह अंत में टीवी न्यूज चैनल ही खोलता है।
रंजीत कुमार ने कहा कि आज भी मेनस्ट्रीम मीडिया ही खबरों की पुष्टि का सबसे विश्वसनीय माध्यम है। इसकी वजह यह है कि टीवी और मुख्यधारा का मीडिया कई तरह के सेल्फ रेगुलेटरी नियमों और पेशेवर जिम्मेदारियों से बंधा होता है। मीडिया संस्थान किसी भी खबर को बिना जांच-पड़ताल के प्रसारित नहीं कर सकते। हर खबर को कई स्तर पर क्रॉस चेक और वेरिफाई किया जाता है, उसके बाद ही उसे दर्शकों तक पहुंचाया जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सोशल मीडिया पर मौजूद हर व्यक्ति, जिसके हाथ में कैमरा है, उसे पत्रकार मान लिया जाना चाहिए? क्या ऐसे लोग भी वही जवाबदेही निभा सकते हैं, जो मुख्यधारा का मीडिया निभाता है? उनका कहना था कि ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि सोशल मीडिया पर खबर डालने वाले अधिकांश लोगों पर वैसी संस्थागत जिम्मेदारी नहीं होती जैसी पत्रकारिता से जुड़े संस्थानों पर होती है।
रंजीत कुमार ने कहा कि आज मीडिया में एक और बड़ा बदलाव आया है, जिसे समझने की जरूरत है। उन्होंने इसे 'न्यूज कन्फर्मेशन' और 'व्यू वैलिडेशन' का बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि अब लोग सिर्फ खबर जानने के लिए टीवी नहीं देखते, क्योंकि खबर तो उन्हें पहले ही विभिन्न माध्यमों से मिल चुकी होती है। वे टीवी इसलिए देखते हैं ताकि जिस घटना को लेकर उनके मन में जो समझ या राय बनी है, उसकी पुष्टि हो सके। वे यह जानना चाहते हैं कि उनका नजरिया सही है या नहीं।
उन्होंने कहा कि आज टीवी पर प्रसारित होने वाली प्राइम टाइम डिबेट, एक्सप्लेनर शो और विश्लेषण आधारित कार्यक्रम इसी जरूरत को पूरा करते हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों को किसी मुद्दे को बेहतर ढंग से समझने और अपनी राय को परखने का अवसर मिलता है। उनके मुताबिक, इसमें कोई बुराई नहीं है। यदि मुख्यधारा का मीडिया समय के साथ इस बदलाव को नहीं अपनाएगा, तो वह धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए मीडिया को समय के अनुसार बदलाव करना ही होगा। लेकिन कई बार जनपक्षधर पत्रकारिता को गलत तरीके से सत्ता पक्ष का समर्थन बताकर पेश किया जाता है। यही वह जगह है, जहां भ्रम और गलत नैरेटिव पैदा होता है।
रंजीत कुमार ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती कंटेंट से ज्यादा परसेप्शन की है। एक सुनियोजित कोशिश के तहत यह धारणा बनाई जा रही है कि मेनस्ट्रीम मीडिया अब निष्पक्ष नहीं रहा। उन्होंने कहा कि इस धारणा को बनाने वालों में सिर्फ सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग ही नहीं हैं, बल्कि मीडिया से जुड़े कुछ पुराने लोग भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब कुछ खास सवालों को दबा दिया जाता था। कई मुद्दों को सांप्रदायिक, बहुसंख्यकवादी या दूसरे नाम देकर खारिज कर दिया जाता था और उन पर चर्चा तक नहीं होने दी जाती थी। लेकिन आज वही सवाल सार्वजनिक रूप से पूछे जा रहे हैं। ऐसे में जिन लोगों ने पहले इन सवालों को दबाया था, उन्हें अब यह बदलाव स्वीकार करने में परेशानी हो रही है।
रंजीत कुमार ने दोहराया कि पत्रकारों की जिम्मेदारी किसी राजनीतिक दल, सरकार या विपक्ष के प्रति नहीं, बल्कि देश की जनता के प्रति है। मीडिया ने हमेशा इसी जिम्मेदारी के साथ अपना काम किया है और आगे भी करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि जिस नैरेटिव के जरिए यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि आज की मीडिया जनता के साथ नहीं बल्कि सरकार के साथ खड़ी है, उसे मजबूती से खारिज करने की जरूरत है। उनका कहना था कि जनपक्षधर पत्रकारिता को जानबूझकर पक्षपात के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। इसलिए मीडिया को इस तरह की धारणाओं का तथ्य और जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए जवाब देना होगा।
अपने संबोधन के अंत में रंजीत कुमार ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना और सच को सामने लाना है। जब तक मीडिया इस मूल भावना के साथ काम करता रहेगा, तब तक उसकी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता बनी रहेगी।
अपने संबोधन के अंत में रंजीत कुमार ने कहा कि आज मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ अच्छी पत्रकारिता करना नहीं है, बल्कि उस गलत धारणा का भी सामना करना है जिसे लगातार फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह नैरेटिव बनाया जा रहा है कि मुख्यधारा की मीडिया अब जनता के साथ नहीं, बल्कि सरकार के साथ खड़ी है। उनके अनुसार, इस धारणा को तथ्यों और जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए चुनौती देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जनपक्षधर पत्रकारिता को जानबूझकर पक्षपात के रूप में पेश किया जा रहा है। जबकि मीडिया का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल, सरकार या विपक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि जनता के हितों और सच के साथ खड़ा होना है। इसलिए जरूरी है कि पत्रकार अपने काम के जरिए यह साबित करें कि उनकी प्रतिबद्धता सिर्फ जनता और सत्य के प्रति है।
रंजीत कुमार ने कहा कि समय के साथ मीडिया का स्वरूप और काम करने का तरीका जरूर बदला है, लेकिन पत्रकारिता के मूल मूल्य नहीं बदले हैं। मुख्यधारा की मीडिया आज भी तथ्यों की जांच, खबरों की पुष्टि और जिम्मेदारी के साथ सूचना देने की अपनी भूमिका निभा रही है। इसी कारण फेक न्यूज और अफवाहों के दौर में भी लोग किसी खबर की पुष्टि के लिए विश्वसनीय मीडिया संस्थानों की ओर देखते हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को लेकर जो गलत धारणाएं बनाई जा रही हैं, उन्हें सिर्फ बयान देकर नहीं, बल्कि बेहतर और जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए गलत साबित किया जा सकता है। मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता है और उसे हर हाल में बनाए रखना होगा।
अपने संबोधन का समापन करते हुए रंजीत कुमार ने दोहराया कि पत्रकारों की जवाबदेही किसी सत्ता, विपक्ष या राजनीतिक विचारधारा के प्रति नहीं है। पत्रकारिता का असली धर्म जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना और सच को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि मीडिया को इसी मूल भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए और ऐसे हर नैरेटिव का मजबूती से विरोध करना चाहिए, जो मुख्यधारा की पत्रकारिता की साख और विश्वसनीयता पर बिना आधार के सवाल खड़े करता है।