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एंटरटेनमेंट चैनल्स पर भारी पड़ने लगा है ये फैसला, हो रहा है बड़ा नुकसान
रेवेन्यू के साथ ही जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की व्युअरशिप भी घट गई है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्लेटफॉर्म ‘फ्रीडिश’ से चैनल हटाने का फैसला कई ब्रॉडकास्टर्स को फिलहाल भारी पड़ने लगा है। दरअसल, ‘फ्रीडिश’ से अपने चैनल्स हटाने के साथ ही इन बॉडकास्टर्स की 20 मिलियन से ज्यादा व्युअरशिप भी कम हो गई है। ऐसे में कई चैनल्स का एड रेवेन्यू काफी घट गया है।
बता दें कि चार प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स ‘स्टार इंडिया’, ‘ZEEL’,‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ और ‘इंडिया कास्ट मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन’ ने इस साल फरवरी में इस प्लेटफॉर्म से अपने चैनल्स हटाने का निर्णय लिया था। ‘इंडिया कास्ट मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन’ ब्रॉडकास्टर्स 'टीवी18' और 'वायकॉम18' के चैनलों को डिस्ट्रीब्यूट करता है। इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि पहले जो चैनल्स फ्री टू एयर प्रसारित होते थे, वे फ्रीडिश की शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी पहुंच के कारण उसका लाभ लेते हुए व्युअरशिप के आधार पर विज्ञापनदाताओं से दस सेकेंड के विज्ञापन के लिए 4000 और 5500 रुपए तक चार्ज करते थे। लेकिन अब यह विज्ञापन दरें काफी घटकर 3000 रुपए प्रति दस सेकेंड तक हो गई हैं, क्योंकि चैनल्स ‘कॉस्ट पर रेटिंग पॉइंट’ (CPRP) देने में भी असफल हो रहे हैं।
इस बारे में ‘DCMN India’ के डायरेक्टर (ऑफलाइन मीडिया) सुधीर कुमार का कहना है, ‘कई चैनल्स जो फ्रीडिश से पे चैनल्स बन गए हैं, उनका प्रति सप्ताह ‘ग्रॉस रेटिंग पाइंट’ (GRP) कम हो गया है। एक बार ‘ग्रॉस रेटिंग पाइंट’ कम होने पर वे उन रेट पर विज्ञापन नहीं मांग सकते हैं, जिन पर छह महीने पहले मांगते थे। फ्रीडिश से हटने के कारण जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GEC) की व्युअरशिप भी 60 से 80 प्रतिशत तक घट गई है।’
इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि प्राइवेट ब्रॉडकास्टर जो डीडी-फ्रीडिश को हर साल छह से आठ करोड़ रुपए का भुगतान कर रहे थे, वे हर साल 500 से 700 करोड़ रुपए की कमाई कर रहे थे। फ्रीडिश से हटने के बाद ऐसे कई चैनल्स का रेवेन्यू 200 करोड़ रुपए से भी कम हो गया है।
‘ट्राई’ (TRAI) के नए टैरिफ ऑर्डर लागू होने के बाद फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से हिंदी के बड़े एंटरटेनमेंट चैनल्स हटाने पर हुए उन्हें हुए रेवेन्यू के नुकसान की बात करें तो ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (Zee Media Corporation Limited) ने वित्तीय वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में समेकित (consolidated) रेवेन्यू 1693.50 मिलियन रुपए और पूरे 2018-19 के लिए 6869.2 मिलियन रुपए बताया था। वित्तीय वर्ष 2018 में जहां ऑपरेटिंग रेवेन्यू 5734.8 मिलियन रुपए था, वह वित्तीय वर्ष 2019 में 19.8 प्रतिशत बढ़कर 6869.20 मिलियन रुपए रहा।
हालांकि, वित्तीय वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 3.9 प्रतिशत की गिरावट आई और वित्तीय वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में 1762.2 मिलियन रुपए के मुकाबले यह 1693.5 मिलियन रुपए रह गया। इस बारे में ‘जी’ का कहना था कि रेवेन्यू में मुख्य रूप से गिरावट ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर को देखते हुए एडवर्टाइजर्स द्वारा विज्ञापन खर्च में कमी के कारण रही। सिर्फ ‘जी’ ही एक उदाहरण नहीं है, ऐसे कई चैनल्स हैं, जिनके रेवेन्यू में इस प्रक्रिया के दौरान कमी आई है।
इन फ्री टू एयर चैनल्स से अपने विज्ञापन हटाने के बाद माना जा रहा है कि एडवर्टाइजर्स ने निवेश के अन्य रास्ते तलाश लिए हैं। इस बारे में ‘इमामी’ (Emami) के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (मीडिया) बासब सरकार का कहना है कि इमामी जैसे एडवर्टाइजर्स के लिए यह काफी फायदे का सौदा रहा, जिसका फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर था। इसका कारण बताते हुए बासब सरकार ने कहा, देश में चुनाव और अन्य बड़े मुद्दों के कारण हिंदी न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप काफी बढ़ गई थी, जिससे उनके एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में काफी इजाफा हुआ।’
हालांकि, यह स्थिति यूं ही बनी रहेगी अथवा इसमें बदलाव होगा, इस बारे में फिलहाल कुछ भी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन यह स्थिति यूं ही नहीं बनी रहेगी। इस बारे में ‘सब’ (SAB) ग्रुप के सीईओ मानव ढांडा का कहना है, ‘जिन चार बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने फ्रीडिश से अपने चैनल हटाने का फैसला लिया है, उनके पास और भी कई चैनल्स हैं। ऐसे में यदि उन्हें किसी एक चैनल से नुकसान होता है तो वे दूसरे चैनल्स से इस नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। यह नुकसान थोड़े समय के लिए ही है, आने वाले समय में यह ब्रॉडकास्टर्स और डीटीएच प्रोवाइडर्स दोनों के लिए फायदेमंद होगा।’
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