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क्या बीते दौर के शोज से लौटेगी टीवी की चमक?

आज जब दर्शकों के पास लीनियर टीवी से लेकर ओटीटी और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो तक अनगिनत विकल्प मौजूद हैं, भारतीय टेलीविजन खासकर हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) एक अहम बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago

अदिति गुप्ता, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

आज जब दर्शकों के पास लीनियर टीवी से लेकर ओटीटी और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो तक अनगिनत विकल्प मौजूद हैं, भारतीय टेलीविजन खासकर हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) एक अहम बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। लंबे समय तक पारिवारिक मनोरंजन का अडिग स्तंभ माने जाने वाले ये चैनल अब फिर से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर कौन-सा फिक्शन कंटेंट दर्शकों के दिलों को वाकई छूता है।

बड़े प्रमोशन और भव्य लॉन्च के बावजूद, कई नए शोज रेटिंग्स में टिक नहीं पा रहे। ऐसे में एक ट्रेंड साफ उभर रहा है- सीधी, भावनात्मक और मूलभूत कहानियां आज भी दर्शकों को जोड़ती हैं, जबकि अधूरी या उलझी हुई स्क्रिप्ट्स दर्शकों द्वारा तुरंत नकार दी जाती हैं।

क्या पुरानी कहानियों की वापसी फिर से जादू कर पाएगी?

इन दिनों टीवी इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वो है नॉस्टैल्जिया यानी पुरानी, यादगार कहानियों की वापसी। कई चैनल अब रीकंपोज्ड ड्रामा और पुराने हिट शोज को फिर से लॉन्च कर रहे हैं, बजाय इसके कि वे नई स्क्रिप्ट्स के साथ जोखिम लें।

Sony Entertainment Television ने हाल ही में अपना आइकॉनिक शो ‘CID’ फिर से शुरू किया है, और JioStar तो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ को उसके कई पुराने कलाकारों के साथ दोबारा ला रहा है। यह दिखाता है कि चैनल अब उन फॉर्मूलों की ओर लौट रहे हैं जिनका सफलता का रिकॉर्ड पहले से तय है।

यह चलन सिर्फ बड़े शोज तक सीमित नहीं है। Sony ने हाल ही में ‘राधिका दिल से’ नाम से एक डेली सोप लॉन्च किया जो असल में Dangal TV पर चल रहे ‘मन अति सुंदर’ का रीब्रैंडेड वर्जन है। यह सवाल उठता है कि क्या दर्शक वाकई पुरानी कहानियों के लिए तरस रहे हैं, या चैनल्स बस नए प्रयोगों से बचना चाह रहे हैं?

Balaji Telefilms के ग्रुप CEO संजय द्विवेदी कहते हैं, “हिंदी GEC दर्शकों के लिए नॉस्टैल्जिया अब भी एक मजबूत हुक है, लेकिन यह तब तक कारगर है जब तक हम उसमें कुछ नया, आज के समय के अनुरूप जोड़ते हैं। भावनात्मक जुड़ाव तो काम करता है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट को नॉस्टैल्जिया भी नहीं बचा सकता।”

Dentsu X के डायरेक्टर अनिल सोलंकी का मानना है कि ‘क्योंकि...’ की वापसी से पुराने FMCG ब्रैंड्स के साथ-साथ प्रीमियम विज्ञापनदाता भी आकर्षित हो सकते हैं, अगर इसकी कहानी आज के दर्शकों को जोड़े। “आज के बिखरे मीडिया परिदृश्य में, भावनात्मक जुड़ाव और समकालीन प्रासंगिकता दोनों जरूरी हैं,” वे कहते हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर 29 जुलाई को लॉन्च होने वाला ‘क्योंकि...’ का रीबूट हिट होता है, तो ये एक ट्रेंड सेट कर सकता है- ‘कहानी घर घर की’, ‘कसौटी जिंदगी की’ और ‘कहीं तो होगा’ जैसे आइकॉनिक शोज की भी वापसी हो सकती है।

हालांकि, एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो, “हम शायद रीमेक युग के अंत में हैं। अब आगे वही टिकेगा जिसमें कंटेंट में असल नई कहानी होगी, न कि सिर्फ पुरानी स्क्रिप्ट्स का दोहराव।”

क्यों फ्लॉप हो रहे हैं नए फिक्शन शो?

बड़ी उम्मीदों और भारी बजटों के साथ लॉन्च हुए कई नए फिक्शन शोज कुछ हफ्तों में ही बंद हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण — कंटेंट में स्पष्ट भिन्नता की कमी और पुराने फॉर्मूलों पर अत्यधिक निर्भरता।

द्विवेदी कहते हैं, “कोर GEC दर्शक सरल लेकिन ताजगी से भरे पारिवारिक ड्रामे पसंद करते हैं। अगर नए शोज की शुरुआती कड़ियां दर्शकों को नहीं बांध पातीं, तो 3–4 हफ्तों में रेटिंग्स गिर जाती हैं और रिकवरी मुश्किल होती है।”

सोलंकी विज्ञापनदाताओं की नजर से कहते हैं, “नए शोज में अक्सर स्पष्ट दृष्टिकोण की कमी होती है। आज दर्शक परंपरा के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि पूर्वानुमेयता से ऊब चुके हैं।”

प्राइमटाइम में अब भी भावनात्मक कहानियों का बोलबाला

द्विवेदी के अनुसार, “स्पष्ट भावनात्मक कहानियां आज भी दर्शकों को जोड़ती हैं। हालांकि सिर्फ रसोई राजनीति वाले पुराने फॉर्मेट अब दर्शकों को पसंद नहीं आते।”

उनका कहना है कि केवल अर्बन-निश कंटेंट से काम नहीं चलेगा, हिंदी GEC को छोटे शहरों और ग्रामीण दर्शकों को भी जोड़ना होगा। कॉलेज लाइफ, स्टार्टअप और मॉडर्न रिलेशनशिप पर आधारित शोज मेट्रो से बाहर नहीं चल पाए।

सोलंकी कहते हैं, “टियर-2 और टियर-3 शहरों में आज भी सामाजिक न्याय, पारिवारिक संघर्ष और हल्के-फुल्के जीवन से जुड़े शोज ही काम कर रहे हैं। दर्शक अब घिसे-पिटे क्लिच और अति-नाटकीय स्क्रिप्ट्स को नकार रहे हैं।”

ताजा डेटा क्या कहता है?

हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनलों (GECs) की 25वें हफ्ते की व्युअरशिप रिपोर्ट से यह संकेत मिला है कि पिछले सप्ताहों की तुलना में केवल हल्का-फुल्का बदलाव आया है। ड्रामा-प्रधान शो अब भी दर्शकों की पसंद बने हुए हैं और ‘पे’ (सब्सक्रिप्शन बेस्ड) और ‘फ्री’ (फ्री-टू-एयर) दोनों प्लेटफॉर्म्स पर छाए हुए हैं। ज्यादातर शोज की परफॉर्मेंस में सप्ताह-दर-सप्ताह कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा।

फिक्शन शोज ने पे, फ्री और कम्बाइंड व्युअरशिप में बरकरार रखी पकड़

Star Plus पर ‘Advocate Anjali Awasthi’ की रेटिंग 24वें हफ्ते में 1.31 और 25वें हफ्ते में 1.27 रही, यानी हल्की गिरावट लेकिन अब भी मजबूत स्थिति। ‘Jaadu Teri Nazar’ की रेटिंग 0.96 से बढ़कर 1.02 हो गई, जबकि ‘Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin’ की रेटिंग 0.67 से गिरकर 0.63 हो गई। Colors चैनल पर ‘Shiv Shakti Tap Tyaag Tandav’ की रेटिंग 1.07 से बढ़कर 1.11 हो गई, यानी इसमें सुधार हुआ। वहीं ‘Ram Bhavan’ लगभग स्थिर रहा- 0.53 से 0.54, Zee TV का ‘Kumkum Bhagya’ 1.34 से बढ़कर 1.38 पर पहुंचा, जबकि ‘Jaane Anjaane Hum Mile’ 1.40 से गिरकर 1.31 पर आ गया। Colors का ‘Mannat Har Khushi Paane Ki’ भी स्थिर रहा- 0.98 से 1.00।


Dangal चैनल ने फ्री कैटेगरी में दबदबा बनाए रखा। ‘Mann Sundar’ की रेटिंग 3.04 से बढ़कर 3.43 हो गई। STAR Utsav पर ‘Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin’ की रेटिंग 3.14 से गिरकर 2.99 हो गई। Dangal पर ‘Mann Ati Sundar’ 2.39 से बढ़कर 2.74 हो गया। ‘Pati Brahmachari’ की रेटिंग 1.78 से बढ़कर 2.04 हो गई। जबकि ‘Gehna Zevar Ya Zanjeer’ की रेटिंग 1.05 से गिरकर 0.70 पर आ गई, यानी इसमें साफ गिरावट देखी गई।

Zee TV का ‘Kumkum Bhagya’ 0.93 से 0.95 पर पहुंचा, यानी हल्की बढ़त। Star Plus का ‘Advocate Anjali Awasthi’ 0.91 से गिरकर 0.88 पर आ गया। Dangal का ‘Gehna Zevar Ya Zanjeer’ स्थिर रहा- 0.23 से थोड़ा बढ़कर 0.27। ‘Jaadu Teri Nazar’ 0.67 से बढ़कर 0.71 हो गया। ‘Shiv Shakti Tap Tyaag Tandav’ 0.70 पर स्थिर रहा। ‘Ram Bhavan’ में कोई बदलाव नहीं आया- 0.37 पर कायम। ‘Mannat Har Khushi Paane Ki’ भी 0.68 से थोड़ा बढ़कर 0.70 हो गया।

कुल मिलाकर, 25वें हफ्ते में ज्यादातर शोज की परफॉर्मेंस में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। ड्रामा-प्रधान शोज अब भी दर्शकों की पसंद बने हुए हैं और कुछ कार्यक्रमों की रेटिंग में मामूली सुधार या गिरावट आई है। Dangal जैसे चैनलों ने Free viewership में मजबूत स्थिति बनाए रखी है।

सिर्फ नॉस्टैल्जिया नहीं, कंटेंट में स्पष्टता और कनेक्शन जरूरी

आज का हिंदी GEC दर्शक न केवल परिचित चेहरों या पुरानी कहानियों से जुड़ता है, बल्कि वह कुछ नया, कुछ अलग चाहता है- जो भावनात्मक रूप से जोड़ता हो और प्रासंगिक भी हो। अब चैनलों को जरूरत है पुरानी लीक से हटकर, सटीक और स्पष्ट कहानी कहने की। और यही वो बदलाव है जिससे टेलीविजन को अपनी नई पहचान मिलेगी। 


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